samacharsecretary.com

सूखे पेयजल स्रोतों की करायें जांच, नल जल योजनाएं बिना किसी बाधा के हो संचालित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पेयजल आपूर्ति में कोई कमी न रहे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सूखे पेयजल स्रोतों की करायें जांच, नल जल योजनाएं बिना किसी बाधा के हो संचालित केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से राज्य शासन को मिलेंगे 5 हजार करोड़ रुपये जल स्रोतों के लिए टयूबवेल पर ही न रहें आश्रित, तालाब से जल संग्रहण और रिचार्जिंग दोनों में आसानी मार्च 2028 से पहले जल जीवन मिशन होगा कम्पलीट मध्यप्रदेश बना बोरवेल अधिनियम बनाने वाला देश का पहला राज्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों को समुचित पेयजल आपूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नागरिकों को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। गर्मी के मौसम और बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था की सतत् निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि जहां जैसी आवश्यकता हो, वहां वैसी त्वरित व्यवस्थाएं की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जल अभाव की स्थिति बन रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर पानी उपलब्ध कराया जाए। बैठक में पीएचई की मैदानी योजनाओं एवं पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पत्तिया उइके ने बताया कि विभाग तेजी से अपनी लक्ष्य पूर्ति की ओर बढ़ रहा है। मार्च 2028 से पहले प्रदेश में हर घर नल से जल के उद्देश्य से जल जीवन मिशन का काम पूरा कर लिया जायेगा। मिशन का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उज्जैन राजस्व संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में जल जीवन मिशन का शत् प्रतिशत कार्य हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शत-प्रतिशत कार्य करने वाले ऐसे गांवों/ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन/सम्मानित किया जाये, जिन्होंने बेहतर तरीके से नल जल योजनाओं का संचालन/संधारण किया। मंत्री श्रीमती उइके ने बताया कि बोरवेल में गिरने से होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं/मृत्यु को रोकने के लिए प्रदेश में बोरवेल अधिनियम बनाया गया है। ऐसा अधिनियम बनाने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। उन्होंने विभागीय संरचना और गतिविधियों को अधिक बेहतर बनाने के लिए विभाग के सिविल विंग, मैकेनिकल विंग और जल निगम को एकीकृत करने का सुझाव दिया। मंत्री श्रीमती उइके बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान- 2026 में डिंडोरी और मंडला जिले में 8 हजार से अधिक एकल ग्राम नल जल योजनाओं पर काम पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इस काम को 'कर्म स्थान से जन्म स्थान की ओर' अवधारणा से जोड़ा जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था एवं अधोसंरचनात्मक विकास के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से तत्काल समन्वय करें। केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन अन्तर्गत लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त होना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मध्यप्रदेश को यह आवंटन जारी करने की सहमति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से राज्य में ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने को कहा जिससे कि सभी नलजल योजनाएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रहे। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जल बचाने वाले और इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वालों का राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मान कार्यक्रम आयोजित करें। बताया गया कि विभाग द्वारा जल महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसमें प्रदेश में एकल एवं समूह नल जल योजना के संचालन एवं प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल महोत्सव कार्यक्रम को जल गंगा संर्वधन अभियान के साथ जोड़ने और जल बचाने के लिए अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। जल गंगा संर्वधन अभियान के तहत विभाग द्वारा ग्रामीण, शहरी एवं स्कूलों में स्थापित जल स्रोतों की वाटर टेस्टिंग की जा रही है। साथ ही हैंडपंपों की जांच एवं नल जल योजना के ऑपरेटर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल स्रोतों के लिए पीएचई केवल टयूबवेल जैसे माध्यम पर ही आश्रित न रहे। जल स्रोत के रूप में तालाब सरोवर निर्माण से कई लाभ होंगे। इससे जल संरक्षण के साथ जल स्तर में वृद्धि होगी। क्षेत्र में वॉटर रिचार्जिंग बढ़ेगी। जल संग्रहण क्षमता बढ़ने के साथ ही नल-जल योजना के संचालन के लिए स्थायी जल संरचना भी उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कार्य में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिसर (मैपकास्ट) की विशेषज्ञ सेवाओं का भी लाभ लें। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मनीष सिंह ने बताया कि विभागीय स्तर पर पेयजल आपूर्ति की गहन मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया गया है। पेयजल आपूर्ति में आ रही समस्या की सूचना मिलते ही उसे तत्काल दूर किया जा रहा है। पेयजल से निर्माण कार्य करने वालों पर सख्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि म.प्र. जल निगम के समूह ग्राम पेयजल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण खर्चे को कम करने के लिए प्रदेश में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही हैं। पीएचई सोलर एण्ड विंड एनर्जी का बल्क यूजर है। प्रमुख सचिव सिंह ने बताया कि प्रदेश में दिसम्बर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक  क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन दिये गये, साथ ही 15 हजार 238 नवीन नलकूप/हैंडपंप भी स्थापित किये गये। प्रदेश के 14 हजार 200 गांवों में जल प्रदाय व्यवस्था का शत् प्रतिशत काम पूरा कर इन्हें हर घर जल घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत परिवारों को नल से जल के तहत कवर कर लिया गया है।   म.प्र. जल निगम के प्रबंध संचालक वी.एस. कोलसानी ने बताया कि उज्जैन राजस्व संभाग की एकल ग्राम नल जल योजनाओं के काम पूरे कर लिये गये है। यहां 7 लाख 9 हजार … Read more

बाबूलाल जी गौर ने जनसेवा और जनहितैषी कार्यों से लोगों के दिलों में बनाई खास पहचान : CM डॉ. यादव

बाबूलाल जी गौर ने जनहितैषी कार्यों से लोगों के दिलों में बनाई जगह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रद्धेय गौर जी सदैव हमारे लिए आशीर्वाददाता की भूमिका में रहे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गौर की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्रद्धेय बाबूलाल गौर की जयंती पर विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके कार्यकाल के स्वर्णिम क्षणों का स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कहा कि श्रद्धेय बाबूलाल गौर जी मध्यप्रदेश के ऐसे राजनेता रहे, जिन्होंने अपने जनहितैषी कार्यों से लोगों के दिलों में जगह बनाई। वे सदैव हमारे लिए आशीर्वाददाता की भूमिका में रहे। राज्य सरकार उनके बताए मार्ग और आदर्शों का अनुसरण करते हुए प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राजधानी भोपाल के वीआईपी रोड के विकास में गौर की दृढ़ता स्मरणीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय बाबूलाल जी ने अपने राजनीतिक जीवन में विभिन्न जनआंदोलनों में सक्रिय सहभागिता करते हुए राष्ट्रसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका समर्पित सार्वजनिक जीवन और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। बाबूलाल जी गौर ने प्रदेश के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेशवासियों की सेवा की। प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राजधानी भोपाल के वीआईपी रोड के विकास में उनकी दृढ़ता स्मरणीय है। मंत्री, जनप्रतिनिधि तथा परिजन ने भी अर्पित की पुष्पांजलि मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी, विधायक रामेश्वर शर्मा तथा परिजन सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

रक्षाबंधन पर बहनों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बसों में मिलेगा सफर का तोहफा : CM डॉ. यादव

रक्षाबंधन पर बहनें करेंगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन की बसों में सफर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव परिवहन सेवा को चरणबद्ध रूप से किया जाएगा शुरू सामान्य जन के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है राज्य परिवहन सेवा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य परिवहन सामान्य जन के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्य सरकार न सिर्फ प्रदेश में बेहतर और आधुनिक सड़कों का तेजी से निर्माण कर रही है, बल्कि जल्द ही नागरिकों को राज्य परिवहन की विशेष सुविधा भी देने जा रही है। राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की ओर बढ़ रही है। इस बार रक्षाबंधन पर हमारी बहनें परिवहन विभाग की बसों में सफर करें, इसके लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी विधानसभा में मीडिया से चर्चा में दी। राज्य सरकार जन सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थिति के कारण शहरों के बीच दूरी अधिक है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा सभी समस्याओं को खत्म कर जनता का आवागमन सुगम बनाएगी। उम्मीद है कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों और पड़ोसी राज्यों के साथ मध्यप्रदेश सरकार का यह प्रयास सुगम परिवहन सेवा के प्रभावी रूप में देखने को मिलेगा। प्रदेश में जन सुविधाओं के विस्तार और प्रदेश के समग्र विकास के लिए हमारी सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता और संकल्प के साथ कार्य कर रही है।  

प्रदेश के विकास और जनकल्याण को बड़ी सौगात, 21,485 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी

प्रदेश के चहुँमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को मिली स्वीकृति अधिकार अभिलेखों पर स्टॉम्प ड्यूटी और पूरा पंजीयन शुल्क माफ करने का हुआ फैसला योजना का वित्तीय भार 3800 करोड़ रूपये का राज्य शासन करेगा वहन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति जिला न्यायालय भवन, पिपल्याहाना, इंदौर के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत 626 करोड़ 61 लाख रूपये की स्वीकृति पहली से 8 वीं तक के विद्यार्थियों को सिली हुई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय "मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश, 2026" के प्रारूप का अनुमोदन "मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश 2026" के प्रारूप का किया अनुमोदन "तन्वी द ग्रेट" और "शतकः संघ के 100 वर्ष" को एस.जी.एस.टी. से छूट के निर्णय का अनुसमर्थन बरगी जलाशय दुर्घटना की जांच के लिए न्यायिक जाँच आयोग के गठन का अनुसमर्थन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। साथ ही प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है, जिसका संपूर्ण 3800 करोड़ रूपये का वित्तीय भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। इसके साथ ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 17 हजार 59 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई, जिससे नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण और एमबीबीएस तथा पीजी सीटों में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त होगा। बैठक में ग्रामीण विकास और वित्तीय सुधारों को गति देने के लिए 'मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम' तथा 'मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम' में संशोधन संबंधी अध्यादेशों के प्रारूपों को मंजूरी दी गई। वहां, स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए सत्र 2026-27 में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त इंदौर जिला न्यायालय भवन के पुनरीक्षित लागत, बरगी जलाशय हादसे की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठन के निर्णय का अनुसमर्थन तथा 2 प्रमुख फिल्मों को एस.जी.एस.टी. से छूट देने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर मंत्रि-परिषद द्वारा मुहर लगाई गई। ये सभी निर्णय राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार और पारदर्शी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा, संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रूपये का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा है। स्वामिव योजना में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत नागरिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने के लिए अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त/संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का विस्तृत परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध चिकित्सालय योजना की 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 14,363.95 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के जन सामान्य को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराये जाने एवं प्रदेश में चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किये जाने के लिए 12 जिला मुख्यालयों पर चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध चिकित्सालयों का संचालन राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है। चिकित्सा महाविद्यालय में पी.जी. पाठ्यक्रम के सुदृढ़ीकरण से संबंधित योजना के लिए 657 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश में संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में वृद्धि होगी। इससे राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ जन सामान्य को सुदूर ग्रामीण अंचल से जिला स्तर तक चिकित्सा सुविधा के लिए चिकित्सीय मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की … Read more

महिला-बाल कल्याण योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए कड़े निर्देश

महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहन और लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव योजनाओं के क्रियान्वयन में जनभागीदारी और जबावदेही करें सुनिश्चित पोषण स्तर सुधार की गतिविधियों में विभिन्न विभाग मिलकर करें कार्य निजी अस्पतालों और संस्थाओं का भी लिया जाए सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक से अधिक जन भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचार हो। बच्चों और महिलाओं में पोषण स्तर को बेहतर करने के लिए संचालित गतिविधियों में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित निजी अस्पतालों और संस्थाओं को भी जोड़ा जाए। इस दिशा में अन्य राज्यों और प्रदेश के जिलों में हो रहे सफल नवाचारों को अपनाने के लिए भी कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही मैदानी स्तर पर बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करें और लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश सोमवार को मंत्रालय में हुई महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर हॉस्टल निर्माण की बनाएं कार्ययोजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन औद्योगिक इकाइयों में महिला कर्मियों की संख्या अधिक है, उन इकाइयों में कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर हॉस्टल निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में बताया गया कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण प्रारंभ हो गया है। प्रताड़ित महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद-झाबुआ, इंदौर के लसूड़िया और सांवेर एवं धार के मनावर और पीथमपुर में वन स्टॉप सेन्टर स्वीकृत किए गए हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन अंतर्गत 51 जिला स्तरीय और 01 राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर के माध्यम से 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई गई। जोखिम ग्रस्त बच्चों की मैपिंग के लिए 13 जिलों में प्रक्रिया जारी है। 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित किया गया विद्यारंभ समारोह बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए विद्यारंभ आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया और बच्चों का शाला में सुगम प्रवेश सुनिश्चित किया गया। प्रदेश के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सराहना मिली है। बाल देखरेख संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री खेल एवं सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। सक्षम आंगनवाड़ी उन्नयन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बैठक में बताया गया कि सक्षम आंगनवाड़ी उन्नयन के अंतर्गत प्रदेश में एक साथ 12 हजार 670 मिनी केंद्रों को मुख्य आंगनवाड़ी के रूप में उन्नत कर मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बना है। इस प्रकार की पहल में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में जनवरी 2024 से मई 2026 तक प्रदेश की 01 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र बहनों को 47 हजार 775 करोड़ रुपये से अधिक की मासिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15 लाख 84 हजार बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के क्रियान्वयन में देश में अव्वल म.प्र. बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में दर्ज 15 लाख 51 हजार गर्भवती महिलाओं को 798 करोड़ 68 लाख रूपये से अधिक का भुगतान किया गया। इस योजना के क्रियान्वयन में पिछले ढाई साल से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को बीमा योजना से लाभान्वित किया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पोषण स्तर में सुधार के लिए किये जा रहे नवाचारों की जानकारी भी दी गई। बैठक में सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती जी.वी. रश्मि सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी पहचान, CM डॉ. यादव ने दिया प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन को श्रेय

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश के अग्रणी होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन को है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भविष्य की जरूरतों के अनुसार दी गई अंतर्राज्यीय परियोजनाओं को मंजूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदानीरा समागम में जल संवर्धन की प्रदर्शनी का किया अवलोकन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन के कारण मध्यप्रदेश जल संरक्षण और जल संचयन के कार्यों में देश में अग्रणी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण में किये जा रहे अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने राज्यों को अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के बलबूते भविष्य की आवश्कताओं का अनुमान लगाते हुए आवश्यक जल के प्रबंध के लिए भी सजग बनाया है। मध्यप्रदेश, केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए दी गई मंजूरी से वृहद स्तर पर लाभान्वित होगा। मध्यप्रदेश इस वर्ष गुड़ी पड़वा से ही प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख कुओं बावड़ियों, पोखरों, जलाशयों और अन्य जलसंरचनाओं को उपयोगी बनाने के महत्वपूर्ण कार्य में लगा है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की शाम भारत भवन के बहिरंग में 27 मई से 2 जून तक आयोजित सदानीरा जल गंगा संवर्धन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया। मेपकास्ट (मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद) के सहयोग से लघु चित्रों में जल, भूगर्भीय जल स्रोत, मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान और जलचर-जलीय जीवन के प्राण तत्व नामक प्रदर्शनियों के साथ ही 'वीर भारत न्यास' और 'मेपकास्ट' द्वारा प्रकाशित अंतर्जलि यात्रा, जिलों के भूजल एटलस और अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में फिजी, साइप्रस, मैक्सिको सहित अन्य देशों के उच्चायुक्त और राजदूत भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनेक नदियों का उद्गम स्थल है। प्रदेश की नदियां प्रवाहित होते हुए गंगा-यमुना जैसी नदियों में जाकर मिलती हैं। यह प्रदेश का सौभाग्य है कि हमारे विंध्याचल और सतपुड़ा के पर्वत मध्यप्रदेश को परमात्मा की अनुपम कृति हैं। वनांचलों से जल धाराएं आती हैं जो नदियों को समृद्ध बनाती हैं। नर्मदा मैया के साथ ही ताप्ती, बेतवा, चंबल जैसी नदियां अपार जल राशि से समृद्ध हैं। चंबल नदी का जल प्रदेश की गणना देश की स्वच्छ नदियों में करवाता है, इसके कारण घड़ियाल भी इसी नदी में सर्वाधिक पाए जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदि काल से जल सहेजने के कार्य चल रहे हैं। राजा भोज के काल की तकनीक की चर्चा करें तो भोपाल की बड़ी झील श्रेष्ठ जल संरक्षण प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें आबादी को हानि पहुंचाए बिना जल सहेजने, उसके उपयोग और अतिरिक्त जल की निकासी का श्रेष्ठ प्रबंध किया गया। प्रदेश में जनता की भागीदारी से जल गंगा संवर्धन अभियान का संचालन चल रहा है। प्रदेश में कृषि उत्पादन में वृद्धि का आधार भी यही जल और उसका उचित प्रबंधन है। भूगर्भ के जल भण्डारण का कृषि क्षेत्र में संतुलन के साथ उपयोग किस तरह किया जाए यह विज्ञान के सहयोग से संभव है। मेपकास्ट द्वारा इस क्षेत्र में किये जा रहे अनुसंधान महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास और सहयोगी संस्थाओं को इस सार्थक आयोजन के लिए बधाई दी। इस अवसर पर केंद्रीय भू-जल बोर्ड के प्रतिनिधि अशोक विश्वास, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी भी उपस्थित थे। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह प्रदान किए। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल सहित बड़ी संख्या में जल संरक्षण क्षेत्र के विद्वान, विद्यार्थी, सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि और अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जुड़े कलाधर्मी उपस्थित थे।  

पीएम ई-बस सेवा के तहत इंदौर शहर में प्रारंभ होगा 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में इंदौर संभाग से प्रारंभ होगा बस आपरेशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीएम ई-बस सेवा के तहत इंदौर शहर में प्रारंभ होगा 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर से प्रदेश के अन्य जिलों के लिए, इंदौर शहर एवं उप नगरीय क्षेत्रों तक सिटी बसें म.प्र. से लगे हुए राज्यों के लिए (महाराष्ट्र, राजस्थान गुजरात एवं उत्तरप्रदेश) अंतर्राज्यीय चलेंगी बसें मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में म.प्र. यात्री परिवहन एण्ड इन्फ्रॉस्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मण्डल की हुई बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में  हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेश में बसों के संचालन हेतु, मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्डं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मण्डल की बैठक संपन्न हुई। बैठक में बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष बोर्ड के प्रबंध संचालक मनीष सिंह द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। संपूर्ण मध्यप्रदेश को 7 क्षेत्रों में, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर एवं रीवा विभक्त करते हुए इन शहरों में पूर्व से क्रियाशील शहरी परिवहन के लिये कंपनियों के संबंध में जानकारी दी गई। बताया गया कि पीएम ई-बस सेवा और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना में बसों का संचालन सर्वप्रथम इंदौर क्षेत्र से प्रारंभ किया जाएगा। इंदौर क्षेत्र के तहत, इंदौर संभाग के समस्त जिले तथा इंदौर स्थित अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (A.I.C.T.S.L.) अब संपूर्ण इंदौर संभाग से प्रारंभ होने वाली बसों के कार्यक्षेत्र में कार्य करेंगी। इंदौर क्षेत्र से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत निम्न तीन श्रेणी की बसों का संचालन जुलाई माह प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित किया गया:- (अ) इंदौर से मध्यप्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाली इंटरसिटी मार्गों पर बसों का संचालन। (ब) इंदौर शहर में सिटी बसों का संचालन तथा इस श्रेणी में उपनगरीय क्षेत्रों तक अधिसूचित मार्गों पर भी बसों का संचालन। (स) इंदौर संभाग के समीपवर्ती राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश जाने वाले अंतर्राज्यीय मार्गों पर अनुबंध अनुसार बसों का संचालन। इसके साथ-साथ यह भी अवगत कराया गया कि पीएम ई-बस सेवा की 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी इंदौर शहर में जुलाई माह से प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। प्रबंध संचालक द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया गया कि 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों के 7 शहर से, प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों तक जाने वाले कुल 620 मार्गों को चिन्हित किया गया है। इनमें कुल 2432 बसें संचालित होगी। इसके तहत इन्दौर क्षेत्र से प्रदेश के अन्य जिलों में कुल 121 मार्ग चिन्हित किये गये हैं, जिनमें 608 बसें संचालित की जायेंगी। सात क्षेत्रीय मुख्यालय इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और रीवा में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सिटी बसों का संचालन भी किया जायेगा। यह बसें आमजन की सुविधा हेतु शहर से आगे महत्वपूर्ण उप नगरीय क्षेत्रों तक भी जा सकेंगी। इस श्रेणी के सिटी रूट के तहत इंदौर में शहर के अंदर एवं उप नगरीय क्षेत्रों तक कुल 28 मार्ग चिन्हित किये गये हैं। इनमें आमजन की सुविधा हेतु 784 बसें (पीएम ई-बस सेवा की 150 बसों को मिलाकर) संचालित की जायेंगी। इसी प्रकार यह भी बताया गया कि इंदौर क्षेत्र से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश राज्यों के लिये जाने वाली बसों के मार्ग अनुबंध अनुसार कुल 101 हैं। इसमें कुल 276 अंतर्राज्यीय बसों का संचालन अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (A.I.C.T.S.L), के द्वारा किया जायेगा। इसी प्रकार इंदौर से प्रारंभ होने वाली इंटरसिटी सिटी बसें एवं अंतर्राज्यीय, कुल मार्गों की संख्या क्रमश: 250 हैं। इनमें कुल 1688 बसों का संचालन किया जाना प्रस्तावित हैं। प्रबंध संचालक द्वारा यह अवगत कराया गया कि जिस प्रकार से इंदौर क्षेत्र से उक्त तीनों श्रेणी की बसों का संचालन विभिन्न मार्गों पर किया जायेगा। इसी प्रकार अन्य 6 क्षेत्रीय मुख्यालयों से भी इन तीनों श्रेणी की बसों का संचालन चिन्हित मार्गों पर उस क्षेत्र की सहायक कंपनियों द्वारा किया जायेगा। सम्पूर्ण प्रदेश के सात क्षेत्रों में कुल सभी श्रेणी के 1164 मार्गों को चिन्हित किया गया है, जिसमें कुल 5206 बसें संचालित होंगी। बसों का संचालन मोटरयान अधिनियम 1988 के सुसंगत प्रावधानों के तहत, स्कीम के प्रकाशन उपरांत होगा। इसमें वर्तमान संचालित निजी बसों के अनुज्ञा-पत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा वे यथावत पूर्व व्यवस्था अनुसार संचालित होती रहेंगी। संचालक मण्डल की बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत गठित की गई राज्य स्तरीय कंपनी एवं सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के संगठनात्मक महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं पदों की स्वीकृति भी संचालक मण्डल द्वारा दी गई। इन कंपनियों में प्रभावशील रहने वाले सेवा भर्ती नियम-2026 की भी स्वीकृति संचालक मण्डल द्वारा प्रदान की गई है। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्डि इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में 7 विभाग कार्य करेंगे, जो क्रमश: IT एवं ITMS विभाग, planning एवं अनुबंध विभाग, पॉलिसी विभाग एवं अनुसंधान, मानव संसाधन एवं विधि विभाग, अधोसंरचना विभाग, प्रवर्तन एंव गुणवत्ता विभाग तथा Buiseness Development विभाग कार्य करेंगे। सभी विभागों के प्रमुख, मुख्य महाप्रबंधक रहेंगे। इन पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को लिया जा सकेगा। इस होल्डिंग कंपनी में प्रतिनियुक्ति, संविदा और संविलयन के आधार पर पदों की भर्ती की जा सकेगी। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में कुल 140 पद उच्च प्रबंध श्रेणी, वरिष्ठ प्रबंध श्रेणी एवं कनिष्ठ प्रबंध श्रेणी में स्वीकृत किए गए हैं। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के अधीन 7 क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में कुल 150 पदों की स्वीकृति दी गई है। सभी सहायक कंपनियां एक कार्यकारी संचालक के अधीन होंगी। सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के अधीन संचालित होने वाली बसों की सुरक्षा एवं सुविधा और प्रवर्तन अमले के लिये भी पद स्वीकृत किए गए हैं। इसमें पुलिस एवं विशेष सशस्त्र बल से अधिकारी-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर अथवा हाल ही में सेवानिवृत्त हुए अधिकारी-कर्मचारियों को संविदा पर लिया जा सकेगा। संचालित होने वाली बसों की गुणवत्ता नियंत्रण के लिये गुणवत्ता विभाग के अधीन भी पदों की स्वीकृति की गई है। इससे आमजनों की यात्रा सुरक्षित हो सकेगी। राज्य परिवहन उपक्रम के तहत संचालित होने वाली इन बसों की आवाजाही प्रदेश के सभी ISBT एवं बस स्टेण्ड तक हो सकेगी। इस प्रकार एक राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी एवं 7 सहायक क्षेत्रीय कंपनियों … Read more

छोटे कारोबारियों के लिए वरदान साबित हो रही पीएम स्वनिधि योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पीएम स्वनिधि योजना से देश के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को मिली नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता हो चुके हैं लाभांवित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सम्मान का आधार बनी 'पीएम स्वनिधि' योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'पीएम स्वनिधि' ने देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को नई उड़ान और सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलवाया है। उन्होंने कहा कि इस जनकल्याणकारी योजना से जुड़कर अब तक प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता लाभान्वित हो चुके हैं।  

बुजुर्गों के अधिकारों को सशक्त बना रही MP सरकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था

मध्यप्रदेश में वरिष्ठजनों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की सुदृढ़ व्यवस्था कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं इसका प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं। अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है।   हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है।   सम्मान और सामाजिक स्वीकृति वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है। नवाचार और सुधार राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है। यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है। मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

राज्यपाल पटेल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्मदिवस की दीं शुभकामनाएं

राज्यपाल पटेल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्मदिवस की दीं शुभकामनाएं लोकभवन में पुष्पगुच्छ भेंट कर किया अभिवादन भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल के जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकभवन पहुंचकर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल पटेल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्पगुच्छ, अंग वस्त्रम और बाबा महाकाल की प्रतिकृति भेंट कर उनका अभिवादन किया। साथ ही उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु होने की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि संवैधानिक मूल्यों और अंत्योदय के प्रति राज्यपाल पटेल की निष्ठा, कर्तव्यपरायणता एवं प्रतिबद्धता प्रेरणादायी है।