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रवि किशन का रिएक्शन: रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से फिर चर्चा में आई पुरानी भोजपुरी फिल्म

आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धु्रंधर के दोनों पार्ट पर दुनियाभर के लोगों ने जमकर प्यार लुटाया. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर चुन-चुनकर रिकॉर्ड तोड़ डाले. अब इस फिल्म के बीच एक्टर रवि किशन की भी मौज हो गई. इसके पीछे की वजह खुद एक्टर ने बताई है. दरअसल साल 2014 में आई रवि किशन की फिल्म 'धुरंधर: द शूटर', रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर के आने के बाद से अचानक सुर्खियों में आ गई. उस दौरान भोजपुरी 'धुरंधर' के सीन सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे थे. लोगों ने तो इसे ही बॉलीवुड की धुरंधर का रीमेक तक बता दिया. अब इस पर रवि किशन ने रिएक्ट किया है. रवि किशन ने क्या कहा? धमाल 4 के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान रवि किशन से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए अपनी बात रखी. रवि किशन ने अपने खास और देसी अंदाज में जवाब देते हुए कहा, 'हां भाई, मुझे इस बात की पूरी खबर है. मेरी जिंदगी में ऐसी धमाकेदार और अजीबोगरीब चीजें अक्सर होती रहती हैं.' उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने बहुत पहले 'धुरंधर' नाम की फिल्म में काम किया था और उसका जोन भी कुछ वैसा ही था, जैसी 2025-26 में आई बॉलीवुड वाली 'धुरंधर' है. हालांकि, उनकी फिल्म भोजपुरी में थी और उसे एक सीमित बजट के साथ बनाया गया था. हंसते हुए रवि किशन ने आगे कहा कि आज के समय में बॉलीवुड की 'धुरंधर' को ढूंढने के चक्कर में या फिर उस फिल्म की जबरदस्त लहर की वजह से लोगों ने उनकी पुरानी भोजपुरी 'धुरंधर' को भी पूरा देख डाला. इसके लिए उन्होंने दर्शकों का हंसते हुए शुक्रिया अदा किया. मजाकिया लहजे में चुटकी लेते हुए रवि किशन बोले, 'मेरी इस फिल्म के जो प्रोड्यूसर्स और राइट्स होल्डर्स हैं, वो तो इस चक्कर में रातोरात अचानक करोड़पति बन गए हैं.' बता दें कि भोजपुरी फिल्म धुरंधर: द शूटर को दीपक तिवारी ने डायरेक्ट किया था. इसमें रवि किशन ने पुलिस ऑफिसर का रोल किया था. उनके किरदार का नाम रणवीर था. धमाल 4 का ट्रेलर हुआ रिलीज बीते दिन मुंबई के पास एक एम्यूजमेंट पार्क में जब फिल्म 'धमाल 4' के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान मूवी की स्टारकास्ट जुटी. इस खास मौके पर अजय देवगन, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, उपेंद्र लिमये और मशहूर भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन के साथ-साथ बाल कलाकार रियांश डाभी और अक्षरा पडवाल भी मौजूद रहे. फिल्म के प्रोड्यूसर भूषण कुमार, अशोक ठकेरिया और डायरेक्टर इंद्र कुमार ने भी इस इवेंट में शिरकत की. फिल्म 10 जुलाई को रिलीज होने वाली है.

फर्जी केस करने वालों को हो सजा — रवि किशन ने संसद में उठाई कड़ी कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली/ लखनऊ  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद रवि किशन ने झूठे मुकदमे करने वालों को सजा दिलाने के लिए कानून बनाने की मांग केंद्र सरकार से की है। लोकसभा में गुरुवार को शून्यकाल (जीरो आवर) के दौरान रवि किशन ने फर्जी केस के कारण निर्दोष लोगों की मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों की संक्षिप्त चर्चा करते हुए कहा कि कानून बनाकर झूठा केस करने वाले और उसके आरोपों को सही बताने वाले जांच अधिकारियों पर कार्रवाई का कानून बनाना चाहिए। बता दें कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 248 बरी होने पर निर्दोष आरोपी को झूठे आरोप लगाने वाले पर केस करने का अधिकार देता है, जिसमें 5 से 10 साल सजा हो सकती है। लेकिन वह नया केस प्राथमिकी, जांच, चार्जशीट, सबूत, गवाही, बहस की पूरी प्रक्रिया से गुजरकर फैसले और सजा तक पहुंचने में कई साल ले सकता है।   रवि किशन ने कहा- ‘अगर मुजरिम है, गलत किया है तो सजा मिले। लेकिन कोई जुर्म नहीं किया है और किसी ने उस पर झूठा मुकदमा किया है (तो) जिस पर मुकदमा होता है, उसका परिवार बिखर जाता है, समाज में साख खत्म हो जाती है, बहन-बेटी की शादी बर्बाद हो जाती है। मुकदमा करने वाला आराम से रहता है। सरकार पर भी बोझ आता है। अनगिनत झूठे मुकदमे का आर्थिक बोझ सरकार पर पड़ता है। सरकार से मांग है कि कानून का दुरुपयोग कर फर्जी मुकदमा दायर करने वालों पर सख्त कार्रवाई का कानून बनाया जाए। फर्जी मुकदमों को सही ठहराने वाली जांच एजेंसियों पर भी कानून बनना चाहिए। झूठा मुकदमा करने वालों के लिए सजा तय होनी चाहिए।’ बीएनएस की धारा 248 के मद्देनजर रवि किशन की मांग को समझने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ने मशहूर वकील अश्विनी दुबे से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि 248 का प्रावधान एक नए केस की शुरुआत है, जो लंबी न्यायिक प्रक्रिया है। ऐसे में कई सालों से कोर्ट-कचहरी करने के बाद बरी हुआ निर्दोष आरोपी झूठे केस का नया मुकदमा करके फिर अगले कई साल अदालतों के चक्कर नहीं काटना चाहता। इस मनोवैज्ञानिक स्थिति का फायदा झूठे केस करने वाले उठाते हैं। अश्विनी ने कहा कि कानून में ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि कोर्ट अगर किसी को झूठे आरोप से बरी करने का फैसला दे रहा है, तो उसी आदेश में झूठे आरोप लगाने वाले और जांच में उसे सही बताने वाले जांच अधिकारी (आईओ) को भी सजा दे दी दिया जाए, जुर्माना लगाया जाए। झूठे केस करने वाले और झूठे आरोपों को जांच में सही ठहराने वाले अधिकारी इससे डरेंगे। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी दुबे ने कहा कि एक निर्दोष व्यक्ति गलत मुकदमों को कई साल झेलता है और बाद में जब तक कोर्ट उसे बाइज्जत बरी करता है, उसका पूरा जीवन निकल चुका होता है। मानसिक, आर्थिक, सामाजिक पीड़ा मिलती है, तिरस्कार मिलता है। बिना दोषी ही वह दोषी मान लिया जाता है। उन मुकदमों में झूठे शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई आम तौर पर नहीं होती है। दुबे ने कहा- ‘बीएनएस की धारा 248 नया केस करने के लिए है। उसकी प्रक्रिया उसी तरह वर्षों तक चलेगी। अगर अदालत को लगता है कि क्राइम का आरोप झूठा लगा था तो उसके खिलाफ उसी जजमेंट में कार्रवाई हो। सजा मिले और आर्थिक दंड मिले। इससे झूठे मुकदमे कम होंगे। निर्दोष को सजा नहीं होगी। झूठा मुकदमा करने से पहले लोग डरेंगे।’ अश्विनी दुबे ने कहा कि झूठे मुकदमों में अधिकतर केस एससी-एसटी एक्ट, रेप, शारीरिक शोषण, शादी के झूठे वादे, छेड़छाड़ जैसे आरोपों में हो रहे हैं। उन्होंने कहा- ‘आम तौर पर देखा जाता है कि एडल्ट कपल संबंध बनाते हैं और बाद में रिश्तों में खटास आती है तो रेप या यौन उत्पीड़न या शादी के झूठे वादे का केस करा दिया जाता है। बाद में पता चलता है कि आपसी सहमति से संबंध बना था। कोई दबाब नहीं था, कुछ जबरन नहीं था। इसी तरह से कई बार एससी-एसटी, शारीरिक शोषण, छेड़छाड़ के कानून का दुरुपयोग हो रहा है।’