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केसी त्यागी ने छोड़ी जदयू, भविष्य को लेकर बताए बड़े प्लान

नई दिल्ली पिछले कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोल कर चर्चा में रहने वाले केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड से इस्तीफा दे दिया है। केसी त्यागी ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर शेयर कर साफ किया है कि वो जदयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और आगे सदस्यता नहीं लेंगे। JDU को भेजे गए इस्तीफे में केसी त्यागी ने अपने भविष्य का प्लान भी बताया है। केसी त्यागी ने लिखा है कि 22 मार्च को वो अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे। केसी त्यागी ने लिखा, '30 अक्तूबर, 2003 को जदयू अस्तित्व में आया और समता पार्टी तथा जनता दल का विलय हुआ। उस वक्त जॉर्ज फर्नांडिस ने अध्यक्ष और मैंने महासचिव के तौर पर एक साथ काम किय। मैंने शरद यादव और नीतीश कुमार की अध्यक्षता में भी काम किया। मैं पार्टी का मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार भी रह। अब पार्टी का सदस्यता अभियान खत्म हो गया है और मैंने दोबारा पार्टी की सदस्यता नहीं ली है। नीतीश कुमार के प्रति मेरा सम्मान कभी नहीं बदलेगा।' केसी त्यागी ने बताया है भविष्य का प्लान केसी त्यागी ने आगे लिखा, 'मेरे कुछ राजनीतिक साथी, समर्थक और वर्करों ने 22 मार्च को एक बैठक आयोजित की है। इस बैठक में देश के राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी। मैं जल्द ही आगे की रणनीति पर फैसला लूंगा। बता दें कि केसी त्यागी मूल रूप से उत्तर प्रदेश से आते हैं। पश्चिमी यूपी में उनके काफी समर्थक भी हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का रूख भी कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी की इच्छा अब यूपी की राजनीति करने की है। केसी त्यागी की गिनती जदयू के पुराने और दिग्गज नेताओं के तौर पर होती थी। केसी त्यागी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी भी माने जाते थे। वो जदयू के पक्ष में हर मंच पर मजबूती से अपनी बात भी रखते थे। इसी साल केसी त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी उठाई थी और पीएम मोदी को खत लिखा था। हालांकि, लंबे समय से जदयू ने केसी त्यागी से दूरी बना रखी थी। इस मुद्दे पर भी जदयू ने खुद को उनसे अलग कर लिया था। केसी त्यागी ने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को हटाने के फैसला का विरोध किया था। इसके अलावा फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी वो भारत सरकार के स्टैंड से अलग खड़े नजर आए थे। पिछले काफी समय से पार्टी केसी त्यागी को तवज्जो नहीं दे रही थी जिससे इस बात का इशारा मिल रहा था कि अब वो पार्टी में नहीं है। हालांकि, अब केसी त्यागी ने खुद जदयू से इस्तीफे का ऐलान किया है।  

केसी त्यागी की JDU से छुट्टी, पार्टी ने कहा- ‘अब उनका हमारे साथ कोई संबंध नहीं’

पटना  जेडीयू के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी का पार्टी में अध्याय अब समाप्त हो चुका है. हाल के दिनों में के.सी. त्यागी के कुछ बयानों और गतिविधियों को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं. सूत्रों के अनुसार, त्यागी ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया था, जिसके बाद जेडीयू नेतृत्व ने उन्हें दूरी बनाने का फैसला किया. पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन के हालिया बयान से यह साफ हो गया है कि जेडीयू का अब के.सी. त्यागी से कोई औपचारिक संबंध नहीं रह गया है.  के.सी. त्यागी ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग उठाई थी. उन्होंने बाकायदा पीएम मोदी को लेटर लिखकर इसकी मांग की थी. अपने पत्र में त्यागी ने लिखा था कि जैसे पिछले साल चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न की उपाधि से नवाजा गया था, उसी तरह नीतीश कुमार भी इसके पूरी तरह हकदार हैं. लेकिन जेडीयू ने उनकी इस मांग से किनारा कर लिया. जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'के.सी त्यागी की इस मांग का पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से कोई लेना नहीं होता है. दरअसल, वह जेडीयू के साथ हैं या नहीं, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को ये भी पता नहीं है. इसलिए उनके बयानों को और उनकी विज्ञप्ति को उनकी निजी क्षमता में दिए गए बयान के तौर पर लेना चाहिए.' सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है. हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल के.सी. त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है. इसकी वजह पार्टी से उनके लंबे और पुराने संबंध बताए जा रहे हैं. जेडीयू के भीतर यह माना जा रहा है कि त्यागी ने पार्टी के साथ लंबे समय तक अहम भूमिकाएं निभाई हैं, जिसे देखते हुए नेतृत्व किसी तरह का टकराव नहीं चाहता. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, के.सी. त्यागी अब जेडीयू की नीतियों, फैसलों और आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते. मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में दिया था बयान भविष्य में पार्टी की ओर से जारी होने वाले बयानों और राजनीतिक रुख में उनका कोई दखल नहीं होगा. जेडीयू नेतृत्व ने इस मुद्दे पर फिलहाल संतुलित रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि यह अलगाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से हुआ है. जेडीयू के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी नेतृत्व आगे की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. बता दें कि हाल ही में के.सी. त्यागी ने मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में बयान दिया था, जो जेडीयू नेतृत्व को नागवार गुजरा. उन्होंने कहा था, 'खेल में राजनीति नहीं लाना चाहिए. जब बांग्लादेश ने हिंदू क्रिकेटर लिट्टन दास को अपनी टीम का कप्तान नियुक्त किया है, तो भारत को भी मुस्तफिजुर पर पुनर्विचार करना चाहिए और उन्हें आईपीएम में खेलने की अनुमति दी जानी चाहिए.' बांग्लादेश में हिंदुओं पर हालिया अत्याचार और उनकी हत्याओं के बाद मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल में लेने का भारत में जबरदस्त विरोध हुआ. इसके बाद बीसीसीआई के निर्देश पर कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुस्तफिजुर को रिलीज कर दिया. हालांकि, के.सी. त्यागी ने ये माना था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों से भारत में गुस्सा है. लेकिन उनका आईपीएल को लेकर दिया गया बयान जेडीयू को रास नहीं आया. पार्टी सूत्रों का मानना है कि उन्हें आईपीएल पर बयान देने की क्या जरूरत है और वो भी ऐसा बयान जो जनमत की भावना के खिलाफ हो और एनडीए गठबंधन में अलग-अलग राय दिखाए?  जेडीयू नेतृत्व का मानना है कि जब मामला दो देशों के बीच का हो तो सरकार के सहयोगी दल के नाते बोलने से पहले त्यागी को पार्टी में बात करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. के.सी. त्यागी पहले भी बड़े सरकारी पदों पर लेटरल एंट्री के माध्यम से नियुक्ति, समान नागरिक संहिता और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर एनडीए की नीतियों से अलग बयान दे चुके हैं, जिसने जेडीयू के लिए असहज स्थिति में डाल दिया. इन बयानों के कारण ही के.सी. त्यागी से जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी जगह राजीव रंजन को जेडीयू ने अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था. 

पीड़िता को लेकर बयान पर केसी त्यागी की दो टूक, बोले— कुलदीप सेंगर की बेटी को चुप रहना चाहिए

नई दिल्ली उन्नाव रेप केस मामले में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की बेटी द्वारा अपने पिता का बचाव करने पर जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि उन्हें पीड़िता को लेकर दिए बयान से पहले थोड़ा सोचना चाहिए। नई दिल्ली में केसी त्यागी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि कुलदीप सेंगर की बेटी भी एक लड़की है, एक महिला है, लेकिन उन्हें एक महिला के साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में ऐसे बयान देने से बचना चाहिए। यह सिर्फ एक लड़की का मामला नहीं है; यह पूरे पीड़ित समुदाय के दर्द को दर्शाता है। कुलदीप सेंगर की बेटी ने अपने पिता को निर्दोष बताते हुए कहा कि बीते 8 साल में भी उन्हें भी बहुत कुछ झेलना पड़ा है। लोग एक तरफ से सिर्फ पीड़िता का पक्ष मान रहे हैं, जबकि उनका पक्ष कोई नहीं ले रहा है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के पर्यवेक्षक की कार पर हुए हमले को लेकर केसी त्यागी ने कहा कि चुनाव से पहले एसआईआर को लेकर टीएमसी पहले ही हल्ला कर चुकी है। अधिकारियों पर हमले अब अराजकता की सीमा पार कर चुके हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मंदिर-मस्जिद की राजनीति पर कहा कि धर्मनिरपेक्ष राज्य में सभी को अपने धर्म को मानने की इजाजत है। चुनाव के लिए इसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर केसी त्यागी ने कहा कि उनका निधन दुर्भाग्यपूर्ण है। वह लंबे समय तक पड़ोसी देश की प्रधानमंत्री रहीं। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के नए साल के जश्न के खिलाफ फतवा जारी करने पर केसी त्यागी ने कहा कि तमाम मुस्लिम देशों में नया साल मंगलमय तरीके से मनाया जाता है। दुनिया के नॉन-मुस्लिम कंट्रीज में ईद के समारोह होते हैं। नए साल पर ऐसे बयान देकर भारतीय मौलाना अपनी हदें पार कर रहे हैं। वहीं, कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने पर जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि पूरे देश में खुशी है। रेप पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न्याय मिला है। अंतिम फैसला अभी आना बाकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सेंगर को दी गई जमानत पर रोक लगा दी है और उसकी रिहाई रोक दी है। यह न्याय की जीत है और पूरा देश रेप पीड़िता के साथ खड़ा है।