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इजराइल-गाजा संघर्ष तेज़, नेतन्याहू ने जताया अमेरिका पर भरोसा, कतर ने उठाई सज़ा देने की मांग

यरूशलम: इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने  को कहा कि शीर्ष अमेरिकी राजनयिक मार्को रुबियो की इजराइल यात्रा ने सहयोगियों के बीच संबंधों की मजबूती को दिखाया है. यह बात कतर में हमास नेताओं पर हुए अभूतपूर्व इजराइली हमले की व्यापक आलोचना के कुछ दिनों बाद कही गई है. गाजा युद्ध विराम वार्ता में अमेरिकी सहयोगी और प्रमुख मध्यस्थ पर हुए हमले ने अरब और मुस्लिम नेताओं को दोहा में एकजुटता दिखाने के लिए इकट्ठा होने के लिए प्रेरित किया है. यहां कतर के प्रधानमंत्री ने दुनिया से "दोहरे मानदंडों" को त्यागने और इजराइल को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया. अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के लिए इजराइल की कड़ी आलोचना की, और रुबियो ने वॉशिंगटन रवाना होने से पहले पत्रकारों के सामने स्वीकार किया कि राष्ट्रपति इससे "खुश नहीं" थे. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि इस हमले से "इजराइलियों के साथ हमारे संबंधों की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं आएगा." फिर भी, इस हमले ने गाजा में युद्ध विराम सुनिश्चित करने के प्रयासों पर नए सिरे से दबाव डाला है, और रुबियो ने स्वीकार किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल को इसके प्रभाव के बारे में "बात करनी होगी." नेतन्याहू ने इस अभियान का बचाव किया है. इसमें हमास के अधिकारी एक नए अमेरिकी युद्ध विराम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे. साथ ही ये कहा कि समूह के नेताओं को मारने से गाजा युद्ध को समाप्त करने में "मुख्य बाधा" दूर हो जाएगी. एएफपी संवाददाता के अनुसार,  को रुबियो ने नेतन्याहू और इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हुकाबी के साथ यरुशलम की पवित्र पश्चिमी दीवार पर प्रार्थना की. नेतन्याहू ने बाद में कहा कि इस यात्रा से पता चलता है कि इजराइली-अमेरिकी गठबंधन "पश्चिमी दीवार के उन पत्थरों जितना ही मजबूत और टिकाऊ है जिन्हें हमने अभी छुआ है." उन्होंने आगे कहा कि रुबियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में, "यह गठबंधन पहले कभी इतना मजबूत नहीं रहा." रुबियो की नेतन्याहू सहित अधिकारियों के साथ मुख्य बैठकें आज सोमवार को होंगी, उसके बाद मंगलवार को रवाना होंगे. उनकी यह यात्रा  कतर में अरब और मुस्लिम नेताओं के आपातकालीन शिखर सम्मेलन के साथ मेल खाती है, जिसके प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने  को एक तैयारी बैठक को संबोधित किया था. उन्होंने कहा, "समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोहरे मापदंड अपनाना बंद करे और इज़राइल को उसके द्वारा किए गए सभी अपराधों के लिए दंडित करे." उन्होंने आगे कहा कि गाजा में इजराइल का "विनाश का युद्ध" सफल नहीं होगा. "इजराइल को जारी रखने के लिए जो चीज प्रोत्साहित कर रही है… वह है उसकी चुप्पी, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की उसे जवाबदेह ठहराने में असमर्थता." बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद, इजराइल ने हाल के दिनों में इस क्षेत्र के सबसे बड़े शहरी केंद्र, गाजा शहर पर कब्जा करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. उसने निवासियों को शहर खाली करने के लिए कहा है और कई ऊंची इमारतों को उड़ा दिया है, जिनका इस्तेमाल हमास कर रहा है. अगस्त के अंत तक, संयुक्त राष्ट्र का अनुमान था कि शहर और उसके आसपास के इलाकों में लगभग 10 लाख लोग रह रहे थे, जहां उसने अकाल की घोषणा की है. इसके लिए इजराइली सहायता प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया है. एएफपी की तस्वीरों में वाहनों और पैदल लोगों का एक समूह नष्ट इमारतों के वीरान परिदृश्य से होते हुए गाजा शहर से दक्षिण की ओर भागता हुआ दिखाई दे रहा है. गाजा शहर की निवासी 20 वर्षीय सारा अबू रमदान ने कहा, "हम लगातार गोलाबारी और शक्तिशाली विस्फोटों के बीच लगातार आतंक में जी रहे हैं. इन रॉकेटों में इतनी बड़ी मारक क्षमता क्यों है? उनका लक्ष्य क्या है? हम यहां मर रहे हैं, हमारे पास शरण लेने के लिए कोई जगह नहीं है… और दुनिया बस देख रही है." गाजा की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि  सुबह से इस क्षेत्र के आसपास इज़राइली हमलों में कम से कम 45 लोग मारे गए हैं. गाजा में मीडिया पर प्रतिबंध और कई इलाकों तक पहुंचने में कठिनाइयों के कारण, एएफपी नागरिक सुरक्षा एजेंसी या इजराइली सेना द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पा रहा है. कतर के पीएम की दुनिया से गुहार, इजराइल को दंडित करें, डबल स्टैंडर्ड छोड़ें कतर के प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से "दोहरे मानदंडों" को खारिज करने और इजराइल को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया. यह बात उन्होंने दोहा में हमास सदस्यों पर अभूतपूर्व इजराइली हमले के जवाब में बुलाई गई एक आपातकालीन शिखर बैठक की पूर्व संध्या पर कही. अमेरिका के एक सहयोगी द्वारा दूसरे देश की धरती पर किए गए इस घातक हमले ने आलोचनाओं की लहर पैदा कर दी. इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फटकार भी शामिल है, जिन्होंने समर्थन जताने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो को इजराइल भेजा. सोमवार को अरब और इस्लामी नेताओं की आपातकालीन बैठक खाड़ी देशों के बीच एकता का एक स्पष्ट प्रदर्शन होगी और इजराइल पर और दबाव बनाने की कोशिश करेगी, जो पहले से ही गाजा में युद्ध और मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए बढ़ती मांगों का सामना कर रहा है. कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने रविवार को एक तैयारी बैठक में कहा, "समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोहरे मापदंड अपनाना बंद करे और इजराइल को उसके द्वारा किए गए सभी अपराधों के लिए दंडित करे." उन्होंने आगे कहा कि गाजा में इजराइल का "विनाश का युद्ध" सफल नहीं होगा. "इजराइल को जारी रखने के लिए जो चीज प्रोत्साहित कर रही है… वह है उसकी चुप्पी, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की उसे जवाबदेह ठहराने में असमर्थता." सोमवार के शिखर सम्मेलन में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के शामिल होने की उम्मीद है. फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास रविवार को दोहा पहुंचे. यह देखना बाकी है कि सऊदी अरब के वास्तविक शासक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस बैठक में शामिल होंगे या नहीं, हालांकि उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में पड़ोसी देशों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए कतर का दौरा किया था. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी के अनुसार, … Read more

गाजा पर कब्जे को लेकर नेतन्याहू का सख्त रुख, कहा- बंधक समझौते से फर्क नहीं पड़ता

येरुशेलम इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दो टूक कहा है कि अगर हमास बंधकों को रिहा करने वाली शर्तों के साथ युद्धविराम समझौते पर सहमत हो जाता है, तब भी उनकी सेना पूरे गाजा पट्टी पर कब्जा करेगी। नेतन्याहू की यह टिप्पणी तब आई है, जब गाजा पर कब्जा करने के लिए इजरायली सुरक्षा बल आगे बढ़ रहे हैं और उनके इस कदम की अंतरराष्ट्रीय जगत में भारी आलोचना हो रही है।  स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया से बात करते हुए, नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि हमास को खदेड़ने का उनका लक्ष्य अपरिवर्तित है। उन्होंने कहा, "हम ऐसा वैसे भी करेंगे। ऐसा कभी नहीं था कि हम हमास को वहाँ छोड़ देंगे।" नेतन्याहू ने कहा कि हम हर हाल में गाजा पर भी कब्जा करेंगे। ट्रंप के बयान का भी किया जिक्र उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस समर्थन का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि हमास गाजा में नहीं रह सकता है। नेतन्याहू ने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे सही कहा है, उनका कहना है कि हमास को गाजा से जाना ही होगा। यह SS (शुट्ज़स्टाफ़ेल) को जर्मनी में ही छोड़ देने जैसा है। आप जानते हैं, जर्मनी के ज़्यादातर हिस्से को तो SS से मुक्त करा लिया गया था लेकिन बर्लिन को एसएस और नाज़ी कोर के साथ छोड़ दिया गया था।” आलोचनाओं को कहा- यहूदी-विरोधी सुनामी बता दें कि 1925 में हिटलर ने शुट्ज़स्टाफ़ेल की स्थापना की थी, जिसे एसएस के नाम से भी जाना जाता है। एसएस को शुरू में हिटलर के निजी अंगरक्षकों के रूप में बनाया गया था, बाद में इसने बड़ा रूप ले लिया था और नाजियों पर कब्जा कर लिया था। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि अगर हमास शेष बंधकों को रिहा करने, निरस्त्रीकरण करने और "गाज़ा का विसैन्यीकरण" करने पर सहमत हो जाए, तो युद्ध आज ही समाप्त हो सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आलोचना को यहूदी-विरोधी सुनामी कहकर खारिज कर दिया। UN महासचिव बोले तुरंत हो युद्धविराम बता दें कि इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने घनी आबादी वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र के उत्तरी भाग में स्थित गाज़ा शहर पर कब्ज़ा करने की अपनी अहम रणनीति के तहत बुधवार को युद्ध का अगला चरण शुरू कर दिया है। नेतन्याहू ने इसे हमास का गढ़ बतलाया है। इसके साथ ही इजरायली सेना के जवान गाजा पट्टी में अंदर घुस गए। दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नेतन्याहू से तुरंत अपने सैनिकों को गाजा से बुलाने और युद्धविराम का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि IDF के आक्रमण से गाजा पट्टी में भूख से तड़प रहे लोगों का बड़े पैमाने पर विनाश हो जाएगा। अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में फ़िलिस्तीनियों की आधिकारिक मौत के आंकड़े इस सप्ताह बढ़कर 62,000 को पार कर गए हैं।

इंटरनेशनल कोर्ट के जजों पर अमेरिका का प्रतिबंध, नेतन्याहू से जुड़ा मामला

वॉशिंगटन/यरुशेलम  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के वैसे जजों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने को मंजूरी दी थी और अरेस्ट वारंट जारी किया था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा बुधवार को घोषणा किए गए इस कदम की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि यरूशलेम को झूठे तरीके से बदनाम करने के ICC के अभियान पर अमेरिकी सरकार का यह दंडात्मक कदम सराहनीय है। नेतन्याहू ने इस कदम को इजरायल की रक्षा में एक निर्णायक कदम कहा है। नेतन्याहू के ऑफिस से जारी एत बयान में उन्होंने कहा, "मैं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के लिए बधाई देता हूँ।" उन्होंने आगे कहा, "यह इजरायल और इजरायली डेमोक्रेटिक फ्रंट को निशाना बनाकर किए जा रहे झूठे प्रचार अभियान के खिलाफ और सच्चाई व न्याय के पक्ष में एक कड़ा कदम है।" किन-किन पर लगे प्रतिबंध? ट्रंप प्रशासन ने जिन जजों पर ये प्रतिबंध लगाए हैं उनमें फ्रांस के न्यायाधीश निकोलस यान गुइलौ, फिजी के उप अभियोजक नजहत शमीम खान और सेनेगल के उप अभियोजक मामे मांडियाये नियांग के भी नाम शामिल हैं। इन लोगों ने गाजा में कथित युद्ध अपराधों के लिए इजरायली पीएम नेतन्याहू और उनके पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ पिछले साल गिरफ्तारी वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। इनके अलावा कनाडा की न्यायाधीश किम्बर्ली प्रोस्ट को भी उस फैसले के लिए प्रतिबंधित किया गया है जिन्होंने आईसीसी को अफगानिस्तान में अमेरिकी कर्मियों की जाँच करने की अनुमति दी थी। नवंबर 2024 में नेतन्याहू के खिलाफ जारी हुए थे वारंट बता दें कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के न्यायाधीशों के एक पैनल ने नवंबर 2024 में नेतन्याहू और योआव गैलेंट के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। न्यायाधीशों का मानना था कि उक्त दोनों ने गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल के अभियान के दौरान मानवीय सहायता रोककर और जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाकर युद्ध अपराध किए हैं। हालांकि, इजरायल के अधिकारी इस तरह के आरोपों को खारिज करते हैं। ICC ने प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की इसके जवाब में आईसीसी ने बुधवार को अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की और इसे सभी 125 सदस्य देशों के अधिदेश के तहत संचालित एक निष्पक्ष न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता पर एक ज़बरदस्त हमला बताया है। एक बयान में, ICC ने कहा कि ये प्रतिबंध "अदालत के सदस्य देशों, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और सबसे बढ़कर, दुनिया भर के लाखों निर्दोष पीड़ितों का अपमान हैं।" अदालत ने आगे कहा, "आईसीसी किसी भी दबाव या धमकी की परवाह किए बिना, अपने कानूनी ढाँचे के अनुसार अपने आदेशों का सख्ती से पालन करना जारी रखेगा।" फरवरी और जून में भी लगाए थे प्रतिबंध इससे पहले जून में भी ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी के दो अन्य जजों को प्रतिबंधित कर दिया था। उससे पहले फरवरी में ICC के मुख्य अभियोजक करीम खान पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। इन प्रतिबंधों के बाद आईसीसी के कर्मचारियों के सामने कई तरह की अड़चनें आ रही हैं। प्रतिबंधों के कारण उनकी अमेरिका में एंट्री बैन हो गई है। इसके अलावा वे अमेरिकी संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। बैंकों से भी लेनदेन रुक जाएगा।

नेतन्याहू का हमास पर हमला: गाजा में बच्चों की हड्डियों की तस्वीरें हैं भ्रामक प्रचार

तेल अवीव हमास के झूठ पर आंखें खोलें… इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू रविवार को जब मीडिया से मुखातिब हुए. तब उन्होंने प्रेस के सामने हमास के झूठ की पोल खोलने का दावा किया. इधर गाजा भूख से बिलख रहा है और उधर नेतन्याहू ने इसी गाजापट्टी को लेकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं. वह बार-बार कह रहे हैं कि उनका इरादा गाजा पर पूर्ण नियंत्रण का नहीं है तो ऐसे में सवाल उठता है कि फिर आखिर उनका इरादा क्या है? नेतन्याहू ने रविवार को इंटरनेशनल मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जितनी जल्दी हो सके, वह उतनी जल्दी गाजा में युद्ध को खत्म करना चाहते हैं. गाजा सिटी को कैप्चर करना सभी 50 इजरायली बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है.  इस दौरान नेतन्याहू ने कहा कि उनका लक्ष्य गाजापट्टी से हमास को पूरी तरह खत्म करना है. उनका कहना है कि हमास का पूरी तरह से खात्मा किए बिना गाजा में स्थायी शांति संभव नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि गाजा पर इजरायल का नियंत्रण स्थायी कब्जे के लिए नहीं है, बल्कि हमास के सैन्य ढांचे को नष्ट करने और क्षेत्र को सैन्यीकरण से मुक्त कराने के लिए है.  नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल का इरादा गाजा पर शासन करने या उसे अपने देश में मिलाने का नहीं है. इसके बजाय गाजा में एक नागरिक प्रशासन स्थापित किया जाएगा जो ना तो इजरायल के लिए खतरा और क्षेत्र में शांति बनाए रखे. नेतन्याहू ने कहा कि गाजा को किसी ऐसी अस्थायी सरकार को सौंपा जाएगा. जो ना तो हमास हो और न ही इजरायल के लिए खतरा पैदा करने वाला कोई संगठन हो. उन्होंने गाजा में बंधकों की रिहाई को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि हमास के साथ युद्ध और बंधकों की रिहाई के लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं. हालांकि, बंधकों के परिवारों और कुछ आलोचकों का कहना है कि गाजा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की उनकी योजना बंधकों की जान को खतरे में डाल सकती है. इससे पहले इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने नेतन्याहू की योजना को मंजूरी दी, जिसमें गाजा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण स्थापित करना शामिल है. इसका उद्देश्य हमास के बचे हुए ठिकानों को खत्म करना और क्षेत्र में इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. गाजा युद्ध खत्म करने के 5 तरीके – हमास अपने हथियार डाल दे – सभी इजरायली बंधकों को रिहा किया जाए – गाजा का विसैन्यीकरण हो – गाजा में इजरायल का सैन्य प्रभुत्व – गाजा में ऐसी व्यवस्था तैयार करना, जो ना तो हमास के नियंत्रण में हो और ना हो फिलीस्तीनी प्राधिकरण के इजरायली पीएम नेतन्याहू ने बताया कि गाजापट्टी में हमास के अभी भी दो गढ़ बचे हुए हैं, जो गाजा सिटी और सेंट्रल कैंप्स ऑफ मोआसी हैं. नेतन्याहू ने कहा कि हमास को पूरी तरह खत्म करना इजरायल की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इसके बिना कोई समाधान टिकाऊ नहीं होगा. गाजा में भुखमरी और मानवीय संकट के सवालों पर नेतन्याहू ने इन आरोपों को खारिज करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मीडिया में भूख से बिलखते बच्चों की जो तस्वीरें गाजा की बताकर शेयर की जा रही है. दरअसल वो प्रोपेगैंडा है. ये तस्वीरें गाजा की नहीं हैं. उन्होंने बकायदा प्रेजेंटेशन के साथ इंटरनेशनल मीडिया में छप रही इन बच्चों की तस्वीरों का ब्योरा दिया और दावा किया कि इन्हें गाजा का बताकर इजरायल को बदनाम किया जा रहा है.  बता दें कि नेतन्याहू ने यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि इजरायल एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है और उनकी कार्रवाइयां आतंकवाद के खिलाफ हैं.जर्मनी, फ्रांस, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने गाजा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की योजना की आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की है.