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युवा वर्ष के लिए उच्च शिक्षा सहित संबंधित विभाग करें आवश्यक तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में नैक की तर्ज पर गठित करें सैक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवा वर्ष के लिए उच्च शिक्षा सहित संबंधित विभाग करें आवश्यक तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाविद्यालयों में कृषि पाठ्यक्रम को लोकप्रिय बनाने का कार्य सराहनीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए दी बधाई उच्च शिक्षा विभाग की हुई समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की आवश्यकता के अनुसार नए महाविद्यालय प्रारंभ किए जाएं। जिन सघन आबादी वाले क्षेत्रों में महाविद्यालय संचालित हैं, वहां विद्यार्थी संख्या बढ़ने पर शिक्षण में शिफ्ट व्यवस्था भी लागू करने पर विचार किया जाए। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की तर्ज पर राज्य परिषद अर्थात सैक के गठन की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। रोजगार परक पाठ्यक्रमों पर फोकस किया जाए। आने वाला वर्ष युवा वर्ष होगा, इस नाते अन्य संबंधित विभागों के साथ विद्यार्थियों के हित में नए कार्यक्रमों और प्रकल्पों को लागू करने की तैयारी भी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में कृषि के स्नातक पाठ्क्रम की व्यवस्था सुनिश्चित कर इस विषय को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कृषि पाठ्यक्रम से प्रदेश के लगभग 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने की सफलता के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बधाई भी दी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता में निरंतर सुधार के कदम उठाए जाएं। पीएममहाविद्यालयों में भी इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। अन्य सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी शिक्षण और अन्य गतिविधियों का सुचारू संचालन होता रहे, इस पर ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की दिशा में हुए कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ किया गया है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं। गत वर्ष 83 नए शोध केंद्र प्रारंभ किए गए। आने वाले समय में 100 शोध केंद्र स्थापित होंगे। सकल नामंकन अनुपात (जीईआर) में प्रदेश ने भारत के 1.1 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 1.8 की वृद्धि करने में सफलता प्राप्त की है। इसी तरह गत ढाई वर्ष में नेशनल लॉ इन्स्टिट्यूट यूनिवर्सिटी में 27वीं और डीएवीवी इंदौर ने 49वीं रैंक प्राप्त की है। प्रदेश की तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को भी नेशनल इन्स्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेम वर्क (एनआईआर एफ) द्वारा श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के लिए सराहा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिन्दवाड़ा के राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में अच्छे विषयों का समावेश करें। इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक आर्थिक सहयोग देगी। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान के कोर्स के लिए व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की रूचि के अनुरूप नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ बैठक में बताया गया कि उच्च शिक्षा विभाग सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग कर रहा है। स्वयं पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों में पंजीयन के कार्य में मध्यप्रदेश ने जुलाई 2025 में 3 लाख 52 हजार 931 पंजीयन कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जुलाई 2026 के सेमेस्टर में यह संख्या 2 लाख 73 हजार 266 हो गई है। प्रदेश में गुना, खरगौन और सागर में नए विश्वविद्यालय और आगर मालवा में लॉ कॉलेज प्रारंभ किया गया। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में 28 विषयों में पीजी कक्षाएं प्रारंभ की गईं। प्रदेश के 618 उच्च शिक्षण संस्थान भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के "वन नेशन-वन सबक्रिप्शन" पोर्टल पर पंजीयन करवा चुके हैं। इस पोर्टल का प्रदेश के 8 लाख से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी उपयोग कर चुके हैं। प्रदेश इस कार्य में भी देश में प्रथम है। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 5 हजार फैकल्टी और स्टॉफ को प्रशिक्षण देने के साथ ही मनोबल सत्र में 71 हजार 705 विद्यार्थी भागीदारी कर चुके हैं। जुलाई से मार्च तक तीन चरणों में कैलेंडर जारी कर अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश में भारतीय ज्ञान परम्परा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के विशेष विशेषज्ञों की समितियां भी गठित की गईं। प्रदेश में 55 शासकीय महाविद्यालयों का प्रधानमंत्री कॉलेज और एक्सीलेंस के रूप में उन्नयन कर विभिन्न सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। प्रमुख नवाचारों में 10 संभागीय मुख्यालयों पर डिजिटल स्टूडियो शुरू हुए हैं। ई ज्ञान सेतु चैनल के माध्यम से ई-कंटेंट उपलब्ध करवाया जा रहा है जिसमें हिन्दी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं बुंदेली, बघेली और मालवीय के ई-कंटेंट भी शामिल हैं। ई-प्रवेश के लिए मोबाइल एप की शुरूआत और सार्थक एप से उपस्थिति की जानकारी प्राप्त की जा रही है। समर्थ सॉफ्टवेयर पर विश्वविद्यालयों को जोड़ा गया है। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में एवीजीसी लेब स्थापित की जा रही है। यह लेब एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स के कार्यों में सहायक है। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से 68 महाविद्यालय एआई कोर्स का संचालन कर रहे हैं। गैर हिन्दी भारतीय भाषाओं में अध्ययन की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। साधना सप्ताह में आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर उच्च शिक्षा विभाग ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।        मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश     महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रोजगार परक पाठ्यक्रम के संचालन पर जोर हो।     पार्ट टाइम महाविद्यालय संचालित किए जाएं। प्रातः और शाम की शिफ्ट में कॉलेज चलाए जा सकते हैं।     आवश्यकता के अनुसार सांदीपनि विद्यालयों के भवन में भी महाविद्यालय संचालित करें।     कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए कॉउंसलिंग की भी व्यवस्था हो।     खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान सहित अन्य वोकेशनल विषयों के अध्ययन के लिए महाविद्यालयों में आवश्यक व्यवस्था की जाए।  

मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने पर्यटन विभाग से तालमेल बढ़ाएं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का लें सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर और भोपाल मेट्रो रेल परियोजनाओं के हुए दो तिहाई कार्य पूरे कार्यो की समय-सीमा में पूर्णता के दिए गए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल संचालन के प्रथम चरण के कार्य पूर्ण होने के बाद परियोजना के आगामी चरणों के कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। सघन आबादी के क्षेत्रों और कामकाजी नागरिकों की सुगम आवाजाही के लिए मेट्रो रेल व्यवस्था एक वरदान है। प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रमुख व्यवसायिक केन्द्र इंदौर में मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। दोनों नगरों की मेट्रो रेल परियोजना के सभी चरणों के सम्पूर्ण कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। समग्र प्रगति की दृष्टि से दोनों परियोजनाओं के दो तिहाई कार्य पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में भोपाल और इंदौर के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। विद्यार्थियों की अध्ययन यात्रा से भी जोड़ें मेट्रो परियोजना को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी बन रहे हैं। प्रमुख धार्मिक केंद्रों, पर्यटन स्थलों, पुरातात्विक धरोहर स्थलों और टाइगर रिजर्व एवं अभयारण्य की सैर के लिए विद्यार्थियों सहित अन्य नागरिकों के लिए प्रबंध होने से मेट्रो रेल का उपयोग बढ़ेगा। इन प्रयासों में पर्यटन विभाग सहित मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।  भोपाल मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना में फेज़-1 में सुभाष नगर से एम्स तक दिसम्बर 2025 से संचालन हो रहा है। इस ट्रेक पर 7.1 किलोमीटर क्षेत्र में 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए गए हैं। फेज़-2 में सुभाष नगर से करोंद चौराहा तक 9.64 से किलोमीटर सेक्शन में कार्य हो रहा है, जो जून 2028 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। इस सेक्शन में 6 एलिवेटेड और दो भूमिगत स्टेशन होंगे। इसी तरह फेज़-3 में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी चौराहे तक 14.16 लम्बाई के सेक्शन में कार्य हो रहा है। इस सेक्शन में 13 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह कार्य भी आने वाले 2 वर्ष में पूर्ण होगा। इंदौर मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि इंदौर मेट्रो रेल परियोजना में फेज-1 के रीच वन में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर 3 तक 5.26 किलोमीटर के सेक्शन का शुभारंभ मई 20 25 में हो चुका है। फेज-1 के रीच-2 में सुपर कॉरिडोर 3 से मालवीय नगर चौराहे तक 11.43 किलोमीटर के सेक्शन के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। फेज-2 के अंतर्गत रीच-1 में शहीद बगीचा से खजराना चौराहा तक 1.77 किलोमीटर सेक्शन के कार्य और फेज-2 के ही रीच-2 के एयर पोर्ट से गांधी नगर तक 1.5 किलोमीटर सेक्शन के कार्य जून 2028 तक पूर्ण होंगे। फेज-3 में खजराना चौराहा से एयरपोर्ट के 11.59 किलोमीटर लम्बाई के सेक्शन के कार्य होंगे। बैठक में नगरों में भविष्य में क्रियान्वित किए जाने वाले फ्लाई ओवर निर्माण, मेट्रो रेल और सड़क निर्माण के कार्यों के संबंध में भी चर्चा हुई।  

वैश्विक निवेश हब बनने की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम इंदौर में 6 जून को होगा भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम 2026 लैटिन अमेरिका एवं 15कैरिबियन देशों के राजनयिक और प्रतिनिधि होंगे शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के लिए आकर्षक निवेश स्थल के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में निवेश, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई गति देने के उद्देश्य से 6 जून को इंदौर में भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन (LAC) व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 की बैठक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में राज्य सरकार के सहयोग से ग्लोबल इंडिया बिज़नेस फोरम (GIBF) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण फोरम का आयोजन मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के सहयोग से रेडिसन ब्लू, इंदौर में होगा। फोरम में लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के 15 देशों के वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें विभिन्न देशों के राजदूत, एक उच्चायुक्त और एक महावाणिज्यदूत शामिल होंगे। इनके साथ निवेशक, निर्यातक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, व्यापार आयुक्त, एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और वरिष्ठ शासकीय अधिकारी सहित 350 से अधिक प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे। चार प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल भी इसमें सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा निवेश संवर्धन और वैश्विक सहभागिता को लेकर किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर अधोसंरचना, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशक हितैषी वातावरण के माध्यम से नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी दिशा में यह फोरम भारत और लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण साबित होगा। मध्यप्रदेश का निर्यात प्रदर्शन भी लगातार मजबूत हुआ है। वर्ष 2025-26 में राज्य से लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र को लगभग 4,186 करोड़ रूपये का निर्यात दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.6 प्रतिशत अधिक है। इस निर्यात में फार्मा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ब्राज़ील, मैक्सिको और चिली, राज्य के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और वैश्विक साझेदारियों को लेकर फोरम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में भारत एलएसी विशेष संस्करण का विमोचन भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश की निवेश क्षमताओं और औद्योगिक अवसरों पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा निवेश प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही व्यापार एवं निवेश के अवसरों, विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग तथा सेवा क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर केंद्रित पैनल होंगे। विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित चर्चा में औषधि, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल रहेंगे, जबकि सेवा क्षेत्र की चर्चा में सूचना-प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फिनटेक तथा शिक्षा क्षेत्र में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। फोरम में उद्योगों और निवेशकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ावा देने के लिए बी2बी और बी2जी बैठकों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे नए व्यापारिक अवसरों और निवेश साझेदारियों को गति मिलेगी। भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक आर्थिक उपस्थिति, निवेश आकर्षण और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई दिशा देगा।  

ग्रीन मोबिलिटी की ओर कदम, इलेक्ट्रिक कार अपनाएंगे CM मोहन यादव; नंबर प्लेट का भी है खास महत्व

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इलेक्ट्रिक कार से सफर करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा की गई पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील पर अमल करते हुए सीएम मोहन यादव ने इलेक्ट्रिक कार में सफर करने का फैसला लिया है। सीएम के फैसले के बाद अब उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल कर लिया गया है और ऐसा बताया जा रहा है कि शाम को पहली बार सीएम मोहन यादव इलेक्ट्रिक कार में सफर कर सकते हैं। सीएम के काफिले में शामिल हुई इलेक्ट्रिक कार सीएम मोहन यादव के द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत करने का फैसला लिए जाने के बाद उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल किया गया है। सीएम के काफिले के लिए नई इलेक्ट्रिक कार महिंद्रा XEV 9e खरीदी गई है, जो कि एक बार की चार्जिंग में करीब 500 किलोमीटर की रेंज देती है। सीएम मोहन यादव आज शाम को पहली बार सीएम हाउस से स्टेट हैंगर जाते वक्त इस इलेक्ट्रिक कार की सवारी कर सकते हैं। कार के नंबर में छिपा है बड़ा संदेश सीएम मोहन यादव के काफिले में जो इलेक्ट्रिक कार शामिल की गई है उसका नंबर MP 02VB 2047 है। सीएम हाउस से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार के नंबर में भी एक बड़ा संदेश छिपा है। कार के नंबर में विकसित भारत का संदेश है, V का मतलब विकसित और B का मतलब भारत है। 2047 नंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दर्शाता है। मोदी के संदेश पर मोहन का अमल..अब EV पर होंगे सवार मध्य प्रदेश के डॉ मोहन यादव बीजेपी शासित राज्यों के उन मुख्यमंत्रियों में से हैं, जिन्होंने पीएम की अपील का अमल सबसे पहले किया. वे मध्य प्रदेश के इकलौते मुख्यमंत्री होंगे, जो अब इलेक्ट्रिकल व्हीकल से सफर करेंगे. सीएम आज से ही इस पर अमल करेंगे. जानकारी के मुताबिक . बीजेपी प्रवक्ता डॉ हितेष वाजपेयी का कहना है कि "मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की ये पहल अनुकरणीय है और मिसाल बनेगी।  मोहन यादव ईवी कार में चलेंगे जिस तरह से उन्होंने पहले काफिले को सीमित किया और अब ईवी वाहन से चलने का निर्णय लिया है. निश्चित तौर पर पार्टी के भीतर ही नहीं बाकी समाज में भी ईंधन बचाने के साथ पर्यावरण को बचाने का जो संकल्प है, उससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी।  ईवी कार में दर्ज विकसित भारत और 2047 इस ईवी कार का नंबर भी बेहद खास है. एमपी 03 सीरीज की इस कार का जो नंबर है, वो वी बी 2047 है. वीबी (VB) के मायने हैं विकसित भारत. जो 2047 का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तय किया है. मोहन यादव प्रदेश के इस लिहाज से पहले मुख्यमंत्री होंगे, जिन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन की सवारी का निर्णय लिया. हालांकि भारत के अन्य राज्यों में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले ही अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन शामिल कर लिए थे. इसी तरह से मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा भी अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं।  13 गाड़ियों से अब केवल पांच गाड़ियों का काफिला मोहन यादव ने इससे पहले अपने काफिले की गाड़ियों को कम किया था. उनके काफिले में 13 गाड़ियां थी, जिन्हें कम करके 8 किया गया और फिर सीमित करके पांच गाड़ियों का काफिला ही बचा. कारकेड कम करने के बाद बीती दिल्ली यात्रा में सीएम डॉ मोहन यादव ने आम आदमी की तरह मेट्रो में यात्रा की थी. अब उसमें भी मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिलक वाहन से यात्रा करने का निर्णय लिया. सभी उच्च तकनीक से लैस महिन्द्रा कंपनी से बनी इस कार के फीचर हैं, एक बार की चार्जिंग में ये औसत 500 किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर तय कर लेती है।  इस कार के टॉप मॉडल की कीमत करीबन 31 लाख 25 लाख है. इसमें आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. इस गाड़ी में पैनोरमिक सनरूफ है, जिससे केबिन में भरपूर प्राकृतिक रोशनी आती है और यात्रियों को खुले आसमान का शानदान नजारा मिलता है. इसमें 360 डिग्री घूमने वाला कैमरा और कई दूसरे सुरक्षा फीचर्स होते हैं. इस गाड़ी में 79 किलोवॉट की लिथियम आयन बैटरी होती है, जो 20 मिनट में 80 परसेंट तक चार्ज हो जाती है. सिर्फ 6.8 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंच जाती है।  एक महीने में बचेगा 6 हजार लीटर डीजल गाड़ियों की संख्या कम करने से डीजल-पेट्रोल की खपत में बड़ी कमी आएगी. स्टेट गैरेज के सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 2026 में वीआईपी वाहनों में करीबन 24 हजार लीटर डीजल की खपत हुई थी, जो मई माह में घटकर 18 हजार लीटर रह गई है. इस तरह एक माह में करीबन 6 हजार लीटर डीजल की कमी आई है।  पीएम की अपील पर सीएम मोहन यादव ने किया अमल बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल की बचत की अपील करने के बाद सीएम मोहन यादव ने इस पर अमल किया है। सबसे पहले सीएम मोहन यादव ने अपने काफिले से गाड़ियों की संख्या कम कराई थी और एक गाइडलाइन भी जारी की थी। इसके साथ ही बीते दिनों सीएम मोहन यादव खुद इंदौर से उज्जैन तक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बस में यात्रा कर पहुंचे थे और सादगीपूर्ण प्रशासन का संदेश दिया था। इस दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्था के लिए केवल तीन अन्य वाहन ही उनके साथ थे। इतना ही नहीं बस में यात्रा के दौरान ही सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई विकासकार्यों और जनहित की योजनाओं पर चर्चा भी की थी।

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में शीघ्र लागू होगी समान नागरिक संहिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दो साल में प्रारंभ किये प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली में इंडिया@2047 कॉन्क्लेव में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली श्रीमती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित … Read more

MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर ₹17,059 करोड़ खर्च करेगी सरकार, किसानों को भी मिली बड़ी सौगात

भोपाल  जनता की सहूलियत के कामों पर सरकार 21 हजार 485 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह राशि अगले 5 साल में खर्च होगी। सबसे ज्यादा 17 हजार 59 करोड़ रुपए स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होंगे। धार स्थित भोजशाला में सरस्वती लोक बनाया जाएगा। भोज शोध संस्थान की स्थापना भी होगी। यहां पूर्व के वर्षों में भोजशाला आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को आर्थिक मदद दी जाएगी। किसानों को भी दी खुशखबरी किसानों द्वारा कुल पैदा की जाने वाली गर्मी की मूंग का 25 फीसद हिस्सा खरीदा जाएगा। जबकि उड़द के एक-एक दाने की खरीदी होगी। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 21 हजार 485 करोड़ की विभिन्न योजनाओं की निरंतरता को मंजूरी दे दी है। जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाकी के विषयों की मंत्रियों को बैठक से पहले ब्रीफिंग में जानकारी दी। बरगी कू्रज हादसे की न्यायिक जांच कराए जाने का अनुसमर्थन संघ के 100 वर्ष फिल्म को एसजीएसटी से छूट दिए जाने व बरगी बांध में हुए भीषण हादसे की न्यायिक जांच कराए जाने संबंधी निर्णय का अनुसमर्थन किया। जबकि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश-2026 और मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया है। यहां खर्च होंगे 17 हजार 59 करोड़  -मेडिकल कॉलेजों के लिए चिकित्सालय योजना को 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया। इस पर 14,363.95 करोड़ खर्च होंगे। यह राशि लोगों को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधा देने और चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किए जाने पर खर्च होगी। -मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम को मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए 657 करोड़ की मंजूरी मिली। मेडिकल कॉलेजों में केंद्र के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में बढ़ोतरी होगी। -उज्जैन ,सिवनी, छतरपुर, दमोह और बुदनी में बनाए जा रहे नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली। -एमबीबीएस की सीट बढ़ाने संबंधी योजना के लिए 838 करोड़ रुपए मिले। इस राशि से मेडिकल कॉलेजों में अधोसंरचना निर्माण, आधुनिक उपकरणों की स्थापना, पठनपाठन एवं महाविद्यालयीन गतिविधियों शुरू की जाएंगी। -इंदौर के पिपल्याहाना में जिला न्यायालय भवन के लिए पुनरीक्षित लागत 626 करोड़ 61 लाख रुपए को स्वीकृति दी।

मशहूर बुरहानपुर केला फसल को भारी नुकसान, मुख्यमंत्री ने तुरंत सर्वे और राहत के दिए निर्देश

बुरहानपुर   तेज आंधी और बेमौसम के कारण बुरहानपुर जिले में केले की फसलों को भारी नुकसान हुआ. खासकर शाहपुर और खकनार तहसील क्षेत्रों में फसलें तबाह हो गईं. किसान बर्बादी की कगार पर हैं. संकट की इस घड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के जख्मों पर मरहम लगाया है. उन्होंने कलेक्टर को तुरंत सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं. अब उम्मीद है कि किसानों को जल्द ही 2 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिल सकता है।  सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल मिले मुख्यमंत्री से किसानों की मांगों को लेकर भोपाल में मंगलवार को खंडवा-बुरहानपुर से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट की. उन्होंने मुख्यमंत्री को बुरहानपुर जिले के विभिन्न गांवों में आई प्राकृतिक आपदा की स्थिति से अवगत कराया. सांसद ने नुकसान की जानकारी उपलब्ध कराई. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुरवासियों के नाम संदेश जारी किया।  बुरहानपुर कलेक्टर को सर्वे कराने के निर्देश सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र पाटिल ने बताया "प्राकृतिक आपदा से जिलेभर में भारी नुकसान हुआ है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टर हर्ष सिंह को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र सर्वे कर राहत एवं सहायता कार्यों को तत्परता से करने को कहा है. इसके अलावा खंडवा जिले की ग्राम पंचायत हंडियाखेड़ा में हुई आगजनी की घटना के बारे में भी जिक्र किया है. हंडियाखेड़ा में 20 से अधिक आवासीय मकान प्रभावित हुए हैं।  विधायक अर्चना चिटनीस पहुंची खेतों में मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक अर्चना चिटनीस ने लोनी और बिरोदा गांव के खेतों का जायजा लिया. वह प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खेतों में पहुंची. किसानों से सीधा संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनी. अर्चना चिटनिस ने कहा "किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं. प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और किसानों को राहत दिलाना हमारी प्राथमिकता है।  पिछली बार 2 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिला मध्य प्रदेश सरकार ने पिछली बार केला फसल नुकसान का मुआवजा बढ़ाया था, अब प्रभावित किसानों को उनकी फसल नुकसानी 2 लाख रुपये तक प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिलता है, इस बार जिलेभर भारी नुकसान हुआ है, जिसके कारण अब प्रभावित किसानों ने मुआवजा राशि को दोगुना करने और मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू किए जाने की मांग उठाई है।  लोनी गांव के किसान हेमंत पाटिल और बिरोदा गांव के किसान भास्कर झोपे ने सरकार से मुआवजा बढ़ाकर देने की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि जिले में एक सप्ताह के भीतर तीसरी बार नुकसान हुआ है, इससे किसानों की कमर टूट गई है. किसान सदमे में हैं।  बुरहानपुर के कई गांवों में फसलें तबाह बीते शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को बे-मौसम बारिश और तेज तूफान किसानों की फसलों पर आफत बनकर बरसे. इस बार फिर प्राकृतिक आपदा से सैकड़ों किसान प्रभावित हुए हैं. शाहपुर क्षेत्र के खामनी, भावसा, मोहद सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों में फसल बर्बादी हो चुकी है. इसी तरह आदिवासी बाहुल्य खकनार क्षेत्र के दर्यापुर, सिंधखेड़ा, सिरपुर, टेंभी, मांजरोद कला, मांजरोद खुर्द, ढाबा, डोईफोडिया सहित अन्य गांवो में किसानों की खड़ी फसल गिर गई है। 

दिग्विजय सरकार में बंद हुआ ट्रिब्यूनल अब फिर होगा शुरू, ड्राफ्ट तैयार करा रही मोहन यादव सरकार

भोपाल  म.प्र. के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर सहमति बन चुकी है। वर्तमान में जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों के भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े करीब साढ़े चार लाख मामले लंबित हैं। ट्रिब्यूनल के गठन से इन मामलों का अलग से और तेजी से निपटारा हो सकेगा। दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान इसे बंद कर दिया गया था जिसे अब एक नए स्वरूप में फिर से चालू किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच बनी सहमति बन चुकी है। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसके गठन का खाका तैयार करने में जुटा है। उधर, एमपी हाईकोर्ट में पेंडिंग केस बढ़ने के कारण न्यायाधीशों के नए पद सृजित किए जाने के प्रस्ताव भी सरकार तक पहुंचे हैं। राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन की कवायद को लेकर सरकार का मानना है कि इससे एमपी के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों और शिकायतों के मामले कोर्ट के बजाय ट्रिब्यूनल के जरिए निराकृत हो सकेंगे। सरकार का यह भी मानना है कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (एसएटी) के गठन के बाद एमपी के मुख्य हाईकोर्ट जबलपुर, खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में हो सकेगी। ऐसे में इन न्यायालयों पर पड़ने वाले न्यायालयीन मामलों का बोझ कम हो सकेगा। कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल के फैसले की अपील के लिए ही किए जा सकेंगे। सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी मिलते ही तीनों ही न्यायालय में कर्मचारियों से संबंधित साढ़े 4 लाख मामलों की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से इस फैसले को जल्दी ही लागू करने के संकेत भी दिए हैं। दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की वर्किंग की स्टडी मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश के एसएटी के गठन के पहले दूसरे राज्यों में संचालित राज्य प्रशासनिक अधिकरण की वर्किंग और वक्त के हिसाब में किए गए बदलाव की स्टडी भी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की जानकारी लेकर एमपी की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करेंगे जिसे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। फिर इसे विधानसभा में विधेयक लाकर मंजूरी दी जाएगी। दिग्विजय सरकार में बंद किया गया था प्रशासनिक ट्रिब्यूनल मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को राज्य सरकार ने 2001 में ही बंद कर दिया था। इसके पीछे तब की दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा एमपी का पुनर्गठन और प्रशासनिक कारण बताए गए थे। इसके बाद राज्य सरकार के आग्रह पर भारत सरकार द्वारा एक अधिसूचना के माध्यम से 17 अप्रैल 2003 को आधिकारिक रूप से ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था। 13 साल ही काम कर पाया था ट्रिब्यूनल इस अधिकरण को राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 4(2) के अंतर्गत 29 जून 1988 को स्थापित किया गया था। इसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों का निपटारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य बेंच (जबलपुर) और खंडपीठों (इंदौर और ग्वालियर) द्वारा किया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण राज्य के कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में त्वरित और सस्ता न्याय दिलाने के लिए यह एक प्रमुख संस्था थी जिसमें वर्ष 2001 से काम बंद हुआ और 2003 में केंद्र ने इसको मंजूरी दे दी थी। भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवाद, शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार जब यह ट्रिब्यूनल काम कर रहा था तो इसमें उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा न्यायिक व प्रशासनिक सदस्य नियुक्त किए जाते थे। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती थी। ट्रिब्यूनल को राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवादों और शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार था। इसमें यह व्यवस्था भी थी कि ट्रिब्यूनल के निर्णयों के खिलाफ अपील सीधे उच्च न्यायालय में की जा सकती थी। प्रशासनिक न्याय अधिकरण को जब बंद किया गया था, तब प्रदेश में कर्मचारियों से संबंधित लंबित मामलों की संख्या 30 हजार थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया था।  

भोजशाला को मिलेगी नई पहचान, बनेगा भव्य सरस्वती लोक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोजशाला में बनेगा भव्य सरस्वती लोक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजा भोज की कर्मस्थली धार में होगी भोज शोध संस्थान की स्थापना भोजशाला के लिए आंदोलन में शहादत देने वाले शहीदों के परिजन को राज्य सरकार देगी आर्थिक सहायता किसानों को गेहूँ उपार्जन के लिए किया जा चुका है 25 हजार 97 करोड़ रुपए का भुगतान ग्लोबल स्किल पार्क के विद्यार्थियों का हंगरी में रोजगार के लिए हुआ चयन प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 9 लाख 67 हजार किलोग्राम दूध का हो रहा है संकलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित धार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धार स्थित भोजशाला परिसर में राज्य सरकार भव्य सरस्वती लोक बनायेगी। धार में राजा भोज संस्थान की स्थापना भी की जायेगी। राजा भोजपाल द्वारा धार में स्थापित भोजशाला सदियों तक ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान और संस्कृत भाषा का सबसे प्रखर केन्द्र रहा है। भोजशाला में दूर-दूर से विद्यार्थी और विद्वान ज्ञान अर्जित करने और शास्त्रों पर विमर्श करने आते थे। राज्य सरकार भोजशाला के उसी गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने के लिए सभी जरूरी प्रयास करेगी। राजा भोज की कर्मस्थली धार में राजा भोज शोध संस्थान की भी स्थापना की जायेगी। भोजशाला के लिए हुए आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों स्व. बनसिंह, स्व. अंतरसिंह एवं स्व. लक्मण सिंह के निकटतम परिजन को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में ये विचार व्यक्त किए। प्रदेश में गेंहूँ उपार्जन के नए रिकार्ड के लिए, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र सेवा के सफल 12 वर्ष के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 26 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र सेवा के सफल 12 वर्ष पूर्ण हुए हैं। देशवासियों की आशा के प्रतीक प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में भारत ने विकास के साथ आत्मनिर्भरता, सुरक्षा, सांस्कृतिक गौरव, डिजिटल क्रांति और वैश्विक नेतृत्व के नए आयाम स्थापित किए हैं। अंत्योदय की भावना के साथ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा है। राष्ट्र प्रथम की भावना से GYAN मंत्र में गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति के उत्थान तक, सीमाओं की सुरक्षा से नक्सल व आतंक मुक्त भारत के निर्णायक परिणाम तक, भारत ने अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी। समान नागरिक संहिता के संबंध में 15 जून तक दिए जा सकेंगे सुझाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समान नागरिक संहिता के संबंध में सुझाव प्राप्त करने के लिए वेबसाईट निर्माण की पहल को सराहा। उन्होंने कहा कि जिलों में उच्च स्तरीय समीति द्वारा भ्रमण किया जा रहा है, जहां जन सामान्य, राजनीतिक दल, गैर शासकीय संगठन आदि इस संबंध में अपना मत प्रस्तुत करेंगे। सुझाव देने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्री परिषद के सदस्यों को यूसीसी के लिये बनी इस उच्च स्तरीय समिति और इसके कार्यों तथा वेबसाईट का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इससे हमें अधिक से अधिक सुझाव प्राप्त हो सकेंगे। प्रदेश के आधुनिक कौशल प्रशिक्षण मॉडल से युवाओं को विदेश में मिल रहे हैं रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में विकसित हो रहा कौशल तंत्र अब युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय रोजगार अवसरों से भी जोड़ रहा है। संस्थान के बैच-9 के 3विद्यार्थियों का चयन हंगरी में रोजगार के लिए हुआ है। चयनित विद्यार्थी हंगरी पहुंचकर अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन प्रारंभ कर चुके हैं। इस वर्ष माह अप्रैल-मई 2026 में 16 कम्पनियों में 236 युवाओं को प्लेसमेंट मिला है। यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रहे आधुनिक कौशल प्रशिक्षण मॉडल और उद्योगोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को रेखांकित करती है। वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को 1609 करोड़ रुपए का भुगतान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 9 लाख 67 हजार किलोग्राम औसत दुग्ध संकलन की उपलब्धि दर्ज हुई है। दुग्ध संघों ने दुग्ध उत्पादक किसानों को गत वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान किया गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मार्गदर्शन में हुए कार्यों से वर्ष 2024-25 में 1398 करोड़ रूपए की तुलना में वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को 1609 करोड़ रुपए की राशि के भुगतान में सफलता मिली है। दुग्ध उत्पादकों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रणाली अपनाई गई है। विभिन्न दुग्ध संघों में खरीद मूल्य में 2.50 से 8.50 रूपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। 13 लाख 42 हजार किसानों द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूँ का विक्रय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम मध्य एशिया की विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश में सफलतापूर्वक गेहूँ उपार्जन का कार्य पूर्ण किया गया। प्रदेश में 104.36 लाख मेट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूँ के समर्थन मूल्य राशि 2585 रूपए प्रति क्विंटल के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल की दर से राज्य सरकार द्वारा बोनस दिया गया। कुल 2625 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया गया, जिससे राज्य के किसानों को समर्थन मूल्य की राशि के अतिरिक्त राशि 417 करोड़ रूपए प्राप्त होगी। कोविड-19 को छोड़कर प्रदेश में विगत 10 वर्षों में इस वर्ष सर्वाधिक 104.36 लाख मीट्रिक टन गेंहूँ का उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समर्थन मूल्य पर 13 लाख 42 हजार किसानों द्वारा गेहूँ का विक्रय किया गया, जो कि गेहूँ विक्रय करने वाले किसान संख्या की दृष्टि से पूरे भारत में सर्वाधिक है। मध्यप्रदेश, पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में पहली बार लघु एवं सीमांत कृषकों को गेहूँ विक्रय करने का अवसर प्रदान किया गया। सप्ताह में 05 दिन के स्थान पर 06 दिन (शनिवार को भी) गेहूँ का उपार्जन किया गया है। किसानों को 25,096.99 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है और शेष भुगतान प्रचलित है। जल गंगा संवर्धन अभियान … Read more

भगवान देवनारायण का जीवन मानव सेवा और लोककल्याण का संदेश देता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भगवान देवनारायण का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत, उन्होंने मानव सेवा को ही माना अपना धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री उज्जैन के जमालपुरा में चल रहे देवनारायण कथा महोत्सव में वीसी से हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान देवनारायण सिर्फ़ गुर्जर समाज के आराध्य देव ही नहीं, बल्कि न्याय, लोक कल्याण, सेवा और पराक्रम के प्रतीक हैं। उनका पूरा जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने कर्मों से यह सिद्ध किया कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवता की सेवा और कमजोरों की रक्षा में निहित है‌। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से उज्जैन जिले के ग्राम जमालपुरा में आयोजित देवनारायण कथा महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कथा महोत्सव आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान देवनारायण मंदिर परिसर में लगातार छठें वर्ष 7 दिवसीय कथा का आयोजन धर्म प्रेमियों के लिए सोने गर सुहागा की तरह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान देवनारायण लोक देवता हैं। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। उनका ननिहाल उज्जैन है़ वे 12 वर्ष तक उज्जैन में ही रहे। उनका जीवन सदैव जनसेवा और लोक कल्याण को समर्पित रहा। सेवा ही भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा धर्म हैं। हम सबको इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। प्रसिद्ध कथा वाचक पं. ईश्वर सिंह गुर्जर (भगत जी), रामचन्द्र जी, निर्भय सिंह आंजना, वीरेन्द्र आंजना, मानसिंह चौधरी, हीरालाल आंजना सहित बड़ी संख्या में स्थानीय धर्म प्रेमी उपस्थित थे।