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चुनाव की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दल अर्लट : सीएम नीतीश हर दिन करेंगे चार चुनावी सभा, पीएम और राहुल की होंगी इतनी सभाएं

पटना बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दलों ने ताबड़तोड़ चुनावी सभा करने की तैयारी कर ली है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और इंडिया गठबंधन अपने अपने स्टार प्रचारकों की सभाओं पर पूरा फोकस कर रहा है। इस बार पहले चरण में सबसे अधिक चुनावी सभा भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं की होगी। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की 25-25 चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10 से अधिक चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। सीएम नीतीश कुमार भी अपना संबोधन देंगे खास बात यह है कि पीएम मोदी की चुनावी सभा में सीएम नीतीश कुमार भी अपना संबोधन देंगे। पीएम मोदी की हर तीन में एक सभा उस क्षेत्र में होगी, जहां एनडीए के घटक दलों के उम्मीदवार हैं। वहीं दो सभा भाजपा के उम्मीदवारों के क्षेत्र में होगी। प्रधानमंत्री की सभाओं में मंच पर एनडीए के उम्मीदवारों को भी जगह मिलेगी। जनता दल यूनाईटेड की ओर से सीएम नीतीश कुमार 10 अक्टूबर से अपने चुनावी अभियान पर निकलेंगे। इस दौरान वह हर दिन चार चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। वह हेलीकॉप्टर से अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी सभा करेंगे। कई जगहों पर वह रोड शो भी कर सकते हैं। राहुल गांधी की 10 से अधिक चुनावी सभा इधर, इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी भी 10 से अधिक चुनावी सभा को संबोधित करेंगे।  जबकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की छह से अधिक चुनावी सभी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की पांच चुनावी सभा होने वाली है। तेजस्वी यादव की चुनावी सभा की घोषणा अब तक नहीं की गई है। संभावना है कि सीट शेयरिंग पर खुलासा होने के बाद अपनी चुनावी सभा की भी घोषणा कर देंगे। पहले चरण में इन 18 जिलों में होगा विधानसभा चुनाव         मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर, बक्सर।

कांग्रेस पर भड़के हरियाणा मंत्री, कहा – ‘अंग्रेजों की औलाद’, राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया

अंबाला कोलंबिया में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरएसएस के खिलाफ दिए बयान पर हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस को अंग्रेजों की औलाद बताया। उन्होंने कहा राहुल गांधी को बुरी आदत है कि वह विदेशों में जाकर देश को कोसते हैं। उन्होंने कहा, कांग्रेस को एक अंग्रेज एओ ह्युम ने पैदा किया था इसलिए आप अंग्रेज की औलाद हो, लेकिन भाजपा एक देसी पार्टी है जो दिन-रात भारत की तरक्की के लिए काम करती है। केजरीवाल को मंत्री विज की दो टूक आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के बयान कि गोवा में भाजपा-कांग्रेस की मिलीभगत वाली सरकार चल रही है, पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने अरविंद केजरीवाल को नसीहत देते हुए कहा की आप अपनी पार्टी के प्रमुख हो और आप इधर-उधर की बात न करके,यह देखें कि आपके पंजाब में क्या हाल हैं। उन्होंने गुनगुनाते हुए कहा, पंजाब क्यों बेहाल है, तू उसका कर ले ख्याल, तू इधर-उधर न भटक, पंजाब का कर ले ख्याल। सुरजेवाला हताश कवि: अनिल विज कांग्रेस के नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा भाजपा सरकार पर किसान विरोधी होने के ट्विट पर व कुछ पंक्तियां लिखने पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुरजेवाला एक हताश कवि की तरह लगे हुए हैं और वैसे ही गीत लिख रहे हैं, जैसे कोई डिप्रेशन में लिख रहा हो। मंत्री विज ने कहा भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार है, जितना किसानों के लिए हितकारी है, उससे पहले आज तक किसी सरकार ने किसानों पर ध्यान नहीं दिया। 

मोहम्मद सिराज ने स्टॉर्क को पछाड़ा, बने दुनिया के पहले गेंदबाज

अहमदाबाद भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जा रहा है. आज (3 अक्टूबर) इस मुकाबले का दूसरा दिन है. भारतीय टीम की पहली पारी चल रही है. भारत का स्कोर 180 रन के पार जा चुका है और उसके 3 विकेट गिरे हैं. केएल राहुल और ध्रुव जुरेल नाबााद बैटर हैं. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज की पहली पारी 162 रनों पर सिमट गई थी. भारत-वेस्टइंडीज के बीच अहमदाबद टेस्ट मैच के दूसरे दिन के खेल से जुड़े अपडेट्स के लिए इस पेज को रिफ्रेश करते रहिए… भारत की पहली पारी में यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल ने शानदार शुरुआत करते हुए पहले विकेट के लिए 68 रनों की साझेदारी की. यशस्वी 36 रन बनाकर आउट हो गए. वहीं तीसरे नंबर पर उतरे साई सुदर्शन केवल 7 रन बनाकर चलते बने. इसके बद केएल राहुल और कप्तान शुभमन गिल ने पहले दिन के खेल में भारत को कोई और नुकसान नहीं होने दिया. राहुल तो अपना अर्धशतक भी पूरा करने में सफल रहे. विंडीज की पहली पारी: सिराज की कातिलाना गेंदबाजी पहली पारी में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने खराब प्रदर्शन किया. जस्टिन ग्रीव्स, शाई होप और कप्तान रोस्टन चेज ही कुछ देर तक क्रीज पर टिक पाए. ग्रीव्स ने चार चौके की मदद से 48 गेंदों पर 32 रन बनाए. वहीं शाई होप ने 26 और रोस्टन चेज ने 24 रनों का योगदान दिया. भारत की ओर से तेज गेंदबज मोहम्मद सिराज ने चार विकेट झटके. वहीं जसप्रीत बुमराह को तीन सफलताएं हासिल हुईं. कुलदीप यादव को दो और वॉशिंगटन सुंदर को एक विकेट मिला. जसप्रीत बुमराह ने लगाई रिकॉर्ड्स की झड़ी पहले टेस्ट मैच में जसप्रीत बुमराह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए इतिहास रच दिया. वेस्टइंडीज की पहली पारी में बुमराह ने घातक स्पेल डालते हुए तीन विकेट हासिल किए. खास बात यह रही कि उन्होंने इनमें से दो बल्लेबाजों को बोल्ड आउट किया. इसी के साथ बुमराह ने 2025 में सबसे ज्यादा बार बल्लेबाजों को बोल्ड करने वाले गेंदबाज का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. साल 2025 में सबसे ज्यादा बोल्ड करने वाले गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इस साल टेस्ट क्रिकेट में अब तक 12 बल्लेबाजों को बोल्ड आउट कर चुके हैं. इस सूची में उनके बाद मोहम्मद सिराज (9) और शमर जोसेफ (9) का नाम है. वहीं मिचेल स्टार्क (7), स्कॉट बोलैंड (6) और जोमेल वारिकन (6) भी इस सूची में शामिल हैं. अगर इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें तो बुमराह 2025 में अब तक 15 विकेट बोल्ड आउट के जरिए ले चुके हैं. यह किसी भी फुल-मेंबर गेंदबाज द्वारा इस साल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. भारतीय दिग्गजों की लिस्ट में बुमराह बुमराह अब इंटरनेशनल क्रिकेट में 147 बोल्ड विकेट ले चुके हैं और वह भारत के लिए इस मामले में चौथे स्थान पर हैं. उनसे आगे अनिल कुंबले (186), कपिल देव (167) और रविचंद्रन अश्विन (151) हैं. बुमराह ने रवींद्र जडेजा (145) को पीछे छोड़ते हुए इस सूची में बढ़त बना ली है.  मोहम्मद सिराज ने स्टार्क को छोड़ा पीछे अहमदाबाद में शुरू हुई टेस्ट सीरीज का पहलादिन टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज के नाम रहा. सिराज ने मैच की पहली पारी में वेस्टइंडीज के टॉप ऑर्डर को ध्वस्त कर दिया. उन्होंने कुल 4 विकेट झटके. खास बात ये रही कि शुरुआती चार में से तीन अहम बल्लेबाजों को सिराज ने आउट किया. इसी के साथ वह साल 2025 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) खेलने वाली सभी टीमों के बीच सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए. सिराज ने हासिल की ये उपलब्धि सिराज ने इस साल (2025) अब तक 7 टेस्ट मैचों की 12 पारियों में कुल 30 विकेट हासिल किए हैं. वेस्टइंडीज़ के खिलाफ जब उन्होंने अपना तीसरा विकेट लिया, तभी उन्होंने इस साल की लिस्ट में टॉप पोज़िशन पर कब्ज़ा जमा लिया. इस दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क को पीछे छोड़ दिया. स्टार्क ने 14 पारियों में 29 विकेट लिए हैं. यह उपलब्धि सिराज के करियर के लिए बेहद खास है क्योंकि वह लगातार अपने प्रदर्शन से भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण की रीढ़ बनते जा रहे हैं. अहमदाबाद की हरी पिच पर उन्होंने जिस आक्रामक लय में गेंदबाज़ी की, उससे कैरेबियाई बल्लेबाज़ शुरुआत से ही दबाव में आ गए. टॉप 5 गेंदबाज़ (WTC 2025) 1. मोहम्मद सिराज – 30 विकेट (12 पारियां) 2. मिचेल स्टार्क – 29 विकेट (14 पारियां) 3. नाथन लायन – 24 विकेट (11 पारियां) 4. शमार जोसेफ – 22 विकेट (6 पारियां) 5. जोश टंग – 21 विकेट (8 पारियां) नए WTC साइकल (2025-27) में भी नंबर 1 सिराज की चमक सिर्फ इस साल तक सीमित नहीं है. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (2025-27) के नए चक्र में भी वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं. भारत ने इस साइकल की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ 5 टेस्ट मैचों की सीरीज़ से की थी, जो 2-2 से ड्रॉ रही. उस सीरीज़ में सिराज भारत के सबसे बड़े मैच-विनर रहे. भारत के लिए वह अब गेंदबाज़ी आक्रमण के लीडर बन चुके हैं, खासकर जसप्रीत बुमराह की फिटनेस मैनेजमेंट को देखते हुए. विदेशी और घरेलू दोनों परिस्थितियों में विकेट निकालने की उनकी क्षमता उन्हें अलग बनाती है. लाइन और लेंथ पर नियंत्रण के साथ उनकी स्विंग और सीम मूवमेंट बल्लेबाज़ों के लिए मुश्किलें खड़ी करती है. भारत में सबसे तेज 50 विकेट पूरे अहमदाबाद टेस्ट में बुमराह ने एक और बड़ा मुकाम हासिल किया. उन्होंने भारत में खेलते हुए अपने 50 टेस्ट विकेट पूरे कर लिए. बुमराह ने केवल 24 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की और कपिल देव का रिकॉर्ड तोड़ दिया. कपिल देव ने भारत में 50 टेस्ट विकेट 25 पारियों में पूरे किए थे. अब बुमराह और जवागल श्रीनाथ संयुक्त रूप से भारत में सबसे तेज 50 विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज बन गए हैं. उनके बाद कपिल देव (25), इशांत शर्मा (27) और मोहम्मद शमी (27) का नाम आता है. घरेलू धरती पर नया इतिहास बुमराह ने घरेलू धरती पर 17 की बेहतरीन औसत से 50 विकेट पूरे किए हैं. एशियाई परिस्थितियों में खेलने वाले गेंदबाजों में यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ औसत है. इसके अलावा, बुमराह भारत के पहले … Read more

सीट बंटवारे पर अटका मामला, बिहार में महागठबंधन में फिर दरार?

पटना  बिहार में महागठबंधन के हिसाब से तो वोटर अधिकार यात्रा अच्छी रही, लेकिन लगता है कांग्रेस और आरजेडी के बीच रिश्तों को उलझा दिया है. ऐसा लगता है राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के बीच फिर से ठन गई है. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी ये सब हुआ था. और, तब सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि जब बात नहीं बन पा रही थी, तब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को दखल देना पड़ा था.  सीटों का बंटवारा तभी फाइनल हो सका, जब प्रियंका गांधी और लालू यादव के बीच सीधी बात कराई गई. तब लालू यादव बिहार से बाहर थे, और चारा घोटाले के लिए रांची जेल में सजा काट रहे थे. एक बार फिर बात उसी मोड़ के आस पास आकर अटक गई लगती है.  तेजस्वी यादव के बिहार अधिकार यात्रा पर निकलने को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है. और, सीट बंटवारे का मामला फंसे हुए होने के जो कारण माने जा रहे हैं, उनमें से एक ये भी है – हालांकि, सबसे बड़ा मसला है मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर कांग्रेस का रुख है.  तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा मानने का सवाल राहुल गांधी ने तो बस टाल दिया था, लेकिन बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने तो जैसे सिरे से खारिज ही कर डाला है – ऐसे में तकरार तो बढ़नी ही है.     तेजस्वी यादव जैसा बड़ा दिल राहुल गांधी क्यों नहीं दिखा रहे हैं 2025 की शुरुआत से ही राहुल गांधी के करीब करीब हर दौरे में एक बात कॉमन नजर आती है. आरजेडी के मुकाबले कांग्रेस को श्रेष्ठ बताना. जैसे लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी क्षेत्रीय दलों की विचारधारा की बात करते थे. कहते थे, क्षेत्रीय दलों के पास कोई विचारधारा नहीं है. तब अखिलेश यादव निशाने पर थे, और अब तेजस्वी यादव हैं. अखिलेश यादव ने तब आंख भी दिखाई थी, शायद तेजस्वी यादव भी अब वैसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं.   चुनाव तो राहुल गांधी महागठबंधन के साथ ही लड़ने की करते हैं, लेकिन हर कदम पर लगता है जैसे कांग्रेस अकेले मैदान में उतरने जा रही हो. तेजस्वी यादव का बिहार की सभी 243 सीटों पर लड़ने की बात करना भी, राहुल गांधी के व्यवहार का जवाब ही लगती है.  1. बिहार में हुए SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ ही INDIA ब्लॉक के बैनर तले वोटर अधिकार यात्रा निकाला जाना तय हुआ, लेकिन राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा को भी भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा जैसा बना देने की कोशिश की. फर्क बस यही था कि वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी के साथ तेजस्वी यादव और बिहार महागठबंधन के और भी नेता शामिल थे.  फिर भी ऐसा लगा जैसे राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा को हाइजैक कर लिया हो. पूरी यात्रा में राहुल गांधी आगे आगे और तेजस्वी यादव पीछे पीछे नजर आए. कहां प्रशांत किशोर जैसे नेता कांग्रेस को लालू परिवार की पिछलग्गू पार्टी कहा करते थे, और कहां वोटर अधिकार यात्रा में लगने लगा जैसे आरजेडी ही कांग्रेस की पिछलग्गू बन गई हो.  2. तेजस्वी यादव की तरफ से तो राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए भी प्रस्तावित कर दिया गया, लेकिन राहुल गांधी पूरी तरह टाल गए. बल्कि, राहुल गांधी का जवाब सुनकर तो ऐसा लगा जैसे वो चाहते ही न हों कि तेजस्वी को बिहार में विपक्ष की तरफ से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए.  3. राहुल गांधी के बयान में जो कसर बाकी रह गई थी, कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने पूरी कर दी. अव्वल तो पहले भी कृष्णा अल्लावरु भी तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित किए जाने पर वैसी ही प्रतिक्रिया देते थे जैसा राहुल गांधी का रिएक्शन था, लेकिन हाल के एक प्रेस कांफ्रेंस में तो चार कदम आगे ही बढ़ गए.  कृष्णा अल्लावरु ने तो अब यहां तक बोल दिया है कि इंडिया ब्लॉक के मुख्यमंत्री पद का चेहरा अब बिहार के लोग ही तय करेंगे. निश्चित तौर पर तेजस्वी यादव और लालू यादव के लिए ऐसी बातें बर्दाश्त कर पाना काफी मुश्किल होगा.  फिर तो तेजस्वी यादव का बिहार अधिकार यात्रा शुरू करना जरूरी हो जाता है. और, सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात करना भी – तेजस्वी यादव के पास सीटों पर अपनी बात मनवाने का बेहतर तरीका भी यही लगता है. कैसा चल रहा है सीटों के बंटवारे पर मोलभाव 2020 के चुनाव में कांग्रेस को महागठबंधन में 70 सीटें मिली थीं, और चुनाव में कांग्रेस 19 सीटें जीतने में कामयाब हुई. उस चुनाव में आरजेडी ने 2015 में जीती हुई अपनी 10 सीटें सहयोगियों को दी थी, जिनमें दो कांग्रेस को मिली थीं – और वो एक सीट जीतने में सफल भी रही.  2020 के मुकाबले 2015 में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट बेहतर पाया गया था. तब 41 सीटों पर चुनाव लड़कर कांग्रेस ने 27 सीटें जीती थी. लेकिन, 2020 में आरजेडी नेतृत्व को लगा कि महागठबंधन के सत्ता न हासिल करने में कांग्रेस अपने हिस्से की सीटें हार जाना बड़ी वजह रही. चुनाव नतीजे आने के बाद तेजस्वी यादव या लालू यादव तो नहीं, लेकिन आरजेडी नेताओं ने खुल कर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला बोला था.  2025 के चुनाव में भी कांग्रेस की तरफ से 70 सीटों पर दावा पेश किए जाने की बात सुनी जा रही है. ऐसी दावेदारी के पीछे राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस अपने प्रभाव में हुआ इजाफा मान रही है. इंडियन एक्सप्रेस की  रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस उन 70 सीटों में से 27 अपने लिए अच्छी सीटें मान रही है. 27 सीटों में ही कांग्रेस की जीती हुई 19 सीटें भी शामिल हैं. 8 वे सीटें हैं, जहां कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे नंबर पर थे, और हार का फासला करीब पांच हजार वोट थे.  दिल्ली की प्रेस कांफ्रेंस में कृष्णा अल्लावरु ने भी कहा था, हर राज्य में अच्छी और खराब सीटें होती हैं. और, ऐसा कभी नहीं होना चाहिए कि एक पार्टी सभी अच्छी सीटों पर चुनाव लड़े, और दूसरी खराब सीटों पर. कृष्णा अल्लावरु का कहना था कि सीटों के बंटवारे के वक्त इस … Read more

कांग्रेस की दोहरी रैली: किसान न्याय यात्रा और वोट चोर गद्दी छोड़ का आयोजन उज्जैन में 12 सितंबर

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में 12 सितंबर को कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक आयोजन करने जा रही है। इस दिन ‘किसान न्याय यात्रा’ और ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली का आयोजन होगा। इसी दिन कांग्रेस के इस अभियान का समापन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार, सचिन पायलट, केसी वेणुगोपाल, कमलनाथ समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। संभावना जताई जा रही है कि इस रैली के समापन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हो सकते हैं। MP के कई जिलों में निकली यात्रा दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाते हुए इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ यात्रा कई जिलों में निकाली गई। इन सभाओं और रैलियों को कई जगह समर्थन मिला, तो कुछ स्थानों पर विरोध का भी सामना करना पड़ा। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से गरमाई राजनीति गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वोट चोरी के आरोप लगाए थे। इसी बयानबाजी के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर यह अभियान शुरू किया, जो अब उज्जैन में समापन की ओर बढ़ रहा है। 

डबल वोटिंग विवाद: राहुल गांधी पर लगा आरोप और आर्टिकल 337 के तहत संभावित जेल की सजा

बेंगलुरु कर्नाटक में डबल वोटिंग का दावा अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए कानूनी पचड़ा बन गया है. राहुल गांधी ने अपनी प्रेजेंटेशन में एक डॉक्‍यूमेंट दिखाते हुए दावा किया था कि यह चुनाव आयोग का रिकॉर्ड है. शगुन रानी नाम की एक महिला के पास दो-दो वोटर आईडी हैं. इसमें पोलिंग बूथ ऑफिसर का टिक मार्क लगा है, जो यह साबित करता है कि शगुन रानी ने दो बार वोट भी किया. अब यही राहुल गांधी के गले की फांस बन गया है. क्‍योंक‍ि चुनाव आयोग कह रहा क‍ि पूरी कहानी ही उलटी है. कर्नाटक के चीफ इलेक्‍शन कमीश्नर ने राहुल गांधी को नोटिस जारी कर दिया है और पूछा है क‍ि जो दावा आपने क‍िया, उसका सबूत तो दीजिए. क्‍योंक‍ि हमने जो जांच की है, उसके मुताबिक- शगुन रानी नाम की मह‍िला ने दो वार वोट नहीं क‍िया. लेकिन सबसे बड़ा सवाल, अगर राहुल गांधी का दावा गलत पाया गया तो क्‍या होगा? कहा जा रहा है क‍ि उन पर आर्टिकल 337 के तहत कार्रवाई हो सकती है. आख‍िर ये आर्टिकल 337 है क्‍या? भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 337 एक गंभीर अपराध में लागू होती है. जब भी कोई शख्‍स सरकारी दस्तावेज या कोर्ट रिकॉर्ड की जालसाजी करता है तो उस पर ये धारा लगाई जा सकती है. जैसे कोई शख्‍स अगर वोटर आईडी, आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु या विवाह रजिस्टर, सरकारी प्रमाणपत्र, कोर्ट की कार्यवाही के रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेज में खेल करे, तो वो इस खेल में फंस सकता है. माना जा रहा क‍ि राहुल गांधी ने ज‍िस तरह चुनाव आयोग के डॉक्‍यूमेंट को गलत तरह से पेश क‍िया, उसमें छेड़छाड़ की गई, वह इस दायरे में आएगी. अगर ऐसा हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. क्‍या कहता है कानून कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसे किसी डॉक्‍यूमेंट को जाली साबित करने में दोषी पाया जाता है, चाहे वह डॉक्‍यूमेंट कागजी हो या इलेक्ट्रॉनिक, तो उसे 7 साल तक की कठोर कारवास की सजा दी जा सकती है. इतना ही नहीं, उस पर असीमित जुर्माना भी लगाया जा सकता है. कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अपराध गैर-जमानती भी हो सकता है, यानी दोषी पाए जाने पर गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से ही जमानत लेनी होगी. क‍ितने द‍िन की सजा कानून ये भी कहता है क‍ि अगर आरोप साबित होते हैं तो दोषी व्यक्ति को राजनीति में बने रहने पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर संसद या विधानसभा की सदस्यता जा सकती है. राहुल गांधी के मामले में अगर जांच और कोर्ट में यह साबित होता है कि उन्होंने वोटर लिस्ट से जुड़ा कोई जाली डॉक्‍यूमेंट बनाया या इस्तेमाल किया, तो धारा 337 के तहत उन पर केस चल सकता है और दोषी साबित होने पर उन्हें 7 साल तक की जेल, जुर्माना, और सांसद पद गंवाने का खतरा भी हो सकता है. कहां फंसे पेच चुनाव आयोग को कोर्ट में यह तय करना होगा कि डॉक्‍यूमेंट जानबूझकर जाली बनाया गया या सिर्फ गलती से शामिल हुआ. सबूत की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष पर यानी चुनाव आयोग पर होगी. दोष साबित होने पर सजा और जुर्माने की मात्रा अदालत तय करेगी. कांग्रेस बोली, रंगे हाथ पकड़े गए तो सबूत मांग रहे कर्नाटक चुनाव आयोग के दावे पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस महासच‍िव केसी वेणुगोपाल ने कहा- राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका बड़ा खुलासा आयोग के अपने डेटा, यानी वोटर लिस्ट, पर आधारित है. अब, जब वे आपको रंगे हाथ पकड़ चुके हैं, तो आप उनसे दस्तावेज़ मांग रहे हैं? ये वही डेटा है जो आपके पास है.राहुल का आरोप है कि आयोग डिजिटल, मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट देने से इंकार करता है, सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच रोकता है और सबूत मिटाता है. उनका कहना है कि सबूत सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं, फिर भी आयोग व्हिसलब्लोअर से सवाल कर रहा है. यह सिर्फ विडंबना नहीं, बल्कि दोष स्वीकारने जैसा है. कांग्रेस ने पांच सीधे सवाल पूछे हैं विपक्ष को डिजिटल वोटर लिस्ट क्यों नहीं दी जाती? सीसीटीवी और वीडियो सबूत मिटाने का आदेश किसने दिया? फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी क्यों हुई? विपक्षी नेताओं को धमकाने का कारण क्या है? क्या चुनाव आयोग अब भाजपा का चुनाव एजेंट बन गया है?

सबूत हमारे पास हैं – राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर निशाना, उठाए पारदर्शिता पर सवाल

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने इस दौरान महाराष्ट्र और कर्नाटक की मतदाता सूची दिखाते हुए इन दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर्स का आरोप लगाया.  राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के दौरान कहा कि संविधान की नींव वोट है. ऐसे में सोचना होगा कि क्या सही लोगों को वोट डालने दिया जा रहा है? क्या मतदाता सूची में फर्जी वोटर्स जोड़े गए? महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया. हम महाराष्ट्र में चुनाव हार गए.  महाराष्ट्र में 40 लाख वोटर रहस्यमयी हैं. यहां पांच महीने में कई वोटर जोड़े गए.  राहुल ने कहा कि महाराष्ट्र में पांच साल की तुलना में पांच महीने में बड़ी संख्या में नए वोटर जुड़े. महाराष्ट्र विधानसभा में वोटिंग के दिन शाम पांच बजे के बाद वोटिंग में तेज इजाफा होता है. हमें फिर पता चला कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच एक करोड़ नए वोटर्स मतदाता सूची में जुड़े. वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग जवाब देना चाहिए. उन्हें बताना चाहिए कि क्या वोटर लिस्ट सही है या गलत? कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा क्यों नहीं देता? हमने आयोग से बार-बार डेटा मांगा लेकिन हमें नहीं दिया गया. यहां तक कि चुनाव आयोग ने हमें जवाब देने से भी इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि देश मे फर्जी वोटिंग हो रही है. हमें इस चोरी को पकड़ने में लंबा समय लगा. हमने अपने स्तर पर जांच की, जिसमें हमें छह महीने का समय लगा. हमने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर वोटर्स लिस्ट की पड़ताल की. महादेवपुरा सीट पर हम 32707 वोटों से हार गए थे. अकेली इसी सीट पर बीजेपी एक लाख से ज्यादा के मार्जिन से जीती थी. इसे हमें शक हुआ कि दाल में कुछ काला है. राहुल ने कहा कि बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा की महादेवपुरा विधानसभा सीट में 6.5 लाख वोटों में से एक लाख से अधिक वोटों की चोरी की गई. हमारी इंटर्नल पड़ताल में पता चला कि इनमें से एक लाख से अधिक वोटर्स डुप्लीकेट हैं या जिनके एड्रेस गलत हैं. उन्होंने कहा कि हमारी पड़ताल में वोटर्स लिस्ट में कई गड़बड़ियों का पता चला. इस वोटर लिस्ट में कई लोगों के पिता के नाम के आगे कुछ भी लिखा गया है. वोटर लिस्ट में 40 हजार मकानों के एड्रेस शून्य हैं. डुप्लीकेट वोटरों की संख्या बहुत ज्यादा है. 11 हजार संदिग्ध ऐसे हैं, जिन्होंने तीन बार वोट डाला. ये लोग कहां से आ रहे हैं? एक ही पते पर 46 वोटर्स हैं. एक कमरे के घर में 80 मतदाता हैं. ये चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत है.  राहुल गांधी ने बताया कि वोट चोरी पांच तरीकों से की जाती है. डुप्लीकेट वोटर्स 11,965 हैं. वोटर लिस्ट में ऐसे वोटर जिनका एड्रेस फर्जी हैं, उनकी संख्या 40 हजार के आसपास है. एक ही पते पर 10 हजार से ज्यादा वोटर्स रजिस्टर्ड हैं. 4132 वोटर्स ऐसे हैं वोटर लिस्ट में जिनकी फोटो इनवैलिड हैं.  वोट चोरी 5 तरह से होती है? – डुप्लीकेट वोटर्स (11,965) – फेक और इनवैलिड एड्रेस (40,009) – एक ही पते पर बल्क वोटर्स (10,452) – इनवैलिड फोटो (4132) – फॉर्म 6 का दुरुपयोग (30,000)  

चीन ने जमीन कब्जाई’ पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल से पूछा– जानकारी का स्रोत क्या है?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि यदि आप सच्चे भारतीय हैं तो आप ऐसा कुछ नहीं कहते. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की चीन द्वारा भारत की जमीन पर कब्जा करने संबंधी बयान पर कड़ी टिप्पणी की और उनसे पूछा कि उन्हें संसद में ये मुद्दे उठाने से किसने रोका है. कोर्ट ने पूछा, 'क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सामग्री है? बिना किसी विश्वसनीय सामग्री के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं. अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब बातें नहीं कहते.' मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने की. वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने पीठ के समक्ष राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व किया. सुनवाई की शुरुआत में सिंघवी ने गांधी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अगर वह ये सब नहीं कह सकते तो विपक्ष के नेता भी नहीं हो सकते. उन्होंने पीठ से अपने मुवक्किल के बयान की जाँच करने का आग्रह किया. न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, 'डॉ. सिंघवी, आपको जो भी कहना है, कहिए. आप संसद में क्यों नहीं कहते? आपको सोशल मीडिया पोस्ट में यह सब क्यों कहना है.' सिंघवी ने तर्क दिया, 'एक तकनीक है, आप संसद सदस्य (एमपी) बन जाते हैं और सभी को बदनाम करते हैं लेकिन जनहित में एक पार्टी के नेता, बस देखें कि उन्होंने क्या कहा.' न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, 'डॉ. सिंघवी, हमें बताइए कि आपको कैसे पता चला कि 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीनियों ने कब्जा कर लिया है. आपको कैसे पता चला कि आप वहाँ थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सामग्री है? बिना किसी विश्वसनीय सामग्री के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं.' न्यायमूर्ति दत्ता ने आगे कहा, 'अगर आप एक सच्चे भारतीय होते, तो आप ये सब बातें नहीं कहते.' सिंघवी ने कहा कि यह भी संभव है कि एक सच्चा भारतीय कहे कि हमारे 20 भारतीय सैनिकों को पीटा गया और मार दिया गया, और उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चिंता का विषय है. न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, 'जब सीमा पार संघर्ष होता है. अगर आप खुलासा कर रहे हैं, आप विपक्ष के नेता (एलओपी) हैं. तो आप (संसद में) सवाल क्यों नहीं पूछते, आप एलओपी हैं. यह क्या है, आप कहे जा रहे हैं? आपके पास अनुच्छेद 19(1)(ए) का अधिकार (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) है, एक जिम्मेदार एलओपी होने के नाते, आप ऐसा करते हैं.' सिंघवी ने कहा कि मानहानि का मुकदमा दायर करके किसी व्यक्ति को परेशान करने का यह कोई तरीका नहीं है, और उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधान 1 की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि अब संज्ञान लेने से पहले प्राकृतिक न्याय की आवश्यकता होती है. सिंघवी ने तर्क दिया, 'यह एक सर्वमान्य आधार है कि जब वर्तमान मामले में यानी 11 फरवरी, 2025 को संज्ञान लिया गया था, तब कोई प्राकृतिक न्याय नहीं था और न ही 223 (1) प्रावधान का कोई अनुपालन हुआ था.  राहुल गांधी से कोर्ट के तीखे सवाल सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने राहुल गांधी की तरफ से दिए गए बयानों पर असहमति जताई. राहुल गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने शुरुआत में दलील दी कि अगर कोई विपक्षी नेता मुद्दे नहीं उठा सकता, तो यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी. अदालत में सिंघवी ने कहा कि अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते, तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते. इस पर जस्टिस दत्ता ने पूछा, 'आपको जो कुछ भी कहना है, संसद में क्यों नहीं कहते? आपको सोशल मीडिया पोस्ट में यह क्यों कहना है?' राहुल गांधी के बयान पर असहमति जताते हुए जस्टिस दत्ता ने पूछा, 'आप बिना किसी सबूत के ये बयान क्यों दे रहे हैं. अगर आप एक सच्चे भारतीय होते, तो आप यह सब नहीं कहते.' भारत जोड़ो यात्रा में दिया था बयान अपनी 2023 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान, कांग्रेस नेता राहुल ने दावा किया कि एक पूर्व सेना अधिकारी ने उन्हें बताया था कि चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है. उनके इस बयान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया था और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था. राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, 'आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2,000 किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है?' और इस पर जोर देते हुए कहा, 'अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो आप ऐसा नहीं कहते.' कोर्ट ने पूछा कि क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? जब सीमा पार कोई विवाद होता है तो क्या आप ये सब कह सकते हैं? आप संसद में सवाल क्यों नहीं पूछते? कोर्ट ने राहुल गांधी को फटकार लगाते हुए कहा कि आप विपक्ष के नेता हैं तो आप ये बातें क्यों कहेंगे? आप ये सवाल संसद में क्यों नहीं पूछते? इसके जवाब में राहुल की तरफ से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्होंने संसद में बोलने की छूट पाने के लिए चुनाव नहीं लड़ा. अनुच्छेद 19(1)(ए) राहुल गांधी को सवाल पूछने की इजाजत देता है. सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी ने यह स्वीकार करते हुए कि याचिकाकर्ता अपना बयान बेहतर तरीके से पेश कर सकते थे, कहा कि शिकायत सिर्फ सवाल उठाने के लिए उन्हें परेशान करने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है, जो एक विपक्षी नेता का कर्तव्य है. उन्होंने यह भी बताया इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया है. हालांकि, जस्टिस दत्ता ने बताया कि यह मुद्दा हाई कोर्ट के सामने नहीं उठाया गया था. सिंघवी ने माना कि इस पॉइंट को उठाने में चूक हुई. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में चुनौती मुख्य रूप से शिकायतकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर केंद्रित थी.  सिंघवी ने राहुल की तरफ से कहा कि उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की कोई जरूरत नहीं है. मामले में संज्ञान लिए जाने से पहले उन्हें कोई प्राकृतिक न्याय … Read more

‘2020 में जेटली ने धमकाया?’ राहुल गांधी के बयान पर उठा सवाल, BJP ने याद दिलाई मौत की तारीख

 नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान ने एक बार फिर सियासी भूचाल ला दिया है. शनिवार को कांग्रेस के वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लेकर ऐसा दावा कर दिया, जिसे भाजपा ने 'फेक न्यूज' करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब अरुण जेटली का निधन 2019 में हो गया तो वह राहुल गांधी से मिलने 2020 में कैसे आ गए? लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के इस दावे पर कि दिवंगत पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था, डीडीसीए प्रमुख रोहन जेटली ने शनिवार को कांग्रेस नेता को याद दिलाया कि उनके पिता का निधन इन कानूनों के लागू होने से पहले ही हो गया था। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे।" एक्स पर एक पोस्ट में, रोहन जेटली ने लिखा, "राहुल गांधी अब दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता के स्वभाव में किसी को भी विरोधी विचार के लिए धमकाना नहीं था। वह एक कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे और हमेशा आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे।" उन्होंने आगे लिखा, "अगर ऐसी कोई स्थिति आती, जैसा कि राजनीति में अक्सर होता है, तो वह सभी के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र और खुली चर्चा का आह्वान करते। वह ऐसे ही थे और आज भी उनकी यही विरासत है। मैं राहुल गांधी से कहता हूं वे उन लोगों के बारे में बोलते समय सचेत रहें जो हमारे साथ नहीं हैं। उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के साथ भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की, उनके अंतिम दिनों का राजनीतिकरण किया, जो भी उतना ही घटिया था। दिवंगत आत्मा को शांति मिले।'' इससे पहले दिन में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि एनडीए सरकार ने दिवंगत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पहले लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ने की कोशिश करने पर उन्हें धमकाने के लिए भेजा था। राहुल गांधी ने कहा, "मुझे याद है कि जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तो अरुण जेटली को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा था, 'अगर आप सरकार का विरोध करते रहेंगे और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहेंगे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।' मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, ''मुझे नहीं लगता कि आपको पता है कि आप किससे बात कर रहे हैं।'' दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान कहा, "मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, वो (अरुण जेटली) अब नहीं हैं, इसलिए मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए लेकिन फिर भी कहूंगा, अरुण जेटली जी को मुझे मिलने और धमकी देने के लिए भेजा गया था." राहुल ने कहा कि जेटली जी ने मुझसे कहा, "अगर तुम इस रास्ते पर चलते रहे, सरकार का विरोध करते रहे और कृषि कानूनों पर हमसे लड़ते रहे, तो हमें तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी. मैंने जवाब दिया कि मुझे नहीं लगता कि आपको अंदाजा है कि आप किससे बात कर रहे हैं. हम कांग्रेस वाले हैं, डरते नहीं हैं, झुकते नहीं हैं. हमें तो अंग्रेज नहीं झुका पाए." भाजपा का पलटवार: फर्जी बयानों से दूर रहें राहुल राहुल गांधी के इस बयान पर सबसे तीखा जवाब आया बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय की ओर से. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'Fake News Alert!' उन्होंने आगे लिखा, "राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि अरुण जेटली ने उन्हें 2020 में लाए गए कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था. लेकिन तथ्य यह है कि अरुण जेटली का निधन 24 अगस्त 2019 को हो गया था, जबकि कृषि कानूनों का मसौदा पहली बार 3 जून 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया गया था और ये कानून सितंबर 2020 में पास हुए." अमित मालवीय ने आगे कहा, "ऐसे में यह दावा सरासर झूठा और भ्रामक है कि जेटली जी ने उन्हें किसी बात के लिए संपर्क किया. यह साफ है कि राहुल गांधी एक बार फिर टाइमलाइन को तोड़-मरोड़ कर अपनी राजनीतिक कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं." पिता की आत्मा को शांति से रहने दें: रोहन जेटली अरुण जेटली के बेटे और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, "राहुल गांधी अब यह दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने कृषि कानूनों को लेकर उन्हें धमकी दी थी. मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था, जबकि कृषि कानून 2020 में लाए गए थे. और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता कभी किसी को किसी विचार के विरोध के लिए धमकाने वाले नहीं थे. वह एक सच्चे लोकतांत्रिक व्यक्ति थे जो हमेशा संवाद और सहमति में विश्वास रखते थे." उन्होंने आगे कहा, "मैं राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि जो अब हमारे बीच नहीं हैं, उनके बारे में बोलते समय थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएं. उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के अंतिम दिनों को भी राजनीति से जोड़कर अपमानजनक हरकत की थी." हर बात में झूठ, कांग्रेस कब सुधरेगी: अनुराग ठाकुर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी की हर बात झूठ है. हर साल झूठ बोलते हैं, वो सुधर नहीं सकते. रोज एक नया झूठ. कांग्रेस कब तक झूठ की राजनीति करेगी? अरुण जेटली बड़े नेता थे. उनका निधन 2019 में हुआ और कृषि कानून 2020 में संसद में आया. कितने झूठ बोलेंगे राहुल गांधी? जब जेटली जी 2019 में ही गुजर गए, तो वो उनसे 2020 में मिलने कैसे आ सकते हैं? राहुल गांधी को अरुण जेटली के परिवार … Read more

EC का पलटवार: ‘राहुल नहीं आते, अब कर्मचारी धमकी का निशाना’, विपक्ष के आरोपों पर सफाई

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. आयोग ने कहा कि जब राहुल गांधी को आपत्ति जताने के लिए बुलाया जाता है तो वह आते नहीं और अब आयोग के कर्मचारियों को धमकाने तक लगे हैं.  आयोग ने राहुल के बयानों को 'बेबुनियाद' और 'गैर-जिम्मेदाराना' करार देते हुए कहा कि वह ऐसे आरोपों को नजरअंदाज करता है. साथ ही आयोग ने अपने सभी चुनावी कर्मियों को ऐसी टिप्पणियों पर ध्यान न देने और निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से काम जारी रखने का निर्देश दिया है. चुनाव आयोग ने कहा कि राहुल गांधी को 12 जून 2025 को ईमेल भेजा, लेकिन वह पेश नहीं हुए. 12 जून 2025 को उन्हें पत्र भी भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं आया. राहुल गांधी ने अब तक किसी भी मुद्दे पर आयोग को कोई पत्र नहीं भेजा है. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब वह आधारहीन आरोप लगा रहे हैं और आयोग व उसके कर्मचारियों को धमकाने तक लगे हैं. चुनाव आयोग ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों को नजरअंदाज करता है और अपने सभी कर्मचारियों से अपील करता है कि वे निष्पक्षता व पारदर्शिता के साथ कार्य करते रहें. आयोग ने अपने कर्मियों से अपील की कि वे बिना किसी दबाव के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गरिमा को बनाए रखें. क्या बोले राहुल गांधी दरअसल, राहुल गांधी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर वोट चारी आरोप लगाया और कहा कि हमारे पास इसके पुख्ता सबूत हैं. राहुल गांधी ने कहा कि इस वोट चोरी में चुनाव आयोग शामिल है और मैं ये हल्के में नहीं कह रहा हूं. मैं ये पुख्ता सबूत के साथ बोल रहा हूं. जैसे ही हमने ये रिलीज किया, वैसे ही पूरे देश को पता चल जाएगा कि इलेक्शन कमीशन वोट चोरी करा रहा है और किसके लिए कर रहा है? आयोग बीजेपी के लिए ऐसा कर रहा है. इस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. हमें MP और महाराष्ट्र चुनाव में हुआ शक: राहुल गांधी राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी को मध्य प्रदेश और लोकसभा चुनावों में वोट चोरी का शक था. महाराष्ट्र में ये शक और बढ़ गया, जहां उन्हें लगा कि राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर धांधली हुई उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक करोड़ नए वोटर जोड़े गए, लेकिन जब कांग्रेस ने वोटर लिस्ट और वीडियोग्राफी की मांग की तो आयोग ने कोई सहयोग नहीं किया. राहुल ने कहा, 'चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट नहीं दिखाई. हमने वीडियोग्राफी मांगी तो उन्होंने उसका कानून ही बदल दिया.' बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच तनातनी देखने को मिली हो. 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी राहुल ने आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया था, खासकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर. उस वक्त भी आयोग ने राहुल के बयानों को 'आधारहीन' बताते हुए खारिज कर दिया था. इसके अलावा कांग्रेस ने कई बार आयोग के कुछ अधिकारियों की नियुक्ति और उनके कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं, जिसे आयोग ने राजनीति से प्रेरित बताया है.