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‘लैंड फॉर जॉब घोटाला’ में लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ कोर्ट ने तय किए आरोप

नई दिल्ली पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को 'लैंड फॉर जॉब स्कैम' मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया है. रेल मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी में नौकरियों के बदले भूमि लेने के घोटाले में राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया. कोर्ट ने संदेह की कसौटी पर पाया कि लालू और परिवार की ओर से व्यापक साजिश रची गई थी. चार्जशीट में लालू यादव के करीबी सहयोगियों को नौकरियों के बदले जमीन अधिग्रहण में सह-साजिशकर्ता के रूप में मदद मिली. कोर्ट ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार की बरी करने की मांग की दलील सही नहीं है. इसके साथ ही, इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य सरकारी पद से अलग होकर आपराधिक उद्यम के रूप में काम कर रहे थे.   कोर्ट ने बहु चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत 40 से अधिक आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है. अदालत ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, साथ ही आईपीसी के तहत अन्य अपराधों का भी आरोप है. जबकि उनके परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने यह फैसला सुनाया. इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था. इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर केस को कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी.इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था. लैंड फॉर जॉब केस में मीसा भारती  बता दें कि 19 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था. सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में 103 आरोपी हैं जिसमें से पांच की मौत हो चुकी है. इससे पहले कोर्ट आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर दो बार फैसला टाल चुका है. 4 दिसंबर और 10 नवंबर 2025 को कोर्ट किसी न किसी वजह से फैसला टाल चुका है. कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. तेज प्रताप यादव पर आरोप तय इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर जज विशाल गोगने की कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी. प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश भट्ट ने 19 दिसंबर को राबड़ी देवी की याचिका खारिज कर दिया था. लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 7 अक्टूबर 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी 2025 को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. लैंड फॉर जॉब घोटाला क्या है? बता दें कि लैंड फॉर जॉब घोटाला, कथित भ्रष्टाचार का केस है। यह साल 2004 से 2009 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री हुआ करते थे। आरोप है कि लालू यादव ने अपने रेल मंत्री के पद का गलत इस्तेमाल किया और इसके जरिए रेलवे के 'ग्रुप-डी' के पदों पर नियुक्तियां की। इन नियुक्तियों के बदले उन्होंने और उनके परिवार ने उम्मीदवारों से रियायती दरों पर या गिफ्ट के तौर पर जमीनें हासिल की थीं। 98 आरोपियों में लालू परिवार का कौन-कौन शामिल? जांच के दौरान, इस केस में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेज प्रताप यादव, बेटे तेजस्वी यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 98 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें अब लालू परिवार को सदस्यों पर आरोप तय हो गए हैं, जबकि 52 लोगों को आरोप मुक्त किया जा चुका है। लालू परिवार को कितनी सजा हो सकती है? लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में आरोप तय होने के बाद लालू परिवार के सदस्यों की संभावित सजा पर बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा ने INDIA TV से बताया, 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 8, 9, 11, 12 और 13, ये सभी लगे हुए हैं। इन सभी में 7 साल तक की सजा का प्रावधान का है। वहीं, धारा 467, 468 और 471 भी हैं तो कुल मिलाकर इनको अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है, अगर सारी सजाएं एक साथ चलती हैं। लेकिन सजा अगर एक के बाद एक शुरू करने वाला कोई ऑर्डर अदालत देती है तो इसमें ये सजा बढ़ भी सकती है।' अलग-अलग सजा को लेकर प्रावधान क्या है? उन्होंने आगे कहा, 'अदालत जब आदेश देती है, तो कहती है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, तो उसमें जो अपर साइड सजा होती है, वही सजा दोषी को भुगतनी पड़ती है। यानी अधिकतम जितने साल की सजा कोर्ट की तरफ से सुनाई जाती है, उतने साल ही दोषी को जेल में रहना पड़ता है।'

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम: IRCTC घोटाले में लालू यादव की याचिका पर जारी किया नोटिस

नईदिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. हाईकोर्ट ने कथित आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मामले में लालू यादव द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है. इस मामले में कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से भी जवाब मांगा है. दरअसल लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे. लालू यादव का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का आदेश गलत है और उनके खिलाफ बिना पुख्ता आधार के आरोप लगाए गए हैं. इसी को लेकर उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. सीबीआई के जवाब का इंतज़ार हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वह इस मामले में अपना जवाब दाखिल करे. इसके बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी. आईआरसीटीसी घोटाले का मामला रेलवे से जुड़े एक टेंडर और होटलों के संचालन से संबंधित है. यह मामला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. सीबीआई ने इस मामले में जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था. कब है अगली सुनवाई अब इस केस की अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी. उस दिन हाईकोर्ट सीबीआई के जवाब और लालू यादव की दलीलों को सुनकर आगे का फैसला करेगा. इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है. आईआरसीटीसी घोटाला क्या है? आरोप है कि रेलवे के होटल का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया और बदले में लालू प्रसाद यादव के परिवार को सस्ती कीमत पर कीमती जमीन दिलाई गई. जांच एजेंसियों का मानना है कि इससे सरकार को नुकसान हुआ और कुछ निजी लोगों व एक राजनीतिक परिवार को फायदा मिला. इसी कारण सीबीआई और ईडी ने इसे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला माना है. यह मामला किस समय का है? यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. होटल का ठेका किसे दिया गया था? रांची और पुरी के दो रेलवे होटल पहले आईआरसीटीसी को दिए गए, फिर इन्हें निजी कंपनी सुजाता होटल्स को लीज पर दिया गया. जांच एजेंसियों का क्या आरोप है? एजेंसियों का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया. बदले में क्या मिला, ऐसा आरोप है? आरोप है कि पटना की एक कीमती जमीन राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बाजार भाव से काफी कम कीमत पर दी गई. इस मामले में कौन-कौन आरोपी हैं? लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, कुछ आईआरसीटीसी अधिकारी और निजी कारोबारी आरोपी हैं. मामला अभी किस स्थिति में है? अक्टूबर 2025 में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय किए. लालू यादव ने इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है और मामला अभी विचाराधीन है.

गुड्डु बाबा ने कौटिल्य नगर में लालू की जमीन को लेकर विजय सिन्हा को लिखा पत्र

पटना. लैंड फॉर जॉब, आईआरसीटीसी घोटाले का आरोप झेल रहे लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और उनके परिजनों के लिए नये साल में एक और मुश्किल खड़ी होती दिख रही है। सामाजिक कार्यकर्ता गुड्डू बाबा ने लीज पर दी गई कौटिल्य नगर की जमीन पर जांच के लिए डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को पत्र लिखा है। बताया जा रहा है कि लालू प्रसाद का परिवार 10 सर्कुलर रोड आवास से कौटिल्य नगर स्थित आवास में शिफ्ट होने वाला है। कौटिल्य नगर में अन्य नेताओं को भी लीज पर जमीन दी गई है। गुड्डू बाबा ने विजय कुमार सिन्हा पत्र लिखकर जांच की मांग करने की पुष्टि की है। न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि उक्त जमीन वेटेनरी कॉलेज से संबंधित है। इन जमीनों के आवंटन में नियमों की अनदेखी की गयी। इनकी गहन जांच की आवश्यकता है। कौटिल्य नगर में 1986 में कोऑपरेटिव सोसायटी बनाकर विधायकों और सांसदों को 20 एकड़ जमीन लीज पर आवंटित कर दी गई। वहां नेताओं ने घर बना लिए। इन लोगों ने शर्त का पालन नहीं किया। इन नेताओं को कभी सरकारी आवास का उपयोग नहीं करना था। प्राप्त भूखंड को बेचना, किसी को हस्तांतरि करना या व्यावसायिक उपयोग पर रोक थी। कौटिल्य नगर की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए 2016 से हाईकोर्ट में मामला चल रहा है। यह जमीन पटना यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहित किया गया जिसे बाद में वेटेनरी कॉलेज को दिया गया। बाद में नेताओं ने बांट लिया। कौटिल्यनगर का मामला एक बड़ा लैंड स्कैम है। उन्होंने यह भी कहा कि 1986 में की गई 30 साल की लीज 2016 में एक्सपायर हो गई। रिन्यूअल के लिए फाइल बढ़ाई गई पर नीतीश कुमार ने इस पर स्वीकृति नहीं दी। सीएम को अच्छे से इन जमीनों की सच्चाई पता है। लीज का एक्सटेंसन नहीं किया गया।हालांकि शिकायत पर ऐक्शन इतना आसान नहीं है क्योंकि कई बड़े नेताओं के हित का मामला है। इस पर विजय सिन्हा पर निर्भर करता है कि क्या ऐक्शन लेते है। राजद ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा है कि एक परिवार का नाम लोकर और आरोप लगाकर खबर में बने रहने की कवायद है। लालू परिवार को टारगेट किया जा रहा है।

कांग्रेस और लालू यादव पर सम्राट चौधरी का हमला, बोले– बिहार को दशकों तक लूटते रहे

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी  ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस  ने 55 सालों तक प्रदेश को लूटा, जबकि डबल इंजन सरकार ने बिहार में विकास की नई इबारत लिखी है। सम्राट चौधरी बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र के वीरपुर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) प्रत्याशी कुंदन सिंह (BJP) और खगड़िया विधानसभा क्षेत्र के मारड़ में बब्लू मंडल जनता दल यूनाईटेड (JDU) उम्मीदवार के समर्थन में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और लालू यादव ने मिलकर 55 सालों तक बिहार को लूटा। कांग्रेस ने गरीबों के मसीहा कर्पूरी ठाकुर को गाली दी थी। बिहार यदि पिछड़ा है तो इसका कारण कांग्रेस और राजद है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस बार विधानसभा चुनाव में एक तरफ विनाश है और दूसरी तरफ विकास है। एक तरफ जंगलराज है तो दूसरी तरफ सुशासन है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर महागठबंधन में परिवारवाद हावी है, वहीं दूसरी ओर जदयू ने एक साधारण कार्यकर्ता बब्लू मंडल को प्रत्याशी बनाकर यह साबित किया है कि राजग में कार्यकर्ताओं का सम्मान होता है। राजग शासन में ना हिंदू देखा गया, ना मुसलमान,बस इंसान देखा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास की भावना से काम हुआ। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने बिहार में विकास की नई इबारत लिखी है। उन्होंने कहा कि करीब एक करोड़ लोगों को पक्का मकान मिला, गांवों में 20 घंटे से ज्यादा बिजली मिल रही है। पहले बागमती, गंडक और कोसी में पुल बनने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह सब संभव हुआ। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति बेहद खराब थी।बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सब बदहाल थे। उस समय अपहरण उद्योग फल-फूल रहा था। महिलाएं शाम पांच बजे के बाद घर से निकलने से डरती थीं, लेकिन नीतीश कुमार के सुशासन ने बिहार का चेहरा बदल दिया।उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार ने साइकिल और पोशाक योजना से बेटियों को स्कूल तक पहुंचाया, पढ़ाई के अवसर दिए और उन्हें सरकारी नौकरी में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर सशक्त किया। पंचायत चुनाव में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिला। अब सरकार एक करोड़ 41 लाख महिलाओं को 10 हजार रुपये की पहली किस्त देकर उन्हें स्वावलंबी बना रही है।  

कुप्रशासन का खेल जारी: लालू यादव का परिवार बना अगला निशाना

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर तीखा हमला बोला और कहा कि राज्य में ‘कुप्रशासन फैलाने वाले व्यक्ति' ने पहले अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनाकर आगे बढ़ाया और अब बेटे-बेटियों को आगे बढ़ा रहे हैं। राज्य में जिस व्यक्ति ने कुप्रशासन फैलाया, उसने जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समस्तीपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का आह्वान किया और कहा कि बिहार नरेन्द्र मोदी सरकार की मदद से तेजी से प्रगति कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी जनसभा से बिहार में चुनाव अभियान की शुरुआत की। कुमार ने लालू प्रसाद यादव पर बिना नाम लिए निशाना साधा और कहा कि “राज्य में जिस व्यक्ति ने कुप्रशासन फैलाया, उसने पद छोड़ने की नौबत आने पर अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिया।” नीतीश कुमार 1997 की उस घटना का जिक्र कर रहे थे, जब चारा घोटाले के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) द्वारा आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने पदभार संभाला था। NDA की सरकार में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ- Nitish Kumar मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्होंने (लालू प्रसाद) अब तक अपनी आदतें नहीं बदली हैं। पहले अपनी पत्नी को आगे किया और अब बेटों-बेटियों को बढ़ावा देने में लगे हैं।” उनका इशारा महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव और पाटलिपुत्र से सांसद मीसा भारती की ओर था। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने थोड़े समय के लिए उनकी पार्टी से गठबंधन किया था, लेकिन जल्द ही समझ गया कि यह गलती थी। मैंने पाया कि मैं उसी गठबंधन में बेहतर हूं, जिसका मैं शुरू से हिस्सा रहा हूं।” जद(यू) प्रमुख ने कहा कि राजग की सरकार में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। उनका कहना था कि केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य के विकास के लिए हर संभव सहयोग दिया है। भाषा कैलाश  

राजनीतिक सियासत: लालू ने तेजस्वी की ताकत बढ़ाने के लिए किया सक्रिय प्रयास, कांग्रेस देरी में

पटना राजद की चुनावी रणनीति का निर्धारण और तेजस्वी यादव को संवाद की सीख देकर एक समय निश्चिंत हो चुके लालू प्रसाद की सक्रियता दोबारा बढ़ गई है। स्वास्थ्य इसकी अनुमति नहीं देता, फिर भी वे दौड़-धूप कर रहे। एकमात्र उद्देश्य तेजस्वी को सत्तासीन करना है। लालू मान चुके हैं कि उनके हस्तक्षेप के बिना न सीटों पर समझौता संभव है और ना ही मुख्यमंत्री के चेहरे का निर्धारण। कांग्रेस आज आनाकानी कर रही, तो कल को कन्नी भी काट सकती है। चिंता महागठबंधन में पीछे धकियाने जाने की भी है। सामाजिक समीकरण का विस्तार किए बिना राजद को सत्ता मिलने से रही, जबकि परंपरागत जनाधार (मुसलमान-यादव) पर ही हिस्सेदार खड़े हो गए हैं, इसलिए लालू ने अपनी रणनीति का रुख दोतरफा कर दिया है। आक्रामक बयानों से वे कोर वोटरों को साधने का उपक्रम कर रहे, तो फील्ड में सक्रियता से विरोधियों के साथ महागठबंधन के घटक दलों को हर दांव-पेच से निपटने की चुनौती दे रहे। एनडीए, विशेषकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पर उनके बोल बेहद तीखे होते जा रहे। नीतीश सरकार के 20 वर्षों के शासन को वे "दो पीढ़ियों को बर्बाद करने वाला" करार चुके हैं। एक्स पर लिख चुके हैं, "ऐ मोदी जी, विक्ट्री चाहिए बिहार से और फैक्ट्री दीजिएगा गुजरात में! यह गुजराती फार्मूला बिहार में नहीं चलेगा!" क्षेत्रीय अस्मिता को उभारने वाला यह बयान वस्तुत: जनाधार के विस्तार की आकांक्षा है। लालू सपरिवार गयाजी पहुंच थे। अपने हाथों कोई षट्कर्म नहीं किया, क्योंकि गयाजी में वे पहले ही पिंडदान कर चुके हैं, फिर भी विष्णुपद मंदिर पहुंचे। उनकी यह पहल सीतामढ़ी में जानकी मंदिर पहुंचे राहुल गांधी से उत्प्रेरित मानी जा रही, जो धुव्रीकरण की आशंका को निर्मूल करने के उद्देश्य से रही। मुसलमानों के हिमायती राजद के लिए ध्रुवीकरण की स्थिति कभी लाभप्रद नहीं रहती, इसलिए लालू ने तेजस्वी को इससे बचते हुए ''खैनी में चूना रगड़ देने'' वाले बयान को बारंबार दोहराने की सीख दी। यह बयान वस्तुत: अगड़ों पर आक्षेप और कोर वोटरों को साधने का उपक्रम रहा। बहरहाल, लालू की रणनीति युवा-महिला वोटरों को लुभाने और एनडीए के वोट-बैंक में सेंधमारी के साथ तेजस्वी की छवि को एक प्रगतिशील नेता के रूप में स्थापित करने की है। माई-बहिन मान योजना और शत प्रतिशत डोमिसाइल के वादे के साथ महागठबंधन में नए सहयोगियों (झामुमो और रालोजपा) को जोड़ने से इसका आभास होता है। सारे निर्णय लालू के रहे। हालांकि, परिवार के भीतर मतभेद, महागठबंधन में अंतर्द्वंद्व और कानूनी चुनौतियां उनकी इच्छाओं पर तुषारापात कर रहीं। इसके बावजूद वे तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा बता रहे, क्योंकि इसके लिए अभी कोई दूसरा दमदार आवाज नहीं। पांच फरवरी को नालंदा में लालू ने तेजस्वी को ही महागठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा बताया था। उसके बाद मोतिहारी में कहा कि "तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनने से कोई माई का लाल नहीं रोक सकता।" इस उद्घाेष के बावजूद कांग्रेस पेच फंसाए है। ऐसे में लालू इत्मीनान से नहीं बैठ सकते। मोतिहारी में वे पूर्व विधायक यमुना यादव के निधन पर शोक जताने गए। पुराने नेताओं के स्वजनों का दु:ख साझा करने के लिए ऐसे ही वैशाली और आरा भी जा चुके हैं। इस स्तर पर लालू की सक्रियता पिछले वर्षों में नहीं रही। हालांकि, उनकी अति-सक्रियता राजद की संभावना के प्रतिकूल भी पड़ जाती है। तब जंगलराज की पुनर्वापसी की आशंका जताते विरोधी कुछ अधिक आक्रामक हो जाते हैं।