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पीसी के दौरान शॉर्ट सर्किट, मची अफरातफरी; मायावती को तुरंत सुरक्षा में निकाला गया बाहर

लखनऊ राजधानी लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती के जन्मदिन के मौके पर बड़ा हादसा टल गया। मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) के दौरान ही अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। बिजली को बोर्ड से चिंगारी के साथ ही धुआं निकलने लगा। घटना उस वक्त हुई जब मायावती की प्रेसवार्ता समाप्त होने ही वाली थी। देखते ही देखते पूरे हॉल में धुआं भर गया। इससे वहां मौजूद पत्रकारों और नेताओं में हड़कंप मच गया।   तत्परता से टला बड़ा हादसा प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में जैसे ही शॉर्ट सर्किट हुआ, बिजली के बोर्ड से चिंगारियां निकलने लगीं और धुएं का गुबार छा गया। हालांकि, मायावती की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गजब की फुर्ती दिखाई। खतरे को भांपते हुए सुरक्षा घेरे ने तत्काल पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को लेकर सुरक्षित तरीके से हॉल से बाहर निकाला और उनके आवास की ओर ले गए। अग्नि सुरक्षा उपकरणों का हुआ उपयोग शॉर्ट सर्किट की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद सुरक्षा टीम और बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। सुरक्षाकर्मियों ने बिना समय गंवाए वहां रखे अग्नि सुरक्षा उपकरणों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल किया। इससे आग फैलने से पहले ही काबू पा लिया गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन कुछ देर के लिए वहां अफरातफरी का माहौल बना रहा। अग्नि सुरक्षा उपकरणों का हुआ उपयोग शॉर्ट सर्किट की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद सुरक्षा टीम और बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। सुरक्षाकर्मियों ने बिना समय गंवाए वहां रखे अग्नि सुरक्षा उपकरणों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल किया। इससे आग फैलने से पहले ही काबू पा लिया गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन कुछ देर के लिए वहां अफरातफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा पर उठे सवाल? बसपा प्रमुख की सुरक्षा को देखते हुए इस तरह की तकनीकी खामी पर सवाल उठने लगे हैं। जन्मदिन के बड़े आयोजन और मीडिया के भारी जमावड़े के बीच हुए इस शॉर्ट सर्किट ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और तकनीकी टीम सर्किट की जांच कर रही है।  

बसपा परिवार में खुशियों की बहार: आकाश आनंद के घर नन्हीं परी का आगमन, मायावती ने दी बधाई

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के परिवार से एक खुशखबरी सामने आई है। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक और मायावती के भतीजे आकाश आनंद के घर बच्ची के रूप में एक नई सदस्य का आगमन हुआ है। मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए खुद ही इस बात की जानकारी दी है। वहीं, इस खबर के बाद बसपा समर्थकों और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। मायावती ने सोशल मीडिया एक्स लिखा, "बसपा के राष्ट्रीय संयोज आकाश आनन्द को पुत्री के रूप में परिवार में नई सदस्य की प्राप्ति पर सभी लोगों में खुशी की लहर है। उनके लिए इससे भी ज़्यादा हर्ष व गौरव की बातयह है कि श्री आकाश ने अपनी बेटी को माननीय बहनजी की तरह ही बहुजन समाज के मिशन के प्रति समर्पित करने के लिये तैयार करने की इच्छा व्यक्त की है, जिसका भरपूर स्वाग है। मां और बेटी दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं।" बांग्लादेश में हुई हिंसा पर जताई चिंता मायावती ने एक अन्य पोस्ट में बांग्लादेश में हुई हिस्सा पर चिंता जताई। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, "अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब को जिस प्रकार से साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उससे अपने देश में ही नहीं बल्कि अन्यत्र भी चिन्ता की लहर है। अभी हाल ही में वहां एक दलित युवक की जिस प्रकार से नृशंस हत्या की गयी है। उसको लेकर भारत भर में लोगों का सड़कों पर फूटा आक्रोश स्वाभाविक है, जिसका भारत सरकार को तुरन्त समुचित संज्ञान लेकर आगे हर स्तर पर कुछ और भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की देश को आशा है और यही समय की मांग भी लगती है।" बसपा सुप्रीमो ने आगे लिखा, “वैसे तो अपने देश में भी ख़ासकर दलितों व आदिवासियों पर सदियों से होने वाली जातिवादी द्वेष, जुल्म-ज़्यादती, शोषण व तिरस्कार आदि रुका नहीं है बल्कि हर स्तर पर लगातार जारी है तथा उनकी सुरक्षा को लेकर बने क़ानूनों को एक प्रकार से निष्क्रिय ही बना दिया गया है, किन्तु पड़ोसी देश बांग्लादेश में इसी प्रकार की होने वाली जुल्म-ज्यादती कोई कम गंभीर बात नहीं है बल्कि यह अति-दुखद व चिन्ता की बात है। साथ ही, पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति को लेकर ख़ासकर देश में लोगों की चिंताएं लगातार बनी रहती हैं और इस मामले में सरकार अपनी भूमिका भी निभाने का प्रयास करती रहती है, किन्तु हाल के दिनों में बांग्लादेश में जिस प्रकार से भारत व हिन्दू विरोधी घटनायें घटित हो रही हैं। उसको लेकर केन्द्र सरकार को लोगों की अपेक्षा के अनुसार और भी अधिक सक्रियता एवं प्रभावी कदम उठाने की ज़रूरत लग रही है जिसको लेकर जनता का समर्थन अवश्य ही सरकार के साथ होगा।”  

मायावती ने दी उत्तराखंड को 25वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएँ, कहा— ईमानदार शासन से होगा विकास

लखनऊ उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ अर्थात् उत्तराखण्ड रजत जयंती पर राज्य के समस्त भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई।   बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की उत्तर प्रदेश में मेरी रही सरकार द्वारा कई नए जिले, तहसील व ब्लाक आदि बनाकर उत्तराखंड में जनहित, जनकल्याण व विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पार्टी के समर्थन से बने नये उत्तराखण्ड राज्य के लोगों का जीवन भी ख़ुश एवं खुशहाल हो, यही शुभकामनायें। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन भी सही नीयत व नीति से कार्य करे तो यह बेहतर। जिससे उत्तराखंउ का विकास हो सके। आप को बता दें कि लंबे समय से चली आ रही पृथक राज्य की मांग को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश के एक हिस्से को काट कर 2000 में उत्तराखंड की स्थापना कर नया राज्य बनाया गया था।

BSP सुप्रीमो मायावती आज बिहार दौरे पर, रैली से भरेंगी चुनावी जोश

पटना बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आज बिहार के कैमूर जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगी। बसपा के एक बयान के अनुसार, रैली दोपहर में भभुआ हवाई पट्टी के पास एक मैदान में आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में आसपास के जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पार्टी ने कहा कि बसपा लगभग सभी सीटों पर बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ रही है। बयान में कहा गया है कि राज्य में पार्टी के अभियान का नेतृत्व बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक और राज्यसभा सांसद रामजी गौतम, राष्ट्रीय समन्वयक अनिल सिंह और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद कर रहे हैं। 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी। 2025 के बिहार चुनाव (Bihar Election 2025) में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच होगा। एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कांग्रेस पार्टी, दीपांकर भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीआई-एमएल), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रशांत किशोर की जन सुराज ने भी राज्य की सभी 243 सीटों पर दावा ठोका है।

UP विधानसभा 2027: मायावती की रणनीति पर BSP कार्यकर्ताओं की बैठक में चर्चा

लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। हालांकि, उनके भतीजे आकाश आनंद खराब स्वास्थ्य के कारण इसमें शामिल नहीं हो सके। चुनावी रणनीति और पांचवीं बार सरकार बनाने की कोशिश के चलते मायावती ने ये बैठक बुलाई। बैठक के दौरान, मायावती ने पार्टी नेताओं का चुनावी तैयारियों पर मार्गदर्शन किया और उत्तर प्रदेश में बसपा को पांचवां कार्यकाल दिलाने की रणनीति की रूपरेखा पर चर्चा की। मुख्य चर्चा आगामी चुनावों के प्रति पार्टी के दृष्टिकोण पर केंद्रित रही। बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में निर्देश दिए की बूथ स्तर तक संगठन के गठन का काम अगले तीन महीने में पूरा किया जाए। मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पर उमड़ी कार्यकर्ताओं की भीड़ के लिए बूथ स्तर तक पदाधिकारी जाएं और धन्यवाद ज्ञापित करें। सर्व समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ें। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटें। 15 जनवरी को मायावती का जन्मदिन जनकल्याणकारी दिवस के रूप में सभी जिलों में मनाया जाएगा। इसकी अभी से तैयारियां शुरू करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में मायावती और आकाश आनंद के उत्तर प्रदेश भर में होने वाले दौरों के कार्यक्रमों को भी अंतिम रूप दिया गया। ये दौरे पार्टी का आधार मजबूत करने और चुनाव के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से किए जाएंगे। साथ ही बैठक में निर्देश दिए गए कि 10 प्रतिशत बचे बूथ हर हाल में नवंबर से जनवरी तक गठित किए जाएं। चार बार बसपा की सरकार रही है उस समय सरकार ने जो काम किए वह जन-जन तक पहुंचाए जाएं। अपनी जमीनी रणनीति के अलावा, बसपा अपनी भाईचारा समितियों के जरिए मुसलमानों, ओबीसी, दलितों और ब्राह्मणों सहित विभिन्न समुदायों का समर्थन मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह चुनावों से पहले एक व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाए रखने के पार्टी के निरंतर प्रयास को दर्शाता है।  

मायावती की रणनीति में 2007 की झलक, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं पर चुप क्यों हैं बीएसपी प्रमुख?

लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने क़रीब 9 साल बाद गुरुवार को लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन कर 2027 के लिए चुनावी हुंकार भर दी. बसपा के संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर निशाना साधकर उत्तर प्रदेश की दो ध्रुवीय हो चुकी राजनीति को त्रिकोणीय बनाने की कवायद करती नज़र आईं. कांशीराम स्मारक स्थल से मायावती ने अपने खिसके सियासी जनाधार को वापस लाने की रणनीति का ख़ुद ख़ुलासा किया. 2027 की चुनावी जंग फ़तह करने के लिए 2007 जैसे सियासी समीकरण बनाने का ताना-बाना बुनती नज़र आईं. बसपा के दलित वोट बैंक को पहले से ज़्यादा मज़बूत करने के साथ ओबीसी, अति-पिछड़ों के साथ ब्राह्मण-ठाकुर वोटों की केमिस्ट्री बनाने का दाँव चला. मायावती ने साफ़-साफ़ शब्दों में कहा कि पिछड़े और अति-पिछड़ा तबक़े के साथ ही ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को बसपा से जोड़ने पर उनकी पार्टी काम करेगी. महारैली में मायावती ने ऐलान किया कि राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को ब्राह्मण, विधायक उमाशंकर सिंह को क्षत्रिय और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को अति-पिछड़ा और पिछड़ा समाज को जोड़ने का ज़िम्मा सौंपा. हालाँकि, मुस्लिम समाज को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले. 2007 के फ़ॉर्मूले से 2027 जीतने का प्लान बसपा की बहुजन पॉलिटिक्स के साथ मायावती ने 2007 में सर्वजन की सियासत पर क़दम बढ़ाया था, जिसके दम पर पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई. मायावती ने दलित वोटों के साथ अति-पिछड़े, मुस्लिम और ब्राह्मण की सियासी केमिस्ट्री बनाई थी. उत्तर प्रदेश के 2027 चुनाव को देखते हुए बसपा ने इस साल फ़रवरी से ही सोशल इंजीनियरिंग पर काम शुरू कर दिया था. इसके तहत मार्च में हर ज़िले में भाईचारा कमेटी का गठन किया था, जिसके ज़रिए पिछड़ों को जोड़ने की योजना थी. इसके लिए उन्होंने विश्वनाथ पाल के नाम का ज़िक्र किया, जो बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. बसपा बना रही नई सोशल इंजीनियरिंग बसपा से पिछड़ा और अति-पिछड़ों को जोड़ने के लिए इन कमेटियों की हर दो महीने में बैठकें भी मायावती कर रही हैं. इस बीच अब ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को साथ लाने के लिए पार्टी मिशन मोड पर काम करेगी. मायावती ने ब्राह्मण समाज को जोड़ने का बीड़ा सतीश चंद्र मिश्र को दे रखा है तो ठाकुर वोट के लिए उमाशंकर सिंह को ज़िम्मा दिया है. मायावती ने इन दोनों नेताओं का नाम भी लिया. मायावती ने गुरुवार को भाषण में भी ग़रीब सवर्णों का कई बार ज़िक्र करते हुए कहा कि भाजपा, सपा और कांग्रेस की सरकारों में इस तबक़े की हालत लगातार ख़राब हुई और बसपा की सरकार बनने के बाद सर्व समाज को रोज़ी-रोटी और रोज़गार का संकट नहीं होने दिया जाएगा. सतीश चंद्र मिश्र के बेटे कपिल मिश्र के काम को भी सराहा. उन्होंने कहा कि जिस तरह से कपिल ने कार्यक्रम में फ़्री मेडिकल समेत दूसरी व्यवस्थाओं में मदद की है, वह पार्टी के प्रति उनके सेवा भाव को दिखाता है. मुस्लिमों पर क्यों मायावती रहीं ख़ामोश? मायावती ने मुस्लिम वोटों पर अपने पत्ते नहीं खोले, लेकिन रैली के मंच पर पूर्व सांसद मुनकाद अली, शमसुद्दीन राईन और पूर्व एमएलसी नौशाद अली को जगह देकर मुस्लिम समाज को साथ आने व सम्मान देने का संदेश दिया है. बसपा के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो मुस्लिम समाज के बीच अभी बसपा को लेकर उहापोह की स्थिति है, लेकिन उसे जोड़ने के लिए अलग से योजना पर काम चल रहा है, जिसका ख़ुलासा बाद में किया जाएगा. हालाँकि, मायावती ने ज़िला से लेकर मंडल और प्रदेश स्तर पर संगठन में मुस्लिम पदाधिकारी बनाकर बसपा यह संदेश देने का प्रयास किया है कि मुस्लिम समाज के लिए पार्टी के दरवाज़े खुले हैं, लेकिन सपा के साथ जिस तरह एकमुश्त जुड़े हैं, उसके चलते फ़िलहाल मुख्य फ़ोकस नहीं है. मायावती समझ रही हैं कि मुस्लिम वोट तभी बसपा के साथ जुड़ेगा, जब उसका बहुजन वोट साथ आ जाएगा, इसीलिए पूरा फ़ोकस दलित और पिछड़े वोटबैंक पर है. रैली में मायावती ने अल्पसंख्यकों, ख़ासकर मुस्लिमों का विकास न होने व जान-माल का ख़तरा होने की बात कहकर उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास किया. 2027 जीतने की मायावती ने भरी हुंकार मायावती ने साफ़ कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगी. उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव जीतने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगी. बसपा प्रमुख ने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को अपने से पहले बोलने का मौक़ा देकर पार्टी के भविष्य की तस्वीर भी साफ़ कर दी. उन्होंने कहा कि आकाश अब पार्टी के मूवमेंट से पूरी तरह जुड़ चुके हैं. पूरी लगन और मेहनत से काम कर रहे हैं, जिस तरह आपने कांशीराम के बाद मेरा साथ दिया, उसी तरह आकाश का भी देना है. इस तरह आकाश को भविष्य का नेता बता दिया. मायावती ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बहुमत की सरकार बनाकर अपना 15 साल का वनवास ख़त्म करने के लिए रैली के ज़रिए तगड़ा शक्ति प्रदर्शन किया. क़रीब तीन लाख लोगों की क्षमता वाला कांशीराम स्मारक स्थल ख़चाख़च भरा रहा तो बाहर भी भीड़ दिखाई दी, जो बसपा के लिए 2027 से पहले सियासी संजीवनी से कम नहीं है.

चंद्रशेखर रावण पर गंभीर आरोप, डॉ. रोहिणी घावरी ने की खुलकर बातें, शराब को लेकर भी विवाद

इंदौर  उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर इंदौर की पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने उत्पीड़न, धोखेबाजी और कई दलित लड़कियों के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. रोहिणी का कहना है कि चंद्रशेखर ने शादी का झांसा देकर उनके साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए और उन्हें धोखे में रखा। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनके पास चंद्रशेखर के खिलाफ वीडियो के रूप में पुख्ता सबूत हैं, जिसमें वे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और इसकी सुप्रीमो मायावती के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 'अन्याय के खिलाफ है मेरी लड़ाई' डॉ. रोहिणी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह जून से ही चंद्रशेखर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रही हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा सुनवाई न किए जाने पर उन्होंने वकील की सलाह पर दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर की है। उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि वह किसी राजनीतिक दल के इशारे पर यह सब कर रही हैं। रोहिणी ने कहा, "मेरी लड़ाई किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है। अगर किसी को लगता है कि मैं किसी के कहने पर काम कर रही हूं, तो वे इसे सबूतों के साथ समाज के सामने साबित करें।" जबकि रोहिणी का कहना है कि मैंने समाज को जागरूक करने के लिए वीडियो शेयर किया था। बताया था कि लीडर्स समाज को झूठा संदेश देते हैं। एक तरफ तो आप प्रेरित करते हो कि शराब नहीं पीना चाहिए। मैंने वही दिखाया जो सच है। रात को 1 बजे ग्रीन टी कौन पीता है। आप एल्कोहोलिक हो तो झूठ मत बोलो। कई दलित लड़कियों के शोषण का आरोप रोहिणी ने दावा किया कि चंद्रशेखर ने उनके अलावा भी कई दलित लड़कियों का शोषण किया है। उन्होंने कहा, "मेरी कुछ ऐसी लड़कियों से बात हुई है, जिन्हें मेरी तरह ही शादी का झांसा देकर रिश्ते में रखा गया और बाद में छोड़ दिया गया।" उन्होंने 2017 के एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें सहारनपुर की एक जाटव लड़की ने चंद्रशेखर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसकी आवाज दबा दी गई। शादी और निजी संबंधों पर बड़ा खुलासा डॉ. घावरी ने चंद्रशेखर की शादी को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर ने अपनी शादी की बात छिपाई थी और इसे एक 'कॉन्ट्रैक्चुअल मैरिज' बताया था, जिससे वह जल्द छुटकारा पाना चाहते थे। रोहिणी के अनुसार, चंद्रशेखर की मां ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके बेटे की शादी नहीं हुई है, जबकि चंद्रशेखर को एक बेटा भी है। मायावती के लिए कहे अपशब्द रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ने बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा, "मेरे पास ऐसे वीडियो हैं, जिन्हें मैं जांच एजेंसियों को देने के लिए तैयार हूं। वह (चंद्रशेखर) नहीं चाहते थे कि कोई और दलित लीडरशिप में आगे बढ़े और इसीलिए वे मायावती जी की छवि खराब करने की कोशिश करते थे।"  

मायावती ने सपा-कांग्रेस को घेरा, कहा – सत्ता में रहते PDA की बात क्यों नहीं की गई?

लखनऊ चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती और उनकी अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक्टिव मोड में आ गई है. बसपा संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती की पार्टी आज लखनऊ में बड़ी रैली कर रही है. इस रैली को संबोधित करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि इस स्थल पर मरम्मत का कार्य नहीं होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से मान्यवर कांशीराम की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित नहीं कर पा रहे थे. मायावती ने योगी सरकार का आभार जताया और कहा कि यूपी की वर्तमान सरकार सपा जैसी नहीं है. योगी सरकार ने पूरा का पूरा पैसा इस स्थल के मरम्मत के कार्य पर खर्च किया. उन्होंने कहा कि सपा की सरकार में इन स्थलों की हालत जर्जर हो गई थी. मायावती ने कहा कि सपा सरकार ने एक पैसा भी इन स्थलों के रख-रखाव पर खर्च नहीं किया. मायावती ने कहा कि हमने सरकार में रहते ऐसा सिस्टम बनाया था कि इन स्थलों को देखने आने वाले लोगों से लिया गया टिकट का पैसा इनके रख-रखाव पर खर्च किया जाएगा. सपा की सरकार में टिकट का एक भी पैसा खर्च नहीं किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार आई, तब हमने मुख्यमंत्री को इसे लेकर पत्र लिखा. हमने आग्रह किया कि टिकट का पैसा जो भारी मात्रा में सरकार के पास इकट्ठा हो गया है, उससे इन स्थलों की मरम्मत कराई जाए. मायावती ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने इसे दिखवाया और मरम्मत कराई. उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब ये सरकार में रहते हैं, तब इनको हमारे गुरु, संत और महापुरुष याद नहीं आते. आज जब ये विपक्ष में हैं, तब इनको पीडीए याद आ रहा है. मायावती ने पूछा कि सत्ता में रहते इनको पीडीए क्यों नहीं याद रहा. आज इनको हमारे गुरु, संत और महापुरुष याद आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव से पूछना चाहती हूं कि हमने कासगंज जिला बनाकर उसका नाम मान्यवर कांशीराम के नाम से रखा था. सत्ता में आते ही सपा ने उसका नाम बदल दिया. बसपा प्रमुख ने कहा कि हमने सत्ता में रहते हुए महात्मा ज्योतिबा फुले, नारायणा गुरु समेत अपने संतों और गुरुओं को पूरा सम्मान दिया है. ये जातिवादी पार्टियों को रास नहीं आ रहा है. उन्होंने कहा कि सपा अब पीडीए के नाम पर बरगलाने का काम कर रही है. सपा के शासन में इन वर्गों का बहुत ज्यादा शोषण और उत्पीड़न हुआ है. बसपा प्रमुख ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को कोट करते हुए कहा कि वह कहते थे सत्ता एक ऐसी मास्टर चाबी है, जिसके माध्यम से इन वर्गों के लोग अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, खुशहाली और स्वाभिमान का जीवन व्यतीत कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि बाबा साहब के सपने को पूरा करने के लिए मान्यवर कांशीराम ने अपना पूरा जीवन खपा दिया. यूपी में कई बार सरकार बनाकर, आसपास के राज्यों में भी विधायक-सांसद जिताकर बाबा साहब का कारवां आगे बढ़ाया है. मायावती ने कहा कि कांशीराम की दिली तमन्ना थी कि दलित और अन्य उपेक्षित वर्गों की आबादी बहुत अधिक है, इन वर्गों को एकजुट होकर अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बनानी होगी. तभी पूरे स्वाभिमान के साथ जिंदगी व्यतीत कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि दुख की बात ये है कि कांशीराम के जीते जी यह सपना साकार नहीं हो सका था. मायावती ने कहा कि उनके निधन के बाद उनकी एकमात्र उत्तराधिकारी ने इसे पूरा भी किया है और हमने 2007 में पहली बार अकेले ही पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है. उन्होंने इससे पहले अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि आप सभी लोग अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतनी बड़ी संख्या में मान्यवर कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे है. बसपा का दावा- जुटे पांच लाख कार्यकर्ता बसपा का दावा है कि रैली में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के पांच लाख से अधिक कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं. इस रैली के लिए मायावती ने अलग योजना तैयार की है. मायावती करीब तीन घंटे तक मंच पर मौजूद रहेंगी और रैली को संबोधित भी करेंगी. मंच पर मायावती के साथ ही छह और लोग होंगे. कार्यक्रम के मुख्य मंच पर सात कुर्सियां लगाई गई हैं. मंच पर मायावती के साथ उनके भाई आनंद कुमार, भतीजे आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता सतीशचंद्र मिश्र भी होंगे. कार्यक्रम की शुरुआत थोड़ी देर में होनी है. इस रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है. चारबाग रेलवे स्टेशन पर पार्टी ने पहली बार कार्यकर्ता सहायता शिविर लगाया है. इस शिविर में युवा नेता-कार्यकर्ता प्रदेश के अलग-अलग स्थानों से रैली में शामिल होने आ रहे लोगों की सहायता कर रहे हैं. गौरतलब है कि चार साल पहले यानी 2021 बसपा प्रमुख मायावती ने 9 अक्तूबर को ही कांशीराम स्मारक स्थल में रैली की थी. तब कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने थे. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा महज़ एक सीट पर ही जीत सकी थी. मायावती ने इस बार भी रैली के लिए वही मौका, वही तारीख और वही स्थान चुना है. बसपा की रणनीति अपनी राजनीतिक ताकत दिखाकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले खुद को मजबूत विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश करने की है. खिसकती राजनीतिक जमीन बचाने की जद्दोजहद में जुटी बसपा और इसकी प्रमुख मायावती की कोशिश छिटके कोर वोटर को फिर से अपने पाले में लाने की है.

राजनीति में लौटे अशोक सिद्धार्थ, आकाश आनंद के बाद बसपा में स्वागत, मायावती ने किया माफ़

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को पार्टी और डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने के हित में पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को पार्टी में फिर शामिल कर लिया है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ से पहले उनके दामाद आकाश आनंद का भी बसपा से निष्कासन समाप्त कर उनको पार्टी में नंबर दो का दर्जा भी दिया है। अशोक सिद्धार्थ ने सार्वजनिक रूप से बसपा मुखिया से माफी मांगने के साथ अपनी गलती को स्वीकार किया था। उसी के बाद से उनका निष्कासन रद होना तय माना जा रहा था। बसपा मुखिया ने सोशल मीडिया पर अपने एक्स हैंडल पर पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ का पार्टी से निष्कासन रद करने का जानकारी दी। मायावती ने लिखा कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में कई जिम्मेदार पदों पर लम्बे वर्षों तक कार्यरत रहे एवं पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिये कुछ माह पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आज अपने लम्बे पोस्ट के जरिये सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती की माफी मांगी है। उन्होंने आगे पार्टी और बीएसपी मूवमेन्ट के प्रति पूरी तरह से वफादर रहकर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने में पूरे जी-जान से लग जाने का आश्वासन बहुजन समाज व बीएसपी नेतृत्व को दिया है। मायावती ने आगे लिखा, हालांकि उन्हें अपनी गलती का एहसास बहुत पहले हो चुका था और वे इसका लगातार पश्चाताप विभिन्न स्तर पर कर रहे थे, किन्तु आज उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपना पछतावा जाहिर किया है। जिसको ध्यान में रखते हुये पार्टी व मूवमेन्ट के हित में उन्हें पार्टी ने एक मौका दिया जाना उचित समझा है। इसी कारण बीएसपी से उनके निष्कासन का फैसला आज तत्काल प्रभाव से रद किया जाता है अर्थात इनको पार्टी में वापस ले लिया गया है। उम्मीद है कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं की तरह वे भी पूरे तन, मन, धन से पार्टी व मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान जरूर देंगे, ताकि बीएसपी के नेतृत्व में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का कारवां आगे बढ़ता हुआ बहुजन समाज को शोषित वर्ग से ऊपर उठाकर यहाँ प्रदेश एवं देश का शासक वर्ग बना सके। आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने बसपा प्रमुख से माफी मांग ली है। अशोक सिद्धार्थ ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए मायावती से माफी मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने मायावती से खुद को पार्टी में वापस लेने का आग्रह भी किया है। मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने अब सभी विवाद खत्म करते हुए बसपा प्रमुख से माफी मांग ली है। बता दें कि मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पिछले दिनों पार्टी से निकाल दिया था। अपनी पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि मैं हाथ जोड़कर उनसे अनुरोध कर रहा हूं कि वह मुझे माफ कर दें। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे से कभी भी ऐसी गलती नहीं करने की भी बात कही। अशोक सिद्धार्थ ने किसी के लिए सिफारिश नहीं करने का भी वादा किया। आखिर में उन्होंने मायावती से खुद को माफ करते हुए पार्टी में वापस लेने का आग्रह किया। अशोक सिद्धार्थ ने की पोस्ट अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि आगे अब गलती नहीं होगी। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, "मैं अशोक सिद्धार्थ बीएसपी पूर्व सांसद निवासी जिला फर्रुखाबाद बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी की चार बार रहीं मुख्यमंत्री एवं कई बार लोकसभा व राज्यसभा की रहीं सांसद बहन मायावती जी का हृदय से सम्मान एवं चरण स्पर्श करता हूं और मुझसे पार्टी का कार्य करने के दौरान ‘जाने व अनजाने’ में तथा गलत लोगों के बहकावे में आकर जो भी गलतियां हुई हैं। तो उसके लिए मैं बहन जी से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं। जिन्होंने अनेकों कष्ट झेलकर, अपनी पूरी जिन्दगी, इस देश के करोड़ों दलितों एवं अन्य उपेक्षित वर्गों के हित व कल्याण के लिए समर्पित की है।  

‘राजनीति का गिरता स्तर चिंताजनक’ – पीएम मोदी को गाली पर मायावती की प्रतिक्रिया

पटना  बिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मां की गाली से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती भी दुखी हैं। मायावती ने शुक्रवार को कहा कि राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ अभद्र टिप्‍पणी किया जाना दुखद और चिंतनीय है। मायावती ने 'एक्‍स' पर लिखा कि देश में खासकर राजनीतिक स्वार्थ के कारण राजनीति का गिरता हुआ स्तर अति-दुखद एवं चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि देश में उच्च सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं व विशेषकर राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के बारे में जिस प्रकार की अभद्र, अशोभनीय, अमर्यादित व असंसदीय टिप्पणी करके उनकी व देश की छवि को भी धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं वह अत्यंत दुखद व चिंतनीय है। कहा कि इस संबंध में सभी दलों की राजनीति सिद्धांत आधारित और देश और आमजन के हित में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खासकर चुनाव के समय यह प्रक्रिया और भी अधिक विषैली व हिंसक हो जाती है। इसी क्रम में अभी बिहार में भी जो कुछ देखने व सुनने को मिला है वह देश की चिंता को बढ़ाने वाला है। मायावती ने कहा कि बसपा किसी भी प्रकार की दूषित व जहरीली राजनीति के खिलाफ है। भाजपा ने इस मुद्दे पर कहा है कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत 'इंडिया' गठबंधन को जनता द्वारा ''दंडित'' किया जाएगा। सोशल मीडिया पर आई एक वीडियो क्लिप में कुछ लोग 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान दरभंगा में एक मंच से प्रधानमंत्री मोदी को मां की गाली देते सुनाई और दिखाई दे रहे हैं। हालांकि शुक्रवार को पुलिस ने गाली देने वाले को गिरफ्तार कर लिया है। सीएम योगी आक्रोशित इससे पहले सीएम योगी ने इसी लेकर गुस्से का इजहार किया था। योगी ने कहा कि कांग्रेस और आरजेडी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रयुक्त अभद्र भाषा अत्यंत निंदनीय एवं राजनीतिक मर्यादा का पतन है। INDI गठबंधन के नेताओं द्वारा किया गया यह कृत्य सिर्फ प्रधानमंत्री जी का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारत वासियों की भावनाओं का अपमान है। याद रहे, एक साधारण माँ ने अपने संघर्षों और संस्कारों से ऐसे पुत्र को गढ़ा, जिसने स्वयं को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया और आज विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में जन-जन के मन में बसते हैं। बिहार की जनता निश्चित ही इस घृणित राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी और भारतीय संस्कृति व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगी।