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प्लेटफॉर्म विस्तार के चलते उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर छह दिन बदलेगा ट्रेनों का शेड्यूल

उदयपुर उदयपुर शहर के रेलवे यात्रियों के लिए अहम खबर है। भारतीय रेलवे ने उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म विस्तार का कार्य 19 फरवरी से शुरू कर दिया है। यह काम 24 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग ब्लॉक लिया गया है, जिससे कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे द्वारा प्लेटफॉर्म नंबर 9 और 10 को उमरड़ा साइड से जोड़ने का काम किया जा रहा है। अभी प्लेटफॉर्म 9 केवल राणा प्रताप नगर साइड से जुड़ा है, जबकि प्लेटफॉर्म 10 सीधे किसी दिशा से कनेक्ट नहीं है। कार्य पूरा होने के बाद प्लेटफॉर्म 9 पर दोनों दिशाओं से ट्रेनें आ-जा सकेंगी और प्लेटफॉर्म 10 पर उमरड़ा की ओर से ट्रेनें खड़ी हो सकेंगी। इससे स्टेशन की क्षमता बढ़ेगी। ब्लॉक के दौरान अधिकांश ट्रेनें राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन और मावली जंक्शन रेलवे स्टेशन से संचालित होंगी। 19 से 24 फरवरी के बीच कई ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द रहेंगी या उनका स्टेशन बदला गया है। इनमें 59610 (चित्तौड़गढ़–उदयपुर), 59606 (बड़ी सादड़ी–उदयपुर), 59607 (उदयपुर–बड़ी सादड़ी), 19606 (उदयपुर–मदार जंक्शन) शामिल हैं। 23 फरवरी को 12963 (निजामुद्दीन–उदयपुर) और 20473 (दिल्ली–उदयपुर) राणा प्रताप नगर तक ही आएंगी। 24 फरवरी को 09721/09722 (जयपुर–उदयपुर), 20474 (उदयपुर–दिल्ली), 12964 (उदयपुर–निजामुद्दीन) सहित कई ट्रेनें उदयपुर सिटी स्टेशन नहीं आएंगी। 59835 (मंदसौर–उदयपुर) और 59836 (उदयपुर–मंदसौर) 24 फरवरी को केवल मावली तक चलेंगी। ब्लॉक के अंतिम दिन 24 फरवरी को सबसे ज्यादा असर रहेगा। 20987 (उदयपुर–असारवा) ट्रेन करीब 4 घंटे 20 मिनट की देरी से रवाना होगी, जबकि 69243 (असारवा–चित्तौड़गढ़) ट्रेन लगभग 3 घंटे 30 मिनट की देरी से चलेगी। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर ले लें। प्लेटफॉर्म विस्तार कार्य पूरा होने के बाद स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम हो जाएगा।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक: रायपुर स्टेशन पर बजा राज्य गीत

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आज 1 नवंबर को रायपुर रेलवे स्टेशन राज्य गीत ‘अरपा-पैरी के धार’ से गूंज उठा. प्लेटफॉर्म्स पर बैठे यात्रियों के चेहरों पर राज्यगीत की धुन सुनते ही खुशी की चमक दिखाई दी. इस दौरान कुछ यात्रियों ने रेलवे स्टेशन का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया है. बता दें, छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना को आज 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं. इसलिए छत्तीसगढ़ इस साल अपना रजत जयंति वर्ष मना रहा है. इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्योत्सव कार्यक्रम और छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन के उद्घाटन करने समेत कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे हैं. प्रदेश भर से बड़ी संख्या में लोग नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्व कार्यक्रम में शामिल होंगे और राज्य गठन का उत्सव मनाएंगे. छठ गीत बजने पर उठे थे सवाल छठ महापर्व पर छत्तीसगढ़ के रेलवे स्टेशनों पर छठ गीत भी बजाए गए थे, जिसे लेकर छत्तीसगढ़वासियों ने सवाल उठाए थे. प्रदेशवासियों का कहना था कि “छठ छत्तीसगढ़ का पर्व नहीं है. दूसरे राज्य का पर्व है. अब-तक रेलवे स्टेशनों पर छत्तीसगढ़ के गीत नहीं बजाए गए, लेकिन छठ गीत बजाया गया.” आज छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर रेलवे स्टेशन पर राज्य गीत सुनकर लोगों में उत्साह देखने को मिला. कई लोगों ने साथ-साथ गाया “जय हो जय हो… छत्तीसगढ़ मईया….”  

रेलवे स्टेशन का नाम बदला: औरंगाबाद अब छत्रपति संभाजीनगर

मुंबई दक्षिण मध्य रेलवे ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए ‘औरंगाबाद रेलवे स्टेशन’ का नाम बदलकर ‘छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन’ कर दिया है। रेलवे ने बताया कि यह नाम परिवर्तन औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है और स्टेशन के सभी साइनबोर्ड, टिकट, घोषणाएं और डिजिटल सिस्टम में नया नाम अपडेट किया जा रहा है। आधिकारिक नोटिस में लिखा है कि प्राधिकृत अधिकारी द्वारा "औरंगाबाद" रेलवे स्टेशन नांदेड मंडल, दक्षिण मध्य रेलवे का नाम बदलकर "छत्रपति संभाजीनगर" रेलवे स्टेशन करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस स्टेशन का नया स्टेशन कोड "CPSN” होगा। सभी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी रेलवे के मुताबिक, यह फैसला महाराष्ट्र सरकार की अनुशंसा और गृह मंत्रालय की स्वीकृति के बाद लिया गया। स्टेशन का नया नाम छत्रपति संभाजीनगर मराठा योद्धा छत्रपति संभाजी महाराज की वीरता और ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से रखा गया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस बदलाव के बाद यात्रियों को स्टेशन से जुड़ी सभी सूचनाएं और टिकटें नए नाम से जारी होंगी। एक अधिकारी ने कहा रेलवे ने सभी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। अब सभी प्लेटफॉर्म और ट्रेनों की घोषणाओं में स्टेशन का नाम ‘छत्रपति संभाजीनगर’ सुनाई देगा। इससे पहले, केंद्र सरकार ने 2022 में औरंगाबाद शहर का नाम भी छत्रपति संभाजीनगर करने की मंजूरी दी थी। अब रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तन के साथ यह प्रक्रिया पूरी हो गई है। 15 अक्तूबर को जारी हुआ था गजट नोटिफिकेशन गौरतलब है कि भाजता नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने  विगत 15 अक्तूबर को इसका नाम बदलने का गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। तीन साल पहले तत्कालीन सरकार ने औरंगाबाद शहर का नाम छत्रपति संभाजीनगर किया था। ये फैसला छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र और मराठा राज्य के दूसरे शासक छत्रपति संभाजी के सम्मान में लिया गया। औरंगाबाद का नाम पहले मुगल सम्राट औरंगजेब के नाम पर रखा गया था। इतिहासकारों के मुताबिक औरंगाबाद रेलवे स्टेशन 1900 में हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली खान के शासनकाल में खोला गया था। छत्रपति संभाजीनगर एक पर्यटन केंद्र है और अजंता और एलोरा की गुफाओं सहित कई ऐतिहासिक स्मारकों से घिरा हुआ है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की इकाई- यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है।

रेलवे स्टेशनों पर बैटरी गाड़ियों के खिलाफ कुलियों का हल्ला, राजनीतिक समर्थन भी साथ

रायपुर रायपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए बैटरी चलित वाहन शुरू करने के फैसले के खिलाफ कुलियों का विरोध नहीं थम रहा है. इस कदम को अपनी आजीविका पर बड़ा संकट बताते हुए बड़ी संख्या में कुलि आज प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर लामबंद हुए. रेलवे लाइसेंसी पोर्टर्स के बैनर तले कुली प्रदर्शन कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे कुलियों का कहना है कि रेलवे में आधुनिकीकरण और निजीकरण के कारण उनकी आजीविका पर भीषण संकट मंडरा रहा है. महंगाई के दौर में उनकी सीमित आमदनी से परिवार का पालन-पोषण करना लगभग असंभव हो गया है. रेलवे ने कुलियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई आदेश जारी किए थे, जैसे उनके बच्चों को रेलवे विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा, परिवार के सदस्यों के लिए निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था, प्रतिवर्ष चार वर्दी प्रदान करना और आधुनिक सुविधाओं से युक्त विश्रामालय उपलब्ध कराना. ये सभी प्रावधान अभी तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाए हैं. विशेष रूप से रायपुर मंडल में कुलियों की उपस्थितिऔर स्टेशनों पर बैटरी चालित वाहनों की निःशुल्क सेवा उपलब्ध होने के बावजूद सामान ढोने का ठेकेदारी कार्य एक निजी कंपनी को सौंप दिया है—प्रति यात्री 50 रुपये तथा प्रति लगेज 30 रुपये की दर से. यह कुलियों की आजीविका का हनन है. गौरतलब है कि रेल्वे लायसेंसी पोर्टर्स मजदूर सहकारी संस्था मर्यादित, रायपुर ने 22 सितंबर को मंडल रेल प्रबंधक को ज्ञापन दिया था. जिसमें उन्हें आश्वसन मिला था कि उनके हितों का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन कुछ घण्टों बाद बताया गया कि निविदा निरस्त हो सकती है. उन्होंने मांग की है कि निविदा को निरस्त कर कुलियों के रोजी-रोजगार को बचाने की व्यवस्था की जाए. नहीं तो जिस प्रकार 2003 में कुलियों को रेलवे में समायोजित किया गया था, उसी प्रकार पुनः किया जाए. छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की एंट्री कुलियों ने बताया कि वह आगे की लड़ाई छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के साथ मिलकर लड़ेंगे. ज्ञापन, प्रेस वार्ता, धरना, शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे.