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पीएम मोदी की सहानुभूति पर चीन की प्रतिक्रिया, संकट में सहयोग की सराहना

नई दिल्ली  चीन ने अपने शांक्सी प्रांत में हुए भीषण कोयला खदान हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम कई लोगों की जान जा चुकी है और दो लोग अभी भी लापता हैं। भारत में चीन के राजदूत जू फेईहोंग ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी के पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की सहानुभूति और समर्थन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। भारत का समर्थन हमारे लिए महत्वपूर्ण चीनी राजदूत जू फेईहोंग ने पीएम मोदी के संदेश के लिए उनका धन्यवाद करते हुए एक्स पर लिखा कि शांक्सी प्रांत में खदान दुर्घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवेदना संदेश के लिए हम उनकी सराहना करते हैं। इस कठिन समय में भारत के लोगों की सहानुभूति और समर्थन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। हमारी संवेदनाएं पीड़ितों, लापता लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम बचाव और राहत कार्यों में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवेदना संदेश इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को इस हादसे पर अपना शोक संदेश भेजा था। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था कि चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान दुर्घटना में लोगों की मौत से दुखी हूं। भारत के लोगों की ओर से, राष्ट्रपति शी चिनफिंग और चीन के लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ईश्वर शोक संतप्त परिवारों को इस दुखद घड़ी में शक्ति प्रदान करे। मैं शेष सभी लापता व्यक्तियों के शीघ्र और सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना करता हूं। शुक्रवार शाम को हुआ था भयानक विस्फोट चीनी अधिकारियों के अनुसार, यह गैस विस्फोट शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 7:29 बजे किनयुआन काउंटी की लियुशेनयु कोयला खदान में हुआ था। शनिवार को अधिकारियों ने पुष्टि की कि हादसे में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य लापता हैं। इस घटना में घायल कुल 128 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिनमें से दो की हालत बेहद नाजुक और दो की गंभीर बनी हुई है कंपनी की लापरवाही आई सामने घटना की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि खदान के भीतर जहरीली और हानिकारक गैसें लंबे समय तक सुरक्षित सीमा से अधिक बनी हुई थीं, जिससे दोबारा आपदा होने की आशंका बढ़ गई थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि खदान का संचालन करने वाली कंपनी द्वारा कानूनों का गंभीर उल्लंघन किए जाने की बात सामने आई है। सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, किनयुआन का प्रशासन संभालने वाले चांगझी शहर के मेयर चेन शियांगयांग ने बताया कि कंपनी के जिम्मेदार लोगों को नियंत्रण में ले लिया गया है। इसके साथ ही, व्यापक सुरक्षा जांच पूरी होने तक कंपनी की कोयला खदानों में उत्पादन पूरी तरह से रोक दिया गया है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दिए सख्त जांच के आदेश चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों को बचाने और घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के लिए चौतरफा प्रयास करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने विस्फोट के कारणों की गहन जांच करने और कानून के अनुसार जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। जांच टीम ने कहा है कि वे दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाएंगे, स्थानीय अधिकारियों, उद्योग रेगुलेटर्स और संबंधित कंपनी की जिम्मेदारियों की जांच करेंगे और प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त सजा सुनिश्चित करेंगे।

राजस्थान के मोकलवास में दर्दनाक हादसा: मलबे में दबे मजदूर की तलाश में रेस्क्यू जारी

 जयपुर राजस्थान के नीमकाथाना जिले के मोकलवास में गुरुवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब झरिंड़ा स्थित एक क्रेशर खदान में भीषण भूस्खलन के कारण पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे आ गिरा. इस हादसे में 4 मजदूर भारी पत्थरों और मशीनों के नीचे दब गए. राहत की बात यह रही कि 3 मजदूरों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन 1 मजदूर अब भी करीब 12 घंटों से खान के भीतर फंसा हुआ है. शुक्रवार सुबह होते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी ताकत झोंक दी है. अंधेरे और मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें मलबे के नीचे दबे चौथे मजदूर दयालचंद का रात भर पता नहीं चल सका. रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती रात का घना अंधेरा और खराब मौसम रहा. संसाधनों की कमी और दोबारा भूस्खलन के खतरे को देखते हुए बचाव कार्य को बीच में रोकना पड़ा, जिसके कारण दयालचंद पूरी रात मलबे के नीचे ही फंसा रहा. प्रतापगढ़ का निवासी है फंसा हुआ मजदूर मलबे में फंसे मजदूर की पहचान प्रतापगढ़ जिले के निवासी के रूप में हुई है. दयालचंद खदान में मशीनरी संचालन का कार्य कर रहा था, तभी अचानक गिरी चट्टानों ने उसे और मशीनों को अपनी चपेट में ले लिया. परिजनों और स्थानीय प्रशासन की सांसें अब शुक्रवार सुबह शुरू हुए इस अंतिम दौर के रेस्क्यू पर टिकी हैं. NDRF की टीम मौके पर पहुंची हादसे की गंभीरता को देखते हुए नीमकाथाना एडीएम (ADM) भागीरथमल साख और एएसपी (ASP) लोकेश मीणा भारी पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर डटे हुए हैं. रेस्क्यू को गति देने के लिए NDRF की टीम भी झरिंड़ा गांव पहुंच चुकी है. आधुनिक कटर और भारी मशीनों की मदद से विशालकाय पत्थरों को हटाने का काम अब युद्धस्तर पर किया जा रहा है.

खदान हादसा बढ़ा भयावह, सोनभद्र में मलबे में दबे मजदूरों की तलाश जारी

 सोनभद्र उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में ढही एक पत्थर खदान के मलबे से पांच और शव बरामद हुए हैं. इस तरह हादसे में मरने वालों की संख्या छह हो गई है. जिला मजिस्ट्रेट बीएन सिंह ने बताया कि रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात को ये शव बरामद किए गए. पिछले 48 घंटे से रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.   न्यूज एजेंसी के अनुसार, मृतक की पहचान ओबरा के पनारी निवासी इंद्रजीत (30) के रूप में हुई है. अन्य मृतकों की पहचान इंद्रजीत के भाई संतोष यादव (30), रविंद्र उर्फ ​​नानक (18), रामखेलावन (32) और कृपाशंकर के रूप में हुई है. राजू सिंह (30) का शव रविवार को बरामद किया गया.  प्रदेश के मंत्री और स्थानीय विधायक संजीव कुमार गोंड ने शनिवार शाम को खदान ढहने के बाद बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में घटनास्थल का दौरा किया था. उन्होंने ने कहा, "लगभग एक दर्जन मज़दूर मलबे में दबे हो सकते हैं." वहीं, वाराणसी जोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पीयूष मोर्डिया ने रविवार को कहा कि भारी पत्थरों की मौजूदगी के कारण मलबा हटाने में समय लग रहा है. सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिषेक वर्मा ने बताया कि उन्हें शनिवार शाम करीब 4.30 बजे ओबरा थाने में घटना की सूचना मिली. फोन करने वाले ने बताया कि कृष्णा माइनिंग वर्क्स द्वारा संचालित एक पत्थर खदान का एक हिस्सा ढह जाने से कई मजदूर मलबे में दब गए.  एसपी के मुताबिक, पुलिस ने परसोई टोला निवासी छोटू यादव की शिकायत पर कृष्णा माइनिंग वर्क्स के मालिक और उनके व्यापारिक साझेदारों मधुसूदन सिंह और दिलीप केशरी (दोनों ओबरा निवासी) के खिलाफ मामला दर्ज किया है. तीनों आरोपियों की अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है.  उधर, समाजवादी पार्टी के रॉबर्ट्सगंज सांसद छोटेलाल खरवार ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से माफिया द्वारा खदान को अवैध रूप से चलाया जा रहा था. उन्होंने कहा, "पत्थरों के नीचे 12 से 15 लोगों के दबे होने की आशंका है. इस इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. हर महीने एक-दो ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन खनन माफिया कैसे सब कुछ संभाल लेते हैं." सपा सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध खनन किया जा रहा है. खरवार ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें फंसे खदान मजदूरों के परिजनों से मिलने से रोका. उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे और प्रत्येक परिवार के लिए एक सरकारी नौकरी की भी मांग की.