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कर्नाटक में सरकारी बसों की बदहाल हालत पर बवाल, हेडलाइट बंद तो मोबाइल टॉर्च से चला सफर; KKRTC घिरी

 बेंगलुरु कर्नाटक में सरकारी बस सेवाओं की स्थिति को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है. सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में दावा किया गया कि कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KKRTC) की कुछ बसें हेडलाइट खराब होने के कारण रात में मोबाइल की टॉर्च के सहारे चलाई गईं. दावा किया जा रहा है, राज्य सरकार के पास फंड नहीं है, जिसके चलते इन बसों की लाइटों को ठीक नहीं करवाया गया. हालांकि इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर परिवहन व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया है।  वहीं इस पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारास्वामी ने एक्स पर एक पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय ने पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत 4,500 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की थीं. दिसंबर 2025 में ही कन्फर्मेशन मिलने के बावजूद राज्य सरकार (@tdkarnataka) 'लेटर ऑफ़ अवार्ड' (LoA) तक जारी नहीं कर पाई है, जिससे पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।  बसों की खराब स्थिति पर गरमाई राजनीति साथ ही राज्य सरकार पर 'शक्ति' स्कीम के तहत ₹4,573 करोड़ का रीइम्बर्समेंट बकाया है. जिससे मौजूदा बसों की मामूली मरम्मत भी नहीं हो पा रही है. फिर भी अपनी नाकामी के कारण वे 4500 मुफ़्त नई ई-बसों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।  फिलहाल बसों की खराब स्थिति और ई-बस परियोजना में कथित देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. मामले को लेकर अब सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, जबकि परिवहन व्यवस्था को लेकर यात्रियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। 

कर्नाटक में कुकर बम मामले में आतंकी शारिक को 10 साल की सजा, मंदिर में रखने से पहले हुआ था धमाका

 मंगलुरु मंगलूरु के कुकर बम धमाके के मामले में विशेष NIA अदालत ने आतंकी मोहम्मद शारिक को 10 साल की सजा सुनाई है. शारिक ने अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया था, जिसके बाद यह फैसला आया।  यह घटना 19 नवंबर 2022 को कर्नाटक के मंगलूरु के कंकनाडी इलाके में हुई थी. जांच में सामने आया कि शारिक कदरी मंजुनाथ मंदिर में बम रखने जा रहा था. लेकिन रास्ते में ही कुकर बम फट गया, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया।  धमाके में शारिक खुद घायल हो गया था. साथ ही ऑटो चालक पुरुषोत्तम पुजारी भी जख्मी हुए थे. दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।  करीब तीन महीने इलाज के बाद शारिक को एनआईए की हिरासत में लिया गया. पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।  अब अदालत ने उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इस फैसले को बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि समय रहते धमाका होने से एक संभावित बड़ा हमला टल गया। 

कर्नाटक में अश्लील वीडियो पर नपे DGP रैंक के अधिकारी

बेंगलुरु. अश्लील वीडियो मामले में फंसे कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी के रामचंद्र राव के खिलाफ ऐक्शन हुआ है। खबर है कि उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने इन वीडियो को पूरी तरह से फर्जी और मॉर्फ्ड बताया है। उन्होंने इसे छवि खराब करने की साजिश करार दिया और वीडियो की प्रामाणिकता साबित करने के लिए फॉरेंसिक जांच की मांग की है। कथित रूप से महिलाओं के साथ वीडियो में आपत्तिजनक स्थिति में नजर आने के बाद राव को निलंबित कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद राल कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर से मिलने भी पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। क्या था मामला सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे अधिकारी राव हैं। वह सोना तस्करी मामले की आरोपी रान्या राव के पिता बताए जा रहे हैं। वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि कुर्सी पर बैठा एक अधिकारी कई महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में है। सिद्धारमैया भड़के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। न्यूज एजेंसी वार्ता के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को यह जांच करने का निर्देश दिया है कि वीडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किया गया और किसने इसे प्रसारित किया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार वीडियो के स्रोत और विश्वसनीयता की जांच के लिए प्रारंभिक जांच शुरू किए जाने की संभावना है। साइबर अपराध विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि फुटेज में डिजिटल छेड़छाड़ की गई है या नहीं। इस घटना पर राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।