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दुग्ध व्यवसाय से तरक्की में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर

मिल्क प्रोक्योरमेंट से आत्मनिर्भर बनीं प्रदेश की साढ़े तीन लाख महिलाएं दुग्ध व्यवसाय से तरक्की में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी की महिलाओं ने रचा इतिहास उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बनी तरक्की का आधार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं तरक्की की नई इबारत लिख रहीं हैं। प्रदेश में दुग्ध संग्रहण और उससे जुड़े कार्यों के माध्यम से करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं हैं। इतनी बड़ी संख्या के लिहाज से दुग्ध व्यवसाय के क्षेत्र में यूपी देश में नंबर वन है। यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए संभव हुआ है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए तरक्की का मजबूत आधार बनकर उभरा है। योगी सरकार की अभूतपूर्व योजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश नित नए रिकॉर्ड बना रहा है। मिल्क वैल्यू चेन से मिल रहा अब बेहतर मूल्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में दुग्ध मूल्य श्रृंखला (मिल्क वैल्यू चेन) विकसित होने से अब उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है। इसके साथ ही किसानों और महिला समूहों को नियमित एवं पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उनके भरोसे और आय दोनों में वृद्धि हुई है। रोजगार के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दुग्ध व्यवसाय से गांवों में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन हो रहा है। इससे न सिर्फ महिलाओं की आय बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह कार्य अब बड़े आर्थिक मॉडल का रूप ले चुका है। महिलाओं का व्यापक सशक्तीकरण सरकार की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी गई है। इसका परिणाम यह है कि आज ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और परिवार के साथ-साथ समाज में भी अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। प्राथमिकता में ग्रामीण महिलाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण महिलाओं को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में लगातार अभूतपूर्व योजनाओं के जरिए नए रिकॉर्ड बन रहे हैं और महिलाएं विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश में दुग्ध व्यवसाय के माध्यम से महिलाओं का सशक्तीकरण न केवल एक आर्थिक बदलाव है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत नींव बन चुका है। प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर देश के सामने नई दिशा प्रस्तुत कर रहीं हैं।

चाय के रेट बढ़ाए गए, अब LPG संकट से दूध की कीमत भी बढ़ने की आशंका

नई दिल्ली ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है. कई जगह लोगों को लंबी लाइनों में लगकर महंगे दाम पर गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. एलपीजी की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों तक पहुंच गया है. चाय बेचने वालों ने भी चाय की कीमत 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दी है. यह संकट सिर्फ रेस्टोरेंट और होटल तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध के कारोबार पर भी इसका असर पड़ रहा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। पहले गल्फ देशों से 85-90 प्रतिशत एलपीजी आती थी, लेकिन अब आयात पर संकट आ गया है. जिससे घरेलू गैस के साथ-साथ इंडस्ट्रीज को भी मार पड़ रही है. रेस्टोरेंट, होटल पहले से परेशान थे और अब डेयरी वाले भी इसकी मार खा रहे हैं. डेयरी उद्योग में एलपीजी का इस्तेमाल बहुत जरूरी है. दूध को पाश्चराइजेशन (खास तापमान पर गर्म करके बैक्टीरिया मारना) के लिए बड़ी मात्रा में गैस चाहिए. बिना नियमित गैस के दूध जल्दी खराब हो सकता है. छोटे-मध्यम डेयरी प्लांट्स को यह समस्या सबसे ज्यादा झेलनी पड़ रही है. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कई डेयरी मालिकों ने बताया कि गैस न मिलने से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के काम में रुकावट आ रही है. इससे दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। मुश्किल में पड़ी दूध की पैकेजिंग इस इंडस्ट्री में सबसे बड़ी समस्या पैकेजिंग की है. दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन बनाने वाली फैक्टरियां भी एलपीजी पर निर्भर हैं. इन फैक्टरियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही, इसलिए प्रोडक्शन धीमा हो गया है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गोवर्धन डेयरी के फाउंडर देवेंद्र शाह ने कहा, “हमारे पास अभी सिर्फ 10 दिन का पैकेजिंग मटेरियल स्टॉक बचा है. अगर सप्लाई जल्द नॉर्मल नहीं हुई तो दूध सप्लाई करना मुश्किल हो जाएगा.” चेंबूर के सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी चेतावनी दी, “अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो पूरी डेयरी इंडस्ट्री बड़े संकट में फंस सकती है। दूध स्टोर करने की क्षमता कम इसके अलावा मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में बताया गया है कि बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के अनुसार, हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हुए. छोटी डेयरियों के पास दूध स्टोर करने की क्षमता नहीं है. इसलिए वे गाय और भैंस का दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं. यह संकट सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. देश के कई हिस्सों में डेयरी ऑपरेटर्स इसी तरह की शिकायतें कर रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट पहले से दूध के ऑर्डर कम कर रहे हैं. अगर पैकेजिंग रुक गई तो दुकानों पर दूध के पैकेट कम मिलेंगे. इससे आम लोग प्रभावित होंगे, खासकर शहरों में जहां लोग पैकेज्ड मिल्क पर निर्भर हैं. गांवों में जहां ढीला दूध बिकता है, वहां भी प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है। डेयरी मालिकों की मांग क्या है? डेयरी मालिकों की मांग है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई प्राथमिकता से बढ़ाई जाए. उनका कहना है कि दूध एक जरूरी चीज है, इसे संकट में नहीं छोड़ना चाहिए. अगर 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं या उपलब्धता कम हो सकती है. कुछ जगहों पर किसान बायोगैस जैसे विकल्प अपना रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर यह मुश्किल है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात करता है. पहले भारत का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और एलपीजी सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था. लेकिन ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कच्चे तेल की सप्लाई कुछ हद तक संभाली है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों के लिए गैस की सप्लाई कम कर दी गई है और होटल-रेस्तरां जैसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी में भी कटौती की गई है। यह संकट अस्थायी है, लेकिन इसका असर आम आदमी तक पहुंच रहा है. पहले रेस्टोरेंट में एक्स्ट्रा चार्ज लगे, अब दूध पर खतरा मंडरा रहा है. सरकार को जल्द कदम उठाने होंगे ताकि दूध जैसी बेसिक चीज प्रभावित न हो।

मध्य प्रदेश में दूध उत्पादकों के लिए लाइसेंस अनिवार्य, शुद्धता पर रखी जाएगी कड़ी निगरानी

भोपाल मध्य प्रदेश में घर-घर दूध बेचने वाले दुग्ध उत्पादकों को अब दूसरे दुकानदारों की तरह लाइसेंस लेना होगा. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए भी लाइसेंस का अनिवार्य कर दिया है. इसके चलते प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों को अब खाद्य विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. प्राधिकरण ने दुग्ध उत्पादकों के पंजीयन और लाइसेंस के संबंध में एडवाइजरी जारी कर दी है. यह निर्णय दूध में की जा रही मिलावट पर लगाम लगाने के लिए लिया गया है। हर माह तैयार होगी रिपोर्ट मध्य प्रदेश देश में तीसरा सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य है. प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 707 ग्राम प्रतिदिन है. प्रदेश में 225.95 लाख टन का दूध उत्पादन हो रहा है. प्रदेश में लोगों तक सहकारी समितियों के माध्यम से तो दूध पहुंच ही रहा है, साथ ही बड़ी मात्रा में दूध की सप्लाई डेयरी संचालकों द्वारा घर-घर की जा रही है. सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध सप्लाई की गुणवत्ता की जांच तो लगातार हो रही है, लेकिन डेयरी संचालकों द्वारा सप्लाई होने वाले दुग्ध और उनके उत्पाद की जांच के लिए ऐसे सभी संचालकों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान हो सकेगी. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध से जुड़ी गतिविधियों की नियमित मासिक रिपोर्ट तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं. यह रिपोर्ट हर माह 31 तारीख तक भेजनी होगी। दुध में मिलावट के लिए बनाई जा रही प्रयोगशाला प्रदेश सरकार द्वारा लोगों को शुद्ध दूध की सप्लाई के लिए राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भी स्थापित की जा रही है. यह प्रयोगशाला भोपाल के मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन में स्थापित की जाएगी. इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता से लेकर प्रदेश भर की संस्थाएं दूध और इससे बनने वाले उत्पादों की जांच करा सकेंगे।  यह प्रदेश की पहली राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला होगी. इसमें 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी. इस प्रयोगशाला को एनएबीएल और एफएसएसएआई की मान्यता प्राप्त होगी. इससे प्रदेश में शुद्ध दूध की सप्लाई सुनिश्चित हो सकेगी।

FSSAI की रिपोर्ट ने चौंकाया, दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और पानी मिलाने वाले टॉप डेयरी ब्रांड्स जांच में फेल

भोपाल   भारत, जो दुनिया के कुल दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा उत्पादक देश है, अब 'मिलावटी और असुरक्षित' दूध के केंद्र के रूप में उभर रहा है। हाल ही में 'ट्रस्टीफाइड' (एक स्वतंत्र लैब टेस्टिंग प्रोग्राम) द्वारा की गई जांच ने देश के टॉप डेयरी ब्रांडों के दावों की पोल खोल दी है। बैक्टीरिया का स्तर खतरे के निशान से ऊपर ट्रस्टीफाइड की रिपोर्ट के अनुसार, कई नामी ब्रांडों के दूध के नमूनों में कोलीफॉर्म (Coliform) का स्तर FSSAI की निर्धारित सीमा से 98 गुना अधिक पाया गया। इसके अलावा, 'टोटल प्लेट काउंट' (Total Plate Count) भी सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा था, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हर तीन में से एक नमूना फेल दूध की शुद्धता को लेकर सरकारी आंकड़े भी डराने वाले हैं। FSSAI द्वारा 2025 में की गई जांच में 38 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए। पिछले कुछ वर्षों का रुझान देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक हुई है:     2015-2018: मिलावटी नमूनों की संख्या में 16.64% का इजाफा हुआ।     2022: कुल 798 नमूनों में से आधे मिलावटी पाए गए।     2025: लगभग हर तीसरा नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा। उत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित एफएसएसएआई की 'मिल्क सर्विलांस रिपोर्ट' के अनुसार, मिलावट के मामले में क्षेत्रीय स्तर पर भारी अंतर देखा गया है: क्षेत्र – मानकों में फेल नमूनों का प्रतिशत उत्तर भारत: 47% (सबसे असुरक्षित) पश्चिम भारत: 23% दक्षिण भारत: 18% पूर्वी भारत: 13% क्या मिलाया जा रहा है आपके दूध में? इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन की एक ताजा स्टडी में 330 नमूनों की जांच की गई, जिसमें से 70.6% में गंभीर मिलावट पाई गई। मिलावट के मुख्य कारक इस प्रकार हैं: पानी: 193 नमूनों में मात्रा बढ़ाने के लिए पानी मिलाया गया। डिटर्जेंट (23.9%): झाग बनाने और दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए। यूरिया (9.1%): फैट और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए। स्वास्थ्य पर प्रभाव और सावधानी विशेषज्ञों का कहना है कि कोलीफॉर्म और डिटर्जेंट युक्त दूध पीने से पेट में संक्रमण, किडनी की बीमारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दूध खरीदने से पहले ब्रांड की लेटेस्ट लैब रिपोर्ट और FSSAI मार्क की जांच जरूर करें। सोर्स- एफएसएसएआई

हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट

हौसले और मेहनत से पूजा ने रचा सफलता का नया अध्याय, 80 लाख का वार्षिक कारोबार हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के जरिए पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का बड़े पैमाने पर उत्पादन लखनऊ अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र स्थित कलवारी गांव की पूजा चौधरी ने अपने दृढ़ निश्चय और लगातार मेहनत के दम पर यह कर दिखाया है कि कम संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। विवाह के बाद जब उन्होंने ससुराल में कदम रखा, तब परिवार दूध के छोटे व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। पूजा ने इस कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और बड़े स्तर पर विकसित करने का निर्णय लिया। इसके चलते पूजा ने साल 2023 में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर 'शिव मिल्क प्रोडक्ट' नाम से एक डेयरी प्लांट की स्थापना की। उनके इस दूरदर्शी कदम से आज उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।  इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध, छाछ सहित कई अन्य उत्पादों को तैयार किया जाता है। इन उत्पादों की आपूर्ति न केवल जिले में की जाती है, बल्कि मथुरा-वृंदावन तक नियमित रूप से की जा रही है। हरजीगढ़ी में 50 लाख के निवेश से शुरू की आधुनिक डेयरी टप्पल क्षेत्र के छोटे से गांव हरजीगढ़ी में आधुनिक तकनीक से लैस ऑटोमेटिक डेयरी प्लांट की स्थापना करना पूजा के लिए आसान नहीं था। लेकिन जब इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी करना संभव है। इसमें पूजा के पति रोहिताश और परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया और अपने छोटे से दुग्ध व्यवसाय को नए मुकाम तक पहुंचा दिया। दरअसल वर्ष 2008 में उनके परिवार ने कामधेनु डेयरी योजना का लाभ लेकर दूध का बूथ शुरू किया था। विवाह के बाद पूजा ने कारोबार में अकाउंट संबंधी जिम्मेदारी संभाली और विस्तार की दिशा में कदम आगे बढ़ाया। विभाग में आवेदन, जमीन की उपलब्धता और ऋण स्वीकृति के बाद प्लांट शुरू करने में थोड़ा विलम्ब जरूर हुआ पूजा ने हार नहीं मानी। डेयरी शुरू होने के बाद पूजा ने 35 लोगों को रोजगार दिया और 70 किसानों से दूध आपूर्ति का अनुबंध भी किया। पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का उत्पादन ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के नाम से संचालित इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध और छाछ सहित अन्य उत्पाद मशीन के जरिये तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति जिले के अलावा मथुरा-वृंदावन, हाथरस और अन्य कस्बों तक की जा रही है। पूजा के ससुर इस व्यवसाय को और भी बढ़ाना चाहते हैं। आज लगभग 20 डीलर विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। पूजा ने सभी उत्पादों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन और वितरण की एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई है जिससे उनका यह व्यवसाय तेजी से बढ़ा है और अच्छा मुनाफा भी हुआ है।  महिला उद्यमिता की प्रेरक पहचान बनीं पूजा अक्सर यह धारणा रही है कि विवाह के बाद बहुओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित हो जाती है। आज भी कई स्थानों पर यह सोच कायम है। लेकिन पूजा के साथ ऐसा नहीं हुआ। शादी के बाद उन्हें परिवार का पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।  पूजा ने राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक किया। शुरू से उनकी इच्छा व्यवसाय करने की थी। ससुर और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने डेयरी प्लांट में निवेश का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित भी किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। आज 35 से अधिक लोग दूध संग्रह कर डेयरी तक पहुंचा रहे हैं। पूजा चौधरी की यह यात्रा ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली हर महिला के लिए प्रेरणास्रोत है, जिन्होंने आत्मनिर्भर बनकर उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त पहचान स्थापित की है।

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के छात्रों को कक्षा 1 से 8 तक मिलेगा फ्री दूध, बड़ी खुशखबरी

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को डॉ. अंबेडकर नगर (महू) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को दूध उपलब्ध कराने का भी एलान किया। सीएम ने बताया कि अगले एकेडमिक सेशन से बच्चों के लिए ये व्यवस्था कर दी जाएगी। सीएम ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि 'हमारी सरकार गरीब, महिला, युवा, किसान सबकी बेहतरी के लिए है। हम तो दूध का उत्पादन बढ़ाने वाले लोग हैं। ऐसे में स्कूल के अंदर, सरकारी स्कूलों में भी कक्षा 1 से लेकर 8 तक बच्चों को अगले सत्र से दूध पिलाने की व्यवस्था सरकार के माध्यम से करने वाले हैं।' बजट में भी हो चुका इसका एलान विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 16 फरवरी को छठवीं बार बजट पेश किया था जिसमें बच्चों को दूध देने की बात कही गई थी। बजट भाषण के दौरान उन्होंने जानकारी दी थी कि बच्चों को टेट्रा पैक में दूध दिया जाएगा। महू-खंडवा रेलवे लाइन जल्द सीएम ने जानकारी दी है कि 'भविष्य की दृष्टि से सर्वसुविधायुक्त 'सांदीपनि विद्यालय' पूरे प्रदेश में बन रहे हैं। आने वाले समय में महू-खंडवा रेलवे लाइन प्रारंभ होने से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और क्षेत्र के विकास को गति भी मिलेगी। राज्य में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहित कर निवेशकों को इंडस्ट्री ग्रोथ के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार हर क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।' टेंपल मैनेजमेंट के लिए एकेडमिक कोर्स सीएम ने जानकारी दी है कि 'सरकार ने विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर टेंपल मैनेजमेंट के लिए एकेडमिक कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके जरिए मंदिर प्रबंधन को पेशेवर और रोजगारपरक बनाया जाएगा।' आपको बता दें कि मुख्यमंत्री इंदौर जिले के महू विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत महूगांव में 85 करोड़ रुपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, विधायक सुश्री उषा ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू: 9वीं से 12वीं तक बच्चों को प्रतिदिन 200 ग्राम दूध मिलेगा

चंडीगढ़ देसां म्ह देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाना यह कहावत हरियाणा की खानपान संस्कृति और पौष्टिकता को दर्शाती है। हरियाणा में पहली बार सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के प्रति बच्चे को 200 ग्राम दूध सप्ताह में चार दिन मिलेगा। इसके अतिरिक्त एक मिल्कबार या पिन्नी भी शामिल की जाएगी। देश के भविष्य बच्चों के स्वास्थ्य के हितकारी कदम उठाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी के बाद यह लाभकारी योजना सरकारी स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू हो जाएगी।  मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के मार्गदर्शन में योजना को अमलीजामा पहनाने का ब्योरा तैयार किया गया है। अब योजना को बच्चों तक पहुंचाने के लिए आखिरी मंजूरी सीएम नायब सिंह सैनी ने दे दी है। मिड-डे-मील के तहत सरकारी स्कूलों में पोषण पदार्थ बच्चों को देने की व्यवस्था आठवीं कक्षा तक लागू है। 6.20 लाख बच्चों को मिलेगा लाभ प्रदेशभर में तकरीबन 14,300 सरकारी स्कूल संचालित है। वर्तमान में 9वीं से 12वीं कक्षा तक तकरीबन 6.20 लाख विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में इस योजना का लाभ सभी बच्चों को मिलेगा। हालांकि, आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की संख्या में कमी या वृद्धि होने के मद्देनजर योजना को लागू करने की तैयारी की गई है। 35 से 40 करोड़ रुपये की सालाना लागत शिक्षा विभाग के अनुसार इस योजना को लागू करने के लिए पैक्ड दूध की खरीद की जाएगी। इसके लिए खाद्य व आपूर्ति विभाग के साथ एमओयू साइन किया जाएगा। ताकि दूध की आपूर्ति की जिम्मेदारी विभाग की ओर से निर्धारित की जा सके। साथ ही स्कूल स्तर पर सप्ताह में चार दिन तक बच्चों को दूध के वितरण की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से तय की जाएगी। बढ़ती उम्र में दूध के अनेक फायदे सप्ताह में चार दिन तक किसी बच्चे को 200 ग्राम (लगभग एक गिलास) दूध देने से कई महत्वपूर्ण फायदे मिल सकते हैं, खासकर बढ़ती उम्र में यह और भी आवश्यक है। यदि किसी बच्चे को दूध से एलर्जी या पाचन समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। दूध में कैल्शियम और विटामिन डी होता है जो हड्डियों की मजबूती और सही लंबाई बढ़ाने में मदद करता है। प्रोटीन, विटामिन-बी और अच्छे फैट्स बच्चों की याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक विकास में सहायक होते हैं। दूध से मिलने वाला प्रोटीन मांसपेशियों के विकास और रोजमर्रा की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। वहीं, दूध में मौजूद पोषक तत्व बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाते हैं जिससे वे जल्द बीमार नहीं पड़ते और नियमित दूध से जरूरी पोषण मिलता है जिससे कमजोरी व पोषण की कमी कम होती है। -डॉ. सनी मेहता, जीएमएसएच-16, चंडीगढ़।

प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों की शुद्धता जांचने के लिए बनाई गई हाईटेक डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला

भोपाल  दूध और दूध से जुड़े डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता जांचने के लिए प्रदेश में पहली बार हाईटेक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है। केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट परियोजना द्वारा स्वीकृत यह लैब राज्य की पहली प्रयोगशाला होगी, जहां दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच हो सकेगी। भारत सरकार ने दिया 12.40 करोड़ का अनुदान प्रयोगशाला के निर्माण के लिए भारत सरकार ने 12.40 करोड़ का अनुदान दिया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, शेष की खरीदी प्रक्रिया जारी है। MP की इस हाइटेक प्रयोगशाला में दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटि‚स, हेवी मेटल्स जैसी कई जांच हो सकेंगी। राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता भी दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि आपके घर में आने वाले दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, जहां आम उपभोक्ता के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित प्रयोगशाला के निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स एवं ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही दूध एवं दुग्ध पदार्थों के परीक्षण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 100 से अधिक मानकों पर होगा परीक्षण राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आम उपभोक्ता और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस प्रयोगशाला की सुविधा आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देश की विभिन्न खाद्य उत्पादक संस्थाओं को भी उपलब्ध होगी। इसके स्थापित होने से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, शुद्धता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। देशभर की संस्थाओं को मिलेगा लाभ मिलावट की आशंका पर शुद्धता जांचने के लिए लैब का इस्तेमाल आम आदमी से लेकर देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं कर सकेंगी। यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के वियीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी।

राजस्थान में 2 रुपए घटे सरस दूध के भाव

जयपुर. सवाई माधोपुर एवं करौली जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरस दूध की कीमतों में कमी की घोषणा की है। संघ के प्रबंध संचालक सुरेश कुमार सेन ने बताया कि दुग्ध क्रय दरों में कमी होने के कारण यह निर्णय किया है। अब सरस गोल्ड दूध का एक लीटर पैक 68 रुपए में और टीएम दूध का एक लीटर पैक 52 रुपए में उपलब्ध होगा। पहले इनकी कीमत क्रमशः 70 रुपए और 54 रुपए थी। नई दरें 13 जनवरी से लागू होंगी और उपभोक्ता सरस बूथ व शॉप एजेंसियों से दूध प्राप्त कर सकेंगे। गुणवत्ता पर विशेष जोर संघ ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में कमी के बावजूद दूध की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं तक शुद्ध और पौष्टिक दूध पहुंचाना ही संघ का उद्देश्य है। दूध की कीमतों में कमी से आमजन को सीधी राहत मिलेगी। रोजाना सरस दूध का उपयोग करने वाले परिवारों के लिए यह निर्णय आर्थिक दृष्टि से सहायक साबित होगा। संघ के अनुसार उपभोक्ताओं को उचित दर पर गुणवत्तायुक्त दूध उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। साथ ही किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की दरों में आई कमी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

सिर्फ चुटकीभर हल्दी और दूध! जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे जो सर्दियों में रखेंगे आपको फिट

अक्सर कुछ लोग स्वाद के चक्कर में हल्दी वाला दूध पीने से कतराते हैं, लेकिन अगर आप इसके जादुई फायदों को जान लेंगे, तो आज रात से ही इसे पीना शुरू कर देंगे। आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण कि क्यों चुटकीभर हल्दी आपकी सेहत बदल सकती है। जोड़ों के दर्द का रामबाण इलाज सर्दियों में अक्सर पुराने दर्द फिर से उभर आते हैं, खासकर घुटनों और जोड़ों का दर्द। हल्दी में प्राकृतिक रूप से 'एंटी-इंफ्लेमेटरी' गुण होते हैं, यानी यह शरीर की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करती है। रोज रात को गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीने से यह एक नेचुरल पेनकिलर का काम करती है और आपकी हड्डियों को मजबूती देती है। सर्दी-जुकाम और खांसी की छुट्टी बदलते मौसम में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम जल्दी पकड़ लेता है। हल्दी वाला दूध शरीर में गर्मी पैदा करता है और कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश और सीने की जकड़न से तुरंत राहत दिलाते हैं। यह आपको अंदर से इतना मजबूत बना देता है कि छोटी-मोटी बीमारियां पास भी नहीं आतीं। नींद की गोली से बेहतर है यह उपाय क्या आप रात भर करवटें बदलते रहते हैं और नींद नहीं आती? तो दवाइयां लेने के बजाय आज रात हल्दी वाला दूध पीकर देखें। जी हां, दूध में ट्रिप्टोफैन और हल्दी में मौजूद तत्व दिमाग को शांत करते हैं और तनाव को कम करते हैं। इसे पीने के कुछ ही देर बाद आपको गहरी और सुकून भरी नींद आ जाएगी। चेहरे पर आएगा कुदरती निखार महंगी क्रीम लगाने से बेहतर है कि आप अपने शरीर को अंदर से साफ करें। हल्दी एक बेहतरीन 'ब्लड प्यूरीफायर' है। यह खून से विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है, जिससे कील-मुंहासे कम होते हैं। लगातार इसके सेवन से त्वचा में एक अलग ही चमक आ जाती है, जो किसी भी मेकअप से ज्यादा सुंदर लगती है। पेट रहेगा फिट, तो आप रहेंगे हिट सर्दियों में हम अक्सर तला-भुना खाना खा लेते हैं, जिससे पाचन गड़बड़ा जाता है। हल्दी वाला दूध पाचन तंत्र को सुधारने में मदद करता है। यह पेट में गैस और अपच जैसी समस्याओं को रोकता है। इतना ही नहीं, यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे सर्दियों में वजन बढ़ने का डर भी कम हो जाता है। सेहतमंद रहने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है, बस रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाएं और पी लें। यह छोटी-सी आदत आपको सर्दियों में बीमारियों और दर्द से दूर रखेगी।