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रायसेन में पेड़ों की कटाई पर बवाल, 680 की मंजूरी लेकर हजारों पेड़ काटने का आरोप; विधानसभा में उठेगा मुद्दा

भोपाल  रायसेन जिले की ग्राम पंचायत समनापुर कला में कथित रूप से हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का विषय बन गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले का संज्ञान लिया है और कहा है कि इसे आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा। 680 पेड़ों की अनुमति, हजारों की कटाई का आरोप ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों के अनुसार पंचायत ने सुनील मालवीय को 680 पेड़ काटने की अनुमति दी थी। वहीं, समीप स्थित भूमि स्वामी अशोक वासवानी को पंचायत द्वारा कोई अनुमति जारी नहीं की गई। इसके बावजूद दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होने के आरोप लगे हैं। अधिकारियों पर भी उठे सवाल पंचायत सचिव का कहना है कि अनुमति संबंधित अधिकारियों के निर्देश पर दी गई थी। वहीं, राजस्व विभाग इस पूरे मामले की जिम्मेदारी पंचायत पर डाल रहा है। आरोप है कि कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और वन विभाग को जानकारी होने के बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती रही। 5 हजार से अधिक सागौन के पेड़ काटने का दावा स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए पुराने फोटो बताते हैं कि क्षेत्र पहले घने जंगल से आच्छादित था। सूत्रों का दावा है कि रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में 5 हजार से अधिक सागौन सहित अन्य इमारती पेड़ों की कटाई की गई। हालांकि वन विभाग का कहना है कि लकड़ी परिवहन के लिए कोई ट्रांजिट परमिट (टीपी) जारी नहीं किया गया। बिना सत्यापन के अनुमति देने का आरोप जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत समनापुर ने 23 दिसंबर 2023 को खसरा क्रमांक 132/372/2, 132/372/3, 132/372/4 और 132/372/5 (कुल 7.450 हेक्टेयर) में 450 सागौन, 82 साज और 98 सतकुट के पेड़ काटने की अनुमति जारी की थी। आरोप है कि यह अनुमति बिना उचित सत्यापन और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी किए दे दी गई। खनन और कटाई दोनों पर सवाल सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि रसूख के दम पर यह अनुमति इतनी आसानी से मिल गई, जिसे प्राप्त करने के लिए साधारण आदमी के पसीने छूट जाते हैं। दूसरी ओर इसी से लगे हुए एक दूसरा खसरा क्रमांक 132/1-3 रकबा 10 एकड़ पर अशोक वासवानी का बोर्ड लगा है, वहाँ भी सागौन, साज, महुआ एवं सतकुट के हजारों पेड़ काटे गए। साथ ही मशीनों से चट्टानें काट कर उत्खनन किया जा रहा है। मामले में खनिज विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।  

Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से संसद सत्र की संभावना, PM-CM पद से जुड़े अहम विधेयक पर हो सकती है चर्चा

नई दिल्ली संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस बार मॉनसून सत्र तीन सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति में इसपर कोई फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर चार सप्ताह तक मॉनसून सत्र चलता है और इसमें 20 बैठकें होती हैं। हालांकि इस बार बैठकों की संख्या कम भी हो सकती है। बता दें कि पश्चिम बगाल, असम और पुदुच्चेरी में बीजेपी की जीत और कई पार्टियों में चल रही अंदरूनी कलह के बीच यह सत्र हो रहा है। ऐसे में सदन में कई मामलों को लेकर हंगमा होने के भी आसार हैं। टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन करने का ऐलन कर दिया है। इसके अलावा शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के साथ सात सांसद पहले ही बीजेपी के साथ आ गए हैं। अब एनसीपी (SP) में भी टूट के कयास लगाए जा रहे हैं। टीएमसी और शिवसेना सांसदों पर भी होगा फैसला लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को टीएमसी के 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को लेकर भी फैसला करना है। इन सांसदों ने उन्हें अलग गुट की मान्यता देने का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को दिया है। जानकारों का कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले भी इसपर फैसला हो सकता है। राज्यसभा में सत्तापक्ष के समीकरण काफी मजबूत हो गए हैं। महिला आरक्षण विधेयक फिर पेश कर सकती है सरकार पिछले सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिर गया था। लोकसभा में संख्या कम होने की वजह से निचले सदन में ही विधेयक पारित नहीं हो पाए थे। हालांकि अगर इस बार मॉनसून सत्र से पहले ही स्पीकर फैसला करते हैं तो सत्तापक्ष दोनों सदनों में मजबूत हो सकता है। ऐसे में सरकार महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक 2029 को लोकसभा में पेश कर सकती है। जानकारी के मुताबिक सरकार इन विधेयकों का मसौदा फिर से तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया जा सकता है। दक्षिण के राज्यों का कहना था कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के निर्धारण से उनका प्रतिनिधित्व संसद में कमजोर हो जाएगा। इसी समस्या को टालने के लिए सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का विधेयक लाया जा सकता है। पीएम-सीएम जेल वाला बिल सरकार इस सत्र में पीएम और सीएम की कुर्सी छीनने वाला बिल भी ला सकती है। बताया जा रहा है कि संशोधन विधेयक के लिए ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं कि सजा होने पर सीएम और पीएम की कुर्सी छीन ली जाए। इसके अलावा कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए अन्य सिफारिशें भी की जा सकती है। एक देश एक चुनाव बिल को पारित कराने के लिए भी सरकार जोर लगा सकती है। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, एफसीआरए बिल, एंटी डोपिंग बिल भी पेश किया जा सकता है।