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दवाओं की बिक्री पर नई सख्ती, प्रिस्क्रिप्शन के बिना सिरप देने पर रोक

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने दवाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है, स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अहम नोटिफिकेशन जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब खांसी समेत सभी तरह के सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगे, यानी अब मेडिकल स्टोर से कोई भी कफ सिरप या अन्य सिरप आधारित दवा खरीदने के लिए पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होगा।  क्या है नया नियम? 9 जून को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बताया कि Drugs (5th Amendment) Rules, 2026 लागू कर दिए गए हैं, इसके तहत एक बड़ा बदलाव किया गया है अब ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल K से “Syrups” को हटा दिया गया है।  पहले शेड्यूल K के तहत कुछ दवाएं ऐसी थीं जिन्हें बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीदा जा सकता था (OTC दवाएं), लेकिन अब इस लिस्ट से सिरप को बाहर कर दिया गया है. अब कफ सिरप समेत सभी तरह के सिरप बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिलेंगे। क्या है नया नियम? केंद्र सरकार ने 9 जून 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए Drugs (Fifth Amendment) Rules, 2026 लागू किए हैं. यह संशोधन Drugs and Cosmetics Act, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत किया गया है और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही प्रभावी हो गया है।  ड्रग्स रूल्स में क्या बदलाव किया गया? सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 की Schedule K में सूचीबद्ध दवाओं की श्रेणी से "Syrups" शब्द को हटा दिया है. इसके परिणामस्वरूप सिरप अब ओवर-द-काउंटर दवाओं की श्रेणी में नहीं रहेंगे और उनकी बिक्री पर सख्त नियामकीय नियंत्रण लागू होगा।  अब बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिलेगी कफ सिरप नए नियम के तहत कफ सिरप सहित औषधीय सिरप खरीदने के लिए उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा. इससे उन सिरपों की सामान्य खरीद प्रभावित होगी, जिन्हें अब तक लोग सीधे मेडिकल स्टोर से खरीद लेते थे।  बच्चों की मौत के मामलों के बाद लिया गया फैसला सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामलों ने दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे. इन घटनाओं के बाद सिरप के निर्माण और बिक्री पर कड़े नियंत्रण की मांग तेज हो गई थी।  जनता से सुझाव लेने के बाद लागू हुआ संशोधन इस संशोधन का मसौदा 30 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था, जिस पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे. सरकार ने कहा कि प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम संशोधन अधिसूचित किया गया।  फार्मेसियों को करना होगा नए नियमों का पालन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव हर्ष मंगला द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब देशभर की फार्मेसियों को सिरप और संबंधित औषधीय फॉर्मूलेशन की बिक्री के लिए संशोधित नियमों का पालन करना होगा. इसके तहत बिना डॉक्टर की पर्ची के ऐसी दवाएं बेचना संभव नहीं होगा।  क्यों लिया गया यह फैसला? स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ये कदम दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया गया है. पिछले कुछ समय से कफ सिरप और दूसरी सिरप वाली दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही थी।      कई मामलों में ओवरडोज का खतरा     बिना जरूरत दवा लेना     बच्चों में गलत डोज     मिलावटी सिरप से नुकसान इन सभी समस्याओं को देखते हुए सरकार ने सख्ती बढ़ाई है. मेडिकल स्टोर के लिए भी सख्त नियम नए नियम लागू होने के बाद अब मेडिकल स्टोर्स को भी निर्देश दिए गए हैं कि     बिना डॉक्टर पर्ची के सिरप न बेचें     नियम तोड़ने पर कार्रवाई हो सकती है छोटे पैक में ही मिलेगी दवा सरकार ने एक और बड़ा बदलाव किया है, अब सभी सिरप और लिक्विड दवाएं सिंगल-यूनिट पैक में ही बेची जाएंगी.     5 ml, 10 ml जैसी छोटी पैकिंग     एक बार की डोज वाला पैक यह नियम कब लागू होगा? 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू. पुराने स्टॉक बेचने के लिए कंपनियों को 6 महीने का समय मिल है. ऐसा इसलिए क्योंकि खुली बोतल से ओवरडोज या गलत डोज का खतरा साथ ही मिलावट या खराब होने की संभावना रहती थी।   इससे क्या होगा फायदा?     ओवरडोज का खतरा कम होगा     बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा बढ़ेगी     दवा की क्वालिटी बनी रहेगी     मिलावट और खराब दवा का जोखिम घटेगा

जिला अस्पताल में बच्चों को मिल रहा था दूषित सिरप, एजीथ्रोमिसिन की बोतलों में निकले कीड़े

ग्वालियर  छिंदवाड़ा में कफ सिरप से 22 बच्चों की मौत का मामला गर्माया अभी हुआ हुआ ही है कि, मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सिरप को लेकर नया मामला सामने आ गया. यहांं बच्चों के एंटीबायोटिक सिरप में कीड़े निकलने की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन सिरप की शीशियां जब्त कर सैंपल लिए हैं. दवाओं की ये बोतलें जिला अस्पताल में वितरित की जा रही थीं. जिला अस्पताल में हो रहा था दवा का वितरण पिछले दिनों कफ सीरप कोल्ड्रिफ के बाद अब बच्चों को दिए जाने वाले एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन ओरल सस्पेंशन सिरप में कीड़े निकलने की बात सामने आई है. जिला अस्पताल में दवाओं के वितरण के दौरान एंटीबायोटिक दवा की शीशी में कीड़ों की शिकायत मुरार जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से की गई है. जिसके बाद ड्रग डिपार्टमेंट ने संज्ञान लिया है. एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन सिरप के वितरण पर रोक लगाते हुए सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं. दवा की शीशी में निकला कीड़े जैसा एलीमेंट मामला ग्वालियर के जिला अस्पताल मुरार के अधीन प्रसूति गृह अस्पताल का है, जहां ओपीडी में एक महिला अपने बच्चे को लेकर आई थी, डॉक्टर द्वारा लिखे जाने पर एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन सिरप दवा वितरण केंद्र से दी गई थी. लेकिन जब महिला ने सिरप की बोतल को खोला तो उसमें काले रंग का कीड़े की तरह दिखने बाला कोई एलिमेंट दिखा. जिसके बाद महिला के द्वारा तुरंत इसकी शिकायत सिविल सर्जन डॉ आरके शर्मा से की गई. सैंपल के साथ दवा वितरण पर रोक शिकायत मिलते ही सिविल सर्जन ने ड्रग डिपार्टमेंट को सूचना दी और ड्रग इंस्पेक्टर अनुभूति शर्मा के नेतृत्व में जांच टीम सिविल सर्जन दवा स्टोर पर पहुंची, जहां से एंटीबायोटिक ओरल सस्पेंशन सिरप एजीथ्रोमिसिन के सैंपल कलेक्ट किए गए. साथ ही दवा का वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया. इसके अलावा वितरण केंद्रों पर जो सिरप सप्लाई की गई है वहां से इसे रिकॉल कर कलेक्ट किया गया है. सभी अस्पतालों में वितरण पर लगेगी रोक ड्रग इंपेक्टर अनुभूति शर्मा का कहना है कि, "इस गंभीर मुद्दे से जुड़ी खबर सामने आने के बाद न सिर्फ एजीथ्रोमिसिन के सैंपल लिए गए हैं, बल्कि कुछ अन्य दवाओं को भी जांच के दायरे में लिया गया है." बताया जा रहा है कि, ये दवा भोपाल स्थित सरकारी स्टोर से सप्लाई की गई थी. ऐसे में बैच नंबर के आधार पर जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि इस बैच के सिरप मध्य प्रदेश के जिन जिलों में सप्लाई हुए हैं वहां इंफॉर्मेशन देकर उनके वितरण पर रोक लगाई जा सके.'' ड्रग इंस्पेक्टर अनुभूति शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि "यदि सैंपलों की जांच में अमानक तत्व पाए जाते हैं तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.''

सिरप से मौतों के बाद केंद्र की बड़ी बैठक, राज्यों को पालन के लिए निर्देश

नई दिल्ली मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप के चलते हुए बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ आज एक अहम बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें खांसी की दवाओं की गुणवत्ता और उचित उपयोग पर चर्चा हुई। उन्होंने सभी दवा निर्माताओं को संशोधित शेड्यूल एम का सख्ती से पालन करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले कारखानों के लाइसेंस रद्द करने का निर्देश दिया। साथ ही, खासकर बच्चों में खांसी की दवाओं का सही और सीमित उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया, क्योंकि अधिकांश खांसी स्वयं ही ठीक हो जाती है और दवाइयों की जरूरत नहीं होती। इस दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बेहतर निगरानी, समय पर रिपोर्टिंग, आईडीएसपी-आईएचआईपी की रिपोर्टिंग टूल का व्यापक प्रचार और सूचनाओं के आदान-प्रदान व संयुक्त कार्रवाई के लिए मजबूत समन्वय बनाए रखने की सलाह दी गई। 'कोल्ड्रिफ' पर CDSCO सख्त, तमिलनाडु एफडीए को कार्रवाई का निर्देश केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सरेशान फार्मास्यूटिकल्स की तरफ से बनाई गई खांसी की दवा कोल्ड्रिफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब कई बच्चे इस दवा पीने के बाद मृत पाए गए। सीडीएससीओ तमिलनाडु के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन को पत्र लिखकर कंपनी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए कहेगा।मृत बच्चों में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, राजस्थान के बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा केरल और तेलंगाना ने भी इस दवा का उपयोग रोकने के लिए जनता को चेतावनी जारी की है। कफ सिरप का उत्पादन करने वाली कंपनी पर लटकी तलवार वहीं दूसरी ओर सरकार कफ सिरप का उत्पादन करने वाली कंपनी पर सख्य कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) तमिलनाडु एफडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) को 'कोल्ड्रिफ' सिरप निर्माता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराधों के तहत सख्त कार्रवाई करने के लिए कहेगा। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में उन फैक्ट्रियों की जांच शुरू कर दी है जहां से संदिग्ध दवाएं बनी थीं। बता दें कि मामले में सीडीएससीओ ने 19 दवाओं के सैंपल इकट्ठे किए हैं, जिनमें खांसी की सिरप, एंटीबायोटिक और बुखार की दवाएं शामिल हैं। मध्य प्रदेश में नेक्स्ट्रो डीएस सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध मध्य प्रदेश में एक और कंपनी नेक्स्ट्रो डीएस के खांसी की दवा के नमूनों की जांच अभी चल रही है। कुल 19 नमूने लिए गए हैं, जिनमें सिरप, एंटीबायोटिक, बुखार की दवा और ओन्डान्सेट्रॉन शामिल हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो डीएस सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है और इसी कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री भी रोक दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस प्रतिबंध की घोषणा की। सभी राज्यों को केंद्र सरकार का निर्देश केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सलाह दी है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दी जाए। वहीं पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह, सीमित मात्रा और सावधानी के साथ किया जाए। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए नुकसानदेह दवाओं पर अब चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य होगा। क्या है खतरा? मामले में तंलगाना सरकार की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कोल्ड्रिफ सिरप के इस बैच में डायएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) नाम का जहरीला रसायन मिला है, जो शरीर के गुर्दों (किडनी) को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। इसी कारण तेलंगाना में इस सिरप को लेकर लोगों को उपयोग तुरंत बंद करने की चेतावनी दी गई है।