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महाकाल की भक्ति में सुविधा: महाशिवरात्रि पर चलेंगी तीन मेला स्पेशल ट्रेनें

उज्जैन  महाशिवरात्रि महापर्व पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और सीहोर (कुबेरेश्वर धाम) जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत दी है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए उज्जैन से भोपाल और संत हिरदाराम नगर के मध्य तीन जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें (Special Mela Trains) चलाने का निर्णय लिया है। मंडल रेल प्रवक्ता मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें 13 से 23 फरवरी तक संचालित की जाएंगी। ट्रेनों का शेड्यूल -1. उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09305/09306) संचालनः 13 से 22 फरवरी तक प्रतिदिन । समयः उज्जैन से सुबह 09:00 बजे चलकर दोपहर 13:30 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में वहां से दोपहर 14:30 बजे चलकर शाम 19:30 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर।     उज्जैन भोपाल उज्जैन (09307/09308) संचालनः 13 से 23 फरवरी तक प्रतिदिन। समयः उज्जैन से रात 21:00 बजे चलकर रात 02:10 बजे भोपाल पहुंचेगी। वापसी में भोपाल से सुबह 03:10 बजे चलकर सुबह 08:00 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः उपरोक्त स्टेशनों के साथ संत हिरदाराम नगर पर भी ठहराव।     उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09313/09314) – संचालनः 13-22 फरवरी तक रोज समयः उज्जैन से शाम 16:00 बजे चलकर रात 21:40 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में रात 22:30 बजे चलकर अगले दिन रात 2 बजे उज्जैन पहुंचेगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर। कोच और सुविधा रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन मेला स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए सामान्य और स्लीपर श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। इससे कम बजट में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी। 

महाकाल की नगरी में 9 भव्य द्वार, सनातन गौरव की शुरुआत, सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी ‘उज्जैन’, अपने प्रवेश मार्गों पर भव्य और प्रतीकात्मक पहचान गढ़ने जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख रुपये से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है। यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल–कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है। योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार निर्मित किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और ट्रैफिक सुव्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामयी बने। स्थापत्य में दिखेगा काल और संस्कृति का संवाद नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी–सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे। रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे। यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। जानिये, किस द्वार के लिए कितना बजट     अमृत द्वार 9.68 करोड़     पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़     गज द्वार 8.51 करोड़     कालगणना द्वार 11.07 करोड़     उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़     सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़     त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़     विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़     डमरू द्वार 13.29 करोड़ सदियों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी रही है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न केवल सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की यह योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने का प्रयास है। नामों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता     अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।     पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।     गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।     कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।     उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।     सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।     त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।     विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।     डमरू द्वार : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत। (नोट : इन नौ भव्य प्रवेश द्वारों के साथ उज्जैन न केवल भौतिक रूप से भव्य दिखेगा, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी आधुनिक स्वरूप में सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।) 

शिवनवरात्रि महोत्सव की शुरुआत महाकाल में कोटेश्वर भगवान के पूजन से, पहले दिन वस्त्र अर्पित कर किया जाएगा श्रृंगार

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवनवरात्रि का पर्व शुक्रवार से सुबह से शुरू हुआ। कोटेश्वर महादेव के पूजन के साथ विशेष अनुष्ठान की शुरुआत हुई। गर्भगृह में पुजारी घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में 11 ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल का पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रूद्राभिषेक होगा। इस बार दिन का महाशिवनवरात्रि पर्व महाकाल मंदिर में मनाया जाएगा, मान्यता है कि जिस तरह माता की आराधना के 9 दिनों तक नवरात्री पर्व मनाया जाता है ठीक उसी तरह देश भर में सिर्फ उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही महाशिवनवरात्रि पर्व मनाए जाने की परम्परा निभाई जाती है। सुबह कोटेश्वर भगवान का पूजन अर्चन होगा। शाम को भगवान को सर्वप्रथम चंदन का उबटन लगाकर स्नान कराया गया। जलधारी पर हल्दी अर्पित की गई। दोपहर एक बजे भोग आरती के बाद अपराह्न तीन बजे पंचामृत पूजन के पश्चात भगवान का भांग से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भगवान को लाल, गुलाबी और पीले रंग के नए वस्त्र अर्पित कर शृंगारित। मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला और छत्र से सजाया जाएगा। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में 10 दिन तक शिवनवरात्रि महा उत्सव मनाया जायेगा। यह विशेष श्रृंगार 6 फरवरी से 15 फरवरी तक शिवनवरात्रि के सभी नौ दिनों तक चलेगा। प्रतिदिन भक्तों को भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।भगवान महाकाल के मंदिर में उत्सव का प्रारंभ कोटेश्वर महादेव के पूजन से होगा। शिवनवरात्रि पर 9 दिन यह शृंगार     6 फरवरी : चंदन, भांग शृंगार।     7 फरवरी :नवीन वस्त्र।     8 फरवरी : शेषनाग शृंगार।     9 फरवरी : घटाटोप शृंगार।     10 फरवरी : छबीना शृंगार।     11 फरवरी: होलकर शृंगार।     12 फरवरी : मनमहेश शृंगार।     13 फरवरी : उमा महेश शृंगार।     14 फरवरी : शिव तांडव शृंगार।     15 फरवरी: सप्तधान का मुखौटा। महाशिवरात्रि पर्व के लिए दर्शन व्यवस्था तय,10 लाख भक्त आएंगे महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे।

धार्मिक कार्यक्रम में अलका लांबा ने कही बात, काम से बनती है असली पहचान

उज्जैन  अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचीं। उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। अलका लांबा ने महाकाल मंदिर में पहले नंदी हाल और फिर देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने नंदी मंडपम में बैठकर ध्यान लगाया। धार्मिक वातावरण के बीच उनका दौरा आध्यात्मिक दिखा, लेकिन बाहर निकलते ही सुर सियासी हो गए। मीडिया से चर्चा में लांबा ने नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाम में “भगवान” जोड़ लेना काफी नहीं, असली पहचान काम से होती है। उनके मुताबिक, आज प्रदेश में कुछ नेताओं के काम समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाले नजर आ रहे हैं। उन्होंने भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का उदाहरण देते हुए कहा कि शिव ने सृष्टि बचाने के लिए विष पिया था, लेकिन आज के कुछ सत्ताधारी समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। उनका आरोप था कि इस तरह की भाषा और राजनीति लोगों के बीच नफरत बढ़ा रही है। लांबा ने यात्रा के दौरान देखी एक घटना का जिक्र करते हुए और गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इंदौर से उज्जैन आते समय उन्होंने एक ऑटो पर ऐसा प्रचार देखा जिसमें एक ऐसे दोषी अपराधी का महिमामंडन किया गया था, जिसे नाबालिग बेटियों से जुड़े जघन्य अपराधों में सजा हो चुकी है। इसे उन्होंने बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि अपराधियों को हीरो बनाकर पेश करना महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरनाक सोच है। महिला कांग्रेस की नेता ने साफ कहा कि उनकी पार्टी ऐसी मानसिकता के खिलाफ लगातार आवाज उठाएगी और समाज में अपराधियों की छवि चमकाने की कोशिशों का विरोध करेगी। धार्मिक यात्रा के बहाने शुरू हुआ यह दौरा, आखिरकार प्रदेश की सियासत में तीखा संदेश छोड़ गया।  

महाकाल मंदिर हुआ डिजिटल, दर्शन, भस्म आरती और दान सभी सेवाएं अब एक वेबसाइट पर उपलब्ध

उज्जैन  देशभर में धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर भी इससे अछूता नहीं है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भीड़, लंबी कतारें, जानकारी की कमी और बुकिंग को लेकर भ्रम ये सभी समस्याएं लंबे समय से श्रद्धालुओं के सामने रही हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। मंदिर की नई आधिकारिक वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in लॉन्च कर दी गई है। इस एक प्लेटफॉर्म के जरिए अब दर्शन, पूजन, भस्म आरती, अतिथि निवास बुकिंग और ऑनलाइन दान जैसी सभी सेवाएं उपलब्ध होंगी। यह पहल न सिर्फ श्रद्धालुओं के अनुभव को आसान बनाएगी, बल्कि मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ाएगी। नई सरकारी वेबसाइट से क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी महाकाल मंदिर की इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि श्रद्धालुओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म या दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एक ही वेबसाइट पर सभी जरूरी सेवाएं एक जगह मिलेंगी। इस वेबसाइट पर होम पेज पर जाते ही श्रद्धालुओं को साफ तौर पर ये विकल्प दिखाई देंगे शीघ्र दर्शन, भस्म आरती बुकिंग, विशेष पूजन, अतिथि निवास बुकिंग, ऑनलाइन दान, सरकारी डोमेन gov.in पर बनी यह वेबसाइट साइबर सुरक्षा के लिहाज से भी मजबूत मानी जा रही है। इससे फर्जी वेबसाइट और ठगी की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी। शीघ्र दर्शन बुकिंग का आसान प्रोसेस महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन की मांग सबसे ज्यादा रहती है। नई वेबसाइट पर इसका प्रोसेस बेहद सरल रखा गया है, ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। शीघ्र दर्शन बुक करने के लिए श्रद्धालु को सबसे पहले वेबसाइट के होम पेज पर जाना होगा। वहां शीघ्र दर्शन के विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर दर्ज कर सबमिट करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी को वेरीफाई करने के बाद श्रद्धालु अपनी जरूरी जानकारी भरकर उपलब्ध स्लॉट में से अपना समय चुन सकते हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही बुकिंग कन्फर्म हो जाती है। श्रद्धालु को न तो लाइन में लगने की चिंता रहेगी और न ही किसी तरह की अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा। भस्म आरती और पूजन बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसे देखने और इसमें शामिल होने की इच्छा हर श्रद्धालु की होती है, लेकिन सीमित संख्या के कारण यह हमेशा आसान नहीं होता। नई वेबसाइट के जरिए भस्म आरती बुकिंग को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बना दिया गया है। श्रद्धालु अब पहले से उपलब्ध तारीख और स्लॉट देखकर बुकिंग कर सकते हैं। इसी तरह विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी भी वेबसाइट पर साफ शब्दों में दी गई है। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि मंदिर प्रशासन को भी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलेगी। भक्त निवास परियोजना: 672 करोड़ की बड़ी योजना महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की सुविधा हमेशा एक बड़ा सवाल रही है। इसे ध्यान में रखते हुए श्री महाकालेश्वर भक्त निवास परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, यह परियोजना लगभग 672 करोड़ रुपये की लागत से 18.65 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही है। इस विशाल परियोजना में करीब 3,000 कमरे, भोजनालय, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। नई वेबसाइट के जरिए श्रद्धालु न सिर्फ अतिथि निवास की बुकिंग कर सकेंगे, बल्कि इस परियोजना के लिए दान भी दे सकेंगे। जो लोग कमरों के निर्माण या अन्य सुविधाओं में सहयोग करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह पोर्टल एक आसान माध्यम बनेगा। दान और CSR गतिविधियों के लिए पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म महाकाल मंदिर में दान देने की परंपरा सदियों पुरानी है। अब इसे डिजिटल रूप देकर और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालु ऑनलाइन दान कर सकेंगे और यह जान सकेंगे कि उनका योगदान किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा। CSR गतिविधियों के लिए भी यह पोर्टल एक नया और भरोसेमंद डिजिटल चैनल साबित होगा। इससे विकास कार्यों को गति मिलेगी और दानदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि डिजिटल दान व्यवस्था से हर रुपये का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

कोहली ने इंदौर वनडे से पहले महाकाल दरबार में की पूजा, कुलदीप के साथ भस्म आरती में शरीक हुए

 उज्जैन  भारत और न्यूजीलैंड के बीच 3 वनडे मैचों की सीरीज का आख‍िरी मुकाबला इंदौर में रव‍िवार को होना है.फ‍िलहाल दोनों ही टीमें वनडे सीरीज में 1-1 से बराबरी पर हैं. इंदौर में होने वाले इस मुकाबले से पहले भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर,बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक उज्जैन के महाकाल मंद‍िर पहुंचे. केएल राहुल और टीम इंड‍िया के अन्य सदस्यों ने भी आशीर्वाद लिया. ताजा क्रम में शन‍िवार सुबह विराट कोहली और कुदीप यादव महाकाल मंद‍िर पहुंचे. उनके साथ फील्ड‍िंंग कोच टी द‍िलीप भी नजर आए.  विराट कोहली और कुलदीप यादव भगवान महाकाल में गहरी आस्था रखते हैं.इसीलिए वे समय मिलते ही बाबा महाकाल के दर्शन लिए उज्जैन पहुंच जाते हैं. शनिवार सुबह विराट कोहली और कुलदीप यादव भस्म आरती में सम्मिलित हुए और बाबा महाकाल का पूजन कर आशीर्वाद लिया. बाबा महाकाल के दर्शन कर विधिवत पूजन किया. भगवान शिव की आराधना की. उल्लेखनीय है कि हाल ही में खेले जा रहे वनडे सीरीज में विराट कोहली और कुलदीप यादव भी टीम में शामिल हैं.  ध्यान रहे भारत और न्यूजीलैंड के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज का आख‍िरी मैच 18 जनवरी को इंदौर में होने वाला है.मैच से पहले तमाम खिलाड़ी इंदौर पहुंच गए हैं.इन्हीं में से कुछ खिलाड़ी अपने व्यस्त शेड्यूल में से समय निकाल कर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं.शनिवार सुबह भस्म आरती में कुलदीप यादव और विराट कोहली बाबा महाकाल के मंदिर पहुंचे और लगभग 2 घंटे तक भस्म आरती में बैठकर बाबा महाकाल के दर्शन किए.  विराट कोहली के लिए यह दौरा और कल का मैच व्यक्तिगत रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इंदौर के होलकर स्टेडियम में कोहली का पिछला रिकॉर्ड बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहा है, क्योंकि यहां खेली गई चार पारियों में उनके बल्ले से केवल 99 रन निकले हैं और वह एक भी अर्धशतक नहीं बना पाए हैं। ऐसे में कोहली और उनके फैंस यही उम्मीद कर रहे होंगे कि महाकाल के आशीर्वाद से न केवल उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन सुधरे, बल्कि टीम इंडिया इस मुकाबले को जीतकर सीरीज पर अपना कब्जा जमाए।  1-1 की बराबरी पर है सीरीज शुभमन गिल की कप्तानी में यह घर पर पहली वनडे सीरीज है जिसे वह जीतना चाहेंगे। फिलहाल सीरीज 1-1 की बराबरी पर है। भारत ने पहला मुकाबला 4 विकेट से जीता था, लेकिन दूसरे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने वापसी करते हुए 7 विकेट से जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही उसने 1-1 से बराबरी कर ली थी। अब दोनों टीमों के पास सीरीज जीतने का मौका है और इसके लिए विराट कोहली को अपना बेस्ट देना होगा। दूसरे मुकाबले में वह चूक गए थे।  विराट संग सेल्फी लेने की होड़ दोनों क्रिकेटरों ने लगभग 2 घंटे तक मंदिर परिसर में समय बिताया। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने भस्म आरती का आनंद लिया और शिवजी का जाप किया। इस दौरान मंदिर में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मंदिर से बाहर निकलने के बाद विराट के साथ फोटों क्लिक कराने के लिए भारी भीड़ उमड़ गई। दोनों खिलाडियों संग फील्ड‍िंग कोच टी द‍िलीप भी नजर आए।  इंदौर में 18 जनवरी को आखिरी वनडे बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच 3 वनडे मैचों की सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला इंदौर 18 जनवरी, रविवार को होना है। फ‍िलहाल दोनों ही टीमें वनडे सीरीज में 1-1 से बराबरी पर है।  टीम इंडिया की कोशिश आखिरी मैच जीतकर सीरीज अपने नाम करने होगा।  महाकाल की फोटो भी कोहली ने की क्ल‍िक  महाकाल मद‍िर में दर्शन के दौरान कोहली ने फोटो भी क्ल‍िक की. इस दौरान कोहली मंद‍िर के मुख्य प्रांगड़ में नंदी के मूर्त‍ि के पास बैठे द‍िखे. उनके पीछे ही फील्ड‍िंग कोच टी द‍िलीप भी थे.  कुलदीप यादव ने कहा जय श्री महाकाल, वर्ल्ड कप में अच्छा करेंगे.  महाकाल मंद‍िर में पूजा करने के बाद कुलदीप यादव ने मीड‍िया से बात की और कहा कि दर्शन का बहुत अच्छा अनुभव रहा. कुलदीप यादव ने कहा- पूरी टीम आई थी, सुकून मिला, बस जिंदगी अच्छे से चलती रहे.महाकाल जी की कृपा रही तो आने वाले टी20 वर्ल्ड कप में भी टीम अच्छा करेगी. वहीं विराट कोहली और रोहित शर्मा को लेकर कुलदीप यादव ने कहा-दोनों ही गेम (क्रिकेट) के लीजेंड हैं और उनके होने से बहुत एनर्जी और सुकून मिलता है.कुलदीप ने इस दौरान यह भी कहा कि टीम के बाकी यंग ख‍िलाड़ी भी अच्छा कर रहे हैं. 

श्रीमहाकाल महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा से जोड़ने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

महाकाल महोत्सव का हुआ शुभारंभ श्रीमहाकाल महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा से जोड़ने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में हुआ महाकाल महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू मुख्यमंत्री ने महाकालेश्वर मंदिर की नवीन आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल का किया शुभारंभ 600 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले महाकालेश्वर भक्त निवास के दान एवं सीआरएस पोर्टल का शुभारंभ पार्श्व गायक शंकर महादेवन के भजनों की सुमधुर प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया महाकाल महोत्सव का शुभारंभ उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महाकाल महोत्सव से उज्जैन की सुंदरता को स्वर्ग के समान बना दिया है। आज की उज्जैन नगरी महाकवि कालिदास की रचनाओं की अवंतिका के समान हो गई है। सम्राट विक्रमादित्य  और राजा भोज के काल से अवंतिका नगरी न्याय और प्रशासनिक दक्षता की वाहक है। सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज और अवंतिका नगरी की अन्य महान विभूतियों और प्रेरक कहानियों को महाकाल महालोक में मूर्ति कला और दीवारों पर चित्रों के माध्यम से बड़ी सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। महाकाल की नगरी काल की नगरी है। महाकाल की कृपा से हमारी प्रत्येक सांस है और प्रेरणा से यह जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित है। प्रदेश ने धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर अपनी नवीन पहचान स्थापित की है । महाकाल महोत्सव  श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म  और प्रदेश  की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का माध्यम है। इससे श्रद्धालुओं को बाबा का आशीर्वाद भी मिलेगा, और उज्जैन की जानकारी भी मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मकर संक्रांति पर्व की पावन संध्या पर पूजन अर्चन कर महाकाल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर  प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल,राज्य सभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, सत्य नारायण जटिया,संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, रवि सोलंकी, नरेश शर्मा, श्रीराम तिवारी,रूप पमनानी  आदि जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग है ,दोनों ज्योतिर्लिंग की कनेक्टविटी सड़क ,वायु और रेल मार्ग से बढ़ाकर श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान की जा रही है। उज्जैन में तो शक्ति पीठ माता गढ़ कालिका भी है साथ ही यहाँ शिप्रा के किनारे गुरुद्वारा  है जहां गुरु नानक जी आए और उज्जैन का उल्लेख अपने पदों में किया है। उज्जैन की विविधता और समरसता निराली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सावन महोत्सव 2003 के बाद शुरू किया गया।  अब शिवरात्रि से लेकर गुड़ी पड़वा तक उज्जैन में मेला आयोजित हो रहे हैं। उज्जैन में आयोजित विविध कार्यक्रमों और मेलों के माध्यम से पर्यटनों  को इतिहास और संस्कृत से जोड़ रहे है और सभी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और ग्वालियर में आयोजित व्यापार मेले में वाहनों में कर की छूट भी सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है। इस परम्परा को ओर समृद्ध बनाकर अब भोपाल के साथ उज्जैन में भी 5 दिवसीय वन मेला दशहरा मैदान पर आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न वन उत्पाद नागरिक प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संगीत की समृद्ध परंपरा में डमरू सबसे पहला वाद्य यंत्र है। संगीत की समृद्ध परंपरा में अन्य यंत्र इसके बाद बने है। शंकर महादेवन द्वारा दी जाने वाली डमरू वाद्य यंत्र पर प्रस्तुति अद्भुत होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल्द ही जिले को इंदौर उज्जैन सिक्स लेन,  हरिफटक पुल सिक्स लेन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आदि की सौगात मिलेगी। साथ ही जिले में अन्य विकास के कार्य भी किए जा रहे है। जिले में 25 जनवरी को राहगीरी का आनंद उत्सव भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकालेश्वर मंदिर की नवीन आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in का शुभारंभ किया। साथ ही 600 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले महाकालेश्वर भक्त निवास के दानदाताओं के लिए वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/bhaktniwas का भी शुभारंभ किया। महाकाल महोत्सव में पार्श्व गायक शंकर महादेवन की आकर्षक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वीर भारत न्यास, विक्रमादित्य शोध पीठ तथा महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव 18 जनवरी 2026 (विक्रम संवत 2082) तक चलेगा।  

महाकाल की नगरी में 14-18 जनवरी तक होगा सांस्कृतिक समागम, शिव-भक्ति और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की मौजूदगी

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी में 14 से 18 जनवरी तक सांस्कृतिक समागम, शिव-भक्ति और वैश्विक कलाकारों के संगम का केंद्र बनेगी। श्रीमहाकाल महोत्सव देश और दुनिया में उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देगा और लोक एवं शास्त्रीय कला के बीच अनूठा संवाद स्थापित करेगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। पहले दिन पार्श्व गायक शंकर महादेवन (Singer Shankar Mahadevan) अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ प्रस्तुति देंगे। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि महाकाल की नगरी में आयोजित महोत्सव देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर उज्जैन को नई ऊंचाई देगा। महोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें शास्त्रीय और लोक, परंपरा और आधुनिकता, देशज और वैश्विक सभी धाराएं एक साथ प्रवाहित होंगी। महोत्सव में 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आने की संभावना है। सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के साथ उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, आंध्रप्रदेश के चंद्रबाबू नायडू, महाराष्ट्र के देवेन्द्र फडणवीस, गुजरात के भूपेन्द्र पटेल, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, झारखंड के हेमंत सोरेन और तमिलनाडु के एमके स्टालिन को आमंत्रित किया गया है।  अंतरराष्ट्रीय सहभागिता महोत्सव की विशेषता यह रहेगी कि इंडोनेशिया और श्रीलंका के नाट्य दल सहभागिता करेंगे। इससे भारत की प्राचीन सांस्कृतिक कड़ियों का पुनस्मरण होगा और यह सिद्ध होगा कि भारत की सभ्यता केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक भूभाग में सांस्कृतिक सेतु निर्मित किए हैं। संगीत और प्रस्तुति पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम् की त्रयी शिव-भक्ति और भारतीय संगीत की ऊंचाइयों को स्वर देगी। सोना महापात्रा की भावपूर्ण प्रस्तुति, द ग्रेट इंडियन क्वायर, विपिन अनेजा और श्रेयस शुक्ला जैसे कलाकार महोत्सव को समकालीन सृजन का सशक्त स्वर देंगे। लोक कला का महत्वपूर्ण आयाम तिवारी ने बताया कि महोत्सव का विशेष आयाम है जनजातीय लोक कला। प्रतिदिन उज्जैन के विभिन्न स्थलों से कला यात्राएं निकलेंगी, जो रंगों, वाद्यों और नृत्य की लय के साथ श्रीमहाकाल महालोक परिसर तक पहुंचेगी। यह केवल मार्ग की यात्रा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संचित परंपराओं को वर्तमान से जोड़ने का माध्यम होगी। महोत्सव वीर भारत न्यास, श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, संस्कृति संचालनालय, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, त्रिवेणी संग्रहालय, कृषि उद्योग विकास परिषद, उज्जैन विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और नगर निगम की सहभागिता में आयोजित किया जा रहा है।

सुविधाओं के कारण महाकाल दर्शन की संख्या बढ़ी, पांच जनवरी तक दस लाख श्रद्धालुओं की उम्मीद

उज्जैन  नए साल के प्रथम प्रभात में देवदर्शन की आस लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन, ओंकारेश्वर और नलखेड़ा पहुंच रहे हैं। दो ज्योतिर्लिंगों और मां बगलामुखी मंदिर में नव वर्ष के स्वागत की तैयारी नव्य-भव्य रूप में हो रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर प्रशासन ने प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर रखी है। भीड़ बढ़ने पर नंदी हाल में भी प्रवेश बंद किया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो नए साल के पहले दिन सामान्य श्रद्धालुओं के लिए शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था को भी स्थगित किया जा सकता है। ओंकारेश्वर और मां बगलामुखी मंदिर में भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। मालूम हो कि चार दिनों में साढ़े 8 लाख लोग भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। 5 जनवरी तक 10 लाख दर्शनार्थियों के आने का अनुमान है। श्रद्धालु चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से भक्त प्रवेश करेंगे। वाहन पार्किंग के लिए चार जगह कर्कराज, भील समाज की धर्मशाला, कार्तिक मेला ग्राउंड, हरिफाटक ब्रिज के नीचे व्यस्था की गई है। भीड़ बढ़ने पर वाहन पहले भी रोके जा सकते हैं। प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकाल मंदिर में साल 2025 में दर्शनार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड बना है। साल के आखिरी पखवाड़े में अब तक 15 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन कर लिए हैं। भक्तों को कम समय में सुविधा से भगवान के दर्शन कराए जा रहे हैं। देशभर से आने वाले दर्शनार्थी उपलब्ध सुविधा का लाभ रहे रहे हैं। 4 दिन में 84 हजार भक्तों ने 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट खरीदकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। इससे मंदिर समिति को 2 करोड़ 10 लाख रुपये की आय हुई है। इसके अलावा चार दिन में 2500 किलो लड्डू प्रसाद की बिक्री हुई है। इससे मंदिर समिति को 10 लाख रुपये से अधिक राशि मिली है। आधे घंटे में हुए दर्शन शनिवार, रविवार की तुलना में सोमवार को दर्शनार्थियों की संख्या कम रही। दर्शनार्थियों को 25 से 30 मिनट में भगवान महाकाल के दर्शन हुए। कम समय में सुविधा पूर्वक दर्शन से श्रद्धालु खुश नजर आए। मंदिर प्रशासन ने दर्शन की कतार में खड़े भक्तों के लिए पेजयल आदि के इंतजाम भी कर रखे हैं। बगलामुखी मंदिर प्रोटोकाल व्यवस्था एक सप्ताह के लिए बंद आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। नववर्ष पर संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष व तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने बताया कि एक सप्ताह के लिए प्रोटोकाल व्यवस्था बंद की है। एक सप्ताह बाद दर्शनार्थियों की संख्या की समीक्षा के बाद इसे लेकर निर्णय लिया जाएगा। ओंकारेश्वर मंदिर प्रोटोकाल दर्शन प्रतिबंधित     खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट द्वारा भीड़ नियंत्रण से लेकर मंदिर में सुचारु दर्शन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। नाव संचालन भी ठप रहेगा। दर्शन के लिए झूला पुल से प्रवेश बंद कर व्यवस्था को एकांगी कर दिया है। जेपी चौक पर बेरिकेडिंग कर दर्शनार्थियों की भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है। ये सभी बदलाव पांच जनवरी तक लागू रहेंगे। पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि पांच जनवरी तक ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। प्रोटोकाल के तहत दर्शन व्यवस्था को फिलहाल बंद किया गया है। विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पोर्टल पर ऑनलाइन निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।  

उज्जैन के महाकाल मंदिर में साल के आखिरी रविवार को पहुंचे डेढ़ लाख भक्त, सर्दियों में बढ़ी श्रद्धा

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में साल के आखिरी रविवार करीब डेढ़ लाख भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया गया। शनिवार को जिस सम्राट अशोक सेतु पर ताला लगा दिया गया था। रविवार को उसे 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट वाले दर्शनार्थियों के लिए खोला गया। महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक का निर्माण होने के बाद से सप्ताहंत में भक्तों की संख्या सर्वाधिक रहती आ रही है। इसका असर साल के आखिरी रविवार को भी नजर आया। देशभर से आए डेढ़ लाख से अधिक भक्त भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर पहुंचे। शनिवार से भक्तों का उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया था, जनदबाव के चलते प्रशासन को अपनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा था। रविवार को भी इसका असर दिखाई दिया। मंदिर प्रशासन ने उत्तर व पूर्व के सभी द्वारों को बंद कर केवल पश्चिम दिशा के श्री महाकाल महालोक व सम्राट अशोक सेतु से सामान्य व शीघ्र दर्शन टिकट वाले दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया। अतिरिक्त इंतजाम शुरू किए बीते दो दिनों की भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति व जिला प्रशासन द्वारा 31 दिसंबर व 1 जनवरी के लिए अतिरिक्त इंतजाम जुटाए जा रहे हैं। चारधाम पार्किंग में जिगजेग लगाने का काम शुरू हो गया है। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए अन्य इंतजाम भी किए जा रहे हैं। कालभैरव मंदिर में भी दर्शनार्थियों का ताता महाकाल मंदिर के अलावा कालभैरव, मंगलनाथ, अंगारेश्वर व चिंतामन गणेश मंदिर में भी आस्था उमड़ रही है। रविवार को 75 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान कालभैरव के दर्शन किए। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था स्थगित रही। जिला प्रशासन की ओर से जारी सूची के आधार पर ही प्रोटोकाल दर्शन कराए जा रहे थे। मंदिर में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। मंदिर के बाहर अब भी अव्यवस्था का अंबार महाकाल मंदिर के बाहर अब भी अव्यवस्था का अंबार है। आसपास गली तथा शहनाई गेट के सामने मुख्य द्वार पर अवैध पार्किंग हो रही है, जो थोड़ा बहुत रास्ता बचता है उस पर हार फूल, माला, पूजन सामग्री बेचने वाले दुकान लगा लेते हैं। भारी भीड़ के बीच में सड़कों पर हो रहे इस अतिक्रमण को देखने वाला कोई नहीं है।