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शरद पवार की तबीयत में गिरावट, अस्पताल में कराया गया भर्ती

 पुणे एनसीपी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार की तबीयत सोमवार को अचानक बिगड़ गई है. शरद पवार को बारामती से पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक ले जाया जा रहा है. शरद पवार के कार्यालय ने जानकारी दी है कि उन्हें बुखार और खांसी की शिकायत है. सोमवार को बारामती तालुका के काठेवाड़ी में दिवंगत नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की तेरहवीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है. शरद पवार और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को इस समारोह में शामिल होना था, लेकिन शरद पवार की आज सुबह से ही तबीयत खराब हो गयी. इसकी वजह से वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए. प्राप्त जानकारी के अनुसार शरद पवार को सुबह से ही खांसी, बुखार और जुकाम था, इसलिए डॉक्टरों की एक टीम सुबह ही बारामती के गोविंदबाग स्थित उनके आवास पर पहुंच गई थी. डॉक्टरों ने शरद पवार की नियमित जांच की. इसके बाद, डॉक्टरों की एक टीम दोपहर में शरद पवार की दोबारा जांच करने गई. पुणे के रूबी अस्पताल में किया जाएगा भर्ती शरद पवार को पुणे के रूबी अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया गया है. कुछ मिनट पहले शरद पवार पुणे के लिए रवाना हुए. उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले भी उनके साथ हैं. शरद पवार के काफिले में एक एम्बुलेंस भी है. शरद पवार जल्द ही पुणे पहुंचेंगे. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा. उनका आगे का इलाज पुणे के रूबी अस्पताल में होगा. परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि शरद पवार को लगातार खांसी और कफ की दिक्कत हो रही है, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. उन्होंने प्रोटेक्टिव मास्क पहना हुआ था और मेडिकल सपोर्ट स्टैंडबाय पर था. पिछले कुछ दिनों से पवार की तबीयत ठीक नहीं माना जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से शरद पवार की सेहत ठीक नहीं रही है. बीमारी की वजह से वह पिछले दो-तीन महीनों से ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रहे थे, लेकिन अपने भतीजे और अजीत पवार की अचानक मौत के बाद उन्होंने पार्टी वर्कर्स और आम लोगों से मिलना फिर से शुरू कर दिया. पिछले हफ्ते, उन्होंने लगातार तीन दिन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में बिताए, जहां अजीत पवार रहते थे, जहां पार्टी लीडर्स और शुभचिंतक शोक जताने के लिए इकट्ठा हुए थे. माना जा रहा है कि पिछले आठ दिनों से बारामती में लगातार आने वालों की वजह से वह थक गए थे. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य भर में डिस्ट्रिक्ट काउंसिल और पंचायत चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ पॉलिटिकल एक्टिविटी बढ़ गई है.

ओवैसी ने शरद पवार के सांसद बनने पर उठाए सवाल, क्या इस बार नहीं बन पाएंगे सांसद?

मुंबई   लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने वरिष्ठ नेता शरद पवार के संसदीय भविष्य को लेकर बड़ा दावा कर दिया है। उन्होंने रविवार को कहा कि पवार के पास दोबारा राज्यसभा में जाने के लिए जरूरी विधायक नहीं है। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में इसे लेकर बड़ा 'तमाशा' होगा। AIMIM चीफ की तरफ से यह दावा ऐसे समय पर किया गया है, जब महाराष्ट्र में BMC समेत कई बड़े निकायों के चुनाव होने हैं। पवार का कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है। ओवैसी ने कहा, 'पवार साहब का राज्यसभा टर्म कब तक का है? मार्च तक। उसके पास उनके पास ताकत कहां है। उनके गठबंधन में इतने विधायक कहां हैं। अगर वह जाते हैं, तो कैसे जाएंगे। यह तो उनको पूछना चाहिए…। अगर वह दोबारा राज्यसभा जाएंगे पवार साहब तो कैसे जाएंगे? नंबर चाहिए न। तो पता चल जाएगा आपको। अभी तमाशा होगा देखिए।' कई दिग्गजों का कार्यकाल पूरा होगा इन राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इसमें कई नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें केंद्र सरकार में मंत्री एवं विभिन्न दलों के प्रमुख नेता शामिल है। अगर मंत्री फिर से चुनकर नहीं आते हैं तो उनका सरकार में रहना मुश्किल हो जाएगा और अन्य प्रमुख नेताओं के लिए भी दिक्कतें बढ़ेगी। जिन प्रमुख नेताओं कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बी एल बर्मा, जॉर्ज कुरियन आदि शामिल है। इनके अलावा प्रेमचंद गुप्ता, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास अठावले, रामगोपाल यादव, नीरज शेखर, राम जी, शक्ति सिंह गोहिल, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, तिरुचि शिवा और मनोनीत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई शामिल है। सबसे ज्यादा दस सीटें उत्तर प्रदेश में रिक्त होंगी 2026 में जिन 72 सीटों के लिए चुनाव होंगे उनमें अप्रैल में 37 सीटों के लिए, जून में 23 सीटों के लिए, जुलाई में एक सीट के लिए और नवंबर में 11 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। अप्रैल माह में जिन 37 सीटों के लिए चुनाव होंगे, उनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल शामिल है, जबकि नवंबर में होने वाले 11 सीटों के चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की 10 सीटें होगी। इसके अलावा जून में होने वाले 23 सीटों के चुनाव में आंध्र प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य हैं।

मुंबई की राजनीति गरमाई: BMC चुनाव से पहले शरद पवार ने फडणवीस सरकार को चुनौती दी

मुंबई   महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आने वाला है. दरअसल, स्थानीय निकाय और बीएमसी चुनाव से पहले राज्य की देवेंद्र फडणवीस ने सीधे तौर पर दिग्गज वयोवृद्ध नेता शरद पवार से सीधे टकरा गई है. दरअसल, राज्य सरकार ने शरद पवार की अध्यक्षता वाले वीएसआई के फंड की ऑडिट का आदेश दिया है. वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआई) पुणे में स्थित है. विपक्षी दल ने इसे बीजेपी की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है. कैबिनेट ने 30 सितंबर को इस फैसले को मंजूरी दी थी. शुगर कमिश्नर संजय कोल्टे ने कहा कि कैबिनेट मीटिंग के मिनट्स मिलने के बाद हम कमेटी गठित करने की प्रक्रिया में हैं, जो वीएसआई के रिकॉर्ड और फंड उपयोग की जांच करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वीएसआई में जांच शुरू होने की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि शुगर कमिश्नर ने केवल संस्थान द्वारा कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये के उपयोग की जानकारी मांगी है. कोई जांच शुरू नहीं हुई. अगर वीएसआई के खिलाफ कोई गंभीर शिकायत मिलती है, तो हम जांच कर सकते हैं. फिलहाल किसी की कोई शिकायत नहीं है. चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान का काम करती है संस्था 1975 में सहकारी कारखानों के गन्ना उत्पादकों द्वारा स्थापित वीएसआई चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान एवं विकास संस्थान है. यह सहकारी मिलों से कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये प्राप्त करता है, जिससे अपनी गतिविधियां चलाता है. शरद पवार के अलावा उनके भतीजे एवं उपमुख्यमंत्री अजित पवार, पूर्व मंत्री दिलीप पाटील, जयंत पाटील और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात इसके ट्रस्टी हैं. एन51सीपी-एसपी नेताओं ने इसे विपक्षी गढ़ों को निशाना बनाने का हिस्सा बताया. पार्टी के राज्य महासचिव रोहित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री का जांच का फैसला सामान्य प्रक्रिया नहीं है. ठाणे के बाद अब बारामती को निशाना बनाया जा रहा है. जब विपक्ष भ्रष्टाचार के सबूत देता है, तो सरकार चुप रहती है, लेकिन वीएसआई जैसी प्रतिष्ठित संस्था को टारगेट किया जा रहा है. यह बीजेपी की राजनीति के निम्न स्तर को दर्शाता है. पुणे जिले का बारामती पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ है, जबकि ठाणे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का घरेलू मैदान है. एनसीपी-एसपी का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी विपक्षी नेताओं की संस्थाओं को कमजोर करने की रणनीति अपनाते हैं. वीएसआई चीनी उद्योग में तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए जाना जाता है. सहकारी मिलों से प्राप्त फंड का उपयोग वैज्ञानिक अध्ययन, किसान जागरूकता और उद्योग उन्नयन में होता है. संस्थान के ट्रस्टी बोर्ड में सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल हैं, जो इसे गैर-राजनीतिक स्वरूप देते हैं. फिर भी, फंड ऑडिट का फैसला राजनीतिक रंग ले चुका है. जांच पारदर्शी होगी शुगर कमिश्नर कोल्टे ने बताया कि कमेटी का गठन जल्द पूरा होगा और जांच पारदर्शी होगी. लेकिन विपक्ष का मानना है कि यह कदम शरद पवार की साख को ठेस पहुंचाने का प्रयास है. रोहित पवार ने कहा कि वीएसआई ने दशकों से चीनी उद्योग को मजबूत किया है. अगर सरकार को पारदर्शिता चाहिए, तो सभी सहकारी संस्थाओं की जांच होनी चाहिए, न कि चुनिंदा. महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव का केंद्र रहा है. पवार परिवार का चीनी सहकारिता पर मजबूत पकड़ है और बारामती में कई मिलें उनके समर्थकों के नियंत्रण में हैं. ऑडिट का फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में सत्ता गठबंधन और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है. फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अभी केवल जानकारी मांगी गई है, लेकिन विपक्ष इसे जांच की शुरुआत मान रहा है. आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट इस विवाद को और गहरा सकती है या शांत कर सकती है. फिलहाल, वीएसआई का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान बनता दिख रहा है.  

निकाय चुनाव से पहले शरद पवार ने मुंबई में की रणनीति बैठक, फैसले ने सबका ध्यान खींचा

मुंबई  ​आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों की पृष्ठभूमि में आज मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) शरद पवार गुट की एक अहम बैठक हुई. बैठक में राकांपा शरद पवार गुट के अध्यक्ष शरद पवार भी शामिल हुए. यह बैठक छत्रपति संभाजीनगर और पुणे स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों की रणनीति पर मंथन हुआ. इसके साथ-साथ इस बैठक में शरद पवार ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में पार्टी का पूरा फोकस ज्यादा से ज्यादा युवाओं को उम्मीदवार बनाने पर रहेगा. बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के साथ-साथ पदवीधर (Graduates) और शिक्षक मतदार संघों के चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक मजबूती और आगामी रणनीति तय करना था. मीटिंग में पार्टी के पदवीधर और शिक्षक सेल के पदाधिकारियों से सुझाव लेकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की गई. 50 फीसदी से ज्यादा युवा लड़ेंगे चुनाव इस बीच, इस बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है. आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में, कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटों पर उन युवाओं को चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा जिनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है. शरद पवार ने इस बैठक में अपने पदाधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कैसे मौका दिया जा सकता, इस गौर करने का निर्देश दिया. बैठक में यह भी बताया गया है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में गठबंधन कैसे बनाया जाए, इस पर चर्चा के लिए कल महाविकास अघाड़ी नेताओं की एक अहम बैठक होगी.​ अजित पवार गुट के विधायक के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया शरद पवार ने इस बैठक में इस बात पर भी प्रतिक्रिया दी है कि एनसीपी अजित पवार गुट के विधायक संग्राम जगताप के विवादित बयान से माहौल गरमा गया है. उन्होंने कहा कि एक समय में एक विधायक हमारे साथ थे, लेकिन अब उनकी हर बात मीडिया में आ रही है, इसलिए हम सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना नहीं चाहते, बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे कुछ नेता इस समय विवादित बोल रहे हैं, लेकिन अपनी पार्टी के नेता से उन्होंने प्रेम की भाषा प्रयोग करने की हिदायत भी दी है. मीटिंग में शामिल रहे ये नेता इस बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले, प्रदेश अध्यक्ष और विधायक शशिकांत शिंदे, विधायक और विधानमंडल में पार्टी के नेता जयंत पाटिल, पूर्व मंत्री राजेश टोपे,बालासाहेब पाटिल, पुणे, सातारा, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, छत्रपति संभाजी नगर, जालना, हिंगोली, परभणी, नांदेड़, बीड, धाराशिव और लातूर जिलों के सांसद और विधायक मौजूद थे.  

भाजपा विधायक के विवादित शब्दों पर शरद पवार का ऐक्शन, फडणवीस से मांगी सफाई

मुंबई भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर की ओर से एनसीपी-एसपी के नेता जयंत पाटिल पर विवादित बयान ने हलचल मचा दी है। पडलकर के बयान पर दिग्गज नेता शरद पवार तक ने आपत्ति जताई है। यही नहीं उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस को ही सीधे शुक्रवार सुबह फोन लगाया और कहा कि वह इस मामले को देखें। शरद पवार ने कहा कि आपके विधायक का बयान महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आज तक महाराष्ट्र में किसी ने इतने निचले स्तर तक जाकर टिप्पणी नहीं की है। दरअसल गोपीचंद पडलकर और जयंत पाटिल के बीच सालों से अदावत रही है। लेकिन गुरुवार को पडलकर ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसकी हर कोई आलोचना कर रहा है। दरअसल सांगली जिले में स्थित अपनी विधानसभा में गोपीचंद ने जयंत पाटिल पर खुद को फंसाने की कोशिश का आरोप लगाया था। पडलकर ने कहा था कि एक ठेकेदार की हत्या के मामले में मुझे जयंत पाटिल ने फंसाने की कोशिश की। पडलकर ने कहा कि मुझे हैरानी होती है कि कैसे इतना मूर्ख आदमी महाराष्ट्र का नेता हो सकता है। कैसे उन्होंने एनसीपी का महाराष्ट्र में नेतृत्व किया होगा। पडलकर ने कहा कि जयंत पाटिल मूर्ख हैं। हर एक सप्ताह में जयंत पाटिल साबित करते हैं कि वे कितने मूर्ख हैं। उन्होंने कहा था कि मेरा और ठेकेदार का कोई संबंध नहीं था। लेकिन जयंत पटेल का काम सिर्फ़ गोपीचंद पडलकर को बदनाम करना है। लेकिन मैं अब यहां क्यों हूं ? मैं ऐसी बहुत सी चीज़ें लेकर आया हूँ। इन लोगों के राज में मैं दो महीने जेल में रहा हूं। इसके आगे पडलकर कहते हैं कि जयंत पाटिल आखिर किसके बेटे हैं। उन्होंने कहा कि वह राजारामबापू पाटिल के बेटे हैं, यह लगता नहीं। कुछ तो गड़बड़ है। इसके आगे वह कहते हैं कि ये गोपीचंद पडलकर जयंत पाटिल जैसे भिखारी का बेटा नहीं है। उनके इसी बयान पर हल्ला मचा तो शरद पवार ने सीधे सीएम फडणवीस को फोन लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने विधायक को समझाएं और मामले को देखते हुए कोई ऐक्शन भी लें। दरअसल जयंत पाटिल के पिता राजाराम पाटिल का महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा नाम रहा है। इसके अलावा सूबे में सहकारिता से जुड़े कामों में भी उनके योगदान की सराहना की जाती रही है।