samacharsecretary.com

सैफ अली खान की ‘कर्तव्य’ का दमदार ट्रेलर रिलीज, पुलिसवाले के रोल में दिखा नया अंदाज

धर्म करते हैं कर्म छूटता है, कर्म करते हैं धर्म छूटता है, कतर्व्‍य तक को बात ही नहीं पहुंचती सर!' सैफ अली खान की नई क्राइम ड्रामा फिल्‍म 'कर्तव्‍य' के ट्रेलर की शुरुआत इसी एक डायलॉग से होती है। इसके बाद अगले सवा 2 मिनट में हम एक पुलिसवाले के द्वंद्व, पावर और पॉल‍िटिक्‍स के बीच झूलते सिस्‍टम और एक वर्दीवाले की निजी जिंदगी में मची उथल-पुथल की वो झलक देखते हैं, जो इस फिल्‍म के लिए उत्‍सुकता बढ़ा देती है। गौरी खान और शाहरुख खान की रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी 'कतर्व्‍य' उन फिल्‍मों में से है, जिसका लंबे समय से इंतजार है। तीन साल पहले इस फिल्‍म का ऐलान हुआ था। यह फिल्‍म OTT पर रिलीज होने वाली है। डिजिटल स्‍क्रीन पर 'सेक्रेड गेम्‍स' के 7 साल बाद सैफ अली खान एक बार फिर से वर्दी में नजर आने वाले हैं। जबकि उनके साथ संजय मिश्रा, रसिका दुग्‍गल और सौरभ द्व‍िवेदी भी प्रमुख भूम‍िकाओं में हैं। 'कर्तव्‍य' का डायरेक्‍शन 'भक्षक' और 'बोस: डेड/अलाइव' से सुर्ख‍ियां बटोर चुके पुलकित ने किया है। कहानी हमें एक छोटे शहर के देसी परिवेश में ले जाती है, जहां झामली कोतवाली में पवन एक ऐसा पुलिसवाला है, जो अपने धर्म, कर्म और कर्तव्‍य के बीच फंसा हुआ है। पवन जहां सच का साथ देना चाहता है, वहीं महकमे में उसकी नाकामी पर उसे सीनियर अध‍िकारी (मनीष चौधरी) का तंज झेलना पड़ता है। पवन से कहा जाता है- आठ साल में तो आम का पेड़ भी फल देने लगता है, तेरे में तो कैरी भी ना फूट रही। यहां देख‍िए, 'कर्तव्‍य' का ट्रेलर कर्म, धर्म और कतर्व्‍य के बीच एक पुलिसवाले की नैतिक दुविधा 'ओमकारा' जैसी फ‍िल्मों और 'सेक्रेड गेम्स' से लेकर 'तांडव' जैसी वेब सीरीज में अपनी दमदार अदाकारी से दिल जीतने वाले सैफ अली खान यहां भी असर दिखाते हैं। आज की दुनिया में, जहां हर फैसले की कोई न कोई कीमत चुकानी पड़ती है, 'कर्तव्य' हमें एक ऐसे नैतिक दुविधा भरे सफर पर ले जाती है, जहां फर्ज और उसके नतीजों के बीच टकराव है। 'कर्तव्‍य' फिल्‍म की कहानी पुलकित के डायरेक्‍शन में बनी इस क्राइम-ड्रामा की कहानी के केंद्र में पवन है। वह एक पुलिस अफसर है, जिस पर महकमे की कड़ी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। उसे एक पत्रकार की सुरक्षा का जिम्‍मा सौंपा गया था, लेकिन वह उसकी जान बचाने में नाकाम रहता है। उस महिला पत्रकार को सरेराह गोली मार दी जाती है। जैसे-जैसे सीनियर अफसरों का दबाव बढ़ता है, पवन उस हमलावर को पकड़ने के लिए मुहिम में जुट जाता है। यह जांच पवन का सामना आनंद श्री (सौरभ द्व‍िवेदी) से करवाती है, जो अपनी रसूख और ताकत का इस्‍तेमाल नाबालिग बच्‍चों से गलत काम करवाने के लिए करता है। इधर, पवन की निजी जिंदगी में भी उथल-पुथल मची हुई है। उसके भाई से जुड़े एक विवाद के कारण परिवार को धमकियां मिल रही हैं। पवन को सिस्टम के भीतर और घर, दोनों ही जगहों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जैसे-जैसे यह मामला और गहराता है, पवन खुद को फर्ज और परिवार के बीच फंसा हुआ पाता है। इस बीच जब पवन आनंद श्री के ख‍िलाफ मोर्चा खोलता है तो उसे चेतावनी मिलती है। लेकिन यहां हमें उसके किरदार का सबसे बोल्‍ड अंदाज देखने को मिलता है। पवन कहता है- महादेव का भक्‍त हूं और ऊपर से पुलिसवाला, मैं भी देखता हूं क्‍या फाड़ लेगा! 'कतर्व्‍य' OTT रिलीज: कब और कहां देखें 'कतर्व्‍य' का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज हुआ है। लेकिन इसके प्रोड्यूसर शाहरुख खान ने बीते महीने 30 अप्रैल को ही इसकी रिलीज डेट का ऐलान कर दिया था। सैफ अली खान की यह ड्रामा फिल्‍म 15 मई 2026 को Netflix पर रिलीज होगी। शाहरुख ने रिलीज की तारीख का ऐलान करते हुए लिखा था, 'कर्तव्य के इस चक्रव्‍यूह में, हर फैसला एक इम्‍त‍िहान होगा।' 'कतर्व्‍य' की कास्‍ट फिल्‍म में सैफ अली खान जहां पुलिसवाले पवन के लीड रोल में हैं, वहीं उनकी पत्‍नी के किरदार में रसिका दुग्‍गल हैं। संजय मिश्रा ने सैफ अली खान के सहयोगी पुलिसवाले और मनीष चौधरी ने सीनियर अध‍िकारी की भूमिका निभाई है। सौरभ द्व‍िवेदी इसमें विलेन आनंद श्री के रोल में हैं। जबकि साथ में जाकिर हुसैन भी अहम भूमिका में हैं।  

सैफ अली खान पैतृक संपत्ति मामला: सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई अस्थायी रोक

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान के के पूर्वजों से जुड़े संपत्ति विवाद में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान की शाही संपत्ति से जुड़े दशकों पुराने संपत्ति विवाद को नए सिरे से सुनवाई के लिए निचली अदालत को वापस भेज दिया था। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया‌‌। बेंच ने नवाब हमीदुल्ला खान के बड़े भाई के वंशजों उमर फारुक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया, जो हाईकोर्ट के 30 जून के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें 14 फरवरी, 2000 के निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया गया था, जिसमें नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान) और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों, अभिनेता सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के संपत्ति पर विशेष अधिकार बरकरार रखे गए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत का फैसला 1997 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर आधारित था, जिसे बाद में 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था। हालांकि, 2019 के उदाहरण को लागू करने और मामले का निर्णायक रूप से फैसला करने के बजाय, हाईकोर्ट ने मामले को पुनर्मूल्यांकन के लिए वापस भेज दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत उल्लिखित प्रक्रियात्मक मानदंडों के विपरीत है। यह मामला 1999 में नवाब के विस्तारित परिवार के सदस्यों द्वारा दायर दीवानी मुकदमों से जुड़ा है, जिनमें दिवंगत बेगम सुरैया राशिद और उनके बच्चे, महाबानो (अब दिवंगत), नीलोफर, नादिर और यावर के साथ ही नवाब की एक और बेटी नवाबजादी कमर ताज रबिया सुल्तान शामिल हैं। वादियों ने नवाब की निजी संपत्ति के बंटवारे, कब्जे और न्यायसंगत निपटान की मांग की थी। निचली अदालत ने साजिदा सुल्तान के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के अधीन नहीं है और संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें हस्तांतरित की गई थी। सन 1960 में नवाब की मृत्यु के बाद, भारत सरकार ने 1962 का एक प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 366(22) के तहत साजिदा सुल्तान को शासक और निजी संपत्ति की वास्तविक उत्तराधिकारी दोनों के रूप में मान्यता दी गई। हालांकि, वादी पक्ष ने तर्क दिया कि नवाब की निजी संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत सभी कानूनी उत्तराधिकारियों में बांटी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 1962 के प्रमाण पत्र पर औपचारिक रूप से कोई विवाद नहीं था, लेकिन दावा किया कि यह न्यायसंगत विभाजन को नहीं रोकता। अभिनेता सैफ अली खान और उनके परिवार सहित प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि उत्तराधिकार में ज्येष्ठाधिकार के नियम का पालन किया गया और साजिदा सुल्तान को शाही गद्दी और निजी संपत्ति, दोनों का वंशानुगत उत्तराधिकार प्राप्त हुआ था। निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए, हाईकोर्ट ने मामले को वापस भेज दिया था। याचिकाकर्ताओं ने मामले को वापस भेजने के आदेश को पलटने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया।