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रेलवे का बड़ा प्रोजेक्ट! मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक, बीना-जबलपुर रूट पर सफर होगा आसान

जबलपुर बुंदेलखंड और महाकौशल के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर आई है. क्योंकि पश्चिम मध्य रेलवे के द्वारा बीना-जबलपुर को बाईपास करने की योजना बनाई गई है. इतना ही नहीं इसका सर्वे करने के लिए बजट की भी मंजूरी मिल गई है. करीब 83 लाख की लागत से इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें 166 किलोमीटर लंबे रूट का सर्वेक्षण होगा. अभी लोकेशन की तलाश चल रही है कि आखिर यह रेलवे बाईपास कहां से गुजरेगा? इसका सीधा फायदा बीना रेलवे जंक्शन को मिलने वाला है।  क्योंकि यह रेलवे जंक्शन वर्तमान समय में मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के अत्यधिक दबाव से जूझ रहा है. बाईपास रेलवे ट्रैक बनने से मालगाड़ियों को निकालने की योजना है, इससे यात्री गाड़ियों को आउटर सिग्नल पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी  बीना रेलवे स्टेशन से रोजाना गुजरती हैं 60 से 70 मालगाड़ी बुंदेलखंड का बीना रेलवे जंक्शन एक ऐसा सेंटर है जहां से बीना-कटनी, बीना-भोपाल, बीना-झांसी, जैसी दिशाओं में ट्रैक यानी रेलवे लाइन जाती है और रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार यहां से रोजाना 60 से 70 मालगाड़ी गुजरती हैं. इतना ही नहीं मालगाड़ी के अलावा अगर यात्री ट्रेनों की बात करें तो उनकी संख्या भी 150 प्लस है. रेलवे के अनुसार बिना स्टेशन पर रुकने वाली और थ्रू निकलने वाली गाड़ियों की संख्या 155 है. आज की स्थिति की बात करें तो सभी मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें एक ही ट्रैक से निकाली जाती हैं।  ट्रेनों को सीधे बायपास से निकाला जाएगा इसकी वजह से प्लेटफॉर्म की लूप लाइन के साथ मैन अप और डाउन ट्रैक व्यस्त रहता है. इसके अलावा रेलवे यार्ड में मालगाड़ियों को प्लेस करने और चलाने में ट्रैक व्यस्त हो जाता है. ट्रैक क्लियर न मिलने के कारण सवारी गाड़ियों को स्टेशन के होम या आईबीएच सिग्नल पर रोकना पड़ता है. इसकी वजह से न सिर्फ यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, बल्कि ट्रेनें भी डिटेन होती हैं. इस दबाव को कम करने के उद्देश्य से रेलवे ने बाईपास ट्रैक बनाने का निर्णय लिया है. बाईपास बनाने के बाद मालगाड़ियों को यार्ड में लेकर चलाने के बजाए सीधे बाईपास से निकाला जाएगा।  फाइनल रिपोर्ट तैयार होने के बाद कैबिनेट को भेजी जाएगी रिपोर्ट रेलवे के इंजीनियरों के द्वारा सर्वे रिपोर्ट में यह चीज देखी जाएगी कि इसका रूट कहां से गुजरेगा. भू अर्जन करने के लिए कितनी मुआवजा राशि खर्च करनी पड़ सकती है. इस नए रेलवे ट्रैक से कितने गांव कितने शहर कनेक्ट होंगे. ट्रैफिक किस तरह का मिलेगा, इस रास्ते में नदी पर कहां पुल बनाने पड़ेंगे. कहां पहाड़ को काटकर ट्रैक बिछाना पड़ेगा. इनकी फाइनल रिपोर्ट तैयार होने के बाद उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसका प्रस्ताव कैबिनेट तक जाएगा. वहां से मोहर लगने के बाद ही बजट आवंटित किया जा सकता है।  यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकने की नहीं पड़ेगी जरूरत बीना के एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि बाईपास बनने के बाद रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म और ट्रैक खाली रहेंगे. इससे यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रेनों को सीधे प्लेटफॉर्म पर ले सकेंगे. इसके साथ ही परियोजना का उद्देश्य न सिर्फ स्टेशन का ट्रैफिक कम करना है, बल्कि यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार करना है।  बाईपास बनने से दूरी होगी कम बीना से जबलपुर जाने वाली रेलवे ट्रैक की दूरी की बात करें तो यह सागर, दमोह, कटनी होते हुए गुजरता है. जिसकी दूरी लगभग 351 किलोमीटर है और किसी भी ट्रेन से सफर करने के लिए कम से कम 6 घंटे का समय लगता है, लेकिन जब यह बाईपास बन जाएगा तो इसकी दूरी लगभग आदि कम होकर 166 किलोमीटर रह जाएगी, जिससे समय की बचत होगी किराया भी कम लगने लगेगा। 

बिहार के रोहतास में औद्योगिक पुनर्जागरण की तैयारी, डालमियानगर रेल कारखाने को मिला बजट

 रोहतास  डालमियानगर औद्योगिक परिसर में चार दशक से पसरा अंधेरा अब छंटने की उम्मीद जगी है। रेलवे द्वारा 430.20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक औद्योगिक परिसर के गुलजार होने की संभावना बढ़ गई है। कभी देश-विदेश में अपनी पहचान रखने वाला डालमियानगर औद्योगिक परिसर स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। ले‍क‍िन वर्तमान में यहां सन्‍नाटा है। एश‍िया के बड़े औद्योग‍िक समूह में थी गिनती एक समय एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक परिसरों में शामिल रोहतास उद्योग समूह का यह क्षेत्र दुधिया रोशनी से जगमगाता था, लेकिन वर्ष 1984 में रोहतास उद्योग समूह में तालाबंदी के बाद यहां सन्नाटा और अंधेरा छा गया। वर्ष 2007 से परिसमापन की प्रक्रिया में चल रहे रोहतास उद्योग समूह को रेलवे ने करीब 240 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी कि इस क्षेत्र की औद्योगिक पहचान फिर लौटेगी। लोकसभा चुनाव 2009 से पहले तत्कालीन रेलमंत्री Lalu Prasad Yadav ने यहां रेल वैगन मरम्मत कारखाने का शिलान्यास किया था। उस समय लोगों को लगा कि डालमियानगर के अच्छे दिन लौट आएंगे, लेकिन यूपीए-2 सरकार के दौरान यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। प्रधानमंत्री से मिलकर की गई मांग वर्ष 2015 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन सांसद Upendra Kushwaha और शाहाबाद क्षेत्र के अन्य सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलकर यहां रेल कारखाना स्थापित करने की मांग उठाई। जून 2017 में रेल मंत्रालय में हुई बैठक में राइट्स को यहां रेल वैगन मरम्मत एवं कपलर कारखाना स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए बजटीय प्रावधान भी किया। वर्ष 2018 में परिसर के कबाड़ की नीलामी 94 करोड़ रुपये से अधिक राशि में की गई। प्रस्तावित रेल कारखाने के लिए चिह्नित 219 एकड़ भूमि से कबाड़ हटाकर उसे समतल भी कर दिया गया। डीएफसीसी निर्माण बना बाधा इस परियोजना के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (DFCC) का निर्माण बड़ी बाधा बन गया। प्रस्तावित रेल वैगन मरम्मत कारखाने के समीप से गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कारण रेल लाइन ले जाना मुश्किल हो गया। रेलवे ने वर्ष 2020 में बजटीय प्रावधान होने के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई। इसके बाद राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रयास किया। उन्‍होंने रेलमंत्री अश्‍वि‍नी वैष्‍णव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद पहलेजा रेलवे स्टेशन के पास से फ्लाईओवर के जरिए डालमियानगर तक रेलवे ट्रैक ले जाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा गया। अब रेलवे ने वर्ष 2026-27 के रेल बजट में डालमियानगर रेल वैगन मरम्मत कारखाने के लिए 430.20 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इससे इलाके के लोगों में एक बार फिर औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद जाग उठी है।  

403 करोड़ की लागत से नई रेल फैक्ट्री का निर्माण, बिहार में बढ़ेगा औद्योगिक विकास

 रोहतास बिहार के रोहतास जिले के डालमियानगर में रेल वैगन मरम्मत कारखाने का निर्माण किया जाएगा. फैक्ट्री के निर्माण को लेकर भारतीय रेलवे के डीडीयू रेल मंडल और राइट्स की तरफ से आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. रेल फैक्ट्री के बनने से बिहार के युवाओं को बड़ा फायदा हो सकेगा. नई फैक्ट्री की क्या है अनुमानित लागत? जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना की लागत लगभग 403.20 करोड़ रुपए है. इसे 219 एकड़ की जमीन पर विकसित किया जाएगा. रेल बजट 2026-27 में इस परियोजना के लिए राशि आवंटित की गई थी. समय के अंदर ही इस परियोजना के पूरा होने की संभावना जताई जा रही है. डीडीयू रेल मंडल के डीआरएम की माने तो, रोजगार के लिए यह बड़ा केंद्र बन सकेगा. युवाओं के साथ व्यापारियों को फायदा रेल फैक्ट्री के लगने से युवाओं के लिए रोजगार तो उपलब्ध होगा ही लेकिन इसके साथ-साथ आस-पास के इलाकों में वेल्डिंग, स्पेयर पार्ट्स निर्माण, पेंटिंग जैसे छोटे-बड़े उद्योगों को स्थापित भी किया जाएगा. इससे जिले की इकोनॉमी भी मजबूत हो सकेगी. नई रेल फैक्ट्री को लेकर आस-पास के लोगों और व्यापारियों के बीच उत्साह का माहौल है. 1984 में ही बंद हुआ था कारखाना डालमियानगर देश के फेमस औद्योगिक केंद्र में से एक है. 1984 में ही यह बंद हो गया था. लेकिन 2007 में फिर इसे चालू करने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया. 2009 में शिलान्यास भी किया गया. लेकिन किसी ना किसी कारण से काम शुरू नहीं हो पाया. लेकिन अब कारखाने को स्थापित किए जाने के काम को तेज कर दिया गया है. पहलेजा रेलवे स्टेशन से कारखाना तक नया रेलवे फ्लाईओवर और ट्रैक बनाया जाएगा. इससे वैगनों को मरम्मत के लिए वर्कशॉप तक आसानी से लाया जा सकेगा.