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मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में खास पल, वैदिक घड़ी को लेकर सीएम का अभिनव प्रयास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित करने पर कैबिनेट के सदस्यों ने माना आभार मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में खास पल, वैदिक घड़ी को लेकर सीएम का अभिनव प्रयास उज्जैन की धरोहर को मिला नया स्वरूप, कैबिनेट ने सीएम यादव के कदम की सराहना की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित किए जाने पर मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने शॉल और पुष्प-गुच्छ भेंट कर आभार व्यक्त किया। मंत्रियों ने कहा कि यह पहल भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाली है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगी। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है। यह घड़ी केवल समय बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और चंद्रमा की स्थिति जैसी जानकारी भी उपलब्ध कराती है। इसमें वैदिक समय के साथ-साथ भारतीय मानक समय और ग्रीनविच मानक समय का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव है। इस अनूठी घड़ी के साथ मोबाइल एप भी तैयार किया गया है, जो 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और विश्वभर के 7000 से अधिक स्थानों के लिए समय व पंचांग की जानकारी देता है। मंत्रियों ने कहा कि उज्जैन की वैदिक और सांस्कृतिक परंपरा से प्रेरित यह घड़ी मुख्यमंत्री निवास में स्थापित होना गर्व की बात है। यह पहल प्रदेश की गौरवशाली धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के साथ युवाओं को वैदिक विज्ञान और गणना प्रणाली से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर परिवहन, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पवार सहित अन्य मंत्री शामिल थे।  

मध्य प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति के लिए रोलिंग बजट पर काम

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार पहली बार तीन साल का रोलिंग बजट तैयार करेगी। प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति- विकसित मध्य प्रदेश 2047 पर केंद्रित वर्ष 2026-27, वर्ष 2027-28 एवं वर्ष 2028-29 के लिए त्रिवर्षीय रोलिंग बजट तैयार किया जाएगा। इसके लिए 15 सितंबर से 30 सितंबर तक विभागवार बैठकें होंगी। 31 अक्टूबर को नई योजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे और एक अक्टूबर से 15 नवंबर तक द्वितीय चरण की चर्चा की जाएगी। बता दें कि इससे पहले बजट निर्माण में 28 से 31 जुलाई तक विभागीय प्रशिक्षण और प्रारंभिक चर्चा की जा चुकी है। इसके अलावा इस बार भी राज्य सरकार द्वारा शून्य आधार बजटिंग की प्रक्रिया को जारी रखते हुए वित्तीय अनुशासन और परिणाम आधारित बजट निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। शून्य आधार बजटिंग प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर योजना के पीछे ठोस उद्देश्य हो, उसका समाज पर प्रभाव दिखे और प्रत्येक व्यय राज्य की विकास प्राथमिकताओं से मेल खाता हो। बजट स्वीकृति के पहले हर योजना का होगा मूल्यांकन प्रत्येक योजना के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि उस पर खर्च क्यों किया जा रहा है, उसका लाभ किसे होगा और उसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या होगा। इस प्रक्रिया में गैर-प्रभावी योजनाओं को समाप्त करने और समान प्रकृति की योजनाओं को एकीकृत करने पर भी विचार किया जाएगा। दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें होंगी आयोजित बजट निर्माण के लिए दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। 31 मार्च 2026 को समायोजन प्रस्तावों की अंतिम तिथि रखी गई है। वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की भी गणना अलग होगी। विभागों को अपने स्थायी खर्चों जैसे वेतन, पेंशन, भत्तों की गणना करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के वेतन में तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि जोड़ी जाएगी। महंगाई भत्ते की गणना क्रमश: 74 प्रतिशत, 84 प्रतिशत और 94 प्रतिशत के हिसाब से होगी। संविदा कर्मचारियों के वेतन में चार प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का भी प्रविधान रहेगा। अजा-अजजा उपयोजना के लिए न्यूनतम बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए सेगमेंट कोडिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। आफ-बजट व्यय और केंद्रीय योजनाओं पर भी रहेगी निगरानी जिन विभागों को भारत सरकार से सीधे फंड प्राप्त होता है, उन्हें वह राशि भी बजट प्रस्ताव में दर्शानी होगी। इसके अलावा, आफ-बजट ऋण, प्रोत्साहन योजनाओं का वित्तीय असर, और नवीन योजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बजट की तैयारी के लिए जो आइएफएमआइएस प्रणाली अपनाई गई है, उसमें तय समय के बाद प्रविष्टि की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी प्रस्ताव निर्धारित समय-सीमा में दर्ज करें और विभागीय बैठक के पूर्व पूरी जानकारी तैयार रखें।

प्रकृति और‍विज्ञान के संतुलन पर केन्द्रित भारतीय परम्पराओं का गौरवपूर्ण प्रतीक है वैदिक घड़ी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित करेगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रकृति और‍विज्ञान के संतुलन पर केन्द्रित भारतीय परम्पराओं का गौरवपूर्ण प्रतीक है वैदिक घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और ऐप का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं के मोबाइल में डाउनलोड करवाया विक्रमादित्य वैदिक क्लॉक ऐप मुख्यमंत्री निवास पहुंची शौर्य स्मारक से आरंभ हुई भारत का समय-पृथ्वी का समय रैली मुख्यमंत्री निवास में स्थापित की गई विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतवर्ष ने अपने ज्ञान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अलौकिक किया है। कालगणना की पद्धति 300 साल पहले तक हमारे देश से दुनिया तक जाती थी। भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पहलु प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है, जो विश्व कल्याण का पोषक है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परम्परा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। विरासत-विकास-प्रकृति और तकनीक के संतुलन का प्रकटीकरण विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अनावरण और उसके ऐप लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राजा भोज पर यूट्यूब सीरीज के फोल्डर और खगोल विज्ञान पर फिल्म सीडी का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का मंत्रोच्चार के बीच अनावरण किया। इस अवसर पर शौर्य स्मारक से आरंभ हुई 'भारत का समय-पृथ्वी का समय' रैली मुख्यमंत्री निवास पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में शामिल युवाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के ऐप का लोकार्पण, राजा भोज पर निर्मित यू-ट्यूब सीरीज के फोल्डर का विमोचन और खगोल विज्ञान पर केन्द्रित फिल्म की सीडी का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक घड़ी के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आहवान किया और उपस्थित युवाओं से मोबाइल में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी डाउनलोड करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर वैदिक घड़ी भेंट की गई। भारतीय कालगणना में ऋतुओं के प्रभाव का विशेष महत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि सनातन संस्कृति के व्रत, त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर नहीं आते, उनकी गणना में ऋतुओं का प्रभाव शामिल है। सावन-भादो-कार्तिक माह का प्रभाव हम सब अपने जीवन में अनुभव कर रहे हैं। पूर्णिमा और अमावस्या का समुद्र पर प्रभाव ज्वार-भाटा से आंका जा सकता है, इससे हमारी तिथियों की सत्यता भी प्रमाणित होती है। मानसिक रोगियों पर अमावस्या और पूर्णिमा का प्रभाव चिकित्सा शास्त्र भी स्वीकार करता है। मानव शरीर संरचना में 70 प्रतिशत जल का अंश है, जो अमावस्या और पूर्णिमा पर प्रभावित होता है। इसी का परिणाम है कि मानसिक चिकित्सालयों को अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष सतर्कता बरतने के स्थाई निर्देश हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में समय की गणना सूक्ष्मतम स्तर तक की गई है। सनातन संस्कृति में सूर्योदय से सूर्योदय तक की गणना का विधान है। इस प्राचीन गणना में 30 मुहूर्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में विभिन्न सिद्धांतों पर विचार-विमर्श के लिए कोई बंधन या दंड नहीं है, जबकि कालगणना पर वैचारिक मतभेद के कारण मृत्युदंड देने का उद्धरण पश्चिम के इतिहास में मिलता है। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का हैं जीवंत उदाहरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खगोलीय अध्ययन के लिए सूर्य से बनने वाली छाया के आधार पर सूर्य की गति की गणना की गई। उन्होंने बताया कि भारत का केन्द्र उज्जैन है और उज्जैन का केन्द्र वर्तमान में डोंगला में स्थित है। डोंगला का प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से जुड़ता है। संभवत: डोंगला के इस महत्व से ही भगवान श्रीकृष्ण का आगमन हुआ था। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का जीवंत उदाहरण हैं। पंचांग के विद्वान चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तिथि, नक्षत्र, वार, व्रत, त्यौहार और मुहूर्तों की जानकारी वर्तमान में भी त्वरित रूप से उपलब्ध कराते हैं। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास के द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री निवास केवल मुख्यमंत्री का नहीं, अपितु सभी प्रदेशवासियों की धरोहर है। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार है। भारतीय संस्कृति के अतीत के गौरवशाली पृष्ठों का प्रकटीकरण हमारा दायित्व है। इसी का परिणाम है कि हमारी कालगणना का केन्द्र उज्जैन है, परंतु कालगणना की पद्धति की जानकारी प्रदेश की राजधानी में हो, इसके लिए प्रयास करते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना भोपाल में की गई। भारतीय कालगणना की पद्धति की जानकारी का वैश्विक रूप से भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक घड़ी के ऐप के माध्यम से हम अपने मोबाइल में वैदिक घड़ी का संचालन कर सकते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा और संस्कृति विभाग के इस आयोजन में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम आजादी के अमृतकाल में चल रहे हैं। पूरी दुनिया का समय बदल रहा है, पश्चिम के बाद अब पूर्व का समय आया है। प्रधानमंत्री मोदी विश्व में भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए हैं प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने दृष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्हीं के प्रयासों से वर्ष 2014 में दुनिया के अंदर यूनेस्को के माध्यम से योग को पुनर्स्थापित किया गया। भारत का ज्ञान, कौशल और विशेषता केवल भारत के लिए नहीं है, यह समूची मानवता के लिए है। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए इस भाव से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम निरंतर सक्रिय और अग्रसर हैं। सुशासन के उच्चतम मापदंडों के आधार पर वर्तमान व्यवस्थाओं का हो रहा है संचालन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन के आधार पर ही विक्रमादित्य काल वर्तमान समय तक याद किया जाता है। सुशासन के इन्हीं उच्चतम मापदंडों के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान में व्यवस्थाओं का संचालन हो रहा है। उनके प्रत्येक निर्णय से देश … Read more

वैदिक घड़ी का शुभारंभ: सूर्योदय से सूर्यास्त तक होगी समय की गणना, सीएम बोले- यही है असली भारतीय पद्धति

भोपाल   राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण और ऐप लॉन्च किया। इस घड़ी की खासियत है कि यह सूर्य की गति के साथ चलती है और सूर्योदय से नए दिन की शुरुआत करती है। इस मौके पर शौर्य स्मारक से युवाओं का बाइक व पैदल मार्च निकाला गया, जो मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचा। वहां “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी : भारत के समय की पुनर्स्थापना की पहल” विषय पर युवा संवाद हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने युवाओं से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह केवल घड़ी नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि का आधुनिक स्वरूप है। वैदिक घड़ी हमारी संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगी।   कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से जुड़े मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- 'अगर हम मंत्रियों को एक-एक घड़ी भेंट कर दी जाए तो हम भी अपने घरों में इसे स्थापित कर सकें।' वर्ष की गणना छह ऋतुओं के आधार पर की गई  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय की गणना सूर्योदय से सूर्योदय तक होनी चाहिए, क्योंकि रात 12 बजे दिन बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हमारे इतिहास में खगोल विज्ञान को सूर्य की छाया के आधार पर समझा और परिभाषित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे व्रत-त्योहार अंग्रेजी कैलेंडर पर नहीं, बल्कि भारतीय पंचांग पर आधारित हैं। वर्ष की गणना भी तिथियों और छह ऋतुओं के आधार पर की गई है।  सीएम ने कहा कि ये भारत का समय है…। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब मोबाइल ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इसे डाउनलोड कर आप अपने फोन पर हर उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि मुख्यमंत्री निवास के बाहर भी वैदिक घड़ी स्थापित की गई है।  सूर्योदय से होना चाहिए दिन की गणना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे सभी त्योहार अंग्रेजी तिथियों के आधार पर नहीं आते। वर्ष की गणना भी तिथियों और छह ऋतुओं के आधार पर की गई है। इसलिए समय की गणना सूर्योदय से सूर्योदय तक होनी चाहिए। रात 12 बजे दिन बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हमारी प्राचीन गणना पद्धति में 60 सेकेंड का मिनट नहीं, बल्कि 30 घंटे में 30 मुहूर्त माने जाते हैं। यह कोई बंधन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की धरोहर और विचार का विषय है। उन्होंने कहा कि अतीत के इतिहास में खगोल विज्ञान को सूर्य की छाया से समझा जाता था। भारत का सेंटर पॉइंट उज्जैन माना गया है, लेकिन यह भी समय के साथ दोलायमान हुआ और 32 किमी दूर डोंगला तक पहुंचा। भगवान श्रीकृष्ण भी समय गणना का केंद्र खोजने डोंगला के पास नारायणा गांव आए थे, जहां उनके साथ बलराम और सुदामा भी मौजूद थे। सीएम ने आगे कहा कि 10 हजार साल पहले सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण कब हुआ था, इसकी गणना आज का कंप्यूटर भी नहीं कर पाएगा, लेकिन हमारी वैदिक काल गणना तुरंत सटीक जवाब देती है। सावन के महीने में छाता लेकर चलने की परंपरा भी इसी अनुभवजन्य गणना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ग्रह, नक्षत्र और तिथियों के आधार पर जीवन के सभी निर्णय तय किए जाते थे। हमने विधानसभा में भी यही परंपरा अपनाने का प्रयास किया है- रात में भी काम हो सकता है, लेकिन अमावस्या के दिन अवकाश होना चाहिए। पश्चिम का समय जब तक था, तब तक था। अब पूर्व का समय आया है। दुनिया में भारत की अच्छाइयों को लेकर जाने का यही समय सही समय है। 2014 में सरकार बनाने के 6 महीने में ही पीएम मोदी ने दुनिया मे योग को पुर्नस्थापित करने का काम किया। भारत का ज्ञान कौशल समूची मानवता के लिए है। ये घड़ी भारत की हलचल दुनिया को दिखा रही है। सबकी गति अलग- अलग है लेकिन हमारी ज्ञानगंगा की धारा और आगे तक जाए। हम सब इस घड़ी का उपयोग करते हुए इसकी चर्चा करेंगे। सीएम ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा- मोबाइल ऊपर करके क्यूआर कोड से घड़ी डाउनलोड करो। CM ने सबके मोबाइल की टॉर्च ऑन करवाई। भरतीय पंचांग ऋतुओं और प्रकृति से जुड़ा हुआ  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के लोकार्पण एवं युवाओं से संवाद कार्यक्रम में कहा कि  काल गणना और वैदिक पद्धति हमारी वैज्ञानिक और सांस्कृतिक धरोहर है। अंग्रेजी तिथियां बदलती रहती हैं, लेकिन भारतीय पंचांग ऋतुओं और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। सावन-भाद्रपद की वर्षा, क्वार-कार्तिक की ऋतु चक्र- सभी तिथि आधारित गणना का प्रमाण हैं। चंद्रमा और समुद्र के ज्वार-भाटा से लेकर मनुष्य के शरीर पर अमावस्या–पूर्णिमा का प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। भारतीय गणना पद्धति में दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक माना जाता है, न कि रात 12 बजे से। 30 मुहूर्त, 24 घंटे और समय की संरचना भारतीय काल गणना की अद्वितीय प्रणाली है। सीएम हाउस मेरा नहीं, प्रदेश की जनता का  सीएम ने कहा कि हमारे यहां विचार व्यक्त करने और सत्य के आधार पर सुधार करने की स्वतंत्रता रही है, यही हमारी संस्कृति की ताकत है। उज्जैन भारत का काल गणना का केंद्र है, जो खगोलीय दृष्टि से प्रमाणित है। पंचांग और वैदिक गणित की सटीकता को दुनिया भी स्वीकार कर रही है, कंप्यूटर जहां असफल हो जाए वहां हमारे ज्योतिषी सही उत्तर दे सकते हैं। मुहूर्त का अर्थ केवल शुभ-अशुभ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन और प्रकृति के अनुकूल आचरण भी है। सीएम हाउस मेरा नहीं, प्रदेश की 9 करोड़ जनता का है। भारत के समय की नई परिभाषा लिखी जा रही इस दौरान भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि आज से भारत के समय की नई परिभाषा लिखी जा रही है। उन्होंने कहा- 'जब हम मां की कोख में आते हैं तो ईश्वर प्रारब्ध पहले ही लिख देता है। मुख्यमंत्री जी ने वैदिक घड़ी लगवाकर वास्तव में भारत के समय की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक कदम उठाया है।' हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म हिंदू संस्कृति में हुआ है। यह घड़ी हमें काल गणना की वैदिक परंपरा से जोड़ेगी और भारत को सोने की चिड़िया बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री निवास विरासत का साक्षी बन रहा मंत्री कृष्णा गौर ने कहा- … Read more

मध्यप्रदेश में पहली बार स्टेट क्रिएटर्स अवार्ड्स, सीएम डॉ. यादव ने किया ऐलान

मध्यप्रदेश में भी दिये जायेंगे स्टेट क्रिएटर्स अवार्ड्स : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में पहली बार स्टेट क्रिएटर्स अवार्ड्स, सीएम डॉ. यादव ने किया ऐलान भोपाल में क्रिएटर्स समिट – 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए क्रिएटर्स अवार्ड्स भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज हम डिजिटल युग में जी रहे हैं। सूचनाओं और घटनाओं का प्रसार बड़ी तेजी से होता है। ऐसे दौर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि आप लोग जो भी कंटेंट वायरल करेंगे, वही समाज तक पहुंचेगा। इसलिए अपने प्रभाव और ताकत का समाजहित में सही दिशा में सदुपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि सभी क्रिएटर्स को अपने दायित्व को समझते हुए अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल समाज और देश के विकास में करना चाहिए। यही सच्ची समा सेवा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की पहुंच और प्रभाव का उपयोग शासकीय योजनाओं और विकास कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में किया जा सकता है। इसीलिए हमारे सरकार प्रदेश में सोशल मीडिया के जरिए पब्लिक नेटवर्किंग को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिएटर्स से कहा कि वे सरकार के कामों को भी जनता तक पहुंचाये, सरकार क्रिएटर्स को सभी जरूरी मदद और सुविधाएं प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि अब मध्यप्रदेश में स्टेट क्रिएटर्स अवार्ड दिए जायेंगे। इसकी रूपरेखा जल्द ही तैयार की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार की रात भोपाल के एक निजी होटल में आयोजित भोपाल क्रिएटर्स समिट – 2025 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां क्रिएटर्स द्वारा आयोजित टाक शो में भी हिस्सा लिया। टॉक शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 में सोशल मीडिया से जुड़े क्रिएटर्स को सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। समिट में प्रदेश भर से आए यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल आर्टिस्ट्स ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कंटेंट मॉनेटाइजेशन, ऑडियंस इंगेजमेंट और डिजिटल दुनिया के नए ट्रेंड्स पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 प्रकार की अवार्ड कैटेगरी में बेस्ट परफॉर्मर क्रिएटर्स को ‘क्रिएटर्स अवार्ड्स’ भी प्रदान किए। समिट में सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े ने कहा कि क्रिएटर्स ने दुनिया की सोच बदल दी है। ये एक नई तरह की आरेन्ज इकानामी है जो अब दुनिया में 6 ट्रिलियन डातर की हो गई है। उन्होंने कहा कि आप अपनी क्रियेटिव सोच के साथ आगे बढ़, सरकार आपके अच्छे काम में आपके साथ है। कार्यक्रम में डिजिटल क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले क्रिएटर्स को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मयंक तिवारी, नमन देशमुख सहित बड़ी संख्या में युवा इन्फ्लुएंसर्स, डिजिटल आर्टिस्ट्स और कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद थे। 

धार्मिक पर्यटन में MP नंबर-1: CM डॉ. यादव बोले- सबसे ज्यादा श्रद्धालु यहां आए

CM डॉ. यादव का दावा- धार्मिक पर्यटन के लिए सबसे ज्यादा पर्यटक MP पहुंचे रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव से ग्वालियर क्षेत्र में पर्यटन विकास को मिलेगी नई गति ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत अभियान चल रहा है। राज्य सरकार भी इस अभियान में हरसंभव सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पर्यटन विकास को रोजगार से जोड़ा है। पर्यटन बढ़ता है, तो लोगों को रोजगार के नए-नए अवसर मिलते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश में पर्यटन क्षेत्र बहुत तेजी से विकास कर रहा है। इसमें मध्यप्रदेश भी पीछे नहीं है। गत वर्ष धार्मिक पर्यटन के लिए देश में सर्वाधिक पर्यटकों ने मध्यप्रदेश को ही चुना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को जारी संदेश में कहा कि हमारी सरकार सभी क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दे रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शनिवार को ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की गई है। इससे पहले रीवा और उज्जैन में टूरिज्म को लेकर ऐसी ही कॉन्क्लेव आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में समृद्ध वन क्षेत्र और वन्य जीव पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। कूनो में देश का पहला राष्ट्रीय चीता अभ्यारण्य है। साथ ही चंबल नदी के आसपास घड़ियाल अभ्यारण्य भी है। कछुओं की लुप्त प्रजातियों का भी संरक्षण मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। माधव नेशनल टाइगर पार्क को इसी साल लोकार्पित किया गया है। पर्यटन विकास के जरिए प्रदेश का भविष्य और उज्ज्वल और समृद्ध हो, सभी युवाओं को रोजगार मिले, हमारी सरकार इसी भावना से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के कई स्थान हैं। देश में कुल 66 स्थान विश्व धरोहर स्थल के रूप में चिन्हित किए गए हैं, इनमें से 27 मध्यप्रदेश में स्थित हैं। यह राज्य के लिए बेहद गौरव की बात है। इस कॉन्क्लेव के जरिए ग्वालियर एवं चंबल अंचल में पर्यटन विकास को एक नई गति मिलेगी।  

हमारा स्वाभिमान है स्वदेशी उत्पाद, हमारी संस्कृति ही हमें जोड़ती है स्वदेशी भाव से: CM यादव

स्वदेशी उत्पादों का उपयोग है सच्ची राष्ट्रसेवा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमारा स्वाभिमान है स्वदेशी उत्पाद हमारी संस्कृति ही हमें जोड़ती है स्वदेशी भाव से स्वदेशी अभियान के पोस्टर एवं जन अभियान परिषद के ब्रोशर का किया विमोचन जनअभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के मध्य हुआ एमओयू स्वदेशी से जुड़े रहने के संकल्प के तहत सभी ने ली शपथ मुख्यमंत्री ने किया स्वदेशी से स्वावलंबन विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री एवं जनअभियान परिषद के अध्यक्ष डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वदेशी वस्तुएं केवल उत्पाद ही नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, धरोहर और हमारे मान-सम्मान का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया "वोकल फॉर लोकल" अभियान भारतीयता की इसी भावना को आगे बढ़ाने का माध्यम है। हमारे देशी उत्पाद न केवल विदेशी उत्पादों से अधिक मजबूत, किफायती और गुणवत्तायुक्त हैं, बल्कि इन्हें खरीदने पर हमें अधिकतम लाभ भी मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आत्मीय आह्वान किया कि हर भारतीय नागरिक को न केवल स्वयं स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करना चाहिए, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। यही देश प्रेम हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। स्वदेशी भावना ही सच्ची राष्ट्रसेवा का सहज मार्ग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में जनअभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में 'स्वदेशी से स्वावलंबन' विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि कर इस एक दिवसीय संगोष्ठी का विधिवत् शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनअभियान परिषद द्वारा स्वदेशी अभियान के लिए तैयार किए गए पोस्टर एवं ब्रोशर का भी विमोचन किया। इस ब्रोशर में स्वदेशी वस्तुओं की सूची दी गई है। कार्यक्रम में जन अभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के मध्य स्वदेशी उत्पादों के प्रचार-प्रसार की जनजागृति के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में इस एमओयू का दोनों संगठनों द्वारा परस्पर आदान-प्रदान भी किया गया। कार्यक्रम का आरंभ वंदे मातरम् गायन के साथ हुआ। आरंभ में आयोजकों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का तुलसी का पौधा भेंटकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण की दिशा में विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं का अधिकाधिक उपयोग ही देश के प्रति प्रेम और सच्ची राष्ट्र सेवा है। हम सभी को अपने जीवन में देशी उत्पादों का उपयोग बढ़ाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्वदेशी भाव से सदैव जुड़े रहने के संकल्प के तहत कार्यक्रम में उपस्थित सभी को स्वदेशी उत्पादों का ही उपयोग करने की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को 'राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस' की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लघु उद्योगों से ही हमारी अर्थव्यवस्था कायम है। भारतीय वस्तुओं और भारतीय तकनीक की विश्व में धूम मची है। वैश्विक स्तर पर हमारे देश में निर्मित वस्तुओं की मांग बढ़ी है। यह वैश्विक मांग हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान भाव को और पोषित करती है। उन्होंने कहा कि पूरा राष्ट्र स्वदेशी के प्रति वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध है। हमारी संस्कृति ही हमें स्वदेशी का भाव सिखाती है। हम देशी वस्तुओं के प्रति अपने अंर्तमन से जुड़े हुए हैं। यह भावना ही स्वदेशी उत्पादों को और बेहतर स्वरूप देने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच दोनों का लक्ष्य एक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश में धार्मिक, आध्यात्मिक और वन पर्यटन बढ़ाने की दिशा में ठोस काम किए हैं। महाकाल लोक के निर्माण के बाद वर्ष 2024 में 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आए। हम हर सेक्टर में आगे बढ़ रहे हैं। पर्यटन के अलावा हम एमएसएमई यानि छोटे उद्योग और खनन क्षेत्र में निहित संभावनाओं को तलाशने के लिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कॉन्क्लेव कर रहे हैं। ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की गई है। यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश में रोजगारपरक उद्योग स्थापित करने वाले उद्योगपतियों और निवेशकों को किफायती दरों पर भूमि, बिजली, पानी के साथ-साथ प्रति श्रमिक 5 हजार रूपए प्रोत्साहन राशि भी दे रहे हैं। इससे प्रदेश में नए उद्योग-धंधे लगेंगे, जिसका सीधा लाभ मध्यप्रदेश के निवासियों को मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह के रूप में मिट्टी के गणेश की प्रतिमा भेंट की गई। संगोष्ठी में बैतूल विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि स्वदेशी एक बड़ा विषय है। राज्य सरकार स्वदेशी के प्रति जागरूकता और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही है। हम सभी अपने मानस में, अपने आचरण में स्वदेशी भाव लाएं, तभी हमारा देश विकसित और समृद्ध बनेगा। हम अपनी संस्कृति और धरोहर को बचाए रखें और सरकार के स्वदेशी भाव से जुड़े हर काम, हर अभियान में सहयोगी बनें। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर जागृति लाएंगे, तभी तो स्वदेशी की भावना हर नागरिक तक पहुंचेगी। जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने कहा कि यह राज्य स्तरीय संगोष्ठी स्वदेशी जागरण मंच के सहयोग से आयोजित की गई है। दोनों संगठन स्वदेशी के प्रति जागृति लाने के लिए प्राण-प्रण से जुटे हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 25 सितम्बर से 02 अक्टूबर 2025 तक जनअभियान परिषद 'स्वदेशी जागरण सप्ताह' मनाएगा। हम इसे जन-जन का अभियान बनाएंगे। उन्होंने बताया कि हम सरकार के हर अभियान को प्रदेश के हर नागरिक तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। विगत 30 मार्च से 30 जून तक चले 'जल गंगा संवर्धन अभियान' में जन अभियान परिषद ने 40 लाख लोगों की सहभागिता कराई। 'एक पेड़ मां के नाम अभियान' के तहत जन अभियान परिषद ने 17 लाख से अधिक पौधे रोपने में मदद की और करीब 1.5 लाख से अधिक महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हम मिट्टी के गणेश की स्थापना के लिए लक्षित होकर काम कर रहे हैं। इस वर्ष के गणेशोत्सव में हमने प्रदेश के 10 लाख से अधिक घरों में … Read more

CM मोहन यादव बोले – मध्यप्रदेश के कण-कण में बसा है सौंदर्य

सीएम ब्लॉग भोपाल  भारत का हह्यदय प्रदेश मध्यप्रदेश अप्रतिम सौंदर्य से समृद्ध प्रदेश है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक सम्मोहित करने वाला राज्य है। इसके कण-कण में सौंदर्य है। जो एक बार आता है यहां की स्मृतियों के सम्मोहन में बंधकर बार-बार आता है। मध्यप्रदेश में हर आयु के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता है। पर्यटन के संबंध में दशकों पहले की अवधारणाएं अब समाप्त हो गई हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन ने अब उद्योग का रूप ले लिया है। हमारी नीतियों और दूरदर्शी निर्णयों से पर्यटन क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। यह सर्वमान्य तथ्य है कि अर्थव्यवस्था में पर्यटन सर्वाधिक रोजगार उत्पन्न करने वाला सेक्टर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अतुल्य भारत का वैश्विक स्तर पर मान-सम्मान बढ़ा है। इसका सकारात्मक प्रभाव सभी राज्यों के पर्यटन उदयोग पर पड़ा है। देश का घरेलू पर्यटन बढ़ने से मध्यप्रदेश जैसे तेजी से बढ़ते राज्य को सीधा लाभ हुआ है। मध्यप्रदेश के शांतिप्रिय नागरिकों के लिये सबसे ज्यादा खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश अब वैश्चिक पर्यटन नक्शे पर ध्रुव तारे जैसा चमक रहा है। हमारे पर्यटन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह अत्यंत समृद्ध और विविधता से सम्पन्न है। साथ ही जिम्मेदार और सुरक्षित भी। प्रदेश में पर्यटन की नई-नई शाखाएं उभरी है। प्राकृतिक पर्यटन हो या सांस्कृतिक पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन हो या वन्यजीव पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन हो या रोमांचकारी पर्यटन, कृषि पर्यटन हो या फिल्म पर्यटन या नया उभरता हुआ चिकित्सा पर्यटन। इन सभी नये स्वरूपों के साथ मध्यप्रदेश की पहचान बहुआयामी पर्यटन प्रदेश के रूप में हो रही है। प्रदेश में अब पर्यटकों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। गत वर्ष देश में सर्वाधिक पर्यटक मध्यप्रदेश में आए। नैसर्गिक सौन्दये, वन्य प्राणी, धार्मिक स्थल, आकर्षक ऐतिहासिक विरासतें और हरे-भरे वन हमारी विशेषता है। हमारे वन जीवत है। देश में सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में हैं। चंबल सबसे साफ नदी है जिसमें घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। नर्मदा मैया के दर्शन करने हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आते है। प्रधानमवी नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि से मध्यप्रदेश अब देश का एकमात्र चौता प्रदेश बन गया है। चौतों का परिवार पालपुर कूनो में फल फूल रहा है। सांची, खजुराहो और भीमबेटका जैसी विश्वविख्यात धरोहर हमारी वैश्विक सांस्कृतिक पहचान है। अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल के पत्थर कला स्थल, भोजेश्वरा महादेव मंदिर भोजपुर, रामनगर मंडला के गाँड स्मारक और मंदसौर का धमनार भी जुड़ने की तैयारी में हैं। इसके अलावा नर्मदा परिक्रमा, गौड चित्रकला और भगोरिया उत्सव भी पर्यटन के नक्शे पर प्रमुखता से उभरे हैं। मध्यप्रदेश ऐसा अग्रणी राज्य चल गया है. जिसने सबसे ज्यादा 18 स्थलों को विश्व विरासत सूची में शामिल करने की पहल की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश के पर्यटन को नई दिशा मिली है। केन्द्र का भरपूर सहयोग मिल रहा है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां इको सेंसिटिव जोनल मास्टर प्लान बनाने का काम शुरू किया गया और 27 राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में से सतपुड़ा राष्ट्रीय उदयान और बोरी वन्य जीव अभ्यारण्य में पूरा हो गया। हैरिटेज पर्यटन की कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। प्रदेश में अधोसंरचना मजबूत होने, सड़क संपर्क में निरंतर सुधार होने और केन्द्र सरकार के सहयोग से रेल सुविधाओं के बढ़ने से पर्यटन क्षेत्र और उदयोग को लाभ मिला है। इस क्षेत्र में निवेश निरंतर बढ़ रहा है। हाल में रीवा पर्यटन कॉन्क्लेव में तीन हजार करोड के निवेश प्रस्ताव मिले। पर्यटन स्थलों सुविधाएं निरंतर बढ़ाई जा रही हैं। पीएमपर्यटन वायु सेवा की शुरुआत हुई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सतना और सिगरौली के मध्य वायु सेवा का संचालन हो रहा है। मध्यप्रदेश सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। इसी समय आध्यात्मिक पर्यटन भी निरंतर विस्तार ले रहा है। भगवान श्रीमहाकाल की नगरी उज्जैन और यहां श्रीमहाकाल लोक विश्व विख्यात हैं। पिछले साल सात करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र के योगदान में आध्यात्मिक पर्यटन भागीदारी को और ज्यादा सशक्त बनाने की तैयारी चल रही है। ओरछा में भगवान श्रीराम का मंदिर है। यह विश्व का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान को राजा के रूप में गार्ड ओफ आनर दिया जाता है। यह अभूतपूर्व आध्यात्मिक घटनाक्रम है। यहां भगवान श्रीराम राजा की सरकार स्थापित है। ग्वालियर के ऐतिहासिक भव्य किले के संबंध में उल्लेख मिलता है कि भारत में पहली बार जीरो का लिखित इस्तेमाल कहां हुआ। ग्वालियर किले में नीं शताब्दी के इस चतुर्भुज मंदिर में शूल्य का सबसे शुरुआती शिलालेख पर उकेरा हुआ प्रमाण मिलता है। इस मंदिर को दुनिया में टैपल ऑफ जीरो के नाम से भी पहचाना जाता है। धार्मिक आयोजनों को नया स्वरूप दिया जा रहा है। बाबा श्रीमहाकाल की दिव्य सवारी को भव्य रूप दिया गया। रक्षा बंधन के त्यौहार और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को सार्वजनिक रूप से प्रदेश के कोने-कोने में मनाया गया। धार्मिक महत्व के स्थलों में धार्मिक और सांस्कृतिक लोगों और स्मारकों का निर्माण अध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम देगा। संत रविदास लोक सागर, रानी दुर्गावती स्मारक जबलपुर देवी लोक सलकनपुर सीहोर रामराजा लोक ओरछा, जाम सांवली हनुमान लोक पांढुर्ना, पशुपतिनाथ लोक मंदसौर, परशुराम लोक जानापाव महू, महाराणा प्रताप लोक भोपाल, भादवामाता लोक नीमच, रानी अवंतीबाई स्मारक जबलपुर, मा नर्मदा महालोक अमरकंटक अनूपपुर देवी अहिल्या लॉक खरगौन और नागलवाडी लोक बड़वानी में किया जा रहा है। एक और जहां आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन समृद्ध हो रहा है वहीं दूसरी ओर फिल्म पर्यटन भी तेजी से बढ़ रहा है। फिल्म निर्माताओं को मध्यप्रदेश में आकर्षक सुविधाएं मिल रही है। कई प्रसिद्ध फिल्मों की शूटिंग मध्यप्रदेश में हुई है। इससे स्थानीय कलाकारों को फिल्मो में काम मिला। फिल्म यूनिट के सदस्यों को होम स्टे की सुविधाओं का लाभ मिला। होम स्टे की संख्या निरंतर बढ़ते जा रही है। प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति को देखने-समझने में होम स्टे अच्छी भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल 100 पर्यटन ग्राम विकसित किए गए हैं, जिसमें से 63 पर्यटन याम विकसित हो चुके हैं। इनमें 470 से ज्यादा होम स्टे हैं। देश के पहले हैंडलूम गाव प्राणपुर को वैश्विक पहचान मिली है। गॉड, भील पेंटिंग और मांडना आर्ट जैसी जनजातीय … Read more

ग्वालियर में दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव, पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: CM यादव

ग्वालियर की दो दिवसीय ‘रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव’, पर्यटन को देगी नई दिशा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव केंद्रीय मंत्री सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष तोमर भी होंगे शामिल प्रसिद्ध अभिनेता पीयूष मिश्रा और फ़ैसल मलिक करेंगे संवाद निवेशक, पर्यटन व्यवसायी, टूर ऑपरेटर्स, होटल इंडस्ट्री के हितधारक होंगे शामिल दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ग्वालियर में ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 29 एवं 30 अगस्त को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में  रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर तथा पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी होंगे। प्रसिद्ध अभिनेता पीयूष मिश्रा और फैसल मलिक विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। ग्वालियर–चंबल एवं सागर क्षेत्र की पर्यटन क्षमताओं को पहचानते हुए प्रदेश में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की जा रहा है। “टाइमलेस ग्वालियर: इकोज़ ऑफ़ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लेगेसी” थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 11 से 13 अक्टूबर-2025 तक भोपाल में मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट का आयोजन किया जाएगा।   अनुबंध और साझेदारियों से होगा पर्यटन का विकास कॉन्क्लेव में पर्यटन विकास को गति देने के लिए कई अहम करार होंगे।  होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) प्रदान किए जाएंगे। पारंपरिक संगीतज्ञों, लोक कलाकारों और पर्यटक ग्रामों के कलाकारों की क्षमता निर्माण के लिए ग्वालियर की मान सिंह तोमर यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू होगा। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार के लिए याप डिजिटल, क्रायोन्स एडवरटाइजिंग, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजे़स लिमिटेड, कॉन्सेप्ट कम्युनिकेशन्स साथ अनुबंध होंगे। इन समझौतों से न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय समुदाय और कलाकार भी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। नई परियोजनाओं का होगा शुभारंभ कॉन्क्लेव में नई परियोजनाओं की शुरुआत भी होगी। इनमें हस्तशिल्पों की मार्केटिंग में संस्था डेलबर्टो महत्वपूर्ण साझेदारी होगी। इस साझेदारी से हस्तशिल्प प्रेमी एक विशेष ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के जरिए सीधे हमारे कारीगरों से जुड़कर उनके द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट और प्रामाणिक उत्पाद घर बैठे ही खरीद सकेंगे। इंडिगो और आगा खां फाउंडेशन के सहयोग से सीएसआर के अंतर्गत ग्वालियर किले में संरक्षण, लैंडस्केपिंग और इल्युमिनेशन कार्यों का शिलान्यास होगा। स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत ग्वालियर के फूल बाग में अनुभवात्मक पर्यटन परियोजनाओं का शिलान्यास होगा। साथ ही मान सिंह तोमर म्यूजिक यूनिवर्सिटी में विकास कार्यों का शिलान्यास किया जायेगा।   विरासतों, धरोहरों और अनुभवात्मक पर्यटन की संभावनाओं पर होगा मंथन रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज़्म ऐज़ अ कल्चरल ब्रिज – ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ़ एमपी” विषय पैनल डिस्कशन होगा, जिसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार होगा। दूसरा पैनल डिस्कशन “ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग – इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्ज़री एंड एक्सपीरियंस” विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें विरासत, लग्ज़री स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा। हितधारक पर्यटन व्यवसाय में निवेश की संभावनाओं पर करेंगे चर्चा रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में ट्रैवल ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच द्विपक्षीय संवाद और पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। यह सत्र न केवल क्षेत्रीय पर्यटन के विकास के लिए, बल्कि राष्ट्रीय पर्यटन समृद्धि के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। सांस्कृतिक संध्या में दिखेगा मध्य प्रदेश का गौरव रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के प्रथम दिवस सांस्कृतिक संध्या में मध्यप्रदेश का गौरव देखने को मिलेगा। इस दौरान कलाकारों द्वारा लोककला की प्रस्तुति दी जाएगी। इसी प्रकार मैहर बैंड समां बांधेगा। इस कॉन्क्लेव में विशेष पर्यटन प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, पर्यटन इकाइयों, होस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होमस्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडिक्राफ्ट, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे। यह प्रदर्शनी निवेशकों, ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स, स्थानीय उद्यमियों और आगंतुकों को एक मंच पर लाकर पर्यटन क्षेत्र में संभावनाओं को प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करने का अवसर देगी।   जुटेंगे इंफ्लुएंसर्स, हितधारक जानेंगे समृद्ध विरासत कॉन्क्लेव में इंफ्लुएंसर्स मीट भी होगी। इसमें ग्वालियर–चंबल क्षेत्र के इंफ्लुएंसर्स शामिल होंगे और उन्हें अभिनेता फैसल मलिक के साथ रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसी तरह ग्वालियर किले पर 30 एवं 31 अगस्त को सुबह 6:30 बजे से योग सत्र का आयोजन किया जाएगा। चयनित अतिथियों एवं प्रतिनिधियों के लिए फैमिलियाराइज़ेशन टूर (FAM Tour) का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य ग्वालियर एवं आसपास के पर्यटन स्थलों की संभावनाओं से प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। इस विशेष भ्रमण के माध्यम से प्रतिनिधियों को क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक महत्व आदि का अनुभव कराया जाएगा, जिससे वे निवेश, प्रचार-प्रसार और पर्यटन विकास की दृष्टि से गहराई से जुड़ सकें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में 79.27 करोड़ के विकास कार्यो का किया भूमि-पूजन

हर काल और हर युग में रही है उज्जैन की गौरव गाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में 79.27 करोड़ के विकास कार्यो का किया भूमि-पूजन 25 करोड़ रूपये से अधिक की लागत से रीगल टॉकीज का होगा उन्नयन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की सात पवित्र नगरियों में अवंतिका (उज्जैन) भी शामिल है। यहां राजा विक्रमादित्य, महाकवि कालिदास, सम्राट अशोक, चंद्र प्रद्योत के नाम अजर-अमर हो चुके हैं। हमारे पास राष्ट्र वीर दुर्गादास राठौर की ऐतिहासिक विरासत भी है। आज उनकी छत्री के जीर्णोद्धार के लिए भूमिपूजन किया गया है। हर काल और युग में उज्जैन की गौरवशाली गाथा रही है। हम एक नये दौर में प्रवेश कर रहे है। उज्जैन गोपाल मंदिर क्षेत्र स्थित रीगल टॉकीज का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। यहां भगवान महाकालेश्वर की सवारी निकलती है, सिंहस्थ के दौरान यहां से पेशवाई निकलती है और यह स्थान हरि और हर के मिलन का साक्षी भी होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को उज्जैन में गोपाल मंदिर छत्री चौक स्थित कार्यक्रम में 79.27 करोड़ रूपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 25.15 करोड़ रूपये की लागत से रीगल टॉकीज के विकास कार्य, आगामी सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत 22.30 करोड़ रूपये की लागत से गदा पुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंह पुरा होते हुए लालपुल ब्रिज तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य और 31.83 करोड़ रूपये की लागत से गाड़ी अड्डा चौराहे से वी.डी क्लाथ मार्केट, निकास चौराहा, खजूर वाली मस्जिद, के.डी. गेट मार्ग वाया जूना सोमवारिया से बड़ी पुलिया तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य का भूमिपूजन किया गया है। कार्यक्रम में रीगल टॉकीज के उन्नयन पर आधारित लघु फिल्प का प्रसारण भी किया गया। रीगल टॉकीज का निर्माण कार्य 36 हजार स्क्वेयर फीट क्षेत्र में किया जाएगा।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन शहर का हर काल में विशेष महत्व रहा है। आगामी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए विकास के कार्य निरंतर किये जा रहे हैं। आज उज्जैन को कुल 107 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात मिली है। आगामी सिंहस्थ महापर्व में स्नान क्षिप्रा नदी के जल से ही होगा। सेवरखेडी – सिलारखेड़ी परियोजना से क्षिप्रा नदी में पूरे वर्ष जल रहेगा, क्षिप्रा सदैव प्रवहमान रहेगी। सिंहस्थ में सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही उज्जैन को नई 4 लेन सड़क की सौगात मिलने वाली है। साथ ही लगभग 10 हजार करोड़ की लागत से नई मेट्रो लाइन उज्जैन से इंदौर और पीथमपुर को कनेक्ट करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रम उद्योगपुरी में इंडस्ट्रियल सैट अप किया गया है और यहां से हम विश्व स्तरीय उत्पाद बनाकर विश्व के कई देशों को सप्लाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी योजना ने बहनों का सशक्तिकरण किया है। प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरणा लेकर बहनों के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना शुरू की है, जिसमें बहनों को अभी 1250 रुपए की राशि दी जा रही है। जल्दी ही बहनों को प्रतिमाह 1500 रुपए की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने माताओं-बहनों को स्थानीय निकाय चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। अब ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं। सरकार हर वर्ग के विकास के लिए कार्य कर रही है। अब प्रदेश में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 32 मैडिकल कॉलेज हो जाएंगे। वर्ष 2002-03 के बाद मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले डेढ़ साल में 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है।                                                       कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, संजय अग्रवाल, कैलाश प्रजापत, गणमान्य नागरिक मौजूद थे। आभार प्रर्दशन एमआईसी सदस्य शिवेंद्र तिवारी ने किया। मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने 52 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उज्जैन में एक अन्य कार्यक्रम में 52 करोड़ 69 लाख रुपए से अधिक की लागत से राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री के संरक्षण संवर्धन एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय तथा मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, रवि सोलंकी, संजय अग्रवाल आदि उपस्थित रहे। वीर दुर्गादास छत्री पर किया माल्यार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री शेखावत तथा अन्य अतिथियों द्वारा राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री पर पहुंचकर माल्यार्पण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को राष्ट्र वीर दुर्गादास के पराक्रम एवं शौर्य एवं देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने के लिए विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इनमें राष्ट्र वीर दुर्गादास की प्रतिमा स्थापना के साथ ही पैदल पुल, बगीचा, एक्टिविटीज जोन, रिटेनिंग वॉल, पार्किंग, हॉर्स ट्रैकिंग जोन, ओपन एयर थिएटर, संग्रहालय निर्माण आदि कार्य सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तावित निर्माण कार्यों का नक्शे पर अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।