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भोपाल: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, आईईएचई में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर हुआ स्वागत

महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की हुई शुरुआत, आईईएचई भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर किया गया आत्मीय स्वागत Working Together Towards Excellence के संकल्प के साथ शुरू हुई नई शैक्षणिक यात्रा भोपाल प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र 2026 की शुरुआत हो गई है। उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (आईईएचई), भोपाल में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए "दीक्षारंभ प्रवेश उत्सव एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम" उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं तथा उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं से परिचित कराते हुए उच्च शिक्षा की नई यात्रा के लिए तैयार करना था। इस अवसर पर संस्थान के वार्षिक संकल्प "Working Together Towards Excellence" को विद्यार्थियों के समक्ष मार्गदर्शक विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मुख्य प्रवेश द्वार पर अक्षत एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। हरित वसुंधरा क्लब के तत्वावधान में विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों द्वारा वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, अध्ययन संसाधनों, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा उच्च शिक्षा में सफलता के लिए आवश्यक कौशलों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने तथा संस्थान की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर संस्थान के संचालक डॉ. (प्रो.) प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता एवं कौशल विकास का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि आईईएचई भोपाल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने संस्थान के इस वर्ष के संकल्प "Working Together Towards Excellence" का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्कृष्टता का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब शिक्षक एवं विद्यार्थी सहयोग, समर्पण और सहभागिता की भावना के साथ मिलकर कार्य करें। उन्होंने सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। दीक्षारंभ समारोह के अंतर्गत वाणिज्य, कला एवं विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए पृथक-पृथक अभिमुखीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विद्यार्थियों का शिक्षकों से परिचय कराया गया तथा पाठ्यक्रम, अध्ययन पद्धति, अकादमिक अवसरों, अनुसंधान गतिविधियों एवं संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई | मानसिक स्वास्थ्य के बारे में दी गई जानकारी दीक्षारंभ कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण "Mental Health and Wellness Program" रहा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यबल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं सकारात्मक जीवनशैली के महत्व से अवगत कराया गया। 1 जुलाई 2026 को आयोजित सत्र में एम्स भोपाल की बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. अनुराधा कुशवाहा ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक वातावरण में सहज रूप से समायोजित होने, अध्ययन एवं व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने तथा मानसिक रूप से सुदृढ़ रहने के व्यावहारिक उपाय बताए। वहीं, 2 जुलाई 2026 को सागर पब्लिक स्कूल, भोपाल की मनोवैज्ञानिक डॉ. इंदु सिंह विद्यार्थियों से संवाद कर मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगी। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा व्यक्तित्व विकास, ज्ञान विस्तार एवं उज्ज्वल भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक, सांस्कृतिक, खेल एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावक इस अवसर पर कुल 756 नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि 117 अभिभावकों  ने भी कार्यक्रम में सहभागी होकर संस्थान की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान संस्थान का वार्षिक टैगलाइन "Working Together Towards Excellence" विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के सामूहिक संकल्प के रूप में प्रतिध्वनित हुआ। उल्लेखनीय है कि संस्थान की सामान्य परिषद के अध्यक्ष उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, कार्यसमिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा के मार्गदर्शन में संस्थान निरंतर उत्कृष्टता एवं नवाचार की दिशा में अग्रसर है।  

डिजिटल लॉकर में सुरक्षित होगा भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई; उच्च शिक्षा को केंद्र की बड़ी सौगात

विशेष आलेख ​डिजिटल लॉकर में भविष्य, 'क्रेडिट बैंक' में जमा होगी पढ़ाई ​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में केंद्र की बड़ी सौगात                रायपुर       ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ को मिली सबसे बड़ी सौगातों में से एक—'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से सत्र 2023-24 से अनिवार्य रूप से लागू हुई यह योजना वर्ष 2026 में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है। अब राज्य का हर छात्र अपनी जेब में डिजिटल यूनिवर्सिटी लेकर घूम रहा है। ​क्या है यह 'क्रेडिट बैंक' और कैसे बदलेगी जिंदगी?     ​कल्पना कीजिए एक ऐसे बैंक की, जहाँ पैसा नहीं बल्कि आपकी पढ़ाई और कॉलेज के 'क्रेडिट' (अंक) जमा होते हैं। यदि किसी वजह से आपकी पढ़ाई बीच में छूट जाए, तो यह बैंक आपकी मेहनत को बेकार नहीं जाने देता। ​      मान लीजिए बस्तर के किसी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र को पारिवारिक कारणों से सेकंड ईयर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पहले की व्यवस्था में उसकी दो साल की पढ़ाई 'जीरो' मान ली जाती थी। अब पहले दो वर्षों में छात्र ने जो भी अंक या 'क्रेडिट' कमाए हैं, वे उसकी ABC ID के जरिए डिजिटल बैंक में सुरक्षित रहेंगे। दो या तीन साल बाद जब वह दोबारा पढ़ना चाहेगा, तो वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय में सीधे 'थर्ड ईयर' में प्रवेश ले सकेगा। इसे ही "मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट" कहा गया है। ​छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति का 'स्कोरकार्ड'     ​यह एकीकृत डिजिटल सिस्टम न केवल छात्रों के दस्तावेजों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें देशव्यापी स्तर पर अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने की आजादी भी दे रहा है। वर्तमान में यह योजना छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है, जिसके दायरे में राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं आ रहे हैं। ​     इस महा-अभियान में राज्य के अग्रणी विश्वविद्यालय जैसे पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय पूरी सक्रियता के साथ भागीदार बन चुके हैं। ​शत-प्रतिशत केंद्रीय सहयोग        तकनीक की यह इतनी बड़ी अवसंरचना (Infrastructure) छत्तीसगढ़ को पूरी तरह निःशुल्क मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसके चलते राज्य सरकार पर आर्थिक भार पूरी तरह से शून्य है। ​डिजीलॉकर बना 'सुरक्षा कवच': गुम होने का डर खत्म     ​अक्सर दुर्घटना या लापरवाही के कारण छात्रों की मूल अंकसूची (Marksheet) या डिग्रियां नष्ट हो जाती थीं, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया है। ​विश्वविद्यालयों को सीधे 'नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी' (NAD) पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे छात्र की डिग्री और सर्टिफिकेट सीधे उसके डिजीलॉकर में अपलोड हो रहे हैं।  ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से उतने ही मान्य हैं जितनी मूल हार्ड कॉपी। यानी नौकरी के इंटरव्यू में अब भारी-भरकम फाइल ले जाने की जरूरत नहीं, सिर्फ मोबाइल ही काफी है। ​'ग्लोबल' हो रहा है छत्तीसगढ़ का युवा     ​इस योजना ने सुदूर वनांचल जैसे सुकमा, बीजापुर या सरगुजा के कॉलेजों को भी नेशनल पोर्टल से सीधे जोड़कर अमीर और गरीब छात्र के बीच का डिजिटल फासला पूरी तरह खत्म कर दिया है।     ​'ABC ID' के माध्यम से छत्तीसगढ़ का युवा अब सिर्फ अपने राज्य तक सीमित नहीं है। उसके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा ने उसे पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ दिया है। यह सिर्फ कागजों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख युवाओं के सपनों को मिला एक नया 'डिजिटल पंख' है।  विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, हर कॉलेज में काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य

वि‌द्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम, हर कॉलेज में काउंसलर जरूरी मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश स्टॉफ प्रशिक्षण, अभिभावक जागरुकता और मेंटर प्रणाली भी होगी लागू भोपाल वि‌द्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में जारी इन निर्देशों के अंतर्गत अब सभी शैक्षणिक संस्थानों में काउंसलर की नियुक्ति के साथ कई अन्य व्यवस्थाएं भी अनिवार्य कर दी गई हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, जिन संस्थानों में 100 या उससे अधिक वि‌द्यार्थी अध्ययनरत हैं, वहां कम से कम एक प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा। कम छात्र संख्या वाले संस्थानों को बाहरी विशेषज्ञों से जुडकर काउंसलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। काउंसलर के रूप में मनोविज्ञान में स्नातकोतर, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्य विशेषज्ञ या संबंधित क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति नियुक्त किए जा सकेंगे। संस्थान में केवल काउंसलर नियुक्ति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे संस्थान को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है। इसी उ‌द्देश्य से सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों, प्रशासनिक स्टॉफ और सुरक्षा कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षणों में मानसिक स्वास्थ्य, प्राथमिक सहायता, वि‌द्यार्थी के व्यवहार में आए परिवर्तनों की पहचान तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही वि‌द्यार्थियों के अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया है। संस्थानों को निर्देश दिए गए है कि वे अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे वे अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों को समझ सके और समय रहते उचित सहयोग प्रदान कर सकें। विद्यार्थियों की व्यक्तिगत निगरानी और मार्गदर्शन के लिए 25 से 40 छात्रों पर एक मैंटर नियुक्त किया जाएगा। यह मेंटर वि‌द्यार्थियों की उपस्थिति, शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यवहार और मानसिक स्थिति पर नजर रखेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। साथ ही अभिआवकों से संपर्क बनाए रखते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहयोग करेगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संस्थानों को निर्देशित किया है कि इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू करते हुए निर्धारित प्रारूप में जानकारी विभाग को शीघ्र प्रेषित करें। मॅटोर-मॅटी (गार्जियन ट्यूटर) व्यवस्था प्रत्येक संस्थान द्वारा 25-40 वि‌द्यार्थियों पर एक मेंटर की नियुक्ती की जाएगी। यह दायित्व किसी प्राध्यापक को दिया जाएगा, जिसे सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वाह करना होगा। मेंटर वि‌द्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और व्यवहार की निगरानी और कमजोर वि‌द्यार्थियों की पहचान कर उनका मार्गदर्शन करेंगे। मानसिक तनाव व व्यक्तिगत समस्याओं में सहयोग करना। अभिभावकों से नियमित संपर्क बनाए रखना। कैरियर मार्गदर्शन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये प्रेरित करना। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में वि‌द्यार्थिों की सहभागिता बढ़ाना। विद्यार्थियों के रिकॉर्ड व काउंसलिंग रजिस्टर का संधारण करना होगा। संस्थाओं में प्रदर्शित से होंगे हेल्पलाइन नंबर परिसर में प्रमुख स्थानों पर वॉल पेटिंग से हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे। Dial-112 Tele-MANAS-14416 उमंग हेल्पलाइन 14425 उच्च शिक्षा विभाग की विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सुश्री ऊषा नायर ने कहा, विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। काउंसलर नियुक्ति के साथ स्टॉफ प्रशिक्षण, अभिभावक सहभागिता और मेंटर प्रणाली को लागू कर हम एक सुरक्षित और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन निर्देशों के क्रियान्वयन की सतत निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संस्थानों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। यह पहल विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन और समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

सहेलियों को बॉयफ्रेंड बनाने का दबाव: हॉस्टल से बाहर की गई छात्रा, मोबाइल ऐप से जुड़ती थी अज्ञात युवकों से

 इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के कमला नेहरू गर्ल्स हॉस्टल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब डेटा साइंस फर्स्ट ईयर की एक छात्रा की संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं. छात्रा पर आरोप है कि वह हॉस्टल की अन्य छात्राओं को कॉलेज लाइफ एन्जॉय करने के बहाने गलत रास्तों पर धकेलने की कोशिश कर रही थी.  मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली यह छात्रा एक विशेष वर्ग से ताल्लुक रखती है. हॉस्टल की 5 छात्राओं ने लिखित शिकायत की है कि वह उन पर 'बॉयफ्रेंड' बनाने का लगातार मानसिक दबाव बना रही थी.  छात्रा पर आरोप है कि वह तमाम मोबाइल ऐप्स के जरिए अज्ञात युवकों से वीडियो कॉल करती थी और अन्य छात्राओं को भी उन युवकों से बात करने के लिए प्रेरित करती थी.   छात्राओं की शिकायत के बाद वार्डन ने जब आरोपी छात्रा के सामान की तलाशी ली, तो वहां से कई आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद होने की बात सामने आई है. यूनिवर्सिटी का एक्शन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. आरके सिंघई ने कड़ा रुख अपनाया है. छात्रा को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है. पूरे मामले की सत्यता और नेटवर्क का पता लगाने के लिए 5 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है. प्रबंधन इस बात की भी जांच कर रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो काम नहीं कर रहा.  कुलगुरु का बयान कुलगुरु आरके सिंघई ने स्पष्ट किया है कि छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल के माहौल से समझौता नहीं किया जाएगा. जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर छात्रा पर आगे की अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी.

छात्रा के साथ अभद्रता पर बवाल, यूपी में नस्लीय टिप्पणी से बढ़ा आक्रोश

गोरखपुर साउथ दिल्ली के मालवीय नगर में किराए के फ्लैट में एसी लगवाने के दौरान अरुणाचल प्रदेश की एक प्रतियोगी छात्रा और उसकी दो सहेलियों द्वारा लगाए गए नस्लीय टिप्पणी के आरोपों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब यूपी के गोरखपुर शहर में उत्तर-पूर्व भारत की एक मेडिकल छात्रा बदसलूकी की घटना सामने आ गई है। छात्रा ने आरोप लगाया है कि शहर के ओरियन मॉल से बाहर निकलने के दौरान उसके साथ ‘बैड टच’ और दुर्व्यवहार की यह घटना हुई। घटना 22 फरवरी की रात करीब आठ बजे की बताई जा रही है। छात्रा ने नस्लीय टिप्प्णी किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने अभी तक घटना के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार किया है। एम्स गोरखपुर से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही इस छात्रा ने आरोप लगाया है कि घटना उस वक्त हुई जब वह मॉल से बाहर निकल रही थी। छात्रा के अनुसार तीन युवकों ने उसका पीछा करते हुए नस्लीय टिप्पणी की और गाली-गलौज की। डॉक्टर उत्तर-पूर्व भारत की रहने वाली हैं। मॉल से लेकर एम्स गोरखपुर के गेट नंबर दो तक, लगभग डेढ़ किलोमीटर तक तीनों उनके पीछे-पीछे चलते रहे। आरोप है कि गेट नंबर दो के पास सेना शिविर के पास एक युवक ने शर्ट उतारकर अशोभनीय हरकत की और डॉक्टर के साथ ‘बैड टच’ किया। इस मामले को लेकर नॉर्थ ईस्ट फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स (नाफोर्ड) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग किया है। पोस्ट में इसे गंभीर नस्लीय उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न का मामला बताया गया है। नाफोर्ड क्या है नाफोर्ड का फुल फार्म नॉर्थ ईस्ट फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स है। यह संगठन मुख्यत:रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्याओं और उनके अधिकारों के लिए लड़ता है। यह संगठन रेजिडेंट डॉक्टरों के अधिकारों की सुरक्षा और बेहतर कार्य स्थितियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करता है। इस मामले में नाफोर्ड ने कहा है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपनी सेवाएं दे सकें। संगठन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानकारी से इनकार कर रही पुलिस गोरखपुर में पुलिस तक अभी यह मामला नहीं पहुंचा है। कैंट और एम्स थाना पुलिस ने ऐसे किसी मामले की औपचारिक जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली में क्या हुआ है? रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली के मालवीय नगर थाना क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियां एक फ्लैट के चौथे फ्लोर पर किराए पर रहती हैं। 20 फरवरी की दोपहर वे अपने फ्लैट में एसी लगवा रही थीं। इस दौरान ड्रिलिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया। ड्रिलिंग के दौरान गलती से थोड़ा मलबा और धूल नीचे के फ्लोर पर गिर गई। इससे नाराज नीचे के फ्लैट में रहने वाला दंपती ऊपर पहुंचा और आपत्ति जताई। आरोप है कि इस दौरान पति-पत्नी ने युवतियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके उत्तर-पूर्वी मूल को लेकर नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां कीं।  

विदेश भेजने का सपना दिखाकर मेडिकल कॉलेज की छात्रा को फंसाया, IELTS सेंटर संचालक पर शिकंजा

फरीदकोट हालाबाद मुदकी जिला फिरोजपुर की निवासी एक लड़की ने आईईएलटीएस सेंटर के मालिक के खिलाफ ब्याज पर पैसे देने के बहाने कार में बिठा कर अश्लील  हरकतें करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद लड़की के बयान के आधार पर सिटी पुलिस कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह फरीदकोट मेडिकल कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई कर रही थी और अस्पताल में पढ़ाई शुरू करने से पहले वह आईईएलटीएस सेंटर में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थी। वहीं उसकी और उसके परिवार की मुलाकात आईईएलटीएस सेंटर के मालिक गुरप्रीत सिंह से हुई, जो मोगा जिले के ढुड़ी का निवासी है। उसने अपने भाई का यूके वीजा दिलाने के लिए गुरप्रीत सिंह को 2 लाख रुपये दिए थे। वीज़ा न मिलने पर उसने शिकायतकर्ता द्वारा दी गई राशि लौटा दी, लेकिन ब्याज पर और अधिक धन देने के बहाने शिकायतकर्ता को अपनी कार में बैठाकर उसके साथ अभद्रता की, अश्लील हरकतें कीं और जान से मारने की धमकी भी दी इस संबंध में सहायक थानेदार अकालप्रीत सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, जिसकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

स्कूल में क्रूर सजा का मामला, सूरजपुर में बच्चे के साथ अमानवीय व्यवहार का वीडियो आया सामने

 अंबिकापुर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां के एक स्कूल में एक मासूम बच्चे को अमानवीय तरीके से दंडित करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में बच्चा केवल टी-शर्ट के सहारे पेड़ से लटका हुआ नज़र आता है, जबकि नीचे उसने सिर्फ अंडरवीयर पहना हुआ है. वह पूरी तरह से असहाय है और उसका हल्का शरीर हवा में इधर-उधर झूलता दिखाई देता है, जिसे देख हर कोई स्तब्ध है. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बच्चे को ऐसी क्रूर सजा किस कारण दी गई, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और आम लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे के साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है और यह बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन है. कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और अनुशासन के नाम पर गलत मानसिकता ऐसी घटनाओं को जन्म देती है. इधर जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि वीडियो की सत्यता, घटना का समय और इसमें शामिल जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए पुलिस और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम तैनात कर दी गई है. जांच में दोषी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन या संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के प्रति स्कूलों में होने वाली अनुचित सजाओं के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है.  

सीएम योगी द्वारा मिली छात्रवृत्ति से प्रसन्न छात्राओं ने कहाः धन्यवाद योगी जी

छात्राओं के खिले चेहरेः छात्रवृत्ति का मिला लाभ, सुरक्षा का सीखा जरूरी पाठ सीएम योगी द्वारा मिली छात्रवृत्ति से प्रसन्न छात्राओं ने कहाः धन्यवाद योगी जी कार्यक्रम में छात्रवृत्ति प्राप्त करने के साथ ही छात्राओं को मिशन शक्ति के अंतर्गत नारी सुरक्षा के विभिन्न आयामों से कराया गया अवगत छात्राओं को दी गई 1090, 112 जैसे विभिन्न हेल्पलाइन व अन्य सुरक्षात्मक उपायों के सही इस्तेमाल की जानकारी -कार्यक्रम में सुरक्षा, स्वावलंबन तथा सतत विकास लक्ष्यों समेत विभिन्न पहलुओं के बारे में छात्राओं को किया गया जागरूक लखनऊ शारदीय नवरात्रि के अवसर पर शुक्रवार को प्रदेश की ‘भावी नारी शक्ति’ के स्वावलंबन और सुरक्षा के लिए सीएम योगी द्वारा की गई अनुकरणीय पहल से छात्राओं के चेहरे खिल उठे। एक ओर योगी सरकार ने उन्हें छात्रवृत्ति देकर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का कार्य किया, वहीं दूसरी ओर मिशन शक्ति के अंतर्गत छात्राओं को सुरक्षा के विभिन्न आयामों से अवगत कराकर उन्हें जागरूक व सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किया गया। छात्राओं को जहां समय से पूर्व छात्रवृत्ति मिलने की खुशी थी, वहीं उन्हें यह भी बताया गया कि सुरक्षा की दृष्टि से कौन-कौन से कदम अपनाने चाहिए, किस हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर किस प्रकार की समस्या में सहायता प्राप्त की जा सकती है तथा पुलिस की मदद कैसे ली जानी है।          इससे छात्राओं में सुरक्षा की भावना प्रबल हुई और ‘सशक्त भारत–सशक्त उत्तर प्रदेश’ के निर्माण में उनके संकल्प को और सुदृढ़ करने में मदद मिली। इसके साथ ही शिक्षा क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलाव, स्वावलंबन तथा प्रदेश के विकास हेतु सतत विकास लक्ष्यों समेत विभिन्न पहलुओं पर भी छात्राओं को जानकारी दी गई, जिससे उनमें जागरूकता का विस्तार हुआ। छात्रवृत्ति है एक बीज, जो भविष्य में उत्पन्न करेगा सकारात्मक परिणाम राजीव गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज की छात्रा साक्षी मिश्रा ने छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि कार्यक्रम में मुझे महिला सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों के बारे में जानकारी मिली। हेल्पलाइन नंबर और आपात स्थितियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जागरूकता का संचार हुआ। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति एक बीज है, जो आगे चलकर हमारे देश और राज्य के लिए सकारात्मक परिणाम उत्पन्न करेगा। वहीं, बख्शी का तालाब स्थित बेहटा के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की कक्षा 12 की छात्रा सफिया बानो ने कहा कि सीएम योगी के प्रयास से 6 महीने पूर्व ही छात्रवृत्ति का लाभ मिला, जिससे आगे की पढ़ाई में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में पुलिस विभाग की सहभागिता से नारी सशक्तिकरण के बारे में जागरूकता का प्रसार हुआ। उन्होंने कहा कि स्वयं की सुरक्षा के लिए 1090 समेत किन हेल्पलाइन नंबरों और उपायों का उपयोग किया जा सकता है, इसके बारे में हमें जानकारी दी गई। इसी प्रकार, कक्षा 9 की छात्रा प्रिया शर्मा ने कहा कि सीएम योगी द्वारा छात्रवृत्ति प्राप्त कर मैं बेहद खुश हूं और समय से पहले छात्रवृत्ति मिलने पर उन्हें धन्यवाद देना चाहती हूं। किसी से डरने की जरूरत नहीं बख्शी का तालाब स्थित बेहटा के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की छात्रा अफशा बानो के अनुसार नारी सशक्तिकरण को लेकर सीएम योगी की पहल अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि आज कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी बेहद उपयोगी रही। अब किसी से डरने की जरूरत नहीं है। अगर कोई लड़की को कोई लड़का परेशान करे तो 1090 या 112 पर तुरंत कॉल करके पुलिस की सहायता ली जा सकती है। पुलिस और सीएम योगी के प्रयास न केवल अनुकरणीय हैं बल्कि सुरक्षा, आत्मरक्षा और उन्नयन के लिहाज से छात्राओं के लिए बेहद सहायक सिद्ध हो रहे हैं। वहीं, भाखामऊ की रहने वाली कक्षा 12 की छात्रा कुसुम भारती ने सीएम योगी से मुलाकात पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि आज हम सब खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं क्योंकि राज्य की नीतियां इस विषय पर केंद्रित हैं। मिशन शक्ति के जरिए हमें यह सीखने को मिला कि अगर कोई हमें छेड़े तो 112 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करानी चाहिए। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की छात्रा काशी चौरसिया ने भी छात्रवृत्ति का लाभ मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, धन्यवाद योगी जी, आपके प्रयास प्रदेश के सभी छात्र-छात्राओं का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित कर रहे हैं और छात्राओं में आत्मबोध, नारी सशक्तिकरण तथा सुरक्षा जैसे विषयों के प्रति जागरूकता प्रसार के साथ उन्हें सुरक्षित महसूस कराने की दिशा में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।