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क्या प्रियंका चतुर्वेदी और आदित्य ठाकरे में सब ठीक नहीं? चर्चाओं के बीच संजय राउत ने दी सफाई

मुंबई शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा से कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें दूसरा मौका नहीं मिला है। उनके स्थान पर दिग्गज नेता शरद पवार को उच्च सदन में भेजा जा रहा है और इसे लेकर उद्धव सेना ने भी सहमति जताई। इस बीच चर्चाएं यह भी थीं कि पार्टी के भीतर प्रियंका को भेजने या फिर मौका ना देने को लेकर मतभेद थे। आदित्य ठाकरे चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से मौका मिले, लेकिन संजय राउत ने शरद पवार को भेजे जाने का वादा किया और अंत में उनकी ही चली। इसे लेकर चर्चाएं यहां तक शुरू हो गईं कि आदित्य ठाकरे के आगे संजय राउत की ही चली और शरद पवार को किया कमिटमेंट पार्टी को मानना पड़ गया। अब इस मामले में संजय राउत ने सफाई भी देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि राजनीतिक समीकरण पक्ष में नहीं थे और शरद पवार जैसे सीनियर नेता राज्यसभा जाना चाहते थे। इसलिए प्रियंका चतुर्वेदी का नाम आगे नहीं बढ़ाया गया। यदि समीकरण अनुकूल होते और शरद पवार जैसे नेता का नाम नहीं होता तो निश्चित तौर पर पार्टी की ओर से प्रियंका को ही दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार किया जाता। उन्होंने कहा कि यह बात रही है कि उद्धव सेना में अंदरखाने यह इच्छा प्रबल थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से राज्यसभा में भेजा जाए। लेकिन पार्टी के पास अपने स्तर पर नंबर कम थे और फिर जब शरद पवार जैसे सीनियर नेता ने दावा कर दिया तो प्रियंका चतुर्वेदी के लिए मुकाबले में बने रहना मुश्किल हो गया। संजय राउत ने कहा, 'पार्टी में यह प्रबल इच्छा थी कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक और मौका दिया जाए। लेकिन जरूरी नंबर नहीं थे। यदि शरद पवार खुद मुकाबले में ना आना चाहते और नंबर होते तो उन्हें ही भेजा जाता। उन्हें 100 फीसदी चांस दिया जाता।' बता दें कि महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 6 पर एनडीए जीतने की स्थिति में है। एकमात्र सीट विपक्ष जीत सकता है, जिस पर शरद पवार को उतारा गया है। इस एकमात्र सीट पर उद्धव सेना, कांग्रेस और एनसीपी-एसपी तीनों ही दावा कर रहे थे, लेकिन अंत में शरद पवार के नाम पर ही सहमति बनी। भाजपा ने रामदास आठवले और विनोद तावड़े जैसे नेताओं को चांस दिया है। संजय राउत से जब एनडीए उम्मीदवारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आठवले के बारे में तो पहले से ही तय लग रहा था। अब विनोद तावड़े को भेजना अहम है। दरअसल विनोद तावड़े बीते कई सालों से संगठन में काम कर रहे हैं। कई राज्यों के प्रभारी रहे हैं। उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति से दूर रखा गया और वह चुपचाप करते रहे। माना जा रहा है कि अब उसका इनाम उन्हें राज्यसभा भेजकर दिया जा रहा है।  

प्रियंका चतुर्वेदी के पक्ष में संजय राउत का वीटो, उद्धव सेना में आदित्य ठाकरे की योजना रद्द

मुंबई  महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में विपक्ष महज एक सीट ही जीतने की स्थिति में है। इसके लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार का नाम तय हुआ है। 85 वर्षीय लीडर के नाम के ऐलान के लिए जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें उद्धव सेना का कोई नेता शामिल नहीं था। इसे लेकर कयास लगने लगे तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले खुद सामने आईं और कहा कि उद्धव सेना की नाराजगी के सारे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संजय राउत पहले ही आए थे और शरद पवार से मिलकर भरोसा दे गए थे कि यदि आप उम्मीदवार होते हैं तो हम आपके साथ होंगे। इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा, 'कांग्रेस ने आखिर राज्यसभा में उम्मीदवार फाइन कर लिया। महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे।' यह बात सही है कि संजय राउत लगातार कहते रहे हैं कि शरद पवार को राज्यसभा जाना चाहिए। हालांकि उनके सुर आदित्य ठाकरे से अलग रहे हैं, जो चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक मौका और मिलना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें फिर से मौका नहीं मिला है। वह राज्यसभा में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन भावुक भी नजर आई थीं। इस तरह पूरे प्रकरण को आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है और इसके आधार पर लोग यह भी रहे हैं कि प्रियंका के नाम पर संजय राउत ने वीटो लगा दिया और इस तरह शरद पवार का रास्ता साफ हो गया। पूरे मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि संजय राउत एक तरह से विजेता बनकर उभरे और उन्होंने उद्धव सेना का एजेंडा तय कर दिया। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सेना के खाते में विधान परिषद की सीट आ सकती है। लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में उद्धव सेना ही है। फिर भी राज्यसभा की सीट एनसीपी-एसपी के खाते में जाना दुखद है। कांग्रेस का भी था दावा, पर खरगे ने खुद ही किया पीछे हटने का ऐलान राज्यसभा सीट के लिए तो कांग्रेस ने भी दावा किया था। इस संबंध में राहुल गांधी से भी बात की गई थी, लेकिन अंत में पार्टी शरद पवार के नाम पर ही सहमत हो गई। अब देखना होगा कि एमएलसी सीट पर क्या होता है। अगले महीने ही उद्धव ठाकरे का एमएलसी का कार्यकाल समाप्त होगा। ऐसे में नजरें इस बात पर हैं कि वह रिपीट होंगे या फिर किसी और नेता को उनके स्थान पर मौका दिया जा सकता है।

संजय राउत का दावा—मराठी वोट बैंक के चलते बीजेपी को झुकना पड़ा, रितु तावड़े बनीं मुंबई मेयर

नई दिल्ली शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव में उनकी पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को मिले मराठी लोगों के भारी समर्थन के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मुंबई के महापौर के रूप में एक मराठी व्यक्ति को चुनना पड़ा। राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी कटाक्ष किया। शनिवार को आरएसएस शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान को संघ प्रमुख मोहन भगवत से बातचीत करते देखा गया था। राज्यसभा सदस्य ने पूछा, "क्या यह फिल्म अभिनेता सलमान खान का स्वागत था या (यह संदेश था कि) संघ व उसकी शाखाओं में मुसलमानों का भी स्वागत है?" उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि जिस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफरत और बदले की भावना से प्रेरित दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है, उसमें संघ भी शामिल है। राउत ने मुंबई के महापौर पद के लिए भाजपा द्वारा रितु तावडे (53) को उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि वह मूल रूप से कांग्रेस से हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं है। राज्यसभा सदस्य ने कहा, "जिस तरह से मराठी लोगों ने भारी बहुमत से शिवसेना (उबाठा) और मनसे को वोट दिया, भाजपा को मुंबई में एक मराठी महापौर बनाना ही पड़ा।" रितु तावडे, मुंबई की महापौर बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और शिवसेना (उबाठा) द्वारा किसी प्रतिद्वंद्वी को मैदान में नहीं उतारने के फैसले के बाद चार दशकों में सत्तारूढ़ पार्टी की वह पहली महापौर बनेंगी। रितु के निर्विरोध चुने जाने से ठाकरे परिवार का बीएमसी पर 25 साल का वर्चस्व समाप्त हो गया।  

नरवणे की जान को जोखिम? संजय राउत के बयान से मचा सियासी हड़कंप

नई दिल्ली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के नेता संजय राउत अपने आक्रामक अंदाज के लिए चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने एक और चौंकाने वाला बयान देते हुए पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा को ही खतरा होने की बात कह दी है। संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी ने संसद में पूर्व आर्मी चीफ का हवाला देकर बात की और सरकार ने उन्हें रोक दिया। वह सही नहीं था। इस घटनाक्रम के चलते मुझे नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक ऐसा मुद्दा लाने की कोशिश की, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है।   संजय राउत ने कहा कि जब देश पर संकट आता है या पड़ोसी मुल्क हमला करने की तैयारी में भारत की सीमा पर पहुंचता है तो उस वक्त राजनीतिक नेतृत्व को निर्णय लेना चाहिए। जनरल नरवणे बार-बार कोशिश कर रहे थे कि हमें आदेश दीजिए। उनका पूछना था कि चीन के इस अतिक्रमण के जवाब में हमें आदेश दीजिए। लेकिन 56 इंच का सीना रखने वाले भाग गए। उन्होंने कहा कि अब मुझे मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उनके साथ क्या होगा, यह मैं कह नहीं सकता। उनकी सिक्योरिटी बढ़ जानी चाहिए। इससे पहले ऐसे कई हादसे हो चुके हैं। इसलिए सुरक्षा दी जानी जरूरी है। संजय राउत का सवाल- आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था उन्होंने कहा कि आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था। उन्होंने भी तो सीमा की सुरक्षा का मसला उठाया था। दरअसल सोमवार को लोकसभा में उस वक्त काफी हंगामा हुआ था, जब मनोज मुकुंद नरवणे की गैर-प्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी बोलने लगे थे। उन्होंने डोकलाम में भारतीय सीमा के पास चीनी टैंकों के पहुंचने का कथित प्रकरण उठाया था। इस पर विवाद तब बढ़ गया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐतराज जताया। उनका कहना था कि संसद में ऐसी किसी पुस्तक को कोट नहीं किया जा सकता, जो प्रकाशित ही नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुस्तक तथ्य सही होते तो वह प्रकाशित ही हो जाती। उस पर किसी तरह की रोक लगाने की जरूरत नहीं थी।  

अजित पवार के विमान हादसे पर सियासत गरम: संजय राउत बोले– जब आसमान साफ था तो दुर्घटना कैसे?

मुंबई शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने अजित पवार की मौत को लेकर बड़े सवाल उठाए हैं। बजट सत्र में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे संजय राउत ने कहा कि अजित दादा के प्लेन क्रैश पर सवाल उठने लाजमी हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना उन्हें जस्टिस लोया केस की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना में कुछ तो गड़बड़ है और इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए। इसी तरह के सवाल राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी उठाए हैं। देशमुख ने कहा कि मौसम एकदम साफ था, दृश्यता अच्छी थी फिर अचानक विमान टिल्ट कैसे हो गया। इस घटना की जांच ठीक से होनी चाहिए।   संजय राउत ने कहा कि अजित पवार की मौत सामान्य नहीं बल्कि संदिग्ध है। बीजपी के लोग उन्हें सिंचाई घोटाले की फाइल से धमका रहे थे। वहीं वह घर वापसी की तैयारी कर रहे थे। एनसीपी के विलय की तारीख तय हो गई थी। इसी बीच इतनी बड़ी घटना हो जाती है। अनिल देशमुख ने की जांच की मांग अनिल देशमुख ने कहा कि विमान दुर्घटना की वजह बताई गई कि विजिबिलिटी कम थी। लेकिन जो वीडियो लिए गए, वे इतनी दूर से लिए जाने के बाद भी एकदम साफ थे। विमान जाते-जाते लैंड होने से पहले अचानक कैसे झुक गया और क्रैश हो गया। बहुत सारे लोगों को शंका है कि इस तरह कैसे विमान क्रैश हो गया। ब्लैक बॉक्स की जांच होगी तो सब चीजें सामने आएंगी। देखकर मामला संदिग्ध लगता है इसलिए इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए। बीजेपी को निशाने पर लेते हुए संजय राउत ने कहा कि सिंचाई घोटाले की फाइलों को लेकर जवाब दिया गया और उसके 10 दिन के अंदर ही इतना बड़ा हादसा हो गया। इसके पीछे क्या समझा जाए? बता दें कि विमान दुर्घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सवाल उठाए थे। हालांकि शरद पवार ने उनकी बात को खारिज कर दिया था।  

अजित पवार की मौत पर उठे सवाल: संजय राउत बोले– सहानुभूति नहीं, सच्चाई चाहिए

मुंबई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अजित पवार का बुधवार को बारामती एयरपोर्ट पर एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। वह जिला परिषद चुनावों के लिए एक सार्वजनिक रैली में शामिल होने के लिए बारामती जा रहे थे। यह खबर सामने आते ही न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। आज बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी गई। इस बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने घटना की जांच की मांग की है। संजय राउत की मांग: सिर्फ संवेदनाएं काफी नहीं संजय राउत ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अजित पवार जैसे बड़े और लोकप्रिय नेता की मौत महज एक 'हादसा' कहकर नहीं छोड़ी जा सकती। उन्होंने मांग की कि इस दुर्घटना की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह विमान की तकनीकी खराबी थी, रडार की विफलता थी या एयरपोर्ट मैनेजमेंट की कोई चूक? उन्होंने कहा- सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके। राउत ने अहमदाबाद में हुए पिछले विमान हादसों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उन जांचों से कभी कुछ हासिल हुआ? उन्होंने जोर देकर कहा कि जड़ तक जाना जरूरी है। संजय राउत ने कहा- अजित पवार महाराष्ट्र के एक कद्दावर और लोकप्रिय नेता थे। पूरा देश सदमे में है। सिर्फ संवेदना जताने से क्या होगा? अगर यह तकनीकी खराबी थी, तो हमें इसका मूल कारण जानना ही होगा। प्रशासन और पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। ब्लैक बॉक्स बरामद जांच अधिकारियों ने दुर्घटना स्थल से वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) बरामद कर लिया है। इससे विमान के अंतिम क्षणों की सटीक जानकारी मिल सकेगी। पुणे ग्रामीण पुलिस ने बारामती तालुका पुलिस स्टेशन में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और अन्य तकनीकी टीमें इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या दुर्घटना मानवीय चूक के कारण हुई या किसी यांत्रिक विफलता के कारण। अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसे शून्य को छोड़ गया है जिसे भरना मुश्किल होगा। उनके राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उनकी प्रशासनिक पकड़ और जमीनी लोकप्रियता हमेशा बनी रही।  

मुंबई में सियासी सस्पेंस: ताज होटल को आर्थर रोड और यरवदा जेल बनाने का आरोप, राउत ने शिंदे को घेरा

ठाणे महाराष्ट्र में बीएमसी समेत नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। खासकर नवनिर्वाचित शिवसेना कॉर्पोरेटर्स को लेकर को राजनीति जोरों पर है। खबरों के मुताबिक शिवसेना के 29 कॉर्पोरेटर्स को ताज लैंड्स एंड होटल में बुलाया गया है और वहां रोक कर रखा गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि शिंदे गुट ने ताज होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल बना दिया है, जहां नए चुने गए पार्षदों को बंद कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह नाइंसाफी और अनुचित कार्रवाई बताया। राउत ने कहा कि यह लॉ एंड ऑर्डर का सवाल है। राज्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद नए चुने गए शिवसेना के पार्षदों के साथ गलत किया जा रहा है। उनका आरोप है कि शिवसेना को डर है कि उनके पार्षदों को तोड़ा जा सकता है। राउत ने कहा कि ताज होटल को एक तरह से जेल जैसा बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत आदेश देना चाहिए कि होटल में बंद किए गए पार्षदों को छोड़ दिया जाए। उनका कहना है कि किसी भी चुनावी या सियासी प्रक्रिया में ऐसे डर और दबाव का इस्तेमाल करना गलत है। सूत्रों की मानें तो नए कॉर्पोरेटर्स को होटल में बुलाने का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दबाव के जरिए पार्षदों को अपने गुट में लाने की कोशिश रोकी जा सके। शिंदे गुट यह सुनिश्चित करना चाह रहा है कि नए चुने गए पार्षद उनके पक्ष में रहें। गौरतलब है कि शुक्रवार को महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने नगर निगम चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की। 29 में से 25 निकायों में जीत दर्ज की गई, और बीएमसी चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि बहुमत (114) के लिए शिंदे सेना की मदद चाहिए। महायुति की जीत ने ठाकरे परिवार का तीन दशक का वर्चस्व खत्म कर दिया। वहीं, उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी पूरी तरह विफल नहीं हुई। उनके गठबंधन ने 71 सीटें जीतकर मुंबई के मराठी बहुल इलाके में अपना दबदबा बनाए रखा।

‘लोकतंत्र से खिलवाड़’—हजारों वोटर लिस्ट से बाहर, संजय राउत का बीएमसी चुनावों पर हमला

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में खराबी और आचार संहिता के उल्लंघन का दावा किया। नतीजों के दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने कहा कि मुंबई में दिख रहा वोटिंग पैटर्न एक गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन इलाकों में वोटर लिस्ट से हजारों मतदाताओं के नाम गायब थे, जहां शिवसेना (UBT), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और कांग्रेस को पारंपरिक रूप से मजबूत समर्थन मिलता है। मालूम हो कि बीएमसी चुनाव में भाजपा गठबंधन की बड़ी जीत हुई है। वहीं, तीन दशकों बाद देश के सबसे अमीर नगर निगम से शिवसेना यूबीटी बाहर हो गई।   उन्होंने आरोप लगाया, "हजारों लोगों के नाम, जिन्होंने विधानसभा चुनावों में भी वोट दिया था, वोटर लिस्ट से गायब हैं। यह खास तौर पर उन इलाकों में हो रहा है जहां शिवसेना (UBT), एमएनएस या कांग्रेस के वोट ज़्यादा हैं।" राउत ने यह भी दावा किया कि कई पोलिंग बूथ पर EVM खराब थे। उन्होंने कहा, "जहां NCP के लिए वोट बटन दबाया गया, वहां BJP की लाइट जल गई। शिव सेना (UBT) के जलती हुई मशाल के निशान और MNS के इंजन के निशान के साथ भी ऐसा ही हुआ।'' उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग से बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सीनियर भाजपा नेताओं और मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर भूषण गागरानी की मीटिंग पर सवाल उठाते हुए, राउत ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "कल, शाम करीब 6 बजे, सीनियर भाजपा नेताओं और मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर के बीच एक मीटिंग हुई। क्यों? आचार संहिता अभी भी लागू है। आप कमिश्नर के साथ 1.5 घंटे बैठे और क्या तय किया? क्या आपने आज का नतीजा पहले से ही तय कर लिया था?" राउत ने एग्जिट पोल के समय पर भी चिंता जताई, यह दावा करते हुए कि उन्हें आधिकारिक वोटिंग प्रतिशत घोषित होने से पहले ही जारी कर दिया गया था। उन्होंने कहा, "वोटिंग प्रतिशत आने से पहले ही एग्जिट पोल आ गए। यह क्या है? कुछ जगहों पर वोटिंग अभी भी चल रही थी, लेकिन भाजपा से जुड़े आउटलेट्स ने उन्हें एक-एक करके जारी करना शुरू कर दिया। भाजपा नेताओं ने अपनी जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया। यह किस तरह का लोकतंत्र है?" गुरुवार को इससे पहले, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर चिंता जताई थी, जिसमें वोटर लिस्ट, मिटने वाली स्याही और पुरानी ईवीएम मशीनों से जुड़ी समस्याओं का ज़िक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इन समस्याओं को दूर करने के लिए काफी कुछ नहीं कर रहा है और सरकार पर चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। मतों की गिनती शुक्रवार सुबह शुरू होने के बाद रुझानों के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी सहयोगी शिवसेना आगे हैं। मुंबई के 227 वार्ड में से भाजपा 88, शिवसेना 28, शिवसेना यूबीटी 73, कांग्रेस आठ वॉर्डों में आगे है। इसके अलावा, एमएनएस सात वॉर्ड में आगे है।  

महायुति पर सवाल: संजय राउत बोले, ज्यादातर विधायक illegitimate, जनता खोज रही जवाब

मुंबई  शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने वोट चोरी के मुद्दे पर एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसे-ऐसे लोग चुनकर आए हैं जिनका कुछ अता-पता नहीं। लोग उन्हें ढूंढ रहे हैं कि कौन विधायक है। मीडिया से बातचीत में राउत ने शनिवार को कहा, 'ये लोग वोट चोरी से महाराष्ट्र में विधायक बन गए। एकनाथ शिंदे, अजित पवार या फिर बीजेपी के 90 फीसदी विधायक तो वोट चोरी बने हुए हैं। वे घपला करके बने हैं। इसलिए जनता को उनके नाम भी नहीं मालूम हैं।' संजय राउत ने कहा कि वे आकर धमकियां देते हैं तो देने दो। उन्होंने कहा, 'बीजेपी का अब यह कल्चर बन गया है। कोई जयंत पाटिल के पिता जी के बारे में बोलता है तो कोई मुझे गाली देता है। मैंने जो सवाल पूछा है उसका जवाब मिलना चाहिए। लोकतंत्र में आलोचना की जा रही है।' राउत ने कहा कि घुसकर मारने की बात करोगे तो वापस नहीं जाओगे। दरअसल, महाराष्ट्र के भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने एनसीपी (एसपी) के नेता जयंत पाटिल और उनके माता-पिता के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। भाजपा विधायक पडलकर की टिप्पणी से विवाद विपक्षी दल के अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को फोन कर अपनी असहमति दर्ज कराई थी। पडलकर ने संबंधित टिप्पणी हाल में सांगली जिले में अपने विधानसभा क्षेत्र जत में रैली के दौरान की थी। इससे उत्पन्न विवाद के बीच फडणवीस ने भी आपत्ति व्यक्त की और विधायक को संयम बरतने की सलाह दी। टिप्पणी के विरोध में एनसीपी (एसपी) ने पाटिल के निर्वाचन क्षेत्र सांगली के ईश्वरपुर व ठाणे में भी प्रदर्शन किया और पडलकर का पुतला जलाया। पाटिल हाल तक NCP (एसपी) के प्रदेश प्रमुख थे और वह कई वर्षों तक मंत्री रहे हैं। वह दिवंगत राजाराम पाटिल के पुत्र हैं, जो कांग्रेस के दिग्गज नेता होने के साथ ही पश्चिमी महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र के अग्रदूतों में से एक थे।  

मुंबई पर मराठाओं का दावा खारिज, जजों पर बरसे संजय राउत

मुंबई  मराठा आंदोलन को लेकर आए बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को शिवसेना (UBT) ने चुनौती दी है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि महाराष्ट्र को मुंबई हाईकोर्ट ने नहीं दी है। उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा आरक्षण आंदोलन के कारण पूरा शहर ठहर गया है और यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं है तथा इसमें सभी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। राउत ने कहा, 'मुंबई खाली नहीं हो सकती। मुंबई जो है वो महाराष्ट्र और मराठी लोगों को हाईकोर्ट ने नहीं दी है। यह मुंबई 106 जो शहीद हो गए मराठी हमारे और हजारों लोग आंदोलन में आए थे लाखों लोग, इसके बाद यह मुंबई महाराष्ट्र को और मराठी मानुस को मिली है। तो महाराष्ट्र की सरकार तय कर सकती है। हाईकोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर आप गोली मारोगे, तो महाराष्ट्र में बड़ा संघर्ष हो जाएगा। जिस हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता बैठे हैं, उस न्यायालय से हम क्या अपेक्षा कर सकते हैं।' पैदल कोर्ट पहुंचे जज मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों के कारण न केवल आम लोगों को, बल्कि उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण मुंबई की सड़कों पर कब्जा कर लिया है और एक न्यायाधीश की कार को रोक दिया, जिसके कारण न्यायाधीश को उच्च न्यायालय भवन तक पहुंचने के लिए थोड़ी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम की पीठ ने कहा कि मुंबई शहर 'सचमुच पंगु हो गया है और उच्च न्यायालय वस्तुतः घेरेबंदी में है।' पीठ ने कहा कि हर सड़क विशेषकर आजाद मैदान, सीएसटी, मंत्रालय, फ्लोरा फाउंटेन, मरीन ड्राइव, पी'डेमेलो रोड का पूरा क्षेत्र प्रदर्शनकारियों से भरा पड़ा है जो सड़कों पर नाच रहे हैं, कबड्डी खेल रहे हैं, खाना बना रहे हैं, मुख्य सड़कों पर स्नान कर रहे हैं। क्या बोला हाईकोर्ट सोमवार को उच्च न्यायालय ने मुंबई में सामान्य स्थिति बहाल करने का आग्रह किया और जरांगे तथा उनके समर्थकों को हालात सुधारने तथा मंगलवार दोपहर तक सभी सड़कें खाली करने का अवसर दिया। जरांगे 29 अगस्त से दक्षिण मुंबई स्थित आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वह मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की मांग कर रहे हैं। उनके समर्थकों ने दावा किया कि जरांगे ने सोमवार से पानी पीना बंद कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने विशेष सुनवाई में कहा कि प्रदर्शनकारी आंदोलन के लिए निर्धारित स्थान आजाद मैदान पर नहीं रुके हैं और उन्होंने दक्षिण मुंबई के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अवरुद्ध कर दिया है। अदालत ने कहा, 'स्थिति गंभीर है और मुंबई शहर लगभग ठहर सा गया है।' अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और चर्चगेट रेलवे स्टेशन, मरीन ड्राइव और उच्च न्यायालय भवन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर जमा हो गए हैं। अदालत ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं है और जरांगे तथा अन्य प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देते समय प्राधिकारों द्वारा निर्धारित प्रत्येक शर्त का उल्लंघन किया है। पीठ ने कहा, 'हम जरांगे और उनके समर्थकों को हालात को तुरंत सुधारने और यह सुनिश्चित करने का अवसर दे रहे हैं कि मंगलवार दोपहर तक सड़कें खाली हो जाएं।' पीठ ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार के लिए निर्धारित करते हुए कहा कि अगर तब तक जरांगे की तबीयत बिगड़ती है, तो सरकार उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान करेगी।