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लाड़ली बहना और किसान सम्मान निधि के बीच MP पर कर्ज का पहाड़, आंकड़ा ₹4.97 लाख करोड़ पार

भोपाल  एमपी की धरती पर पैदा होने वाले हर बेटा-बेटी पर 55323 रुपए का कर्ज है। यह कर्ज उसने या उसके मां-बाप का नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा बाजार से लिए जा रहे कर्ज के रूप में है जिसकी भरपाई सरकार प्रदेश वासियों से वसूले जाने वाले टैक्स के रूप में करती है. प्रदेश की आबादी के वास्तविक आंकड़े फरवरी 2027 में आएंगे पर राज्य सरकार द्वारा जो औसत आबादी मानी जा रही है वह नौ करोड़ है। इसके आधार पर एमपी के हर व्यक्ति पर कर्ज की यह राशि सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी सरकार पर कर्ज की राशि 488714.17 करोड़ रुपए हैं जो इसके बाद के दो महीने में लिए गए 9200 करोड़ के कर्ज के चलते बढ़कर अब 497914 करोड़ रुपए हो गई है। बता दें कि सरकार ने पिछले साल 2025-26 में लिए गए कर्ज के मुकाबले 29 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाए हैं। माना जा रहा है कि यह किसी बड़ी योजना के बराबर की राशि है जिसका ब्याज सरकार ने चुकाया है। प्रदेश सरकार का मौजूदा कर्ज और कर्ज देने वाली संस्थाओं पर बकाया राशि     वित्त विभाग ने कहा है कि प्रदेश सरकार पर वर्तमान में 488714.17 करोड़ का कर्ज है। कर्ज की यह राशि सरकार ने अलग-अलग सेक्टर से ली है।     राज्य सरकार ने बाजार से 333278.21 करोड रुपए का लोन लिया है। कंपनसेशन और अदर बॉन्ड जिसमें पावर बांड्स भी शामिल हैं, के जरिये सरकार ने 4416. 45 करोड़ रुपए उधार लिए हैं।     साथ ही वित्तीय संस्थानों से 17737.58 करोड़ रुपए सरकार ने लिए हैं। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से लोन और एडवांस राशि के रूप में 81152.31 करोड़ रुपए ले रखे हैं।     इसके अलावा अदर लायबिलिटी कैटेगरी में 13951.57 करोड़ रुपए का कर्ज होने की जानकारी दी गई है।     केंद्र सरकार के नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से भी सरकार ने 38178.05 करोड़ रुपए ले रखे हैं। इस तरह कुल 488714.17 करोड रुपए का कर्ज राज्य सरकार पर है। 31 मार्च 2025 की स्थिति में था 421740 करोड़ का कर्ज पिछले साल 31 मार्च 2025 की स्थिति में राज्य सरकार पर कुल कर्ज 421740.27 करोड़ रुपए था। अगर 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी की आबादी 8.80 करोड़ मानी जाए तो प्रदेश के हर व्यक्ति पर कुल कर्ज 47925 रुपए होता है। यानी एक साल में प्रति व्यक्ति कर्ज घटने के बजाय छह हजार रुपए बढ़ गया है और इस स्थिति में सुधार आने की कोई गुंजाइश फिलहाल दिखाई नहीं देती है क्योंकि योजनाओं की पूर्ति के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 में अप्रेल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया है। लाड़ली बहना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने बढ़ाया कर्ज राज्य सरकार पर कर्ज की बढ़ती राशि के पीछे मुफ्त में बांटी जाने वाली राशि को भी कारण बताया जा रहा है। सरकार भले ही दावे करे कि जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह अधोसंरचना विकास और प्रदेश के विकास के लिए खर्च हो रहा है लेकिन हकीकत यही है कि हर माह ली जाने वाली कर्ज की रकम लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्जवला योजना जैसे अन्य योजनाओं पर खर्च की जा रही है और प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने ले लिया है 9200 करोड़ का कर्ज मोहन सरकार ने पिछले साल लिए गए 488714 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में अप्रेल और मई के महीनों में 9200 करोड़ रुपए का कर्ज चार बार में ले लिया है। अगर इसे भी कर्ज की कुल राशि में जोड़ दिया जाए तो वर्तमान में सरकार पर कुल कर्ज 4 लाख 97 हजार 914 करोड़ रुपए हो जाता है। इस नजरिये से देखें तो प्रदेश के हर नागरिक पर कर्ज का आंकड़ा 54301 से बढ़कर 55323 रुपए हो जाता है।

30 साल से बंद सहकारी मंडली का कर्ज चुकाकर गांव को दिलाई राहत, 300 किसानों की हुई मदद

सावरकुंडला  गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला तालुका स्थित जीरा गांव में किसानों की 30 साल पुरानी पीड़ा का अंत हो गया है. 1995 में गांव की सेवा सहकारी मंडली के बंद होने के बाद करीब  300 किसान इस मंडली के कर्ज के बोझ तले दबे थे, जिसके चलते उन्हें अन्य बैंकों से भी फसल ऋण नहीं मिल पा रहा था. गांव के मूल निवासी और सूरत के सफल हीरा कारोबारी बाबूभाई चोडवाडिया उर्फ ​​जीरावाला किसानों की मदद के लिए आगे आए. बाबूभाई ने अपनी मां की पुण्यतिथि के अवसर पर यह अनुकरणीय कार्य करने का फैसला किया. उनकी मां की इच्छा थी कि उनकी संपत्ति का उपयोग ऐसी जगह किया जाए, जिससे उन्हें खुशी मिले. उन्होंने गांव के 290 किसानों का पिछले 30 सालों का कर्ज चुकाने के लिए ₹89 लाख की भारी-भरकम राशि दान की. यह राशि 1995 में किसानों के नाम पर फर्जी ऋण लेने के कारण लगी थी. बाबूभाई ने कहा कि उन्होंने अपनी मां की इच्छा पूरी की है और यह पट्टिका किसानों के दिलों में महसूस होगी. सार्वजनिक जीवन में होने के नाते, उन्होंने अन्य उद्योगपतियों को भी किसानों की मदद के लिए आगे आने की अपील की.  30 साल के दर्द से मिली मुक्ति आज जीरा गांव में, अमरेली सांसद भरत सुतारिया और सावरकुंडला-लिलिया विधायक महेश कसवाला सहित बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों को 'अदेयता प्रमाण पत्र' (Due Certificate) प्रदान किए गए. किसान नाथाभाई शिरोया और महेशभाई दुधात ने  कहा कि इन 30 वर्षों में उनके 'काले बाल सफेद हो गए', लेकिन उन्हें ऋण नहीं मिल रहा था. उन्होंने बाबूभाई को भगवान के रूप में आया हुआ बताया और उनके परिवार को 10 गुना लाभ होने की कामना की. जीरा गांव की सरपंच दक्षाबेन चोडवाडिया ने कहा कि बाबूभाई ने ₹89 लाख का कर्ज चुकाकर उनके ससुर का अधूरा सपना पूरा किया है. सांसद भरत सुतारिया ने बाबूभाई की पहल की सराहना की और कहा कि यह अन्य गाँवों के लिए भी एक मिसाल है, जहाँ किसान ऐसी ही समितियों के कारण बोझ तले दबे हुए हैं. बाबूभाई जीरावाला की इस पहल ने न केवल 300 किसानों को कर्जमुक्त किया है, बल्कि उन्हें '7-12 कागज' (राजस्व रिकॉर्ड) पर लगे बोझ से भी मुक्ति दिलाई है, जिससे वे अब अन्य बैंकों से फसल ऋण ले सकेंगे.

किसानों के लिए बड़ी राहत: शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण योजना जारी रहेगी

किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण योजना निरंतर जारी रहेगी राज्य शासन ने किया आदेश जारी भोपाल राज्य शासन ने वर्ष 2025-26 के लिये सहकारी बैंकों के माध्यम से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) द्वारा शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण देने की योजना को निरंतर रखने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य शासन ने आदेश जारी किया है। जारी आदेशानुसार खरीफ 2025 सीजन के लिये देय तिथि 28 मार्च 2026 तथा रबी 2025-26 सीजन के लिये देय तिथि 15 जून 2026 नीयत की गई है। राज्य शासन द्वारा अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले सभी किसानों को गत वर्ष के समान 1.5 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित देय तिथि तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) दिया जायेगा।