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मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को ओरछा में करेंगे रामराजा लोक परियोजना का शिलान्यास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को ओरछा में करेंगे  रामराजा लोक का भूमिपूजन 332 करोड़ के विकास कार्यों की देंगे सौगात ओरछा  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को निवाड़ी जिले के ओरछा में  रामराजा लोक के द्वितीय चरण के निर्माण की आधारशिला रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 257 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत के कार्यों का भूमिपूजन और 74 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत के कार्यों का लोकार्पण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  रामराजा सरकार के दर्शन करेंगे और जुझार सिंह महल का भ्रमण कर  रामराजा लोक फेस-1 के निर्माणाधीन कार्यों का अवलोकन करेंगे। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  रामराजा वृद्धाश्रम में भोजन करेंगे। इन कार्यों का होगा लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव  रामराजा लोक के प्रथम चरण में 103 दुकानों एवं प्लाजा निर्माण, राय प्रवीण महल गार्डन का संरक्षण, विकास एवं इल्यूमिनेशन कार्य, स्टेट प्रोटेक्टेड मोन्यूमेंट लक्ष्मी मंदिर ओरछा में बाउंड्री वाल का निर्माण कार्य, लक्ष्मी मंदिर तता राजा महल का इल्यूमिनेशन तथा कटीला दरवाजा से जहांगीर महल तक पाथ-वे, स्ट्रीट लाइट हेरिटेज पोल कार्य और लक्ष्मी मंदिर एवं जहांगीर मंदिर के लेंडस्केपिंग कार्य का लोकार्पण करेंगे। साथ सांदीपनि विद्यालय स्कूल असाटी, शासकीय उ.मा. विद्यालय गोराखास, चचावली पठाराम मार्ग लंबाई 6 किमी. असाटी देवेन्द्रपुरा मार्ग लंबाई 4.20 किमी, लगी बरिया चिकटा से चौमों मार्ग लंबाई 3.40 किमी, सिमरा जेरौन मुख्य मार्ग से बोडेरा कटरयाना पिरयनवारा खिरक होते हुये मिलावन खिरक तक मार्ग लंबाई 3 किमी, देवेन्द्रपुरा से गिदखिनी मार्ग लंबाई 2.10 किमी, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस कंट्रोल रूम, 50 सीटर अनुसूचित जाति सीनियर बालक छात्रावास भवन शक्तिभैरो और उप तहसील (टप्पा) तरीचरकलां जिला निवाड़ी का लोकार्पण होगा। इन सभी कार्यों की लागत 74 करोड़ 90 लाख रूपये है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोक निर्माण, पर्यटन, उच्च शिक्षा और पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के 257 करोड़ 95 लाख लागत के 5 कार्यों का भूमिपूजन भी करेंगे।  

प्रख्यात पार्श्व गायक किशोर कुमार की जन्मस्थली खंडवा में पुण्य तिथि पर गीतकार प्रसून जोशी किशोर कुमार सम्मान से अलंकृत

किशोर कुमार गीतों को जीते थे और हरफनमौला कलाकार थे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रख्यात पार्श्व गायक किशोर कुमार की जन्मस्थली खंडवा में पुण्य तिथि पर गीतकार प्रसून जोशी किशोर कुमार सम्मान से अलंकृत प्रतिवर्ष दो दिन का होगा समारोह, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़कर की घोषणा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रख्यात पार्श्व गायक और अभिनेता  किशोर कुमार असाधारण कलाकार थे। वे गीतों को गाते नहीं थे, बल्कि गीतों को जीते थे। पूरा समय मस्ती में रहते थे। ऐसे हरफनमौला कलाकार थे, जिसका अलग अंदाज था। उनकी स्मृति में मध्यप्रदेश सरकार प्रतिवर्ष दो दिन का समारोह आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार की रात्रि मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल रूप से प्रख्यात पार्श्व गायक और अभिनेता किशोर कुमार की स्मृति में खण्डवा में हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय "किशोर कुमार सम्मामन अलंकरण समारोह" को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रख्यात गीतकार  प्रसून जोशी को किशोर कुमार सम्मान अलंकरण प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मायन से  प्रसून जोशी को अलंकृत किए जाने पर बधाई देते हुए कहा कि  जोशी ने अपनी कलम का जादू दिखाया है। उनके लिखे विज्ञापन के जिंगल्स भी लोकप्रिय हुए हैं। भगवान राम, भगवान कृष्ण और मां पर जोशी जी के गीतों और कविताओं को बहुत पसंद किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खण्डवा किशोर कुमार की जन्म भूमि के साथ ही दादा माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मभूमि रही है। यहां दादा धूनी वाले का आशीर्वाद है। इसके साथ ही ओंकारेश्वर धाम भी खण्डवा जिले में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किशार कुमार के व्यक्तित्व और कृतित्व का विस्तार से उल्लेख किया। विशेष रूप से इंदौर के कॉलेज में अध्ययन के दौरान घटित विशेष प्रसंगों को गीतों और अभिनय में शामिल करने, पड़ोसन और चलती का नाम गाड़ी जैसी फिल्मों में गायन और अभिनय के प्रभावशाली अंदाज, फक्कड़ स्वभाव और अपने बड़े भाई अशोक कुमार के साथ प्रगाढ़ संबंध का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी गाया गीत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किशोर कुमार के गाए गीत " जिंदगी एक सफर है सुहाना….." की पंक्तियां गाकर किशोर कुमार को याद किया और उनकी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दी। गीतकार प्रसून जोशी ने प्राप्त सम्मान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मध्यप्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।  जोशी ने कहा कि किशोर दा की हंसी हमेशा गूंजती रहेगी। वे बाल सुलभ थे, आज के जीवन में वैसा रहना मुश्किल है। उन्होंने गीतकारों के शब्दों को जीवंत करने का कार्य किया। वे आशा और उम्मीद की आवाज बने।  जोशी ने किशोर दा के गाए गीत "आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं, एक ऐसे गगन के तले, जहाँ ग़म भी न हो, आँसू भी न हो,बस प्यार ही प्यार पले, एक ऐसे गगन के तले…." को गाकर सुनाया। कार्यक्रम को जनजातीय कार्य मंत्री  विजय शाह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर खण्डवा क्षेत्र के सांसद  ज्ञानेश्वर पाटिल, गीतकार  प्रसून जोशी की धर्मपत्नी मती अर्पणा जोशी, विधायक  नारायण पटेल, मती कंचन तनवे, सु छाया मोरे, खण्डवा की महापौर मती अमृता यादव और अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन  आशीष दवे ने किया। संस्कृति सचिव  एनपी नामदेव ने  प्रसून जोशी को दिए गए प्रशस्ति पत्र का वाचन किया।  

सिवनी लूटकांड पर सीएम डॉ. यादव सख्त, 11 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कड़ा रुख सिवनी लूट मामले में 11 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध दर्ज हुई एफआईआर 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा कानून सबके लिये बराबर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी लूट मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। सिवनी एसडीओपी पूजा पांडे सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें से 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। इसमें एसडीओपी सिवनी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, कॉन्सटेबल योगेंद्र, नीरज और जगदीश शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध मुक्त वातावरण बनाना और नागरिकों की सुरक्षा पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों का मुख्य दायित्व है। अपने कर्तव्यों से हटकर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को राज्य सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिवनी प्रकरण में जो भी दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी होगी। प्रदेश में कानून सबके लिए बराबर है। कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो। राज्य सरकार प्रदेश में सुशासन स्थापित करने सतत रूप से कार्य कर रही हैं, इस दिशा में किसी का हस्तक्षेप सहन नहीं होगा। ये भी हैं आरोपी सिवनी मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 310(2) डकैती, 126(2) गलत तरीके से रोकना, 140(3) अपहरण और 61(2) आपराधिक षडयंत्र के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किये गये 5 अधिकारी एवं कर्मचारियों के अलावा जिनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई, उनमें प्रधान आरक्षक माखन, प्रधान आरक्षक राजेश जंघेला, प्रधान आरक्षक रविंद्र उईके, आरक्षक रितेश वर्मा, एसएएफ आरक्षक केदार और एसएएफ आरक्षक सुभाष सदाफल शामिल हैं।  

हमारे नगर-निगम अब मेट्रोपॉलिटन सिटी बनने की ओर अग्रसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

स्वच्छता के लिए बने वातावरण से अब शहरों और प्रदेशों में साफ-सफाई के लिए बढ़ी प्रतिस्पर्धा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमारे नगर-निगम अब मेट्रोपॉलिटन सिटी बनने की ओर अग्रसर नगरीय निकायों को दी रुपए 7 हजार करोड़ की परियोजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर दीपावली से पहले हुआ स्वच्छता मित्रों का सम्मान 5वें राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान एवं कार्यशाला “स्वच्छता समग्र समारोह” में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता को अपनी महत्वपूर्ण प्राथमिकता बनाया। उनकी इस पहल से स्वच्छता के क्षेत्र में न केवल देश का माहौल बदला अपितु विश्व के कई देशों ने उनकी इस पहल को अनुकरणीय बताया। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक रूप से सशक्त देश के रूप में स्थापित हुआ है। अब हमारी पहचान स्वच्छ देश के रूप में होने लगी है। स्वच्छता को दी गई प्राथमिकता से राज्यों के साथ शहरों में भी स्वच्छता के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। राज्य सरकार और प्रदेशवासियों के लिए यह उपलब्धि और गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख स्वच्छतम राज्यों में शामिल है। यह प्रधानमंत्री  मोदी का ही नेतृत्व और मार्गदर्शन है जिसके परिणामस्वरूप हमारे नगर-निगम अब मेट्रोपॉलिटन सिटी बनने की ओर अग्रसर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को रवीन्द्र भवन में 5वें राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान एवं कार्यशाला “स्वच्छता समग्र समारोह” को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा सफाई मित्रों का सम्मान किया। इस अवसर पर स्वच्छता अभियान पर केंद्रित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से प्रदेश के नगरीय निकायों को रुपए 7 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश को ग्रीन और क्लीन सिटी वाला प्रदेश बनाने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। स्वच्छता में इंदौर ने नित नए कीर्तिमान गढ़े हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के उज्जैन, भोपाल और जबलपुर सहित 8 शहरों को स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। स्वच्छता में मंडला, टीकमगढ़ जैसे 6 छोटे जिलों ने भी स्थान बनाया है। राज्य सरकार का संकल्प है कि हम आने वाले समय में शहरों से लिगेसी वेस्ट को समाप्त करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में स्थान प्राप्त करने पर जबलपुर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, देवास, इंदौर नगर निगम, शाहगंज नगर परिषद, बुदनी नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों एवं सफाई मित्रों को पुरस्कार प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है आज स्वच्छता की विभिन्न कैटेगरी में 64 पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। प्रदेश को दीपावली से पहले ही साढ़े 22 हजार करोड़ रुपए की सौगात मिल रही है। आज 10 हजार करोड़ रुपए की नमामि नर्मदे योजना प्रारंभ की जा रही है। अमृत 2 योजना के अंतर्गत 7 हजार करोड़ रुपए की सौगात मिल रही है। मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना की भी शुरुआत हो रही है जो 5 हजार करोड़ रुपए लागत की है। आगामी 3 वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए की योजनाएं मूर्तरूप लेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ: 2028 उज्जैन का ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इसके लिए विशाल स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। पृथ्वी पर जल से ही जीवन की उत्पत्ति हुई है इसीलिए सिंहस्थ जैसे आयोजनों में पवित्र नदियों में जल को नमन करते हुए स्नान का महत्व है। सिंहस्थ-2028 का आयोजन विश्व के लिए उदाहरण बनेगा। हमें स्वच्छता को संस्कार में लाना होगा : राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी ने कहा कि हमें आसपास स्वच्छता के साथ मानसिक स्वच्छता को भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। हमें स्वच्छता को संस्कार में लाना होगा और अपने विचार और संस्कार से ही व्यक्ति अपने आसपास की स्वच्छता के लिए सक्रिय होता है। हमें वार्डवार कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करते हुए कचरा संग्रहण के लिए सक्रिय होना होगा, तभी शहरों को सुंदर बनाया जा सकेगा। सड़कों और गलियों के साथ-साथ जल संरचनाओं की स्वच्छता को भी प्राथमिकता देनी होगी। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास  संजय दुबे ने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश निरंतर 8 वर्षों से नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री  मोदी की मंशा के अनुरूप राज्य सरकार ने स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर ही सफाई मित्रों के स्वागत और सम्मान का यह कार्यक्रम रखा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विचार था कि दीपावली पर्व पर सफाई का बहुत महत्व है और हमारे घर-द्वार तथा इलाके की सफाई में सफाई मित्रों का विशेष महत्व रहता है। स्वच्छता मित्रों का सम्मान दीपावली से पहले किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस प्रतिबद्धता के परिणाम स्वरूप ही यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि इस वर्ष बारिश से पहले प्रदेश के लगभग 40 नगरीय निकायों में वर्षों से जमा कचरे को हटा दिया जाएगा। प्रदेश में डोर टू डोर कचरा संकलन गतिविधि का विस्तार किया जाएगा। कार्यक्रम में विधायक  रामेश्वर शर्मा, महापौर भोपाल मती मालती राय, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष  प्रताप सरोठिया, आयुक्त नगरीय विकास  संकेत भोंडवे सहित प्रदेश से आए महापौर, पार्षदगण एवं सफाई मित्र उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया सफाई मित्रों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वच्छता सम्मान समारोह में उल्लेखनीय कार्य करने वाले नगरीय निकायों को पुरस्कृत किया। साथ ही उल्लेखनीय कार्य करने वाले सफाई मित्र लक्ष्मी, गुड्डी बाई, पुष्पा, कालीचरण और जीवन को सम्मानित कर पुरस्कार किया। पुरस्कृत स्थानीय निकाय सफाई मित्र सुरक्षित श्रेणी में जबलपुर नगर निगम, सुपर स्वच्छ लीग में उज्जैन नगर निगम, स्वच्छ शहर श्रेणी में जनसंख्या के अनुसार भोपाल, ग्वालियर, देवास नगर निगम को सम्मानित किया गया है। वायु सर्वेक्षण में देवास, स्वच्छ शहर में सीहोर जिले के शाहगंज और बुदनी नगरीय निकायों को पुरस्कृत किया गया। इन नगरीय निकायों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार प्राप्त किये हैं। समारोह में पीएम आवास योजना में इंदौर, बैरसिया और निवाली बुजुर्ग को, पीएम स्वनिधि योजना में रतलाम, सारणी, … Read more

15 अक्टूबर को होगा प्रदेश स्तरीय सड़क सुरक्षा सेमिनार, CM डॉ. यादव लेंगे हिस्सा

भोपाल मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम और लोक निर्माण विभाग द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के सहयोग से एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय सड़क सुरक्षा सेमिनार का आयोजन मंगलवार 15 अक्टूबर को आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, स्वर्ण जयंती सभागार, भोपाल में होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश स्टेकहोल्डर्स एलायंस मीटिंग फॉर डेटा-ड्रिवन हाईवे लोकेल इंटरवेंशंस के अंतर्गत किया जा रहा है। इस आयोजन में प्रदेशभर के लगभग 500 तकनीकी अधिकारी शामिल होंगे। सेमिनार में सड़क सुरक्षा से जुड़े नवीनतम तकनीकी उपायों, डेटा विश्लेषण आधारित सड़क सुधार रणनीतियों तथा सड़क दुर्घटना नियंत्रण उपायों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। सेमिनार का उद्देश्य सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन को एक साझा मंच पर लाना है जिससे राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह आयोजन प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना और सुरक्षित भारत मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप एक महत्त्वपूर्ण पहल है जो ‘सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित जीवन’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में ठोस कदम साबित होगा।  

सोयाबीन उत्पादक किसानों को लाभांवित करने भावांतर योजना की स्वीकृति

कोदो-कुटकी का पहली बार उपार्जन किये जाने का निर्णय सोयाबीन उत्पादक किसानों को लाभांवित करने भावांतर योजना की स्वीकृति प्रदेश में "RAMP" योजना को सैद्धांतिक रूप से लागू किये जाने की स्वीकृति राज्य के शासकीय पेंशनर, परिवार पेंशनर को देय मंहगाई राहत की दर में वृद्धि किये जाने का निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रमुख कोदो-कुटकी उत्पादक जिलों के कृषकों से पहली बार कोदो-कुटकी उपार्जन का किये जाने का निर्णय लिया, जिससे अधिक से अधिक जनजातीय कृषकों को फायदा होगा। इस के लिए रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत प्रमुख कोदो-कुटकी उत्पादक जिलों जबलपुर, कटनी, मण्डला, डिंडोरी, छिंदवाडा, शहडोल, अनुपपुर, उमरिया, रीवा, सीधी एवं सिंगरौली के कृषकों से कोदो-कुटकी का उपार्जन किया जायेगा। साथ ही अन्य जिलों से मांग आने पर उन जिले के कृषकों से भी उपार्जन किये जाने पर विचार किया जायेगा। अन्न उत्पादक जिलों के कृषकों से अन्न कंसोर्टियम ऑफ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (अन्न फेडरेशन) द्वारा कोदो-कुटकी का उपार्जन किया जायेगा। खरीफ 2025 में उत्पादित अन्न कुटकी 3500 रूपये प्रति क्विंटल एवं कोदो 2500 रुपये प्रति क्विंटल के मान से लगभग 30 हजार मेट्रिक टन का उपार्जन किया जायेगा। इसके लिए अन्न फेडरेशन को 80 करोड़ रूपये का ब्याज मुक्त ऋण शासन के मूल्य स्थिरीकरण कोष से प्रदाय किया जायेगा। इसके अतिरिक्त कृषको को प्रोत्साहन राशि के रूप में 1000 रुपये प्रति क्विंटल के मान से संबंधित कृषकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रदाय किये जायेंगे। सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश के सोयाबीन के किसानों को लाभांवित किये जाने के लिए भारत सरकार की प्राईज डिफिसिट पेमेन्ट स्कीम लागू की गयी है, जो प्रदेश में भावांतर योजना कहलायेगी। प्रदेश में सोयाबीन भावांतर योजनांतर्गत 24 अक्टूबर, 2025 से 15 जनवरी, 2026 तक सोयाबीन का विक्रय, राज्य की अधिसूचित मंडियों में किया जायेगा। प्रदेश की मंडियों में 14 दिवस के सोयाबीन के विक्रय मूल्य के Weighted औसत के आधार पर सोयाबीन के मॉडल रेट की गणना की जायेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य से विक्रय दर/मॉडल रेट अंतर की राशि पंजीकृत कृषकों के पोर्टल पर दर्ज बैंक खाते में डी.बी.टी. के माध्यम से अंतरित की जायेगी। एम.एस.पी 5328 रूपये है। 'रेशम समृद्धि योजना'' के क्रियान्वयन की सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार की सिल्क समग्र-2 योजना को 25% राज्यांश के साथ, राज्य में रेशम समृद्धि योजना के रूप में क्रियान्वयन की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को रेशम उत्पादन संबंधी 23 गतिविधियों में सहायता प्राप्त होगी, जिसमें सामान्य वर्ग के हितग्राही को इकाई लागत की 75 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 90 प्रतिशत आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। इसमें क्रमशः 25 प्रतिशत एवं 10 प्रतिशत हितग्राही अंश रहेगा। योजना के क्रियान्वयन से मलबरी, वन्या और पोस्ट ककून क्षेत्रों में हितग्राहियों की सतत् रोजगार उपलब्ध होने के साथ उनकी आय में वृद्धि होगी। वर्तमान में कुल लागत इकाई राशि रूपये 3.65 लाख होती थी जिसमें 2.0875 लाख राज्य शासन से राज्य सहायता प्राप्त होती थी। रेशम समृद्धि योजना में इकाई की कुल लागत राशि रूपये 5 लाख होगी। उसमें से सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को केन्द्रांश राशि रूपये 2.50 लाख, राज्यांश राशि रूपये 1.25 लाख एवं हितग्राही का अंश राशि रुपये 1.25 लाख तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को केन्द्रांश राशि रूपये 3.25 लाख, राज्यांश राशि रूपये 1.25 लाख एवं हितग्राही का अंश राशि रूपये 0.50 लाख होगा। यह योजना रेशम किसानों के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगी। प्रदेश में (RAMP)" योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, नई दिल्ली की "Raising and Accelerating MSME Performance" योजना को प्रदेश में सैद्धांतिक रूप से लागू किये जाने की स्वीकृति दी गयी हैं। योजनान्तर्गत प्रदेश के लिए स्वीकृत बजट 105 करोड़ 36 लाख रूपये अन्तर्गत राज्यांश की 30 प्रतिशत राशि 31 करोड़ 60 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी है। पेंशनर और परिवार पेंशनर को देय मंहगाई राहत की दर में वृद्धि मंत्रि-परिषद द्वारा राज्य के शासकीय पेंशनरों परिवार पेंशनरों को देय मंहगाई राहत की दर में वृद्धि किये जाने का निर्णय लिया गया हैं। राज्य के पेंशनरों / परिवार पेंशनरों को वर्तमान में देय मंहगाई राहत सातवें वेतनमान अंतर्गत 53 प्रतिशत एवं छठवें वेतनमान अंतर्गत 246 प्रतिशत में 1 सितम्बर 2025 (भुगतान माह अक्टूबर, 2025) से वृद्धि की जाकर कुल मंहगाई राहत सातवें वेतनमान अंतर्गत 55 प्रतिशत एवं छठवें वेतनमान अंतर्गत 252 प्रतिशत किये जाने का निर्णय लिया गया हैं। शासकीय पेंशनरों / परिवार पेंशनरों को मंहगाई राहत में वृद्धि करने पर राज्य के कोष पर इस वितीय वर्ष में लगभग 170 करोड़ रूपये का अतिरिक्त व्यय भार आयेगा। छत्तीसगढ़ शासन के पत्र 25 अगस्त 2025 के अनुक्रम में सहमति प्रदान किये जाने के लिए निर्णय लिया गया है। ''सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना 2021 में नए प्रावधान सम्मिलित करने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा प्रदेश के "सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना वर्ष 2021" के विद्यमान प्रावधानों के साथ अन्य प्रावधानों को सम्मिलित किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के 5 हजार युवाओं को विभिन्न रोजगारोन्मुखी प्रतियोगी परीक्षाओं का निःशुल्क परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। अन्य निर्णय मंत्रि-परिषद् द्वारा आरक्षक (विसबल) 620 अरुण सिंह भदौरिया, 15वीं वाहिनी विसबल, इंदौर को प्रधान आरक्षक (विसबल) के पद पर क्रम से पूर्व पदोन्नति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया हैं।  

पेंशनरों के खाते में बढ़ेगा लाभ, डॉ मोहन यादव ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाने का ऐलान किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में कोई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के पेंशनरों की महंगाई राहत में दो प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना का अनुसमर्थन किया गया। इसमें यह प्रविधान किया गया है कि यदि मंडी में कृषक की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बिकती है तो फिर सरकार उसे अंतर की राशि का भुगतान करेगी। मोटे अनाज को प्रोत्साहित करने के लिए श्रीअन्न फेडरेशन बनाने का निर्णय लिया गया। यह किसानों को न केवल मोटा अनाज की खेती के लिए प्रेरित करेगा बल्कि उपज की बिक्री, ब्रांडिंग के लिए भी काम करेगा।  मोहन कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर लगी मुहर     रेशम समृद्धि योजना अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ लागत मूल्य में वृद्धि की गई है। साथ ही किसानों की अंश राशि को कम कर दिया गया है, ताकि आम किसान भी इससे जुड़ सकें।     प्रदेश में कोदो और कुटकी की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसका उचित मूल्य किसानों को मिले इसके लिए कोदो का मूल्य ₹3500 प्रति क्विंटल और कुटकी का मूल्य ₹2500 प्रति क्विंटल तय किया गया है।     रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत कोदो, कुटकी उत्पादक जिले जबलपुर कटनी मंडला डिंडौरी छिंदवाड़ा शहडोल अनूपपुर उमरिया रीवा सीधी और सिंगरौली के किसानों से कोदो कुटकी का उपार्जन किया जाएगा।     7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले पेंशनरों की महंगाई राहत में दो प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है,जिसके बाद डीआर दर 53 फीसदी से बढ़कर 55 प्रतिशत हो गई है। इसके लिए 170 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे साढ़े चार लाख से अधिक पेंशनर्स लाभान्वित होंगे।छठे वेतन आयोग के तहत आने वाले पेंशनर्स के डीए में भी वृद्धि की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति मिलने के बाद वित्त विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया था।     सोयाबीन उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए कैबिनेट द्वारा भावान्तर योजना को मंजूरी दी गई है। सोयाबीन का एमएसपी 5328 रुपए है।यह राशि सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी।     सूक्ष्म-लघु उद्योग के लिए 105 करोड़ स्वीकृत किए है। यह राशि उत्पादकों की क्वालिटी सुधारने, देश में मार्केट की स्थिति, एक्सपोर्ट पर खर्च करेंगे।  प्रदेश में लागू करने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। राज्य सरकार अपनी ओर से 30 करोड़ रुपये लगाएगी।     सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना अंतर्गत पात्र छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उनके आवास का किराया प्रतिमाह ₹1000 सरकार देगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आज के कार्यक्रम     सीएम डॉ मोहन यादव सुबह 11 बजे मंत्रालय पहुंचेंगे, जहां कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे।     दोपहर 1 बजे बीजेपी कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में शामिल होंगे।     2 बजे रविंद्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान समारोह कार्यक्रम     3 बजे समन्वय भवन में आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान कार्यक्रम में शामिल होंगे।     3:30 बजे देवास के लिए रवाना । संदीपनी उच्चतम माध्यमिक विद्यालय का लोकार्पण, नेमवार में सामूह जलप्रदाय योजना का शुभारंभ समेत विकास कार्यों का लोकार्पण भूमिपूजन।     शाम 6:05 बजे देवास से भोपाल लौटेंगे।     रात 8:30 सीएम हाउस में वीसी माध्यम से खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह में शामिल होंगे। कोदो-कुटकी के लिए समर्थन मूल्य तय राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी की खरीद के लिए दाम तय किए हैं। कुटकी 3500 प्रति क्विंटल और कोदो का दाम 2500 प्रति क्विंटल तय किया गया है। ये दोनों ही फसलें मिलेट्स की श्रेणी में आती हैं और प्रदेश के 11 जिलों में इनकी बड़े पैमाने पर खेती होती है। सरकार ने निर्णय लिया है कि श्री अन्न फेडरेशन कोदो-कुटकी की मार्केटिंग का कार्य करेगा, ताकि उत्पादक किसानों को उचित मूल्य मिल सके। इसके लिए फेडरेशन को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। विद्यार्थियों को 1000 रुपए की सहायता कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदाय के वे विद्यार्थी जो कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत हैं, उन्हें 1000 रुपए तक की सहायता राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है। रेशम समृद्धि योजना को मंजूरी बैठक में रेशम समृद्धि योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत राज्य में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने और बुनकरों को आर्थिक सशक्तिकरण का मौका मिलेगा। MSME को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन कैबिनेट ने MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) को प्रोत्साहन देने के लिए ₹105 करोड़ की मंजूरी दी है। इसमें 30% राशि राज्य सरकार की ओर से और शेष राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होगी। यह राशि उद्योगों के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और रोजगार सृजन में मदद करेगी। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को लाभ, युवाओं को अवसर और उद्यमियों को प्रोत्साहन मिले।    

विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाएं अधिक से अधिक रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय कोर्सेस : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विश्वस्तरीय बनें उच्च शिक्षा के सभी संस्थान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाएं अधिक से अधिक रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय कोर्सेस अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में अगले सत्र से प्रारंभ करें कृषि संकाय विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक विषय प्रारंभ करने संबंधी बैठक में दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की उच्च शिक्षा गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी कैंपस एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय बनाए जाएं। यह सभी संस्थान आईआईटी, आईआईएम और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की तर्ज पर विकसित किए जाएं। सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय विषय एवं कोर्सेस प्रारंभ किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रोजगारपरक नवीन विषय प्रारंभ करने के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन, प्रमुख सचिव पशुपालन  उमाकांत उमराव, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  संदीप यादव, प्रमुख सचिव खेल एवं युवक कल्याण  मनीष सिंह सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, उच्च शिक्षाविद् एवं विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में अगले सत्र से कृषि संकाय और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में बीटेक में डेयरी टेक्नॉलाजी का पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों में इन कोर्सेस का प्रचार करें जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थी इस विषय की पढ़ाई के लिए आगे आएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विमानन क्षेत्र में बड़ा स्कोप है, इसलिए विश्वविद्यालयों में इसके पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का भी समग्र अध्ययन कराया जाए। इसके लिए इस विश्वविद्यालय को आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय बनाने पर भी गंभीरता से विचार कर निर्णय के लिए रखा जाए। उन्होंने कहा कि पाणिनी विश्वविद्यालय को आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनाने से इस विश्वविद्यालय का परिधि क्षेत्र बढ़ेगा और प्रदेश के करीब 50 से अधिक आयुर्वेदिक महाविद्यालय इसके दायरे में आ जाएंगे। यह एक बड़ा कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि विश्वविद्यालयों में सभी प्रकार की भर्तियों को टाईम-फ्रेम में लाएं और जल्द से जल्द सभी प्रकार की भर्तियां एवं नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएं। इस पर अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। वर्तमान में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 364 पद भरे हुए हैं और इन्हीं श्रेणी के 1585 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्सिंग एवं पैरामेडिकल महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी ली। अपर मख्य सचिव  राजन ने बताया कि सत्र 2025-26 में नर्सिंग कॉउंसिल द्वारा प्रवेश प्रकिया आरम्भ कर दी गई है। पैरामेडिकल कॉउंसिल द्वारा सत्र 2025-26 की मान्यता संबंधी प्रक्रिया एक माह में प्रारम्भ करने की बात कही गई है। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को एनओसी उच्च शिक्षा विभाग के संचालनालय स्तर पर एवं मान्यता क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए ग्राम कल्याणपुरा में 70 एकड़ भूमि उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवंटित की जा चुकी है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा जिला अस्पताल झाबुआ में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हास्पिटल के रूप में अनुमति देने के लिए आवेदन कर दिया गया है। सभी विश्वविद्यालय अगले पांच साल का रोड-मैप तैयार करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरूओं को निर्देशित किया कि वे सभी अपने विश्वविद्यालयों का अगले पांच साल का रोड-मैप तैयार करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कुलगुरू अपने विश्वविद्यालयों में कृषि, उद्यानिकी, फ्लोरीकल्चर, टूरिज्म, माइनिंग, विमानन, दुग्ध उत्पादन के प्रोत्साहन के लिए पशुपालन (एनिमल हस्बेंड्री) जैसे रोजगारपरक विषय एवं डिग्री पाठ्यक्रम प्रारंभ करें। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को ज्ञान देने के अलावा उनकी उद्यमशीलता को भी प्रोत्साहित करें। कृषि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रवृत करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय यह बताएं कि उन्होंने कितने रोजगारपरक विषय खोले हैं, उनमें कितने विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया और विश्वविद्यालयों ने अपने स्तर पर कितने विद्यार्थियों को रोजगार/प्लेसमेंट उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपने-अपने क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक प्रक्षेत्रों की जरूरतों को समझें और उनकी जरूरत के अनुसार अपने यहां नए-नए एडवांस कोर्सेस प्रारंभ करें। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही अध्ययन के साथ-साथ रोजगार भी मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी कैंपस एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय बनाए जाएं। यह सभी संस्थान आईआईटी, आईआईएम और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की तर्ज पर विकसित किए जाएं। सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय विषय एवं कोर्सेस प्रारंभ किए जाएं। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने बताया कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में बीबीए एविएशन का तीन वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसमें करीब 30 बच्चों ने प्रवेश लिया है। इसके अतिरिक्त बीएसी एविएशन पाठ्यक्रम बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन और चित्रकूट विश्वविद्यालय, चित्रकूट में प्रारंभ किया गया है। अपर मुख्य सचिव  राजन ने बताया कि प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में 384 शोध केंद्र संचालित हैं। सौ नए शोध केंद्रो की स्थापना की जानी है। सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना कर दी गई है। शासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का भ्रमण कराने की योजना को महाविद्यालयों के वार्षिक कैलेण्डर में नियमित गतिविधि के रूप में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नैक की तर्ज पर राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (सैक) का गठन हो गया है। वर्तमान वित्त वर्ष से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन का कार्य प्रारंभ कराया जा रहा है। विश्वविद्यालयों में सभी रिक्त पदों पर भर्ती एवं … Read more

मोहन सरकार का दिवाली गिफ्ट संभव! मप्र में बढ़ सकता है डीए-डीआर, केंद्र से 3% पीछे

भोपाल  केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाने के फैसले के बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं। प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दीपावली से पहले समान लाभ देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार के पहले बोनस और फेस्टिवल एडवांस में बढ़ोतरी की घोषणा की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ खुशियां मना सकें। 3% डीए-डीआर और बोनस की मांग मध्यप्रदेश के कर्मचारियों ने दीपावली से पहले 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीए-डीआर) देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बोनस और फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि त्योहारी सीजन में खर्च बढ़ जाता है, इसलिए सरकार को समय रहते राहत प्रदान करनी चाहिए।तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा- दीपावली पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को बोनस के साथ 3% डीए और डीआर देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारी और पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। प्रदेश में मिल रहा 55% डीए, केंद्र में बढ़कर हुआ 58% वर्तमान में मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डीए अब 3% बढ़कर 58% हो गया है। राज्य के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2025 से ड्यू है, जिसे अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें हमेशा केंद्र के बाद देरी से डीए वृद्धि मिलती है। 29 साल से बंद है बोनस कर्मचारी संगठनों ने याद दिलाया कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है। उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में दिया जाता था। केंद्र सरकार और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस देती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा वर्षों से बंद है।कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार कहती है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना उनकी ‘कथनी और करनी’ में फर्क दिखाता है। 10 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स होंगे प्रभावित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा 55% डीए वर्तमान में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 58% डीए प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के कर्मचारियों का जुलाई 2025 से डीए ड्यू है। 29 साल से बंद बोनस देने की मांग कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है, जबकि उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में मिलता था। केंद्र और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस दे रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। यह फिर से शुरू किया जाना चाहिए। संगठनों ने कहा कि सरकार एक ओर दावा करती है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना “कथनी और करनी में अंतर” दर्शाता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दीपावली से पहले कर्मचारियों को राहत देने का फैसला लेकर त्योहार की खुशियां दो गुनी करेंगे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों को दीपावली के पहले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य के कर्मचारी भी मोहन सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहा है कि एमपी में काम कर रहे कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देकर बोनस दिया जाए ताकि कर्मचारी त्यौहार खुशियों के साथ मना सकें। इसके साथ ही फेस्टिवल एडवांस भी बढ़ी हुई राशि के साथ देने की मांग की जा रही है। उधर माना जा रहा है कि जल्दी ही राज्य सरकार भी कर्मचारियों के लिए डीए देने का ऐलान कर सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जिस प्रकार से केंद्र एवं रेलवे द्वारा दीपावली के अवसर पर बोनस एवं 3% महंगाई भत्ता, महंगाई राहत एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों को प्रदान कर दी गई है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार भी दीपावली के त्योहार पर कर्मचारियों को आर्थिक रूप से खुशियां दे। प्रदेश में वर्ष 1996 से बोनस बंद है। वर्ष 1996 तक 1079 रुपए बोनस के रूप में कर्मचारियों को प्राप्त होते थे। वर्तमान में प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आज भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है वहीं मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को बोनस से वंचित कर दिया गया है। संगठनों के अनुसार एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा कहा जाता है कि केंद्र के समान कर्मचारियों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी वहीं बोनस न देना कथनी और करनी में अंतर बताता है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्चा बढ़ जाता है। इसकी भरपाई के लिए सरकार को बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए जिसका फायदा प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। इसी तरह कर्मचारी नेता जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दिवाली के पहले महंगाई भत्ते की किस्त देने की मांग की है। जुलाई 2025 से 3% महंगाई भत्ता बढ़ाने पर इतना मिलेगा लाभ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी -1395 से 1620 तृतीय श्रेणी कर्मचारी -1755 से 4419 द्वितीय श्रेणी अधिकारी – 5049 से 6048 प्रथम श्रेणी अधिकारी -7191 से 12690 तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ने पर महीने का इतना हो जाएगा वेतन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेतन मान – 55 %भत्ता – 58% भत्ता 15500-– 24025 24490 16100— 16985—25438 … Read more

देश में प्राचीन काल से रही है न्याय देने की परम्परा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश में प्राचीन काल से रही है न्याय देने की परम्परा समानता, पारदर्शिता, विनम्रता और सबको समय पर न्याय दिलाना ही है न्यायपालिका की मूल आत्मा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर में किया विधि विशेषज्ञों की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ उच्चतम न्यायलय के न्यायमूर्तिगणों और विधि-विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि न्याय पाना देश के हर नागरिक का मौलिक, बुनियादी, मानवीय, नागरिक और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत की संघीय शासन व्यवस्था का आधार ही सबके जीवन, भोजन और स्वास्थ्य के अधिकारों की समान रूप से न्यायपूर्ण रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि लोक कल्याणकारी राज्य का पहला दायित्व है कि देश का कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे। न्याय और सुशासन न केवल राष्ट्र और समाज को मजबूत करते हैं, बल्कि शासन व्यवस्था को जवाबदेह भी बनाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का नया दौर न्याय का पथ गौरवान्वित करने वाला है। उच्चतम न्यायालय द्वारा बीते कुछ सालों में दिए गए कई निर्णयों ने देश को नई दिशा दी है। इससे न्याय व्यवस्था पर हमारी आस्था को और बल मिला है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि युग बदले, दौर बदले, परंतु न्याय की आत्मा हमेशा वही रहेगी। समानता, पारदर्शिता, विनम्रता और सबको समय पर न्याय दिलाना ही न्यायपालिका की मूल आत्मा रही है और आगे भी रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा है हमारे देश में न्याय की प्राचीन परंपरा रही है। न्याय देने की स्थापित व्यवस्था को और बेहतर बनाना हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब तो न्याय की देवी की आंखों की पट्ठी भी खोल दी गई है। इसका आशय यह है कि अब न्याय की देवी खुली आंखों से न्याय कर सकेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित "इवोल्विंग होराइजन्स: नेविगेटिंग कॉम्प्लेक्सिटी एंड इनोवेशन इन कमर्शियल एंड आर्बिट्रेशन लॉ इन द डिजिटल वर्ल्ड" विषय पर आयोजित विधि विशेषज्ञों की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस) के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्चतम न्यायलय के न्यायमूर्तिगणों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर इस संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए इंदौर पधारे उच्चतम न्यायालय के सभी सम्मानीय न्यायमूर्तियों और देश-विदेश से आए विधि विशेषज्ञों, न्यायविदों तथा विद्यार्थियों का आभार जताते हुए कहा कि देश के सबसे स्वच्छतम शहर में न्याय प्रणाली के मंथन पर ऐसी विद्वत सभाओं का आयोजन हमें नई उम्मीद देता है, साथ ही और बेहतर करने की प्रेरणा भी देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार न्याय प्रणाली को और अधिक सुलभ, सरल और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। राज्य में प्रादेशिक और जिला स्तर के न्यायालयों की सुदृढ़ स्थापना के साथ-साथ मध्यप्रदेश में ग्राम न्यायालयों की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय न्याय परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हम सम्राट वीर विक्रमादित्य को कैसे भूल सकते हैं, जिन्होंने अपने बाल्यकाल से ही तत्समय भारत देश में न्याय और सुशासन की व्यवस्था का सूत्रपात किया था। हम उन्हीं के बताए मार्ग पर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में कानून के क्षेत्र में अनेक नवाचार हो रहे हैं, जिससे नागरिकों को अधिक अधिकार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ दायित्वों का पालन भी आवश्यक है उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली जितनी सहज और सरल होगी, नागरिक को उतनी ही जल्दी न्याय मिलेगा। हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक नागरिक को सुगमता से न्याय मिले और उसकी आस्था न्यायिक व्यवस्था पर सदैव बनी रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष ज़ोर देकर कहा कि आज के तेज़ी से विकसित होते तकनीकी युग में, न्यायपालिका को निरंतर मूल्यांकन और अनुकूलन उपायों पर काम करना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि न्याय प्रदान करना नवाचार में बाधा डाले बिना निष्पक्ष और पारदर्शी बना रहे। इससे भारत की अर्थव्यवस्था का विकास हो सके और साथ ही व्यापार करने में आसानी भी सुनिश्चित हो। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी ने कहा कि न्यायपालिका का लक्ष्य कानून का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के विचार को सीमित किए बिना निष्पक्षता की सीमाओं का विस्तार करना है। उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था में, डेटा पर नियंत्रण केवल फर्मों या कंपनियों के स्वामित्व से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, और इसलिए, आर्थिक विकास को बाधित किए बिना पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कानूनी पेशा तकनीकी प्रगति का अपवाद नहीं रह सकता। प्रौद्योगिकी-संचालित और स्वचालित अनुबंधों के उदय के साथ, न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तकनीकी विकास के कारण न्याय से समझौता न हो और इन प्रगति के साथ विकसित होना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  राजेश बिंदल ने कहा कि जैसे-जैसे व्यापार का विस्तार होता है, विवाद स्वाभाविक रूप से बढ़ते हैं और इसका समाधान न्यायपालिका में ही निहित है। चूँकि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, इसलिए हमारी मानसिकता में बदलाव लाने और सभी हितधारकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपयोगी तो है, लेकिन यह पेटेंट और पंजीकरण जैसे क्षेत्रों में नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  अरविंद कुमार ने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का केवल एक भागीदार ही नहीं, बल्कि एक निर्माता भी है। न्याय से समझौता किए बिना, व्यापार में सुगमता और नवाचार को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने न्यायनिर्णयन से सहयोग और मध्यस्थता से नवाचार की ओर बदलाव पर ज़ोर दिया और कानूनी बिरादरी के लिए तदनुसार अनुकूलन की आवश्यकता पर बल दिया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  संजीव सचदेवा ने "विकसित होते क्षितिज: डिजिटल दुनिया में वाणिज्यिक और मध्यस्थता कानून में जटिलता और नवाचार को नेविगेट करना" विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  जे.के. माहेश्वरी, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण और अन्य न्यायाधीशगणों और विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत … Read more