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स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी: शिक्षा विभाग ने स्कूलों को दिए नए आदेश, बढ़ेगी सुविधा

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में स्कूली बच्चों पर बढ़ते भारी स्कूल बैग का बोझ अब कम किया जाएगा। बच्चों की सेहत और रीढ़ की हड्डी की समस्यओं को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। किसी भी विद्यार्थी का स्कूल बैग अब उसके शरीर के वजन के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होगा। विभाग द्वारा सर्कुलर में साफ किया गया है कि सिर्फ प्रवानित सिलेबस में तय पाठ-पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। कोई भी स्कूल एक्स्ट्रा गाइडबुक, रेफरेंस बुक या वर्कबुक को जरुरी नहीं बनाएगा। स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे टाइमटेबल इस तरह बनाएं कि स्टूडेंट्स एक ही दिन में सभी सब्जेक्ट की किताबें न लाएं। क्लास के हिसाब से भी गाइडलाइन जारी की गई हैं। प्री-प्राइमरी और ग्रेड 1 और 2 को होमवर्क से बचने और कम से कम किताबों के साथ एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। क्लास 3 से 5 को सब्जेक्ट के हिसाब से लिमिटेड किताबें रखने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि क्लास 6 से 8 को रोज का काम का बोझ कम करने के लिए सब्जेक्ट के हिसाब से टाइमटेबल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। हर स्कूल के लिए स्कूल बैग निगरानी कमेटी बनाना जरूरी जहां तक ​​हो सके क्लास 9 से 12 तक के बच्चों के लिए लॉकर की सुविधा देने और एक सही टाइमटेबल अपनाने पर जोर दिया गया है। स्कूलों को क्लासरूम में लॉकर या शेल्फ की सुविधा देने की भी सलाह दी गई है ताकि बच्चों को हर दिन घर से भारी किताबें न लानी पड़ें। इसके साथ ही, हर स्कूल के लिए स्कूल हेड की अगुवाई में एक स्कूल बैग मॉनिटरिंग कमेटी बनाना जरूरी कर दिया गया है। सर्कुलर के मुताबिक हर 15 दिन में कम से कम एक बार स्टूडेंट्स के बैग का वजन चेक किया जाएगा और एक लिखा हुआ रिकॉर्ड रखा जाएगा। स्कूलों को 7 दिनों के अंदर ऑर्डर के पालन पर रिपोर्ट देने का निर्देश इस प्रोसेस में पेरेंट्स को शामिल करते हुए, स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पेरेंट्स को तय नियमों के बारे में बताएं और उन्हें सलाह दें कि वे अपने बच्चों के बैग में गैर-जरूरी चीजें न भेजें। जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर ने सभी स्कूलों को 7 दिनों के अंदर इस ऑर्डर के पालन पर रिपोर्ट देने को कहा है। आदेश में साफ किया गया है कि ऑर्डर का उल्लंघन करने पर इसे गंभीरता से लिया जाएगा और नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है।

विद्यार्थियों के आधार बायोमेट्रिक अपडेट के लिए स्कूलों में शिविर, 21 हजार से अधिक स्टूडेंट्स शामिल

महासमुंद जिले में यूडाईस 2025-26 के अंतर्गत आधार से संबंधित बायोमेट्रिक अपडेट की प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 06 फरवरी 2026 की स्थिति में जिले में कुल 30,587 विद्यार्थियों का बायोमेट्रिक अपडेट लंबित है, जिसे शीघ्र पूर्ण किया जाना है। इस हेतु विद्यालयों में विशेष बायोमेट्रिक अपडेट शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से यूआईडीएआई से डाटा अपडेट कर उसकी प्रविष्टि यूडाईस पोर्टल पर की जाएगी। अभियान के अंतर्गत ई.डी.एम. चिप्स से समन्वय कर 20 से अधिक लंबित बायोमेट्रिक वाले 352 विद्यालयों का चयन किया गया है, जिसमें लगभग 21,406 विद्यार्थियों का अपडेट किया जाना है। जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा रेखराज शर्मा द्वारा सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयकों को निर्देशित करते हुए अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालयों को पालकों एवं विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं शिविर में उपस्थित होकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट करवा सकें। इस कार्य के सफल संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर बीआरसी एवं संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पूरे अभियान की प्रतिदिन मॉनिटरिंग जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा किया जाएगा। प्रथम चरण में 5 से 7 वर्ष एवं 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक अपडेट पर फोकस करते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। यूआईडीएआई द्वारा बायोमेट्रिक अपडेट की जानकारी यूडाईस पोर्टल पर अपडेट करने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही यूआईडीएआई के निर्देशानुसार 7 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट एक वर्ष के लिए निःशुल्क किया गया है, जबकि 5 से 7 वर्ष एवं 17 वर्ष के बच्चों के लिए यह सुविधा पहले से ही निःशुल्क है। आधार ऑपरेटरों को प्रतिदिन शिविर की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संधारित करने तथा शिविर स्थल पर आवश्यक दस्तावेज सूची, शुल्क सूची एवं अन्य निर्देश प्रदर्शित करने कहा गया हैं। 

चंडीगढ़ के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी

चंडीगढ़. चंडीगढ़ के स्कूलों में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब 5 बड़े स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। यह धमकी ई-मेल के जरिए भेजी गई थी। जिन स्कूलों को धमकी मिली उनमें सेक्टर-25 का चितकारा इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर-16 का मॉडल स्कूल, सेक्टर-45 का सेंट स्टीफंस स्कूल, सेक्टर-35 का मॉडल स्कूल और सेक्टर-19 का मॉडल स्कूल शामिल हैं। धमकी मिलते ही एहतियात के तौर पर सभी स्कूलों को खाली करा लिया गया। बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया और स्कूल बसों को रास्ते से वापस भेज दिया गया। चंडीगढ़ पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और स्कूल कॉम्प्लेक्स में तलाशी ली जा रही है। वहीं अभी तक कोई संदिग्ध चीज बरामद नहीं हुई है। पुलिस ईमेल भेजने वाले की पहचान और धमकी की सच्चाई की जांच कर रही है। सुरक्षा कारणों से आस-पास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। इस धमकी के बाद बच्चों के साथ-साथ माता-पिता में भी चिंता का माहौल है।

पटना में पूरी तरह खुले स्कूल, सुबह 9 बजे से रहेंगी क्लास

पटना. पटना जिले में स्कूल पूरी तरह खोल दिए गए हैं। 17 जनवरी से जिले के तमाम निजी और सरकारी विद्यालयों में सभी कक्षाओं की पढ़ाई सुचारू कर दी गई है। बिहार में पड़ रही प्रचंड ठंड और शीतलहर को देखते हुए पिछले दिनों स्कूलों में पाबंदी लगाई गई थी। 16 जनवरी तक प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं पर पाबंदी थी, जिसे शनिवार को हटा दिया गया। इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) ने आदेश जारी किया है। पटना के डीएम त्यागराजन द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया कि जिले के सभी निजी एवं सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, किसी भी शिक्षण संस्थान में सुबह 9 बजे से पहले पढ़ाई नहीं हो पाएगी। स्कूलों का संचालन 9 बजे के बाद ही किया जाएगा। यह आदेश फिलहाल 20 जनवरी तक लागू रहेगा। ठंड में और राहत मिलने पर टाइमिंग में और राहत दी जाएगी। ठंड के चलते बंद किए गए थे स्कूल पटना समेत बिहार के कई जिलों में ठंड के चलते निजी एवं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बंद की गई थी। इस महीने की शुरुआत में जिले के सभी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। यह पाबंदी 11 जनवरी तक जारी रही थी। इसके बाद चरणवार तरीके से विभिन्न कक्षाओं की छुट्टियां खत्म की गईं। सबसे पहले, 12 जनवरी से छठी से आठवीं तक के स्कूल खोल दिए गए, लेकिन कक्षा 5 तक पाबंदी जारी रही। बाद में 14 तारीख से कक्षा 1-5 तक के लिए स्कूल खोले गए, लेकिन प्राइमरी एवं प्री-प्राइमरी के बच्चों की छुट्टियां जारी रहीं। अब सभी कक्षाओं पर लगी रोक को हटा दिया गया है।

हरियाणा के छात्रों को राहत: 15 दिन का विंटर वेकेशन, 1 जनवरी से स्कूल रहेंगे बंद

अम्बाला  हरियाणा में कड़ाके की ठंड के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। Directorate School Education Haryana ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, एक जनवरी 2026 से पंद्रह जनवरी 2026 तक सभी विद्यालय बंद रहेंगे। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सोलह जनवरी 2026 (शुक्रवार) से स्कूल पूर्व की भांति दोबारा खुलेंगे और नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। इस आदेश को जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और सभी स्कूल मुखियाओं को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। क्या पूरी तरह बंद रहेंगे स्कूल निदेशालय ने यह भी साफ किया है कि शीतकालीन अवकाश के दौरान सीबीएसई, आईसीएसई सहित अन्य बोर्डों के नियमों के अनुसार दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए विद्यालय बुलाया जा सकता है। क्यों लिया गया फैसला शिक्षा विभाग के अनुसार, यह निर्णय लगातार गिरते तापमान और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि ठंड के मौसम में छात्रों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

छुट्टियों का मौका: झारखंड के स्कूल 24, 25 और 26 दिसंबर को बंद

रांची  क्रिसमस 2025 इस बार गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन लगभग पूरे देश के सभी स्कूलों में छुट्टी रहती है। वहीं, बात करें झारखंड की तो हर साल की तरह इस बार भी यहां के सभी स्कूलों में 25 दिसंबर यानी क्रिसमस पर छुट्टी रहने वाली है। 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के स्कूलों में क्रिसमस की छुट्टी के बाद सर्दियों की छुट्टियां पड़ जाएगी जिससे बच्चों में खुशी की लहर है। कई स्कूलों में 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश दिया जा सकता है। क्रिसमस के मौके पर मिशनरी और CBSE/ICSE स्कूलों में छुट्टी का दायरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है। दिसंबर के अंत में झारखंड में तापमान काफी गिर जाता है, इसलिए Winter Break दिया जाता है। बच्चों में खुशी की लहर कुछ जिलों में ठंड अधिक होने पर छुट्टियां जनवरी के पहले सप्ताह तक बढ़ सकती हैं। विंटर ब्रेक का फैसला जिला प्रशासन भी मौसम को देखते हुए करता है। इस दौरान बच्चों को कुछ दिन के लिए पढ़ाई से राहत मिल जाती है।  

झारखंड में 48 घंटे की छुट्टी का ऐलान, सभी शिक्षण संस्थान व दफ्तर बंद

रांची  झारखंड में 27 और 28 नवंबर को दो दिन की छुट्टी का ऐलान किया गया है। इस घोषणा के बाद स्कूल, कॉलेज और सरकारी-निजी दफ्तर बंद रहेंगे। प्रशासन ने यह फैसला मुख्य रूप से मौसम की बदलती स्थिति और त्योहारों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए लिया है। इन दो दिनों में सभी शिक्षण संस्थान और कई कार्यालय बंद रहेंगे ताकि त्योहारों के दौरान भीड़ और ट्रैफिक जाम को कम किया जा सके। यह छुट्टी सामान्य अवकाशों से अलग होती है क्योंकि इसे विशेष परिस्थितियों जैसे मौसम या त्योहार के कारण जल्दी घोषित किया जाता है। स्कूल–कॉलेज बंद का मतलब यह है कि शिक्षण संस्थान इन दो दिनों में पढ़ाई नहीं करेंगे और सभी शैक्षणिक गतिविधियां रोक दी जाएंगी। हालांकि कई जगहों पर ऑनलाइन कक्षाओं और वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था भी जारी रहेगी ताकि कामकाज प्रभावित न हो। प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से इस छुट्टी का लाभ उठाएं। जरूरत न होने पर बाहर न निकलें और सामाजिक दूरी का पालन करें ताकि यह अवकाश सभी के लिए सुरक्षित रहे।  

लड़कियों ने मैदान में कदम रखा: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर स्कूलों में लड़के-लड़कियों के संयुक्त क्रिकेट मैच का आयोजन

राजगढ़, अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर गर्ल राइजिंग और चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (CINI) के संयुक्त आयोजन में राजगढ़ जिले के खिलचीपुर और जीरापुर में दो क्रिकेट प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों भाग ले रहे हैं। कक्षा 8 के छात्रों के लिए आयोजित इन मैचों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि क्रिकेट सिर्फ लड़कों का खेल नहीं, बल्कि टीमवर्क, नेतृत्व और समानता का प्रतीक है। दो वर्षों से चल रहे RISE कार्यक्रम पर आधारित यह अभियान जिला शिक्षा कार्यालय के सहयोग से राजगढ़ के 24 सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है, जहाँ छात्र सामाजिक और भावनात्मक कौशल विकास, लैंगिक समानता, डिजिटल व वित्तीय साक्षरता तथा जलवायु जागरूकता जैसे मूल्य सीख रहे हैं। इन मैचों ने शिक्षा को कक्षा से बाहर ले जाकर लड़कियों और लड़कों को क्रिकेट के मैदान पर समान अवसर, सहानुभूति और सहयोग की भावना का अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम को कॉमिक बुक ‘कुसुम की पारी’ से भी प्रेरणा मिली, जिसकी प्रतियाँ सभी छात्रों को उपलब्ध कराई गईं। इस कॉमिक में एक युवा लड़की कुसुम की कहानी है, जो बाधाओं और धारणाओं को तोड़कर क्रिकेट खिलाड़ी बनने के अपने सपने को पूरा करती है। “मुझे पहले लगता था कि क्रिकेट तो बस लड़के खेलते हैं। लेकिन जब मैं खुद मैदान में उतरी, तो समझ आया कि हम भी बहुत अच्छा खेल सकते हैं। अब तो मन करता है रोज़ प्रैक्टिस करूं!” — संजना मालवीय, कक्षा 8, मॉडल स्कूल, खिलचीपुर मैच समाप्त होने के पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, मेडल और ट्रॉफी प्रदान की गई। खिलचीपुर स्कूल के प्रिंसिपल रामचंद्र दांगी, सभी शिक्षक और एकीकृत बाल विकास परियोजना की सुपरवाइजर श्रीमती संतोष चौहान ने विद्यालय के छात्रों और उनके माता-पिता के साथ मिलकर बच्चों का स्वागत किया और उनका उत्साह बढ़ाया। श्रीमती संतोष चौहान ने कहा, “खेल आत्मविश्वास बढ़ाने, दृढ़ता विकसित करने और बच्चों में टीम भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम है। जब लड़कियों को समान अवसर प्राप्त होते हैं, तो वे न केवल अपने कौशल को निखारती हैं, बल्कि शिक्षा में समानता को भी बढ़ावा देती हैं।” गर्ल राइजिंग की प्रतिनिधि शुभ्रा ने कहा, “बच्चे जब साथ खेलते हैं, तो वे केवल खेलना ही नहीं सीखते — वे जीवन जीने का तरीका भी सीखते हैं। वे लक्ष्य बनाना, समस्याओं का हल करना, एक-दूसरे का सम्मान करना तथा चुनौतियों से जूझकर आगे बढ़ना सीखते हैं। लड़कियों के लिए ऐसे अवसर बहुत मायने रखते हैं, क्योंकि ये उन्हें आत्मविश्वास देते हैं, सीमाएँ तोड़ने की ताकत देते हैं और यह एहसास कराते हैं कि खेल के मैदान पर उनका भी समान अधिकार है।” जब गर्ल राइजिंग और CINI ने क्रिकेट जैसे भारत के लोकप्रिय खेल को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उत्सव से जोड़ा, तो उन्होंने यह संदेश दिया कि “लैंगिक समानता केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक अभ्यास है — जहाँ हर बच्चा, चाहे लड़की हो या लड़का, सपने देख सकता है, खेल सकता है और नेतृत्व कर सकता है।”

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने स्कूलों की स्थिति पर लिया संज्ञान, अधिकारियों को सुधार के आदेश जारी

सरगुजा अंबिकापुर शहर सहित छत्तीसगढ़ के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को लेकर गाइडलाइन जारी की गई है, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के शौचालय जाने से लेकर उनके अधिकार और स्कूली बैग के वजन को लेकर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने प्रदेश के सभी कलेक्टर, एसपी और शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी किया गया है, लेकिन इन आदेशों के परिपालन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई जांच कमेटी का गठन नहीं किया है. अधिवक्ता व समाजसेविका शिल्पा पाण्डेय ने प्रेस वार्ता कर बताया कि विभिन्न विद्यालयों से शिकायत मिल रही थी कि छोटे बच्चों को कक्षा के दौरान शौचालय जाने से वंचित किया जा रहा है, साथ ही बच्चों के बस्ते का वजन भी निर्धारित मापदंड से अधिक रखा गया है. और तो और सप्ताह में एक दिन स्कूलों में होने वाला बैग लेस डे का पालन भी नहीं किया जा रहा है. इस पर उन्होंने राज्य बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिखकर स्कूलों में नियमों का पालन करने की मांग की थी. शिल्पा पाण्डेय ने बताया कि कक्षा पहली से लेकर दूसरी तक के बच्चों के बस्ते का वजन डेढ़ से 2 किलो, तीसरी से पांचवी तक अधिकतम ढाई से 3 किलो, छठवीं से आठवीं तक 4 किलो और कक्षा नौवीं से दसवीं तक अधिकतम 5 किलो वजन निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही कक्षा पहली और दूसरी में गृह कार्य होमवर्क पर पूर्णता निषद्ध की गई है. लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. शिल्पा पाण्डेय के पत्र पर संज्ञान में लेते हुए राज्य बाल संरक्षण आयोग के द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टर एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी कर नियमों का पालन करने निर्देशित किया है, जिसमें स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को शौचालय जाने से नहीं रोकने और बस्ते का वजन निर्धारित मापदंड अनुसार करने की बात कही गई है. लेकिन आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई जांच कमेटी का गठन नहीं किया है.

लड़कियों की पढ़ाई, ब्यूटी पार्लर और अब इंटरनेट भी बैन: अफगानिस्तान में तालिबान की सख्ती

काबुल  तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में टेलीकॉम सर्विसेज और इंटरनेट सेवा को बंद करने का आदेश दे दिया है. ग्लोबल इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स की मानें तो पूरे देश में बीते दिन कनेक्टिविटी सामान्य से एक फीसदी के भी कम रह गई है. संस्था का कहना है कि यह इंटरनेट शटडाउन पूरी तरह से ब्लैकआउट के बराबर है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब तालिबान ने अफगानिस्तान में किसी चीज पर बैन लगाया हो. इससे पहले भी जब तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता में आया था, तब भी कई चीजों पर रोक लगाई गई है. चलिए जानें. सत्ता में आया तालिबान, घर में सिमटीं महिलाएं अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद से महिलाओं की जिंदगी तो बिल्कुल सिमट गई है. अगस्त 2021 में तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया और तब से अब तक महिलाओं और लड़कियों पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन से जुड़े अधिकार उनसे धीरे-धीरे छीन लिए गए हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार तालिबान की नीतियों की आलोचना होती रही है, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. लड़कियों की पढ़ाई हुई बैन तालिबान के आने के बाद सबसे पहला असर लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ा. तालिबान ने 2021 में लड़कियों के लिए छठी कक्षा से आगे की पढ़ाई पर रोक लगा दी. धीरे-धीरे विश्वविद्यालयों में भी उनका प्रवेश बंद कर दिया गया. आज स्थिति यह है कि अफगानिस्तान की लाखों लड़कियां और युवतियां स्कूल-कॉलेज जाने से वंचित हैं. शिक्षा का यह अधिकार उनसे पूरी तरह छीन लिया गया है. रोजगार के अवसरों पर लगी पाबंदी केवल शिक्षा ही नहीं, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बंद कर दिए गए. तालिबान सरकार ने कई क्षेत्रों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगाई, जिनमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं. इसके चलते हजारों महिलाएं जो पहले समाज में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं, अब घरों में कैद होकर रह गई हैं. ब्यूटी पार्लर भी कर दिए गए बंद महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति को भी सीमित कर दिया गया है. उनके लिए पार्क, जिम और पब्लिक बाथहाउस जैसी जगहों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां तक कि यात्रा करने के लिए भी महिलाओं को अब पुरुष अभिभावक यानी उनके पिता या पति की जरूरत पड़ती है. यह नियम उनकी स्वतंत्रता को पूरी तरह खत्म कर देता है. जुलाई 2023 में तालिबान ने महिलाओं के लिए ब्यूटी पार्लर बंद करने का भी आदेश जारी किया था. अफगानिस्तान में हजारों महिलाएं ब्यूटी पार्लर में काम करती थीं और यह उनका रोजगार का साधन भी था.  तालिबान में सामान्य जीवन नहीं जी सकते लोग इन तमाम पाबंदियों के बीच तालिबान का तर्क यही रहता है कि ये फैसले उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक व्याख्या पर आधारित हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तालिबान की नीतियां सीधे तौर पर महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन हैं. आज अफगानिस्तान में हालात ऐसे हैं कि लड़कियों की किताबें छिन चुकी हैं, कामकाजी महिलाओं की रोजी-रोटी खत्म हो चुकी है और सामान्य जीवन जीने के मौके भी लगातार सीमित किए जा रहे हैं.