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भारत ने दिखाई मजबूती, रूस के साथ खड़े होकर दुश्मनों को किया पीछे

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन के बीच जब युद्ध शुरू हुआ था, तो पश्चिमी देशों ने कसम खा ली थी कि वे रूस को दुनिया में बिल्कुल अकेला कर देंगे. उस पर पाबंदियों की ऐसी झड़ी लगाई गई कि लगा रूस की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी. लेकिन आज तस्वीर बिल्कुल उलट चुकी है. रूस को अलग-थलग करने चले देश आज खुद बंटे हुए नजर आ रहे हैं और रूस की तो मानो चांदी हो गई है. इस पूरी कहानी में गेमचेंजर बना है भारत. भारत ने जिस तरह पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बावजूद रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा, उसने दुनिया के कई अन्य देशों को भी हिम्मत दी है. अब भारत की तरह ही कई और देश रूस के साथ डटकर खड़े हो गए हैं. स्थिति यह आ गई है कि जो देश कल तक रूस के पक्के दुश्मन बने हुए थे और हर दिन नई पाबंदियां लगाने की वकालत करते थे, वे भी अब पीछे हटते दिख रहे हैं. भारत का दांव- हम वहीं से खरीदेंगे, जहां फायदा होगा रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआत से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारत पर भारी दबाव बनाया था कि वह रूस से तेल न खरीदे. उनका तर्क था कि रूस से तेल खरीदकर भारत एक तरह से इस युद्ध को फंड कर रहा है. लेकिन भारत ने अपनी विदेश नीति को बिल्कुल साफ रखा. भारत सरकार का सीधा सा स्टैंड था, हमारे लिए हमारे देश की 140 करोड़ की आबादी सबसे पहले है. अगर हमें कहीं से सस्ता तेल मिलेगा, जिससे हमारे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में रहें और महंगाई न बढ़े, तो हम वहीं से तेल खरीदेंगे. आज भी यही खबर आ रही कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं कर रहा है. भारत के इस नेशन फर्स्ट वाले रवैये ने दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया. दुनिया को समझ आ गया कि एनर्जी स‍िक्‍योर‍िटी किसी भी देश का पहला अधिकार है और इसके लिए किसी महाशक्ति के आगे झुकने की जरूरत नहीं है. भारत का यही स्टैंड अब दुनिया के कई देशों के लिए रोल मॉडल बन गया है. अब हंगरी बोला- दबाव के आगे नहीं झुकेंगे भारत ने जो रास्ता दिखाया, अब यूरोपीय देश हंगरी भी उसी पर पूरी ताकत से चल पड़ा है. हंगरी ने यूरोपीय यूनियन की आंखों में आंखें डालकर साफ कह दिया है कि वह रूस से तेल खरीदने के मामले में किसी के दबाव में नहीं आएगा. हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने दो टूक कहा, हम मौजूदा विकल्पों से ज्यादा महंगे और कम भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत खरीदने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं. उनका सीधा सा मतलब था कि जब रूस हमें सस्ता और भरोसेमंद तेल और गैस दे रहा है, तो हम सिर्फ यूरोप की राजनीति के चक्कर में कहीं और से महंगा तेल क्यों खरीदें? सिज्जार्टो ने इसे देश का अध‍िकार बताया. यानी यह हंगरी का अपना फैसला है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतें कैसे पूरी करे, इसमें कोई दूसरा देश दखल नहीं दे सकता. हंगरी के इस रुख ने यूरोप के उन देशों की नींद उड़ा दी है जो रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना चाहते थे. हंगरी यह बात अच्छे से जानता है कि अगर उसने रूस से तेल और गैस लेना बंद कर दिया, तो उसके देश में हाहाकार मच जाएगा, महंगाई आसमान छूने लगेगी और इंडस्ट्रीज बंद होने की कगार पर आ जाएंगी. इसलिए उसने कूटनीति से ज्यादा अपने देश की अर्थव्यवस्था को चुना है. यूरोपीय यूनियन में फूट: पाबंदियों पर नहीं बन पा रही बात एक समय था जब यूरोपीय यूनियन रूस के खिलाफ पाबंदियों का नया पैकेज लाने के लिए बस एक इशारे का इंतजार करता था. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. खुद यूरोपीय यूनियन ने मान लिया है कि फिलहाल रूस पर नई पाबंदियां लगाने के मामले में कोई फैसला नहीं हो पाएगा. ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने सोमवार को ब्रसेल्स में अपनी बेबसी जाहिर की. उन्होंने कहा, यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए पाबंदियों के पैकेज पर सहमति नहीं बन पाएगी. इसका सबसे बड़ा कारण हंगरी का लगातार विरोध है. नियम के मुताबिक, यूरोपीय यूनियन में कोई भी बड़ा फैसला तभी लागू होता है जब सभी सदस्य देश उस पर सहमत हों. हंगरी ने वीटो पावर का इस्तेमाल करके ईयू के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. जर्मनी की छटपटाहट: ‘हंगरी को मनाएंगे’ हंगरी के इस कड़े रुख से जर्मनी जैसे बड़े यूरोपीय देश काफी नाराज और परेशान हैं. जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि वे हंगरी से अपनी जिद छोड़ने की अपील करेंगे. वाडेफुल ने कहा, मुझे नहीं लगता कि हंगरी के लिए अपनी आजादी और यूरोपीय संप्रभुता के संघर्ष को धोखा देना सही है. हम एक बार फिर से बुडापेस्ट और ब्रसेल्स में हंगरी के सामने अपनी दलीलें रखेंगे और उनसे अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहेंगे. लेकिन कूटनीति के जानकार मानते हैं कि जर्मनी की यह अपील शायद ही कोई असर दिखाए. यूरोप के कई देश अब अंदर ही अंदर यह समझ चुके हैं कि बिना रूसी ऊर्जा के उनका गुजारा मुश्किल है. ऊपर से वे आदर्शवाद की बातें करते हैं, लेकिन अंदर से उनकी अर्थव्यवस्थाएं भी सस्ते ईंधन के लिए तरस रही हैं. ट्रंप फैक्टर ने यूरोप को भारत के करीब ला दिया इस पूरी कहानी में एक और बहुत बड़ा और दिलचस्प एंगल है, और वो है अमेरिका का ट्रंप फैक्टर. डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां हमेशा से अमेरिका फर्स्ट की रही हैं. उनका अंदाज मनमानी भरा रहा है. वे कब किस देश से कैसा व्यवहार करेंगे, यह कोई नहीं जानता. ट्रंप कई बार यूरोपीय देशों को धमका चुके हैं कि वे अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं, अमेरिका हमेशा उनका बिल नहीं भरेगा. ट्रंप की इसी मनमानी और अनिश्चितता ने यूरोपीय देशों को डरा दिया है. यूरोप को अब लगने लगा है कि अमेरिका के भरोसे बैठकर रूस से पूरी तरह दुश्मनी मोल लेना अक्लमंदी नहीं है. अगर कल को अमेरिका ने हाथ खींच लिया, तो यूरोप बीच मझधार में फंस जाएगा. यही वजह है कि अब … Read more

यूक्रेन में बर्फीली ठंड, माइनस 10 डिग्री तापमान में 12 लाख लोग परेशान, रूसी हमले का असर

कीव  यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार और भी घातक होते जा रहे हैं. शनिवार तड़के रूस ने यूक्रेन के एनर्जी सिस्टम पर एक और बड़े पैमाने पर हमला किया, जिससे राजधानी कीव समेत देश के कई हिस्सों में जोरदार धमाकों की आवाजें गूंजीं. इस हमले के बाद पूरे यूक्रेन में करीब 12 लाख संपत्तियां बिजली से वंचित हो गईं, जबकि तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है. यूक्रेन के उप प्रधानमंत्री ओलेक्सी कुलेबा ने बताया कि राजधानी कीव में देर रात तक 3,200 से ज्यादा इमारतों में हीटिंग की व्यवस्था ठप हो गई है. सुबह यह संख्या करीब 6,000 थी, जिसे इमरजेंसी मरम्मत के जरिए कुछ हद तक कम किया गया. उन्होंने कहा कि राजधानी में 160 से ज्यादा आपातकालीन टीमें हीटिंग सिस्टम बहाल करने में जुटी हुई हैं. ऊर्जा मंत्री डेनिस श्मिहाल ने बताया कि सिर्फ कीव में ही 8 लाख से ज्यादा घरों में अब भी बिजली नहीं है. वहीं, राजधानी के उत्तर में स्थित चेर्निहिव क्षेत्र में करीब 4 लाख लोग अंधेरे में हैं. उन्होंने कहा कि "दुश्मन" के लगातार हमलों के कारण स्थिति को स्थिर करना बेहद मुश्किल हो गया है. यूक्रेन के कई हिस्से में हीटिंग सिस्टम क्षतिग्रस्त इन हमलों का असर आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिख रहा है. पहले से ही कई इलाकों में केंद्रीय हीटिंग सिस्टम क्षतिग्रस्त था, जिससे अपार्टमेंट पहले ही ठंडे हो चुके थे. अब नए हमलों ने हालात और खराब कर दिए हैं. यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरीडेन्को ने कहा कि रूस ने राजधानी कीव के साथ-साथ देश के उत्तर और पूर्व के चार अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाया. उन्होंने बताया कि सरकार तेजी से क्षतिग्रस्त बिजली संयंत्रों की मरम्मत कर रही है, बिजली आयात बढ़ाया जा रहा है और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को भी जोड़ा जा रहा है. रूसी हमले में शख्स की मौत, 30 घायल इस बीच कीव के मेयर विताली क्लिच्को ने बताया कि राजधानी में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं, जिनमें से तीन को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहीं यूक्रेन के दूसरे बड़े शहर खारकीव में 30 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है. गौरतलब है कि ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच संयुक्त अरब अमीरात में बातचीत चल रही है. हालांकि दो दिन की वार्ता के बाद भी किसी समझौते के संकेत नहीं मिले हैं और अगले सप्ताह फिर बातचीत होने की संभावना है.

19 दिन से लापता अलवर के छात्र की रूस में मिली लाश, डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया

अलवर राजस्थान में अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र से एक दर्दनाक खबर सामने आई है. कफनवाड़ा गांव में रहने वाला 22 साल का अजीत चौधरी रूस के उफ़ा शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था, अब अजीत का शव व्हाइट रिवर के पास बने एक बांध में मिला है. अजीत बीते 19 अक्टूबर से लापता था. उसके शव मिलने की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है.  परिजनों ने तीन बीघा जमीन बेचकर बेटे को डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए भेजा था. अजीत साल 2023 से रूस के उफा में स्थित बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. वहां वह बीते 19 अक्टूबर को करीब 11 बजे हॉस्टल से निकला था. दोस्तों ने बताया था कि वो दूध लेकर वापस आधा घंटे में लौटने की कहकर निकला था. उसके बाद वापस नहीं लौटा. रुस में स्थित भारतीय दूतावास से परिजनों को इस मामले को देख रहे सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सागवान को सूचना मिली कि लापता छात्र अजीत चौधरी का शव व्हाइट रिवर से लगते एक बांध में मिला है. शव की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सागवान और जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर, भाजपा नेता बन्नाराम मीना ने बताया कि दूतावास से सूचना मिली है कि छात्र अजीत चौधरी का शव मिल गया है. शव की पहचान अजीत के साथ पढ़ने वाले अन्य छात्रों ने की है. अब विदेश मंत्रालय और रूस में स्थित भारतीय दूतावास व रूसी सरकार से वार्ता कर शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करने के बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. शव को भारत लाने में दो-तीन दिन का समय लग सकता है. इस मामले को लेकर अलवर के जाट छात्रावास में एक बैठक हुई, जिसमें समाज के लोगों ने रूस में लापता छात्र अजीत चौधरी की तलाश करने में लापरवाही बरतने की बात कही. साथ ही शव को जल्द से जल्द भारत लाने की मांग रखी गई. सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सागवान व जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर ने दूतावास से मिली सूचना के बारे में बताया कि अजीत चौधरी का शव मिल गया है. मृतक अजीत के पिता व दादा का रो-रोकर बुरा हाल है, जिन्हें लोगों ने सांत्वना दी.

पोलैंड में बढ़ा तनाव: चार एयरपोर्ट बंद, रूसी ड्रोन हमले के बाद F-16 और F-35 की तैनाती

वारसॉ मध्य यूरोपीय देश पोलैंड ने कई रूसी ड्रोन्स को अपने हवाई क्षेत्र में मार गिराने का दावा किया है। इससे पहले बुधवार की अहले सुबह पोलैंड ने NATO देशों के साथ मिलकर अपने F-16 लड़ाकू विमानों को उतार दिया और राजधानी वारसॉ स्थित अपने मुख्य हवाई अड्डे समेत कुल चार एयरपोर्ट्स बंद कर दिए। यूक्रेन के पश्चिम में स्थित इस देश ने यह कदम तब उठाया है, जब रूस से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की वायु सेना ने पोलैंड को चेतावनी दी थी कि रूसी ड्रोन्स अब यूक्रेन की सीमा पार कर पोलैंड में घुसने जा रही है। इस सूचना पर पोलैंड की वायु सेना ने आननफानन में अपने लड़ाकू विमानों की तैनाती कर दी और कुछ ही देर बाद रूसी ड्रोन मार गिराए। पोलिश वायु सेना ने कहा है कि बार-बार उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया जा रहा था। इसके बाद यह कदम उठाया गया है। इससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। पोलैंड की ऑपरेशनल कमांड ने कहा, "पोलिश और NATO सहयोगियों के लड़ाकू विमान हमारे हवाई क्षेत्र में उड़ान भर रहे हैं, जबकि जमीनी वायु रक्षा और रडार टोही प्रणालियों को उच्चतम स्तर पर तैयार रखा गया है।" CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी वायु सेना ने शुरुआत में कहा था कि रूसी ड्रोन पोलिश क्षेत्र में घुस आए हैं, जिससे ज़मोस्क शहर को खतरा पैदा हो गया है। यूक्रेनी मीडिया ने भी बताया कि एक ड्रोन पश्चिमी पोलिश शहर रेज़्ज़ो की ओर बढ़ रहा है, और कहा कि हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल? इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि जो विल्सन ने आरोप लगाया है कि रूस ने पोलैंड पर हमला करने के लिए ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल किया था। विल्सन ने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा वाइट हाउस में पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नॉरोकी की मेज़बानी के एक हफ़्ते से भी कम समय बाद रूस ईरानी शाहेद ड्रोन से नाटो सहयोगी पोलैंड पर हमला कर रहा है। यह युद्ध जैसा कृत्य है।” उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से कड़ा जवाब देने का आग्रह करते हुए लिखा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह करता हूँ कि वे रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाएं ताकि युद्ध मशीन बना रूस दिवालिया हो जाए।" विल्सन ने आगे कहा कि मॉस्को अब नाटो के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। बेलारूस के साथ लगी सीमा बंद करेगा पोलैंड पिछले साढ़े तीन साल से रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से पड़ोसी देश भी परेशान हैं। इसी क्रम में पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अब घोषणा की है कि एक दिन बाद यानी गुरुवार को पोलैंड बेलारूस के साथ लगी पूर्वी सीमा को बंद करने जा रहा है। दरअसल, पोलिश ससरकार बेलारूस में चल रहे रूसी सेना के आक्रामक सैन्य अभ्यास से चिंतित है। द गार्डियन के मुताबिक, पोलिश प्रधानमंत्री ने कहा कि यह रूस और बेलारूस की ओर से बढ़ती उकसावे की कार्रवाई का जवाब है। पोलैंड ने मार गिराए रशियन ड्रोन पोलैंड की सशस्त्र सेनाओं ने तत्काल जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने और NATO सहयोगी देशों के विमान तैनात किए. इसके साथ ही भूमि आधारित वायु रक्षा और राडार प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा गया. देश के ऑपरेशनल कमांड ने घोषणा की – ‘पोलैंड की वायु सीमा में अब हमारे और सहयोगियों के विमान सक्रिय हैं और वायु रक्षा और रडार चौकसी अब हाई अलर्ट पर है.’ इसके साथ ही कुछ प्रमुख हवाई अड्डों को भी अस्थायी रूप से बंद भी कर दिया गया. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पोलिश आर्मी ने कहा है कि रूसी ड्रोन को मार गिराया गया है. ये पहली बार हुआ है कि नाटो देश किसी रूसी एसेट के साथ सीधे-सीधे उलझा हो. सुरक्षा में तैनात हुए अमेरिकी फाइटर जेट पोलैंड के एयरस्पेस में रशियन ड्रोन के पहुंचने के बाद नाटो देश सतर्क हो गए हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नाटो देश और रूस की ये पहली भिड़ंत हैं, ऐसे में पोलैंड की सुरक्षा के लिए नाटो एयरक्राफ्ट सक्रिय हो चुके हैं. उन्होंने पोलिश एयरस्पेस की सुरक्षा के लिए अमेरिका का एडवांस फाइटर जेट F-35 तैनात कर दिया है. इसी बीच प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने घोषणा की है कि बेलारूस के साथ सभी बॉर्डर क्रॉसिंग बंद की जाएगी, जिसमें रेलमार्ग भी शामिल है. पोलैंड का मानना है कि रूस और बेलारूस की ओर से Zapad‑2025 नाम की बेहद आक्रामक मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से ये हालात पैदा हुए हैं. ऐसे में बॉर्डर क्रॉस करने पर तब तक रोक रहेगी, जब तक खतरा टल नहीं जाता. वहीं पड़ोसी नाटो देशों- लिथुआनिया और लातविया ने भी अपनी सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा दी है. पुतिन के इरादे खतरनाक पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोकी ने भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुकिन के इरादों को भांपकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "हमें व्लादिमीर पुतिन के अच्छे इरादों पर भरोसा नहीं है।" नवरोकी ने आगे कहा, “बेशक, हम दीर्घकालिक शांति, स्थायी शांति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो हमारे क्षेत्रों के लिए जरूरी है, लेकिन हमारा मानना ​​है कि व्लादिमीर पुतिन अन्य देशों पर भी आक्रमण करने के लिए तैयार हैं।” बफर स्टेट के रूप में काम कर रहा पोलैंड बता दें कि पोलैंड में अमेरिका और नाटो देशों के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठान हैं, जो लंबे समय से रूस और शेष पश्चिमी यूरोप के बीच एक बफर स्टेट के रूप में काम करता रहा है। लेकिन अब यह देश भी रूस से खतरा महसूस कर रहा है। यह खतरा तब पैदा हुआ जब रूस ने रातोंरात यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए। यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि वोलिन और ल्वीव जैसे पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों सहित देश के अधिकांश हिस्से में कई घंटों तक हवाई हमले की चेतावनी जारी रही।

रूस से तेल पर भारत अडिग, टैरिफ वॉर के बीच ट्रंप को मिला करारा जवाब

नई दिल्ली भारत ने अमेरिका की टैरिफ वाली कार्रवाईयों को नजरअंदाज करते हुए अपने पुराने और भरोसेमंद सहयोगी रूस से तेल की खरीद जारी रखने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत की तेल रिफाइनरियां रूसी कंपनियों से तेल प्राप्त करना जारी रखे हुए हैं। उनके आपूर्ति संबंधी निर्णय कीमत, कच्चे तेल की गुणवत्ता, भंडार, रसद और अन्य आर्थिक कारकों पर निर्भर होते हैं। सूत्रों के अनुसार, रूसी तेल पर कभी कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इसके बजाय, G7 और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा एक मूल्य सीमा व्यवस्था लागू की गई थी ताकि रूस की आय को सीमित करते हुए वैश्विक आपूर्ति को जारी रखा जा सके। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने इस फ्रेमवर्क के तहत 60 डॉलर प्रति बैरल की अधिकतम सीमा का सख्ती से पालन किया है। अब EU ने इसे घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल करने की सिफारिश की है, जिसे सितंबर से लागू किया जाएगा। भारत ने वैश्विक तेल संकट को टाला मार्च 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफरातफरी मची थी, तब ब्रेंट क्रूड की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसी दौरान भारत ने रणनीतिक निर्णय लेते हुए रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद शुरू की, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलन बना रहा और महंगाई को काबू में रखने में मदद मिली। सूत्रों के अनुसार, अगर भारत ने रूसी तेल न खरीदा होता और OPEC+ देशों की उत्पादन कटौती (5.86 mb/d) भी जारी रहती, तो तेल की कीमतें 137 डॉलर से भी ऊपर जा सकती थीं। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और ऊर्जा संकट और गहरा जाता। भारत ने सिर्फ अपने ऊर्जा हितों की रक्षा नहीं की बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाई। इस दौरान भारत ने ईरान और वेनेज़ुएला जैसे उन देशों से तेल नहीं खरीदा, जिन पर वास्तव में अमेरिका के प्रतिबंध लागू हैं।