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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का किया आत्मीय स्वागत

बस्तर में पहली बार आयोजित होगी मध्य क्षेत्रीय परिषद की उच्च स्तरीय बैठक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का किया आत्मीय स्वागत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 19 मई को जगदलपुर में होगी 26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक बैठक से अंतरराज्यीय समन्वय, सुरक्षा और विकास को मिलेगी नई दिशा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 19 मई 2026 का दिन बस्तर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज होने जा रहा है। जगदलपुर में पहली बार केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने दोनों मुख्यमंत्रियों से विभिन्न समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा भी की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में पहली बार आयोजित हो रही यह उच्च स्तरीय बैठक क्षेत्र के लिए गौरव और विश्वास का विषय है। कभी नक्सली हिंसा की चुनौतियों से जूझने वाला बस्तर आज शांति, सुरक्षा और विकास की नई पहचान बना रहा है। ऐसे समय में देश के वरिष्ठ नेतृत्व और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति बस्तर के बदलते स्वरूप और बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह बैठक अंतरराज्यीय समन्वय को नई मजबूती प्रदान करेगी तथा विकसित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बस्तर के निर्माण की दिशा में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाएगी।

जनभागीदारी का नया अध्याय शुरू, ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान आज से आरंभ

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान जनजातीय वर्ग के लिए 25 सेवाओं के “लाभार्थी संतृप्ति” शिविर होंगे आयोजित भोपाल  जनजातीय वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 से 25 मई तक राष्ट्रव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को सफलतापूर्वक शिविर लगाने एवं लक्षित समूह को लाभ पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त सह संचालक जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जनजातीय समुदाय के हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की सभी जनपद पंचायतों के चयनित ग्रामों में लाभार्थी संतृप्ति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं से लाभान्वित भी किया जाएगा। अभियान के तहत आयोजित शिविरों में 18 विभागों की कुल 25 सेवाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र हितग्राही अनुसार शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। अभियान को सफल बनाने के लिये जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिविरों के आयोजन के लिये अपर संचालक श्रीमती रीता सिंह को राज्‍य स्‍तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। जबकि जिला स्‍तर पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मध्‍यप्रदेश में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत कुल 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 ग्राम लाभान्वित होंगे। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत कुल 122 विकासखंडों के 5 हजार 113 ग्राम लाभान्वित होंगे।

MP सरकार का बड़ा फैसला, शहीदों के परिजनों की पढ़ाई के लिए हर पाठ्यक्रम में मिलेगा आरक्षण

भोपाल प्रदेश में अब पुलिस और होमगार्ड की सेवा दे रहे कर्मचारियों, अधिकारियों की ड्यूटी के दौरान शहादत पर उनके परिजनों को ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए सरकार हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में सीट रिजर्व करेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। इस व्यवस्था में तय किया गया है कि अगर किसी शहीद की पत्नी या उसके पुत्र या पुत्री को ग्रेजुएशन की पढ़ाई करनी है तो ऐसे लोगों के लिए हर पाठ्यक्रम में कम से कम एक सीट रिजर्व रखी जाएगी और उन्हें एडमिशन दिया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस संबंध में पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि प्रवेश मार्गदर्शिका 2026-27 में एक अतिरिक्त सीट का आरक्षण करना अनिवार्य है। यह अतिरिक्त सीट प्रदेश के सभी स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में आरक्षित रखी जाएगी। इसमें पुलिस, होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) के शहीदों की विधवा और उनके आश्रित बच्चों के लिए रिजर्वेशन दिया जाएगा। आयुक्त उच्च शिक्षा ने कहा है कि हर स्नातक पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीट के अलावा एक सीट सुपर न्यूमेरेरी सीट बनाई गई है। यह सीट नियमित सीट्स की संख्या को प्रभावित नहीं करेगी यानी प्रवेश के लिए जितनी सीट्स पहले से तय हैं उनकी संख्या में कोई कमी नहीं होगी। ये होंगे इस अतिरिक्त सीट के लिए पात्र     उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि जो अतिरिक्त सीट तय की गई है उसमें केवल ऐसे उम्मीदवार पात्र होंगे जो पुलिस, होमगार्ड या नागरिक सुरक्षा के शहीद की विधवा या उनके आश्रित पुत्र या पुत्री होंगे।     इसके लिए सक्षम प्राधिकारी घोषित किए गए गृह विभाग या अन्य संबंधित विभाग द्वारा जारी आश्रित होने का प्रमाण पत्र और अन्य सामान्य प्रवेश संबंधी दस्तावेज लिए जाएंगे।     ऐसे उम्मीदवार को ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल पर अलग कैटेगरी या विकल्प के माध्यम से आवेदन करना होगा।     हर पाठ्यक्रम में अधिकतम एक अतिरिक्त सीट ही इसके लिए दी जा सकेगी।     यदि एक से अधिक पात्र अभ्यर्थी हैं तो मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा।     यदि किसी पाठ्यक्रम में पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होता है तो सीट रिक्त रखी जाएगी। यह सीट किसी अन्य श्रेणी या अभ्यर्थी को आवंटित नहीं की जाएगी।

प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला! Mohan Yadav कैबिनेट में नए चेहरों की एंट्री की चर्चा तेज

भोपाल  मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व वाली सरकार 13 जून को अपने ढाई साल पूरे करने जा रही है, लेकिन उससे पहले सत्ता के गलियारों में कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। खबर है कि बीजेपी आलाकमान ने सरकार और संगठन दोनों की परफॉर्मेंस का फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। 17 और 18 मई को पार्टी के केंद्रीय समीक्षक भोपाल पहुंचेंगे, जहां मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो इस बार समीक्षा सिर्फ औपचारिक नहीं होगी, बल्कि मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, जिलों में पकड़, संगठन के साथ तालमेल और जनता के बीच उनकी छवि तक का आकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस संभावित फेरबदल की जद में कुछ बड़े और वरिष्ठ चेहरे भी आ सकते हैं। आमने-सामने होगी जवाबदेही की परीक्षा पार्टी सूत्र बताते हैं कि मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से बैठाकर उनसे सवाल-जवाब किए जाएंगे। चर्चा का फोकस सिर्फ योजनाओं की फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में कितने सक्रिय हैं, संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ उनका व्यवहार कैसा है और जनता के बीच सरकार की छवि मजबूत करने में उनकी भूमिका कितनी प्रभावी रही है। समीक्षक मंत्रियों द्वारा पेश किए गए दावों की जमीनी हकीकत भी जांचेंगे। यही रिपोर्ट आगे कैबिनेट में बने रहने या बाहर होने का आधार बन सकती है। मॉनसून सत्र से पहले हो सकता है बड़ा बदलाव राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जुलाई में प्रस्तावित मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा बदलाव संभव है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में चार पद खाली हैं। ऐसे में सिर्फ विस्तार ही नहीं, बल्कि कई मंत्रियों की छुट्टी और नए चेहरों की एंट्री का रास्ता भी साफ हो सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अभी से नई रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे नेताओं को मौका देने की तैयारी है, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाने वाला माना जाता है। पुराने दिग्गजों की वापसी के संकेत कैबिनेट विस्तार को लेकर जिन नामों की चर्चा है, उनमें कुछ पूर्व मंत्री और लंबे समय से संगठन में सक्रिय चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं। पिछले ढाई साल से कई नेता सत्ता और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्हें मौका देकर पार्टी क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है। बीजेपी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि अगर अभी बदलाव होता है, तो नए मंत्रियों को 2028 चुनाव से पहले करीब दो साल का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में सरकार की पकड़ मजबूत कर सकें। सत्ता और संगठन दोनों की अग्निपरीक्षा मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए आने वाले महीने बेहद अहम माने जा रहे हैं। एक तरफ संगठन सरकार के प्रदर्शन को कसौटी पर कस रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में मोहन कैबिनेट का संभावित फेरबदल सिर्फ मंत्रियों की अदला-बदली नहीं, बल्कि 2028 के चुनावी रण की शुरुआती बिसात माना जा रहा है।

जनसहयोग से बदली पानी की तस्वीर, जल संरक्षण कार्यों में अग्रणी बना मध्यप्रदेश: Mohan Yadav

जनसहयोग से जल संरक्षण कार्यों में अग्रणी बना है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नदियां हमारी प्रत्यक्ष शक्तियां हैं : दादा गुरू साधक और शासक समाज के बीच कार्य करते हैं, तो मिलते हैं श्रेष्ठ परिणाम : आर्य रवीन्द्र भवन में हुई नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी, सेवाभावियों को मिला समर्थ नर्मदा सम्मान भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पानी को बचाने और सहेजने के लिए सरकार के साथ ही आम नागरिक भी सजग और सक्रिय हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार द्वारा करवाए गए जल संरक्षण और जन संचयन के कार्यों में अग्रणी राज्य है। नर्मदा मिशन जैसी संस्थाएं जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश में सभी शासकीय विभाग पानी बचाने और लोगों को जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए मिलकर कार्य करने की भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने परिसर स्थल में देशी उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बाल चित्रकार विक्रम लोधी ने मां नर्मदा का चित्र भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर दादा गुरु भगवान ने प्रवचन द्वारा मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और दादा गुरु ने स्मित अपराजिता की पुस्तक "समर्थ दृष्टि: साधना के शिखर" का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न श्रेष्ठ सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों को समर्थ नर्मदा अलंकरण प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कुंए, बावड़ियां, पोखर, नहर और अन्य जल स्त्रोतों एवं जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्य चल रहे हैं। गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हुए जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियां आगामी 30 जून तक निरंतर चलेंगी। इतनी लंबी अवधि के इस अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं को उपयोगी बनाना और पानी के प्रति जन जागृति बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संवर्धन अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। प्रदेश में अनेक त्यौहार भी शासन-प्रशासन के साथ मिलकर मनाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास और विरासत के संरक्षण के आहवान पर मध्यप्रदेश अमल कर रहा है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों के उद्गम स्थलों के अवलोकन और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की दिशा में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयासों में सराहनीय जनभागीदारी मिल रही है। वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक गोपाल आर्य ने कहा कि हमारे देश में अमृता देवी जैसी महिलाएं हुई हैं, जो वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान से भी पीछे नहीं हटी। साधक और शासक जब समाज के बीच में रह कर कार्य करते हैं तो श्रेष्ठ परिणाम सामने आते हैं। कार्यक्रम में दादा गुरू ने कहा कि भारत की संस्कृति ने दुनिया को दर्शन दिया है। हमारी प्रकृति यह संकेत दे रही है कि हम सभी मिलकर पर्यावरण की चिंता करें। हमारी नदियां हमारी शक्ति है। गंगा-यमुना-नर्मदा जल के रूप में प्रवाहित होने वाली प्रत्यक्ष शक्तियां हैं। नर्मदा पथ व्यक्तित्व निर्माण का पथ है। दादा गुरू ने मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में हो रहे कार्य की प्रशंसा की। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने प्रदेश में जनसहयोग से जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्यों का विवरण दिया। कार्यक्रम में खेल मंत्री विश्वास सारंग, राज्यसभा सदस्य श्रीमती माया नारोलिया, विधायक भगवानदास सबनानी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

एक्सप्रेसवे से डिजिटल टेक्नोलॉजी तक, इंफ्रास्ट्रक्चर में नई छलांग लगा रहा मध्यप्रदेश

सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, डिजिटल तकनीक से मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर रहा मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान किया तैयार जीआईएस आधारित लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप किया गया विकसित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आज अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में तेजी से एक नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “विकसित भारत” की परिकल्पना को मध्यप्रदेश साकार कर रहा है। प्रदेश में अभूतपूर्व गति से सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे और आधुनिक सार्वजनिक अधोसंरचना निर्माण हो रहा है। लोक निर्माण विभाग ने “लोक निर्माण से लोक कल्याण” को अपना मूल मंत्र बनाकर विकास को सीधे जनता की सुविधा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक समृद्धि से जोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मजबूत अधोसंरचना किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देशभर में सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार हुआ है। प्रदेश में सड़क संपर्क, शहरी यातायात, औद्योगिक कनेक्टिविटी और ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिक तरीके से तैयार हो रहा सड़क नेटवर्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सड़क श्रेणियों के पुनर्गठन तथा रोड नेटवर्क रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिससे सड़क निर्माण और रखरखाव की प्राथमिकताएँ अधिक स्पष्ट हुई हैं। विभाग द्वारा “लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप” विकसित किया गया है। यह ऐप GIS आधारित तकनीक पर कार्य करता है और इसके माध्यम से प्रदेश में 71 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों, लगभग 3 हजार भवनों तथा 1400 से अधिक पुलों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है। इस सर्वेक्षण से विभाग को अधोसंरचना की वास्तविक स्थिति का डिजिटल डेटा प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर योजनाएँ अधिक सटीक और व्यावहारिक तरीके से तैयार की जा रही हैं। रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से बेहतर कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया है। मास्टर प्लान के अंतर्गत शहरों के लिए बायपास मार्ग, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहतर सड़क संपर्क, जिला मुख्यालयों के बीच तेज कनेक्टिविटी तथा यातायात दबाव कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रा दूरी और समय कम करने के उद्देश्य से 6 नए ग्रीनफील्ड सड़क मार्गों की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन क्षेत्रों को नई गति मिलने की संभावना है। जीआईएस आधारित डिजिटल बजट प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के अनुरूप लोक निर्माण विभाग ने जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल लागू किया है। इस प्रणाली से प्रत्येक सड़क प्रस्ताव को डिजिटल नक्शे पर दर्ज किया जाता है। इससे यह तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित सड़क पहले से किसी अन्य योजना में शामिल है या नहीं। इस व्यवस्था ने योजनाओं में दोहराव को समाप्त करने के साथ विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है। लोकपथ 2.0 : नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित “लोकपथ” ऐप को अब उन्नत स्वरूप में “लोकपथ 2.0” के रूप में विकसित किया गया है। यह ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल गाइड की तरह कार्य कर रहा है। इस ऐप में रूट प्लानर, टोल जानकारी, अस्पताल एवं पेट्रोल पंप की लोकेशन, एसओएस सुविधा और सड़क दुर्घटना संभावित स्थानों की चेतावनी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ऐप ब्लैक स्पॉट से लगभग 500 मीटर पहले अलर्ट जारी करता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिल रही है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था, 25 ठेकेदार किये गये ब्लैक लिस्टेड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 25 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया तथा कई मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0) लागू किया जा रहा है। इससे योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल रूप से मॉनिटर की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ अधोसंरचना विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से निर्मित गड्ढों को “लोक कल्याण सरोवर” के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब तक 506 सरोवर तैयार किए जा चुके हैं और 600 नए सरोवर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सड़क किनारे भूजल रिचार्ज व्यवस्था, फ्लाई-ओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तथा ग्रीन बिल्डिंग निर्माण जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा शासकीय भवनों को ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। तेजी से आगे बढ़ रहा सड़क और पुल निर्माण कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 77 हजार किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क विकसित किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में विभाग द्वारा 11,632 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं मजबूतीकरण, 5,741 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 190 पुल एवं फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में 16,954 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य तथा 531 पुल एवं फ्लाईओवर परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम होगा तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेस-वे और रिंग रोड परियोजनाओं से मिलेगा नया आयाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर कनेक्टिविटी विस्तार के लिए 6 प्रमुख विकास पथ (एक्सप्रेसवे) परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया गया है। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल जीवन मिशन बना ग्रामीण बदलाव का आधार

जब पानी घर पहुंचा, तब बदली ग्राम कंधारी की तस्वीर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल जीवन मिशन बना ग्रामीण बदलाव का आधार मंत्री  उइके के मार्गदर्शन में बसई समूह जल प्रदाय योजना से बदला हजारों लोगों का जीवन भोपाल कभी पानी के लिए घंटों इंतजार, हैंडपंपों पर लंबी कतारें और दूर-दूर तक बर्तनों के साथ पानी की तलाश में जाती महिलाएं ग्राम कंधारी की पहचान हुआ करती थीं। गर्मी का मौसम आते ही गांव में पेयजल संकट और गहरा जाता था। कई परिवारों का पूरा दिन पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और महिलाओं की दिनचर्या ही बदल जाती थी। आज वही ग्राम कंधारी बदलती ग्रामीण तस्वीर का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां घर-घर पहुंचता शुद्ध पेयजल लोगों के जीवन में सहजता, सम्मान और विश्वास लेकर आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अधोसंरचना को जनजीवन से जोड़ते हुए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है, जिनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों के जीवन पर दिखाई दे। जल जीवन मिशन अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित बसई समूह जल प्रदाय योजना ने दतिया जिले के ग्राम कंधारी सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में इसी परिवर्तन को वास्तविक रूप दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के सतत मार्गदर्शन और नियमित मॉनिटरिंग के कारण योजना का लाभ अंतिम छोर तक रहने वाले परिवारों तक पहुंच रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजनाओं की गुणवत्ता और नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि जल जीवन मिशन महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव लेकर आया है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की स्थिति मजबूत हुई है। बसई समूह जल प्रदाय योजना लगभग 52.26 करोड़ रूपये की लागत से विकसित की गई। योजना के माध्यम से दतिया एवं भांडेर क्षेत्र के 32 गांवों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। योजना के क्रियान्वयन के बाद ग्राम कंधारी में हर घर नल कनेक्शन के जरिए नियमित जल आपूर्ति शुरू हुई, जिससे ग्रामीण जीवन की पूरी तस्वीर बदल गई। करीब 352 परिवारों वाले ग्राम कंधारी में पहले पेयजल की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। गांव में सीमित हैंडपंप होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार महिलाओं और बच्चों को दूरस्थ स्थानों तक जाकर पानी लाना पड़ता था। पानी की गुणवत्ता भी बेहतर नहीं थी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती थीं। गांव के लोगों के लिए पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि रोजाना संघर्ष का विषय था। योजना शुरू होने के बाद गांव में बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला। अब घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को सबसे अधिक राहत मिली है। पहले जहां दिन का अधिकतम समय पानी जुटाने में निकल जाता था, वहीं अब वे परिवार और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी राहत मिली है और उनको पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा है। गांव में स्वच्छता की स्थिति बेहतर हुई है तथा जलजनित बीमारियों में कमी आई है। ग्रामीणों के जीवन स्तर में यह बदलाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। ग्राम कंधारी की यह कहानी केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलते मध्यप्रदेश की तस्वीर है, जहां विकास योजनाएं आंकड़ों से आगे बढ़कर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से गांवों तक पहुंच रहा शुद्ध पेयजल अब ग्रामीण सम्मान, स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई पहचान बन चुका है।  

MP सरकार की बड़ी तैयारी! ग्रामोद्योग के जरिए बढ़ेंगे रोजगार, रेशम और खादी को मिलेगा बढ़ावा

कुटीर और ग्रामोद्योग को नए आयाम देने की तैयारी में मध्यप्रदेश हथकरघा, खादी, रेशम और महिला रोजगार पर विशेष फोकस भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अब कुटीर एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को रोजगार, नवाचार और बाजार से जोड़कर नया स्वरूप देने जा रही है। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाने और ग्रामीण कारीगरों को बेहतर आय और पहचान दिलाने के लिये निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की पहचान महेश्वरी, चंदेरी, खादी और रेशम जैसे उत्पादों को सिर्फ संरक्षित ही नहीं, बल्कि विस्तारित और प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश हथकरघा क्लस्टर का विस्तार : महेश्वरी और चंदेरी की सफलता को देखते हुए प्रदेश के अन्य जिलों में भी नए हथकरघा क्लस्टर चिन्हित कर विकसित किए जाएंगे। खादी उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा: पुराने कॉटन मिल क्षेत्रों और पारंपरिक बुनाई वाले इलाकों को जोड़कर खादी उत्पादन की नई योजना बनेगी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय रोजगार सृजित करना है। महिला सशक्तिकरण पर जोर: लूम और चरखा प्रदाय योजना को महिला एवं बाल विकास तथा कृषि विभाग के साथ जोड़कर रोजगारपरक बनाया जाएगा। रेशम उत्पादन को लखपति दीदियों से जोड़ने का लक्ष्य है। ब्रांड आउटलेट का विस्तार : मृगनयनी, कबीरा और विंध्यावैली जैसे ब्रांड के एम्पोरियम अब फ्रेंचाइजी मॉडल पर अन्य जिलों में खुलेंगे। पर्यटन निगम के साथ मिलकर प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। धार्मिक और सांस्कृतिक उत्पादों को बढ़ावा: धार्मिक स्थानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पूजन सामग्री के उत्पादन और विक्रय को अनुदान और बैंक ऋण आधारित योजना से जोड़ा जाएगा। नवाचार और युवा जुड़ाव: इंदौर की साड़ी वॉकथॉन की तर्ज पर उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर में आयोजन होंगे। साड़ी पहनावे को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार योजना भी शुरू होगी। रेशम और सिल्क टेक पार्क का विस्तार: ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन में "प्राकृत" रेशम शोरूम खुलेंगे। पचमढ़ी के सिल्क टेक पार्क की तर्ज पर रातापानी और अमरकंटक में भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी। ग्रामोद्योग इकाइयों को एमएसएमई से जोड़ना: ग्रामोद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए एमएसएमई विभाग की उद्यम क्रांति योजना के तहत लक्ष्य और आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन अनुसार कुटीर और ग्रामोद्योग सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का आधार है।  

मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार तेज! सड़क, पुल और डिजिटल तकनीक से बदल रही तस्वीर: CM डॉ. यादव

सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, डिजिटल तकनीक से मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर रहा मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान किया तैयार जीआईएस आधारित लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप किया गया विकसित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आज अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में तेजी से एक नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “विकसित भारत” की परिकल्पना को मध्यप्रदेश साकार कर रहा है। प्रदेश में अभूतपूर्व गति से सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे और आधुनिक सार्वजनिक अधोसंरचना निर्माण हो रहा है। लोक निर्माण विभाग ने “लोक निर्माण से लोक कल्याण” को अपना मूल मंत्र बनाकर विकास को सीधे जनता की सुविधा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक समृद्धि से जोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मजबूत अधोसंरचना किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देशभर में सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार हुआ है। प्रदेश में सड़क संपर्क, शहरी यातायात, औद्योगिक कनेक्टिविटी और ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिक तरीके से तैयार हो रहा सड़क नेटवर्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सड़क श्रेणियों के पुनर्गठन तथा रोड नेटवर्क रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिससे सड़क निर्माण और रखरखाव की प्राथमिकताएँ अधिक स्पष्ट हुई हैं। विभाग द्वारा “लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप” विकसित किया गया है। यह ऐप GIS आधारित तकनीक पर कार्य करता है और इसके माध्यम से प्रदेश में 71 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों, लगभग 3 हजार भवनों तथा 1400 से अधिक पुलों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है। इस सर्वेक्षण से विभाग को अधोसंरचना की वास्तविक स्थिति का डिजिटल डेटा प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर योजनाएँ अधिक सटीक और व्यावहारिक तरीके से तैयार की जा रही हैं। रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से बेहतर कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया है। मास्टर प्लान के अंतर्गत शहरों के लिए बायपास मार्ग, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहतर सड़क संपर्क, जिला मुख्यालयों के बीच तेज कनेक्टिविटी तथा यातायात दबाव कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रा दूरी और समय कम करने के उद्देश्य से 6 नए ग्रीनफील्ड सड़क मार्गों की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन क्षेत्रों को नई गति मिलने की संभावना है। जीआईएस आधारित डिजिटल बजट प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के अनुरूप लोक निर्माण विभाग ने जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल लागू किया है। इस प्रणाली से प्रत्येक सड़क प्रस्ताव को डिजिटल नक्शे पर दर्ज किया जाता है। इससे यह तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित सड़क पहले से किसी अन्य योजना में शामिल है या नहीं। इस व्यवस्था ने योजनाओं में दोहराव को समाप्त करने के साथ विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है। लोकपथ 2.0 : नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित “लोकपथ” ऐप को अब उन्नत स्वरूप में “लोकपथ 2.0” के रूप में विकसित किया गया है। यह ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल गाइड की तरह कार्य कर रहा है। इस ऐप में रूट प्लानर, टोल जानकारी, अस्पताल एवं पेट्रोल पंप की लोकेशन, एसओएस सुविधा और सड़क दुर्घटना संभावित स्थानों की चेतावनी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ऐप ब्लैक स्पॉट से लगभग 500 मीटर पहले अलर्ट जारी करता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिल रही है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था, 25 ठेकेदार किये गये ब्लैक लिस्टेड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 25 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया तथा कई मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0) लागू किया जा रहा है। इससे योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल रूप से मॉनिटर की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ अधोसंरचना विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से निर्मित गड्ढों को “लोक कल्याण सरोवर” के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब तक 506 सरोवर तैयार किए जा चुके हैं और 600 नए सरोवर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सड़क किनारे भूजल रिचार्ज व्यवस्था, फ्लाई-ओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तथा ग्रीन बिल्डिंग निर्माण जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा शासकीय भवनों को ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। तेजी से आगे बढ़ रहा सड़क और पुल निर्माण कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 77 हजार किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क विकसित किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में विभाग द्वारा 11,632 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं मजबूतीकरण, 5,741 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 190 पुल एवं फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में 16,954 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य तथा 531 पुल एवं फ्लाईओवर परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम होगा तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेस-वे और रिंग रोड परियोजनाओं से मिलेगा नया आयाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर कनेक्टिविटी विस्तार के लिए 6 प्रमुख विकास पथ (एक्सप्रेसवे) परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया गया है। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, … Read more

मध्यप्रदेश में जल क्रांति की नई मिसाल, मोहन सरकार के प्रयासों से बढ़ी जल आत्मनिर्भरता

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश 'जल आत्मनिर्भरता' का एक नया इतिहास लिख रहा है। प्रदेश की जल संरचनाओं के पुनरुद्धार और नवीन जल स्रोतों के निर्माण के उद्देश्य से शुरू किया गया 'जल गंगा संवर्धन अभियान' अब अपने निर्णायक दौर में है। अभियान में न केवल लुप्त हो रही जल संरचनाओं को जीवनदान मिल रहा है, बल्कि वैज्ञानिक पद्धतियों से वर्षा जल के संग्रहण (Rain Water Harvesting) की क्षमता में भी ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 77 हजार 121 जल संरक्षण संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन के लिए एक सुखद संकेत है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के समन्वय से संचालित इस विशाल अभियान के लिए राज्य सरकार ने व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं। पूरे प्रदेश में कुल 2 लाख 42 हजार 188 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए 6,201.81 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में अब तक 4,443.85 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य 'खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में' रोकने की अवधारणा पर है, ताकि आगामी मानसून में वर्षा की हर बूंद का संचयन सुनिश्चित किया जा सके। सूक्ष्म स्तर पर हो रही मॉनिटरिंग अभियान के अंतर्गत कार्यों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित कर सूक्ष्म स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। विशेष रूप से 'डग वेल रिचार्ज' (सूखे कुओं का पुनर्भरण) में प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है, जहां 88,123 से अधिक कुओं को रिचार्ज करने का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसी प्रकार, ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पशुपालन की सुविधा के लिए 53,568 खेत तालाबों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। जल संरक्षण और पुनर्भरण की अन्य विधियों के तहत 27,332 कार्य संपन्न हुए हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण को मजबूती देने के लिए वृक्षारोपण और स्कूलों में जल टैंकों की सफाई जैसे रचनात्मक कार्यों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है। JSJB 2.0 (जल संचयन जल भागीदारी) पहल के तहत भी 10 लाख से अधिक कार्यों का पंजीकरण राज्य की सक्रियता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान की सफलता को जन-भागीदारी का परिणाम बताया है। जल संरक्षण समाज के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इन स्थायी जल संरचनाओं के माध्यम से भू-जल स्तर को बढ़ाया जाए, ताकि भविष्य में पेयजल संकट का स्थायी समाधान हो सके और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के माध्यम से मध्य प्रदेश आज देश के अन्य राज्यों के लिए जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक मार्गदर्शक बनकर उभर रहा है। खंडवा अग्रणी जिलों में शामिल   जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिलों के प्रदर्शन की नवीनतम रैंकिंग (14 मई, 2026) के अनुसार, खंडवा जिला 7.51 के स्कोर के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। खंडवा में अब तक कुल 9,131 कार्य प्रारंभ किए गए हैं, जिनमें से 2,944 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 5,400 कार्यों की भौतिक पूर्णता (Physical Completion) सुनिश्चित की गई है। रैंकिंग में दूसरे स्थान पर खरगोन जिला (स्कोर 7.38) है, जिसने 81.17 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक 'बुक्ड एक्सपेंडिचर' (वित्तीय प्रगति) दर्ज की है। इसके पश्चात बड़वानी 7.23 के स्कोर के साथ तीसरे, उज्जैन 7.08 के स्कोर के साथ चौथे और राजगढ़ 6.90 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर है। मुख्य आंकड़े एक नजर में:     कुल लक्षित कार्य : 2,42,188     पूर्ण हुए कार्य : 1,77,121     कुल स्वीकृत बजट : ₹6,201.81 करोड़     खेत तालाब पूर्ण : 53,568     कुआं पुनर्भरण (Dug Well Recharge) : 88,123