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पंजाब में एग्जाम के बीच मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की ड्यूटी से टीचर्स नाराज

लुधियाना/तरनतारन. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कार्ड बनाने का काम शिक्षकों से करवाए जाने के विरोध में कंप्यूटर टीचर्स यूनियन, पंजाब ने मोर्चा खोल दिया है। कंप्यूटर टीचरों का एक डेलीगेशन, जिला प्रधान शीतल सिंह और प्रदेश प्रधान गुरविंदर सिंह की लीडरशिप में ए.डी.सी. (ज) राजदीप सिंह बराड़ तरनतारन से कंप्यूटर टीचरों की नॉन-एकेडमिक कामों में लगाई गई ड्यूटी के बारे में मिला। इसमें शीतल सिंह ने कहा कि डी.सी. ऑफिस तरनतारन ने कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड बनाने में लगाई है, जबकि मुख्यमंत्री ने सरकार बनने के बाद कहा था कि किसी भी टीचर की ड्यूटी किसी भी नॉन-एकेडमिक काम में नहीं लगाई जाएगी, लेकिन डी.सी. ऑफिस ने मुख्यमंत्री के बयान का उल्लंघन करते हुए कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड बनाने में लगा दी है।  वहीं इस काम में इस्तेमाल के लिए सरकारी स्कूलों से कंप्यूटर सेट और प्रिंटर भी मांगें जा रहे हैं, जबकि यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इन कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड ने 10वीं/12वीं के प्रैक्टिकल एग्जाम में भी लगाई है और कंप्यूटर सेट और प्रिंटर का इस्तेमाल भी स्टूडैंट्स के प्रैक्टिकल लेने के लिए किया जाना है, इसलिए तरनतारन के सभी जिलों के कंप्यूटर टीचरों ने डी सी ऑफिस तरनतारन से पुरजोर मांग की है कि इन ड्यूटी को तुरंत कैंसिल किया जाए और स्कूलों से हार्डवेयर न मंगवाया जाए। उन्होने कहा कि जब तक ड्यूटी कैंसिल नहीं होती, तब तक तरनतारन जिले के सभी कंप्यूटर टीचरों ने इन ड्यूटी का बायकॉट करने का ऐलान किया है। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष गुरविंदर सिंह ने कहा कि सरकार कोई भी फायदा देते समय कंप्यूटर टीचरों को भूल जाती है, लेकिन गैर-पढ़ाई वाले कामों के लिए सबसे पहले कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी लगाई जाती है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बॉर्डर एरिया में काम करने वाले टीचरों को दिया गया स्पेशल इंक्रीमैंट भी कंप्यूटर टीचरों को अभी तक नहीं दिया गया है। इस मौके पर मनी, कुमार गौरव, परविंदर सिंह, अजयपाल सिंह, पवन कुमार करनजीत सिंह, हरप्रीत सिंह आदि मौजूद थे।

सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय: कमजोर छात्राओं की बोर्ड परीक्षा तैयारी के लिए शिक्षक कर रहे घर-घर पढ़ाई

 ग्वालियर माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं सात फरवरी से शुरू हो रही हैं। परीक्षा को लेकर जहां शिक्षा विभाग स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं और छुट्टी वाले दिन भी पढ़ाई करवा रहा है, वहीं सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय के शिक्षकों ने छात्राओं की तैयारी के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। स्कूल के शिक्षक अब छात्राओं के घर तक पहुंचकर उन्हें पढ़ा रहे हैं, ताकि कमजोर छात्राएं भी अच्छे अंक ला सकें और स्कूल का परिणाम शत-प्रतिशत बना रहे। यह पहल खास तौर पर उन छात्राओं के लिए शुरू की गई है, जिन्होंने त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया या जो किसी कारणवश नियमित कक्षाओं से नहीं जुड़ पा रही थीं। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने मिलकर ऐसी छात्राओं की सूची तैयार की और फिर उनके क्षेत्रों में जाकर सामूहिक पढ़ाई का प्रयोग शुरू किया। शिक्षक ऐसे इलाकों का चयन कर रहे हैं, जहां आसपास कई छात्राएं रहती हों, ताकि एक साथ अधिक छात्राओं को लाभ मिल सके। शिक्षक पहुंचे छात्राओं के घर विद्यालय के विज्ञान शिक्षक पवन चौरसिया, चंद्रभान तमोली, एनडी दीक्षित सहित अन्य शिक्षक अपने-अपने विषयों के अनुसार छात्राओं को उनके घर जाकर पढ़ा रहे हैं। तय समय पर शिक्षक छात्राओं के घर पहुंचते हैं और पाठ्यक्रम की दोहराई, प्रश्न-उत्तर अभ्यास और शंकाओं का समाधान करते हैं। इससे छात्राओं को न केवल विषयों की बेहतर समझ मिल रही है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। घर पर पढ़ाने की वजह शिक्षकों का कहना है कि कई छात्राएं घरेलू जिम्मेदारियों, दूरी या अन्य व्यक्तिगत कारणों से स्कूल नियमित नहीं आ पातीं। ऐसे में घर जाकर पढ़ाने से उनकी पढ़ाई की निरंतरता बनी रहती है। खास बात यह है कि सांदीपनि स्कूलों में सामान्यतः तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले छात्र-छात्राओं को ही प्रवेश दिया जाता है, जिससे शिक्षकों को घर-घर पहुंचने में ज्यादा कठिनाई नहीं हो रही है। मुख्य विषयों पर विशेष फोकस इस पहल के तहत गणित, विज्ञान और हिंदी जैसे मुख्य विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षक सरल उदाहरणों और आसान भाषा में पाठ समझा रहे हैं, ताकि छात्राएं विषय को जल्दी और बेहतर तरीके से समझ सकें। कई अभिभावकों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा है कि इससे उनकी बेटियों की पढ़ाई को नई दिशा मिली है। घर पर जाकर कराएंगे परीक्षा की तैयारी रवींद्र शर्मा, प्राचार्य, सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय ने कहा कि कई छात्राओं को स्कूल की अतिरिक्त कक्षाओं में आने में परेशानी थी, इसलिए स्कूल के शिक्षकों ने तय किया कि वे उनके घर पर जाकर उन्हें पढ़ाएंगे और परीक्षा की तैयारी कराएंगे। अधिकारी की प्रतिक्रिया हरिओम चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो इसे शहर के अन्य स्कूलों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय की यह पहल उन छात्राओं के लिए उम्मीद की किरण बन रही है, जो किसी न किसी वजह से पढ़ाई की मुख्यधारा से पीछे छूट रही थीं।

शिक्षकों ने समृद्धि यात्रा के बीच उठाईं लंबित मांगें

मुजफ्फरपुर. मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के बीच में राज्य के शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। तिरहुत परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ की ओर से मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई है। संघ के प्रमंडलीय संगठन प्रभारी लखन लाल निषाद ने कहा कि शिक्षकों से जुड़ी कई समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। इससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में नियोजित शिक्षकों की कालबद्ध, स्नातक एवं प्रधानाध्यापक प्रोन्नति में हो रही देरी को दूर करने की मांग की गई है। अंतर राशि भुगतान की भी मांग इसके साथ ही डीएलएड प्रशिक्षण के बाद विरमन तिथि से ग्रेड पे देने, वेतन संरक्षण के साथ एरियर भुगतान, 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं आवास भत्ता के अंतर राशि के भुगतान की भी मांग उठाई गई है। शिक्षकों के EPFO में समय पर अंशदान नहीं होने, जिला अंतर्गत स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने, शिक्षा भवन की जर्जर स्थिति की जांच, बच्चों के आधार सुधार के लिए विद्यालयों में कैंप लगाने और अपार योजना की जिम्मेदारी प्रखंड संसाधन केंद्र को सौंपने की मांग की है। इसके अलावा ई-शिक्षाकोष की गड़बड़ियों के कारण कटे वेतन की समीक्षा कर भुगतान, उच्च शिक्षा और पीएचडी के लिए अनुमति व अवकाश, शिशु देखभाल और पितृत्व अवकाश के लंबित आवेदनों की स्वीकृति तथा परिवीक्षा अवधि समाप्त शिक्षकों से संबंधित आदेश जारी करने की भी अपील की गई है। संघ ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समय पर समाधान होने से शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।

एमपी कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा, 3 हजार से लेकर 5 हजार तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा

भोपाल  एमपी के कर्मचारियों, अधिकारियों को जल्द ही बड़ी सौगात मिलेगी। उनके वेतन में 5 हजार तक की बढ़ोत्तरी होगी। प्रदेश के शिक्षा विभाग के अमले को यह लाभ मिलेगा। विभाग के टीचर्स के साथ सहायक संचालक स्तर के अधिकारियों तक के वेतन में इजाफा होगा। चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान (Fourth time-scale-based promotional pay scale) मिलने से उन्हें यह लाभ प्राप्त होगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया चौथे समयमान वेतनमान संबंधी प्रस्ताव अंतिम रूप से तैयार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया है। शिक्षा विभाग में 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके टीचर्स व अन्य संवर्गों को इसका लाभ मिलेगा। अनुमान के मुताबिक विभाग के करीब सवा लाख कर्मचारियों को चौथे समय मान वेतनमान का लाभ मिलेगा। ये सभी टीचर्स, कर्मचारी, अधिकारी पिछले 3 साल से इसका इंतजार कर रहे हैं। कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेज दिया स्कूल शिक्षा विभाग के उपसचिव कमल सिंह सोलंकी के अनुसार पात्र टीचर्स, हेड मास्टर, प्रिंसीपल व अन्य अधिकारियों को चौथा समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान देने का प्रस्ताव है। इसे कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। शिक्षा विभाग के प्राइमरी, मिडिल व अन्य टीचर्स, लेक्चरर्स, प्रिंसीपल्स और सहायक संचालक स्तर के ऐसे अधिकारियों को चौथा समयमान वेतनमान मिलेगा जिनके विभाग में 35 साल पूरे हो चुके हैं। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग में सीधी भर्ती के लेक्चरर्स और प्रिंसीपल्स को यह लाभ मिल चुका है लेकिन पदोन्नत होकर आए टीचर्स और अन्य अधिकारी इससे वंचित हैं। कम से कम 3 हजार रुपए और अधिकतम 5 हजार रुपए का लाभ मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर बताते हैं कि चतुर्थ समयमान लागू होने से टीचर्स को हर महीने कम से कम 3 हजार रुपए और अधिकतम 5 हजार रुपए का लाभ होगा। शिक्षा विभाग के उपसचिव कमल सिंह सोलंकी के अनुसार चौथे समयमान वेतनमान से विभाग पर करीब 312 करोड़ रुपए का आर्थिक भार आएगा। कैबिनेट की अनुमति मिलते ही इसके आदेश जारी कर दिए जाएंगे। पात्र टीचर्स व अधिकारियों के वेतन में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी।

पदभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षक रडार पर, युक्तियुक्तकरण के बाद गिरेगी गाज

रायपुर शिक्षक युक्तियुक्तकरण को करीब छह माह हो गए है. इसके बाद भी जिले के 11 शिक्षकों ने नए स्कूलों में अभी तक ज्वाइनिंग नहीं दी है. जबकि उनका अभ्यावेदन अमान्य घोषित हो चुका है. ऐसे शिक्षकों के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है. इसलिए जेडी ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए जांच दल का गठन किया है. जिसका जिम्मा डीईओ और बीईओ को सौंपा गया है. इससे पदभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों में हड़कम्प मच गया है. शासन के आदेश पर जिले में जून माह में शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया. इसमें शहर और आसपास के स्कूलों में आवश्यकता से अधिक पदस्थ शिक्षकों को शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय स्कूल में भेजा गया. जिले में करीब साढ़े सात सौ शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया. इसके खिलाफ कई शिक्षक हाईकोर्ट गए. वहां से कई को राहत मिली. वहीं जिला और संभाग स्तरीय कमेटी के समक्ष भी उन्होंने हाईकोर्ट के निर्देश पर अभ्यावेदन प्रस्तुत किया. इसमें जिले के मिडिल स्कूल के 11 शिक्षकों को राहत नहीं मिली. उनका आवेदन अमान्य कर दिया गया. इसके बाद भी उन्होंने युक्तियक्तकरण के छह माह बाद भी नए स्कूलों में ज्वाइनिंग नहीं दी है. शासन के आदेश पर उनका वेतन पहले से रोका जा चुका है. इसके बाद भी शिक्षक नए स्कूल में उपस्थित दर्ज नहीं करा रहे है. ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है. इसके लिए जेडी आरपी आदित्य ने संभाग के पदभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश डीईओ और बीईओ को सौपा है. उसके खिलाफ ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कहीं जा रही है. जिसमें उनकी नौकरी भी जा सकती है. निलंबित नहीं होंगे शिक्षक सीधे किए जाएंगे बर्खास्त युक्तियुक्तकरण करने के बाद दूर-दराज के स्कूल में शिक्षक जाना नहीं चाह रहे है. उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश जारी किया गया है. इसके बाद भी जिले से कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी. शिक्षकों को निलंबित करने से उनको फायदा है. इसलिए जेडी ने उनके खिलाफ जांच दल बनाकर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. जिसमें शासन को बर्खास्ती की अनुशंसा भी की जा सकती है. नहीं तो क्रेक सर्विस भी करने की बात कहीं जा रही है. प्राइमरी स्कूल के 9 शिक्षकों पर भी होगी कार्रवाई वहीं जिले के प्राइमरी स्कूल के 9 शिक्षकों ने युक्तियुक्तकरण में नई पोस्टिंग मिलने के बाद भी पदभार ग्रहण नहीं किया गया है. उनके खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी को दल बनाकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी है. लेकिन डीईओ उस ओर ध्यान नहीं दे रहे है. संयुक्त संचालक ने डीईओ को पदभार ग्रहण नहीं करने वाले सहायक शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए है. इसलिए अब उनके खिलाफ भी जल्द जांच दल बनेगा.

ई-अटेंडेंस अनिवार्य, वरना वेतन नहीं! ग्वालियर DEO ने किया कड़ा निर्देश, शिक्षकों में तनाव

 ग्वालियर  अब शिक्षकों की मनमानी नहीं चलेगी, ग्वालियर में जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने साफ कर दिया है कि नवंबर महीने का वेतन केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर ही जारी होगा। एक भी दिन ई-अटेंडेंस मिस हुई तो उतने दिन का वेतन कट जाएगा। DEO ने सभी डीपीसी, बीईओ, संकुल प्राचार्यों और स्कूल प्रधानाचार्यों को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि नवंबर 2025 का वेतन पूरी तरह ई-अटेंडेंस के आधार पर ही दिया जाएगा। जितने दिन शिक्षक ने पोर्टल पर ई-अटेंडेंस लगाई होगी, उतने दिन का ही वेतन जारी होगा। जिन शिक्षकों ने पूरे महीने ई-अटेंडेंस नहीं लगाई, उनका वेतन आंशिक या पूरी तरह रोक दिया जाएगा। आदेश में स्पष्ट लिखा है कि  कोई भी छुट्टी (CL/EL/ML) हो या ड्यूटी, बिना ई-अटेंडेंस के मान्य नहीं होगी। संकुल प्राचार्य और बीईओ रोजाना मॉनिटरिंग करेंगे। लापरवाही बरतने वाले प्राचार्यों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। शिक्षकों में हड़कंप आदेश जारी होते ही जिले भर के शिक्षक कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कई शिक्षक जो अब तक मोबाइल ऐप या पोर्टल पर अटेंडेंस लगाना टालते थे, अब परेशान हैं। सोशल मीडिया पर शिक्षक ग्रुप में एक ही बात चर्चा में है, “अब तो रोज सुबह 10 बजे से पहले अटेंडेंस लगानी ही पड़ेगी वरना पगार कट जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षक स्कूल में उपस्थित हों, यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। ई-अटेंडेंस से पारदर्शिता आएगी और अनुपस्थित शिक्षकों पर लगाम लगेगी। कोई ढील नहीं बरती जाएगी।”यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। अब देखना यह है कि दिसंबर की सैलरी आने तक कितने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 100% हो पाती है!

मंत्री बैंस ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, कहा—शिक्षक हैं ज्ञान और मूल्यों के स्तंभ

चंडीगढ़ पंजाब में अब कोई भी शिक्षक पढ़ाने के सिवाय गैर शैक्षिक कार्य नहीं करेगा। शिक्षामंत्री हरजोत बैंस ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत प्रभाव से इस संदर्भ में सभी विभागों को सख्त हिदायत जारी करें। शिक्षामंत्री ने साफ कहा कि शिक्षकों के लिए कक्षाएं सबसे ज्यादा जरूरी कार्य हैं न कि अन्य कार्य। कई जिलों में शिक्षकों को कक्षाओं से हटाकर रुटीन प्रशासनिक कामों में लगाने की रिपोर्टों पर शिक्षामंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इस रिवायत को शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के साथ घोर अन्याय करार दिया। उन्होंने शिक्षण ड्यूटी को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि शिक्षक अपनी मुख्य जिम्मेदारी पर ही ध्यान केंद्रित करें। मुख्य सचिव को लिखे पत्र में मंत्री बैंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षक केवल साधारण सरकारी कर्मचारी नहीं हैं – वे ज्ञान और मूल्यों के ध्वजवाहक हैं, जिन्हें पंजाब के भविष्य को दिशा देने की पवित्र जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें कक्षाओं की जगह विभिन्न प्रशासनिक कामों में लगाना न केवल उनके साथ बल्कि हमारे बच्चों के साथ भी अन्याय है। ऐसा करने से बच्चों की शिक्षा का अधिकार प्रभावित होता है। बताते चलें कि इस संदर्भ में सूबे के शिक्षक भी मांग कर रहे थे, जिस पर अब शिक्षा मंत्री संज्ञान ले लिया है। मंत्री ने आरटीई एक्ट का दिया हवाला मंत्री ने बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 की धारा 27 का हवाला देते हुए कहा कि यह धारा गैर-शैक्षिक उद्देश्यों के लिए शिक्षकों की तैनाती पर रोक लगाती है। यह मनाही केवल कुछ विशेष मौकों जैसे दस वर्षीय जनगणना, आपदा राहत कार्य और स्थानीय संस्थाओं, राज्य विधानसभाओं या संसदीय चुनावों में ड्यूटी पर लागू नहीं होती। शिक्षा मंत्री बैंस ने बताया कि यह व्यवस्था बहुत सोच-समझकर लागू की गई थी ताकि शिक्षकों का समय और ऊर्जा क्लासरूम शिक्षण पर केंद्रित रह सके, जो हमारे समाज की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि कई बार जरूरी सरकारी काम हो सकते हैं, लेकिन ऐसे कार्यों के लिए शिक्षक को पहला विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। कक्षाओं में उनकी मौजूदगी के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। लिखित अनुमति लेना अनिवार्य पत्र में मुख्य सचिव को निर्देश देते हुए मंत्री बैंस ने कहा कि सभी प्रशासनिक विभागों और जिला अधिकारियों को स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं कि आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 27 में बताई गई ड्यूटी के अलावा शिक्षकों की कोई भी गैर-शैक्षिक ड्यूटी न लगाई जाए। ऐसी कोई भी स्थिति, जहां शिक्षकों की तैनाती आवश्यक हो, ऐसी किसी भी तैनाती से पहले स्कूल शिक्षा विभाग से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए।

शैक्षणिक सत्र में बदलाव पर सवाल, 2 महीने में परीक्षा, रिजल्ट और नामांकन चुनौतीपूर्ण: शिक्षक प्रतिक्रिया

जयपुर   राजस्थान के शिक्षा महकमे ने आगामी शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूलों के अधिग्रहण से छात्रों की बाधित होने वाली पढ़ाई की भरपाई होगी. साथ ही सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों से प्रतिस्पर्धा भी कर पाएंगे. हालांकि, शिक्षक इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उनका मानना है कि राजस्थान में 1 अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू करने की कवायत राजस्थान की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी इस तरह के प्रयोग किए गए हैं, जो फेल हुए हैं. मार्च तक परीक्षा और रिजल्ट : शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने बताया कि 1 अप्रैल से शुरू करने का संदर्भ ही यही है कि परीक्षा और रिजल्ट का काम मार्च तक पूरा करना पड़ेगा, जो संभव नहीं है. इस सत्र में सितंबर खत्म होने को आ गया है, लेकिन अब तक छात्रों को किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं और यदि मार्च में सत्र खत्म होगा तो छात्रों तक किताबें पहुंचना भी एक चुनौती होगी. इसलिए सरकार की ये सोच राजस्थान की भौगोलिक दृष्टि के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी ये अनुभव किया जा चुका है, बावजूद इसके बार-बार प्रयोग करके शिक्षा विभाग को बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है. ये सरकार को बंद करना चाहिए. कम से कम इस विषय में शिक्षा से जुड़े हुए शिक्षक संगठनों से बातचीत करके कोई निर्णय करना चाहिए. तानाशाही तरीके से जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वो कभी भी शिक्षा के लिए फलदाई नहीं रहे और फिर सरकार को बाद में बदलाव करना पड़ता है. किसने क्या कहा, सुनिए. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में रखना होगा तारतम्य : हालांकि, शिक्षकों का एक धड़ा इस पहल का स्वागत भी कर रहा है. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान में प्राइवेट स्कूल 1 अप्रैल या उससे भी पहले से एडमिशन शुरू कर देते हैं. जबकि सरकारी स्कूल 1 जुलाई से प्रवेश उत्सव शुरू करते हैं. इससे सरकारी स्कूल पीछे रह जाते हैं और नामांकन में संतोषजनक वृद्धि नहीं होती. यदि सत्र 1 अप्रैल से सत्र शुरू होगा, तो सरकारी स्कूलों का नामांकन निश्चित रूप से बढ़ेगा. साथ ही शहरी क्षेत्र में लगभग 35 से 40 दिन प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण जो पढ़ाई के दिन कम हो रहे हैं, उनकी भरपाई भी होगी. हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही चुनौतियां गिनाते हुए कहा कि विभाग को इसके लिए विशेष तैयारी करनी होगी. सबसे बड़ी चुनौती परीक्षाओं के टाइम टेबल को लेकर रहेगी. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं को पहले आयोजित करना जरूरी होगा. शिक्षा मंत्री का दावा- छात्रों और अभिभावकों को राहत : हालांकि, शिक्षा मंत्री इस प्रयोग से आश्वस्त हैं. मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि ये अभी प्रस्ताव है. अंतिम मोहर लगनी बाकी है, लेकिन यदि सत्र 1 अप्रैल से शुरू होता है तो गरीब बच्चों को भी लाभ मिलेगा और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. निजी स्कूल फीस के मामले में कभी-कभी अनुचित तरीके अपनाते हैं. ऐसे में ये नई व्यवस्था अभिभावकों को भी राहत देगी. दिलावर ने ये भी स्पष्ट किया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले एक से डेढ़ महीने की पढ़ाई का टेस्ट लिया जाएगा. विभाग ये सुनिश्चित करेगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उनका कोर्स अप्रैल के पहले सप्ताह में ही मिल जाए, ताकि परीक्षा में छात्र अच्छा प्रदर्शन कर सकें. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 15 मई तक शिक्षक घर-घर जाकर एडमिशन लेंगे, जिससे जुलाई में प्रवेश उत्सव की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा, ड्रॉपआउट छात्रों को प्रोत्साहित कर उनका भी संबंधित कक्षा में दाखिला कराया जाएगा. शिक्षा विभाग की होगी बड़ी 'परीक्षा' : बहरहाल, 1 अप्रैल से सत्र शुरू होने से कक्षा 1 से 12 तक की परीक्षाएं 31 मार्च तक खत्म कर रिजल्ट जारी करना होगा. अप्रैल के पहले सप्ताह में किताबें, वर्क बुक छात्रों तक पहुंचानी होगी, क्योंकि यदि सामग्री अप्रैल तक नहीं पहुंचती है तो ग्रीष्मावकाश में इसे छात्रों को उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा. वहीं, यदि इसे मूर्त रूप मिलता है तो इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों और उनके अभिभावकों को मिलेगा.  

शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण: शिक्षकों की उपलब्धता से बच्चों में बढ़ा आत्मविश्वास

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। युक्तियुक्तकरण के तहत जिले में जिन विद्यालयों में शिक्षक नहीं थे, वहां अब विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की पदस्थापना की गई है, इससे अब स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है। इसी कड़ी में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत एकल शिक्षकीय स्कूल प्राथमिक शाला फुलवारी संकुल केन्द्र पदमपुर को दो अतिरिक्त शिक्षक मिल गए हैं, इससे विद्यार्थियों को शिक्षा की नई रोशनी मिली है।      प्राथमिक शाला फुलवारी की शिक्षिका मती चेतना साहू ने बताया कि पहले यहां कुल 95 बच्चों के लिए एक ही शिक्षक पदस्थ थे, लेकिन युक्तियुक्तकरण के बाद तीन शिक्षक हो जाने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आया है, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। उन्होंने बताया कि शासन की यह योजना स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने की दिशा में सार्थक कदम है। विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को नवाचारों और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। युक्तियुक्तकरण से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट नजर आ रहा है। विद्यार्थियों के पालकों ने बताया कि पहले के मुकाबले बच्चे ज्यादा रूचि के साथ विद्यालय जा रहे हैं और पढ़ाई भी बेहतर ढंग से हो रही है। पालकों ने युक्तियुक्तरण योजना से स्कूलों में हुए शैक्षणिक बदलाव एवं शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन के लिए शासन-प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।

शिक्षकों को मिलेगा सरकारी मकान, मध्यप्रदेश में स्कूलों के पास बनेगा आवास

भोपाल  स्कूलों में नियमित पढ़ाई हो सके इसके लिए मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग स्कूलों के पास शिक्षकों को मकान बनाकर देगा। यह महिला शिक्षकों(Government Teacher) के लिए होंगे। लोक शिक्षण संचालनालय इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट जिलों से मिली जानकारी के आधार पर बनेगी। आवास ऐसे स्कूलों के आसपास बनेंगे जहां आवाजाही मुश्किल होती है। लोक शिक्षण ने सभी जिलों को इसके लिए निर्देश भेजे थे। जिलों से जमीन तलाश करने के बाद उसकी रिपोर्ट मांगी थी। बारिश के कारण इस काम में रुकावट आई। इसे अब फिर शुरू किया जाएगा। विभाग के निर्देश के तहत हर जिले में 100 आवास बनेंगे। महिला शिक्षकों के लिए प्राथमिकता होगी। तीन से पांच एकड़ में बहुमंजिला इमारत इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट दिए जाने हैं। यानि विभाग बहुमंजिला इमारतें तैयार कराएगा। हर जिले से इन इमारतों के लिए तीन से पांच एकड़ जमीन को चिन्हित कर रिपोर्ट मांगी गई थी। यह पहला चरण है। हर विकासखंड मुख्यालय पर 100 आवास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए 3 से 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक डीएस कुशवाहा ने इसके संबंध में निर्देश जारी किए गए थे। जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर अब समीक्षा होना है। इन्हें मिलेगा लाभ मध्यप्रदेश में 94 हजार स्कूल हैं। इनमें एक लाख से अधिक महिला शिक्षक(Government Teacher) हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इनकी संख्या 25 हजार से अधिक है। वहीं फिलहाल मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार गांवों और छोटे जिलों के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए ही घर का निर्माण कराने की तैयारी कर रहा है।