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किसानों के लिए बड़ी खबर, रबी फसलों के समर्थन मूल्य में इजाफा; दलहन-तिलहन को बढ़ावा

बांदा केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने इस बार गेहूं की तुलना में दलहन-तिलहन पर ज्यादा मेहरबानी दिखाई है। गेहूं का एमएसपी 2585 से बढ़ाकर 2610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, यानी सिर्फ 25 रुपये की वृद्धि। जबकि चने में 83 रुपये, मसूर में 390 रुपये, रेपसीड-सरसों में 413 रुपये, जौ में 136 रुपये, कुसुम (तिलहन) में सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़ाया है। हालांकि जिले में कुसुम का उत्पादन किया ही नहीं जाता है। दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर फोकस सरकार की मंशा स्पष्ट है कि देश में गेहूं का बफर स्टाक पहले से ही पर्याप्त है। 2014-15 से 2025-26 के बीच 3715 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हुई है, जो 2004-05 से 2013-14 के 2254 लाख टन से काफी अधिक है। इसलिए अब फोकस दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर है। जिले के किसानों के लिए यह फैसला सीधे जेब से जुड़ा है। लेकिन गेहूं के दाम में कम बढ़ोतरी पर किसान मायूस हैं। जिले में 3.39 लाख किसान हैं, जो करीब 3.77 लाख हेक्टेयर खेती में रबी फसलों की पैदावार करते हैंं। इसमें से 1.94 लाख खेती में किसान गेहूं की उपज पैदा करते हैं। जिले में रबी की मुख्य फसलें गेहूं, चना, मसूर और सरसों हैं। अतिरिक्त लाभ का हिसाब कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष 2026-27 में जिले की मंडियों और सरकारी क्रय केंद्रों पर कुल 6,00,120 क्विंटल गेहूं, 1,52,051 क्विंटल चना, 41,444 क्विंटल मसूर और 23,526 क्विंटल सरसों की खरीद/उत्पादन दर्ज किया गया था। यदि इसी उत्पादन को आधार मानें तो नए बढ़े हुए एमएसपी से किसानों को होने वाले अतिरिक्त फायदे में गेहूं बीते वर्ष 6,00,120 क्विंटल हुआ, इसमें बढ़ोतरी धनराशि यदि 25 रुपये बढ़ा दिया जाए तो करीब 1.50 करोड़ रुपये की होगी। वहीं यदि चने की बात करें तो बीते वर्ष 1,52,051 क्विंटल का उत्पादन हुआ तो बढ़ोतरी 83 रुपये होने पर अतिरिक्त लाभ में करीब 1.26 करोड़ रुपये का सीधे लाभ होगा। मसूर में भी बीते वर्ष 41,444 क्विंटल का उत्पादन हुआ, यदि बढ़ोतरी 390 रुपये होने पर किसानों को होने वाले फायदे की बात करें तो करीब 1.61 करोड़ रुपये का लाभ होगा। सरसों बीते वर्ष 23,526 क्विंटल हुई, बढ़ोतरी 413 रुपये की सरकार ने की तो इस हिसाब से करीब 97 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा। यानी यदि आने वाले रबी सीजन में इतना ही उत्पादन हुआ तो बांदा के किसानों की जेब में पिछले साल के मुकाबले कुल पांच करोड़ 35 लाख दो हजार 631 रुपये अतिरिक्त आएंगे। इसमें सबसे ज्यादा फायदा मसूर और सरसों के किसानों को होगा। गेहूं सबसे ज्यादा पैदा होने के बावजूद सबसे कम लाभ देगा।     पानी की कमी के कारण दलहन-तिलहन की खेती ज्यादा फायदेमंद है। एमएसपी बढ़ने से किसान को चना-मसूर-सरसों में ज्यादा फायदा होगा, किसानों को चाहिए चना, मसूर, सरसों जैसी खेती की ओर लौटें, जिससे भूजल बचेगा और फायदा भी अधिक होगा।     -संजय कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बांदा बढ़ोतरी एक नजर में फसल 2026-27 2027-28 बढ़ोतरी गेहूं 2,585 2,610 25 जौ 2,150 2,286 136 चना 5,875 5,958 83 मसूर 7,000 7,390 390 रेपसीड-सरसों 6,200 6,613 413 कुसुम (तिलहन) 6,540 7,215 675  

पंजाब में PAU किसान मेले की शुरुआत, CM करेंगे उद्घाटन; वैज्ञानिक खेती और बढ़ेगी किसान आय पर जोर

चंडीगढ़  पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में आज से दो दिन का बड़ा किसान मेला शुरू हो रहा है। 18 और 19 सितंबर को लगने वाले इस मेले में पंजाब और आसपास के राज्यों से हजारों किसानों के पहुंचने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री भगवंत मान आज दोपहर 12 बजे मेले का उद्घाटन करेंगे।  इस दौरान सीएम राज्य के आगे बढ़कर खेती करने वाले (प्रोग्रेसिव) किसानों को सम्मानित करेंगे। इसके साथ ही वे किसानों को सरकार की नई योजनाओं और नीतियों की जानकारी भी देंगे। उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री PAU में लगाए गए अलग-अलग स्टॉलों को भी देखने जाएंगे। PAU प्रशासन ने इस बार मेले का मुख्य संदेश ‘वैज्ञानिक खेती अपनाएं, कृषि आय बढ़ाएं’ रखा है। इसका मकसद किसानों को पुरानी और पारंपरिक खेती से निकालकर नई तकनीकों की तरफ ले जाना है, जिससे खेती की लागत कम हो और कमाई बढ़ सके। मेले में यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक सीधे किसानों से बात करेंगे। वे फसलों की नई किस्मों, सही बीजों और खेती के नए तरीकों के बारे में जानकारी देंगे। एग्रीवोल्टिक्स तकनीक से कम जमीन में ज्यादा फायदा रिसर्च डायरेक्टर डॉ. ए.एस. ढट्ट ने बताया कि पंजाब में फसलों की पैदावार बहुत अच्छी है। उन्होंने बताया कि एग्रीवोल्टिक्स तकनीक के तहत एक ही जमीन पर सोलर पैनल (सौर ऊर्जा) लगाकर बिजली भी बनाई जा सकती है और नीचे खेती भी की जा सकती है। इससे जमीन का बेहतर इस्तेमाल होगा। मिट्टी की सेहत और पराली का इस्तेमाल डॉ. एम.एस. भुल्लर ने कहा कि पंजाब की मिट्टी ने सालों से पूरे देश का पेट भरा है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे पहले मिट्टी की जांच करवाएं, खाद और पानी का सही इस्तेमाल करें, पराली को जलाने के बजाय काम में लाएं और केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तरह की खेती करें। किसान और PAU का रिश्ता PAU के रजिस्ट्रार सुखजीत पाल सिंह ने कहा कि यह मेला किसानों के फायदे के लिए ही बनाया गया है। उन्होंने सभी किसानों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को परिवार के साथ मेले में आने का न्योता दिया।  

किसान आंदोलन पर आज आएगा निर्णायक फैसला, सरकार से बातचीत के बाद मोर्चा खत्म करने के संकेत

मोहाली  मोहाली-चंडीगढ़ बार्डर पर पिछली 1 सितंबर से चल रहा किसानों का धरना सोमवार को 7वें दिन में पहुंच गया है। इससे पहले रविवार को पंजाब सरकार के दो मंत्रियों व किसान नेताओं के बीच मीटिंग पंजाब भवन चंडीगढ़ में हुई। सूत्रों के अनुसार मीटिंग पाजिटिव रही और कई मांगों को जो पंजाब सरकार के तहत पूरी हो सकती है उनमें से कई को मान लिया गया। सरकार की ओर से कृषि मंत्री गुरमीत सिंह मुंडिया और सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह मीटिंग में हाजिर हुए जबकि किसानाें की कई जत्थेबंदियों के नेता पहुंचे। सरकार की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि एक महीने के अंदर विधान सभा का विशेष सत्र बुला कर पानी के मसले पर बात की जाएगी।बाकी केंद्र से पूरी होने वाली मांगों को लेकर केंद्र से बातचीत का आश्वासन मंत्रियों ने किसान नेताओं को दिया। सोमवार को किसान जथेबन्दीयों के नेता आपस में मीटिंग करेंगे। उसके बाद स्टेज से सरकार-किसानों के बीच हुई मीटिंग के बारे बताया जाएगा। इस दौरान पंजाब सरकार का कोई नुमाइंदा जो मांगों काे पंजाब सरकार ने माना है उसका लिखित मसौदा लेकर मोर्चे में पहुंच सकता है। कुल मिला कर आज बार्डर पर लगा किसानों का मोर्चा खत्म हो सकता है। राकेश टिकैत पहुंचे मोर्चे में किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को किसान मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को सरकारों को मान लेना चाहिए । उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलना चाहिए। किसानों की मुख्य मांगें किसानों की ओर से अमेरिका के साथ ट्रेड डील न करने, पानी के मुद्दे को लेकर सेक्शन 78,79,80 रद्द करने, किसानों का पूरा कर्ज़ माफ़ करने, फसलों का दाम स्वामीनाथन रिपोर्ट के हिसाब से तय करने, बिजली बिल 2025 और बीज बिल 25 वापस लेने, गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, लैंड पुलिंग स्कीम रद्द करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर मोहाली में पक्का मोर्चा लगाया गया है। किसान नेताओं और प्रशासन से बातचीत के बाद किसानों ने 1 से 7 सितंबर तक मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क की एक तरफ मोहाली बार्डर पर लगाया है। मोर्चे में पंजाब भर से पहुंचे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी करने में जगह न मिलने कारण किसानों ने सड़क की दूसरी तरफ भी ट्रालियां खड़ी कर दी है। फिलहाल सड़क की एक तरफ से चंडीगढ़ से मोहाली आने जाने वालों के लिए रास्ता खुला हुआ है।

PM Kisan की 24वीं किस्त से पहले किसान कर लें ये काम, लैंड सीडिंग नहीं हुई तो नहीं मिलेगा पैसा

नई दिल्ली  देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बार फिर खुशखबरी है. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली 2,000 रुपये की राशि की 24वीं किस्त अगले महीने अक्टूबर में आ सकती है. इस योजना के तहत सालभर में कुल 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2-2 हजार की तीन किस्तों में जारी किए जाते हैं. योजना की 23वीं किस्त जून महीने में जारी की गई थी. इस लिहाज से अक्टूबर में फिर 4 महीने पूरे होने पर 24वीं किस्त जारी होने की पूरी संभावना है. इस बार योजना की समीक्षा को और पुख्ता बनाया जा रहा है, जिसके लिए पात्र किसानों को लैंड सीडिंग करवाना जरूरी होगा, तभी किस्त का पैसा मिलेगा।  योजना से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि अक्टूबर में त्योहारी सीजन भी शुरू हो रहा है. नवरात्र की शुरुआत के साथ ही हिंदू त्योहारों का भी श्रीगणेश हो जाएगा. यही वजह है कि अगले महीने 24वीं किस्त के आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. सरकार ने इस योजना की लगातार समीक्षा भी की है, ताकि पात्र किसानों को इसका फायदा दिलाया जा सके. इसी प्रक्रिया में किसानों की ई-केवाईसी कराने के साथ ही लैंड सीडिंग कराने का भी निर्देश जारी किया गया है।  कुछ किसानों को मिलेंगे 4 हजार रुपये इस बार कुछ किसानों को 2 की जगह 4 हजार मिलने की संभावना है. दरअसल, 23वीं किस्त में कई किसानों को उनकी ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन पूरा नहीं होने की वजह से पैसा नहीं मिला था. ऐसे में जिन किसानों ने अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा कर लिया और जमीनों का सत्यापन भी हो चुका है, उन्हें पिछला बकाया भी मिल जाएगा. इसका मतलब है कि 24वीं किस्त के साथ ही 23वीं किस्त का पैसा भी दिया जाएगा. इस तरह, तमाम किसानों के खाते में इस बार 2 की जगह 4 हजार की राशि आएगी. अगर आपकी भी 23वीं किस्त का पैसा नहीं मिला है तो सभी सत्यापन और ई-केवाईसी पूरी कर लें ताकि पिछले किस्त का पैसा भी मिल सके।  बिना लैंड सीडिंग के नहीं मिलेगा पैसा इस बार बिना लैंड सीडिंग के किसानों को 24वीं किस्त का पैसा नहीं मिलेगा. लैंड सीडिंग का मतलब है कि किसानों की जमीन की जानकारी को पीएम किसान के रिकॉर्ड से जोड़ना और उसका सत्यापन करना. दरअसल, पीएम किसान योजना में उन्हीं लैंड होल्डिंग किसानों को इसका फायदा दिया जाएगा, जिनकी पात्रता राज्य सरकारों के भूमि रिकॉर्ड में दर्ज होती है. लिहाजा अगर आपको भी योजना के तहत 24वीं किस्त का पैसा उठाना है तो इसकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी होगा।  कैसे सुधारें अपनी लैंड सीडिंग     किसी किसान को अगर अपनी जमीन के स्टेटस से जुड़ी कोई समस्या दिखती है तो सबसे पहले राज्य सरकार के भूमि रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना और जमीन की जानकारी देनी चाहिए।      किसान अपने जिले के राजस्व विभाग या सरकार की निर्धारित व्यवस्था के जरिये अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकते हैं।      किसान चाहें तो पीएम किसान की वेबसाइट पर जाकर नो योर स्टेटस के जरिये अपने भुगतान और ई-केवाईसी से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।      इसके लिए pmkisan.gov.in पर जाएं और रजिस्ट्रेशन नंबर व कैप्चा डालकर ओटीपी के जरिये लॉग इन करें।   

रायगढ़ के किसान का कमाल, बंजर जमीन पर ग्राफ्टेड टमाटर-बैंगन उगाकर कमाए 4.25 लाख

बंजर जमीन पर लहलहाई ग्राफ्टेड फसल  रायगढ़ के किसान ने ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती से कमाए 4.25 लाख रायपुर  ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती (जिसमें नीचे जंगली बैंगन यानी रूटस्टॉक और ऊपर टमाटर या हाइब्रिड बैंगन यानी सायन होता है) पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक फायदेमंद और रोग-प्रतिरोधी है। यह पौधा अधिक पानी या लंबे समय तक सूखा और भारी बारिश को आसानी से सहन कर लेता है। ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती 4.25 लाख की आमदनी भी अर्जित की              छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम झारआमा के किसान श्री एतवार साय पैकरा ने आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से खेती में सफलता की नई मिसाल कायम की है। कभी अनुपयोगी और बंजर पड़ी रहने वाली जमीन पर ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती कर उन्होंने न केवल 187 क्विंटल का बंपर उत्पादन हासिल किया, बल्कि कुल 4.25 लाख की आमदनी भी अर्जित की। तकनीक और सही मार्गदर्शन से मिली सफलता           किसान की जमीन गांव से दूर जंगल के समीप स्थित होने और सिंचाई साधनों के अभाव के कारण वहां खेती करना आसान नहीं था। उद्यानिकी विभाग की सलाह पर उन्होंने भूमि का समतलीकरण कराया और सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक एवं मल्चिंग पद्धतियों को अपनाया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड सब्जियों की बुआई की। उत्पादन और आय का गणित          टमाटर फसल 87 क्विंटल उत्पादन कर 1 लाख 75 हजार रूपए की बिक्री की। इसी प्रकार बैंगन फसल 100 क्विंटल उत्पादन कर 2 लाख 50 हजार रूपए की बिक्री की। कुल उत्पादन व बिक्री 187 क्विंटल 4 लाख 2 5 हजार रूपए की बिक्री की। किसान को कुल लागत 1 लाख 45 हजार रूपए लगा जबकि शुद्ध लाभ 2 लाख 80 हजार रूपए का हुआ। अतिरिक्त उत्पादन और आय की उम्मीद        वर्तमान में ग्राफ्टेड बैंगन की फसल से उत्पादन निरंतर जारी है। आने वाले समय में 150 से 200 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है, जिससे 4 से 5 लाख की अतिरिक्त आय होने का अनुमान जताया जा रहा है। एतवार साय पैकरा की इस सफलता को देखकर गांव के अन्य किसान भी आधुनिक और ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

MP सरकार का बड़ा कदम: किसानों के लिए आई खुशखबरी, तुरंत जानिए नया फैसला

भोपाल  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 6 दिन बढ़ाकर अब 30 अप्रैल 2026 कर दी है। पहले यह अवधि 24 अप्रैल तक निर्धारित थी। सरकार के इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी, जो अब तक अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक नहीं करा पाए थे। इसके साथ ही सरकार ने स्लॉट बुकिंग की क्षमता भी बढ़ा दी है। अब किसान एक बार में 1000 क्विंटल की जगह 1500 क्विंटल तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे। इससे बड़े किसानों और अधिक उत्पादन करने वालों को सीधा फायदा मिलेगा। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी का कार्य तेजी से जारी है। अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके बदले किसानों के बैंक खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए की राशि भी ट्रांसफर की जा चुकी है। वहीं, 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक करा लिया है। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां छायादार बैठने की व्यवस्था, पेयजल, बारदाना, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट और गुणवत्ता जांच उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है। उपार्जन के लिए जूट बारदानों के साथ पीपी और एचडीपी बैग की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। पिछले वर्ष लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए खरीदी केंद्रों पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि समर्थन मूल्य का लाभ समय पर हर पात्र किसान तक पहुंच सके।

महिला किसान वर्ष 2026: डॉ. प्रतिभा तिवारी ने उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया पर चर्चा और सर्वेक्षण किया

महिला किसान वर्ष 2026 में डाॅ0 प्रतिभा तिवारी जी ने किया उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया में संपर्क/परिचय/चर्चा एवं सवेक्षण   टीकमगढ़ दिनांक 15/04/2026 को भारतीय स्त्रीशक्ति मध्यप्रदेश के द्वारा टीकमगढ़ के मिनोरा गाँव में “महिला किसान वर्ष 2026” में भारतीय स्त्री शक्ति मध्यप्रदेष की प्रदेश अध्यक्ष-डाॅ0 प्रतिभा तिवारी ने उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया में संपर्क/परिचय/चर्चा एवं सवेक्षण  किया जिसमें आपने कहा कि-उत्पादन से उपयोग तक की यह यात्रा केवल वस्तु के लेन-देन की नहीं, बल्कि विश्वास के निर्माण की प्रक्रिया है। यदि हमारा संपर्क मजबूत है, परिचय स्पष्ट है, चर्चा सकारात्मक है और सर्वेक्षण ईमानदार है, तो वह उत्पाद न केवल सफल होगा बल्कि समाज में अपनी एक अमिट छाप छोड़ेगा। उपयोगकर्ता की संतुष्टि ही किसी भी उत्पादन की वास्तविक सफलता है। उपयोगकर्ता के अनुभव को महिला किसान से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। महिला किसान खुद उत्पादक भी है और उपभोक्ता भी। वह जानती है कि किस दाल को पकने में कम समय लगता है या किस अनाज का स्वाद मीठा है। उसका सर्वेक्षण किताबी नहीं, अनुभवी होता है। जब वह उत्पाद बाजार में लाती है, तो वह क्वालिटी कंट्रोल की पहली गारंटी होती है। किसान संघ महाकोशल की प्रदेश उपाध्यक्ष-सुश्री ज्ञानमंजरी दीक्षित ने बताया कि- आज के युग में उत्पादन का अर्थ केवल वस्तु बनाना नहीं है, बल्कि एक सम्बन्ध बनाना है। यह सम्बन्ध संपर्क से शुरू होकर उपयोग के बाद भी सर्वेक्षण के माध्यम से जीवित रहता है। आज हम जिस समाज में रहते हैं, वहां जब भी किसान शब्द का नाम लिया जाता है, तो आंखों के सामने एक पुरुष का चित्र उभरता है। लेकिन हकीकत यह है कि भारत के खेतों की असली रीढ़ हमारी महिलाएं हैं। सरपंच-श्रीमती शान्ति प्रजापति ने कहा कि- अक्सर खेतों के बाहर लगे बोर्ड पर पुरुष का नाम होता है, लेकिन उस खेत की मिट्टी के भीतर महिला किसान का पसीना होता है। महिला किसान वर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस अदृश्य श्रम को पहचान देने का एक आंदोलन है। खेत की धूल को माथे का तिलक बनाती है, वो महिला किसान ही है जो पत्थर से भी फसल उगाती है। सिर्फ अन्न नहीं उगाती वो, इस देश का भविष्य बनाती है। प्रदेष कार्य समीति सदस्य महिला मोर्चा की श्रीमती पूनम अग्रवाल ने बताया कि-महिला किसान वर्ष मनाना तब सार्थक होगा जब हम उत्पादन से लेकर बाजार के हर सर्वेक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। हमें यह स्वीकार करना होगा कि यदि किसान का हाथ मिट्टी में है, तो महिला किसान का दिल उस मिट्टी की खुशबू में है। संम्पर्क अभियान में श्रीमती रीना श्रीवास्तव, श्रीमती अनुराधा बक्षी से सम्पर्क किया गया। इसमें उपस्थित महिलाओं की संख्या 67 रही।

किसान रजिस्ट्री के लिए सरकार की सख्त रणनीति, मिशन मोड में 100% लक्ष्य पूरा करने की योजना

किसान रजिस्ट्री के लिए सरकार की सख्त रणनीति, मिशन मोड में 100% लक्ष्य हासिल करने की तैयारी हर ग्राम पंचायत में कैंप, कम कवरेज वाले गांवों पर विशेष फोकस जनजागरूकता के लिए मीडिया, लाउडस्पीकर और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी 15 मई से योजनाओं के लाभ हेतु फार्मर आईडी अनिवार्य, प्रशासन अलर्ट लखनऊ  राज्य सरकार ने किसान रजिस्ट्री को 100 प्रतिशत पूर्ण करने के लिए मिशन मोड में व्यापक रणनीति लागू कर दी है। तय योजना के अनुसार 30 अप्रैल 2026 तक किसान रजिस्ट्री का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार 15 अप्रैल तक प्रत्येक ग्राम पंचायत में किसान रजिस्ट्री कैंप स्थापित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसानों को मौके पर ही पंजीकरण की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे ऐसे गांवों की पहचान करें जहां रजिस्ट्री का कवरेज कम है और 6 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच विशेष अभियान चलाकर वहां 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करें। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी भूमि धारक किसान, चाहे वे पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े हों या नहीं, किसान रजिस्ट्री में शामिल किए जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी पात्र किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। जागरूकता को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाते हुए जिलों को निर्देश दिया गया है कि अखबारों में विज्ञापन, लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं और स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि अभियान को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।   राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 मई 2026 से उर्वरक, बीज और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी जाएगी। इस निर्णय के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी और बढ़ गई है, ताकि समय सीमा के भीतर अधिकतम किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल न केवल योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन में मदद करेगी, बल्कि किसानों के लिए एकीकृत डेटाबेस तैयार कर भविष्य की कृषि नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

पंजाब के किसानों को मिला सुनहरा अवसर, 24 अप्रैल तक करें काम, समय घट रहा है

 गुरदासपुर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंजाब द्वारा पराली के उचित प्रबंधन के लिए उपयोग में लाई जाने वाली मशीनों पर सब्सिडी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में गुरदासपुर के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. रणधीर सिंह ठाकुर ने बताया कि इच्छुक किसान विभाग के पोर्टल agrimachinerypb.com के माध्यम से 1 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। डॉ. ठाकुर ने बताया कि सरकार की ओर से निजी तौर पर मशीनें खरीदने वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक और किसान समूहों या सोसायटियों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। इस योजना का लाभ जनरल और एससी श्रेणी के सभी किसान उठा सकते हैं। सब्सिडी के तहत मिलने वाली मशीनों में सुपर एसएमएस, हैपी सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, जीरो टिल ड्रिल, बेलर, रेक और मल्चर सहित कई आधुनिक उपकरण शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा पहले भी करोड़ों रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है, जिससे किसानों में जागरूकता आई है और उन्होंने पराली जलाने के बजाय उसे खेतों में ही प्रबंधित करना शुरू कर दिया है। कई किसान पराली की गांठें बनाकर बेच भी रहे हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। मुख्य कृषि अधिकारी ने कहा कि पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और खाद पर होने वाला खर्च कम होता है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण से बचाव होता है, बल्कि मिट्टी में मौजूद लाभदायक जीव भी सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाते हुए समय पर आवेदन करें। 

किसानों को मिलेगी 22वीं किस्त 13 मार्च को, कुछ किसान रह जाएंगे वंचित, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों किसान जिस किस्त का इंतजार कर रहे थे, उसका समय अब करीब आ गया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों को मिलने वाली अगली राशि जल्द उनके खातों में पहुंचने वाली है. दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल आर्थिक मदद दी जाती है। जिससे खेती से जुड़े छोटे खर्चों में राहत मिल सके. कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि अगली किस्त कब जारी होगी. अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है. सरकार के मुताबिक पात्र किसानों के बैंक खातों में 13 मार्च को 22वीं किस्त भेजी जाएगी. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कुछ किसान ऐसे होंगे जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंचेंगे। कब खाते में आएंगे 2 हजार रुपये? काफी समय से किसानों के बीच यह सवाल चल रहा था कि अगली किस्त कब जारी होगी. पहले माना जा रहा था कि फरवरी के आखिर तक पैसे आ सकते हैं. फिर यह चर्चा भी हुई कि होली से पहले किस्त जारी हो सकती है. अब सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये भेजे जाएंगे. यह पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए किसानों को कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। किसान योजना में ऐसे मिलता है फायदा     हर साल किसानों को कुल 6000 रुपये की मदद मिलती है.     यह रकम तीन किस्तों में दी जाती है.     हर चार महीने में 2,000 रुपये खाते में भेजे जाते हैं.     अब तक किसानों को 21 किस्तें मिल चुकी हैं.     अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद लाखों किसानों को एक बार फिर सीधी आर्थिक मदद मिलने वाली है. इन किसानों को नहीं मिलेंगे पैसे हालांकि सभी किसानों को इस बार किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. कुछ जरूरी नियम पूरे न होने पर किस्त अटक सकती है. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी है। अगर ये काम पूरे नहीं हैं तो पैसे रुक सकते हैं:     ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है.     फार्मर आईडी नहीं बनवाई है.     बैंक खाते की जानकारी गलत है.     आधार और बैंक अकाउंट लिंक नहीं है. इन कारणों से कई किसानों की किस्त रुक जाती है. इसलिए जिन किसानों ने अभी तक ये काम पूरे नहीं किए हैं. उन्हें जल्द से जल्द अपडेट कर लेना चाहिए। आपके खाते में पैसे आएंगे या नहीं किसानों के लिए यह जानना भी आसान है कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं. इसके लिए ऑनलाइन स्टेटस चेक किया जा सकता है.स्टेटस चेक करने के लिए ये आसान तरीका अपनाएं। ऐसे चेक करें स्टेटस     पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.     Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन पर क्लिक करें.     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा भरें.     इसके बाद स्क्रीन पर पूरी जानकारी दिखाई दे जाएगी. यहां से किसान यह भी देख सकते हैं कि उनका ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार बैंक सीडिंग पूरा है या नहीं. अगर पहले किसी वजह से किस्त रुक गई थी और अब सभी जरूरी काम पूरे कर दिए गए हैं. तो आगे आने वाली किस्त फिर से मिल सकती है।