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हार के बाद बदला राजनीतिक अंदाज़? तेजस्वी यादव को मिला नया नाम, नेताओं के बयान चर्चा में

 पटना राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के हार को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार ट्रोल हो रहे हैं। सत्ता पक्ष के नेता तो उनपर हमला बोल ही रहे हैं, अब लिस्ट में महागठबंधन के नेता भी शामिल हो गए हैं। सत्ता पक्ष से कृषि मंत्री राम कृपाल यादव और राष्ट्रीय जनता दल के सूप्रीमो लालू प्रसाद के करीबी शिवांनद तिवारी ने भी तेजस्वी यादव पर तंज कसा है। दरअसल, तेजस्वी यादव राज्यसभा चुनाव के परिणाम के बाद बिहार से बाहर चले गए। इसके बाद रामकृपाल यादव और शिवानंद तिवारी ने उन्हें रणछोड़ कह दिया। वहीं पप्पू यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव ने अपनी जिम्मेदारी ही ठीक से नहीं निभा पाए। पहले जानिए शिवानंद तिवारी ने क्या कहा? पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि पराजय से ज्यादा खराब है कि पराजय के बाद मैदान छोड़ देना। सुना है कि तेजस्वी यादव कोलकाता के लिए निकल गए हैं। इसके पहले भी वह बिहार से बाहर चले गए थे। परिवार के साथ यूरोप चले गए थे। पराजय के बाद रण छोड़ देने वाले नेताओं के साथ उनके समर्थक नहीं टिकते हैं। मंत्री रामकृपाल यादव ने क्या कहा? वहीं कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव जिस तरह से विधानसभा चुनाव में पटना छोड़कर चले गए थे, उसी तरह राज्यसभा चुनाव में भी हार के बाद पटना के बाहर चले गए। वह अब रणछोड़ बन गए हैं। यही कारण है कि तेजस्वी यादव की पार्टी के नेताओं को उनपर भरोसा नहीं है। सांसद पप्पू यादव ने उठाया सवाल वहीं सांसद पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के बिहार प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष से बातचीत ही नहीं की। विपक्ष के नेता का दायित्व था कि वह सबसे बात करें। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया। जिसका परिणाम हुआ कि कांग्रेस के तीन विधायक नाराज हो गए और वोट डालने नहीं गए।

तेजस्वी यादव 5 अप्रैल को पहुँचेंगे रांची, संगठन को लेकर राजद नेताओं के साथ करेंगे मंथन

रांची बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 5 अप्रैल को रांची आएंगे। वे इस दौरान पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश, जिला, महानगर और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और बातचीत करेंगे। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में जातीय जनगणना जल्द शुरू करने की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा पार्टी ने तय किया कि हर महीने जिलावार सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पार्टी के मंत्री, विधायक और अन्य पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। राजद कोर कमिटी की बैठक 17 मार्च को शाम 5 बजे राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान के सरकारी आवास पर आयोजित होगी। इसके साथ ही राज्य के 24 जिलों में पंचायत स्तर तक लालू-तेजस्वी रथ घुमाने का भी निर्णय लिया गया, ताकि पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को आम लोगों तक पहुंचाया जा सके। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश राजद अध्यक्ष संजय कुमार सिंह यादव ने की। मंत्री संजय प्रसाद यादव, विधायक नरेश सिंह, पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता, पूर्व विधायक गौतम सागर राणा, सुभाष प्रसाद यादव, प्रवक्ता कैलाश यादव और डॉ. मनोज सहित कई नेताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष रंजन यादव ने किया।  

नीतीश पर तेजस्वी का तंज—साथ रहते तो हालात अलग होते

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने वाले फैसले से प्रदेश की राजनीति ने अचानक से करवट ली है। सत्ता पक्ष जहां नीतीश कुमार के फैसले की सराहना कर रहा है, तो वहीं विपक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार पर भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए दबाव बनाया। राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि अगर वे नीतीश कुमार के साथ होते तो उन्हें आज यह दिन नहीं देखना पड़ता और बिहार की सियासत से उन्हें बाहर नहीं होना पड़ता। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा, "नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं; उनके साथ हमारी पूरी सहानुभूति है। हमें पता है कि क्या हो रहा है और वह किस दौर से गुजर रहे हैं। अगर हम वहां होते, तो शायद नीतीश कुमार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। भाजपा लगातार दबाव बना रही थी। आखिरकार, यह तो होना ही था। नीतीश कुमार ने 20 साल तक बिहार की सेवा की। हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।" तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह राज्यसभा जाना चाहते हैं। हम शुरू से ही कह रहे हैं कि भाजपा चुनाव के बाद नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी पर नहीं रहने देगी। वह अब सच हो रहा है। राजद-जदयू के गठबंधन टूटने के दौर का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि सभी लोग जानते हैं कि हम लोगों ने नीतीश कुमार के साथ मिलकर सरकार चलाई। नीतीश कुमार की सरकार में मैं दूसरी बार डिप्टी सीएम बना था। 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार हमें छोड़कर गए। उस दौरान उनके पास कोई वजह नहीं थी। उस समय भी हम लोगों ने कहा था कि भाजपा जदयू को खत्म करना चाहती है; जदयू बचेगी नहीं। हमारी पूरी सहानुभूति नीतीश कुमार के साथ है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी हमने कुछ नहीं कहा है। हमने कहा था कि नीतीश कुमार को घोड़ी तो चढ़ाया, लेकिन फेरे किसी और के साथ दिला रहे हैं। भाजपा नहीं चाहती है कि कोई ओबीसी समाज, दलित या आदिवासी समाज से आने वाला शख्स न्याय की बात करे। भाजपा के लोग उन्हें टिकने नहीं देना चाहते हैं। निशांत कुमार के राजनीति में आने पर तेजस्वी यादव ने कहा, "हम तो पहले से कहते रहे हैं कि उन्हें आना चाहिए। राजनीति में युवाओं को आना चाहिए।" बताते चलें कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। उनके नामांकन दाखिल कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह समेत बिहार सरकार के कई मंत्री मौजूद रहे।

क्या विधायक पद छोड़ेंगे तेजस्वी यादव? राज्यसभा चुनाव पर सियासी हलचल तेज

पटना बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज हो गई है। सियासी गलियारों में अटकलें चल रही हैं कि तेजस्वी खुद विपक्ष के राज्यसभा उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि, इस बारे में पार्टी की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। दूसरी ओर, राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने के लिए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने रविवार को अहम बैठक बुलाई है। आरजेडी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड और राज्य संसदीय बोर्ड की यह बैठक रविवार को पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर होगी। इस बैठक की अध्यक्षता लालू यादव करेंगे। इसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पार्टी के सभी सांसद, विधायक, एमएलसी और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। राबड़ी आवास में शाम 7 बजे से होने वाली बैठक में आगामी राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार चयन पर मंथन किया जाएगा। इससे पहले शनिवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज रही। हालांकि, पार्टी के तमाम वरीय नेताओं ने इससे साफ इनकार किया। कोई भी नेता इस दावे की पुष्टि नहीं कर सके। चर्चाओं में कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव संसद जा सकते हैं। उनकी विधानसभा सीट राघोपुर से परिवार के किसी अन्य सदस्य को उपचुनाव में लड़ाया जा सकता है। हालांकि, रविवार को आरजेडी की बैठक के बाद ही इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बिहार की 5 राज्यसभा सीटें हो रहीं खाली बिहार की पांच राज्यसभा सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिन पर चुनाव की घोषणा हो चुकी है। जो सीटें खाली हो रही हैं उन पर वर्तमान में एनडीए के 3 और आरजेडी के दो सांसद हैं। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के अनुसार एनडीए की चार सीटों पर जीत पक्की मानी जा रही है। हालांकि, पांचवीं सीट पर जीत के लिए ना तो एनडीए के पास पर्याप्त विधायक हैं और ना ही विपक्षी दलों के महागठबंदन के पास नंबर हैं। अगर आरजेडी या विपक्ष की ओर से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारा जाता है तो क्रॉस वोटिंग हो सकती है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले ही राज्यसभा में विपक्ष से प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर चुके हैं। अब लालू यादव ने उम्मीदवार चयन के लिए पार्टी की बैठक भी बुला दी है। इससे साफ है कि महागठबंधन एनडीए के खिलाफ प्रत्याशी उतारने के पूरे मूड में है। तेजस्वी को चाहिए ओवैसी और मायावती का साथ बिहार विधानसभा में अभी आरजेडी के 25 समेत महागठबंधन के कुल 35 विधायक ही हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसी स्थिति में लालू-तेजस्वी को अपने उम्मीदवार को जीताने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के 5 और मायावती की बसपा के एक विधायक का समर्थन चाहिए। हालांकि, ओवैसी की पार्टी ने खुद अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर आरजेडी से समर्थन मांगा था। शुक्रवार को पटना में तेजस्वी यादव और AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान की सीक्रेट मीटिंग होने की भी बात सामने आई। इसमें दोनों दलों के बीच फिलहाल कोई समझौता नहीं हो पाया है। राज्यसभा चुनाव के लिए 5 मार्च तक नामांकन बिहार की 5 समेत देश भर की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। नामांकन का आखिरी दिन 5 मार्च है। 9 मार्च तक नामांकन वापसी हो सकती है। अगर 5 से ज्यादा उम्मीदवार हुए तो 16 मार्च को मतदान होगा। उसी दिन रिजल्ट भी जारी कर दिया जाएगा। सत्ताधारी गठबंधन की ओर से भी अभी तक किसी भी उम्मीदवार का नाम फाइनल नहीं हुआ है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर लालू ने बुलाई बड़ी बैठक, क्या तेजस्वी यादव छोड़ेंगे विधायकी?

पटना बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज हो गई है। सियासी गलियारों में अटकलें चल रही हैं कि तेजस्वी खुद विपक्ष के राज्यसभा उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि, इस बारे में पार्टी की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। दूसरी ओर, राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने के लिए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने रविवार को अहम बैठक बुलाई है। आरजेडी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड और राज्य संसदीय बोर्ड की यह बैठक रविवार को पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर होगी। इस बैठक की अध्यक्षता लालू यादव करेंगे। इसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पार्टी के सभी सांसद, विधायक, एमएलसी और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। राबड़ी आवास में शाम 7 बजे से होने वाली बैठक में आगामी राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार चयन पर मंथन किया जाएगा। इससे पहले शनिवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज रही। हालांकि, पार्टी के तमाम वरीय नेताओं ने इससे साफ इनकार किया। कोई भी नेता इस दावे की पुष्टि नहीं कर सके। चर्चाओं में कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव संसद जा सकते हैं। उनकी विधानसभा सीट राघोपुर से परिवार के किसी अन्य सदस्य को उपचुनाव में लड़ाया जा सकता है। हालांकि, रविवार को आरजेडी की बैठक के बाद ही इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बिहार की 5 राज्यसभा सीटें हो रहीं खाली बिहार की पांच राज्यसभा सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिन पर चुनाव की घोषणा हो चुकी है। जो सीटें खाली हो रही हैं उन पर वर्तमान में एनडीए के 3 और आरजेडी के दो सांसद हैं। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के अनुसार एनडीए की चार सीटों पर जीत पक्की मानी जा रही है। हालांकि, पांचवीं सीट पर जीत के लिए ना तो एनडीए के पास पर्याप्त विधायक हैं और ना ही विपक्षी दलों के महागठबंदन के पास नंबर हैं। अगर आरजेडी या विपक्ष की ओर से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारा जाता है तो क्रॉस वोटिंग हो सकती है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले ही राज्यसभा में विपक्ष से प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर चुके हैं। अब लालू यादव ने उम्मीदवार चयन के लिए पार्टी की बैठक भी बुला दी है। इससे साफ है कि महागठबंधन एनडीए के खिलाफ प्रत्याशी उतारने के पूरे मूड में है। तेजस्वी को चाहिए ओवैसी और मायावती का साथ बिहार विधानसभा में अभी आरजेडी के 25 समेत महागठबंधन के कुल 35 विधायक ही हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसी स्थिति में लालू-तेजस्वी को अपने उम्मीदवार को जीताने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के 5 और मायावती की बसपा के एक विधायक का समर्थन चाहिए। हालांकि, ओवैसी की पार्टी ने खुद अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर आरजेडी से समर्थन मांगा था। शुक्रवार को पटना में तेजस्वी यादव और AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान की सीक्रेट मीटिंग होने की भी बात सामने आई। इसमें दोनों दलों के बीच फिलहाल कोई समझौता नहीं हो पाया है।

तेजस्वी यादव का बड़ा बयान—संविधान बचाने के लिए सजग रहना जरूरी, सत्ता पर साधा निशाना

पटना राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे हुए लोग आज बाबा साहेब के संविधान को खत्म करने की साजिश में लगे हुए हैं। उन्होंने लोगों से इसके खिलाफ सजग रहने का आह्वान किया। रविदास चेतना मंच के तत्वावधान में आयोजित संत शिरोमणि गुरु रविदास के राज्य स्तरीय 649वें जयंती समारोह को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद ने हमेशा अपने पुरखों को सम्मान दिया। लालू यादव ने पुरखों के विचारों के आधार पर समाज को आगे बढ़ाने का कार्य किया, जबकि आज भाजपा के लोग समाज में नफरत बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर देश को कमजोर करने वाले कार्यों में लगे होने का आरोप लगाया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तारपूर्वक अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार ने 16 प्रतिशत आरक्षण से शोषितों, वंचितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को वंचित रखा है। हम लोगों ने जातीय आधारित गणना कराकर 65 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर सभी के साथ न्याय किया, लेकिन महागठबंधन सरकार के बदलते ही डबल इंजन सरकार ने आरक्षण को फंसाने का कार्य किया।" उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, रविदास और कबीर के विचारों को स्कूलों के सिलेबस में शामिल करवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा तथा इसके लिए सदन के अंदर और बाहर आवाज बुलंद की जाएगी। राजद नेता ने आगे कहा कि बिहार में गरीबों, शोषितों, ठेला वालों और सब्जी वालों के घरों और दुकानों को उजाड़ा जा रहा है। बिहार में शराबबंदी अभियान को विफल बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर से माफियाओं को संरक्षित किया जा रहा है।

बिहार में बयानबाज़ी तेज: मैथिली ठाकुर के कथन पर तेजस्वी बोले— विधायक बनते ही…

पटना आरजेडी  के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में उनकी पार्टी के शासन के बारे में गायक से नेता बनी मैथिली ठाकुर की टिप्पणी पर आलोचना की। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने पहली बार BJP विधायक बनीं मैथिली ठाकुर का नाम तो नहीं लिया, लेकिन अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें टिप्पणियों की आलोचना की गई। दरअसल, गुरुवार को विधानसभा में बोलते हुए, ठाकुर ने RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद के अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव के प्रति लगाव की तुलना हस्तिनापुर के अंधे राजा धृतराष्ट्र के राजकुमार दुर्योधन के प्रति लगाव से की। हालांकि अलीनगर MLA ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उन्होंने "2005 से पहले के बिहार" का ज़िक्र करके इस बात के काफी इशारे दिए थे कि वह क्या कहना चाह रही थीं, जिस साल RJD सत्ता से बाहर हो गई थी। कुछ लोग विधायक बनते ही… नफरत भरे लहजे में, तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को अपनी पोस्ट में लिखा, "कुछ लोग सोचते हैं कि विधायक बनते ही उन्हें पॉलिटिक्स की पूरी जानकारी हो जाती है। लेजिस्लेचर का क, ख, ग भी समझे बिना, उनमें 'जननायक' (लोगों का हीरो, एक ऐसा नाम जो RJD कार्यकर्ता अपने सुप्रीमो के लिए इस्तेमाल करते हैं) के बारे में ताने मारने की हिम्मत होती है।" RJD नेता ने कुछ हफ़्ते पहले दरभंगा जिले में एक दलित लड़की के रेप और मर्डर पर चुप रहने के लिए ठाकुर की भी आलोचना की, जहां उनका अपना चुनाव क्षेत्र आता है। RJD नेता ने मजाक में उन्हें यह भी याद दिलाया कि, हालांकि वह RJD राज के दौरान "जंगल राज" की बात करती थीं, लेकिन उनकी मां ने कुछ दिन पहले उनके अपने जिले मधुबनी में कीमती सामान चोरी होने की शिकायत की थी, जबकि राज्य में उनकी अपनी पार्टी सत्ता में है।  

तेजस्वी यादव का बड़ा बयान: नीतीश कुमार पर साधा निशाना, कहा- बिहार को मिला ‘कठपुतली’ मुख्यमंत्री

पटना राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'अचेत' और 'कठपुतली' सीएम बताते हुए कहा कि यह बिहार का दुर्भाग्य है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज प्रदेश को मुख्यमंत्री नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा भ्रष्ट अधिकारी चला रहे हैं। तेजस्वी यादव ने मंगलवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी कर्पूरी ठाकुर के अनुयायी हैं। हम सभी का फर्ज बनता है कि उनके सपनों को पूरा करें, लेकिन आज देश की स्थिति बदली हुई है। आज लोकतंत्र और संविधान को मिटाया जा रहा है, संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त किया जा रहा है, और तानाशाही चरम पर है। ऐसे में हमारी लड़ाई का रास्ता इतना सरल नहीं है। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार में विकास के नाम पर केवल जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले 100 दिनों के शासन में बिहार में कितने नए कारखाने खुले और कितने युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर भी कहा कि क्या महिलाओं को 1.90 लाख रुपए मिल गए? उन्होंने राजद के कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि राजद कमजोर नहीं है, समय कमजोर है। तेजस्वी ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में पुलिस और प्रशासन द्वारा राजद कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि जब हम लोगों का समय आएगा तो ऐसे लोगों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और राजद का वोट शेयर 23-24 प्रतिशत से बढ़कर अब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि होली के बाद बिहार के सभी जिलों में कार्यक्रम होगा और संगठन को विस्तार और मजबूत करने का कार्य किया जाएगा। यह कार्यक्रम अन्य राज्यों में भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजद को राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिए अन्य प्रदेशों में भी हमें मजबूत बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे झुकने वाले नहीं हैं और हर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

लालू की छाया में तेजस्वी की ताजपोशी! मंगनी लाल मंडल ने किया RJD के नए कार्यकारी अध्यक्ष का ऐलान

पटना तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया है। पटना में राजद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आज अहम बैठक हुई। इस बैठक में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता मौजूद थे। बैठक के दौरान राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने इसक ऐलान किया। पटना के एक होटल में राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसका प्रस्ताव भोला यादव ने रखा। लालू प्रसाद के निर्देश पर रखे गये गये इस प्रस्ताव पर कार्यकारिणी के सदस्यों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। लालू प्रसाद के अस्वस्थता को देखते हुए पार्टी ने पहली बार कार्यवाहक अध्यक्ष चुना है। तेजस्वी को अध्यक्ष की सभी शक्तियाँ दी गई है।   एक राजद नेता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बैठक में मौजूद लगभग सभी नेताओं की मांग थी कि तेजस्वी यादव को अब जिम्मेदारी सौंपी जाए। पार्टी नेताओं का कहना था कि तेजस्वी यादव ही अब बिहार तथा राजद के भविष्य हैं। इसके बाद तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से पार्टी का नया कार्यकारी बॉस चुना गया। लालू प्रसाद यादव ने इसका सर्टिफिकेट तेजस्वी यादव को सौंपा है। राजद ने पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट पर ट्वीट कर तेजस्वी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने की सूचना साझा करते हुए राजद में एक नये युग के शुरू होने की बात कही है। पिछले वर्ष बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का निर्णय लिया था। जिसमें “नेतृत्व संबंधी महत्वपूर्ण फैसले” लिए जाने की संभावना जताई गई थी। जिसके बाद अब तेजस्वी यादव को पार्टी का नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया है। बता दें कि वर्ष 1997 में जनता दल से अलग होकर राजद की स्थापना करने वाले लालू प्रसाद पार्टी की स्थापना के बाद से ही शीर्ष पद पर बने हुए हैं। हालांकि उनकी सर्वोच्चता निर्विवाद है, लेकिन पार्टी सूत्रों का मानना था कि 80 वर्ष से अधिक आयु और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए संगठन के रोजमर्रा के कामकाज के लिए नेतृत्व की दूसरी पंक्ति की जरूरत है। राजद की इस अहम बैठक में शामिल होने के लिए 20 से अधिक प्रदेशों के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य शनिवार को ही पटना पहुंच चुके थे। राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा था कि 25 जनवरी को होने वाली इस बैठक में देश की वर्तमान स्थिति के साथ ही आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। JDU का तंज तेजस्वी यादव के राजद के कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर जदयू प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कटाक्ष किया है। नीरज कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि राजद एक परिवार की पार्टी है और परिवार के ही सदस्य को फिर कमान मिला है। तेजस्वी यादव पर 22 मुकदमे चल रहे हैं, ऐसे में उनको पार्टी का अध्यक्ष बनाना दुर्भाग्य की बात है।  

क्या तेजस्वी बनेंगे RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष? लालू यादव की बीमारी के बीच सियासी हलचल तेज

पटना राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) की कमान पूरी तरह से तेजस्वी यादव के हाथों में आने के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनित किया जाएगा। लालू प्रसाद यादव अभी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जानकारी मिल रही है कि 25 जनवरी को इसका ऐलान कर दिया जाएगा। विदेश यात्रा से लौटने के बाद तेजस्वी यादव ऐक्शन में हैं। आगामी रणनीति और विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा की जा रही है। पटना में तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास पर कोर केमेटी और लोकसभा, राज्यसभा सदस्यों के साथ बैठक की। तेजस्वी को राजद में लालू यादव के बाद नंबर टू का दर्जा पहले से प्राप्त है। पार्टी में नीति निर्धारण हो या कोई बड़ा फैसला, यह काम तेजस्वी यादव ही करते हैं। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही लालू प्रसाद यादव ने यह पावर तेजस्वी को सौंप दिया था। विधानसभा चुनाव में टिकट काटने से लेकर बांटने तक का काम उन्होंने ही किया। कार्यकारी अध्यक्ष का पद मिल जाने के बाद उनकी ताकत और बढ़ जाएगी। 25 जनवरी को पार्टी कार्यसमिति की बैठक पटना में बुलाई गई है। इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी बैठक में तेजस्वी यादव की नई जिम्मेदारी की घोषणा हो सकती है। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वे अक्सर बीमार रहते हैं। इसे देखते हुए तेजस्वी के हाथों में पार्टी की कमान सौंपे जाने की चर्चा हो रही है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा है कि यह लालू प्रसाद की मजबूरी है। वंशवादी परंपरा के तहत वे अपनी कुर्सी परिवार से बाहर के किसी पार्टी नेता को नहीं दे सकते। जदयू प्रवक्ता मनीष कुमार ने कहा है कि तेजस्वी यादव चाहे कुछ भी बन जाएं पर वे बिहार की जनता से दूर हो चुके हैं। वे बिहार वासियों के प्रति उदासीन रहते हैं।