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सेप्टेंबर में मणिपुर जा सकते हैं पीएम मोदी, पहले दौरे में स्थिति का जायजा

भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर में हिंसाग्रस्त मणिपुर का दौरा कर सकते हैं। यह मई 2023 से जारी कुकी-मैतेई हिंसा के बाद उनका पहला दौरा होगा। सूत्रों के अनुसार, 13 सितंबर को मिजोरम दौरे के साथ वे मणिपुर भी जा सकते हैं। विपक्ष लंबे समय से हिंसा को नियंत्रित करने में नाकामी और दौरा न करने को लेकर सरकार की आलोचना करता रहा है। मणिपुर में चार घंटे का संभावित दौरा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री 12 या 13 सितंबर को मणिपुर में लगभग चार घंटे बिता सकते हैं। इस दौरान वे मैतेई और कुकी बहुल इलाकों का दौरा करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मिजोरम यात्रा तय है, जबकि मणिपुर दौरे पर अभी चर्चा चल रही है। इस यात्रा से हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विश्वास बहाली की उम्मीद है।   मिजोरम में रेल नेटवर्क का ऐतिहासिक उद्घाटन प्रधानमंत्री मिजोरम में 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन करेंगे। यह रेल लाइन बांग्लादेश-म्यांमार सीमा के करीब है और मिजोरम को आजादी के बाद पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। यह लाइन आइजोल को असम के सिलचर और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ेगी। इसमें 48 सुरंगें और 150 से ज्यादा पुल हैं, जिनमें 104 मीटर ऊंचा एक पुल कुतुबमीनार से भी 42 मीटर ऊंचा है। मणिपुर में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य मणिपुर में हाल के महीनों में स्थिति शांत हुई है। भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच स्कूल और बाजार खुल रहे हैं, और विस्थापित परिवार घर लौट रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि हाल ही में एक पत्रकार पर हमले की घटना सामने आई। मई 2023 से शुरू हुई हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों की मौत और 1,500 से अधिक घायल हुए हैं। राष्ट्रपति शासन लागू हिंसा को नियंत्रित न कर पाने के दबाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 13 फरवरी 2025 से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है। प्रधानमंत्री का संभावित दौरा राज्य में शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन मीटिंग के लिए चीन गए पीएम मोदी ने मुइज्जू से भी की मुलाकात

तियानजिन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन (SCO) के लिए चीन के तियानजिन में हैं। यहां उनकी रविवार को मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। वहीं, शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से भी मिले। भारत और मालदीव के बीच कुछ महीनों से संबंधों में सुधार आया है। पीएम मोदी ने मुइज्जू से मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की है। इसमें मोदी और मुइज्जू हाथ मिलाते हुए देखे जा रहे हैं। मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा, ''तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू से बातचीत की। मालदीव के साथ भारत का विकासात्मक सहयोग हमारे लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है।'' मुइज्जू के मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत और मालदीव के बीच संबंधों में दरार आ गई थी। मुइज्जू ने इंडिया आउट का नारा देते हुए चुनाव जीता था और राष्ट्रपति बनने के बाद ही भारतीय सेना को अपने देश से बाहर कर दिया था। इसके बाद वह चीन के नजदीक जाने की कोशिश में लग गया था। मुइज्जू ने शी जिनपिंग से चीन जाकर मुलाकात भी की थी और 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद उनके मंत्रालय के मंत्रियों द्वारा दिए गए भारत विरोधी बयान से दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। हालांकि, भारतीय पर्यटकों के बॉयकॉट से आर्थिक नुकसान झेलने के बाद मुइज्जू को भारत की अहमियत समझ आने लगी। मोदी के तीसरी बार पीएम बनने के बाद वह भारत से संबंध ठीक करने में लग गया। पहले मुइज्जू पीएम मोदी के शपथग्रहण समारोह में भारत आए और फिर कुछ समय पहले ही पीएम मोदी ने भी मालदीव की यात्रा की। अब दोनों देशों के बीच संबंध फिर से पटरी पर लौट आए हैं।  

दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय घेरने पहुंची भाजपा, पीएम मोदी को अपशब्द कहने पर बवाल

नई दिल्ली  बिहार के दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वोटर अधिकार यात्रा के मंच से अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसे लेकर सियासी सरगर्मियां सुर्खियों में है। शनिवार को दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय के बाहर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए तत्काल माफी की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करती रही है, लेकिन इस बार हद पार हो गई है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस को अपने नेताओं की इस शर्मनाक हरकत के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। यह अपमान न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि देश की 140 करोड़ जनता का भी है।" भाजपा की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल अब देश विरोधी रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "ये लोग अपनी हताशा में अब देश की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।" दिल्ली के भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल पूरे देश का अपमान है। जब तक कांग्रेस माफी नहीं मांगती, हमारा विरोध जारी रहेगा।" वहीं, विधायक कैलाश गहलोत ने कहा कि लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि यह भाषा भारतीय संस्कृति और मूल्यों के खिलाफ है। भाजपा विधायक अनिल गोयल ने प्रदर्शन के दौरान कहा, "आज पूरा देश इस अपमान से आहत है। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर हमारा यह प्रदर्शन उसी आक्रोश का प्रतीक है।" इसी तरह विधायक सतीश उपाध्याय ने बिहार को मां सीता की धरती बताते हुए कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल भारतीय संस्कृति और भगवान राम के सम्मान के खिलाफ है। यह पूरे देश के लिए असहनीय है।" भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कांग्रेस के आधिकारिक मंच से बोले गए अपशब्दों को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और तेजस्वी यादव इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। सहरावत ने कहा, "यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि देश की अस्मिता पर हमला है।"  

ऐतिहासिक चीन यात्रा पर PM मोदी, SCO शिखर सम्मेलन में रखेंगे भारत का पक्ष

तियानजिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक यात्रा पर चीन पहुंच चुके हैं। वे 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद उनकी पहली चीन यात्रा है और इसे भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह दौरा 1 सितंबर तक चलेगा और इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। यात्रा का महत्व है बेहद खास प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन यात्रा पर पहुंचे हैं। 2018 में उन्होंने उनकी आखिरी बार चीन की यात्रा की थी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन, 2020 के गलवान घाटी में हुए सैन्य टकराव के बाद तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की नींव रखी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात भी होगी। SCO शिखर सम्मेलन का एजेंडा SCO की स्थापना 2001 में हुई थी और इसके 10 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। इस साल का शिखर सम्मेलन तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित हो रहा है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा SCO सम्मेलन माना जा रहा है। इसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देना है। भारत ने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के सचिव तन्मय लाल ने कहा कि SCO का उद्देश्य आतंकवाद, उग्रवाद, और अलगाववाद से लड़ना है, और भारत चाहता है कि सभी सदस्य देश इस मुद्दे पर एक साझा बयान जारी करें। अमेरिकी टैरिफ का असर यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल और हथियारों की खरीद के कारण 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर भी निशाना साधा है, जिनमें भारत और चीन दोनों शामिल हैं। इस पृष्ठभूमि में SCO समिट को वैश्विक मंच पर अमेरिकी नीतियों के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मेलन भारत, चीन, और रूस को एकजुट होकर वैश्विक दक्षिण के हितों को बढ़ावा देने का अवसर देगा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन पीएम मोदी का इस सम्मेलन में स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि यह समिट दोस्ती, एकता, और सहयोग की मिसाल बनेगा।  

जापानी पीएम के साथ ट्रेन राइड पर निकले PM मोदी, भारतीय ड्राइवरों से बातचीत

टोक्यो  जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम शिगेरु इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन का भी लुत्फ उठाया। साथ ही उन्होंने बुलेट ट्रेन ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेने वाले भारतीयों से भी मुलाकात की। जापानी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंदाई की यात्रा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ने ALFA-X ट्रेन को भी देखा और जानकारी ली। बता दें कि भारतीय ड्राइवर जेआर ईस्ट के साथ इस समय ट्रेनिंग कर रहे हैं। जेआर ईस्ट जापान की एक रेलवे कंपनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लैटफॉर्म पर ही उनसे मुलाकात की और फोटो भी खिंचवाईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को जापान के मियागी प्रांत के सेंडाई में स्थित एक सेमीकंडक्टर संयंत्र गए। इससे पहले प्रधानमंत्री ने जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर से मुलाकात की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत ‘राज्य-प्रांत सहयोग’ को मजबूत किए जाने का आह्वान किया। जापान के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘तोक्यो में आज सुबह जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर के साथ बातचीत की। राज्य-प्रांत सहयोग भारत-जापान मैत्री का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यही कारण है कि कल 15वें वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर अलग से एक पहल की गई।’ उन्होंने कहा, ‘व्यापार, नवोन्मेष, उद्यमिता आदि क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। ‘स्टार्टअप’, प्रौद्योगिकी और एआई जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र भी लाभकारी हो सकते हैं।’ विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों पर आधारित भारत-जापान संबंध निरंतर मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तोक्यो और नयी दिल्ली पर परंपरागत रूप से ध्यान केंद्रित करने से आगे बढ़कर राज्य-प्रांत संबंधों को नए सिरे से बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य-प्रांत साझेदारी पहल व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कौशल, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री ने जापान के विभिन्न प्रांतों के गवर्नर और भारतीय राज्य सरकारों से विनिर्माण, गतिशीलता, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, नवोन्मेष, ‘स्टार्ट-अप’ और लघु व्यवसायों में सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। पहलगाम हमले पर क्या बोले पीएम मोदी और जापानी प्रधानमंत्री इशिबा? भारत और जापान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है. दोनों देशों ने कहा कि हमले के जिम्मेदार आतंकियों, उनके आयोजकों और फाइनेंसर्स को तुरंत न्याय के कटघरे में लाया जाए. यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दिया गया. 'सफल दौरे से मिले शानदार नतीजे', PM मोदी की यात्रा के दौरान भारत-जापान के बीच ये समझौते हुए पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच कई समझौते हुए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी जिसे प्रधानमंत्री ने रीपोस्ट किया. प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के गवर्नरों से मुलाकात की अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के अलग-अलग प्रीफेक्चरों (राज्य-स्तर की इकाइयों) के गवर्नरों से मुलाकात की. इस बातचीत में 16 गवर्नरों ने हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते बहुत पुराने सभ्यता से जुड़े हुए हैं और आज भी लगातार मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब जरूरत है कि दिल्ली और टोक्यो तक सीमित रिश्तों को आगे बढ़ाकर भारत के राज्यों और जापान के प्रीफेक्चरों के बीच सीधा सहयोग बढ़ाया जाए. इसके लिए 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में 'स्टेट-प्रीफेक्चर पार्टनरशिप' की शुरुआत की गई थी, जो ट्रेड, तकनीक, पर्यटन, सुरक्षा, स्किल और कल्चर जैसे क्षेत्रों में रिश्तों को और मजबूत करेगी. मोदी ने भारतीय राज्यों और जापानी गवर्नरों से कहा कि वे मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्टअप्स, छोटे उद्योग और नए इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी करें. उन्होंने कहा कि जैसे जापान के हर प्रीफेक्चर की अपनी खास ताकत है, वैसे ही भारत के हर राज्य की अपनी अलग क्षमता है. अगर दोनों मिलकर काम करें तो बड़ा फायदा होगा. मोदी ने खासतौर पर युवाओं और कौशल विकास के आदान-प्रदान पर जोर दिया और कहा कि जापानी टेक्नोलॉजी और भारतीय टैलेंट साथ आएंगे तो नए अवसर बनेंगे. गवर्नरों ने भी माना कि अगर राज्यों और प्रीफेक्चरों के बीच सीधे रिश्ते बढ़ते हैं तो भारत-जापान के कारोबारी, शैक्षिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे.

संयुक्त अंतरिक्ष मिशन से स्टार्टअप्स के लिए बढ़ेंगे सहयोग के अवसर, पीएम मोदी का बयान

टोक्यो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जैक्सा) के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन दोनों देशों के उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को नई गति देंगे। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को टोक्यो में कही।  जापान के अखबार द योमिउरी शिम्बुन को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि ये संयुक्त मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के छायायुक्त क्षेत्रों की गहन समझ विकसित करने में भी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारी सरकार-से-सरकार साझेदारी इसरो और जैक्सा के बीच सहयोग की ऐसी संस्कृति बना रही है, जिससे दोनों देशों के उद्योग और स्टार्टअप्स भी जुड़ रहे हैं। इससे एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जहां प्रयोगशालाओं से लॉन्चपैड तक और शोध से वास्तविक जीवन अनुप्रयोगों तक नवाचार का प्रवाह दोनों ओर से हो रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत और जापान चंद्रयान श्रृंखला के अगले मिशन यानी लूपेक्स (लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन) के लिए हाथ मिला रहे हैं। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी छाया वाले क्षेत्रों की हमारी समझ को और गहरा करेगा।” चंद्रयान-5 चंद्रयान श्रृंखला का पांचवां मिशन है, जिसे लूपेक्स भी कहा जाता है। इसरो और जैक्सा का यह संयुक्त मिशन वर्ष 2027-28 में जापान के एच3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में जैक्सा का रोवर और इसरो का लैंडर शामिल होगा, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में जल-बर्फ की खोज और विश्लेषण करेगा। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि दोनों देशों की वैज्ञानिक टीमें मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान की नई सीमाओं को छुएंगी। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी न केवल अंतरिक्ष में क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि धरती पर जीवन को भी बेहतर बनाएगी।” भारत की अंतरिक्ष यात्रा को प्रधानमंत्री ने “हमारे वैज्ञानिकों के संकल्प, मेहनत और नवाचार की कहानी” बताया और कहा कि अंतरिक्ष भारत के लिए अगला आयाम है। उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता से लेकर हमारी अंतरग्रहीय मिशनों में प्रगति तक, भारत ने लगातार साबित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं, बल्कि अगली सीमा है।” पीएम मोदी ने यह भी बताया कि कैसे अंतरिक्ष विज्ञान का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन में कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन, संचार और अन्य क्षेत्रों में दिखता है। प्रधानमंत्री मोदी 29-30 अगस्त तक जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के आमंत्रण पर हो रही है। यह उनका जापान का आठवां दौरा है। इससे पहले वे मई 2023 में जापान आए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के टोक्यो से भारत में बड़े पैमाने पर बुलेट ट्रेन के विस्तार का किया ऐलान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के टोक्यो से भारत में बड़े पैमाने पर बुलेट ट्रेन के विस्तार का ऐलान किया है। उन्होंने ने शुक्रवार को कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल भारत और जापान के बीच एक प्रमुख परियोजना है और हमारा लक्ष्य कुछ वर्षों में यात्री सेवाएं शुरू करना है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना तो चल ही रही है। हमने एक बड़ी महत्वकांक्षा का अनावरण किया है। हमारे देश में हाई-स्पीड रेल का 7 हजार किलोमीटर लंबा नेटवर्क बनाना। मेक इन इंडिया के तहत बनेगा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क जापान की अपनी यात्रा के दौरान योमिउरी शिम्बुन को दिए गए साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि इसका अधिकांश हिस्सा मेक इन इंडिया के माध्यम से होगा, ताकि यह कार्यक्रम टिकाऊ और व्यवहार्य हो। उन्होंने कहा, "मैं इस प्रयास में जापानी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी का स्वागत करता हूं।"   हाई-स्पीड रेल नेटवर्क इन क्षेत्रों पर भी नजर प्रधानमंत्री ने कहा, "मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत और जापान के बीच एक प्रमुख परियोजना है। हमारा लक्ष्य कुछ वर्षों में यात्री सेवाएं शुरू करना है।" पीएम मोदी ने कहा कि भारत-जापान सहयोग को हाई-स्पीड रेल से आगे बढ़ाकर गतिशीलता के अन्य क्षेत्रों को भी कवर करने की क्षमता है, जिसमें बंदरगाह, विमानन, जहाज निर्माण, सड़क परिवहन, रेलवे और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां भारत ने महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है।  

मोदी बोले- अस्थिर हालात में भारत और चीन का साथ आना बड़ी बात

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बहुप्रतीक्षित चीन दौरे से पहले भारत और चीन के संबंधों पर बातचीत की है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को जापानी अखबार द योमिउरी शिंबुन को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि उनकी यह यात्रा चीन के साथ स्थिर द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा है कि इंडो पैसिफिक रीजन में शांति बनाए रखने और वैश्विक अस्थिरता के बीच चीन के साथ स्थिर और मजबूत संबंध बेहद जरूरी हैं। प्रधानमंत्री ने चीन की यात्रा और चीन के साथ संबंधों पर पूछे गए एक लिखित सवाल के जवाब में कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर मैं शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां से तियानजिन जाऊंगा। पिछले साल कजान में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी मुलाकात के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति हुई है।" पीएम मोदी ने आगे कहा कि विश्व के दो सबसे बड़े देशों के बीच इस साझेदारी से पूरे क्षेत्र की समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, “दुनिया के दो सबसे बड़े राष्ट्रों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिर और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “वैश्विक अर्थव्यवस्था में वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए, दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। भारत आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और चुनौतियों का समाधान करने के लिए बातचीत को बढ़ाने के लिए तैयार है।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दिल्ली से जापान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। जापान दौरे के बाद प्रधानमंत्री तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के लिए चीन जाएंगे। इस दौरान पीएम मोदी चीनी प्रधानमंत्री शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे।  

‘पधारो म्हारे देश’ की धुन पर जापान में पीएम मोदी का अभिनंदन, देखें वीडियो

टोक्यो  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को तोक्यो पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। राजस्थानी वेशभूषा में मौजूद जापान की महिलाओं ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। उन्होंने 'पधारो मारे देश' बोलकर वेलकम करने के बाद राजस्थानी गीत भी सुनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह जापान यात्रा अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच बेहद अहम मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान के तोक्यो पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री भारत-जापान साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ शाम को व्यापक चर्चा करेंगे।’अपने प्रस्थान वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी जापान यात्रा दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का एक अवसर प्रदान करेगी। शिगेरू इशिबा से मिलेंगे PM मोदी पीएम मोदी 29-30 अगस्त को जापान यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। पीएम मोदी की जापान और चीन की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा हो गया है। चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा, "मुझे विश्वास है कि जापान और चीन की मेरी यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगी तथा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास को आगे बढ़ाने में सार्थक सहयोग के निर्माण में योगदान देंगी।" पीएम मोदी ने जापान यात्रा पर कहा, ‘‘हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।’’ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा भारत', बोले पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो में इंडिया-जापान इकोनॉमिक फोरम में कहा, 'आज भारत में राजनीतिक स्थिरता है, आर्थिक स्थिरता है, नीतियों में पारदर्शिता है और फैसलों में पूर्वानुमान की क्षमता है. आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है.' 'भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती ही नहीं, बल्कि कई गुना हो जाती है', बोले पीएम मोदी टोक्यो में पीएम मोदी ने कहा कि भारत निवेश के लिए सबसे प्रॉमिसिंग डेस्टिनेशन है. 80 प्रतिशत कंपनियां भारत में विस्तार करना चाहती हैं और 75 प्रतिशत पहले से मुनाफे में हैं. इसका मतलब है कि भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती ही नहीं है बल्कि कई गुना हो जाती है. 'हर क्षेत्र में भारत-जापान की पार्टनरशिप भरोसे का प्रतीक', इकोनॉमिक फोरम में बोले पीएम मोदी टोक्यो में भारत-जापान इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम पार्टनर रहा है. मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक, सेमीकंडक्टर से स्टार्टअप तक हमारी पार्टनरशिप आपसी विश्वास का प्रतीक बनी है और जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है.' टोक्यो में भारतीय समुदाय से मिले PM मोदी, शेयर की तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टोक्यो में भारतीय समुदाय की गर्मजोशी और स्नेह से वह बेहद अभिभूत हुए. उन्होंने सराहना की कि कैसे भारतीय लोग जापान में रहते हुए समाज में अहम योगदान दे रहे हैं और साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संजोए हुए हैं. पीएम मोदी ने आगे बताया कि कुछ ही घंटों में वह जापान के बिजनेस लीडर्स के साथ मुलाकात करेंगे, जहां भारत-जापान के व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा होगी. जानें क्यों अहम है PM मोदी का जापान दौरा जापान पीएम मोदी के दौरे के दौरान भारत में अगले दस साल के लिए 10 ट्रिलियन येन (लगभग दोगुना) निजी निवेश की घोषणा कर सकता है. यह 2022 में तय किए गए 5 ट्रिलियन येन के लक्ष्य से कहीं बड़ा कदम होगा. जापान, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का बड़ा समर्थक है और मारुति सुजुकी अब भारत से इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी शुरू कर रही है. अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन जैसी बड़ी परियोजना दोनों देशों की साझेदारी का उदाहरण है. इसके अलावा, भारत और जापान सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक नया आर्थिक सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी. गायत्री मंत्र, राजस्थानी पोशाक… जापान के लोगों ने कुछ इस तरह किया पीएम मोदी का वेलकम भारतीय प्रवासी समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का जापान पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया. जापानी समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी का स्वागत गायत्री मंत्र और अन्य मंत्रों का पाठ करके किया. राजस्थानी पोशाक पहने जापानी लोगों ने प्रधानमंत्री के स्वागत में राजस्थानी लोकगीत गाए. टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत पीएम मोदी ने एक्स पर टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि भारत और जापान अपने विकासात्मक सहयोग को लगातार मजबूत कर रहे हैं और इस यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा समेत अन्य नेताओं से मुलाकात करने को उत्सुक हैं. मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दौरा दोनों देशों के बीच मौजूदा साझेदारी को और गहरा करेगा और सहयोग के नए अवसर खोलेगा. मोदी 29-30 अगस्त को जापान यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री ने जापान यात्रा पर कहा, ‘हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।’ उन्होंने कहा, ‘हम अपने सहयोग को नयी उड़ान देने, आर्थिक व निवेश संबंधों के दायरे एवं महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करने, कृत्रिम मेधा (एआई) व सेमीकंडक्टर सहित नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।’ जापान से मोदी 31 अगस्त से दो दिवसीय यात्रा पर चीन के शहर तियानजिन जाएंगे। रविवार को प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वार्ता करेंगे, जिसमें पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आगे के कदमों पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है। पीएम मोदी एससीओ सम्मेलन से इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी … Read more

अगर भारत ने माना PM मोदी का संदेश, तो हिल जाएंगी 30 अमेरिकी कंपनियां

नई दिल्ली अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया है. भारत ने इसे अनुचित करार दिया है. अमेरिका के इस कदम का अब भारत में विरोध हो रहा है. क्योंकि अमेरिका का सबसे बड़ा कारोबारी दुश्मन चीन है, जिसपर अमेरिका ने अधिकतम 34% टैरिफ लगाया है, जबकि भारत पर जबरन 50% टैरिफ लगा दिया गया है, जो कि सरासर गलत है.  इस बीच अब स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से अपील की है कि विदेशी ब्रांड के मुकाबले देसी प्रोडक्ट्स खरीदें, जिससे भारत पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनेगा. अगर देश की 140 करोड़ जनता ने चाह लिया तो कुछ भी संभव है, केवल एक आदमी के स्वदेशी अपनाने से अमेरिका जैसी ताकत को कोई असर नहीं होगा. लेकिन अगर हर किसी ने आज से अमेरिकी प्रोडक्ट्स का बहिष्कार शुरू कर दिया, तो कुछ ही दिन में डोनाल्ड ट्रंप भी रास्ते पर आ जाएंगे. क्योंकि इससे भारत में मौजूद अमेरिका कंपनियों पर आर्थिक चोट पहुंचेगी और इसका नुकसान अमेरिका को उठाना पड़ेगा. लेकिन ये सब तब संभव होगा, जब हर भारतीय स्वदेशी अपनाएगा.   हर भारतीय को करना होगा फैसला लेकिन अब सवाल उठता है कि भारतीय उपभोक्ता और उद्योग जगत कैसे अमेरिका का विरोध करें? क्योंकि केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय रणनीतिक कदम उठाना जरूरी है. दरअसल, आज की तारीख में सैकड़ों अमेरिकी कंपनियां भारत में मौजूद हैं. हर घर में अमेरिका प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हो रहा है, रसोई से लेकर बर्गर-पिज्जा, चिप्स, मैगी, कपड़े, जूते, घड़ी और शराब की बड़ी से बड़ी कंपनियां भारतीय बाजार में मौजूद हैं. आप जब इन कंपनियों को इग्नोर करेंगे, तो आर्थिक चोट अमेरिका को पहुंचेगी.  इसके लिए सबसे पहले हर भारतीय अमेरिकी ब्रांड्स के बजाय भारतीय प्रोडक्ट्स खरीदे. देश के डिस्ट्रिब्यूटर्स और रिटेलर्स अमेरिकी प्रोडक्ट्स की बिक्री कम करके दूसरी कंपनियों को प्राथमिकता दें. साथ ही अमेरिकी आयात पर निर्भरता को घटाना होगा, इसके लिए स्वदेशी और दूसरे देशों के सस्ते प्रोडक्ट्स को अपनाएं. भारत काउंटर टैरिफ के तौर पर अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर ज्यादा टैरिफ लगाने जैसे कदम उठा सकता है. अगर भारत ने लिया बदला… मौजूदा समय में देखें तो हर सेक्टर में अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी है, अगर भारत ने बदला लेना शुरू किया तो अमेरिका को तगड़ा झटका लगेगा. आज हम आपको 30 अमेरिकी कंपनियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका भारत में बड़ा कारोबार है. अगर भारत ने इन कंपनियों को आर्थिक चोट पहुंचाई तो सीधा दर्द अमेरिकी इकोनॉमी को होगा.  अमेरिका की 30 प्रमुख कंपनियों की लिस्ट (अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडिया की रिपोर्ट)-  1. Amazon India: ये अमेरिकी कंपनी ई-कॉमर्स सेंगमेट में सबसे बड़ी प्लेयर है, यह कंपनी भारत में 97% पिनकोड तक पहुंचती है. यानी करीब-करीब हर घर तक अमेजन की पहुंच है, लेकिन इस कंपनी को जो मुनाफा होता है, वो अमेरिका तक पहुंचता है. अगर आपने इस कंपनी का विरोध किया तो सीधा असर अमेरिका को होगा.  2. Apple Inc: आज की तारीख में भारत iphone के लिए बड़ा बाजार है. लेकिन आईफोन को बनाने वाली कंपनी अमेरिकी है. यह कंपनी भारत में बड़े पैमाने पर आईफोन का प्रोडक्शन और बिक्री करती है. अगर इस कंपनी को भारत में दिक्कत हुई तो उसका असर अमेरिका तक दिखेगा. ये कंपनियां भारत में बड़ा कारोबार करके अमेरिकी इकोनॉमी में भी योगदान दे रही हैं.  3. Google (Alphabet Inc.): ये अमेरिकी कंपनी सर्च इंजन, विज्ञापन, एंड्रॉइड और क्लाउड सेवाएं देती हैं, हर कोई गूगल के बारे में जानता है और इसका उपयोग करता है. भारत में गूगल का बड़ा डेटा सेंटर है. कंपनी का भारत बड़ा कारोबार है, लेकिन ट्रंप को लगता है कि अमेरिकी कंपनियों को भारत में कारोबार करने से रोकी जाती हैं.  4. Microsoft: सॉफ्टवेयर, क्लाउड (Azure) और आईटी सर्विस में इस कंपनी का भारत में कारोबार फैला हुआ है. हर कंप्यूटर और लैपटॉप में Microsoft का साफ्टवेयर होता है. ये जो कंपनियां भारत में कमाई करती हैं, उसका कुछ हिस्सा अमेरिका भी ट्रांसफर होता है. यानी अगर भारत में इन कंपनियों के लिए मुश्किलें हुईं तो अमेरिका को भी आर्थिक तौर पर नुकसान होगा.  5. X and Meta: आप दिनभर जिस सोशल मीडिया फेसबुक और ट्विटर यानी X पर समय बिताते हैं, वो भी अमेरिकी कंपनियों के द्वारा ही संचालित की जाती हैं.   Fast-Moving Consumer Goods (FMCG) सेगमेंट में अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जो उपभोक्ता उत्पादों जैसे खाद्य, पेय, व्यक्तिगत देखभाल, और घरेलू उत्पादों में कारोबार करती हैं. बाजार पर प्रभाव की बात करें, तो देश में जंक फूड बाजार $30 बिलियन का है, जिसमें अमेरिकी कंपनियां जैसे PepsiCo, Coca-Cola, और McDonald’s प्रमुख खिलाड़ी हैं.  6. Coca-Cola India: कोका कोला भारत में पेय पदार्थों की अग्रणी कंपनी है, जो कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (कोक, थम्स अप, स्प्राइट), जूस (माज़ा), और बोतलबंद पानी (किनले) जैसे प्रोडक्ट्स बेचती हैं. कंपनी 1960 के दशक से भारत में मौजूद है.  7. PepsiCo India: पेप्सी, 7अप, मिरिंडा, कुरकुरे, और लेज जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स PepsiCo भी अमेरिकी कंपनी है. भारत में पेय और स्नैक्स के क्षेत्र में अग्रणी है, जो . कंपनी 1989 से भारत में सक्रिय है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जैसे सामाजिक पहलों में निवेश करती है.  8. Procter & Gamble Hygiene and Health Care Ltd (P&G India): व्हिस्पर (सैनिटरी पैड), टाइड (डिटर्जेंट) और विक्स जो आप इस्तेमाल करते हैं, वो अमेरिकी कंपनी P&G बनाती है, यह कंपनी 1964 से भारत में सक्रिय है.  9. Colgate-Palmolive (India) Ltd: कोलगेट घर-घर में मशहूर है, लेकिन कंपनी अमेरिकी है, कोलगेट के टूथपेस्ट और टूथब्रश खूब बिकती हैं और हर घर में आम है.  10. Johnson & Johnson Pvt. Ltd: Johnson & Johnson के प्रोडक्टस् भारत में साबून, पाउडर और सैंपू मौजूद हैं. जॉनसन बेबी प्रोडक्ट्स की खूब डिमांड है, इस कंपनी की साल 1886 से ही भारत में मौजूदगी है.  11. Nestlé India Limited: मैगी, नेस्कैफे, किटकैट, मिल्कमेड बनाने और बेचने वाली कंपनी Nestlé अमेरिकी है. मैगी नूडल्स और किटकैट चॉकलेट्स बेहद लोकप्रिय हैं. 1959 से भारत में सक्रिय, कंपनी ने हाल ही में बिना रिफाइंड शुगर वाले सेरेलैक जैसे नए उत्पाद भी लॉन्च किए हैं. 12. Kimberly-Clark Lever Pvt Ltd: आप जो बच्चों के लिए … Read more