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धान किसानों के लिए बड़ी खबर: 15 नवंबर से खरीदी अभियान की शुरुआत

रायपुर छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन सत्र 2024-25 के लिए 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो जाएगी. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की है. उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर सभी पंजीकृत किसानों का धान खरीदेंगे. प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा. राज्य सरकार ने किसानों को समय पर भुगतान और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. बता दें कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य कर दिया है. एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर संपर्क किया जा सकता है. अब तक 21.47 लाख किसानों ने करा लिया है पंजीयन गत वर्ष राज्य के 25.49 लाख किसानों ने धान विक्रय किया था. वर्तमान वर्ष में अब तक 21.47 लाख किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया है. शेष किसान अपने निकटतम सहकारी समिति या निर्धारित केंद्र में जाकर 31 अक्टूबर 2025 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं. इस संबंध में सभी समितियों और जिला कलेक्टरों को पूर्व में आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि एग्रीस्टैक पोर्टल डिजिटल क्रांति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, सटीक और किसान हितैषी बनाएगा. पिछले सीजन में रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की हुई थी खरीदी बता दें कि पिछले खरीफ सीजन में छत्तीसगढ़ में राज्य शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की थी. इसमें मोटा धान 81.98 लाख मीट्रिक टन, पतला धान 10.75 लाख मीट्रिक टन और सरना धान 56.52 लाख मीट्रिक टन शामिल थे. धान की यह खरीदी राज्य बनने के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था. पिछले बार धान खरीदी का सिलसिला 14 नवंबर 2024 से शुरू होकर 31 जनवरी 2025 तक निरंतर जारी रहा, जिसके अंतर्गत राज्य के पंजीकृत 25 लाख 49 हजार 592 किसानों ने धान विक्रय किया था. धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 31 हजार 89 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा गया था. महासमुंद जिला सर्वाधिक 11.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर राज्य में पहले नंबर पर थे. वहीं बेमेतरा जिला 9.38 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर दूसरा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिला 8.56 लाख मीट्रिक टन धान खरीदकर तीसरा स्थान हासिल किया था.

हरियाणा में धान की खरीद पर संकट, मांगें मानने के बाद भी कई मंडियां रहीं सूनी

कैथल  राइस मिलर्स की सरकार ने अधिकतर मांगें मान ली हैं। इसके बाद मिलर्स धान की मिलिंग के लिए राजी हो गए। मिलर्स ने पोर्टल पर पंजीकरण कराने के साथ धान की खरीद भी शुरू कर दी है। कैथल मंडी में साढ़े तीन हजार क्विंटल के करीब धान की खरीद हो चुकी है। कैथल में 108 के करीब राइस मिलर्स ने पंजीकरण करवाया है। दो तीन दिनों में धान की खरीद में तेजी आएगी। फोर्टिफाइड चावल देना होगा राइस मिलर्स को 100 किलोग्राम में एक किलो फोर्टिफाइड चावल मिलाकर देना होगा, यानि 100 दानों में एक दाना मिलाना होगा, इसके लिए टेंडर होंगे, अच्छी कंपनियों को टेंडर अलॉट किए जाएंगे। बैच नंबर नंबर सहित सभी नियम पूरे करने होंगे। देश के गरीब लोगों में इस चावल का वितरण होता है। जरूरी पोषक तत्व न मिलने से स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है। पीआर धान की खरीद शुरू राइस मिलर्स एवं डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि राइस मिलर्स ने पीआर धान की खरीद शुरू कर दी है। धान में नमी की मात्रा ज्यादा आ रही है, इसलिए धान को सुखाकर लाएं। मिलर्स की कुछ मांगें अधूरी रह गई थी, अब सरकार ने मान ली हैं। बैंक गारंटी पिछले साल वाली ही रहेगी, इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, पिछले साल 10 लाख रुपये थी, इस बार भी वही रहेगी। इसके अलावा चावल में जो 25 प्रतिशत टुकड़ा निकलता है, इसमें से दस प्रतिशत टुकड़े की चावल में खपत होगी। बचे 15 प्रतिशत टुकड़े की डिस्टलरी खरीद करेगी, यह सीधा राइस मिलर्स से डिस्टलरी में जाएगा। सरकारी खरीद शुरू होने के तीसरे दिन पीआर धान की खरीद में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। बुधवार तक 11 जिलों में धान पहुंचा, इनमें से छह जिलों में खरीद हुई। सबसे अधिक कुरुक्षेत्र और सबसे कम पानीपत में खरीद हुई। मंडियां धान से अटने लगी हैं। खरीद ना होने का बड़ा कारण धान में 17 प्रतिशत से अधिक नमी है। दूसरा कारण मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण का सत्यापन नहीं होना भी है। धान नहीं बिकने के कारण किसान कई दिनों से मंडियों में इंतजार कर रहे हैं। 11 जिलों में 91490 मीट्रिक टन पीआर धान की आवक हुई। इसमें से 25811 मीट्रिक टन की ही खरीद हो सकी। 65689 मीट्रक धान अभी भी मंडियों फैला है। अंबाला में तो यह सड़कों तक आ गया है। जानिये, जिलों की स्थिति अंबाला जिला की मंडियों में अब तक कुल 4100 गेट पास काटे गए हैं। जिनमें अब तक 22 हजार 640 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इसमें से चार हजार 288 मीट्रिक टन धान की खरीद कर ली गई है। नारायणगढ की मंडी में सबसे अधिक और नन्यौला की मंडी में अब तक सबसे कम धान पहुंचा है। l यमुनानगर में 12 हजार मीट्रिक टन से अधिक पीआर धान मंडियों में पड़ा है। यहां अब 3186 गेटपास कटे हैं। अभी तक 3472 टन की खरीद हो चुकी है। कैथल में 3489 मीट्रिक टन की आवक हुई है। इसमें से 138 टन धान बिका है। इन जिलों में आवक बढ़ी, पर नहीं हुई खरीद प्रदेशभर के पांच जिलों जींद, हिसार, करनाल, फतेहाबाद और सोनीपत में धान की आवक बढ़ गई है, लेकिन यहां पर खरीद नहीं हुई। जींद में 347, हिसार में 65, करनाल में 3400, फतेहाबाद में 139 और सोनीपत में 69 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इन पांचों जिलों में से कहीं पर धान की खरीद नहीं हुई, जिससे वहां के किसान परेशान हैं। पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने से खरीद धीमी रोहेड़ि़या के किसान बिंटू जागलान ने बताया कि पिछले दो दिनों से पीआर धान लेकर आया हूं। नमी भी कम है, लेकिन एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही। 2150 रुपये प्रति क्विंटल रेट दे रहे हैं। पीआर का एमएसपी 2389 रुपये है, मिलर्स नमी बताकर कम रेट लगा रहे हैं। सरकार दावा कर रही है, एमएसपी पर खरीद हो रही है, लेकिन मंडियों में खरीद एमएसपी से कम हो रही है। पीआर धान उत्पादक किसानों ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण किया था। अब किसान मंडियों में धान लेकर पहुंच रहे हैं। यहां पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने के कारण गेट पास नहीं कट रहे हैं। किसान अब चक्कर काट रहे हैं। मुख्यालय की ओर से सत्यापन नहीं होने से मुसीबतें बढ़ गई हैं। कहां कितने राइस मिलर्स ने कराया रजिस्ट्रेशन जिला पंजीकरण कैथल 108 सिरसा 2 अंबाला 45 करनाल 30 फतेहाबाद 140 इन जिलों में नहीं कराया कोई भी पंजीकरण यमुनानगर में अभी तक किसी भी मिलर ने पंजीकरण नहीं कराया, जबकि पिछली बार 190 ने कराया था। जींद में भी अभी तक कोई पंजीकरण नहीं हुआ है, जबकि पिछले वर्ष 32 ने मिलिंग की थी। कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक खरीद हो चुकी है, लेकिन किसी भी राइस मिलर ने पंजीकरण नहीं कराया है। पानीपत में भी किसी मिलर ने पंजीकरण नहीं कराया। जिलों में आवक और खरीद की स्थिति मंडी आवक खरीद अंबाला 24,186 8,476 कैथल 3,489 138 कुरुक्षेत्र 34,917 11,294 पंचकूला 4,870 2,424 पानीपत 1456 यमुनानगर15,326 3,472