samacharsecretary.com

विधानसभावार कृषि सम्मेलन के लिए कृषि विभाग देगा 5 लाख रुपए

प्रत्येक विधानसभा में आयोजित होंगे कृषि सम्मेलन डेढ़ साल में प्रदेश का दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर हुआ 12.50 लाख लीटर प्रतिदिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री द्वय श्री जगदीश देवड़ा और श्री राजेन्द्र शुक्ल सहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पवार सहित मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि, एफपीओ के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मध्यप्रदेश के पुराने विधानसभा भवन का पवित्र स्थान है। इस स्थान पर कृषक कल्याण योजनाओं पर केन्द्रित कार्यशाला राज्य सरकार के कृषि क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।उन्हें साकार करने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध कलेक्शन 25 प्रतिशत बढ़ा है। अब प्रदेश में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध कलेक्शन किया जा रहा है। दूध का मूल्य भी 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र में नरवई प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीन उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण के लिए माता यशोदा योजना शुरू करने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्रों की दुकानें खुलेंगी, जिनसे लघु कृषकों को खेती के लिए किराये पर यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करें, इसके लिए कृषि विभाग ने प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपए आवंटित करने का निर्णय किया है। इन प्रयासों से कृषि कल्याण के लिए सकारात्मक वातावरण बनेगा। किसान सौर बिजली उत्पादन की सभी योजनाओं का लाभ उठाएं। लघु-कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए भी कार्य करें। प्रदेश प्रभारी श्री महेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश अब हजार और लाख में नहीं, मिलियन, बिलियन और ट्रिलियन में बात करने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से कृषि में चौथे स्थान पर है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश कई खाद्यान्नों के उत्पादन में देश में, पहले और दूसरे स्थान पर हैं। मध्यप्रदेश चौथे स्थान पर भी रहते हुए देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के किसानों को सस्ती दरों पर बिजली और सिंचाई के लिए पम्प उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 54 लाख हैक्टेयर है। राज्य सरकार ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के सपने को साकार करते हुए सिंचाई का रकबा आगामी वर्षों में 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में दूध एवं डेयरी क्षेत्र में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी के साथ बढ़ी है। इसी प्रकार प्रदेश का बजट वर्ष 2003-24 में 23 हजार था, जो अब 4 लाख 38 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास

म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।  

बड़वानी जिले के जनजातीय बहुल ग्राम नागलवाड़ी में होगी कृषि केबिनेट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष में किसानों के हित में लगातार कार्य किया जा रहा है। हमारा यह संकल्प है कि प्रदेश के अन्नदाताओं को आत्म-निर्भर बनाते हुए उनकी आय को दोगुना किया जाये। इसी क्रम में सोमवार 2 मार्च को जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि केबिनेट होने जा रही है। इस दिन नागलवाड़ी से ही सरकार किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेगी। राज्य सरकार का मंत्री-मंडल पूरा दिन नागलवाड़ी में रहेगा, जहाँ कृषि केबिनेट सहित प्रबुद्धजन एवं किसानों के साथ संवाद होगा और कृषि एवं जनजातीय कल्याण पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। लगभग 6 हजार की जनसंख्या वाला ग्राम नागलवाड़ी जनजातीय बहुल ग्राम है। यहाँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में होने वाली कृषि केबिनेट न केवल बड़वानी जिले अपितु पूरे निमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए निर्णायक साबित होगी। नागलवाड़ी स्थित 800 वर्ष पुराना प्राचीन भिलट देव मंदिर जनजातीय आस्था में विशेष महत्व रखता है। कृषि केबिनेट के बाद पूरा मंत्री-मंडल इस मंदिर में दर्शन भी करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि केबिनेट के बाद किसानों और प्रबुद्धजन से संवाद भी करेंगे। संवाद के दौरान एक ओर प्रदेश एवं किसानों के हित में किये जा रहे कार्यों एवं योजनाओं को साझा किया जायेगा, वहीं क्षेत्र विकास के लिये किसानों एवं प्रबुद्धजन के विचारों और उनकी अपेक्षाओं को जाना जायेगा। कार्यक्रम स्थल पर जनजातीय विकास और कृषि आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं मंत्रि-परिषद के सदस्य जनजातीय समाज के जुलवानिया में आयोजित भगोरिया हाट की परम्परा में भी शामिल होंगे। केबिनेट के अलावा होने वाले सभी कार्यक्रमों में जनजातीय परम्परा की स्पष्ट झलक दिखाई देगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना मप्र

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ अत्यंत गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के साथ मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। मध्यप्रदेश विधान सभा में मंगलवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध रूप से संतुलित और परिणामोन्मुखी है। प्रमुख बिंदु 1. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹15,02,428 करोड़ की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹7,81,911 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹7,23,724 करोड़ की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। 3. वित्तीय वर्ष 2011-12 से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹76,971 हो गई, जो वास्तविक आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। 4. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) की क्षेत्रीय संरचना प्रचलित मूल्यों पर इस प्रकार रही—प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत। 5. स्थिर (2011-12) मूल्यों पर इनकी हिस्सेदारी क्रमशः प्राथमिक क्षेत्र 33.54 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र 26.18 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र 40.28 प्रतिशत रही। 6. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 43.09 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 33.54 प्रतिशत रही। प्रचलित मूल्यों पर इस क्षेत्र का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹6,33,532 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹6,79,817 करोड़ हो गया, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 7. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत फसलों का सर्वाधिक योगदान 30.17 प्रतिशत रहा, इसके बाद पशुधन 7.22 प्रतिशत, वानिकी 2.13 प्रतिशत, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि 0.61 प्रतिशत तथा खनन एवं उत्खनन 2.96 प्रतिशत रहा। 8. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 19.79 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 26.18 प्रतिशत रही। द्वितीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹2,84,125 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹3,12,350 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 9.93 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 6.87 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 9. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान 9.22 प्रतिशत रहा, इसके बाद विनिर्माण का 7.22 प्रतिशत तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं का 3.35 प्रतिशत योगदान रहा। 10. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 37.12 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 40.28 प्रतिशत रही। तृतीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹5,05,679 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹5,85,588 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 15.80 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 12.07 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 11. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट का सर्वाधिक योगदान 10.35 प्रतिशत रहा। इसके पश्चात अन्य सेवाएँ 7.80 प्रतिशत, अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ 4.98 प्रतिशत, लोक प्रशासन 4.96 प्रतिशत, वित्तीय सेवाएँ 3.73 प्रतिशत, परिवहन एवं भंडारण 2.80 प्रतिशत, संचार एवं प्रसारण संबंधी सेवाएँ 1.68 प्रतिशत तथा रेलवे का 0.82 प्रतिशत योगदान रहा। अन्य क्षेत्रों में प्रमुख उपलब्धियाँ लोक वित्त, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2,618 करोड़ के राजस्व आधिक्य का अनुमान है। राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व प्राप्तियाँ GSDP के 17.16 प्रतिशत के बराबर आंकी गई हैं। कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि अपेक्षित है तथा ऋण–GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि एवं ग्रामीण विकास वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 7.66 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्यानिकी क्षेत्र 28.39 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 425.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा। कुल 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवास पूर्ण किए गए। औद्योगिक विकास, एमएसएमई एवं अधोसंरचना द्वितीयक क्षेत्र में 9.93 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिनमें ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश से लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता ₹22,162 करोड़ रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप तथा 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। सीएसआर व्यय ₹2,600.47 करोड़ रहा तथा पर्यटन आगमन 13.18 करोड़ रहा। नगरीय विकास अमृत 2.0 के अंतर्गत ₹24,065 करोड़ का आवंटन किया गया, जिसमें 1,134 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण किए गए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को आठ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2021-22 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय ₹34,112 करोड़ रहा, जो GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। मातृ मृत्यु अनुपात 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गया। शिक्षा एवं कौशल विकास वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.00 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जबकि कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को SWAYAM पोर्टल पर मॉडल राज्य घोषित किया गया। तकनीकी संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। मुख्यमंत्री मेधावी योजना के अंतर्गत 45,668 विद्यार्थियों को ₹500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया भवन विकास निगम के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 पोर्टल लाँच

भगवान विश्वकर्मा का साक्षात् अवतार हैं इंजीनियर्स सड़क एवं भवन विकास कार्यों के लिए म.प्र. शासन के साथ हुए 4 एमओयू पीडब्ल्यूडी की प्रशिक्षण कार्ययोजना 2026-27, न्यूज लेटर सहित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान एवं बजट मॉड्यूल का भी हुआ विमोचन पिछले 2 वर्ष में लोक निर्माण विभाग ने अपने कार्यों के आधार पर बनाई विशिष्ठ पहचान   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निर्माण सिर्फ ईंट–पत्थर का संयोजन नहीं, एक अभिनव कला है। इसमें उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालिक कार्य योजना को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अब हर निर्माण कार्य में कन्सेप्चुअल और क्वालिटेटिव एप्रोच अनिवार्य रूप से दिखाई देना चाहिए। गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश के विकास के लिए हम सभी को पूरी क्षमता दक्षता से काम करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रवीन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग अन्तर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अभियंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैचारिक प्रतिबद्धता और कार्यशैली में जड़ता से बचने और बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रखने के लिए कौशल संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं अभियंताओं की स्किल्स को रिफ्रेश करती हैं और उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों में दीर्घकालिक दृष्टि, नवाचार और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से लोक निर्माण विभाग नवाचारों को धरातल पर उतार रहा है। वर्तमान समय में हमारे इंजीनियर्स साक्षात् भगवान विश्वकर्मा के अवतार हैं। लोक निर्माण विभाग ने पिछले 2 वर्षों के कार्यों के आधार पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इस अवधि में सराहनीय कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता के अंतिम अध्याय में ज्ञान और विज्ञान की बात कही गई है, जिसमें मन, बुद्धि और अहंकार के साथ पंच तत्वों की व्याख्या की गई है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर्स की यह कार्यशाला आधुनिक संरचनाओं के निर्माण को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण पहल है। हमारे इंजीनियर्स ने सांदीपनि विद्यालय सहित बड़े-बड़े अधोसंरचनात्मक विकास के निर्माण कार्य किए हैं। सड़क, पुल, स्टेडियम और भवन जैसे निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के माध्यम से ही किये जाते हैं। विभागीय इंजीनियर्स की क्षमता संवर्धन के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर्स को अपना काम करने में अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। आज की कार्यशाला में एमपीआईडीसी सहित देश की विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौते हुए हैं। प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग के विकास को लेकर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कार्यों और नवाचारों के लिए लोक निर्माण मंत्री एवं विभाग को बधाई दीं। तकनीक, पारदर्शिता और गुणवत्ता से बदलेगा निर्माण तंत्र : लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विभाग की उस निरंतर सुधार यात्रा का प्रतीक है जिसमें नई सोच, नई प्रणाली और उच्च गुणवत्ता के साथ लोक निर्माण विभाग आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब सोच बदलती है तभी व्यवस्था बदलती है, और यह कार्यशाला विभाग के नवाचारों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में अधोसंरचना विकास को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता, तकनीक और नागरिक सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, डिजिटल इंडिया, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब विकास समन्वित सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने अधोसंरचनात्मक विकास को नई गति और दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि निर्माण केवल संरचना नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है। समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता अब विभाग की कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के लिए 293 इंजीनियर्स के पद भरने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल 2.0 विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकारी भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए एक समग्र मार्गदर्शिका का कार्य करेगा। मंत्री श्री सिंह ने पीएम गति शक्ति पोर्टल आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि सड़कों, पुलों और भवनों का वास्तविक आधार प्रशिक्षित एवं सक्षम मानव संसाधन होता है। इसी उद्देश्य से विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर एक वर्ष का प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया है, जिसमें प्रत्येक त्रैमास के लिए सड़क, पुल, भवन, पर्यावरण और नवीन तकनीकों जैसी थीम निर्धारित की गई हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप निर्मित करने के निर्देशों के पालन में त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियंताओं को इस विषय पर प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया है, जो विभाग की सकारात्मक कार्य संस्कृति का उदाहरण है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के कार्यों के लिए ट्री शिफ्टिंग की एक कार्यशाला भी बहुत जल्द आयोजित की जाएगी। भास्कराचार्य संस्थान ने लोक निर्माण विभाग के 500 से अधिक लोक कल्याण सरोवरों की कार्य योजना तैयार कर ली है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों का औचक निरीक्षण की शुरुआत की है, जिसे ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों ने अपनाया है। लोक निर्माण तकनीक, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल का विमोचन किया गया तथा पी.एम.एस. पोर्टल-2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को प्रेजेंटेशन के साथ लाँच किया गया। साथ ही, … Read more

पंचमढ़ी नगर के नजूल क्षेत्र को पंचमढ़ी अभयारण्य क्षेत्र से बाहर कर राजस्व नजूल घोषित करने की स्वीकृति

नर्मदापुरम जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 215 करोड़ 47 लाख रूपये की स्वीकृति “अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार नियोजन योजना 2025” की स्वीकृति जनजातीय कार्य, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और राजस्व विभाग की योजनाओं के लिए 17,864 करोड़ 26 लाख रूपये की स्वीकृति टाइगर रिज़र्व के अंतर्गत बफर क्षेत्रों के विकास लिए 390 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा पंचमढ़ी नगर के साडा के नियंत्रण वाली नजूल क्षेत्र रकबा 395.931 हैक्टेयर भूमि को संशोधित कर रकबा 395.939 हैक्टेयर भूमि को पचमढ़ी अभयारण्य क्षेत्र से बाहर कर राजस्व नजूल घोषित करने की स्वीकृति दी गयी है। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के 9 टाइगर रिज़र्व के अंतर्गत बफर क्षेत्रों का विकास करने के लिए आगामी 5 वर्षों, वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 390 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस नवीन योजना अंतर्गत बफर क्षेत्रों के विकास के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में चेनलिंक फेसिंग, वन्यप्राणी सुरक्षा, चारागाह विकास, जल स्त्रोतों का विकास, अग्नि सुरक्षा, वन्य प्राणी उपचार एवं स्वास्थ्य परीक्षण और कौशल उन्नयन जैसे कार्य किये जायेंगे। मंत्रि-परिषद द्वारा नर्मदापुरम में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 215 करोड़ 47 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार तवा परियोजना (दायीं तट नहर) की बागरा शाखा नहर होज सिंचाई परियोजना की लागत 86 करोड़ 76 लाख रूपये, प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र 4200 हैक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी। परियोजना से नर्मदापुरम जिले की बाबई एवं सोहागपुर तहसील के 33 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ होगा। नर्मदापुरम जिले की तवा परियोजना की दांयी तट नहर से पिपरिया ब्रांच केनाल होज सिंचाई परियोजना की लागत 128 करोड़ 71 लाख रूपये, प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र 6000 हैक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना से नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील के 30 ग्राम लाभान्वित होंगे। मंत्रि-परिषद द्वारा जनजातीय कार्य विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और राजस्व विभाग की वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 की अवधि के लिए 17 योजनाओं की निरंतरता के लिए 17,864 करोड़ 26 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अुनसार जनजातीय कार्य विभाग की शुल्क की प्रतिपूर्ति, परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण, स्काउट गाइड, परिवहन, स्वास्थ्य, विभिन्न पुरस्कार आदि 15 योजनाओं के लिए 377 करोड़ 26 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। इसी तरह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता के लिए 15 हजार करोड़ रूपये और राजस्व विभाग की तहसील, जिला संभाग के कार्यालय एवं आवासीय भवन का निर्माण योजनाओं के लिए 2,487 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा पिछड़े वर्ग के “बेरोजगार युवक-युवतियों को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना 2022” के स्थान पर संशोधित योजना “अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार नियोजन योजना 2025” की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अनुसार आगामी 3 वर्ष में 45 करोड़ रुपये व्यय किया जाकर प्रतिवर्ष पिछड़े वर्ग के 600 युवाओं को रोजगार के लिए विदेश भेजा जाएगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 4 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए हुए अनुबंध (एमओयू)

राज्य की प्रगति और उन्नति के लिए पर्याप्त विद्युत उपलब्धता आवश्यक बिजली, प्राणों की समान है महत्वपूर्ण 60 हजार करोड़ रूपए लागत के यह समझौते प्रदेश के स्थाई विकास का बनेंगे आधार अनूपपुर में स्थापित होंगे नए पॉवर हाउस टोरेंट, अदाणी और हिन्दुस्थान थर्मल ने एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के साथ किया अनुबंध भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बिजली का महत्व शरीर में प्राणों की समान है। जैसे समस्त गतिविधियों के संचालन के लिए शरीर में प्राण आवश्यक है, वैसे ही किसी भी राज्य की प्रगति और उन्नति के लिए पर्याप्त विद्युत उपलब्धता आवश्यक है। प्रदेश में 60 हजार करोड़ रूपए की लागत से 4 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए हुए समझौते प्रदेश के स्थाई विकास का आधार बनेंगे। इससे प्रदेश में कुल विद्युत उपलब्धता में बढ़ोत्तरी होने के साथ-साथ बिजली की मांग की शत-प्रतिशत आपूर्ति संभव होगी। डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (डीबीएफओओ) मॉडल पर स्थापित होने वाले इन नए विद्युत संयंत्रों से लगभग 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में 4 हजार मेगावॉट बिजली के पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई ने अनुबंध के संबंध में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले तथा टोरेंट पॉवर लिमिटेड के श्री जिगिश मेहता, अदानी पॉवर लिमिटेड के श्री एस.बी. खिलया तथा हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स के श्री रतुल पुरी के बीच पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट का आदान-प्रदान हुआ। यह नए पॉवर हाउस अनूपपुर में स्थापित होंगे। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग समूह के प्रतिनिधियों ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग मित्र नीतियों, सशक्त अधोसंरचना और सुशासन आधारित व्यवस्था के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश -विदेश के निवेशकों और औद्योगिक समूहों के लिए पहली प्राथमिकता बनता जा रहा है। विद्युत उत्पादन में भूमि-जल- पर्यावरण-कोयला- रेलवे लाइन आदि का बेहतर समन्वय आवश्यक है। इन सब आधारों पर मध्यप्रदेश उपयुक्त है। प्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश को मिला पीएम मित्र पार्क विकास के नए आयाम और रोजगार के भरपूर अवसर प्रदान करेगा। प्रदेश में वर्ष-2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इससे उद्यमिता, स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य सरकार रोजगार परक उद्योगों को विशेष महत्व दे रही है। प्रदेश में उद्योग समूहों की गतिविधियों के विस्तार के लिए पर्याप्त संभावनाएं विद्यमान हैं। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने राज्य में स्थापित किए जाने वाले नए विद्युत संयंत्रों से डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (डीबीएफओओ) के तहत विद्युत दर आधारित प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से 3200 मेगावाट बिजली खरीद के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। इसमें बिजली खरीद के ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 800 मेगावॉट की बिजली खरीद का विकल्प भी शामिल था। इसके अनुसार मेसर्स हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को 800 मेगावॉट, मेसर्स टोरेंट पॉवर लिमिटेड को 1600 मेगावॉट तथा मेसर्स अदानी पॉवर लिमिटेड को 800 मेगावॉट व ग्रीन्शू विकल्प के अंतर्गत अतिरिक्त 800 मेगावॉट क्षमता आवंटित की गई है। टोरेंट द्वारा 24 हजार करोड़ रुपए, अडाणी पॉवर द्वारा 24 हजार करोड़ रुपए तथा हिन्दुस्थन थर्मल द्वारा 12 हजार करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इन सभी क्षमताओं के लिये विद्युत आपूर्ति अनुबंध संबंधित चयनित विकासकों द्वारा गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल्स के साथ किए गए हैं। इन विद्युत आपूर्ति अनुबंधों के अंतर्गत वर्ष 2030 से विद्युत आपूर्ति होना संभावित है।  

जबलपुर को मिलेगा मेट्रोपॉलिटन दर्जा, CM मोहन यादव ने दी सौगात

जबलपुर  स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लौटे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर को इसी वर्ष मेट्रोपॉलिटन सिटी (Jabalpur Metropolitan City) बनाने का बड़ा ऐलान किया। होटल कल्चुरी में उद्योगपतियों और व्यापारियों से संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर और भोपाल में मेट्रोपॉलिटन सिटी की शुरुआत हो चुकी है और प्रदेश के चार बड़े महानगरों में शामिल जबलपुर को इससे अलग नहीं रखा जा सकता। जबलपुर के विकास का मास्टर प्लान तैयार- सीएम मुख्यमंत्री ने बताया कि जबलपुर के समग्र विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिसमें शहर से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी नगरों को शामिल किया जाएगा। इससे औद्योगिक, व्यावसायिक और आधारभूत ढांचे का समन्वित विकास संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि जबलपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां फूड सेक्टर व गारमेंट उद्योग को जल्द बड़ी सौगात नदी दी जाएगी। पर्यटन, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं है, जिन पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने जबलपुर के विकास को लेकर अपने विचार रखे। इससे पहले महाकौशल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रवि गुप्ता सहित व्यापारिक संगठनों ने मुख्यमंत्री का सम्मान किया। इस अवसर पर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, विधायक अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे सहित बड़ी संख्या में व्यापारी व उद्योगपति मौजूद रहे। मध्यप्रदेश में सबसे सस्ती बिजली मुख्यमंत्री ने बताया कि दावोस में 200 से अधिक देशों ने भाग लिया, जिसमें फोकस भारतीय प्रतिनिधिमंडल पर रहा। भारत सरकार के साथ 10 राज्यों ने सहभागिता की, जिसमें मध्यप्रदेश विशेष रूप से उभरकर सामने आया। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। पवन और सोलर ऊर्जा के माध्यम से प्रदेश में 2.10 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। यह सबसे सस्ती है। 118 हिन्दू व 3 मुस्लिम जोड़ों का विवाह-निकाह सदर गैरीसन ग्राउंड में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह और निकाह योजना के अंतर्गत 121 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। इनमें 118 हिन्दू और 3 मुस्लिम जोड़े शामिल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवदंपतियों और उनके परिजन पर फूल बरसाकर आशीर्वाद दिया तथा एक जोड़े को 51 हजार रुपए का सांकेतिक चेक प्रदान किया। इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं दीं। मंत्री राकेश सिंह ने सभी जोड़ों को एक-एक फ्रिज भेंट किया। आयोजन में नगर निगम का भी सहयोग रहा। कार्यक्रम में सांसद आशीष दुबे, राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीकि, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अभिलाष पांडे, अशोक रोहाणी, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, अश्विनी परांजपे, स्वामी राघवदेवाचार्य, साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। गौरीघाट तक किया रोड-शो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा (Union Minister JP Nadda) ने झंडा चौक से गौरीघाट तक रोड-शो किया। इस दौरन लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। रोड-शो में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे और विधायक और भाजपा पदाधिकारी शामिल हुए। शहर प्रवास के दौरान नड्डा एवं मुख्यमंत्री उजारपुरवा स्थित जल मंदिर (बावड़ी) देखने गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  सरस्वती घाट पर आयोजित दादा गुरु के प्रकटोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने सनातन संस्कृति, मां नर्मदा की महिमा और विज्ञान व अध्यात्म पर विचार रखे। इस मौके पर प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, विधायक अशोक रोहाणी मौजूद थे।

दावोस में नजर आया मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की गति का सकारात्मक प्रभाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश सरकार की उद्योग हितैषी नीतियों से दावोस बैठक बनी महत्वपूर्ण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पिछले 2 वर्ष में जितनी तीव्र गति से औद्योगिक विकास हुआ है उसका सकारात्मक प्रभाव दावोस में दिखाई दिया है। दावोस में विभिन्न क्षेत्रों के बड़े उद्योगपतियों और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और चर्चा हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में विभिन्न इंटरशेनल कम्पनियों के साथ हुई बैठकों के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त की। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश का पावर हब बन चुका है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2026 में भारत का सबसे बड़ा दल पहुंचा है। आज भारत सभी क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है और बहुत जल्द चौथी सबसे सशक्त आर्थिक ताकत से एक से डेढ़ वर्ष में विश्व में तीसरा स्थान हासिल कर लेगा। बदलाव के इस दौर में मध्यप्रदेश में सोलर एनर्जी, आईटी, टूरिज्म सहित सभी सेक्टर्स में विकास की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश का पावर हब बन चुका है। प्रदेश में पंप स्टोरेज, सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। ओंकारेश्वर में बांध के पानी पर सोलर प्लेट बिछाकर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में 32 लाख किसानों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर पंप बांटे जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि देश में नवकरणीय ऊर्जा के माध्यम से उत्पादित सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश उपलब्ध करवा रहा है। प्रदेश के इस मॉडल को समझने और अध्ययन करने के लिए लोग काफी उत्साहित हैं। मालदीव के साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है मध्यप्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दावोस इकोनॉमिक फोरम में मालदीव के मंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मोहम्मद सईद के साथ अलग-अलग विषयों पर चर्चा हुई। उद्योग क्षेत्र में साझोदारी के लिए डॉ. सईद ने बताया कि उनके देश में टूरिज्म के अलावा मत्स्य पालन, आईटी, हेल्थ जैसे अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति ने पूर्व में काफी ठोस निर्णय लिए हैं। मध्यप्रदेश सरकार मालदीव के साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी समय में वे स्वयं मालदीव की यात्रा करेंगे और वहां विकास के लिए परस्पर साझेदारी की संभावनाओं को तलाशेंगे। मालदीव भी भारत के साथ मिलकर आगे बढ़ने में रुचि रखता है। मालदीव के स्थानीय लोगों और वहां रहने वाले भारतवंशियों के परस्पर बेहतर सांस्कृतिक संबंध हैं। मध्यप्रदेश तेज गति से औद्योगिक विकास करने वाला सबसे युवा राज्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में एग्रीकल्चर पॉल्ट्री के क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं हैं। भविष्य में इस दिशा में भी अन्य राज्यों के साथ व्यापार को आगे बढ़ाएंगे। मध्यप्रदेश के पास पर्याप्त लैंड बैंक है, पर्याप्त बिजली है। ट्रांसपोर्टेशन के मामले में भी हमारा राज्य, भारत के मध्य में स्थित होने के कारण अनुकूल है। अब कई क्षेत्रों के निवेशक मध्यप्रदेश का रुख कर रहे हैं। उद्योग एवं व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए एमओयू हस्ताक्षरित हुआ है। मध्यप्रदेश सबसे तेज गति से औद्योगिक विकास करने वाला राज्य बना है। देश के 3 प्रमुख राज्यों ने औद्योगिक गति को बढ़ाया है, उनमें मध्यप्रदेश सबसे युवा राज्य है। बीते 2 वर्ष में राज्य सरकार के इन प्रयासों से प्रदेश में बेरोजगारी दर एक प्रतिशत के आसपास आ गई है। प्रदेश के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हो रहे प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं।  

दावोस में मध्यप्रदेश का मजबूत प्रदर्शन: CM मोहन यादव निवेश और ग्रीन ग्रोथ पर ग्लोबल रोडमैप पेश करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF), दावोस के वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं, औद्योगिक क्षमताओं और दीर्घकालिक विकास दृष्टि को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। दावोस में वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश की स्थिर नीतियां, संसाधन-समृद्ध संरचना और भविष्य उन्मुख विकास मॉडल को प्रमुखता से रखा जाएगा। दावोस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सत्रों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन और ग्रीन ग्रोथ पर राज्य के संतुलित दृष्टिकोण को सामने रखा जाएगा। उपयोगिता-स्तर की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं, स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े मॉडल राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश के भरोसेमंद गंतव्य के रूप में स्थापित करेंगे। उद्योग और विनिर्माण से जुड़े सत्रों में रक्षा उत्पादन, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। वैश्विक उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल औद्योगिक नीति, सरल प्रक्रियाएं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। डिजिटल तकनीक और नवाचार से जुड़े सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सॉल्यूशंस पर चर्चा होगी। इन विमर्शों में प्रशासन, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में तकनीक के प्रभावी उपयोग को लेकर राज्य का व्यावहारिक और परिणाम-केंद्रित नजरिया सामने आएगा। पर्यटन से जुड़े वैश्विक सत्रों में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, जैव-विविधता, अनुभव-आधारित पर्यटन और बेहतर कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। सतत पर्यटन विकास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर केंद्रित संवाद राज्य के पर्यटन क्षेत्र में नए निवेश अवसरों को रेखांकित करेंगे। स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और मानव विकास से जुड़े सत्रों में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, तकनीक-समर्थित स्वास्थ्य सेवाओं और मानव-केंद्रित विकास मॉडल पर चर्चा होगी, जिससे सामाजिक विकास को आर्थिक प्रगति से जोड़ने वाले राज्य के दृष्टिकोण को वैश्विक पहचान मिलेगी। दावोस के दौरान विषयगत सत्रों, गोलमेज बैठकों और वन-टू-वन उच्चस्तरीय संवादों के माध्यम से निवेश, औद्योगिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के ठोस अवसर सामने आने की उम्मीद है। इन प्रयासों से राज्य में पूंजी निवेश, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार सृजन के नए आयाम खुलेंगे। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में यह सहभागिता मध्यप्रदेश को एक भरोसेमंद, दूरदर्शी और भविष्य-उन्मुख निवेश गंतव्य के रूप में वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित करेगी।