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चंडीगढ़ के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी

चंडीगढ़. चंडीगढ़ के स्कूलों में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब 5 बड़े स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। यह धमकी ई-मेल के जरिए भेजी गई थी। जिन स्कूलों को धमकी मिली उनमें सेक्टर-25 का चितकारा इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर-16 का मॉडल स्कूल, सेक्टर-45 का सेंट स्टीफंस स्कूल, सेक्टर-35 का मॉडल स्कूल और सेक्टर-19 का मॉडल स्कूल शामिल हैं। धमकी मिलते ही एहतियात के तौर पर सभी स्कूलों को खाली करा लिया गया। बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया और स्कूल बसों को रास्ते से वापस भेज दिया गया। चंडीगढ़ पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और स्कूल कॉम्प्लेक्स में तलाशी ली जा रही है। वहीं अभी तक कोई संदिग्ध चीज बरामद नहीं हुई है। पुलिस ईमेल भेजने वाले की पहचान और धमकी की सच्चाई की जांच कर रही है। सुरक्षा कारणों से आस-पास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। इस धमकी के बाद बच्चों के साथ-साथ माता-पिता में भी चिंता का माहौल है।

पटना में पूरी तरह खुले स्कूल, सुबह 9 बजे से रहेंगी क्लास

पटना. पटना जिले में स्कूल पूरी तरह खोल दिए गए हैं। 17 जनवरी से जिले के तमाम निजी और सरकारी विद्यालयों में सभी कक्षाओं की पढ़ाई सुचारू कर दी गई है। बिहार में पड़ रही प्रचंड ठंड और शीतलहर को देखते हुए पिछले दिनों स्कूलों में पाबंदी लगाई गई थी। 16 जनवरी तक प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं पर पाबंदी थी, जिसे शनिवार को हटा दिया गया। इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) ने आदेश जारी किया है। पटना के डीएम त्यागराजन द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया कि जिले के सभी निजी एवं सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, किसी भी शिक्षण संस्थान में सुबह 9 बजे से पहले पढ़ाई नहीं हो पाएगी। स्कूलों का संचालन 9 बजे के बाद ही किया जाएगा। यह आदेश फिलहाल 20 जनवरी तक लागू रहेगा। ठंड में और राहत मिलने पर टाइमिंग में और राहत दी जाएगी। ठंड के चलते बंद किए गए थे स्कूल पटना समेत बिहार के कई जिलों में ठंड के चलते निजी एवं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बंद की गई थी। इस महीने की शुरुआत में जिले के सभी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। यह पाबंदी 11 जनवरी तक जारी रही थी। इसके बाद चरणवार तरीके से विभिन्न कक्षाओं की छुट्टियां खत्म की गईं। सबसे पहले, 12 जनवरी से छठी से आठवीं तक के स्कूल खोल दिए गए, लेकिन कक्षा 5 तक पाबंदी जारी रही। बाद में 14 तारीख से कक्षा 1-5 तक के लिए स्कूल खोले गए, लेकिन प्राइमरी एवं प्री-प्राइमरी के बच्चों की छुट्टियां जारी रहीं। अब सभी कक्षाओं पर लगी रोक को हटा दिया गया है।

हरियाणा के छात्रों को राहत: 15 दिन का विंटर वेकेशन, 1 जनवरी से स्कूल रहेंगे बंद

अम्बाला  हरियाणा में कड़ाके की ठंड के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। Directorate School Education Haryana ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, एक जनवरी 2026 से पंद्रह जनवरी 2026 तक सभी विद्यालय बंद रहेंगे। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सोलह जनवरी 2026 (शुक्रवार) से स्कूल पूर्व की भांति दोबारा खुलेंगे और नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। इस आदेश को जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और सभी स्कूल मुखियाओं को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। क्या पूरी तरह बंद रहेंगे स्कूल निदेशालय ने यह भी साफ किया है कि शीतकालीन अवकाश के दौरान सीबीएसई, आईसीएसई सहित अन्य बोर्डों के नियमों के अनुसार दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए विद्यालय बुलाया जा सकता है। क्यों लिया गया फैसला शिक्षा विभाग के अनुसार, यह निर्णय लगातार गिरते तापमान और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि ठंड के मौसम में छात्रों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

छुट्टियों का मौका: झारखंड के स्कूल 24, 25 और 26 दिसंबर को बंद

रांची  क्रिसमस 2025 इस बार गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन लगभग पूरे देश के सभी स्कूलों में छुट्टी रहती है। वहीं, बात करें झारखंड की तो हर साल की तरह इस बार भी यहां के सभी स्कूलों में 25 दिसंबर यानी क्रिसमस पर छुट्टी रहने वाली है। 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के स्कूलों में क्रिसमस की छुट्टी के बाद सर्दियों की छुट्टियां पड़ जाएगी जिससे बच्चों में खुशी की लहर है। कई स्कूलों में 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश दिया जा सकता है। क्रिसमस के मौके पर मिशनरी और CBSE/ICSE स्कूलों में छुट्टी का दायरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है। दिसंबर के अंत में झारखंड में तापमान काफी गिर जाता है, इसलिए Winter Break दिया जाता है। बच्चों में खुशी की लहर कुछ जिलों में ठंड अधिक होने पर छुट्टियां जनवरी के पहले सप्ताह तक बढ़ सकती हैं। विंटर ब्रेक का फैसला जिला प्रशासन भी मौसम को देखते हुए करता है। इस दौरान बच्चों को कुछ दिन के लिए पढ़ाई से राहत मिल जाती है।  

झारखंड में 48 घंटे की छुट्टी का ऐलान, सभी शिक्षण संस्थान व दफ्तर बंद

रांची  झारखंड में 27 और 28 नवंबर को दो दिन की छुट्टी का ऐलान किया गया है। इस घोषणा के बाद स्कूल, कॉलेज और सरकारी-निजी दफ्तर बंद रहेंगे। प्रशासन ने यह फैसला मुख्य रूप से मौसम की बदलती स्थिति और त्योहारों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए लिया है। इन दो दिनों में सभी शिक्षण संस्थान और कई कार्यालय बंद रहेंगे ताकि त्योहारों के दौरान भीड़ और ट्रैफिक जाम को कम किया जा सके। यह छुट्टी सामान्य अवकाशों से अलग होती है क्योंकि इसे विशेष परिस्थितियों जैसे मौसम या त्योहार के कारण जल्दी घोषित किया जाता है। स्कूल–कॉलेज बंद का मतलब यह है कि शिक्षण संस्थान इन दो दिनों में पढ़ाई नहीं करेंगे और सभी शैक्षणिक गतिविधियां रोक दी जाएंगी। हालांकि कई जगहों पर ऑनलाइन कक्षाओं और वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था भी जारी रहेगी ताकि कामकाज प्रभावित न हो। प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से इस छुट्टी का लाभ उठाएं। जरूरत न होने पर बाहर न निकलें और सामाजिक दूरी का पालन करें ताकि यह अवकाश सभी के लिए सुरक्षित रहे।  

लड़कियों ने मैदान में कदम रखा: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर स्कूलों में लड़के-लड़कियों के संयुक्त क्रिकेट मैच का आयोजन

राजगढ़, अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर गर्ल राइजिंग और चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (CINI) के संयुक्त आयोजन में राजगढ़ जिले के खिलचीपुर और जीरापुर में दो क्रिकेट प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों भाग ले रहे हैं। कक्षा 8 के छात्रों के लिए आयोजित इन मैचों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि क्रिकेट सिर्फ लड़कों का खेल नहीं, बल्कि टीमवर्क, नेतृत्व और समानता का प्रतीक है। दो वर्षों से चल रहे RISE कार्यक्रम पर आधारित यह अभियान जिला शिक्षा कार्यालय के सहयोग से राजगढ़ के 24 सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है, जहाँ छात्र सामाजिक और भावनात्मक कौशल विकास, लैंगिक समानता, डिजिटल व वित्तीय साक्षरता तथा जलवायु जागरूकता जैसे मूल्य सीख रहे हैं। इन मैचों ने शिक्षा को कक्षा से बाहर ले जाकर लड़कियों और लड़कों को क्रिकेट के मैदान पर समान अवसर, सहानुभूति और सहयोग की भावना का अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम को कॉमिक बुक ‘कुसुम की पारी’ से भी प्रेरणा मिली, जिसकी प्रतियाँ सभी छात्रों को उपलब्ध कराई गईं। इस कॉमिक में एक युवा लड़की कुसुम की कहानी है, जो बाधाओं और धारणाओं को तोड़कर क्रिकेट खिलाड़ी बनने के अपने सपने को पूरा करती है। “मुझे पहले लगता था कि क्रिकेट तो बस लड़के खेलते हैं। लेकिन जब मैं खुद मैदान में उतरी, तो समझ आया कि हम भी बहुत अच्छा खेल सकते हैं। अब तो मन करता है रोज़ प्रैक्टिस करूं!” — संजना मालवीय, कक्षा 8, मॉडल स्कूल, खिलचीपुर मैच समाप्त होने के पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, मेडल और ट्रॉफी प्रदान की गई। खिलचीपुर स्कूल के प्रिंसिपल रामचंद्र दांगी, सभी शिक्षक और एकीकृत बाल विकास परियोजना की सुपरवाइजर श्रीमती संतोष चौहान ने विद्यालय के छात्रों और उनके माता-पिता के साथ मिलकर बच्चों का स्वागत किया और उनका उत्साह बढ़ाया। श्रीमती संतोष चौहान ने कहा, “खेल आत्मविश्वास बढ़ाने, दृढ़ता विकसित करने और बच्चों में टीम भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम है। जब लड़कियों को समान अवसर प्राप्त होते हैं, तो वे न केवल अपने कौशल को निखारती हैं, बल्कि शिक्षा में समानता को भी बढ़ावा देती हैं।” गर्ल राइजिंग की प्रतिनिधि शुभ्रा ने कहा, “बच्चे जब साथ खेलते हैं, तो वे केवल खेलना ही नहीं सीखते — वे जीवन जीने का तरीका भी सीखते हैं। वे लक्ष्य बनाना, समस्याओं का हल करना, एक-दूसरे का सम्मान करना तथा चुनौतियों से जूझकर आगे बढ़ना सीखते हैं। लड़कियों के लिए ऐसे अवसर बहुत मायने रखते हैं, क्योंकि ये उन्हें आत्मविश्वास देते हैं, सीमाएँ तोड़ने की ताकत देते हैं और यह एहसास कराते हैं कि खेल के मैदान पर उनका भी समान अधिकार है।” जब गर्ल राइजिंग और CINI ने क्रिकेट जैसे भारत के लोकप्रिय खेल को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उत्सव से जोड़ा, तो उन्होंने यह संदेश दिया कि “लैंगिक समानता केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक अभ्यास है — जहाँ हर बच्चा, चाहे लड़की हो या लड़का, सपने देख सकता है, खेल सकता है और नेतृत्व कर सकता है।”

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने स्कूलों की स्थिति पर लिया संज्ञान, अधिकारियों को सुधार के आदेश जारी

सरगुजा अंबिकापुर शहर सहित छत्तीसगढ़ के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को लेकर गाइडलाइन जारी की गई है, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के शौचालय जाने से लेकर उनके अधिकार और स्कूली बैग के वजन को लेकर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने प्रदेश के सभी कलेक्टर, एसपी और शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी किया गया है, लेकिन इन आदेशों के परिपालन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई जांच कमेटी का गठन नहीं किया है. अधिवक्ता व समाजसेविका शिल्पा पाण्डेय ने प्रेस वार्ता कर बताया कि विभिन्न विद्यालयों से शिकायत मिल रही थी कि छोटे बच्चों को कक्षा के दौरान शौचालय जाने से वंचित किया जा रहा है, साथ ही बच्चों के बस्ते का वजन भी निर्धारित मापदंड से अधिक रखा गया है. और तो और सप्ताह में एक दिन स्कूलों में होने वाला बैग लेस डे का पालन भी नहीं किया जा रहा है. इस पर उन्होंने राज्य बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिखकर स्कूलों में नियमों का पालन करने की मांग की थी. शिल्पा पाण्डेय ने बताया कि कक्षा पहली से लेकर दूसरी तक के बच्चों के बस्ते का वजन डेढ़ से 2 किलो, तीसरी से पांचवी तक अधिकतम ढाई से 3 किलो, छठवीं से आठवीं तक 4 किलो और कक्षा नौवीं से दसवीं तक अधिकतम 5 किलो वजन निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही कक्षा पहली और दूसरी में गृह कार्य होमवर्क पर पूर्णता निषद्ध की गई है. लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. शिल्पा पाण्डेय के पत्र पर संज्ञान में लेते हुए राज्य बाल संरक्षण आयोग के द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टर एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी कर नियमों का पालन करने निर्देशित किया है, जिसमें स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को शौचालय जाने से नहीं रोकने और बस्ते का वजन निर्धारित मापदंड अनुसार करने की बात कही गई है. लेकिन आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई जांच कमेटी का गठन नहीं किया है.

लड़कियों की पढ़ाई, ब्यूटी पार्लर और अब इंटरनेट भी बैन: अफगानिस्तान में तालिबान की सख्ती

काबुल  तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में टेलीकॉम सर्विसेज और इंटरनेट सेवा को बंद करने का आदेश दे दिया है. ग्लोबल इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स की मानें तो पूरे देश में बीते दिन कनेक्टिविटी सामान्य से एक फीसदी के भी कम रह गई है. संस्था का कहना है कि यह इंटरनेट शटडाउन पूरी तरह से ब्लैकआउट के बराबर है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब तालिबान ने अफगानिस्तान में किसी चीज पर बैन लगाया हो. इससे पहले भी जब तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता में आया था, तब भी कई चीजों पर रोक लगाई गई है. चलिए जानें. सत्ता में आया तालिबान, घर में सिमटीं महिलाएं अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद से महिलाओं की जिंदगी तो बिल्कुल सिमट गई है. अगस्त 2021 में तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया और तब से अब तक महिलाओं और लड़कियों पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन से जुड़े अधिकार उनसे धीरे-धीरे छीन लिए गए हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार तालिबान की नीतियों की आलोचना होती रही है, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. लड़कियों की पढ़ाई हुई बैन तालिबान के आने के बाद सबसे पहला असर लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ा. तालिबान ने 2021 में लड़कियों के लिए छठी कक्षा से आगे की पढ़ाई पर रोक लगा दी. धीरे-धीरे विश्वविद्यालयों में भी उनका प्रवेश बंद कर दिया गया. आज स्थिति यह है कि अफगानिस्तान की लाखों लड़कियां और युवतियां स्कूल-कॉलेज जाने से वंचित हैं. शिक्षा का यह अधिकार उनसे पूरी तरह छीन लिया गया है. रोजगार के अवसरों पर लगी पाबंदी केवल शिक्षा ही नहीं, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बंद कर दिए गए. तालिबान सरकार ने कई क्षेत्रों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगाई, जिनमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं. इसके चलते हजारों महिलाएं जो पहले समाज में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं, अब घरों में कैद होकर रह गई हैं. ब्यूटी पार्लर भी कर दिए गए बंद महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति को भी सीमित कर दिया गया है. उनके लिए पार्क, जिम और पब्लिक बाथहाउस जैसी जगहों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां तक कि यात्रा करने के लिए भी महिलाओं को अब पुरुष अभिभावक यानी उनके पिता या पति की जरूरत पड़ती है. यह नियम उनकी स्वतंत्रता को पूरी तरह खत्म कर देता है. जुलाई 2023 में तालिबान ने महिलाओं के लिए ब्यूटी पार्लर बंद करने का भी आदेश जारी किया था. अफगानिस्तान में हजारों महिलाएं ब्यूटी पार्लर में काम करती थीं और यह उनका रोजगार का साधन भी था.  तालिबान में सामान्य जीवन नहीं जी सकते लोग इन तमाम पाबंदियों के बीच तालिबान का तर्क यही रहता है कि ये फैसले उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक व्याख्या पर आधारित हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तालिबान की नीतियां सीधे तौर पर महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन हैं. आज अफगानिस्तान में हालात ऐसे हैं कि लड़कियों की किताबें छिन चुकी हैं, कामकाजी महिलाओं की रोजी-रोटी खत्म हो चुकी है और सामान्य जीवन जीने के मौके भी लगातार सीमित किए जा रहे हैं.    

शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण: शिक्षकों की उपलब्धता से बच्चों में बढ़ा आत्मविश्वास

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। युक्तियुक्तकरण के तहत जिले में जिन विद्यालयों में शिक्षक नहीं थे, वहां अब विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की पदस्थापना की गई है, इससे अब स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है। इसी कड़ी में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत एकल शिक्षकीय स्कूल प्राथमिक शाला फुलवारी संकुल केन्द्र पदमपुर को दो अतिरिक्त शिक्षक मिल गए हैं, इससे विद्यार्थियों को शिक्षा की नई रोशनी मिली है।      प्राथमिक शाला फुलवारी की शिक्षिका मती चेतना साहू ने बताया कि पहले यहां कुल 95 बच्चों के लिए एक ही शिक्षक पदस्थ थे, लेकिन युक्तियुक्तकरण के बाद तीन शिक्षक हो जाने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आया है, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। उन्होंने बताया कि शासन की यह योजना स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने की दिशा में सार्थक कदम है। विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को नवाचारों और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। युक्तियुक्तकरण से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट नजर आ रहा है। विद्यार्थियों के पालकों ने बताया कि पहले के मुकाबले बच्चे ज्यादा रूचि के साथ विद्यालय जा रहे हैं और पढ़ाई भी बेहतर ढंग से हो रही है। पालकों ने युक्तियुक्तरण योजना से स्कूलों में हुए शैक्षणिक बदलाव एवं शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन के लिए शासन-प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।

शिक्षा का अजीब हाल: 8 हजार स्कूलों में स्टूडेंट ही नहीं, 1 लाख में सिर्फ 1 टीचर

नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, भारत में पहली बार स्कूल शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है. यह उपलब्धि देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव मानी जा रही है क्योंकि इससे न केवल शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और स्टूडेंट-टीचर अनुपात (Student-Teacher Ratio) में भी सुधार हुआ है. महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ी  देश में महिला शिक्षकों की संख्या में भी साल 2014 के तुलना में इजाफा हुआ है. शिक्षा मंत्रालय के रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 से अभी तक 51.36 लाख शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है, जिनमें से 61 प्रतिशत महिलाएं हैं. मौजूदा समय में जहां पुरुष शिक्षकों की संख्या 46.41 लाख हैं. वहीं, महिला शिक्षकों की संख्या 54.81 लाख हैं.  भारत में कुल स्कूलों की संख्या 14.71 लाख है, जिसमें 69 प्रतिशत सरकारी हैं और इनमें कुल छात्रों के नामांकन का दर 49 प्रतिशत है. वहीं, देश में कुल प्राइवेट स्कूलों की संख्या 26 प्रतिशत है, लेकिन ये देश के 41 प्रतिशत छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं. वहीं, देश के कुल शिक्षकों में से 51 प्रतिशत शिक्षक सरकारी स्कूलों में और 42 प्रतिशत शिक्षक प्राइवेट स्कूलों में हैं.  UDISE Report: शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 की तुलना में 2024-25 में शिक्षकों की संख्या में 6.7% की वृद्धि हुई है. अब देश में अलग-अलग स्तरों पर स्टूडेंट-टीचर अनुपात अलग-अलग है. शिक्षकों की संख्या में वृद्धि छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षकों की उपलब्धता में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.      क्या है डेमोग्राफिक चेंज? 3 प्वाइंट में समझें, संभल हिंसा पर सौंपी गई रिपोर्ट में इसपर क्यों हुई है चर्चा     ट्रंप टैरिफ जारी रहा, तो भारत के निर्यात पर पड़ेगा भारी असर; विशेषज्ञों ने बताया स्थिति से निपटने का तरीका     शरीर पर 36 जख्म और पोस्टमार्टम में निकली 17 गोलियां, झारखंड के चर्चित नीरज सिंह हत्याकांड को जानिए स्टूडेंट-टीचर रेशियो (PTR) और बेहतर परिणाम यूडीआईएसई प्लस (UDISE Plus) की रिपोर्ट के अनुसार आधारभूत, प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात क्रमशः 10, 13, 17 और 21 है. यह अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में सुझाए गए 1:30 से कहीं बेहतर है. रिपोर्ट बताती है कि कम अनुपात होने से शिक्षक और छात्रों के बीच संवाद बेहतर होता है, जिससे पढ़ाई आसान बनती है और परिणाम भी अच्छे आते हैं. छात्रों के स्कूल छोड़ने के दर में गिरावट  शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के स्कूल छोड़ने के दर में भी गिरावट आई है. प्राइमरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या एक साल में 3.7 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत हो गई है. मिडिल लेवल पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या 1 साल में 5.2 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत और सेकेंडरी लेवर पर 10.9 प्रतिशत से घटकर 8.2 प्रतिशत हो गई है. इसी प्रकार छात्रों के स्कूल में बने रहने के दर में भी वृद्धि हुई है. प्राइमरी लेवल पर बच्चों के स्कूल में बने रहने का दर एक साल में 85.4 प्रतिशत से बढ़कर 92.4 प्रतिशत हो गई है. वहीं, मिडिल लेवल पर एक साल में 78 प्रतिशत से बढ़कर 82.8 प्रतिशत और सेकेंडरी लेवल पर यह एक साल पहले में 45.6 प्रतिशत से बढ़कर 47.2 प्रतिशत हो गई है.  महिला शिक्षकों की संख्या तेजी से बढ़ी ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 के सत्र में कुल शिक्षक 98.83 लाख थे, जो अब 1 करोड़ 1 लाख 22 हजार 420 हो गए हैं। इनमें से 51% (51.47 लाख) शिक्षक सरकारी स्कूलों में हैं। एक दशक में महिला शिक्षकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2014-15 में पुरुष शिक्षक 45.46 लाख और महिला 40.16 लाख थीं, जो 2024-25 में बढ़कर क्रमश: 46.41 लाख और 54.81 लाख हो गई हैं। बीते दशक में महिला शिक्षकों की संख्या करीब 8% बढ़ने की बड़ी वजह इनकी भर्तियां हैं। 2014 से अब तक 51.36 लाख भर्तियों में से 61% महिला शिक्षकों की हुई हैं। पीपुल-टीचर रेश्यो: अब 21 छात्रों पर एक शिक्षक, पहले 31 पर थे     मिडिल स्तर पर 10 साल पहले एक शिक्षक के पास 26 छात्र थे, जो घटकर 17 रह गए हैं। सेकंडरी स्तर पर यह 31 से घटकर 21 रह गया है। यानी छात्र व शिक्षकों के बीच संवाद बेहतर हो रहा है। शिक्षकों के पास जितने कम छात्र होंगे, वे उन्हें ज्यादा समय दे पाएंगे।     ड्रॉपआउट रेट घटा है। सेकंडरी पर 2023-24 में यह 10.9% था, जो 2024-25 में 8.2% बचा है। मिडिल स्तर पर यह 5.2% की तुलना में 3.5% और प्राथमिक पर 3.7% से घटकर 2.3% रह गई है।     प्राथमिक पर रिटेंशन रेट 2023-24 में 85.4% से बढ़कर अब 92.4 % हो गया है। मिडिल पर 78% से बढ़कर 82.8%, तो सेकंडरी पर यह 45.6% से बढ़कर 47.2% हो गया है। सेकंडरी स्तर पर नामांकन दर बढ़कर 68.5% हो गई है। डिजिटल सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ी  डिजिटल सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी की बात करें तो स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं भी लगातार बढ़ रही है. पिछले साल तक 57.2 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर थे, जो अब 64.7 प्रतिशत स्कूलों में हो गए हैं. वहीं, स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की बात करें, जो पिछले साल तक 53.9 प्रतिशत स्कूलों में थी, वो अब लगभग 63.5 प्रतिशत हो गई है.  बुनियादी सुविधाएं बेहतर इन सभी के साथ स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है. अब 99.3 प्रतिशत स्कूलों में पीने का पानी, 93.6 प्रतिशत स्कूलों में बिजली, 97.3 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय और 96.2 प्रतिशत स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय हैं. इसी के साथ स्कूलों अन्य सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब 55 प्रतिशत स्कूलों में रैंप और रेलिंग, 89.5 प्रतिशत स्कूलों में लाइब्रेरी और 83 प्रतिशत स्कूलों में खेल के मैदान हैं.   ड्रॉपआउट दर और नामांकन में सुधार रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 6% की कमी आई है और शून्य नामांकन वाले स्कूलों में करीब 38% की … Read more