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मध्यप्रदेश बना देश का पहला नक्सलमुक्त राज्य, प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना: CM डॉ. यादव

सबसे पहले मध्यप्रदेश हुआ नक्सलमुक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रशंसा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को दी सरकार की उपलब्धियों की जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूरे देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश ने ही नक्सलवाद को समाप्त किया है। लाल सलाम को आखिरी सलाम करने में मध्यप्रदेश ने बाजी मारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जून को नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के विकास के हर मामले में सदैव अग्रणी रहने की क्रियाशीलता की सराहना की। इस वर्ष बैठक का विषय "विकसित भारत @2047 के लिये समावेशी मानव विकास" था। पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद् की बैठक में भाग लिया। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल की बैठक में विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई। देश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज करने पर चर्चा हुई। भविष्य में युवाओं के विकास पर सरकार का विशेष रूप से जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी को मध्यप्रदेश आयुष्मान योजना, नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन, पीएम मित्र पार्क निर्माण सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह मप्र सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में मिली विशेष उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में हो रहे उच्च कोटि के कामों की भी प्रशंसा की है। समान नागरिक संहिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों मांगे जा रहें है। अच्छी नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाये जायें। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित किये गये हैं। समान नागरिक संहिता की वेबसाइट (ucc.mp.gov.in) पर सुझाव देने की प्रक्रिया भी बहुत सरल है। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने-अपने प्रभार के जिलों में समान नागरिक संहिता के संबंध में और उसमें सुझाव देने के लिये अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस – स्वस्थ आयु के लिये योग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को प्रदेश में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दी। विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग अपना चुके है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष योग दिवस की थीम 'स्वस्थ आयु के लिये योग' रखी गई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए निर्धारित गतिविधियों का प्रदेश में अक्षरश: पालन किया जाएगा। एमपी टूरिज्म को मिला "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग को मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित '10वें डेसेनियल एक्जीबिशन एक्सीलेंस अवार्ड्स (EEA) 2026' में "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार" प्राप्त हुआ है। एमपी टूरिज्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। इसे देश के इवेंट, एक्जीबिशन और माइस (MICE – मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेसिंग एंड एक्जीबिशन) सेक्टर के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। पर्यटन निगम को यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य में 20 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और राज्य महत्व के बड़े सम्मेलनों के सफल एवं बेहतरीन प्रबंधन के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी। प्रदेश को मिला उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गत 15 जून को गोवा में ग्लोबल विंड डे – 2026 पर मध्यप्रदेश को उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान प्रदान किया है। हमारा मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में से है और हम प्रदेश में इस दिशा में लगातार काम कर रहें है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को यह केंद्रीय सम्मान प्राप्त होने पर विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी। प्रदेश में स्थापित होगा सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को जानकारी दी कि गत 15 जून को भोपाल में सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिये कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। प्रदेश में सायबर सुरक्षा के लिये एक सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में यह ठोस कदम है। यह सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। एमएसएमई यूनिट्स को प्रोत्साहन राशि का वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 14 जून को सिंगल क्लिक से प्रदेश की 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया है। इसमें 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को 2 करोड़ 2 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को 1 करोड़ 7 लाख रुपये मण्डी शुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों को विद्युत टैरिफ के रूप में 3 करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण भी किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी इस दौरान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक परिदृश्य बदलने के लिये कृत संकल्पित है और इस क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बड़े उद्योगों के अलावा हमारा पूरा ध्यान एमएसएमई की ओर भी है, जिनका प्रदेश के औद्योगिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।  

रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी

बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति के प्रस्ताव पर उप समिति गठित रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2,381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति श्रमिक कल्याण संबंधी योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति जनजातीय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण को बड़ी रफ्तार देते हुए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण सहित कुल 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया। राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने और परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 'मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 लागू करने के प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है। समिति सभी संबंधित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। मंत्रि-परिषद ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर चलाने का पायलट प्रोजेक्ट भी मंजूर किया गया। वन्य-प्राणी संरक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों के 94 गांवों के विस्थापन व मुआवजे के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-2031 के तहत 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं। सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देते हुए जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक व आवासीय सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रुपये और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से रेशम उत्पादन की विभिन्न योजनाओं के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन,औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये तथा स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन व ऑडिट व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सभी निर्णय आगामी पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के समग्र, समावेशी और सतत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी पहल है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 7 हजार 500.80करोड़रूपये में 5 हजार 388.58 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889.38 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त उ‌द्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6 हजार 582.91 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस तरह कुल 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। अतिरिक्त वित्त पोषण में भारत शासन और मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1,696 करोड़ 74 लाख रूपये की अतिरिक्त इक्विटी और केन्द्रीय करों के लिए 214 करोड़ 64 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण, वित्त पोषण एजेंसी बैंकों से ऋण निधि के विरुद्ध 3,496 करोड़ 15 लाख रूपये का अतिरिक्त पीटीए/आंतरिक ऋण, मध्यप्रदेश शासन से राज्य करों के लिए 656 करोड़ 96 लाख रूपये एवं आईडीसीकी लागत के लिए 518 करोड़ 42 लाख रूपये का अतिरिक्त ऋण शामिल है। प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वन विभाग के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के सोलहवें केन्द्रीय वित आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए कुल 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (नॉन-रिकरिंग), प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (रिकरिंग) और प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (प्रोजेक्ट एलिफेंट) के लिए एक हजार 131 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन तीनों योजनाओं से वन्यप्राणी संरक्षण के वैज्ञानिक सिद्धान्तों के आधार पर बनाई गई प्रबंध योजना का क्रियान्वयन किया जाना है, जिसमें मुख्यतः प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्त्रोतों का विकास, वन मार्गो का रखरखाव आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं उनका रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैम्प निर्माण, दवाईयां क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था आदि कार्य किए जायेंगे। ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के लिए एक हजार 250 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्य-प्राणियों के संवेदनशील आवास स्थलों को एवं वन्य-प्राणियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे ग्रामों को संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पुनर्वसित करना है। इसमें ग्रामीणों के अचल सम्पत्ति का विधि अनुसार अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा का भुगतान किया जाता है। योजना का क्रियान्वयन संजय टाइगर रिजर्व, सतपुडा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों में किया जायेगा। श्रमिक कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा श्रमिक कल्याण से संबंधित श्रम विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार श्रम आयुक्त कार्यालय के संचालन के लिए 57 करोड़ 48 … Read more

CM का बड़ा फैसला, ट्रांसफर अवधि में 24 घंटे का विस्तार; कैबिनेट में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य कर्मचारियों के तबादलों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने तबादला अवधि में 24 घंटे की अतिरिक्त राहत देते हुए इसकी समय-सीमा बढ़ा दी है। अब प्रदेश में आज रात 12 बजे तक तबादले किए जा सकेंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिसमें सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर की तारीख एक दिन के लिए बढ़ाई गई है। यानी आज रात 12 बजे तक ट्रांसफर आदेश जारी किए जा सकेंगे। पहले सरकार द्वारा इसकी आखिरी तारीख 15 जून तक रखी गई थी। 2017 में इंदौर मेट्रो की लगाई गई 7515 करोड़ रुपये की लागत अब एलाइनमेंट बदलने से ज्यादा हो गई है। इसे कहीं अंडरग्राउंड भी किया गया, जिसके बाद यह 12900 करोड़ रुपये हो गई है। इंदौर मेट्रो रेल का 31 किमी का नेटवर्क है। 5.388 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई। 21 जून को जबलपुर में योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम होगा, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उपस्थित रहेंगी। गौरतलब है कि 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 मई को आदेश जारी कर सभी विभागों को 15 जून तक तबादले करने के निर्देश दिए थे। अब सरकार ने एक दिन का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है। रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक केंद्र निजी संचालन के लिए देंगे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जो 20 बिस्तर के ऊपर है डॉक्टर और स्टाफ की कमी देखी गई है, विशेषज्ञ नहीं है। इसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि तीन जिलों में रीवा, देवास और गुना में 18 सामुदायिक केंद्रों के निजी तौर पर संचालन के लिए दिए जाएगा। यह नई नीति पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्वीकृति दी गई है। निजी व्यक्ति डॉक्टर, स्टाफ से लेकर पूरे संसाधन लेकर आएंगे। परिसंपत्ति सरकार की रहेगी और दवाइयां की उपलब्धता सरकार द्वारा की जाएगी। टेंडर की प्रक्रिया करेंगे, जो कम से कम लागत का आफर देगा, उसे दिए जाएंगे‌। एक अन्य निर्णय में परोपकारी व कल्याणकारी संस्थाएं यदि कोई चिकित्सालय मध्य प्रदेश में लगाना चाहती हैं तो उन्हें सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। सुपर स्पेशलिटी के उपकरणों को क्षेत्रवार मशीनों के लिए पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा। पांच मंत्रियों की कमेटी बनाई गई पांच मंत्रियों की एक कमेटी बनाई गई है जो पूरे मापदंड निर्धारित करेगी। यहां आयुष्मान के पैकेज की सुविधा भी मिलेगी। कमेटी में मंत्री राजेंद्र शुक्ला, राकेश सिंह, चेतन्य काश्यप, नरेंद्र शिवाजी पटेल और राधा सिंह को रखा गया है। कैबिनेट के प्रमुख फैसले     इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट की बढ़ी हुई लागत को मंजूरी मिली।     वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने वाली 3 योजनाएं जारी रहेंगी।     गांवों के पुनर्वास के लिए मुआवजा मंजूरी पर चर्चा हुई।     श्रम विभाग की कई योजनाओं को आगे भी जारी रखने का फैसला।     स्थानीय निधि ऑडिट से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी।     हाईकोर्ट के आदेश के तहत लोक निर्माण विभाग के एक मामले में पेंशन मंजूर की गई।     रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आउटसोर्स व्यवस्था से संचालित होंगे, इसके पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी।     सामाजिक न्याय विभाग की संस्थाओं में मानदेय पर काम कर रहे कर्मचारियों को संविदा कर्मचारी बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एग्रो सौर पीवी परियोजना के लिए हुआ महत्वपूर्ण एमओयू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में एग्रो सौर पीवी के लिए हुआ एमओयू नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग तथा इंडो-जर्मन एग्रीवोल्टाइक परियोजना मिलकर करेंगे काम प्रदेश में एग्री सौर पीवी के विकास में जर्मन कम्पनी जीआईजेड करेगी सहयोग भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रदेश में एग्रो सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की मंशा पर एक और उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड तथा जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के मध्य सोमवार को मंत्रालय, भोपाल में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। एग्री वोल्टाइक, कृषि एवं सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया एक संगठन है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ उसी खेत में ही सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जिससे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता कम हो, खाद्य सुरक्षा बनी रहे तथा भूमि संबंधी विवादों से भी बचा जा सके। इस काम में जर्मन कम्पनी सरकार को सहयोग देगी। यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के अनुरूप राज्य में विशिष्ट एग्रीवोल्टाइक ढांचा विकसित करने, किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग दक्षता सुधारने, उत्पादित ऊर्जा की सुरक्षा सुदृढ़ करने तथा जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी। यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग मनु श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड अमनवीर सिंह बैंस, भारत में जर्मन दूतावास के पदाधिकारी, एग्री वोल्टाइक संगठन से एलेक्जेंडर, जर्मनी की जीआईजेड कम्पनी के पदाधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। एग्री सौर पीवी के तहत सरकार किसानों को सब्सिडी देगी। इससे किसान अपनी जमीन के मालिकाना हकदार होंगे। किसान जमीन में खेती करेंगे और उसी खेत में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित करेंगे। यह किसानों के लिए डबल सौगात होगी। राज्य सरकार और इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना के मध्य हुई इस परस्पर साझेदारी के अंतर्गत कम्पनी द्वारा एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी एवं आर्थिक मूल्यांकन, डिजाइन, वित्तीय व्यवहार्यता और क्रियान्वयन में सहयोग किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, ऊर्जा विकासकर्ताओं, डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनीज (डिस्कॉम) एवं अन्य संबंधित हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कम्पनी द्वारा राज्य में कृषि उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा को संरक्षित रखते हुए उपयुक्त नीतिगत एवं नियामक ढांचा विकसित करने में भी सहयोग किया जाएगा।  

सभी समाजों और परंपराओं को जोड़ने का आह्वान, आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव व श्रावण महोत्सव मनाने की अपील: CM डॉ. यादव

सभी समाजों को, उनकी परम्पराओं को जोड़ें, आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव और श्रावण महोत्सव भी मनायें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव संस्कृति विभाग की करें पुनर्संरचना, गतिविधियों का भी करें विस्तार सम्राट विक्रमादित्य के नाम से बनायें पृथक अकादमी राज्य के ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और प्रसिद्ध देवस्थानों को भी जोड़ें तीर्थदर्शन योजना में प्रदेश में बन रहे 17 सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की संस्कृति विभाग की गहन समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आगामी छह-सात माह में बड़े त्यौहार, सांस्कृतिक पर्व एवं मेले मनायें जायेंगे। ये सभी त्यौहार हमारी धार्मिक आस्थाओं और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता के प्रतीक हैं। इन सभी अवसरों पर संस्कृति विभाग सभी समाजों को, उनकी आस्थाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को जोड़कर वृहद आयोजन करें। आल्हा-ऊदल वीर रस गायन के प्रतीक हैं, उनकी स्मृति में आयोजन किए जाएं। श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व भी मनाएं। नागपंचमी पर जैव विविधता संरक्षण (सर्प प्रजातियों के संरक्षण) का संदेश दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग लोगों को जोड़कर ऐसे आयोजन करें, जिनसे हमारी कला और संस्कृति के संवर्धन के साथ ही सरकार के संदेश का भी प्रसार हो। मुख्यमंत्री सोमवार को मंत्रालय में संस्कृति विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, परम्पराएं और समृद्ध पुरातात्त्विक धरोहरें प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास किए जाएं। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सांस्कृतिक अभ्युदय के लिए हमारी सरकार हर जरूरी प्रयास कर रही है। हम समाज को साथ लेकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बैठक में संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किये गये 'कला पंचांग' का विमोचन भी किया। इसमें विभाग द्वारा वर्ष भर की जाने वाली कलात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का पूरा कैलेंडर तैयार किया गया है। अब इन्हें सिलसिलेवार क्रियान्वित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का दायरा और तेजी से बढ़ेगा। विभागीय आंतरिक विशेषताओं और विशेषज्ञताओं का समुचित संयोजन करते हुए संस्कृति विभाग की और बेहतर पुनर्संरचना की जाये। विभागीय गतिविधियों का आधुनिक संदर्भों में विस्तार भी किया जाये। उन्होंने कहा कि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग सभी मिलकर काम करें, ताकि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। इससे प्रदेश में उत्कृष्ट कारीगरी से निर्मित होने वाले क्रॉफ्ट आइटम्स, हैंडलूम आइटम्स और कशीदाकारी को भी पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट वीर विक्रमादित्य के नाम से एक पृथक अकादमी का गठन किया जाये। इसमें विक्रमादित्य के जीवनवृत्त पर समग्र शोध एवं अन्य संगत गतिविधियां भी संचालित की जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के बाहर के प्रसिद्ध मंदिरों और देव स्थानों के अतिरिक्त अब प्रदेश में मौजूद 2 ज्योतिर्लिंगों, जागृत एवं मंशापूर्ण शक्ति पीठों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को भी मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इनके निर्माण कार्यों में और अधिक गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों परियोजनाएं धार्मिक आस्था के केंद्र होने के साथ ही प्रदेश के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका कार्य शीघ्र पूर्ण होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक गतिविधियों में जनसहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग की विभिन्न योजनाओं, संरक्षण कार्यों तथा आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाने पर बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के नजदीक जगदीशपुर स्थित पुराने किले की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि इस किले के इतिहास को जीवंत करने और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भविष्य में जल्द ही यहां स्टेट कैबिनेट मीटिंग की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्मे या यहां से निकलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले गायकों, कलाकारों और अन्य जनों की जानकारी एकत्रित कर इन्हें मध्यप्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए राज़ी किया जाये। इससे मध्यप्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक विविधताओं को देश-दुनिया में नई पहचान और एक्सपोजर मिलेगा और अपनी माटी से जुड़कर ऐसे कलाकारों को भी खुशी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्म पुरस्कारों के लिए प्रदेश के कलाकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों के केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर संस्कृति विभाग भी अपनी ओर से अनुशंसा करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं की आर्थिक मदद के लिए एक स्थायी योजना तैयार की जाये, ताकि जरुरतमंदों को शासन की योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा सके। अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेख़र शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 17 धार्मिक/सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक संस्कृति विभाग के अधीन करीब 4160 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों पर काम जारी हैं। कुछ काम पूरे भी हो चुके हैं। जल्द ही लोकार्पण भी कराया जायेगा। प्रदेश में श्रीराम वन गमन पथ निर्माण पर 160 करोड़ रुपए के काम जारी हैं। महाकाल लोक में मूर्ति स्थापना के कार्य प्रगति पर है। ओरछा में भगवान राम राजा लोक एकदम नये स्वरूप में (छह नई थीम पर) तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के सभी लोकों के नियमित संचालन के लिए स्थायी प्रबंधन भी किये जा रहे हैं। प्रदेश के सभी संगीत महाविद्यालयों और सांची स्थित बौद्ध भारतीय ज्ञान … Read more

हौसले बुलंद हों तो हर मंजिल आसान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रेरणादायी संदेश

हौंसले की बुलंदी से हर मंजिल होती है आसान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने भीम नगर बस्ती पहुंचकर एमपी बोर्ड 12वीं की टॉपर कुमारी चांदनी को दिया आशीर्वाद प्रतिभावान बेटी की पढ़ाई में गरीबी नहीं बनेगी कभी बाधा ई-स्कूटर से पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव : हेलमेट पहनने के‍लिए किया लोगों को प्रेरित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि परिवार में गरीबी, कठिनाई के बावजूद हौंसले की बुलंदी से हर मंजिल आसान होती है। विषम परिस्थितियों में भी कुमारी चांदनी ने परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प से जो उपलब्धि हासिल की है, वह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमपी बोर्ड 12वीं की टॉपर कुमारी चांदनी विश्वकर्मा से मिलने ई-स्कूटर से विधानसभा के निकट स्थित भीम नगर बस्ती पहुंचे। ई-स्कूटर पर सवार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं हेलमेट पहना और उनके साथ ई-स्कूटर पर पीछे बैठे विधायक भगवान दास सबनानी ने भी हेलमेट लगाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सेवा सुशासन और गरीब कल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने, सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं की प्रभावशीलता के संबंध में स्थानीय निवासियों से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुमारी चांदनी और उनके परिजन से आत्मीय भेंट की और परिजन के साथ सेल्फी भी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चांदनी की उत्कृष्ट सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रतिभावान बेटी की पढ़ाई में गरीबी कभी बाधा नहीं बनेगी। कुमारी चांदनी को शासन की सभी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक टू व्हीलर चलाकर दिया ईंधन बचाने का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैश्विक ईंधन संकट के बीच भीम नगर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से पहुंचे। उन्होंने देशवासियों से ईंधन बचाने और पर्यावरण-संरक्षण के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रहित में सबसे पहले अपना कारकेड घटाने का निर्णय लिया था। उनकी पहल पर कारकेड में इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) को शामिल किया गया है।  

आज डेटा है सबसे मूल्यवान संपत्ति: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सीमाओं की सुरक्षा की तरह महत्वपूर्ण है डेटा की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज डेटा है सबसे मूल्यवान संपत्ति सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है तेजी से प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन प्रदेश में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की होगी स्थापना मुख्यमंत्री डॉ. यादव "राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने" पर कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति डेटा है। डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। डेटा की सुरक्षा, राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में न केवल देश अपितु पूरी दुनिया में सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हर दिन इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं। अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आधुनिक तकनीक और द्रोण जैसे साधनों के उपयोग से सुरक्षा चुनौतियों का नया स्वरूप देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन है। प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता है कि वह समय से पहले आने वाले वाली चुनौतियों को पहचान लेते हैं और शासन-प्रशासन और जन सामान्य को उसके प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम भी उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सायबर अपराध, डीप फेक और अन्य चुनौतियों पर केंद्रित कार्यशाला में सायबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने में सभी मार्ग खोजे जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने" पर सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।  सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से यह रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अटैक की समय पर पहचान और निगरानी में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस सेंटर की महती भूमिका होगी। यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था से हितग्राहियों तक पहुंचने लगा है शत-प्रतिशत लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश बदलते दौर में हर तरह की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सायबर अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस ने अच्छा काम करके दिखाया है। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जीरो बैलेंस पर बैंक अकाउंट खोलने की शुरुआत की। जनधन खाते खुलने से देशभर में जरूरतमंदों को डीबीटी के माध्यम से हितलाभ सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाने लगा। डीबीटी की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से शत प्रतिशत लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने लगा। दुनिया ने भारत की यूपीआई पेमेंट सिस्टम का लोहा माना है। ऐसे समय में जब नागरिकों को डिजिटल और ऑनलाइन माध्यम से लाभ पहुंच रहा है तो सरकार पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करने के लिए राज्य सरकार हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये आवश्यक प्रबंधन जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षा के तमाम चाक-चौबंद उपायों के बाद भी अगर जीवनभर की गाढ़ी कमाई एक झटके में कोई सायबर अपराधी उड़ा ले जाए तो दु:ख होता है। सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। सायबर क्राइम और डेटा सेफ्टी के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। राज्य का डेटा हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी। प्रदेश सरकार सायबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये हो रहा निरंतर कार्य: पी.एस. सेल्वेन्द्रन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न डिजिटल नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए नागरिकों के व्यक्तिगत, वित्तीय, भूमि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन ने कहा कि इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो सायबर खतरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई से प्रदेश की सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला सायबर सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और मजबूत किया जाएगा। एमपी-सीईआरटी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से सुदृढ़ हो रही सायबर सुरक्षा व्यवस्था : एम.डी. वशिष्ठ प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कहा कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटली नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व भी बढ़ा है। नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि एवं संपत्ति सहित विभिन्न शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। एमडी वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से … Read more

मुख्यमंत्री मोहन यादव का अनोखा अंदाज, स्कूटी पर सवार होकर टॉपर चांदनी के घर पहुंचे, परिवार संग ली सेल्फी

भोपाल  विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत सीएम मोहन यादव 15 जून को भोपाल के भीम नगर पहुंचे। सीएम ईवी स्कूटी से गलियों में पहुंचे थे। इस दौरान यहां के लोगों से उन्होंने संवाद किया और उनका हाल-चाल जाना है। साथ ही वह 12वीं की टॉपर चांदनी विश्वकर्मा के घर भी गए। 12वीं टॉपर के घर पहुंच गए सीएम मोहन यादव सीएम मोहन यादव अपना काफिला छोड़कर ईवी स्कूटी से 12वीं टॉपर के घर पहुंचे । भीम नगर में चांदनी विश्वकर्मा का परिवार रहता है। सीएम को अपने घर में देखकर परिवार के लोग स्तब्ध थे। मोहन यादव ने परिवार के सभी सदस्यों से बात की है। साथ ही चांदनी के परिजनों के साथ सीएम ने सेल्फी भी ली है। चांदनी को भविष्य की दी शुभकामनाएं इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि 12वीं बोर्ड परीक्षा में अद्वितीय प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली चांदनी विश्वकर्मा के घर पहुंचकर उनके परिजनों से भेंट की। चांदनी को उसकी सफलता के लिए सीएम ने उसे बधाई दी। साथ ही कहा कि चांदनी ने विषम परिस्थितियों के बीच भी अपने परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प से जो सफलता अर्जित की है, वह प्रेरणादायी है। उनकी उपलब्धि न सिर्फ अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए भी गर्व का विषय है। आमजनों से की बात सीएम यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण होने के मौके पर हमने पार्टी पदाधिकारियों के साथ यहां जनता से संपर्क-संवाद दिया। यहां तक आने के लिए ईवी का इस्तेमाल किया । इसे चलाकर अच्छा भी लगा। ईवी केवल पेट्रोल के दाम ही नहीं बचाती, बल्कि हमारे कई अन्य तरह के खर्चे भी कम करती है। जनता रह गई अचंभित गौरतलब है कि भीम नगर का माहौल पूरी तरह से बदला हुआ था। अमूमन अपने-अपने कामों में मशरूफ रहने वाले भीम नगर के लोग आज बेहद उत्साहित और जागरूक दिखाई दिए। सीएम को अचानक अपने सामने देख लोग अचंभित हो गए। लोगों को समझ में ही नहीं आया कि अचानक क्या हो गया। इस बीच सीएम ने वहां के लोगों से बात शुरू कर दी। उन्होंने बेटियों को गोद में लेकर दुलार किया और सेल्फी ली। इस दौरान जनता से उन्हें अपना पूरा हाल कह सुनाया। सीएम डॉ. यादव ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी जिंदगी भविष्य में और भी बेहतर होगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उद्यमियों को देंगे प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में भोपाल  प्रदेश में उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ रोजगार सृजन को गति प्रदान कर "विकसित मध्यप्रदेश" बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए रविवार 14 जून को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में वृहद कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभिन्न जिलों के एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे। इस दौरान उद्यमियों को भू-आवंटन पत्र, स्टार्टअप नीति अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न लाभ और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत युवाओं को हितलाभ भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एमएसएमई उद्यमियों एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। संवाद के माध्यम से उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे तथा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों और योजनाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही वे उद्यमिता को और अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव और अपेक्षाएं भी प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से विभाग द्वारा प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देंगे। प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह द्वारा विभाग की प्रमुख उपलब्धियों, योजनाओं एवं भावी कार्ययोजना का उल्लेख किया जाएगा। कार्यक्रम की थीम समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" रखी गई है। सूक्ष्म लघु,उद्यम विभाग कार्यक्रम में प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करेगा। यह कार्यक्रम प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानते हुए निरंतर ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिले और युवाओं में स्वरोजगार की भावना विकसित हो तथा नवाचार को प्रोत्साहन प्राप्त हो। राज्य की नई औद्योगिक एवं निवेशोन्मुखी नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को उद्यम स्थापना के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। संवाद से प्राप्त सुझाव प्रदेश की औद्योगिक एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थानों के पदाधिकारी, निवेशक, स्टार्टअप संस्थापक, युवा उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन केवल हितलाभ वितरण तक सीमित न रहकर उद्यमिता को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का अवसर भी बनेगा। मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनाना तथा नवाचार, कौशल और उद्यमिता के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना भी है। "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम इसी व्यापक सोच और दूरदृष्टि को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

मुख्यमंत्री बोले- नौकरी नहीं छिनेगी, लेकिन अफसर हुआ बर्खास्त; विभाग ने कहा- आदेश नहीं मिला

भोपाल मध्यप्रदेश की नौकरशाही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी नियमों और राजनीतिक घोषणाओं के बीच चल रहे टकराव को उजागर कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में स्पष्ट कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाएगी, लेकिन उनकी घोषणा के बाद ही सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस नियम के तहत कार्रवाई हुई, उसी नियम को लेकर सरकार बदलाव के संकेत दे चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री राहत का संदेश दे चुके थे, तब विभाग ने इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की? यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस घोषणा के 48 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर को बर्खास्त करने का आदेश गुरुवार को जारी किया गया। यह शुक्रवार को सामने आया। CM ने तीन संतान वाला प्रस्ताव किया था रद्द मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था। मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। नौकरी के दौरान हुआ तीसरी संतान का जन्म दरअसल, अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिकायत की गई थी कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ है। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। दरअसल, अशोक सिंह परिहार पर आरोप था कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए और दस्तावेजों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। जांच रिपोर्ट के बाद पंजीयन विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि परिहार ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी, लेकिन विभाग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि 1992 से सरकारी सेवा में रहने वाला कर्मचारी नियमों से अनभिज्ञ होने का दावा नहीं कर सकता। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोप सही जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था। अफसर ने कहा था- नियम की जानकारी नहीं जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी। अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मुख्यमंत्री की घोषणा केवल भविष्य की नियुक्तियों के लिए थी या वर्तमान कर्मचारियों पर भी लागू होनी थी? यदि सरकार नियम बदलना चाहती थी तो विभागों को स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए गए? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या एक अधिकारी की नौकरी उस समय चली गई जब सरकार उसी नियम को बदलने की तैयारी में थी? फिलहाल पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अभी तक कोई नया शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए विभाग ने मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई की है। वहीं अशोक सिंह परिहार के पास अब विभागीय अपील और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है। यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की नौकरी का नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की उस खाई का भी है, जहां एक तरफ राजनीतिक घोषणा होती है और दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्था के आधार पर फैसले जारी रहते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।