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उज्‍जैन के गुरुकुल से शिक्षा प्राप्‍त कर कृष्‍ण बने जगत गुरु सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने पर विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का बढ़ा गौरव : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आज विक्रम विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर अत्यधिक आनन्द का अनुभव हो रहा है। उन्होंने दीक्षान्त समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए सभी के यशस्वी एवं मंगलमय भविष्य की कामना की। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि उज्‍जैन नगरी में आते ही एक अलग प्रकार की अनुभूति होती है। सम्राट विक्रमादित्‍य विश्‍वविद्यालय में ही एक विद्यार्थी ने शिक्षा प्राप्‍त की और आज वे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने। मंगलवार को राज्यपाल  पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30 वां दीक्षांत समारोह स्‍वर्ण जयंती सभागृह सम्पन्न हुआ। राज्‍यपाल  पटेल ने कहा कि प्रदेश का राज्‍यपाल बनने के अगले ही दिन वे भगवान  महाकालेश्‍वर के दर्शन के लिए आए और यहीं से उन्‍हें प्रदेश के सतत विकास और देश की प्रगति के लिए प्रयासरत रहने की प्रेरणा प्राप्‍त हुई। राज्‍यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज दीक्षांत के साथ आप सभी ने समाज के उत्‍थान और देश की एकता के लिए शपथ ली है। विश्‍वविद्यालय से जो संस्‍कार आपको मिले है उन्‍हें जीवन भर स्‍मरण रखकर कार्य करें। आपके माता-पिता ने आपको शिक्षित करने के लिए बहुत कष्‍ट उठाए है इसलिए पढ़ लिखकर अपने माता-पिता की सेवा करें। आप जीवन में कुछ भी बन जाओं परंतु अपने माता-पिता और गुरु के प्रति सदैव आभारी रहना, उनकी सेवा करना। शिक्षित होने का उद्देश्‍य मात्र उपाधि अथवा प्रमाण-पत्र पाना नहीं बल्कि समाज और देश की उन्‍नति में योगदान देकर एक जिम्‍मेदार नागरिक भी बनना है। भगवान कृष्ण ने उज्जैन को बनाया अपनी शिक्षा स्थली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केन्द्र उज्जैन को भगवान कृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना। चौसठ कलाओं और 14 विद्याओं की यह धरती शौर्य के प्रतीक सुशासन के पुरोधा, विक्रम संवत के प्रवर्तक, भारतीय सांस्कृतिक चेतना के रक्षक और न्यायप्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि 7 दशकों के उस समर्पण का परिणाम है, जिसने दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ स्कॉलर सौंपे हैं। विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने से विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का गौरव बढ़ा है। ऐसे विश्वविद्यालय की उपाधियों से विभूषित होना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीक्षांत समारोह में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी-लिट), गोल्ड मेडल और स्नातक उपाधियां प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन में सीखने की एक नई शुरुआत है, यह जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट है। बेहतर जीवन के लिए विद्यार्थियों को सीखने की ललक सदैव बनाए रखना होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी देश और प्रदेश के समग्र विकास में सहभागी बनेंगे और जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने कर्तव्य का पूर्ण निष्ठा के साथ निवर्हन करते हुए अपने परिवार, समाज और देश का गौरव बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को ससम्मान उपाधियां प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई है। यह विश्वविद्यालय प्रसिद्ध कवि  शिवमंगल सिंह सुमन और पद्म विष्णु धर वाकणकर जैसी महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है। नवाचार में अग्रणी यह विश्वविद्यालय, कृषि अध्ययन शाला और डेयरी टेक्नालॉजी जैसे आधुनिक विषयों को आरंभ करने के लिए पहल करने में भी प्रदेश में प्रथम रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय को विभिन्न यंत्रों के लिए 51 लाख रुपए, 5 ड्रोन तथा अध्ययन यात्रा के लिए एक बस प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। पिछला वर्ष प्रदेश में निवेश और रोजगार के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उज्जैन वर्ष 2028 में भव्य और दिव्य सिंहस्थ का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन से लेकर उनके मां क्षिप्रा के जल से स्नान तक की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार अभी से हर संभव तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के आयोजन में स्वच्छता, यात्री मार्गदर्शन, डिजिटल हेल्प आदि का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नवरात्रि और गुड़ी पड़वा की मंगलकामनाएं भी दीं। नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन और भर्तृहरि छात्रावास भवन का किया लोकार्पण राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन का लोकार्पण एवं एमईआरयू परियोजना अंतर्गत नव श्रृंगारित भर्तृहरि छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सम्पादित पुस्तकों ईकोस एण्ड एक्सप्रेशन्स, कंटूर्स ऑफ थॉट, रागात्मिका सहित 4 पुस्तकों का विमोचन भी किया। उपाधियाँ प्रदान करने के बाद विश्‍वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को उपदेश देकर शपथ दिलाई। निकली अकादमिक शोभायात्रा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यपरिषद सदस्‍यों व संकाय अध्‍यक्षों के साथ समूह चित्र खिंचवाया। इसके बाद दीक्षांत समारोह की अकादमिक शोभा यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर निगम अध्‍यक्ष  कलावती यादव शामिल रहें। सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर अर्पित की पुष्पांजलि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर स्थित सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर पुष्पांजलि अर्पित की। एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रगीत वंदेमातरम और राष्ट्रगान जन-गण-मन हुआ। अतिथियों ने माँ वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का किया अवलोकन राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य अतिथियों ने हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आचार्य विद्यासागर पीठ एवं संस्‍था द्वारा अतिथियों को हाथ से बनी हथकरघा सामग्री भेंट की। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और कुल सचिव  अनिल कुमार शर्मा ने राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ, पारिजात का पौधा, शॉल, फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्य परिषद के सदस्यों के द्वारा अन्य अतिथियों का भी सम्मान और स्वागत किया गया। … Read more

परीक्षा तनाव से राहत: बोर्ड एग्जाम से पहले शुरू हुई छात्र हेल्पलाइन सेवा

रायपुर  बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु आयोजन और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व ही हेल्पलाइन सेवा शुरू कर दी गई है। यह हेल्पलाइन हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी एवं हायर सेकेंडरी व्यावसायिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए संचालित की जा रही है। हेल्पलाइन सेंटर से विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक सभी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संपर्क कर सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 1800-233-4363 पर सुबह 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक फोन कर सहायता ली जा सकती है। हेल्पलाइन में प्रतिदिन मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक अभिप्रेरक तथा मण्डल के अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जो परीक्षा से जुड़े तनाव, मार्गदर्शन और अन्य शैक्षणिक समस्याओं का समाधान करेंगे। खास बात यह है कि यह सेवा रविवार के दिनों में भी कार्यालयीन समय में उपलब्ध रहेगी। माशिमं ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि परीक्षा से संबंधित किसी भी समस्या या तनाव की स्थिति में हेल्पलाइन का लाभ उठाएं, ताकि परीक्षाएं तनावमुक्त माहौल में संपन्न हो सकें।

कलेक्टर-विधायक से संबंधों का धौंस बताने वाली शिक्षिका के खिलाफ स्टूडेंट्स का विरोध, हटाने की मांग पर अड़े

दंतेवाड़ा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल बारसूर के छात्र-छात्राएं अपनी शिक्षिका को हटाने की मांग को लेकर स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। छात्रों का आरोप है कि शिक्षिका माधुरी उइके पिछले तीन वर्षों से उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। छात्रों ने बताया कि शिक्षिका माधुरी स्कूल में उनके साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करती है और अभिभावकों को लेकर भी आपत्तिजनक बातें करती हैं। जब शिकायत करने की बात करते हैं तो शिक्षिका उन्हें धमकाती है और कहती हैं कि उनके कलेक्टर और विधायक से सीधे संबंध हैं इसलिए उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता। बच्चों का यह भी आरोप है कि महिला शिक्षिका और बीईओ बयान बदलने का दबाव बना रहे हैं। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं बच्चे छात्राओं ने बताया कि उन्होंने बीते दिन सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिक्षिका के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था और कार्रवाई की मांग की थी। शुक्रवार को वे अभिभावकों के साथ स्कूल तो पहुंचे, लेकिन कक्षाओं में जाने के बजाय स्कूल परिसर के बाहर ही धरने पर बैठ गए। छात्रों ने कहा कि जब तक शिक्षिका को स्कूल से नहीं हटाया जाता, तब तक वे क्लास में नहीं बैठेंगे। छात्रों का आरोप – शिक्षिका के व्यवहार से स्कूल का माहौल हुआ खराब छात्रों का यह भी आरोप है कि शिक्षिका के व्यवहार से स्कूल का माहौल खराब हो गया है। कई शिक्षक भी परेशान हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता भी छात्रों के समर्थन में धरने में शामिल हुए। उनका कहना है कि शिक्षिका की वजह से न केवल बच्चे, बल्कि कई शिक्षक भी असंतुष्ट हैं। पिछले दो वर्षों में कई कर्मचारी स्कूल छोड़ चुके हैं। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि शिक्षिका माधुरी उइके को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, ताकि स्कूल का वातावरण दोबारा सामान्य हो सके।

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा हुई सुलभ, छात्रों के सपनों को मिली उड़ान

रायपुर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और विकास का सबसे बड़ा माध्यम माना जाने लगा है। शिक्षा ही वह शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति, समाज और राज्य को नई दिशा देती है। लेकिन उच्च शिक्षा तक पहुँचना हमेशा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक चुनौती रहा है। आर्थिक तंगी के कारण कई मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस समस्या को गहराई से समझा और समाधान के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया — मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना। इस योजना ने हजारों छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह को आसान बना दिया है। अब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लिए गए शिक्षा ऋण पर ब्याज की चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि सरकार वह बोझ अपने ऊपर ले रही है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद प्रभावित और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र अक्सर आर्थिक कठिनाइयों के कारण तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते थे। उच्च शिक्षा तक पहुँचने में सबसे बड़ी रुकावट महँगी फीस और शिक्षा ऋण का बोझ था। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने यह योजना शुरू की।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि “शिक्षा में निवेश ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि शिक्षित युवा ही राज्य और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।” इसी सोच के तहत यह योजना लागू की गई। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 4 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण ब्याज मुक्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र के परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, जशपुर आदि नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को पूर्णत: ब्याज मुक्त ऋण मिलता है।अन्य जिलों के छात्रों को केवल 1% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। शेष ब्याज सरकार वहन करती है।बैंक द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की पूरी या आंशिक राशि सरकार देती है।इससे छात्रों पर सिर्फ मूलधन  चुकाने की ही बाध्यता रहती है। इस योजना में 35 तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। इनमें डिप्लोमा, स्नातक (ग्रेजुएशन), स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) और पेशेवर कोर्स सम्मिलित हैं।योजना के लिए पात्र छात्रों का छत्तीसगढ़ का निवासी होना आवश्यक है। उसकी वार्षिक पारिवारिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्र को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश लेना अनिवार्य है। इस योजना के लिए राज्य के किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक / सहकारी बैंक में शिक्षा ऋण के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज़ (निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, प्रवेश पत्र, अंकसूची, आधार कार्ड आदि) जमा करना होता है। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद छात्र को योजना का लाभ पाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है। योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का योगदान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस योजना को बहुत ही कुशलता से धरातल पर उताराने का काम किया है। उनके नेतृत्व में इस योजना का विस्तार इस तरह से किया गया, जिससे नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को विशेष लाभ मिला।इस योजना में ऑनलाइन प्रक्रिया को सरल बनाया गया ताकि छात्रों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।बजट में बढ़ोतरी करते हुए उच्च शिक्षा विभाग के बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया। इस योजना के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंक समय पर छात्रों को ऋण दें और ब्याज अनुदान में देरी न हो। योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के मुखिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना से गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा तक पहुँच पा रहे हैं।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस योजना के पहुँचने से काफ़ी उम्मीद बढ़ी है इससे शिक्षा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है, जिससे नक्सलवाद से लड़ाई को नई ताक़त मिल रही है। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा लेकर युवा नौकरी और स्वरोज़गार में आगे बढ़ रहे हैं और परिवारों पर ब्याज का बोझ घटने से वे बच्चों की शिक्षा के लिए और अधिक उत्साहित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भावी योजनाएँ छत्तीसगढ़ सरकार इस योजना को और व्यापक बनाने की तैयारी में है। इस योजना में मिलने वाले ऋण सीमा को 4 लाख रुपए से बढ़ाकर 7 लाख रुपए तक करने पर विचार किया जा रहा है। इस योजना में नॉन-प्रोफेशनल कोर्स (जैसे BA, B.Sc, B.Com) को भी शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। डिजिटल पोर्टल पर पूरी तरह से ऑनलाइन आवेदन और स्वीकृति की सुविधा बनाई जा रही है। छात्रवृत्ति और ऋण अनुदान को जोड़कर “डबल बेनिफिट स्कीम” बनाने पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना छत्तीसगढ़ के युवाओं के सपनों को पंख देने वाली योजना है। यह न केवल छात्रों की आर्थिक समस्याएँ हल कर रही है बल्कि राज्य को ज्ञान और कौशल की शक्ति से सशक्त भी बना रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कदम शिक्षा को लोकतांत्रिक और सुलभ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक है। आज जब कोई भी छात्र यह महसूस करता है कि उसकी पढ़ाई सिर्फ पैसे की वजह से अधूरी नहीं रहेगी, तो यह योजना अपने उद्देश्य में सफल मानी जाती है।

योगी आदित्यनाथ: बिना भेदभाव के विद्यार्थियों तक पहुँच रही है छात्रवृत्ति

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी के चार लाख छात्र-छात्राओं को दिवाली गिफ्ट देते हुए छात्रवृत्ति वितरित की। कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ में किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति सितंबर के महीने में मिल रही है। इसकी सभी विद्यार्थियों को बधाई। पहले जो छात्रवृत्ति फरवरी-मार्च में मिलती थी अब सितंबर में मिला करेगी। सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले छात्रों को छात्रवृत्ति देने में भेदभाव किया जाता था। 2017 में जब हमारी सरकार आई तो हमने 2016-17 और 17-18 की छात्रवृत्ति एक साथ दी। मुख्यमंत्री योगी ने प्रतीकात्मक तौर पर कई विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का चेक प्रदान किया। बता दें कि फरवरी-मार्च में मिलने वाली छात्रवृत्ति इस बार सितंबर में नवरात्र के अवसर पर छात्रों को दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कई बार विद्यालयों से छात्रवृत्ति के लिए डाटा फीड करने में त्रुटि हो जाती है। ऐसे में छात्र अपने अधिकार से वंचित रह जाता है। इसके लिए हम एआई के माध्यम से प्रक्रिया को सरल बना रहे हैं जिससे कि प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम हो और जैसे ही छात्र का पंजीकरण हो जाए उसके फोन पर पूरी डिटेल उपलब्ध हो और समय पर छात्रवृत्ति पहुंच जाए। इसकी व्यवस्था की जा रही है। सीएम योगी ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी शिक्षा से, अपनी योग्यता से हमारे देश को और समाज को दिशा दी थी। सरकार का प्रयास है कि हर छात्र को सहायता मिले जिससे कि वो अपनी शिक्षा से समाज के विकास में योगदान दे सके। समाज कल्याण मंत्री बोले- जिन्हें पिछले वर्ष छात्रवृत्ति नहीं मिली, उन्हें भी दी जाएगी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूपी सरकार के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा है कि योगी सरकार ने पिछले वर्ष 60 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति दी है। इस बार एक नई बात ये होगी कि जो बच्चे किसी भी कारणवश भले ही वो तकनीकी कारण रहे हों छात्रवृत्ति लेने से वंचित रहे हैं। उन्हें भी इस वर्ष छात्रवृत्ति मिलेगी साथ ही एक ऐसी एप का भी विकास किया जाएगा जिसमें बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति की पूरी जानकारी होगी। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि कोई भी बच्चा छात्रवृत्ति से वंचित न रह जाए।