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‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से सायबर अपराध पर कसेगा शिकंजा ‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल डिजिटल युग में न्याय प्रक्रिया को मिली गति भोपाल पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस ने सुशासन को सशक्त करने की दिशा में नवाचार के रूप में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रारंभ की है। यह व्यवस्था 01 लाख रुपये से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू की गई है। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सायबर सुरक्षित भारत’ विज़न के अनुरूप है, जिसका उल्लेख उन्होंने अक्टूबर 2024 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देशभर में सायबर अपराध से निपटने के लिये ऐतिहासिक एवं तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज और आम नागरिकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लागू यह प्रणाली पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक के दुरुपयोग से जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिस प्रकार स्वच्छता को हमने अपनी संस्कृति बनाया है, उसी प्रकार सायबर स्वच्छता को भी जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस को अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है। सायबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी प्रहार सायबर वित्तीय धोखाधड़ी आज पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई बार पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही क्षणों में अपराधियों के हाथों में चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए गृह मंत्रालय द्वारा ‘ई-जीरो एफआईआर’ की अवधारणा लागू की गई है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके। कानूनी आधार : BNSS और डिजिटल परिवर्तन जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) नागरिक-केंद्रित हैं। इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ पर फोकस रहना है। बीएनएसएस की धारा 173 के अंतर्गत ‘जीरो एफआईआर’ को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी, किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित अपराध के लिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ई-जीरो एफआईआर: एक क्रांतिकारी व्यवस्था ‘ई-जीरो एफआईआर’ सायबर वित्तीय धोखाधड़ी—विशेषकर ₹1 लाख से अधिक की हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं को समाप्त कर जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों का एकीकरण करती है। नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), I4सी (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस)। ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण की 5-चरणीय प्रक्रिया शिकायत दर्ज करना – पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय सायबर पुलिस हब को भेजा जाता है। ऑटोमैटिक जनरेशन – सीसीटीएनएस सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ‘ई-जीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ित को तुरंत ‘ई-जीरो एफआईआर’ नंबर उपलब्ध कराया दिया जाता है। समीक्षा एवं हस्तांतरण – राज्य स्तरीय सायबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है। नियमित एफआईआर में परिवर्तन – शिकायतकर्ता को 3 दिन के अंदर नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में ‘ई-जीरो एफआईआर’ को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है। सायबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सायबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C एवं बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में राशि पहुंचने से पहले ही उसे फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तत्काल और कानूनी रूप से सुरक्षित किए जाते हैं। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के प्रमुख लाभ ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था देश में कहीं से भी कहीं भी हुई सायबर या वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराती है। इससे क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलती है, शीघ्र एफआईआर से बैंकिंग चैनल सक्रिय, हो जाते हैं, राशि वापसी की संभावना अधिक हो जाती है साथ ही पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा मिलने से आवश्यक दस्तावेज हमेशा उपलब्ध बने रहते हैं।  

अभ्युदय मध्यप्रदेश: आईटीआई में रिकॉर्ड प्रवेश और युवाओं का हुआ वैश्विक प्लेसमेंट

अभ्युदय मध्यप्रदेश कौशल और रोजगार से गढ़ी जा रही आत्मनिर्भरता की नई इबारत : मंत्री गौतम टेटवाल आईटीआई में रिकॉर्ड प्रवेश और युवाओं का हुआ वैश्विक प्लेसमेंट भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पत्रकार वार्ता में विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियां को साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने कौशल और रोजगार के क्षेत्र में ठोस, परिणाममुखी और राष्ट्र स्तर पर प्रशंसित उपलब्धियाँ हासिल की हैं।मंत्री टेटवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ और आगामी तीन वर्षों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का प्रमाण हैं। सत्र 2025 में प्रदेश के आईटीआई में एक लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थी परीक्षाओं में सम्मिलित हुए और विभिन्न ट्रेडों में दस प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। विगत दो वर्षों में शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाना तथा शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई, बैतूल की प्रशिक्षणार्थी कु. त्रिशा तावड़े को 4 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में सम्मानित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। विश्व कौशल प्रतियोगिता 2024 में प्रदेश के प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 4 कांस्य और 11 मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस (लियॉन) में एक मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस अर्जित किया गया, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता का प्रमाण है। वर्ष 2025 में शासकीय आईटीआई के प्रवेश में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई; कुल सीटें बढ़ाकर 52,248 की गईं और 94.55% सीटें भरी गईं, जो वर्ष 2024 के 86.33% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है। महिला आरक्षण बढ़ाकर 35% करने तथा समावेशी प्रवेश नीतियों के कारण महिला प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़कर 12,191 हुई, जबकि वर्ष 2024 में यह 9,655 थी। समावेशिता और नवप्रवर्तन विभाग की प्राथमिकता है । इस वर्ष 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों और बाल देखरेख संस्थाओं के 16 बच्चों ने आईटीआई में प्रवेश लिया। आठवीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए ट्रेडों की संख्या 5 से बढ़ाकर 10 की गई तथा इन ट्रेडों में 8,041 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। प्रदेश के आईटीआई की गुणवत्ता और आकर्षण का प्रमाण यह है कि इस वर्ष बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित आठ राज्यों के विद्यार्थियों ने मध्यप्रदेश के आईटीआई में प्रवेश लिया। आईटीआई ग्रेडिंग में प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई ने 10 में से 9 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए और शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन ने नौ दशमलव तीन अंक के साथ प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से उज्जैन, भोपाल और जबलपुर में एआई, आईओटी, ब्लॉकचेन तथा एआर-वीआर पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं तथा टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल द्वारा फाइव-जी टेक्नोलॉजी में 400 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत नौ आईटीआई में एआई डेटा लैब्स स्थापित करने के अनुबंध सुनिश्चित किए गए हैं। उद्योग-सीएसआर साझेदारी से प्रशिक्षण अवसंरचना सुदृढ़ हुई है; मारुति सुजुकी द्वारा आईटीआई भोपाल व जबलपुर में आधुनिक लैब का निर्माण पाँच करोड़ रु. की लागत से किया गया, सिमेंस ने आईटीआई उज्जैन में साठ लाख रुपए. की मेन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब स्थापित की, जैगुआर फाउंडेशन ने आईटीआई भोपाल में पंद्रह लाख रु. की प्लम्बिंग स्किल लैब विकसित की तथा श्री-ट्रस्ट ने 20 आईटीआई में इलेक्ट्रिकल, सोलर और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन लैब स्थापित कीं। वाधवानी फाउण्डेशन, क्वेस्ट अलाईंस और इग्नाइट परियोजना के माध्यम से हजारों प्रशिक्षणार्थियों को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इंडस्ट्री-अकादेमिया कंसल्टेशन वर्कशॉप 14 स्थानों पर आयोजित कर प्रशिक्षण एवं उद्योग आवश्यकताओं का बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में वर्ष 2025 में 1,100 प्रशिक्षणार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित किया गया, जिनमें 80% आईटीआई प्रशिक्षणार्थी और 20% पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग प्रशिक्षणार्थी हैं; ग्लोबल स्किल पार्क से अब तक 600 प्रशिक्षणार्थियों का सफल प्लेसमेंट हुआ है जिनमें 29 को विदेशी नियोजन प्राप्त हुआ और यह पार्क उच्च प्लेसमेंट प्रतिशत के साथ प्रदेश की पहचान बन चुका है। विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण, हब-एंड-स्पोक मॉडल और उद्योगों के साथ समन्वय के तहत अधिकारियों तथा अभ्यर्थियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विगत दो वर्षों में विभागीय संस्थागत क्षमता मजबूत करने हेतु अनेक नियुक्तियाँ की गईं तथा अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट को प्रोत्साहन देते हुए आईटीआई उत्तीर्ण 113 प्रशिक्षणार्थियों को अबूधाबी, जापान, स्लोवाकिया, कुवैत सहित विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराया गया। प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार, रोजगार और अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के लिए प्रतिमाह युवा संगम आयोजित किए जा रहे हैं; विगत दो वर्षों में 656 युवा संगमों के माध्यम से कुल 1,56,767 आवेदकों को रोजगार से जोड़ा गया। राज्यमंत्री टेटवाल ने जानकारी दी किआगामी तीन वर्षों की समग्र रूपरेखा में प्रदेश के आईटीआई विहीन 51 विकासखंडों में नये शासकीय आईटीआई की स्थापना, रिक्त पदों की पूर्ति, पीएम सेतु योजना के तहत क्लस्टर विकास, सीएसआर सहयोग से आधुनिक स्किल लैब का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट का बढ़ावा, विश्व कौशल प्रतियोगिताओं में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन और प्रशिक्षकों के लिए पुरस्कार प्रोत्साहन प्रमुख उद्देश्य होंगे। साथ ही, ग्रीन एनर्जी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अनुरूप नए कोर्स और प्रशिक्षण शुरू कर प्रदेश के युवाओं को आने वाले हरित व स्वचालित रोजगार बाजार के लिये तैयार किया जा रहा है। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि ये उपलब्धियाँ हमारे सामूहिक परिश्रम, समर्पण और साझेदारी का नतीजा हैं और कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का उद्देश्य मध्यप्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए प्रदेश को रोजगार का नया मानक बनाना है।  

रोलिंग बजट बनाने में मध्यप्रदेश बनेगा देश का पहला राज्य

जनअपेक्षाओं के अनुरूप होगा मध्यप्रदेश का बजट उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने की बजट विशेषज्ञों से चर्चा भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि लोकतंत्र की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए जनअपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश का बजट तैयार किया जाएगा। नवाचार के रूप में वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों के साथ वर्ष 2027-28 एवं वर्ष 2028-29 के सांकेतिक बजट अनुमान भी तैयार किए जा रहे हैं। इस प्रकार आगामी तीन वर्षों के लिए रोलिंग बजट तैयार करने की पहल करने में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने सोमवार को बजट संवाद कार्यक्रम में यह जानकारी दी। वर्ष 2026-27 के बजट को अधिक लोक कल्याणकारी, व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित बजट संवाद कार्यक्रम में अर्थशास्त्रियों, बजट विशेषज्ञों, प्रबुद्ध विचारकों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज न होकर आम जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होना चाहिए। सरकार का निरंतर प्रयास है कि बजट निर्माण की प्रक्रिया में जनभागीदारी को और अधिक विस्तार दिया जाए और प्राप्त सुझावों को नीति निर्धारण की प्रक्रिया में शामिल किया जाए। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बजट संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष प्रदेश के बजट को सरल, सहज और व्यावहारिक स्वरूप देने का प्रयास किया जाता है, जिससे आम नागरिक भी बजट निर्माण प्रक्रिया को आसानी से समझ सके। बजट को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आम जनता, विषय विशेषज्ञों और प्रबुद्ध वर्ग से ई-मेल, वेबसाइट, दूरभाष एवं अन्य संचार माध्यमों के जरिए सुझाव आमंत्रित किए गए, जिनके माध्यम से लगभग 945 सुझाव प्राप्त हुए हैं। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के संकल्प में प्रदेश का उल्लेखनीय योगदान सुनिश्चित करने हेतु पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में ₹82 हजार 513 करोड़ का पूंजीगत व्यय प्रावधान अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने आगामी लक्ष्यों की चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 2029 तक राज्य का सकल घरेलू उत्पाद ₹27.2 लाख करोड़ तथा वर्ष 2047 तक ₹250 लाख करोड़ से अधिक करने का लक्ष्य है। साथ ही प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि का रोडमैप तैयार किया गया है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि आगामी बजट में कृषि और किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे किसानों की आय बढ़े और सब्सिडी पर निर्भरता कम हो। साथ ही उद्योग, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन के क्षेत्र में सुधार हेतु भी विशेषज्ञों से ठोस सुझाव आमंत्रित किए गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास और नागरिकों के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और बजट विशेषज्ञों के सुझावों से प्रदेश अपने लक्ष्यों को शीघ्र प्राप्त करेगा।              सचिव वित्त लोकेश कुमार जाटव ने स्वागत भाषण में कहा कि बजट सुझाव को यथोचित बजट में शामिल करेंगे। उन्होंने बजट की पूरी प्रक्रिया संक्षेप में जानकारी दी।              उप महाप्रबंधक नाबार्ड सुशील कुमार ने सुझाव दिया कि विकसित भारत 2047 के लिये कारपोरेट सेक्टर की भूमिका, इनवेस्टमेंट बढ़ना, सिंचाई और मंडी इंफ्रास्ट्रेक्चर को बढ़ाना होगा। कुछ विशेष एरिया को शामिल किया जाना चाहिए।              सदस्य मध्यप्रदेश युवा आयोग आशुतोष सिंह ठाकुर ने नेशनल युथ पॉलिसी के कुछ विशेष एरिया को शामिल किया जाना चाहिए, युवाओं को स्किल ट्रेनिंग, लैग्वेंज सिस्टम को लागू करने के लिये उच्च शिक्षा में बजट प्रावधान अलग से होना चाहिए।              पूर्व अध्यक्ष सी.सी.आई. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने युज आफ डूईंग बिजनेस एवं स्टॉट-अप एवं डीफेंस कॉरिडोर पर अपने सुझाव दिया।              उप महाप्रबंधक आरबीआई अल्का गर्दे ने कहा महिलाओं को जो भी प्रशिक्षण दिया जाये जिसमें इनकम जनरेटिंग पॉइंट को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने एमएसएमई क्लस्टर्स को बढ़ावा देने की भी बात की है।              अध्यक्ष उद्योग भारती मितेश लोकवानी ने आईटी सेक्टर, सेमीकंडक्टर में मध्यप्रदेश के निर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफैक्चर एवं लॉजिस्टिक हब बनाने पर जोर दिया।              सोशल पॉलिसीस्पेशलिस्ट सोमेन बागची ने चाइल्ड बजट में चिल्ड्रन पर इनवेस्टमेंट एवं केयर इडस्ट्रीपर अपने विचार व्यक्त किये।              सलाहकार नीति आयोग राजीव ठाकुर ने कृषि उद्योग एवं टेक्सटाइल एवं ऑटोमोबाइलस पर अपने सुझाव दिये।              चार्टर्ड एकाउंटेंट नवनीत गर्ग ने जीएसटी एवं डाटा सेंटर पर अपने सुझाव दिया।              फिल्म अभिनेता राजीव वर्मा ने कहा कि कला व्यक्तिव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने मांग की कि सभागृहों में किराया कम करने, मनोरंजन कर न लगाने एवं नाटय आकादमी में सीटों की सीमा बढा़ने और नाट्य गृहों का निर्माण मध्यप्रदेश में किया जाना चाहिए।              नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी मेनेजमेंट प्रो. प्रताप जैना ने कहा कि मध्यप्रदेश ने जीएसडीपी में बहुत अच्छा कार्य किया है। उन्होंने रेवन्यू सरप्लस होने पर खुशी जताई है। पूंजीगत व्यय पर मध्यप्रदेश की सराहना की।              संयोजक एसएलबीसी एवं महाप्रबंधक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया धीरज गोयल ने कहा प्रदेश सरकार आगामी बजट में वित्तीय अनुशासन बनाये रखते हुए समावेशी और सतत विकास को प्राथमिकता दी है।              भारतीय वन प्रबंधन संस्थान प्रो. योगेश दुबे ने वन, वन्यजीव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन को प्राथमिकता देने की बात कही।              नेशनल इंस्टिट्यूट आफ फाईनेंशियल मेनेजमेंट बृजेश कुमार ने विकसित भारत 2047 के लिये प्रति व्यक्ति आय समाजिक समरसता, तकनीकी विकास, पर्यावरण स्थिरता एवं ग्लोबल प्रजेंश पर अपने सुझाव दिये।              निकोर फाउंडेशन मिताली निकोर ने जेंडर बजट में महिलाओं को क्रियेटर के रूप में बनाना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार ऐसे स्कीम डिजाइन करें जिसमें महिलाएँ अपने विचार एवं लाभ ले सकें। उन्होंने केयर इकनॉमी पर भी सुझाव दिया।              कृषि में नवाचार नरसिंहपुर ड्रोन आचार्य भक्तराज ने सुझाव दिया कि कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा बाउचर से किसानों को प्रमोट किया जाए एवं स्थानीय विशेषज्ञों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने दलहन खेती में ड्रोन की भूमिका पर  भक्तराज की सराहना भी की थी।              संचालक बजट राजीव रंजन मीना ने उप मुख्यमंत्री देवड़ा सहित आमंत्रित विषय विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके बहुमूल्य सुझावों को बजट में शामिल करने का परीक्षण करेगी। इस अवसर पर वित्त विभाग एवं वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

दतिया में टीकाकरण के बाद बड़ा हादसा: एक बच्चे की मौत, तीन अस्पताल में भर्ती

दतिया दुरसड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ककरऊआ में शुक्रवार को हुए टीकाकरण के दौरान वैक्सीन लगाए जाने के बाद डेढ़ माह के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद गांव में हड़कंप और आक्रोश का माहौल है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में वैक्सीन लगाई गई जानकारी के अनुसार शुक्रवार को गांव में आशा कार्यकर्ता द्वारा नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को वैक्सीन लगाई गई थी। टीकाकरण के कुछ समय बाद एक डेढ़ माह के बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। वहीं तीन अन्य बच्चों में भी अस्वस्थता के लक्षण सामने आए, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल दतिया रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। शिकायत लेकर कलेक्टर के बंगले पर पहुंचे लोग घटना से आक्रोशित ग्रामीण बड़ी संख्या में शिकायत लेकर दतिया कलेक्टर के बंगले पहुंचे। ग्रामीणों ने टीकाकरण में लापरवाही और स्वास्थ्य अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। जांच के आदेश ग्रामीणों की शिकायत पर कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि मामले में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंचकर जानकारी जुटा रही है और टीकाकरण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं की जांच कर रही है। वहीं जिला अस्पताल में भर्ती बच्चों की हालत पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।

मध्य प्रदेश में शीत लहर का असर: 20 जिलों में घना कोहरा, ट्रेन और फ्लाइट सेवाएं बाधित

भोपाल मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से में घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। ग्वालियर-चंबल, रीवा, सागर संभाग सहित करीब 20 जिलों में कोहरा छाया हुआ है, जहां कई जगहों पर विजिबिलिटी मात्र 50 मीटर तक रह गई है। ठंड भी बढ़ गई है और कई जिलों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने ग्वालियर, भिंड, मुरैना सहित कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि जबलपुर, कटनी, शहडोल में येलो अलर्ट है। सुबह 10 बजे तक कोहरे के छाए रहने की संभावना जताई गई है। कोहरे का असर सुबह और देर रात सबसे ज्यादा रहता है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो रहा है। प्रभावित जिले और अलर्ट     ऑरेंज अलर्ट: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर आदि।     येलो अलर्ट: जबलपुर, कटनी, शहडोल, सिंगरौली आदि। कुल 20 जिलों में कोहरा और ठंड का असर ज्यादा है। ट्रेन सेवाओं पर असर घने कोहरे के कारण उत्तर भारत से आने वाली कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं। शताब्दी एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, पंजाब मेल समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनें प्रभावित हैं। देरी 30 मिनट से लेकर 8 घंटे तक दर्ज की गई है। दिल्ली से भोपाल, ग्वालियर और इंदौर आने वाली ट्रेनें सबसे ज्यादा लेट हैं। फ्लाइट्स प्रभावित इंदौर से दिल्ली और मुंबई की उड़ानें कोहरे के कारण प्रभावित हो रही हैं। कई फ्लाइट्स देरी से उड़ान भर रही हैं या रद्द हो रही हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरलाइंस से संपर्क कर लेटेस्ट अपडेट लें।

मध्यप्रदेश पुलिस की मानवीय पहल, विगत एक सप्ताह में 19 बिछड़े बच्चों को सकुशल परिजनों से मिलाया

पुलिस की सक्रियता से मासूमों के चेहरों पर लौटी मुस्कान भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस ने गुमशुदा व बिछड़े बच्चों की दस्तयाबी के विशेष अभियान में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। विगत एक सप्ताह में पुलिस ने प्रदेश के मंदसौर, भोपाल, छतरपुर, उज्जैन, झाबुआ और कटनी जिलों से कुल 19बच्चों को खोजकर उनके परिजनों से मिलाया है। पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने कई परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है। मंदसौर पुलिस की बड़ी सफलता जिले के जीवागंज क्षेत्र से 14 दिसंबर को एक वर्षीय बालक के अपहरण की घटना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मात्र 48 घंटों में बालक को राजस्थान के नागौर जिले (मेड़ता शहर) से सकुशल बरामद किया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। भोपाल में चार घंटे में मिली नाबालिग राजधानी भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र से लापता हुई नाबालिग बालिका को पुलिस ने विशेष टीम गठित कर मात्र चार घंटे में ढूंढ निकाला। सार्वजनिक स्थलों पर सघन तलाशी अभियान के बाद बालिका को हर्षवर्धन नगर पार्क से सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया गया। छतरपुर मेले में बिछड़े 13 बच्चों को मिलाया जिले के जुझारनगर थाना क्षेत्र में वैदेही बाबा मंदिर परिसर में आयोजित विशालमेले के दौरान 13 बालक-बालिकाएं अपने परिजनों से बिछड़ गए थे। पुलिस सहायताकेंद्र की सक्रिय टीम ने लगातार गश्त और लाउडस्पीकर अनाउंसमेंट के माध्यम से सभी बच्चों को सुरक्षित उनके माता-पिता से मिलाया। अन्य जिलों में भी दिखाई सजगता उज्जैन के माधवनगर थाना पुलिस ने रात के समय लापता हुए सात वर्षीय बालक को डेढ़ घंटे की कार्रवाई में सुरक्षित बरामद किया। झाबुआ जिले के थांदला थाना क्षेत्र में पुलिस ने नवापाड़ा से लापता दो मासूम बच्चों को त्वरित समन्वय से मछली माता रोड से खोज निकाला। इसी प्रकार कटनी जिले में एन.के.जे. थाना पुलिस ने आधुनिक CCTV सर्विलांस के जरिए छह घंटे में गुमशुदा बालक का पता लगाकर उसे उसके माता-पिता के सुपुर्द किया। इन कार्यवाहियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मानवीय संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता और त्वरित समन्वय के साथ कार्य कर रही है। अपहरण जैसी संगीन घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और बिछड़े बच्चों को घर तक पहुँचाना पुलिस की सजगता और प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।  

त्रिपुरा पर्यटन विकास निगम का मध्यप्रदेश अध्ययन दौरा

ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे मॉडल और फिल्म टूरिज्म को विकसित करने प्राप्त किया मार्गदर्शन मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा भोपाल मध्यप्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे पर्यटन ढांचे, बढ़ती पर्यटक संख्या और नवाचार आधारित पर्यटन विकास मॉडल देशभर में आकर्षण का केंद्र बन रहा है। इसी क्रम में त्रिपुरा अर्बन एंड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (TUTDP) के अंतर्गत त्रिपुरा टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TTDCL) का प्रतिनिधिमंडल आज मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और पर्यटन भवन पहुंचा। निगम के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. से त्रिपुरा टूरिज्म के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रशांत बादल नेगी ने विस्तृत चर्चा की। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और त्रिपुरा में पर्यटन के विकास हेतु हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान-साझाकरण आधारित ऐसे अध्ययन दौरों से राज्यों के बीच पर्यटन विकास की नई संभावनाएँ और साझेदारी मजबूत होती है। त्रिपुरा टूरिज्म के प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के पर्यटन मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया। प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश की ग्रामीण पर्यटन मॉडल, होमस्टे नीति, फिल्म टूरिज्म पॉलिसी, तथा सेफ एंड सस्टेनेबल टूरिज्म जैसे नवाचारों में विशेष रुचि दिखाई और त्रिपुरा में विकसित करने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया। श्री नेगी ने बताया कि जिस प्रकार मध्य प्रदेश में महाकाल लोक के विकास के बाद धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, उसी प्रकार त्रिपुरा में भी 51 शक्तिपीठों में से एक ‘मालाबाड़ी शक्तिपीठ’ (त्रिपुरेश्वरी) के विकास का कार्य प्राथमिकता पर लिया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर उत्तम पाल, एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर सुनील पोद्दार, जूनियर इंजीनियर सुनंदा पॉल, जूनियर इंजीनियर  झुतन दास, जूनियर इंजीनियर  देबब्रत दास, डिप्टी प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तन्मय दाश, तथा ऑफिस मैनेजर-कम-अकाउंटेंट कुंतल भौमिक शामिल रहे। मध्यप्रदेश की ग्रामीण पर्यटन पहल, होमस्टे ईकोसिस्टम, सरल शूटिंग अनुमति व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी मॉडल से प्रभावित प्रतिनिधिमंडल ने इसे त्रिपुरा में लागू करने की इच्छा व्यक्त की। यह दौरा दोनों राज्यों के बीच पर्यटन क्षेत्र में सहयोग और सतत पर्यटन विकास के नए अवसरों को गति देगा। साझा की नवाचारों की जानकारी प्रतिनिधिमंडल ने ‘पर्यटन भवन’ पहुंचकर मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की प्रशासनिक संरचना एवं निगम द्वारा किए जा रहे नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पर्यटकों के लिए जंगल भ्रमण हेतु ट्रेक्स क्रूजर एवं कैंटर बसों के संचालन, भोपाल स्थित बोट क्लब में 20 शिकारा बोट, चप्पू बोट तथा 5 नई वॉटर साइकिल के संचालन के बारे में अवगत कराया। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश में निगम द्वारा संचालित होटल, रिसॉर्ट, बोट क्लब, नए होटल परियोजनाओं एवं हाल ही में निर्मित उज्जैन के हेरिटेज होटल ‘सम्राट विक्रमादित्य’, शहडोल स्थित ‘सरसी आइलैंड रिसॉर्ट’ तथा पचमढ़ी में पूर्णत: महिलाओं द्वारा संचालित प्रदेश के एकमात्र होटल अमलतास के संचालन, के साथ नव श्रृंगारित ‘होटल नीलांबर स्काई लाइन’ की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, माइस (MICE) टूरिज्म के अंतर्गत भोपाल स्थित ‘कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर’ एवं खजुराहो स्थित ‘महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर’ के संचालन तथा इनमें आयोजित होने वाले वृहद आयोजनों के बारे में भी विस्तार से बताया।

मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 17 दिसंबर को, ‘विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के विज़न पर चर्चा

विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के विज़न पर मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसम्बर को राज्यपाल पटेल करेंगे विधानसभा की सात दशक की यात्रा एवं मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की दो वर्ष की ऐतिहासिक उपलब्ध‍ियों पर विधान सभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसम्बर को आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर विधानसभा में मध्यप्रदेश विधानसभा की 7 दशक की यात्रा एवं मध्‍यप्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यों पर केन्द्रित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, जिसका शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि 17 दिसंबर का दिन मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में महत्वपूर्ण है। इसी दिन मध्यप्रदेश विधानसभा की प्रथम बैठक हुई थी। इस विशेष सत्र में सभी सदस्य विकसित मध्यप्रदेश के विजन को धरातल पर उतारने के लिए क्या कदम उठाना चाहिए इस पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। तोमर ने कहा कि आज हमारा प्रदेश विकासशील राज्यों में गिना जाता है। हम सक्षम हैं, अनेक क्षेत्रों में प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। लेकिन आने वाले कल में हम विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का लक्ष्य रखते हैं। इसलिए हमारी पीढ़ी का यह दायित्व है कि इस दिशा में हम चिंतन भी करें और सटीक कदम भी उठाएं। राज्‍य पुर्नगठन आयोग की अनुशंसा पर 1 नवम्‍बर, 1956 को मध्‍यप्रदेश राज्‍य का गठन हुआ था। मध्‍यप्रदेश विधान सभा के प्रथम सत्र की अवधि 17 दिसम्‍बर, 1956 से 17 जनवरी, 1957 थी, सत्र की पहली बैठक 17 दिसंबर 1956 को आहूत हुई थी। तब से अब तक 16 विधानसभा गठित हो चुकी हैं। वर्तमान में 16 वीं विधानसभा कार्यरत है। प्रदेश के विकास एवं आमजन के कल्याण में मध्यप्रदेश विधानसभा एवं सदस्यों का सदैव सक्रिय योगदान एवं भूमिका रही है। प्रथम विधानसभा से अब तक विधानसभा के 19 अध्यक्ष आसंदी पर रहे हैं। 17 दिसंबर 2025 को आहूत एक दिवसीय विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण राष्ट्र “विकसित भारत” के संकल्प की सिद्धी की ओर अग्रसर है। विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश आवश्यक है और इसमें विधायिका की अपनी भूमिका और दायित्व है। प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के इसी विज़न पर सदन में चर्चा होगी। 17 दिसंबर को प्रातः 10.00 बजे राज्यपाल मंगुभाई पटेल विधानसभा परिसर में विधानसभा की 7 दशक की यात्रा पर चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। इस ऐतिहासिक चित्र प्रदर्शनी मे 136 चित्र लगाये गये है। इसमें कुछ दुर्लभ चित्र भी सम्मिलित हैं। ये चित्र प्रथम विधानसभा से वर्तमान सोलहवीं विधानसभा के विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों के हैं। यह प्रदर्शनी विशेषकर विद्यार्थियों के साथ विशिष्‍ष्‍ट जनों एवं आम नागारिकों के लिए भी खुली रहेगी, 18 से 25 दिसंबर के बीच विधानसभा में प्रवेश पत्र बनवा कर प्रदर्शनी देख सकते हैं। प्रवेश पत्र के लिए आधार कार्ड/विद्यालय/महाविद्यालय का परिचय पत्र भी लाना आवश्यक रहेगा। इस प्रदर्शनी के साथ मध्यप्रदेश सरकार के विकास कार्यों के भी छाया चित्र लगाए गए है, जिसमें प्रदेश सरकार के 2 वर्ष के कामकाज का लेखा−जोखा रखा गया है। यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी मध्यप्रदेश के 5 हजार से अधिक जनप्रतिनिधियों के योगदान को भी याद कराती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मंत्रिगण, सदस्यगण, पूर्व विधायक एवं अन्य गणमान्य जन उपास्थित रहेंगे।  

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला 7 दिसम्बर को

  राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह होंगे शामिल भोपाल मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, उससे जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श के लिये दिनांक 7 दिसंबर, 2025 को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। मुख्य अतिथि राज्यपाल मंगुभाई पटेल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अध्यक्षता करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार तथा स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा है। आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने बताया कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, संरचनात्मक सुधार, अकादमिक उन्नयन और संस्थागत तत्परता को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। कार्यशाला का उद्देश्य नीति की गहन समझ विकसित करना, क्रियान्वयन की प्रगति का मूल्यांकन करना, संस्थागत चुनौतियों की पहचान करना तथा पाठ्यक्रम सरलीकरण, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, शोध एवं नवाचार, और उद्योग-अकादमिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। कार्यशाला में होंगे 5 सत्र कार्यशाला में कुल पांच सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें निम्न विषयों पर शिक्षाविदों और विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श होगा। 1. एनईपी 2020 के माध्यम से उच्च शिक्षा का रूपांतरण, संरचनात्मक सुधार एवं संस्थागत तत्परता 2. पाठ्यक्रम एवं शिक्षण विधि में सुधार, लचीलापन, कौशल एकीकरण एवं परिणाम-आधारित शिक्षा 3. मध्यप्रदेश में विदेशी विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना, नीतिगत प्रावधान, संभावनाएं एवं गुणवत्ता संवर्धन 4. विद्यालयीन शिक्षा में एनईपी 2020 के तहत परिवर्तन 5. विद्यालयों में एआई और कौशल निर्माण की भूमिका इन सत्रों के माध्यम से प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक व्यावहारिक एवं क्रियाशील रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे वे अपनी शैक्षणिक, प्रशासनिक और डिजिटल संरचनाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सुदृढ़ कर सकें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है, जिसमें बहुविषयी शिक्षण, लचीलापन, कौशल-आधारित शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, शोध संवर्धन और वैश्वीकरण को विशेष महत्व दिया गया है। आयुक्त स्कूल शिक्षा श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का सफल क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। सांदीपनि विद्यालय की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा मूल्य आधारित शिक्षा और तकनीक सक्षम अधिगम के समन्वय का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत करेगा। स्कूल शिक्षा विभाग NEP-2020 के लक्ष्यों को संयुक्त रूप से प्राप्त करने की दिशा में शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, मूल्यांकन सुधार और नवाचार-आधारित अधिगम को बढ़ावा दे रहे हैं।  

मतदाता सरलता से दर्ज कर सकते हैं विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित शिकायतें: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश कार्यालय ने जानकारी दी है कि मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी अपनी सभी शिकायतें सरल, पारदर्शी और प्रभावी माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं, जिनके समयबद्ध समाधान की व्यवस्था राज्यभर में सुनिश्चित की गई है। फॉर्म वितरण, डाटा सत्यापन, बीएलओ संपर्क, मतदाता सूची त्रुटियों और अन्य निर्वाचन कार्यों से संबंधित शिकायतों के लिए प्रदेश में व्यापक शिकायत निवारण प्रणाली संचालित है। मतदाता अपनी शिकायतें राष्ट्रीय मतदाता हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करके दर्ज करा सकते हैं, जो एक टोल-फ्री सेवा है। शिकायत दर्ज होते ही कॉल करने वाले को एक टोकन आईडी प्रदान की जाती है, जिसके माध्यम से वह बाद में अपनी शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकता है। ऑनलाइन सुविधा के रूप में राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (एनवीएसपी) में भी शिकायत पंजीकृत की जा सकती है, जहाँ पोर्टल के ‘कम्प्लेंट’ सेक्शन में जाकर शिकायत का प्रकार चुनने, आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करने और सबमिट करने पर यह शिकायत सीधे जिला या राज्य निर्वाचन कार्यालय तक पहुँच जाती है और उसका निवारण तय समय-सीमा में किया जाता है। प्रत्येक जिले में कलेक्टर (जिला निर्वाचन अधिकारी), ईआरओ, एईआरओ और निर्वाचन शाखा के माध्यम से भी मतदाता लिखित शिकायतें जमा कर सकते हैं। स्कैन की गई शिकायतें जिले के अधिकृत ईमेल पते पर भेजने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मतदाता अपनी शिकायतें मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश या भारत निर्वाचन आयोग को ईमेल के माध्यम से भी भेज सकते हैं, जिन पर नियमानुसार संज्ञान लिया जाता है। मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े किसी भी विषय जैसे एनुमरेशन फॉर्म न मिलना, जानकारी का गलत संकलन, बीएलओ की अनुपस्थिति या व्यवहार संबंधी शिकायतें, मतदाता सूची में नाम जुड़ने, कटने अथवा स्थानांतरण से संबंधित त्रुटियाँ, पोलिंग बूथ की समस्याएँ, दिव्यांगजन सुविधाओं में कमी संबंधी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के समाधान के लिए राज्य में स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित है। सामान्य शिकायतों का निवारण सात से पन्द्रह दिनों के भीतर किया जाता है, जबकि तात्कालिक या महत्वपूर्ण शिकायतों पर एक से तीन दिनों के भीतर कार्रवाई की जाती है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि “हमारा उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और उत्तरदायी बनाना है। प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और समाधान की पारदर्शिता एवं गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।“