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‘चुनाव आते ही दलित प्रेम जागता है’: कांशीराम जयंती पर मायावती ने सपा-कांग्रेस को घेरा

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन पर "दलित विरोधी" राजनीति में लिप्त होने और बसपा संस्थापक कांशीराम की विरासत का चुनावी लाभ के लिए लाभ उठाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। मायावती ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, सपा और कांग्रेस दलित वोट के स्वार्थ में एक "सोची-समझी रणनीति" के तहत कांशीराम की जयंती मना रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर यह कहते हुए निशाना साधा कि कांग्रेस पार्टी केन्द्र में अपनी सरकार रहने के दौरान कांशीराम को 'भारतरत्न' की उपाधि नहीं दी और अब दूसरी पार्टी की सरकार से देने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा, ''यह हास्यास्पद नहीं है तो क्या है?'' मायावती ने दावा किया कि सपा और कांग्रेस ने शुरू से ही, बसपा को ख़त्म करने में लगी रहीं, जिस पार्टी की स्थापना कांशीराम ने की थी। उन्होंने कहा कि उसे कांशीराम की 'एकमात्र उत्तराधिकारी'' व बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जीते-जी कोई हिला नहीं सकता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टियों पर कांशीराम के जीते जी उनकी उपेक्षा करने और अब उनकी विरासत का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांशीराम के सम्मान में तत्कालीन बसपा सरकार द्वारा किये गये कार्यों को भी तत्कालीन सपा सरकार द्वारा ''अधिकांशः बदल दिया गया। यह है इन पार्टियों का इनके प्रति दोग़ला चाल व चरित्र।'' मायावती ने प्रतिद्वंद्वी दलों के समर्थकों को चुप रहने की सलाह देते हुए कांशीराम की पुस्तक उल्लेख किया और कहा कि ''ऐसे लोगों से दूरी बनाने के लिए ही कांशीराम जी ने 'चमचा युग' के नाम से अंग्रेज़ी में एक किताब भी लिखी है।'' कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग की थी और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था।  

कांग्रेस की वजह से बसपा का गठन, कांशीराम के नाम पर आयोजन पर मायावती ने किया कटाक्ष

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को दलितों के अपमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि जिस पार्टी ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का सम्मान नहीं किया, वह आज कांशीराम जी के नाम पर राजनीति करने का ढोंग कर रही है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस के कारण ही कांशीराम को बसपा बनानी पड़ी थी। अपने समर्थकों को आगाह किया कि वे कांग्रेस के इन 'हथकंडों' से सावधान रहें। कांग्रेस और सपा पर लगाया उपेक्षा का आरोप मायावती ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक केंद्र की सत्ता संभाली, लेकिन कभी भी बाबा साहेब अंबेडकर को 'भारत रत्न' से सम्मानित नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी बाबा साहेब का आदर नहीं कर सकी, वह आज मान्यवर श्री कांशीराम जी को सम्मान देने की बात कैसे कर सकती है? मायावती ने उस दौर को याद दिलाया जब कांशीराम जी का निधन हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राजकीय शोक घोषित करने की जहमत नहीं उठाई थी। मायावती के अनुसार, ये दोनों पार्टियां दलित महापुरुषों के प्रति हमेशा से संकुचित मानसिकता रखती आई हैं। दलित संगठनों और अन्य पार्टियों को दी चेतावनी बसपा प्रमुख ने न केवल कांग्रेस, बल्कि उन छोटे दलित संगठनों और पार्टियों पर भी निशाना साधा जो कांशीराम जी के नाम का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी पार्टियों के हाथों में खेल रहे ये संगठन मान्यवर के नाम को भुनाने की कोशिश में लगे हैं ताकि बसपा को कमजोर किया जा सके। मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे किस्म-किस्म के हथकंडों से सचेत रहें, क्योंकि इन सबका एकमात्र उद्देश्य बसपा के आधार को हिलाना है। 15 मार्च को देशव्यापी कार्यक्रमों की अपील मायावती ने अपने ट्वीट के अंत में सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि कल, यानी 15 मार्च 2026 को मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में आयोजित होने वाले पार्टी के कार्यक्रमों को भव्य और कामयाब बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बसपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो कांशीराम जी के सिद्धांतों पर अडिग है और दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई लड़ रही है।

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर मायावती भड़कीं, उठाए सवाल

लखनऊ  पश्चिम बंगाल दौरे पर गईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम से जुड़े प्रोटोकॉल विवाद पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान होना चाहिए व उनका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। मायावती ने 8 मार्च को अपने ट्वीट में लिखा, "भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक सभी को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना जरूरी तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है। वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण।" बसपा अध्यक्ष ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, "इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी खासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिये तो यह बेहतर होगा। इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी माँग।"

यूपी चुनाव को लेकर मायावती का ऐलान, बसपा उतरेगी अकेले; दिल्ली बंगला मामले में दी सफाई

लखनऊ वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की रणनीति स्पष्ट हो गई है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को साफ शब्दों में कहा कि बसपा किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और 2007 की तरह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि विरोधी दल जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं, ताकि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान चुनावी तैयारियों से भटकाया जा सके। मायावती ने मीडिया में चल रही खबरों को “फेक न्यूज” बताते हुए कहा कि बसपा पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ अकेले मैदान में उतरेगी। उन्होंने बताया कि 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद भी कई बार इस रुख को दोहराया जा चुका है, इसलिए अब इस विषय पर किसी तरह की चर्चा या भ्रम की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, सपा और भाजपा की नीतियां संकीर्ण हैं और ये दल भीमराव आंबेडकर की विचारधारा के अनुरूप काम नहीं करते। गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ मायावती ने कहा कि पिछले अनुभव बताते हैं कि इन दलों के साथ गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी साजिश या भ्रामक खबर से प्रभावित न हों और 2027 में सरकार बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित रहें। दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट पर क्या बोलीं दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी मायावती ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह आवास आवंटित किया है। उन्होंने 2 जून 1995 को लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के बाद से उनकी सुरक्षा संवेदनशील विषय रही है और वर्तमान परिस्थितियों में खतरा और बढ़ गया है। मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, विरोधियों की साजिशें तेज होंगी। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहकर संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों में जुटे रहने की जरूरत है।  

मायावती का बड़ा ऐलान: यूपी चुनाव में बीएसपी करेगी अकेले चुनाव, टाइप-8 बंगला पर भी बयान

 लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने गठबंधन को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं को पूरी तरह भ्रामक और निराधार करार दिया है. मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे गठबंधन से जुड़ी 'उल्टी खबरों' पर ध्यान न दें और 'हाथी की मस्त चाल' चलते हुए चुनावी तैयारियों में जुट जाएं.  मायावती का टार्गेट 2007 की तरह ही प्रदेश में बीएसपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाना है. इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में खुद को आवंटित हुए टाइप-8 बंगले को लेकर भी सफाई दी और कहा कि यह सुरक्षा की दृष्टि से आवंटित किया गया है.  मायावती ने विरोधियों को नसीहत दी है कि बंगले को लेकर कोई भी गलत सूचना न फैलाएं. गठबंधन की अटकलों पर विराम मायावती ने कहा कि बीएसपी के किसी अन्य दल के साथ हाथ मिलाने की खबरें सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चाएं जानबूझकर चलाई जा रही हैं, जिससे कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाया जा सके. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि पार्टी अपनी ताकत पर भरोसा करती है और बिना किसी बैसाखी के चुनाव लड़ेगी. कार्यकर्ताओं से 'हाथी की मस्त चाल' चलने की अपील मायावती ने कैडर में जोश भरते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को विरोधियों के दुष्प्रचार से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने नारा दिया कि पार्टी को 2007 वाला इतिहास दोहराना है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर जाकर जनता को बीएसपी की नीतियों से जोड़ने और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के संकल्प के साथ काम करने को कहा है. दिल्ली में बंगले के आवंटन पर दी सफाई दिल्ली में मिले नए सरकारी बंगले को लेकर हो रही चर्चाओं पर मायावती ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों और प्रोटोकॉल के तहत टाइप-8 बंगला आवंटित किया गया है. उन्होंने साफ किया कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है और इसे लेकर किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाना गलत है.

मायावती का सख्त फैसला: बसपा संगठन में बड़े पदों पर चली कैंची

लखनऊ विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए बूथ और सेक्टर स्तर तक संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला लिया है। इसके तहत संगठन में 50 प्रतिशत युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पार्टी प्रमुख ने दो-दो जिला प्रभारियों की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है और उन्हें विधानसभा प्रभारी बनाया गया है। अब विधानसभा अध्यक्ष, महासचिव और प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ और सेक्टर गठन की जिम्मेदारी संभालेंगे। 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या 1500 से घटाकर 1200 किए जाने के बाद प्रदेश में बूथों की संख्या 1.62 लाख से बढ़कर 1.77 लाख हो गई है। इसके चलते पहले से गठित बूथ और सेक्टर स्तर के संगठन प्रभावी नहीं रह गए हैं। लगभग 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ है।   एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं पार्टी के अनुसार एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं, ऐसे में पूरे प्रदेश में नए सिरे से संगठन खड़ा करने में लगभग तीन माह का समय लग सकता है। जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। कांशीराम और आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाने के निर्देश बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को लखनऊ और नोएडा में भव्य रूप से मनाई जाए। वहीं 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती भी पूरे उत्साह के साथ मनाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि 12 मंडलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लखनऊ में, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह मंडलों के कार्यकर्ता नोएडा स्थित स्मारक पर पहुंचेंगे। संगठन मजबूत करने के लिए जिलों में उतरेंगे शीर्ष नेता एसआईआर और बूथ-सेक्टर गठन का कार्य पूरा होने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, विधायक उमा शंकर सिंह और मंडल स्तरीय मुस्लिम भाईचारा प्रभारियों द्वारा जिलों का दौरा किया जाएगा। सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे बैठक में मायावती ने कहा कि अगले वर्ष सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में बसपा ने अकेले दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि इसके बाद पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है और वर्तमान में विधानसभा में बसपा का केवल एक विधायक है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।

मायावती ने लखनऊ में बुलाई अहम बैठक, 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों पर होगी चर्चा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती आज लखनऊ में संगठन की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। इस बैठक में प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के अध्यक्षों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों की समीक्षा करना है। बसपा लंबे समय से चुनावों की रणनीति पर काम कर रही बसपा लंबे समय से आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पहले ही जिला और विधानसभा स्तर की इकाइयों को संगठन विस्तार, समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने तथा बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने जैसे निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही, भाईचारा कमेटियों को भी पार्टी की चुनावी रणनीति के अनुरूप जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी आज की बैठक में मायावती अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी और संगठन की कमजोरियों व मजबूती दोनों पर मंथन करेंगी। इसके साथ ही वे कोर वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नए वर्गों को जोड़ने की रणनीति स्पष्ट करेंगी। ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर सूत्रों के अनुसार, इस बार बसपा प्रमुख ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही हैं। बैठक में इस दिशा में भी संगठन को ठोस दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है।

SC की रोक के बाद मायावती का बयान, कहा- ‘सवर्ण होते तो विवाद नहीं होता’

लखनऊ यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले पर विपक्षी नेताओं के भी रिएक्शन आने शुरू हो गए हैं। केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, अगर यूजीसी नियमों में सवर्णों को भी कमिटी में रख लिया जाता तो बवाल नहीं होता। उन्होंने आगे कहा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किए गए है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित। जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।   अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सच्चा न्याय यह सुनिश्चित करने में है कि किसी पर भी अत्याचार या अन्याय न हो। यादव ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है। कानून की भाषा भी साफ होनी चाहिए और भाव भी। बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है।' उन्होंने कहा, ‘न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय, न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी।’ यूजीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियमों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए। उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थानों द्वारा 'समानता समितियां' गठित करने को अनिवार्य बनाने संबंधी नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।  

नए UGC नियमों पर मायावती का बचाव, बोलीं विरोध सवर्णों तक सीमित नहीं होना चाहिए

लखनऊ नए यूजीसी नियमों को लेकर बसपा प्रमुख की प्रतिक्रिया सामने आई है. मायावती ने उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले UGC के नए नियमों का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध बिल्कुल भी जायज नहीं है. हालांकि, मायावती ने चेतावनी दी कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था. X पर कई पोस्ट में, मायावती ने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से UGC के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 को 'जातिवादी मानसिकता' वाले लोगों द्वारा गलत तरीके से भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है. उन्होंने कहा- सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को हल करने के लिए 'इक्विटी कमेटियों' के गठन के नए UGC नियमों के कुछ प्रावधानों का विरोध केवल सामान्य वर्ग के वे लोग कर रहे हैं जिनकी जातिवादी मानसिकता है, और वे इन्हें साजिश और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. यह बिल्कुल भी उचित नहीं है.  बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना ​​है कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाता तो बेहतर होता है. सरकारों और संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कदम देश में सामाजिक तनाव का कारण न बनें. उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों से भी अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों के शिकार न बनें.  मायावती ने कहा, "ऐसे मामलों में, दलितों और OBC को भी अपने ही स्वार्थी और बिके हुए नेताओं के भड़काऊ बयानों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए, जो उनकी आड़ में गंदी राजनीति करते रहते हैं. इन वर्गों को सतर्क रहना चाहिए." आपको बता दें कि UGC ने 13 जनवरी को नए नियमों को अधिसूचित किया, जिसमें सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भेदभाव की शिकायतों को देखने और समावेश को बढ़ावा देने के लिए इक्विटी कमेटियों का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है. नियमों के अनुसार, इन कमेटियों में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग व्यक्तियों और महिलाओं के सदस्य शामिल होने चाहिए. 2026 के नियम UGC के 2012 के इक्विटी नियमों की जगह लेते हैं, जो काफी हद तक सलाहकारी प्रकृति के थे. इस कदम से उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें आलोचकों का आरोप है कि नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है. इन चिंताओं को दूर करते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि नए ढांचे के तहत कोई उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा. प्रधान ने कहा, "मैं सभी को विनम्रतापूर्वक भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी भेदभाव के नाम पर नियम का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा."

मायावती ने अपने जन्मदिन पर खेला ब्राह्मण कार्ड, सरकार में मिलेगा पूरा मान-सम्मान

लखनऊ  बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर बड़ा सियासी दांव चला. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों 2025 में शीतकालीन सत्र में सपा, कांग्रेस और बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की. ब्राह्मण विधायकों ने बीजेपी सरकार में उपेक्षा का मुद्दा उठाया है.  इसी तरह क्षत्रिय समाज के विधायकों की बैठक हुई थी. हाल के ही दिनों में सवर्ण समाज के साथ जो कुछ हुआ है वह किसी से छिपा नहीं है. बसपा सरकार बनने पर पार्टी उन्हें पूरा सम्मान देगी. मायावती ने कहा कि ‘हमने ब्राह्मण समाज को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया. ब्राह्मणों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. ब्राह्मणों को किसी का बाटी चोखा नहीं खाना चाहिए. ब्राह्मणों पर किसी तरह का अत्याचार न हो इसलिए बीएसपी की सरकार जरूरी है.’ मायावती ने क्षत्रिय विधायकों का भी जिक्र कर कहा कि उनका भी पार्टी में पूरा सम्मान होगा. उन्होंने कहा कि बसपा सरकार में सर्व समाज का कल्याण हुआ. किसी को भी जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए. बसपा सरकार में नहीं हुआ दंगा मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में कभी मंदिर-मस्जिद का मुद्दा नहीं उठा. हमारी सरकार में कभी कोई दंगा नहीं हुआ. हमारी सरकार ने सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय के मूल सिद्धांत पर काम करती रही है. इतना ही नहीं हमारी सरकार में कानून व्यवस्था भी मजबूत रही है.मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में जो योजनाएं लाई गईं उन्हीं को आगे के सरकारों ने नाम बदलकर आगे बढ़ाया है. एक्सप्रेसवे को लेकर उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे बनाने का रोडमैप उनकी सरकार में ही बन गया था.  एक आध तो बन भी गए थे. उन्होंने बहुजन समाज को भी चेताते हुए कहा कि जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना है. अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान मायावती ने कहा, “हमारी पार्टी पूरी तरह हर स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और EVM में धांधली और बेइमानी नहीं की जाती है तो परिणाम बेहतर होंगे. हम स्तर पर पार्टी को मजबूत कर रहे हैं और क्या पता बाद में EVM को हटा दिया जाए जैसे अन्य कई देशों में हुआ है. हमारी पार्टी का गठबंधन करके चुनाव लड़ने का अनुभव ये रहा है कि इससे पार्टी को नुकसान होता है और गठबन्धन करके चुनाव लड़ने वाली पार्टी को लाभ मिल जाता है. क्योंकि दलित वोटबैंक तो दूसरी पार्टी को मिल जाता है, लेकिन उनकी पार्टी का वोट हमारी पार्टी को नहीं मिलता है.  हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश विधान सभा और लोक सभा चुनाव अकेले लड़ना बेहतर समझा है, और हम कोई भी चुनाव गठबंधन करके नहीं लड़ेंगे. आगे चलकर जब पूरा भरोसा हो जाएगा कि बसपा से गठबंधन करके वो हमारी पार्टी में भी अपना वोट ट्रासंफर करा सकती है तो सोचा जा सकता, लेकिन उसमें वर्षों लगेंगे.