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BSP में ईशान आनंद की बड़ी जिम्मेदारी, मायावती ने दिया अहम पद

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को एक बार फिर चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बना दिया। इससे पहले यह जिम्मेदारी मायावती ने बड़े भतीजे आकाश आनंद को दी थी। पिछले दिनों आकाश से यह जिम्मेदारी छीनने के साथ ही पार्टी से भी बाहर कर दिया था। हालांकि ईशान को भी कुछ समय के लिए मायावती ने पार्टी से बाहर किया था। पिछले दिनों ही दोबारा उनकी वापसी हुई थी। अब एक तरह से सबसे बड़ी जिम्मेदारी दे दी है। अगले छह महीनों में यूपी और पंजाब समेत कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसी को लेकर मायावती ने बुधवार को लखनऊ में पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं और अब तक घोषित प्रत्याशियों की बैठक बुलाई थी। इसी बैठक के दौरान सभी पदाधिकारियों के सामने ही ईशान ने मायावती के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद पहली कतार में सतीश मिश्रा के साथ उन्हें सीट मिली। कुछ देर बाद ही ईशान को सबसे बड़ी जिम्मेदारी देने का ऐलान हो गया। अभी तक ईशान बहुजन समाज पार्टी में पर्दे के पीछे रहकर डिजिटल मीडिया, युवा विंग और तकनीकी रणनीतियों को संभाल रहे थे। अब राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी उनके पास आ गई है। माना जा रहा है कि जिस तरह से पिछले कुछ समय से मायावती अपने ही फैसलों को बदलती रही हैं, ईशान के लिए भी इस जिम्मेदारी को संभालना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। वैसे तो आज की बैठक से पहले ही यह माना जा रहा था कि आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने और ईशान को दोबारा पार्टी में लेने के बाद कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।कहा जा रहा है कि ईशान अब देश भर में राज्यों के प्रभारियों और मुख्य समन्वयकों के साथ सीधे संपर्क में रहेंगे। विधानसभा चुनाव के लिए मायावती से बात कर अहम फैसले लेने के साथ ही पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने का काम भी उनके पास होगा। आकाश आनंद अभी तक जिस तरह से मायावती की जगह राज्यों में जाकर चुनावी बागडोर संभालते रहे, उसी तरह अब ईशान को यह करना होगा। आकाश आनंद को क्यों दरकिनार किया गया? ईशान से पहले उनके बड़े भाई आकाश आनंद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक थे. हालांकि 3 सितंबर को मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था. उन्होंने कहा था कि आकाश को अभी राजनीतिक तौर पर और परिपक्व होने की जरूरत है. इसके बाद 10 सितंबर को मायावती ने उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह अलग कर दिया।  मायावती ने आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी से ज्यादा परिवार को प्राथमिकता दी. मायावती ने यह भी कहा कि आकाश ने उनके उस सोशल मीडिया पोस्ट को दोबारा साझा नहीं किया, जिसमें अशोक सिद्धार्थ से राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की बात कही गई थी. मायावती ने इसे आकाश के पार्टी के प्रति रुख से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे।  आकाश को पहले मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया गया था. लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्हें कई बार जिम्मेदारी मिली और फिर वापस ली गई. अब मायावती ने साफ कहा है कि आकाश को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. उनकी जगह छोटे भाई ईशान आनंद को आगे बढ़ाया जा रहा है। 

मायावती की शर्त के बाद अशोक सिद्धार्थ का बड़ा ऐलान, राजनीति से लिया संन्यास; आकाश आनंद पर क्या बोले?

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है. इससे पहले मायावती ने 3 सितंबर 2026 को आकाश को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया था. अब उन्होंने आकाश को बसपा की प्राथमिक सदस्यता और पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया है।  दरअसल आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है. इसे लेकर मायावती ने कहा कि उन्होंने अगर समय पर फैसला ले लेते तो आकाश के साथ ऐसा नहीं होगा।  मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ने का फैसला सही समय पर नहीं लिया. अगर वो ये कदम पहले उठा लेते, तो बसपा, बहुजन मूवमेंट और खुद आकाश आनंद को लगातार मुश्किल और विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।  मायावती ने पिछले हफ्ते आकाश आनंद को राजनीति के लिए अपरिपक्व बताते हुए पार्टी के कोर्डिनेटर समेत सभी पदों से हटा दिया था। इसके बाद बुधवार को आकाश को दोबारा पद देने के लिए उनके ससुर अशोक के सामने एक शर्त रख दी थी। मायावती ने कहा था कि आकाश आनन्द के भविष्य के लिए अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है। वे अपनी महत्वकांक्षा त्याग कर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें तो आकाश आनन्द को उनकी ज़िम्मेदारियां वापस देने पर विचार हो सकता है। 'जो व्यक्ति 'डबल माइंड' होकर काम…' मायावती ने आकाश आनंद के रुख पर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने मुद्दा उठाया कि आकाश आनंद पहले हमेशा उनके एक्स पोस्ट को रिपोस्ट किया करते थे, लेकिन अशोक सिद्धार्थ से जुड़ी मायावती की पोस्ट को उन्होंने रिपोस्ट नहीं किया. मायावती के मुताबिक, ये इस बात का साफ संकेत है कि आकाश आनंद पार्टी से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को तरजीह दे रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि जो व्यक्ति 'डबल माइंड' होकर काम करेगा, वो बसपा का भला कैसे कर सकता है? मायावती ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ की मंशा पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि अगर सिद्धार्थ को सच में आकाश आनंद के भविष्य और बहुजन मूवमेंट की चिंता होती, तो वो बहुत पहले ही राजनीति से किनारा कर लेते. लेकिन उनकी नीयत और निजी महत्वाकांक्षाओं को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।  2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का आह्वान पार्टी में इस बड़े बदलाव के बाद मायावती ने कार्यकर्ताओं को नया लक्ष्य सौंपा. उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वो विरोधियों के सभी राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करें. उन्होंने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों में 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर चलते हुए पूरी ताकत से जुटने और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की बात की।  मायावती को लिखा भावुक पत्र मायावती की शर्त के 24 घंटे के अंदर ही अशोक सिद्धार्थ ने भावुक पत्र लिखते हुए सक्रिय राजनीति के साथ ही सामाजिक जीवन से पूरी तरह संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने मायावती और बसपा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा भी जाहिर की है। अशोक सिद्धार्थ ने पत्र में स्पष्ट किया कि उनके लिए बहनजी का आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है और उनके मार्गदर्शन के आगे पारिवारिक रिश्ते-नाते बेहद छोटे हैं। विरोधियों पर निशाना, आरोपों को बेबुनियाद भी बताया अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी पर कब्जे के विरोधियों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ साथी अफवाह फैला रहे हैं कि वे पार्टी पर कब्जा और आकाश आनंद को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। सफाई देते हुए कहा कि आकाश को सलाह देना तो दूर, बीते कई महीनों में उनसे मुलाकात केवल पार्टी कार्यक्रमों के सिलसिले में हुई है। कहा कि आकाश मेरे दामाद से पहले बहनजी के भतीजे हैं। उनके अंदर बहुजन मिशन का खून बहता है। मेरे जैसा मामूली कार्यकर्ता भला उन्हें क्या गुमराह करेगा? 35 सालों का सफर और मायावती के प्रति आभार अशोक सिद्धार्थ ने बसपा में 35 वर्षों के योगदान का जिक्र करते हुए लिखा कि मान्यवर कांशीराम और डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन में मायावती की वजह से ही उन्हें एक आम कार्यकर्ता से संसद और विधानमंडल तक पहुंचने का मौका मिला। मिशन के लिए अगर जान भी देनी पड़े तो यह उनके लिए गर्व की बात होगी। अंत में यह भी लिखा कि आकाश आनंद को जिम्मेदारी देना या न देना पूरी तरह से बसपा सुप्रीमो का अधिकार है। उनके संन्यास को आकाश आनंद की पद पर वापसी से जोड़कर न देखा जाए। अगर बहनजी को लगता है कि उनके राजनीति में रहने से संतों, गुरुओं और महापुरुषों के बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो वे तत्काल प्रभाव से राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं।

आकाश आनंद की फिर होगी BSP में वापसी? मायावती ने शक्तियां बहाल करने को लेकर रखी शर्त

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी अनुशासन और मिशन को सर्वोपरि रखते हुए एक्स पर एक बयान जारी किया है. उन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते पार्टी हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोपी पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ पर निशाना साधा, जिसके कारण उनके दामाद आकाश आनंद को भी झटका लगा है और अब केवल ससुर के संन्यास लेने पर ही आकाश की पार्टी में सक्रिय भूमिका बहाल होना संभव बताया गया है।  अशोक सिद्धार्थ पर गंभीर आरोप मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी के मिशन से अधिक अपने निजी और पारिवारिक स्वार्थ को महत्व दिया है. पार्टी द्वारा कई बार मौके दिए जाने के बावजूद उन्होंने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं छोड़ी, जिसका खामियाजा उनके दामाद आकाश आनंद को भी भुगतना पड़ रहा है. पार्टी ने अपने आंतरिक अनुशासन और मूवमेंट के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा रुख अपनाया है।  आकाश आनंद की वापसी की शर्त पार्टी प्रमुख ने साफ कर दिया है कि यदि अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह संन्यास का ऐलान कर देते हैं, तभी आकाश आनंद के लिए पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने का रास्ता खुलेगा. इसके बाद ही बसपा नेतृत्व आकाश को उनकी पुरानी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकता है, क्योंकि पार्टी में इस बात को लेकर आम राय बनी हुई है।  बदलता राजनीतिक घटनाक्रम इससे पहले आकाश आनंद के सोशल मीडिया प्रोफाइल बायो में लगातार बदलाव देखने को मिले थे, जिसमें उन्होंने खुद को पहले कार्यकर्ता और बाद में समर्थक लिख लिया था. पार्टी पदाधिकारियों को भी आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने के निर्देश दिए गए थे. दूसरी ओर, मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद को सक्रिय राजनीति में आगे लाए जाने और मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाए जाने की चर्चाएं भी तेजी से चल रही हैं। 

UP चुनाव से पहले आकाश आनंद को झटका, मायावती ने फिर छीनी बड़ी जिम्मेदारी; बताया अपरिपक्व

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी की किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। उन्होंने आकाश को राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत बताते हुए केवल पार्टी में कार्य करने की अनुमति दी है। मायावती ने इस फैसले के लिए बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला दिया। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम में शामिल होने की अनुमति तो दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या संगठन में बड़े पद देने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर आगे बढ़ रही हैं। नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस लिया! मायावती का मानना है कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है, ताकि विरोधी दल साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर बसपा को चुनावी नुकसान न पहुंचा सकें। वहीं पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनका नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस ले लिया गया है। हालांकि पार्टी से बाहर नहीं किया गया है। आकाश को दो बार पहले पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। आकाश ने अपने एक्स अकाउंट से पद हटाकर खुद को बसपा कार्यकर्ता लिख दिया है। कई जिम्मेदारी दी गई, और फिर वापस ली गई आकाश आनंद को पहले भी कई बार पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी गईं और बाद में वापस ली गईं। वर्ष 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कई जनसभाओं को संबोधित किया। मई 2024 में सीतापुर की एक जनसभा में उनके आक्रामक भाषण के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से हटा दिया था। हालांकि बाद में उनकी वापसी हुई। मार्च 2025 में आकाश आनंद को फिर पार्टी से निष्कासित किया गया। उस समय मायावती ने यह भी कहा था कि अब उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। बाद में आकाश की दोबारा पार्टी में वापसी हुई और अगस्त 2025 में उन्हें फिर राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई। हाल में हाथरस में उन्होंने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला था। अब एक बार फिर उनसे संगठन की बड़ी जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा इस बीच मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साधा। लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा कि जातिवाद, असमानता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरएसएस से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करने की सलाह दी। बैठक में संगठन को मजबूत करने पर जोर बैठक में मायावती ने संगठन को मजबूत करने, कमियों को दूर करने और पदाधिकारियों को पूरी निष्ठा से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कांशीराम की पुण्यतिथि पर देशभर में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस नेता से मिलने से किया इनकार, सियासी गलियारों में बढ़ी चर्चा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं सियासी गलियारों में अलग अलग तरह की हलचलें तेज हो रही हैं। एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिनी दौरे पर यूपी पहुंचे तो दूसरी तरफ उनके खुछ खास लोग अचानक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के लखनऊ स्थित आवास पर मिलने पहुंच गए। चर्चा है कि ये नेता कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का कोई बेहद खास और गोपनीय संदेश लेकर मुलाकात करने पहुंचे थे। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात की कोशिश पर उस समय पानी फिर गया, जब बसपा प्रमुख की ओर से नेताओं को अंदर आने की अनुमति नहीं मिली। पहले से अप्वाइंटमेंट न होने का हवाला देते हुए कांग्रेस नेताओं को गेट से ही वापस लौटा दिया गया। मायावती के आवास पर पहुंचने वाले नेताओं में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी से कांग्रेस के युवा सांसद व अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष तनुज पूनिया के साथ अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे। गेट से लौटने के बाद दी सफाई भले ही सुरक्षाकर्मियों ने समय न होने की बात कहकर कांग्रेसी नेताओं को अंदर नहीं जाने दिया, लेकिन राजनीतिक पंडित इसे मायावती के कड़े स्टैंड के रूप में देख रहे हैं। वहीं, गेट से लौटने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए लिखा कि वे एक सामाजिक कार्यक्रम के सिलसिले में लखनऊ आए थे और शिष्टाचार के नाते बहनजी का कुशलक्षेम जानने उनके आवास गए थे। मायावती की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि बहन जी के शासनकाल में उनकी उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता और निर्णायक नेतृत्व को सभी वर्गों ने सराहा एवं स्वीकार किया है। यही कारण है कि उनके प्रति विशेष सम्मान और स्नेह का भाव सदैव बना रहता है। समय न मिलने के कारण उन्होंने दोबारा समय का अनुरोध किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही मुलाकात होगी। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के यह नेता एक विशेष रणनीति के तहत मायावती से मिलने पहुंचे थे। राहुल की यूपी में मौजूदगी के दौरान कांग्रेस नेताओं का बसपा सुप्रीमो के घर पहुंचना कई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। इस मुलाकात की कोशिश को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की नई कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस चाहती है भाजपा के खिलाफ सभी दल साथ आएं इस अचानक हुई कोशिश और कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठने के बाद पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने भारत समाचार से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पूरी गंभीरता के साथ चाहती है कि देश और प्रदेश के हित में सभी राजनीतिक दल एक साथ आएं। यह विपक्ष और गठबंधन की ही ताकत थी कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश के भीतर कड़े मुकाबले में रोका गया।" उन्होंने आगे कहा कि यूपी में इस समय बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। देश में केवल कांग्रेस ही भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ सकती है। राजनीतिक दलों के नेताओं का एक-दूसरे से मिलना बेहद सामान्य प्रक्रिया है। कांग्रेस ने नेताओं के कदम से खींचा हाथ वहीं, कांग्रेस अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस सांसद व कांग्रेस अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष तनुज पुनिया के बसपा सुप्रीमो मायावती के घर पहुंचने के मामले को लेकर राजनीति गरमा गई है। हालांकि कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय का कहना है कि कांग्रेस नेताओं का मायावती के आवास पर जाना उनका अपना व्यक्तिगत निर्णय था। पार्टी का इससे कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी नेताओं का व्यक्तिगत मामला बताया।