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अमेरिका का बड़ा यूटर्न: भारत को मिलेगा रूस से सस्ता तेल, ट्रंप प्रशासन का नया निर्णय

नई दिल्ली  रूसी तेल पर भारत को सुबह-सुबह खुशखबरी मिली है. पश्चिम एशिया संघर्ष और ईंधन संकट के बीच अमेरिका ने बड़ा यूटर्न लिया है. अमेरिका ने रूसी तेल पर वह ऐलान किया है, जिसका भारत को बंपर फायदा मिलेगा. अमेरिका ने अब उस तेल वाले छूट को रिन्यू करने का फैसला किया है, जिससे भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलती है. जी हां, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह उन देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों में छूट को आगे बढ़ाएगा, जिसका मकसद ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति में आई कमी को दूर करना था. बता दें कि बीते दिनों ही अमेरिका के वित्त मंत्री ने कहा था कि अमेरिका अब रूसी तेल वाली छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों से छूट को बढ़ा दिया है. यह छूट एक महीने के लिए बढ़ाई गई है. यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण बने दबाव को कम किया जा सके. पहले अमेरिका ने रूसी तेल पर मिली छूट को बढ़ाने से इनकार कर दिया था. अमेरिका का यह फैसला केवल उन रूसी तेल को लेकर है, जो समंदर में जहाज पर मौजूद हैं।  अमेरिकी वित्त विभाग का नया फैसला अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात एक नया लाइसेंस वाला आदेश जारी किया. इसमें देशों को 17 अप्रैल से 16 मई के बीच जहाजों पर लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई है. यह कदम पहले जारी 30 दिन की छूट की जगह लेता है, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी. अमेरिका के इस फैसले से भारत को अब फायदा ही फायदा है।  अमेरिका के लिए यह यूटर्न क्यों अमेरिका का फैसला उस फैसले से उलट है, जो इसी हफ्ते की शुरुआत में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने लिया था. अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने बीते दिनों कहा था कि अमेरिका रूसी तेल वाली इस राहत को आगे बढ़ाएगा. ट्रंप प्रशासन का रूसी तेल वाला यह छूट अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण प्रभावित ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के प्रयासों का हिस्सा है. हालांकि, अमेरिका का यह फैसला केवल रूसी तेल को लेकर है. ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया के तेल इस लाइसेंस वाले आदेश से बाहर हैं।  रूसी तेल पर अभी और छूट मिलेगी? ब्रेट एरिक्सन ने कहा, ‘ईरान-अमेरिका संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थायी नुकसान पहुंचाया है और उन्हें स्थिर करने के लिए उपलब्ध उपाय लगभग खत्म हो चुके हैं.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे और छूट दी जा सकती है. वहीं, बेसेंट ने बताया कि इससे पहले मार्च में जारी एक अलग छूट के तहत लगभग 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचा था, जिससे संघर्ष के दौरान आपूर्ति पर बने दबाव को कम करने में मदद मिली थी।  भारत को कितना फायदा? यहां ध्यान देने वाली बात है कि भारत भी प्रतिबंधों में छूट का एक बड़ा लाभार्थी है. यूं कहिए तो बड़ा लाभार्थी. अमेरिकी छूट मिलने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदे थे. ट्रंप प्रशासन के इस छूट वाले फैसले की अमेरिकी नेताओं ने आलोचना की थी कि इससे मास्को और तेहरान पर वित्तीय दबाव कम हो रहा है. सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल पर अमेरिकी छूट लागू होने के बाद रूस से करीब 3 करोड़ बैरल तेल का ऑर्डर दिया था. अब नए फैसले का मतलब है कि भारत अभी आगे भी रूस से सस्ता तेल खरीदता रहेगा। 

तेल भुगतान में भारत का नया कदम, रूबल के साथ युआन का भी इस्तेमाल!

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर बड़ा दावा कर रहे हैं कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. वहीं दूसरी ओर रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक का कहना है कि रूस लगातार भारत को कच्चे तेल के टॉप सप्लायर्स की लिस्ट में बना हुआ है. उन्होंने तो अब यहां तक दावा किया है कि भारत Russian Oil Import के पेमेंट के लिए अब सिर्फ रूबल ही नहीं, बल्कि चीनी करेंसी युआन में भी पेमेंट करने लगा है.  नोवाक बोले- 'चीनी करेंसी में पेमेंट का हिस्सा कम'  सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में रूसी डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि भारत ने रूसी तेल के लिए कुछ पेमेंट चीनी युआन में करना शुरू कर दिया है, हालांकि ज्यादातर लेनदेन अभी भी रूसी करेंसी रूबल में ही किए जाते हैं. उन्होंने बड़ा दावा करते हुए बताया कि, 'मुझे पता है कि इस तरह के भुगतान शुरू हो गए हैं और मेरा मानना ​​है कि वर्तमान में यह प्रतिशत कम है.' बता दें कि पुरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत रूसी तेल के लिए मुख्यतः भारतीय करेंसी Rupee में भुगतान कर रहा था. चीन के बाद दूसरा बड़ा खरीदार रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) के अनुसार, सितंबर में चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद उस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों ने तेल व्यापार के निपटान के लिए युआन और यूएई करेंसी दिरहम समेत वैकल्पिक मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने का काम किया है, जिन पर लंबे समय से अमेरिकी डॉलर का ही वर्चस्व रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल की बढ़ी खरीद भारत, जो कि पारंपरिक रूप से मिडिल ईस्ट क्रूड ऑयल पर निर्भर है. इसने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से ही रूसी तेल के अपने आयात में जोरदार बढ़ोतरी की है. इसके पीछे रूस की ओर से किफायती दरों पर क्रूड ऑयल मुहैया कराना बड़ा कारण है. पश्चिमी प्रतिबंधों और यूरोपीय डिमांड में कमी के कारण Russian Oil पर भारी छूट मिलती है, जिसके चलते भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात कम ही समय में कुल कच्चे तेल आयात तब के के 1 फीसदी से बढ़कर अब करीब 40 फीसदी हो चुका है.  Trump कर रहे हैं ये दावे एक ओर जहां रूस के डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक भारत की रूसी तेल खरीद बढ़ने और इसके पेमेंट के लिए चीनी करेंसी तक के इस्तेमाल की बात कह रहे हैं. तो दूसरी ओर व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के सामने भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के निरंतर आयात पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने आगे दावा किया कि पीएम मोदी ने आज मुझे आश्वस्त किया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह एक बड़ा कदम है. अब हमें चीन को भी यही करने के लिए कहना होगा. हालांकि ट्रंप के दावे को लेकर भारत की तरफ से अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है.