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रिपुन बोरा ने छोड़ी कांग्रेस, हिमंता बिस्वा सरमा बोले—अब क्या बचा पार्टी में?

असम असम में कांग्रेस इकाई के चीफ रहे रिपुन बोरा के इस्तीफे के बाद सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के आखिरी हिंदू नेता ने भी पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति थे जो कि बिना परिवारवाद के राजनीति में आए थे। असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कांग्रेस पर करारा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भूपेन बोरा कांग्रेस के ऐसे आखिरी हिंदू नेता थे जो कि किसी के दम पर राजनीति में नहीं आए थे। उन्होंने कहा कि बोरा के इस्तीफे का संदेश यही है कि कांग्रेस किसी सामान्य व्यक्ति को फलते-फूलते नहीं देखना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल तुष्टीकरण कि राजनीति करना जानती है। सरमा ने कहा कि भूपेन ने बीजेपी जॉइन करने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। सरमा ने कहा कि मंगलवार की शाम को वह बोरा के घर जाएंगे। अगर वह चाहेंगे तो बीजेपी उन्हें स्वीकार करेगी और सुरक्षित सीट भी देगी। सरमा ने कहा, असम में कांग्रेस की स्थिति खराब है। कांग्रेस के कई कार्यालयों में मीटिंग भी एक खास समुदाय की प्रार्थना के साथ शुरू होती है। असम में कांग्रेस बहुत तेजी से बदल रही है। लोग इसे देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई बीजेपी में आना चाहता है तो उसके लिए पार्टी के अंदर चर्चा करनी पड़ेगी क्योंकि यहां कोई वैकेंसी नहीं है। बता दें कि बोरा जुलाई 2021 से प्रदेश में पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस के बड़े नेताओं जिनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हैं, को भेज दिया है। उन्होंने 2006 से 2016 तक असम विधानसभा में बिहपुरिया सीट का प्रतिनिधित्व किया था। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद बोरा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से अपना नाम भी हटा दिया। बोरा का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब असम में कांग्रेस ने राज्य भर के लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए 'बदलाव की यात्रा' शुरू की थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रोंगानोडी सीट से कांग्रेस टिकट के एक बड़े दावेदार भी थे, वह प्रदेश पार्टी अध्यक्ष गौरव गोगोई के साथ परिवर्तन यात्रा में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे थे। बोरा ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, " मैंने अपना इस्तीफ़ा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया है, और मैंने अपने कारण विस्तृत में बताये हैं। मैंने अपनी ज़िंदगी के 32 साल पार्टी को दिये हैं, और ज़ाहिर है, मैंने राजनीति से रिटायरमेंट लेने के लिए इस्तीफ़ा नहीं दिया है। " उन्होंने कहा कि इस पुरानी पार्टी के भविष्य को लेकर कुछ कारण हैं और उन्होंने पार्टी हाईकमान को अपने इस्तीफ़े के कारण बता दिए हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा में शामिल होंगे, श्री बोरा ने कहा कि उन्होंने अभी अपने भविष्य के कदम के बारे में कोई फ़ैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा, " मैंने आपको वह सब कुछ बता दिया है, जो मैं बता सकता था। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने मुझे कुछ भी ऑफ़र नहीं किया है। मैं जो भी फ़ैसला लूंगा, मैं असम के लोगों को सही समय पर बता दूंगा। " पार्टी के अदंरूनी लोगों ने इशारा किया कि पार्टी के आम कार्यकर्ता के बीच राय में मतभेद हैं। हाल ही में पार्टी हाईकमान ने हालांकि श्री बोरा को दूसरी क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों के साथ गठबंधन से जुड़े मामलों को देखने के लिए कहा था, लेकिन श्री गौरव गोगोई के करीबी कुछ दूसरे पार्टी नेताओं के दखल से उन्हें नुकसान हुआ है।  

पशुपति पारस का निर्णय: महागठबंधन नहीं, RLJP अकेले चुनाव में

पटना  राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) प्रमुख पशुपति कुमार पारस ने पुष्टि की है कि उनकी पार्टी ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्हें पहले चरण में "अच्छी संख्या में सीटें" जीतने की उम्मीद है। पारस ने कहा कि विपक्षी महागठबंधन के साथ गठबंधन बनाने के प्रयासों के कोई परिणाम नहीं निकलने के बाद यह निर्णय लिया गया। चुनाव के पहले चरण में हम अच्छी संख्या में सीटें जीतेंगे  आरएलजेपी प्रमुख पारस ने कहा, "हमने महागठबंधन के साथ गठबंधन बनाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन गठबंधन नहीं हो पाया। दलित सेना के समर्थन से हमारी पार्टी बिहार में मजबूत है। हमने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हमलोगों ने पहले चरण की 33 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। मुझे उम्मीद है कि चुनाव के पहले चरण में हम अच्छी संख्या में सीटें जीतेंगे।" बता दें कि बिहार चुनाव 2025 के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा। नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव प्रक्रिया में शुक्रवार को पहले चरण के नामांकन की आखिरी तिथि होने के बावजूद महागठबंधन के घटक दलों में सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। महागठबंधन से कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी रही जिसने आधिकारिक तौर पर अपनी सूची जारी करते हुए 48 उम्मीदवारों की घोषणा की। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) जैसे अन्य सहयोगी दलों ने औपचारिक सूची जारी किए बिना आखिरी समय तक चुनाव चिन्हों का वितरण जारी रखा। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा आंतरिक विवादों को सुलझाने के प्रयासों के बावजूद महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर आखिरी समय तक खींचतान जारी रही  

कल होंगे नए गुजरात मंत्रियों के शपथ ग्रहण: CM पटेल के नेतृत्व में होगी नई टीम का गठन

अहमदाबाद  गुजरात की सियासत से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है. मौजूदा सरकार के सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौप दिया है. इससे अब नए मंत्रिमंडल का मार्ग प्रशस्त होगा. कल गुजरात में नए मंत्रिमंडल का शपथग्रहण समारोह होगा. मुख्यमंत्री देर रात राज्यपाल को हटाए जाने वाले मंत्रियों के इस्तीफे सौंपेंगे. नए मंत्रियों के नामों की एक सूची भी सौंपी जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाले मंत्रिपरिषद का शुक्रवार को विस्तार होगा.भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पहले ही बताया था कि आगामी कैबिनेट विस्तार में राज्य को करीब 10 नए मंत्री मिल सकते हैं. इतना ही नहीं करीब आधे मौजूदा मंत्रियों को बदला जा सकता है. गुजरात कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 17 मंत्री इस बड़े सियासी फेरबदल को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल के मंत्रिपरिषद का विस्तार शुक्रवार सुबह साढ़े 11 बजे होगा. मौजूदा गुजरात कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 17 मंत्री हैं. 8 कैबिनेट मंत्री हैं. इतने ही राज्य मंत्री हैं.कुल 182 सदस्यों वाली विधानसभा में सदन की कुल संख्या का 15 प्रतिशत या 27 मंत्री हो सकते हैं. अब आगे क्या-क्या होगा? मौजूदा मंत्रियों से इस्तीफा लेने के बाद अब मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों को देर रात जानकारी दी जाएगी. कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए 3 से 4 विधायकों को जगह मिल सकती है. ज्यादातर नए मंत्री मूल रूप से बीजेपी से होंगे. समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए जातिगत समीकरण का पूरा ध्यान रखा जाएगा. कुल मिलाकर नए मंत्रिमंडल में युवा और अनुभवी चेहरों का सियासी संगम देखने को मिलेगा. नए मंत्रिमंडल में इन्हें मिल सकती है जगह जानकारी के मुताबिक, इस बार कैबिनेट में रिवाबा जडेजा, अर्जुन मोडवाडिया, जीतू वाघानी, हर्ष सांघवी को जगह मिल सकती है. 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार गुजरात के मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा रहा है. सीएम पटेल के नेतृत्व में ये फेरबदल आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के मद्देनजर हो रहा है. अब सरकार फेरबदल करके 2027 के चुनाव में अपनी जीत को लेकर सभी समीकरणों को साधने का प्रयास कर रही है.