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नवरात्रि में कन्या पूजन का खास महत्व: इन चीजों का दान दिलाएगा माता रानी का आशीर्वाद

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है, और इसमें भी महाष्टमी यानी आठवें दिन का अपना एक अलग आध्यात्मिक वजन होता है. यह दिन शक्ति स्वरूपा मां महागौरी को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से कन्या पूजन करने पर मां दुर्गा का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन से दरिद्रता का नाश होता है. साल 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी. अगर आप भी मां महागौरी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो कन्या पूजन के दौरान कुछ विशेष चीजों का दान करना आपके भाग्य के द्वार खोल सकता है क्यों किया जाता है कन्या पूजन? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं में देवी शक्ति का वास माना जाता है. कन्या पूजन के दौरान 2 से 10 वर्ष तक की बच्चियों को नवदुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराना और दान देना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है. कन्या पूजन में क्या खिलाना चाहिए? कन्या पूजन में पारंपरिक रूप से ये चीजें परोसी जाती हैं जैसे, पूड़ी, काले चने और सूजी का हलवा. इसे भोग प्रसाद माना जाता है. कन्या पूजन में किन चीजों का दान करना शुभ होता है? लाल वस्त्र या चुनरी लाल रंग मां दुर्गा का प्रिय माना जाता है. कन्याओं को लाल चुनरी या कपड़े दान करने से विशेष पुण्य मिलता है. फल और मिठाई फल और मिठाइयों का दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. कंघी, रिबन और चूड़ियां कन्याओं को श्रृंगार की चीजें देना बहुत शुभ माना जाता है. इससे मां महागौरी की कृपा प्राप्त होती है. पैसे (दक्षिणा) कन्या पूजन के बाद श्रद्धानुसार दक्षिणा देना आवश्यक माना गया है. यह पूजा को पूरा करता है. खिलौने और स्टेशनरी छोटी बच्चियों को खिलौने, कॉपी, पेंसिल आदि देना भी पुण्यदायी माना जाता है. नारियल नारियल को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कन्याओं को नारियल देने से घर में खुशहाली आती है. कन्या पूजन का महत्व कन्या पूजन को नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना गया है. यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान और महत्व को भी दर्शाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया कन्या पूजन जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है और घर में सुख-शांति बनाए रखता है.

नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन नवरात्रि के दूसरे दिन मां विंध्यवासिनी, मां पाटेश्वरी देवी, मां विशालाक्षी के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, युवा भक्तों की सबसे अधिक रही संख्या विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, मां शाकुम्भरी देवी, मां कात्यायनी और मां पाटेश्वरी देवी के धामों में लगा रहा भक्तों का तांता    लखनऊ चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी देवी मंदिरों में आस्था का अद्भुत जनसैलाब देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के दूसरे दिन भी शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लाखों की संख्यां में भक्तों ने मां भगवती का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, सहारनपुर, देवीपाटन और वृंदावन सहित कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सुबह से ही देखी गईं। श्रद्धालुओं के सैलाब में युवाओं की संख्या सबसे ज़्यादा रही, उनके जोश और उत्साह भरे “जय माता दी” के जयकारों से मंदिरों परिसर पूरी तरह भक्तिमय नजर आये। विशेष अवसर के चलते नगर निगमों और प्रशासन द्वारा स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को मां भगवती के सुगम दर्शन सुलभ हो सकें।  नवरात्रि के दूसरे दिन मीरजापुर स्थित माँ विंध्यवासिनी धाम में लोगों की आस्था चरम पर रही। सुबह से लेकर शाम तक यहां 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबारों में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। मीरजापुर सिटी मजिस्ट्रेट और मेला प्रभारी अविनाश कुमार ने बताया कि प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की संख्या सुबह ही 2 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी। मां विंध्यवासिनी के धाम में नवरात्रि के अवसर पर पूरे दिन और रात दर्शन-पूजन का क्रम चल रहा है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में पेयजल, छाया, कूलर के साथ एलईडी स्क्रीन की भी  व्यवस्था की गई है, जिससे कतार में लगे भक्तों को भी मां के दर्शन का लाभ मिल सके। साथ ही न केवल मंदिर परिसर, बल्कि विंध्याचल धाम के आस-पास के क्षेत्रों व अन्य मंदिरों में भी सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे दर्शन व्यवस्था सुगम बनी रही। इसी तरह प्रयागराज स्थित मां ललिता देवी शक्तिपीठ में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। पिछले दो दिनों में यहां लगभग 2.5 से 3 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसके साथ ही प्रयागराज के अन्य प्रसिद्ध देवी धाम अलोप शंकरी और कल्याणी देवी मंदिर में भी  की भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में वाराणसी के प्रसिद्ध मां विशालाक्षी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गई। सामान्य दिनों में जहां 4 से 5 हजार लोग दर्शन करने आते हैं, वहीं नवरात्रि में यह संख्या बढ़कर 7 से 8 हजार तक पहुंच गई है। यहां विशेष रूप से दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। इसी क्रम में नगर निगम और प्रशासन द्वारा यहां स्वच्छता और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।  सहारनपुर के शाकुम्भरी देवी मंदिर में भी नवरात्रि के दूसरे दिन शाम तक 80 हजार से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं। वहीं बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिर में करीब 2.5 लाख भक्तों ने दर्शन किए। इन सभी स्थलों पर भक्तों में खासा उत्साह देखा गया, जिसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। वहीं कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन भी नवरात्रि के अवसर पर शक्ति की भक्ति में डूबा नजर आ रहा है। वृंदावन स्थित शक्ति पीठ मां कात्यायनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शुरुआती दो दिनों में ही यहां 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने माँ के दर्शन किए। मंदिर में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। नवरात्रि के अवसर पर प्रदेश के मंदिरों में उमड़ी इस भारी भीड़ के बीच प्रशासन द्वारा सुगम दर्शन, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। नगर निगम की टीमें लगातार सफाई व्यवस्था में जुटी हैं, जबकि महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर प्रमुख स्थल पर सीसीटीवी कैमरे और भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदेश में नवरात्रि के दौरान उमड़ा यह जनसैलाब न केवल आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर चल रही है, उसे देखते हुए नई पीढ़ी में भी अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था और विश्वास बढ़ा है।

नवरात्रि में राशि अनुसार करें ये 9 उपाय, बदलेगी किस्मत

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी. हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर नवरात्रि में अपनी राशि के अनुसार कुछ खास उपाय किए जाएं तो मां दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियां दूर होने लगती हैं. आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी राशि वालों के लिए नवरात्रि के सरल उपायों के बारे में. मेष राशि नवरात्रि के दौरान मेष राशि के जातक मां दुर्गा को लाल फूल और लाल चुनरी अर्पित करें. साथ ही ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करें. इससे साहस और सफलता में वृद्धि होती है. वृषभ राशि वृषभ राशि के लोग मां दुर्गा को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं. शुक्रवार के दिन गरीबों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है. इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है. मिथुन राशि मिथुन राशि वाले नवरात्रि में हरे रंग के फल या हरी इलायची मां को अर्पित करें. साथ ही दुर्गा चालीसा का पाठ करें. इससे बुद्धि और निर्णय क्षमता मजबूत होती है. कर्क राशि कर्क राशि के जातक मां दुर्गा को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं और कन्याओं को भोजन कराएं. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है. सिंह राशि सिंह राशि वालों को मां दुर्गा को गुड़ और गेहूं अर्पित करना चाहिए. रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को दान करना लाभदायक माना जाता है. कन्या राशि कन्या राशि के लोग नवरात्रि में पीले फूल और केले मां दुर्गा को चढ़ाएं. साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है. तुला राशि तुला राशि के जातक मां दुर्गा को सुगंधित इत्र या गुलाब के फूल अर्पित करें. इससे जीवन में संतुलन और खुशियां बढ़ती हैं. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वाले नवरात्रि में लाल चंदन और गुड़ मां दुर्गा को अर्पित करें. साथ ही रोजाना दुर्गा मंत्र का जाप करें. धनु राशि धनु राशि के लोग मां दुर्गा को पीले फल और हल्दी अर्पित करें. गुरुवार के दिन गरीबों को दान करना बहुत शुभ माना जाता है. मकर राशि मकर राशि के जातक मां दुर्गा को तिल और तेल का दीपक जलाकर पूजा करें. इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. कुंभ राशि कुंभ राशि के लोग नवरात्रि में नीले या काले रंग के कपड़े दान करें और मां दुर्गा को नारियल अर्पित करें. मीन राशि मीन राशि के जातकों को मां दुर्गा को पीले फूल और बेसन के लड्डू चढ़ाने चाहिए. इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. नवरात्रि का महत्व नवरात्रि को शक्ति की साधना का पर्व माना जाता है. इन नौ दिनों में श्रद्धा और भक्ति से मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है. मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़े फल दे सकते हैं.

चैत्र नवरात्र अष्टमी 2026: तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

इंदौर नवरात्र में पूरे 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. खासतौर से चैत्र नवरात्रि को बहुत अहम माना जाता है. चैत्र नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत  मानी जाती है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएंगी. इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि बेहद खास होती है. जानते हैं कि चैत्र नवरात्र 2026 में महाअष्टमी की तारीख और इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त क्या रहेंगे।  अष्टमी का महत्व नवरात्रि के आठवें दिन को अष्टमी कहा जाता है और यह दिन देवी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।  कब शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि 2026 ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो रही है। ऐसे में 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का त्योहार प्रारंभ होगा। क्या है कलश स्थापना का शुभ समय  नवरात्रि के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। नौ दिनों की होगी नवरात्रि 19 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 1-  अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना 20 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा 21 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा 22 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा 23 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 5-  मां स्कंदमाता पूजा 24 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा 25 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा 26 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी होगी। आप कन्या पूजन कर सकते हैं। ) 27  मार्च 2026- नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( इस दिन नवमी मनाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा )  पूजा विधि     नवरात्रि के पहले दिन आप एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें।     देवी को लाल रंग की नई चुनरी पहनाएं।     इस दौरान देवी को अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और उन्हें इत्र लगाएं।     एक साफ थाली में रोली और अक्षत का टीका बनाकर माता रानी को लगाएं।     इसके बाद साफ लोटे में जल भरकर उसपर नारियर चुनरी में बांधकर रखें और कलश स्थापित करें।     इस दौरान कलश को भी टिका लगाएं।     देवी को फूलों की माला पहनाएं और सूखे मेवे पूजा में भोग के रूप में शामिल कर लें।     अब आप धूप उठाकर देवी के नामों का जाप करें और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।     देवी की परिवार संग आरती कर लें और कुछ फल मिठाई भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांट दें।  

नवरात्रि 2026: घर में न रखें ये चीजें, नहीं तो नाराज हो सकती हैं मां दुर्गा

चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की आराधना और शुद्धि का समय माना जाता है। शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां दुर्गा का आगमन उन्हीं घरों में होता है जहां स्वच्छता और सकारात्मकता का वास हो। यदि आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाली वस्तुएं मौजूद हैं, तो मां दुर्गा की कृपा से वंचित रहना पड़ सकता है। नवरात्रि के पवित्र दिनों से पहले घर की शुद्धि करना अत्यंत आवश्यक है। यहाँ उन प्रमुख चीजों की सूची दी गई है जिन्हें आपको नवरात्रि से पहले घर से हटा देना चाहिए ताकि मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त हो सके: टूटी-फूटी वस्तुएं और खंडित सामान वास्तु शास्त्र में टूटी हुई वस्तुओं को नकारात्मकता का मुख्य स्रोत माना गया है। घर में पड़े हुए टूटे हुए कांच, बर्तन, फर्नीचर, या इलेक्ट्रॉनिक सामान को नवरात्रि शुरू होने से पहले ही घर से बाहर कर दें। माना जाता है कि ये वस्तुएँ घर में आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव पैदा करती हैं। यदि कोई वस्तु उपयोग में नहीं है और टूटी हुई है, तो उसे सुधारें या तुरंत हटा दें। पुरानी और रद्दी सामग्री अक्सर हम घर के कोनों में, अलमारियों के पीछे या स्टोर रूम में पुरानी रद्दी, अखबारों के ढेर, पुरानी पत्रिकाएं और अनावश्यक कागज जमा कर लेते हैं। ये चीजें अटका हुआ ऊर्जा का प्रतीक हैं। गंदगी और धूल जमा होने से वहां नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है, जो देवी के स्वागत में बाधक बनती है। इन्हें हटाकर घर को व्यवस्थित करें। पुराने और फटे-पुराने कपड़े यदि घर में ऐसे कपड़े हैं जिन्हें आप काफी समय से नहीं पहन रहे हैं या जो फट गए हैं, तो उन्हें नवरात्रि से पहले दान कर देना चाहिए या हटा देना चाहिए। अनावश्यक कपड़े घर में ऊर्जा के प्रवाह को रोकते हैं। पुराने कपड़े हटाने से घर में नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सूखे पौधे और मुरझाए फूल घर की बालकनी या पूजा घर के आसपास यदि आपने गमले रखे हैं और उनमें लगे पौधे सूख गए हैं या फूल मुरझा गए हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें। सूखे पौधे घर में उदासी और नकारात्मकता का संकेत देते हैं। नवरात्रि के आगमन पर घर में ताजे और हरे-भरे पौधे या ताजे फूलों की सजावट करना शुभ माना जाता है।  बंद घड़ियां वास्तु के अनुसार, बंद घड़ियां प्रगति में रुकावट का प्रतीक मानी जाती हैं। यदि घर में कोई घड़ी बंद पड़ी है, तो या तो उसे ठीक करवाएं या उसे घर से हटा दें। समय का सही चलना घर में निरंतरता और सफलता को दर्शाता है। खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण घर में खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जैसे- बंद पड़े मोबाइल फोन, खराब चार्जर, या अन्य बिजली के उपकरण, जो अब काम नहीं करते, उन्हें घर से हटा देना बेहतर है। ये चीजें राहु के दोष को बढ़ाती हैं, जिससे घर में मानसिक उलझनें पैदा होती हैं। पूजा घर की शुद्धि नवरात्रि के लिए पूजा घर सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। यहां किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति या फटी हुई धार्मिक पुस्तकें नहीं होनी चाहिए। यदि आपके मंदिर में ऐसी कोई वस्तु है, तो उसे सम्मानपूर्वक किसी जल में प्रवाहित करें या विसर्जित करें। इसके अलावा, पिछले उत्सवों की बची हुई सूखी सामग्री या राख को हटाकर पूरे मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें। नवरात्रि के लिए कुछ विशेष वास्तु सुझाव गंगाजल का छिड़काव: पूरे घर में, खासकर कोनों और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। इससे घर की ऊर्जा शुद्ध होती है। मुख्य द्वार पर स्वस्तिक: नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर या कुमकुम से स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। यह सुख-समृद्धि का द्वार खोलता है। आम के पत्तों का तोरण: मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाना बहुत शुभ माना जाता है, यह देवी लक्ष्मी और दुर्गा का स्वागत करने का संकेत है। साफ-सफाई का महत्व: घर का कोना-कोना साफ रखें। जिस घर में धूल-मिट्टी नहीं होती, वहां देवी का वास स्थाई रूप से होता है।

Navratri 2026: कब हैं चैत्र, शारदीय और गुप्त नवरात्र? जानें तिथियाँ और घटस्थापना का मुहूर्त

इंदौर  Navratri 2026 Dates: नवरात्र देवी दुर्गा को समर्पित सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है. इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं. हर साल भक्त चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र और दो गुप्त नवरात्र की तिथियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि इनका विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चारों नवरात्र शुभ समय पर पड़ रही हैं, जिससे भक्तों को साधना, व्रत और देवी पूजा के कई अवसर मिलेंगे. इस नए वर्ष में श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से घटस्थापना कर सकते हैं और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं. यहां नवरात्र 2026 का पूरा कैलेंडर दिया गया है, जिसमें सभी नवरात्र की तिथियां और घटस्थापना का सही मुहूर्त शामिल है.  चैत्र नवरात्र 2026 तिथियां और घटस्थापना का मुहूर्त  द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र नवरात्र 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक समाप्त होंगे. चैत्र नवरात्र के पहले दिन का घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. 19 मार्च, प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना, मां शैलपुत्री 20 मार्च, द्वितीया तिथि- मां ब्रह्मचारिणी 21 मार्च, तृतीया तिथि- मां चंद्रघंटा 22 मार्च, चतुर्थी तिथि- मां कुष्मांडा 23 मार्च, पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता 24 मार्च, षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी 25 मार्च- सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि 26 मार्च, अष्टमी तिथि- मां महागौरी, रामनवमी 27 मार्च, नवमी तिथि- मां सिद्धिदात्री, व्रत का पारण शारदीय नवरात्र 2026 तिथियां और घटस्थापना का मुहूर्त  द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 20 अक्टूबर 2026 तक समाप्त होगी. शारदीय नवरात्र के पहले दिन का घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.  11 अक्टूबर, प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना, मां शैलपुत्री 12 अक्टूबर, द्वितीया तिथि- मां ब्रह्मचारिणी 13 अक्टूबर, तृतीया तिथि- मां चंद्रघंटा 14 अक्टूबर, चतुर्थी तिथि- मां कुष्मांडा 15 अक्टूबर, पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता 16 अक्टूबर, षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी 17 अक्टूबर- सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि 18 अक्टूबर, अष्टमी तिथि- सप्तमी तिथि ही रहेगी 19 अक्टूबर, महाअष्टमी- मां महागौरी 20 अक्टूबर, महानवमी- मां सिद्धिदात्री, व्रत का पारण, विजयादशमी  माघ गुप्त नवरात्र 2026  गुप्त नवरात्र का विशेष आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व होता है. इस दौरान साधक और भक्त दस महाविद्याओं की विधि-विधान से पूजा और साधना करते हैं. साल 2026 में इसकी शुरुआत 19 जनवरी 2026 से होगी और समापन 27 जनवरी 2026 को होगा.  आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026    साल 2026 की दूसरी गुप्त नवरात्र आषाढ़ मास में शुरू होगी. इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2026 से होगी और इसका समापन 23 जुलाई 2026 को होगा. इसका घटस्थापना मुहूर्त सुबह 5 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 39 मिनट तक रहेगा.

योगी सरकार में नवरात्रि का पर्व बना आस्था और विकास की एक अद्भुत मिसाल

जौनपुर का शीतला चौकिया धाम नवरात्रि का प्रमुख केंद्र बना, जहां नौ दिनों में 10 लाख से अधिक भक्त पहुंचे सहारनपुर के शाकम्भरी और त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, 20 लाख भक्तों ने किया दर्शन बलरामपुर का देवीपाटन धाम नवरात्रि में आस्था और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बना, 9 लाख श्रद्धालुओं ने किया पूजन भदोही के सीता समाहित स्थल, महाराजगंज के लेहड़ा देवी मंदिर और औरैया के देवी मंदिरों में 9 लाख से ज्यादा भक्तों ने जताई आस्था मिशन शक्ति 5.0 ने इस नवरात्रि को बनाया खास, महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की झलक हर जगह देखने को मिली लखनऊ, उत्तर प्रदेश की पावन धरती पर शारदीय नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और नारी शक्ति का विराट स्वरूप बनकर उभरा है। इस बार पूरे प्रदेश में देवी मंदिरों की तस्वीर देखें, तो यह साफ झलकता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते आठ वर्षों में न केवल प्राचीन धरोहर को संजोया है, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर श्रद्धालुओं को नया अनुभव भी दिया है। यही कारण है कि पूर्वांचल के विंध्यवासिनी धाम से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शाकम्भरी मंदिर तक समस्त देवी मंदिरों में नवरात्रि के नौ दिनों में ही लगभग 2 करोड़ भक्तों ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। इनमें से केवल विंध्यवासिनी धाम में ही 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद लिया। मां विंध्यवासिनी धाम : रोजाना लाखों श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब मीरजापुर स्थित मां विंध्यवासिनी का मंदिर प्रदेश का सबसे प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है। यहां प्रतिदिन औसतन 4 से 5 लाख श्रद्धालु पहुंचे। आम दिनों की तुलना में यह संख्या कई गुना बढ़ गई। सरकार द्वारा बनाए गए विंध्याचल कॉरिडोर ने श्रद्धालुओं को नई सहूलियत दी है। नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों में यहां रोज़ाना 6 से 7 लाख श्रद्धालु माता की आराधना में शामिल हुए। वाराणसी : विशालाक्षी शक्तिपीठ में दक्षिण भारत से उमड़ी आस्था 51 शक्तिपीठों में गिने जाने वाले मां विशालाक्षी मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में नवरात्रि पर भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ गई। सप्तमी से नवमी तक यहां 20 से 30 हजार श्रद्धालु रोज़ाना पहुंचे। वाराणसी के गायत्री शक्ति पीठ चौरा देवी मंदिर में नवमी तक 1 लाख से अधिक श्रद्धालु आए, जबकि दुर्गाकुंड स्थित मां कुष्मांडा मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों में 12 लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे। यहां अंतिम तीन दिनों में प्रतिदिन करीब 2 लाख श्रद्धालु दर्शन करने आए। सहारनपुर : शाकम्भरी व त्रिपुर बाला सुंदरी धाम बने श्रद्धा के केंद्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला भी आस्था से सराबोर रहा। नवरात्रि के नौ दिनों में शाकम्भरी धाम में लगभग 7 लाख और मां त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। देवीपाटन : मां पाटेश्वरी मंदिर में लाखों भक्त और भव्य मेला बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी मंदिर में इस नवरात्रि करीब 6.50 लाख श्रद्धालु पहुंचे। सप्तमी से नवमी तक यहां सबसे अधिक भीड़ रही। साथ ही मंदिर प्रबंधन ने 15 दिवसीय मेले का भी आयोजन किया, जिसमें आस्था और परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला।   प्रयागराज : गंगा तट पर आस्था की गूंज प्रयागराज के मां अलोप शंकरी धाम में नवरात्रि के दौरान करीब 12 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर प्रतिदिन ढाई लाख तक भक्त मां के दरबार में हाजिरी लगाने आए। मां कल्याणी देवी मंदिर में लगभग 6 लाख और मां ललिता देवी मंदिर में प्रतिदिन 70 से 80 हजार श्रद्धालु पहुंचे। सरकार ने यहां लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से यात्री शेड, लाइटिंग और सौंदर्यीकरण के कार्य कराए हैं। गोरखपुर : तरकुलहा व बुढ़िया माई धाम में भव्यता का नया रूप गोरखपुर स्थित तरकुलहा देवी मंदिर इस बार नवरात्रि में प्रमुख आस्था केंद्र बन गया। औसतन 50 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचे, जबकि नवमी पर संख्या 1 लाख पार कर गई। अबतक 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यहां दर्शन कर चुके हैं। वहीं कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माई मंदिर में 5 लाख भक्त पहुंचे। यहां नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों में रोज़ाना 1 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सरकार ने यहां पर्यटन विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च कर सुविधाएं बढ़ाई हैं। गाजीपुर : हथियाराम मठ और कामाख्या मंदिर में उमड़ा विश्वास गाजीपुर के हथियाराम मठ में इस बार नवरात्रि पर लगभग 40 हजार लोग पहुंचे। वहीं कामाख्या देवी मंदिर में अबतक 1 लाख से अधिक भक्तों ने माता के चरणों में मत्था टेका। जौनपुर : चौकिया धाम में श्रद्धालुओं का रेला जौनपुर का मां शीतला चौकिया मंदिर नवरात्रि में भक्तों से खचाखच भरा रहा। प्रतिदिन 70 हजार और सप्तमी से नवमी तक करीब 1 लाख श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचे। नैमिषारण्य : महानवमी पर भक्तों का सैलाब नैमिषारण्य की तपोभूमि स्थित ललिता देवी मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों में दो लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। महानवमी पर यहां आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। आगरा : चामुंडा देवी मंदिर समेत कई धाम बने आकर्षण आगरा का 300 साल पुराना चामुंडा देवी मंदिर नवरात्रि में विशेष आकर्षण रहा। यहां करीब 2 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इसके साथ कैला माता मंदिर में 15 लाख, सती माता मंदिर में 2 लाख, काली माता मंदिर में 1.5 लाख और शीतला माता मंदिर में 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे। मथुरा : नरी सेमरी मंदिर में परंपरा का अनोखा स्वरूप मथुरा के छाता स्थित नरी सेमरी माता मंदिर में नवरात्रि पर 3 लाख श्रद्धालु पहुंचे। यहां मूर्ति के खड़े होने की परंपरा और लाठी-डंडे से पूजा की परंपरा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही। झांसी : आल्हा-उदल की गाथा से जुड़े देवी मंदिर झांसी के पंचकुइया, कैमासन, महाकाली और लहर देवी मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों में 1-1 लाख से अधिक भक्त पहुंचे। यहां के मंदिरों का ऐतिहासिक महत्व और आस्था दोनों ही देखने को मिले। अन्य प्रमुख धाम : प्रदेशभर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ महराजगंज के लेहड़ा देवी मंदिर में 2 लाख श्रद्धालु पहुंचे। औरैया के 15 मंदिरों में करीब ढाई लाख लोग दर्शन को आए। हापुड़, सिद्धार्थनगर और अन्य जिलों के मंदिरों में भी लाखों की भीड़ रही। अंततः यह स्पष्ट है कि योगी सरकार ने नवरात्रि पर आस्था और विकास का अद्भुत मेल कर प्रदेश के मंदिरों को … Read more

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने नवरात्रि पर आस्था का संदेश दिया, कन्या पूजन कर किया शुभकामनाओं

रायपुर नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री  विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के कवर्धा और आसपास के माँ दुर्गा मंदिरों व पंडालों में पहुंचें। उन्होंने यहां विशेष पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उपमुख्यमंत्री ने महाआरती में भाग लिया, श्रृंगार सामग्री अर्पित की और सेवा मंडली के साथ माता सेवा की। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने काली मंदिर, दंतेश्वरी मंदिर, चंडी मंदिर, परमेश्वरी मंदिर और ठाकुरपारा, कुम्हारपारा, राजमहल चौक, भोरमदेव रोड एवं सकरहा घाट में स्थापित दुर्गा पंडालों का दर्शन किया। उपमुख्यमंत्री ने दुर्गा उत्सव समितियों के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं से भेंटकर नवरात्रि की शुभकामनाएँ दीं। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने छीरपानी कॉलोनी, माँ विंध्यवासिनी मंदिर, महामाया मंदिर और जनपद पंचायत कार्यालय के पास स्थित पंडालों में भी मां दुर्गा के दर्शन किए और बच्चों की खेल प्रतियोगिता में भाग लिया। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने वीर सावरकर सभागार, कवर्धा में आयोजित कन्या पूजन एवं भोजन कार्यक्रम में भी भाग लेकर बालिकाओं का पूजन किया और उन्हें भोजन कराया। उन्होंने कहा कि कन्या पूजन नवरात्रि पर्व की आत्मा है और यह नारी शक्ति, मातृशक्ति एवं बालिकाओं के प्रति आदर-सम्मान का प्रतीक है। समाज में स्त्रियों का सम्मान और सशक्तिकरण ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि शक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का पर्व है, जो हमें माता दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना कर सकारात्मक प्रेरणा देता है। उपवास, साधना, कन्या पूजन और सामूहिक भक्ति समाज में भाईचारा, सद्भाव और सेवा का संदेश फैलाते हैं। उन्होंने सभी से नवरात्रि पर्व को श्रद्धा, भक्ति और आपसी सद्भाव के साथ मनाने की अपील की और प्रदेश की खुशहाली, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की। इस अवसर पर  शर्मा ने सांसद  संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा, पूर्व संसदीय सचिव डॉ. सियराम साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष  चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष  पवन जायसवाल, जनपद अध्यक्ष मती गणपत सुषमा बघेल और जिला पंचायत सभापति  रामकुमार भट्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

भक्ति का बड़ा चमत्कार: नवरात्रों में माता रानी ने बरसाई अपार कृपा, चमकी किस्मत

फाजिल्का   नवरात्रों के पवित्र दिनों के दौरान माता रानी की अपार कृपा फाजिल्का के एक परिवार पर हुई। शहर की मशहूर रूप चंद लॉटरी की दुकान से खरीदी गई टिकट ने एक व्यक्ति की जिंदगी खुशियों से भर दी। यह खुशकिस्मत व्यक्ति हैं गुरविंदर सिंह, जिन्हें कम नंबर 56062 के साथ दूसरा इनाम 45 हजार रुपये का मिला। गुरविंदर सिंह अपने बेटे की शादी के लिए सामान खरीदने फाजिल्का शहर आए थे। वापसी के दौरान वह रूप चंद लॉटरी की दुकान पर रुके और एक टिकट खरीदी। किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह टिकट उनकी किस्मत के दरवाजे खोल देगी। दुकान के संचालक बोबी बवेजा ने बताया कि अभी उनकी दुकान पर माता रानी के चरण भी नहीं पड़े थे कि माता ने गुरविंदर सिंह को अपनी कृपा से नवाज दिया। यह खबर मिलते ही गुरविंदर सिंह के चेहरे पर खुशी स्पष्ट थी। परिवार के सदस्यों ने इस खुशी को साझा करते हुए नवरात्रों के पकौड़ों के साथ सोस लगाकर मुंह मीठा करवाया। मौके पर मौजूद लोगों ने भी गुरविंदर सिंह को बधाई दी और माता रानी का धन्यवाद किया। रूप चंद लॉटरी के संचालक बोबी बवेजा ने बताया कि उनकी दुकान का पुराना इतिहास भी इनामों से भरपूर रहा है। शरादों के दौरान केवल 13 दिनों में उनकी दुकान से 14 इनाम निकले थे, जिसने इलाके में चर्चा पैदा कर दी थी। इसके अलावा, एक ही दिन में चार इनाम निकलने का रिकॉर्ड भी उनकी दुकान के नाम है, जिसे अब तक किसी और लॉटरी संचालक ने नहीं तोड़ा।

पवित्र नवरात्रि: फूलों, नारियल और दीपक से घर में बढ़ाएं सकारात्मक ऊर्जा

नवरात्रि का पर्व पूरे भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है. शारदीय नवरात्रि खास तौर पर मां दुर्गा की साधना के लिए बहुत शुभ मानी जाती है. इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और उन्हें फूल, नारियल, चुनरी, वस्त्र और दीपक आदि अर्पित करते हैं, लेकिन जब नवरात्रि खत्म होती है तो ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि आखिर पूजा में चढ़ाई गई चीजों का क्या करना चाहिए? क्या इन्हें ऐसे ही फेंक देना सही है या इसके लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं? इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि नवरात्रि पूजा के बाद जली हुई बाती, नारियल, फूल, कलश, चुनरी और कपड़े का सही तरीका क्या है.  देवी पूजा के लिए जलाई हुई बाती का क्या करें? नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा में जो बाती जलाई जाती है, उसे कभी भी कचरे में नहीं फेंकना चाहिए. चाहे वह आधी जली हो या पूरी, सभी बातियों को इकट्ठा करके पवित्र स्थान पर रख लें. नवरात्रि के आखिरी दिन इसमें कपूर, लौंग और थोड़ा सा घी डालकर दोबारा जलाएं. इसे घर में घुमाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मकता बढ़ती है. बाद में बची हुई राख को पौधे वाले गमले में डाल दें. मान्यता है कि यह भूत नजर दोष से बचाती है. माता को चढ़ाए गए फूलों का क्या करें? फूलों में देवी की ऊर्जा मानी जाती है. इन्हें कहीं भी फेंकने की बजाय प्रसाद मानकर अपने धन स्थान या पूजा घर में रखें. बाकी फूलों को गमले या पौधे में डाल दें ताकि वह खाद के रूप में काम आ सके. यह तरीका पर्यावरण के लिए भी अच्छा माना जाता है. नवरात्रि पूजा के कलश का क्या करें? पूजा के बाद कलश का जल परिवार और घर में छिड़कें. यह घर में शुभ ऊर्जा का प्रसार करता है. बचा हुआ जल पौधों में डाल दें. कलश में रखे सिक्कों को लाल कपड़े में बांधकर धन स्थान पर रखें. इसे देवी का आशीर्वाद माना जाता है. नारियल का क्या करें? मां दुर्गा की पूजा में चढ़ाया गया नारियल बहुत पवित्र माना जाता है. इसे परिवार के सभी सदस्यों और मित्रों में प्रसाद के रूप में बांट दें, अगर नारियल सूख गया हो तो नदी या समुद्र में प्रवाहित कर दें, अगर नारियल फोड़ने पर खराब निकल जाए तो इसे भूमि में दबा दें. मान्यता है कि ऐसा नारियल आपके कष्टों को अपने ऊपर ले लेता है. चुनरी का क्या करें? मंदिर में या पूजा में मिली चुनरी में मां का आशीर्वाद माना जाता है. इसे अपने घर के पवित्र स्थान, धन स्थान या वाहन पर बांध सकते हैं. पूजा-पाठ करते समय इसे सिर पर भी रख सकते हैं, अगर इसका उपयोग न हो पाए तो इसे मंदिर में या किसी श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक दें. माता की चौकी और कपड़े का क्या करें? पूजा के बाद चौकी और वस्त्रों को साफ करके सुरक्षित रखें और आगे आने वाले अनुष्ठानों में उपयोग करें, अगर जरूरत न हो तो मंदिर में दान कर सकते हैं या किसी जरूरतमंद को दे सकते हैं.