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रोबोटिक्स में क्रांति: NVIDIA के वर्ल्ड मॉडल से रोबोट पाएंगे इंसानी जैसी समझ

नई दिल्ली रोबोट समय के साथ-साथ स्मार्ट होते जा रहे हैं। अब वो दिन भी ज्यादा दूर नहीं जब रोबोट इंसानों की तरह सोच-समझ पाएंगे। जी हां, NVIDIA ने कॉसमॉस पॉलिसी  पेश की है। यह कुछ और नहीं बल्कि रोबोट को कंट्रोल करने का एक नया तरीका है। यह NVIDIA के उस बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसमें वे फिजिकल AI सिस्टम के लिए कुछ ऐसे मॉडल बना रहे हैं, जिनकी मदद से फिजिकल एआई सिस्टम दुनिया को समझ पाएं। यह फ्रेमवर्क इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कंट्रोल और प्लानिंग टास्क के लिए बड़े वीडियो प्रेडिक्शन मॉडल को अडैप्ट करके रोबोट आसानी से तय कर पाएं कि उन्हें कौन सी हरकत करनी है। रोबोट्स के लिए पॉलिसी क्या होती है? बता दें कि रोबोटिक्स में, 'पॉलिसी' का मतलब उस दिमाग से होता है, जो तय करता है कि क्या करना चाहिए। यह रोबोट को मिलने वाली जानकारी जैसे कैमरे की फोटोज और सेंसर के डेटा को रोबोट की हरकत में बदलता है। पुराने रोबोट की पॉलिसी अक्सर खास काम के लिए बनाए गए न्यूरल नेटवर्क होती थीं। इनमें अलग-अलग हिस्से जैसे चीजों को समझना, प्लान बनाना और कंट्रोल करना शामिल होते थे। इन सिस्टम को हर रोबोट या माहौल के लिए बहुत सारा लेबल किया हुआ डेटा चाहिए होता था और खास तौर पर ट्यूनिंग करनी पड़ती थी। कैसे काम करती है Cosmo Policy? Cosmos Policy इससे काफी अलग है। NVIDIA शुरू से एक नया कंट्रोल मॉडल बनाने के बजाय, डेमोंस्ट्रेशन डेटा पर पहले से सीखे हुए वीडियो वर्ल्ड मॉडल को पोस्ट-ट्रेन यानी फिर से ट्रेन करती है। इसे Cosmos Predict कहते हैं। यह मॉडल पहले से ही जानता है कि फिजिकल दुनिया समय के साथ कैसे बदलती है, क्योंकि इसने बड़े पैमाने पर वीडियो डेटा से सीखा है। इस अतिरिक्त ट्रेनिंग के दौरान, रोबोट के एक्शन, फिजिकल स्टेट और टास्क के नतीजों को मॉडल के इंटरनल टेम्परल रिप्रेजेंटेशन का हिस्सा माना जाता है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि रोबोट को आगे क्या करना चाहिए और इसके नतीजे क्या होंगे। अलग-अलग मॉडल जोड़ने की नहीं होती जरूरत इस डिजाइन की वजह से Cosmos Policy एक ही आर्किटेक्चर में एक साथ हरकतें, भविष्य की स्थितियां और काम के सफल होने की उम्मीद का अंदाजा लगा पाता है। सिर्फ एक बार की ट्रेनिंग पर निर्भर रहने से, यह फ्रेमवर्क आर्किटेक्चर की जटिलता को कम करता है और परसेप्शन व कंट्रोल के लिए कई अलग-अलग मॉडल को जोड़ने की जरूरत नहीं होती है। ये इमेज NVIDIA की ऑफिशियल साइट से ली गई है। क्या असकरदार है यह नई पॉलिसी? बेंचमार्क के नतीजे बताते हैं कि यह तरीका असरदार है। रोबोटिक मैनिपुलेशन के स्टैंडर्ड बेंचमार्क पर Cosmos Policy ने उन मल्टी-स्टेपकामों में, जिनमें लंबे समय तक सोचने की जरूरत होती है, बहुत अच्छे सक्सेस रेट हासिल किए। कुछ मामलों में, इसने मौजूदा तरीकों के बराबर या उनसे बेहतर परफॉर्म किया, जबकि ट्रेनिंग के लिए बहुत कम डेमो का इस्तेमाल किया। यह डेटा एफिशिएंसी रोबोटिक्स में बहुत जरूरी है, क्योंकि असली दुनिया का ट्रेनिंग डेटा इकट्ठा करना महंगा और समय लेने वाला होता है। बड़े वीडियो मॉडल में पहले से मौजूद जानकारी का फायदा उठाकर Cosmos Policy भरोसेमंद कंट्रोल बिहेविअर सीखने के लिए रोबोट के खास डेटा की जरूरत को कम करता है। पॉलिसी की खास बात Cosmos Policy की एक और खास बात यह है कि यह इन्फेरेंस टाइम पर प्लानिंग कर सकता है। सिर्फ अगली तुरंत होने वाली हरकत बताने के बजाय, मॉडल कई संभावित एक्शन सीक्वेंस बना और उनका मूल्यांकन कर सकता है। इन सीक्वेंस के भविष्य में नतीजों और रिवॉर्ड का अंदाजा लगाकर, रोबोट ऐसी हरकतें चुन सकता है, जिनके लंबे समय तक सफल होने की ज्यादा संभावना हो। यह प्लानिंग क्षमता रोबोट को ज्यादा रिएक्टिव होने के बजाय ज्यादा स्ट्रेटेजिक बनने में मदद करती है, खासकर जब वे मुश्किल काम कर रहे हों। सोच-समझकर ले पाएंगे सही फैसला यह एक बहुत ही अच्छा और जरूरी डेवलपमेंट है। रोबोट सिर्फ वही नहीं करेंगे, जो उन्हें सिखाया गया है। बल्कि वे खुद सोच-समझकर, प्लान बनाकर बेहतर फैसले ले पाएंगे। यह सब इसलिए मुमकिन हो रहा है क्योंकि NVIDIA ने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो वीडियो देखकर दुनिया को समझता है, ठीक वैसे ही जैसे हम इंसान देखते और सीखते हैं।

नई कृषि क्रांति की तैयारी – ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी स्मार्ट खेती

नई दिल्ली.  भारत में कृषि अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक का संगम बन चुकी है. एग्री-टेक यानी कृषि प्रौद्योगिकी ने किसानों की मेहनत को आधुनिक साधनों से जोड़कर खेती को लाभकारी बना दिया है. ड्रोन से लेकर सेंसर्स, डेटा एनालिटिक्स और मोबाइल ऐप्स तक- हर स्तर पर तकनीक का असर दिखने लगा है. अब किसान मौसम की सटीक जानकारी, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की पैदावार का अनुमान डिजिटल साधनों से कर पा रहे हैं. इससे न सिर्फ उत्पादकता बढ़ रही है, बल्कि लागत में भी बड़ी कमी आई है. केंद्र सरकार की योजना परवान चढ़ी तो देश में कृषि अब हल-बैल से नहीं, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), रोबोट और बीजों की जीन एडिटिंग से चलेगी। पानी की बर्बादी शून्य होगी और भरपूर पैदावार से अन्नदाता किसान की आय मौजूदा स्तर से दोगुनी हो सकती है। नीति आयोग ने अगले पांच साल के लिए देश में खेती का रोडमैप जारी करते हुए यह सपना दिखाया है जो सच भी हो सकता है। नीति आयोग ने रोडमैप के रूप में विजन डॉक्यूमेंट ‘रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर : रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी लेड ट्रांसफॉर्मेशन’ तैयार किया है। इस डॉक्यूमेंट में कृषि में 100 प्रतिशत आत्मनिर्भता लाने के लिए ऐसी तकनीकों को चुना है, जिसके जरिए देश की कृषि में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। ये तकनीकें क्लाइमेट चेंज, पानी की कमी, मिट्टी की थकान और बाजार की अनिश्चितता को खत्म करने में मददगार बनेगी। रोडमैप पर प्रभावी अमल से अगले 5 साल में देश मेें कृषि लागत 40 प्रतिशत घटने का अनुमान जताया गया है। कृषि लागत को ही किसानों की खुशहाली और खेती को लाभकारी बनाने में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। रोडमैप से कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी। स्मार्ट फार्मिंग: खेतों से जुड़ी स्मार्ट सोच ‘स्मार्ट फार्मिंग’ अब भारतीय गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह तकनीक खेती के हर चरण में वैज्ञानिक नजरिया अपनाने पर आधारित है. उदाहरण के लिए, ड्रोन के जरिए फसलों पर छिड़काव से समय और पानी दोनों की बचत होती है. वहीं, सेंसर से मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की निगरानी कर किसान तय कर सकते हैं कि किस समय कितनी सिंचाई या खाद की जरूरत है. कई स्टार्टअप्स किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से बाजार भाव, बीज चयन, और फसल बीमा की जानकारी भी दे रहे हैं. इससे किसान पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और जागरूक हो रहे हैं. डिजिटल एग्रीकल्चर से नए अवसर सरकार और निजी कंपनियां मिलकर ‘डिजिटल एग्रीकल्चर’ को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं. प्रधानमंत्री किसान ड्रोन योजना, डिजिटल किसान पोर्टल, और ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) जैसी पहलों ने किसानों के लिए तकनीक को सुलभ बना दिया है. आज किसान अपने स्मार्टफोन से सीधे मंडियों से जुड़ सकते हैं और बिचौलियों से बचकर बेहतर दाम पा सकते हैं. इसके अलावा, सैटेलाइट इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें फसलों की स्थिति पर नज़र रखती हैं और समय रहते चेतावनी भी देती हैं. इससे फसल नुकसान की संभावना काफी घट गई है. आधुनिक तकनीक से आत्मनिर्भर किसान एग्री-टेक ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी है. जहां पहले खेती को जोखिम भरा माना जाता था, वहीं अब यह इनोवेशन और उद्यमिता का क्षेत्र बन चुका है. युवा किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक, हाइड्रोपोनिक और प्रिसिशन फार्मिंग जैसी तकनीकों को अपना रहे हैं. इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है. भारत धीरे-धीरे ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर इकोनॉमी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां तकनीक और परंपरा मिलकर एक स्थायी कृषि भविष्य की नींव रख रहे हैं. संक्षेप में भारत में एग्री-टेक सिर्फ खेती का आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में नई उम्मीदों की बुआई है. तकनीक ने साबित कर दिया है कि अगर सही जानकारी और संसाधन मिलें, तो खेत भी डिजिटल इंडिया की ताकत बन सकते हैं. फ्रंटियर टेक्नोलॉजी : खेत से लैब तक ड्रोन फार्मिंग : एक घंटे में 50 एकड़ पर कीटनाशक छिड़काव, 80% दवा बचत। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग (एआइ/एमएल): मौसम, कीट, बीमारी का 100% सटीक पूर्वानुमान। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) : मिट्टी की नमी, पीएच, पोषक तत्व 24 घंटे सातों दिवस मोबाइल पर। सैटेलाइट इमेजरी : बादल पार कर फसल की लाइव तस्वीर, सूखा-बाढ़ अलर्ट। ब्लॉकचेन : बीज से बाजार तक पारदर्शी चेन, नकली खाद-बीज खत्म। रोबोटिक्स : बुवाई, निराई, कटाई सब ऑटोमैटिक, मजदूरों की कमी दूर। जीन एडिटिंग (सीआरआइएसपीआर ) : 2 साल में सूखा, कीट, नमक रोधी नई किस्में। प्रिसिजन फार्मिंग : हर पौधे को अलग खाद-पानी, 30% लागत में होगी बचत। वर्टिकल फार्मिंग : शहरों में की छतों पर 10 मंजिला खेत, 1 एकड़ यानी 10 एकड़ यील्ड पर फॉर्मिंग। हाइड्रोपोनिक्स : बिना मिट्टी, 90 प्रतिशत कम पानी, साल भर फसल। एरोपोनिक्स : हवा में उगाएं सब्जी, पानी की बूंद भी न बर्बाद। बिग डेटा एनालिटिक्स : हर गांव, हर फसल का अलग ‘डिजिटल फॉर्मूला’। साल दर साल ऐसे कदम वर्ष –लक्ष्य — यह होगा 2026- पायलट प्रोजेक्ट – 10 राज्यों में ड्रोन एआइ हब, 1 लाख एकड़ कवर 2027- डिजिटल पहुंच – 50 प्रतिशत किसानों को मुफ्त ऐप, सैटेलाइट डेटा, आइओटी किट मिलेंगे 2028 –ग्लोबल मार्केट- ब्लॉक चेन से सीधे निर्यात, 10 लाख टन ऑर्गेनिक 2029—रोबोट क्रांति-— 500 रुपए /दिन रोबोट किराया, 50,000 यूनिट डिप्लॉय 2030—स्मार्ट विलेज-–हर गांव में ‘डिजिटल खेत’, आय दोगुनी की गारंटी किसानो को ऐसे लाभ आय: 1 एकड़ में गेहूं से मौजूदा 25,000 रुपए से बढ़कर 2030 में 70,000 रुपए लागत कम: 40% कम होगी (खाद-पानी-दवा) उत्पादन बढ़ेगा : 60% बढ़ेगा पानी बचत : 90% (हाइड्रो/एरोपोनिक्स) बाजार उपलब्धता: 100% (ब्लॉकचेन) फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर : कृषि-टेक फंड : 50,000 करोड़ रुपए ड्रोन दीदी : 1 लाख महिलाओं को ट्रेनिंग। एआइ लैब: हर जिले में 1 एआइ लैब बनेगी। फ्री स्मार्टफोन: 10 करोड़ किसानों को रोबोट बैंक: 1 लाख यूनिट रेंट पर खुलेगा। सब साथ आएंगे होंगे सफल यह यात्रा अकेले सरकार की नहीं है। यह तभी सफल होगी जब किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता एक साथ आएं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचे। जहां यह वास्तव में बदलाव ला सकें। यह रोडमैप ऐसे भविष्य का एक आह्वान है, जहां भारत … Read more