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NIA की जांच में बड़ा खुलासा: रांची में पल रहे ISIS के संभावित सदस्य

रांची  भारत में कट्टरपंथ के जरिए आईएसआईएस आतंकी संगठन की विचाराधार फैलाने से जुड़े केस में एनआईए को महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। रांची एनआईए ने आईएसआईएस मॉडयूल से जुड़े केस की जांच में पाया है कि मध्यप्रदेश का रतलाम निवासी राहुल सेन उर्फ उमर बहादुर ने धर्म परिवर्तन के बाद सनातन समेत कई नामों से भी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाई थी। इसका एडमिन वह खुद था। इस प्रोफाइल्स पर आईएसआईएस का प्रोपगेंडा वीडियो डालकर भ्रम फैलाता था। ISIS के वीडियो से युवाओं को बनाना था कट्टरपंथी एनआईए को मिले तथ्यों के अनुसार, राहुल उर्फ उमर आईएसआईएस के वीडियो को एडिट कर अपलोड करता था। उसका उद्देश्य इन वीडियो के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना था। एनआईए को राहुल के मोबाइल फोन से कई चैट मिले हैं। जिसमें वह युवाओं को आईएसआईएस से जुड़ने की सलाह दे रहा है। एनआईए ने पाया है कि राहुल ने महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, यूपी, पंजाब और बिहार में नेटवर्क बनाए थे। 14 सितंबर 2023 से उमर राहुल उर्फ उमर जेल में है। सिरिया के अबू उमर से जुड़ा था उमर उर्फ राहुल एनआईए ने जांच में पाया है कि राहुल सेन उर्फ उमर सिरिया के आईएस आतंकी अबू उमर से जुड़ा हुआ था। दोनों इंस्टाग्राम में एक-दूसरे से मुसाफिर नाम की आईडी से जुड़े थे। पूछताछ में उमर ने खुलासा किया है कि उसकी इच्छा सिरिया जाकर आईएस से जुड़ने की थी। इससे पूर्व राहुल सेन के सहयोगी फैजान अंसारी के पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में होने की पुष्टि एनआईए की जांच में हुई थी। राहुल ने सनातनी, मुसाफिर, राहुल ओ, राहुल सेन नाम से इंस्टाग्राम, जबकि उमर बहादुर, खालिद, दाईसी, ओसाम बिन लादेन, बकिया, दवाला जैसे नामों से टेलीग्राम चैनल बनाए थे। सनातनी आरएस नाम के एक चैनल पर उसने हथियार व मैगजीन बेल्ट के साथ तस्वीर भी लगाई थी। जन्नत, जिहाद और पैसा- कट्टरपंथियों की कहानी राहुल सेन उर्फ उमर लोहरदगा निवासी फैजान अंसारी से जुड़े नेटवर्क में अहम कड़ी था। जिन युवाओं को कट्टरपंथी संगठन से जोड़ने की कोशिश हुई थी, उसमें से 38 की गवाही एनआईए ने ली है। एनआईए ने जांच में पाया है कि आईएसआईएस संगठन सीधी लड़ाई के बजाय प्रोपगेंडा के प्रसार में जुटा है। इसके लिए ऑडियो, वीडियो, पीडीएफ माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तल्हा जरनैल नाम के डिजिटल मार्केटिंग कर्मी ने एनआईए को बताया है कि फैजान अंसारी ने उसे आईआईएस से जुड़ने को कहा था, इसके लिए उसे जन्नत मिलने की बात कही थी। फैजान ने तल्हा को राहुल सेन के द्वारा धर्मांतरण करने और जेहाद में शामिल होने का उदाहरण भी दिया था। बम बनाकर पैसे कमाने की बात भी फैजान ने कही थी।

NIA ने दायर किया आरोपपत्र, पहलगाम आतंकी हमले की परत-दर-परत कहानी आई सामने

जम्मू-कश्मीर  पहलगाम हमले के लगभग 8 महीने बाद जम्मू की विशेष अदालत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। एनआईए की जांच में पाया गया कि इस हमले में सीधे तौर पर शामिल तीन आतंकवादी सेना के ऑपरेशन महादेव में मारे गए थे। इन आतंकवादियों के नाम सुलेमान शाह (उर्फ फैजल जट्ट या हाशिम मूसा), हमजा (उर्फ हमजा अफगानी) और जिब्रान (उर्फ जिब्रान भाई) थे। इसके अलावा, हमले से एक दिन पहले आतंकवादियों को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, पनाह और भोजन उपलब्ध कराने वाले बशीर अहमद जोठर, परवेज अहमद जोठर और मोहम्मद यूसुफ कटारी के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं। चार्जशीट में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके प्रॉक्सी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) का भी नाम लिया गया है। एनआईए की जांच में पता चला कि बशीर और परवेज स्थानीय निवासी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों ने आतंकियों को 21 अप्रैल की रात हिल पार्क इलाके के एक ढोक (झोपड़ी) में ठहराया था। इन दोनों भाइयों को हमले के लगभग दो महीने बाद 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, जोठर भाइयों के फोन से कुछ पाकिस्तानी नंबर मिले थे। एनआईए के अनुसार, इन व्यक्तियों पर उन तीन आतंकवादियों को शरण देने का आरोप है जिन्हें जुलाई में भारतीय सेना ने मार गिराया था। गिरफ्तार किए गए दो व्यक्तियों (परवेज अहमद जोठर और बशीर अहमद जोठर) ने इन तीन हमलावरों की पहचान पाकिस्तान के नागरिकों के रूप में की थी जो प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। गौरतलब है कि पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था। इस अभियान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालयों तथा प्रशिक्षण केंद्रों सहित नौ स्थानों को निशाना बनाया गया था, जहां से भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाई जाती थी।

NIA की बड़ी कार्रवाई: दिल्ली ब्लास्ट के चार आरोपी कोर्ट में पेश, 12 दिन की जेल हिरासत

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार में हुए ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को चार आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। आरोपियों में डॉक्टर मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद और आदिल अहमद शामिल हैं। इन सभी चारों आरोपियों को पिछली कस्टडी पूरी होने के बाद अदालत में पेश किया गया। अदालत ने इन सभी चार आरोपियों को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। एनआईए ने कोर्ट को बताया कि आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर नबी, आदिल अहमद, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान और इरफान अहमद मिलकर एक बड़ी साजिश रच रहे थे। एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल का उद्देश्य राजधानी में बड़े स्तर पर अशांति फैलाना और संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाना था। जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. उमर नबी ने ही कार में विस्फोट किया था। चारों मुख्य आरोपियों को एनआईए की हिरासत समाप्त होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनके खिलाफ जुटाए गए प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की गई। अदालत ने गंभीरता को देखते हुए सभी को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस मामले के पांचवें आरोपी बिलाल नासिर को भी अदालत लाया गया, लेकिन उसे पेश करने का उद्देश्य अलग था। एनआईए ने उससे वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी है, ताकि कथित साजिश से जुड़े इंटरसेप्टेड कॉल्स और डिजिटल सबूतों का मिलान किया जा सके। जांच एजेंसी की मानें तो यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इससे जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। बता दें कि दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए आतंकी विस्फोट से पूरा देश सहम गया था। शाम करीब 6:52 बजे हाई ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी सफेद हुंडई आई20 कार में जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना भयानक था कि कई गाड़ियां जलकर राख हो गईं, पास की दुकानों के शीशे बिखर गए। इस विस्फोट में 11 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। इस पूरे मामले की जांच एनआईए कर रही है, जिसमें सुसाइड बॉम्बिंग का भी खुलासा हुआ। मुख्य आरोपी डॉ. उमर (अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा), पुलवामा का रहने वाला था, जो आईएसआईएस से प्रेरित बताया जा रहा है।

NIA ने डॉ. शाहीन व परवेज के घर मारी छापेमारी, भाई-पिता के अलावा घर से बरामद हुई ये चीजें

लखनऊ  दिल्ली कार ब्लास्ट मामले में एनआईए की टीम ने लखनऊ में बड़ी कार्रवाई की है. आतंकवादी महिला डॉक्टर शाहीन और उसके भाई परवेज के घर टीम ने तलाशी अभियान चलाया. कार्रवाई के दौरान शाहीन के पिता और भाई सुएब से पूछताछ की गई. कैसरबाग के खंडारी बाजार और लालबाग, मारियांव इलाके में स्थित उनके घरों में सर्च ऑपरेशन किया गया और तमाम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और मोबाइल कब्जे में लिए गए. लखनऊ के मड़ियांव में छानबीन सूत्रों के अनुसार, एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीम सुबह करीब सात बजे मड़ियांव के मुत्तकीपुर इलाके में डॉ. परवेज के घर पहुंची। सुरक्षा घेरा बनाकर घर के भीतर टीम ने कई घंटे तक तलाशी ली। इस दौरान स्थानीय पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। छापेमारी के दौरान डॉक्टर परवेज घर पर मौजूद नहीं थे। टीम ने घर के अन्य सदस्यों से पूछताछ की और कई अहम दस्तावेज़ व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कब्जे में लिए। एटीएस को घर के बाहर खड़ी सफेद रंग की आल्टो कार और अंदर से स्प्लेंडर बाइक बरामद मिली। कार के शीशे पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, गुड़म्बा का गेट पास चिपका मिला। घर से कुछ कंप्यूटर उपकरण, मोबाइल फोन और लैपटॉप भी जब्त किए गए हैं। पड़ोसियों ने बताया, अकेला रहता था टीम ने आसपास के लोगों से भी पूछताछ की। पड़ोसियों ने बताया कि डॉ. परवेज ज्यादा मेलजोल नहीं रखते थे और घर पर बहुत कम ही दिखते थे। एटीएस ने आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले, लेकिन किसी संदिग्ध की फुटेज नहीं मिली। स्थानीय लोगों के मुताबिक, 50 वर्षीय डॉ. परवेज खुद को इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से जुड़ा बताते थे। हालांकि, डॉ. परवेज वहां प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे या किसी अन्य भूमिका में, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। एजेंसियां अब यूनिवर्सिटी प्रशासन से भी संपर्क कर उनके रिकॉर्ड और संभावित गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं। मिला आतंकी मॉड्यूल का लिंक यह पूरा मामला फरीदाबाद में पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा बताया जा रहा है। दरअसल, 30 अक्टूबर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद से एमबीबीएस छात्र डॉ. मुजम्मिल अहमद को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। उसके किराए के घर से भारी मात्रा में विस्फोटक, एके-47 राइफल और कई मैगजीन बरामद हुई थीं। पूछताछ में मुजम्मिल ने अपनी गर्लफ्रेंड डॉ. शाहीन शाहिद का नाम बताया, जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया। शाहीन की कार की डिक्की से हथियार मिले थे। जांच में सामने आया कि शाहीन का लखनऊ से पुराना संबंध है। उसके दादा-दादी लालबाग इलाके में रहते थे। इसी कड़ी में एजेंसियों को डॉक्टर परवेज का नाम मिला, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से संपर्क में थे। दिल्ली ब्लास्ट से हड़कंप सोमवार शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी आई-20 कार में हुए विस्फोट से राजधानी दहल गई। धमाके में नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि 19 से अधिक लोग घायल हुए। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी छह गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए और करीब 20 वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि कार दरियागंज की ओर जा रही थी, जब ट्रैफिक सिग्नल पर यह धमाका हुआ। मौके से बरामद रासायनिक अवशेषों में वही विस्फोटक सामग्री पाई गई, जो फरीदाबाद से बरामद आरडीएक्स से मेल खा रही है। सहारनपुर से भी जुड़ा तार इस आतंकी नेटवर्क का सिरा सहारनपुर के डॉ. आदिल से भी जुड़ा बताया जा रहा है, जिसे कुछ दिन पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। डॉ. आदिल की निशानदेही पर ही डॉ. मुजम्मिल को पकड़ा गया था। अब जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि क्या इन तीनों डॉक्टरों आदिल, मुजम्मिल और परवेज के बीच कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। डॉ. परवेज की तलाश जारी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि छापेमारी में बरामद दस्तावेजों की जांच चल रही है। इनमें कुछ बैंक लेन-देन और ऑनलाइन संचार से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले हैं। फिलहाल डॉ. परवेज फरार हैं और उनकी तलाश कई राज्यों में जारी है। डॉ. शाहीना को लेकर बड़े दावे डॉ. शाहीना को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि डॉ. शाहीन आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की हेड है। उसका लखनऊ के लालबाग इलाके में घर है। डॉ. शाहीन लोक सेवा आयोग से चयनित होकर कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनी थीं। इसके बाद वह वर्ष 2013 में ये बिना किसी को बताए कॉलेज से गायब हो गई। डॉ. शाहीन की शादी जफर हयात नाम के व्यक्ति से हुई थी। वर्ष 2015 में शाहीन ने तलाक ले लिया। वर्ष 2021 में संस्थान ने डॉ. शाहीना को बर्खास्त कर दिया। अभी वह फरीदाबाद के अलफलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई थी।

साजिश का पर्दाफाश: NIA ने जम्मू-कश्मीर समेत पांच राज्यों में छापेमारी की

श्रीनगर  एनआईए ने आतंकी साजिश मामले में जम्मू-कश्मीर और पांच राज्यों में ताबड़तोड़ ऐक्शन शुरू किया है। सोमवार को कम से कम 22 ठिकानों पर छापेमारी हुई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक आतंकी साजिश से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में बारामूला, कुलगाम, अनंतनाग और पुलवामा जिलों में तलाशी जारी है। जानकारी के मुताबिक मामला आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। एनआईए की टीम सोमवार सुबह ही बारामूला के जंगम गांव पहुंच गई। यहां रशीद लोन के घर पर छापेमारी की गई। इस मामले पर एनआईए ने अब तक कोई बयान जारी नहीं किया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले हैं। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के कुलगाम, अनंतनाग, पुलवामा और बारामुला में तलाशी जारी है। कई जगहों से मोबाइल फोन और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इससे पहले जून में एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में ही 32 ठिकानों पर छापेमारी की थी। बिहार में एनआईए को बड़ी सफलता बिहार में एनआईए को बड़ी सफलता मिली है। एनआईए की टीम ने खालिस्तानी आतंकी शरणजीत को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को छापेमारी के दौरान गोपालपुर से गिरप्तार किया गया। स्वर्ण मंदिर में ग्रेनेड अटैक मामले में शरणजीत कुमार उर्फ शनी आरोपी है। वह पंजाब के गुरदासपुर के बटाला का रहने वाला है।

आतंकी फंडिंग का पर्दाफाश! TRF ने मलेशिया से जुटाए लाखों रुपये, NIA जांच में खुलासा

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन, द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) के खिलाफ अपनी जांच में महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं। एनआईए ने श्रीनगर के एक व्यक्ति के मोबाइल फोन से 450 से अधिक कॉन्टैक्ट लिस्ट हासिल की है, जिससे टीआरएफ को धन मुहैया कराने वालों की पहचान करने में मदद मिली है। बता दें कि यह संगठन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद बाद इससे पीछे हट गया था। जांच के दौरान, एनआईए को मलेशिया के जरिए हवाला मार्ग के संभावित इस्तेमाल का पता चला है जिससे टीआरएफ को फंडिंग की जा रही थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच में मलेशिया निवासी सज्जाद अहमद मीर का नाम सामने आया है। एक अन्य संदिग्ध, यासिर हयात के फोन कॉल डिटेल से पता चला कि वह मीर के संपर्क में था और पैसों की व्यवस्था कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, हयात ने टीआरएफ के लिए धन जुटाने के लिए कई बार मलेशिया की यात्रा की। हयात ने मीर की मदद से टीआरएफ के लिए 9 लाख रुपये जुटाए, जो संगठन के एक अन्य ऑपरेटिव शफात वानी को दिए गए। वानी टीआरएफ का एक प्रमुख ऑपरेटिव है और संगठन की गतिविधियों को संचालित करता है। यह भी पता चला कि वानी ने मलेशिया में एक विश्वविद्यालय में सम्मेलन में भाग लेने के बहाने यात्रा की थी, हालांकि विश्वविद्यालय ने इस यात्रा को स्पॉन्सर नहीं किया था। एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि हयात न केवल मीर के संपर्क में था, बल्कि वह दो पाकिस्तानी नागरिकों के साथ भी संपर्क में था। उसका मुख्य काम विदेशी ऑपरेटिव्स से संपर्क बनाए रखना और आतंकी संगठन के लिए धन जुटाना था। 13 अगस्त को, एनआईए ने कहा था कि उसने विदेशी फंडिंग के एक निशान का पता लगाया है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। टीआरएफ को 2019 में लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी के रूप में बनाया गया था, ताकि इसे जम्मू-कश्मीर का स्थानीय संगठन दिखाया जा सके। इसका उद्देश्य हिजबुल मुजाहिदीन को रिप्लेस करना और स्थानीय आतंकी गतिविधियों को नई पहचान देना था। पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा को जवाबदेही से बचाने के लिए टीआरएफ को बनाया गया था, ताकि कश्मीर में कथित संघर्ष को स्थानीय दिखाया जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान चाहता था कि आतंकी हमले जारी रहें और साथ ही वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी से भी बच सके। भारत ने टीआरएफ को एक आतंकी संगठन घोषित किया है और पाकिस्तान पर इसका समर्थन करने का आरोप लगाया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद, अमेरिका ने टीआरएफ को एक विदेशी आतंकी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकी इकाई घोषित किया, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था। इस कदम ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को उजागर कर दिया। एनआईए की जांच अभी भी जारी है, और एजेंसी इस आतंकी संगठन के नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

NIA की बड़ी कार्रवाई, रामलिंगम हत्याकांड में PFI से संबंध रखने वाला आरोपी गिरफ्तार

तमिलनाडु राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2019 में हुए रामलिंगम हत्या कांड मामले में तमिलनाडु में नौ जगहों पर छापेमारी की है। डिंडीगुल और तेनकासी जिलों की इन जगहों पर एनआईए की छापेमारी का मकसद फरार अपराधियों का पता लगाना था। इसी सिलसिले में एनआईए ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया आतंकी संगठन के एक सदस्य को भी गिरफ्तार किया है। बुधवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में सबसे पहले एसडीपीआई पदाधिकारी शेख अब्दुल्ला के बेगमपुर स्थित आवास, एक और सदस्य यूसुफ के ओड्डंचत्रम स्थित घर और अमर के बटलागुंडु के ठिकाने पर छापे मारे गए इसी तरह तेनकासी में भी छापेमारी की गई। एजेंसी ने कोडईकनाल स्थित अंबुर बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह को 2021 में फरार अपराधियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया है। डिंडीगुल और तेनकासी में हुई छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह ने तीन आरोपियों को पनाह दी थी। इनमें से दो आरोपी अब्दुल मजीद और शाहुल हमीद को एजेंसी ने जनवरी 2025 में ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि एक अन्य अपराधी मोहम्मद अली जिन्ना अभी भी फरार है। एजेंसी ने जिन्ना और दो अन्य फरार पीओ बुरहानुद्दीन और नफील हसन के बारे में जानकारी देने पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। ये सभी तंजावुर जिले के हैं और पूर्व में पीएफआई के पदाधिकारी थे। आपको बता दें कुंभकोणम निवासी पीएमके के पूर्व पदाधिकारी रामलिंगम (48) की हत्या 2019 में तंजावुर इलाके में कर दी गई थी। कथित तौर रामलिंगम ने मुस्लिम संगठनों के धार्मिक प्रचार का विरोध किया था। इसी के चलते एक गिरोह ने इनकी हत्या कर दी थी। अगस्त 2019 में एनआईए ने यह मामला तमिलनाडु पुलिस से अपने पास ले लिया। एजेंसी ने 2019 में चेन्नई की पूनमल्ली स्थित अपनी विशेष अदालत में कुल 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इनमें से कुल 6 फरार बताए गए थे। इस मामले में अभी तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।