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पंजाब और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मलेरकोटला में दो आतंकियों को दबोचा, शेरवानी कोटे गांव में मजदूरी करते थे

मलेरकोटला  जम्मू कश्मीर पुलिस ने शनिवार को पंजाब के मलेरकोटला में चलाए गए ऑपरेशन में 2 पाकिस्तानी आतंकियों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया. पंजाब पुलिस के साथ मिलकर चलाए गए इस ऑपरेशन में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकियों के नाम अबू हुरैरा और उस्मान हैं. जबकि, उनके साथ पकड़ा गया जमील एक स्थानीय निवासी है. जिसने दोनों पाकिस्तानी दहशतगर्दों को किराये का मकान दिलवाने में मदद की थी।  मलेरकोटला से पकड़ा गया पाकिस्तानी आतंकी  इनमें अबू हुरैरा ए प्लस कैटेगरी का खतरनाक पाकिस्तानी आतंकी है. इसकी गिरफ्तारी को खुफिया एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं, जिनसे भारत में पाकिस्तान की आतंकी साजिशों के बारे में जानकारी मिल सकती है।  सूत्रों के मुताबिक, श्रीनगर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को मलेरकोटला में पाकिस्तानी आतंकियों के छिपे होने की गुप्त सूचना मिली थी. इसके बाद SOG ने पंजाब पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (CIA) यूनिट के साथ मिलकर मलेरकोटला के शेरवानी कोट गांव में छापा मारा. रेड के दौरान तीनों दहशतगर्दों ने भागने की कोशिश की लेकिन उन्हें दबोच लिया गया।  15 साल से रह रहे थे दोनों पाकिस्तानी बताया जा रहा है कि दोनों मलेरकोटला में पिछले 15 वर्ष से रह रहे थे। दोनों पाकिस्तानी है। गांव शरेवानी कोट के सरपंच सिमरनजीत सिंह ने दोनों को शनिवार को पुलिस के सीआइए स्टाफ की टीम ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ घर में दबिश देकर दोनों को पकड़ा। सिमरनजीत ने बताया कि दोनों करीब पांच साल से उनके गांव में ही रहकर मजदूरी करते थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि दोनों करीब 15 वर्ष से जिले के अलग-अलग गांवों में रह रहे थे। दोनों खुद को जम्मू-कश्मीर के रहने वाले बताते थे और वे स्थानीय लोगों से घुलमिल चुके थे। दोनों पाकिस्तानी हैं, किसी को कभी उन पर संदेह नहीं हुआ। 11 मई 2025 को मां-बेटी को भी पकड़ा था जासूसी करते मलेरकोटला से पाकिस्तानी आतंकी पकड़े जाने की यह पहली घटना है। हालांकि इससे पहले 11 मई 2025 में पुलिस ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में बाप-बेटी को गिरफ्तार किया था। 31 वर्षीय गुजाला अपने पिता यामीन मोहम्मद के साथ सेना व अन्य बड़े प्रतिष्ठानों की जानकारी पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी अब्दुल्ला तक पहुंचाने का काम करते थे। इसके बदले में उन्हें पैसे दिए जाते थे। पुलिस ने दोनों को डिजिटल सुबूत के साथ गिरफ्तार किया था। वहीं, पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात अधिकारी को देश से निष्कासित कर दिया गया था। श्रीनगर पुलिस ने गुप्त सूचना पर चलाया ऑपरेशन उनकी गिरफ्तारी के बाद तीनों आतंकियों को ट्रांजिट रिमांड पर श्रीनगर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया. जिसके बाद SOG के जवान दोनों आतंकी और उसके मददगार को अपनी कस्टडी में लेकर कश्मीर की ओर रवाना हो गए.  पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपी पिछले 15 वर्षों से भारत के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे थे और भारतीय नागरिक बनकर बिना शक पैदा किए अपनी पहचान छिपाए हुए थे।  कट्टरपंथी गतिविधियों का गढ़ बन रहा मलेरकोटला इससे पहले भी मालेरकोटला पुलिस ने कट्टरपंथी गतिविधियों के आरोप में फरहान अंजुम, अदनान खान और वारिस अली को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से .32 बोर पिस्टल, कारतूस और मोबाइल फोन बरामद हुए थे. वहीं, एक अन्य मामले में गुजाला और यामीन मोहम्मद को पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 

होली के दौरान हमले की साजिश, भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी; लश्कर आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी जांच

नई दिल्ली दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई। जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और होली के मौके पर हमले की तैयारी थी। खुफिया इनपुट के बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज की और मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया। हाफिज सईद और लखवी से सीधा संपर्क जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और आतंकी सरगना जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था।पुलिस का कहना है कि आईएसआई भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए लोकल मॉड्यूल खड़ा कर रही थी। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही थी, ताकि बड़े शहरों में समन्वित हमले किए जा सकें। शब्बीर इस नेटवर्क में आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के आतंकी सैदुल इस्लाम के बीच कड़ी का काम कर रहा था। सैदुल संदिग्धों को निर्देश देता था और उन्हें टारगेट तय करने में मदद करता था। 2007 में पकड़ा गया, 2018 में फिर सक्रिय स्पेशल सेल के अनुसार शब्बीर अहमद लोन 2007 में आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा लश्कर से जुड़ गया। उसने अपना बेस बांग्लादेश में बनाया, जबकि कनेक्शन पाकिस्तान से बनाए रखे। अधिकारियों का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद उसने पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय किया और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जोड़ना शुरू किया। जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल ट्रेल से कई अहम सुराग मिले हैं। सोशल मीडिया से जोड़ा गया मॉड्यूल पुलिस के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों को पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में लाया गया। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई। कोलकाता से पकड़े गए उमर फारूक को संवेदनशील स्थानों की रेकी का जिम्मा दिया गया था। संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने और सुरक्षित ठिकाने बनाने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में हथियार जुटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और चैट सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है। ऑपरेशन जारी, कई राज्यों में छापे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी जारी है। कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका में कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि समय रहते साजिश नाकाम कर दी गई, लेकिन नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचना अभी बाकी है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देश के बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल लंबी योजना का हिस्सा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो होली के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था। विवादित पोस्टर से खुला मॉड्यूल का राज स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आठ संदिग्धों में से चार दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए थे। जांच यहीं से आगे बढ़ी और नेटवर्क का सिरा हाथ लगा। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टरबाजी महज ट्रायल रन थी, असली मकसद बड़े हमले की तैयारी था। खुफिया एजेंसियों ने पहले अलर्ट जारी किया था कि आईएसआई समर्थित लश्कर लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है। एक अन्य इनपुट में लाल किले के आसपास हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।

कटरा में बढ़ी सुरक्षा: मां वैष्णो देवी भवन पर मंडराया आतंकी साया, सेना तैनात

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकी घटनाक्रमों के बाद अब जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी मां वैष्णो देवी के पावन भवन और आधार शिविर कटरा को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इस गंभीर सूचना के बाद माता के दरबार और पूरे कटरा शहर को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। आतंकी अलर्ट के बाद कटरा से लेकर भवन तक सुरक्षा व्यवस्था को मल्टी-लेयर कर दिया गया है। आधार शिविर कटरा और यात्रा मार्ग पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए यात्रा मार्ग पर विशेष QRT टीमों को तैनात किया गया है जो आधुनिक हथियारों से लैस हैं।जमीन के साथ-साथ आसमान से भी निगरानी रखी जा रही है। चप्पे-चप्पे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए कड़े नियम सुरक्षा को देखते हुए यात्रियों के लिए भी जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त कर दिया गया है। RFID कार्ड और वेरिफिकेशन: बिना वैध  RFID कार्ड के किसी भी यात्री को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सघन चेकिंग: कटरा के प्रवेश द्वारों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर हर वाहन और यात्री की सघन तलाशी ली जा रही है। पहचान पत्र अनिवार्य: प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे हर समय अपना मूल पहचान पत्र साथ रखें और सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग करें। यात्रा पर कोई रोक नहीं, पर सतर्कता जरूरी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि माता वैष्णो देवी की यात्रा सुचारू रूप से चल रही है और इसे रोका नहीं गया है। हालांकि, श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति के दिखने पर तुरंत पुलिस या श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों को सूचित करें।  

सड़क किनारे रखा था धमाके का सामान, जम्मू‑कश्मीर में बड़ी आतंकी साजिश हुई नाकाम, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

श्रीनगर  देशभर में पूजा स्थलों और ऐतिहासिक इमारतों पर आतंकी हमले की साजिश के अलर्ट के बीच कश्मीर में एक बड़ा हादसा टल गया है। जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में सड़क के किनारे ही इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोजिव डिवाइस (IED) पाया गया है। कोहेस्तान कॉलोनी के पास ही गुलाब शेख मोहल्ले में इसे सड़क के किनारे एक बैग में रखा गया था। हालांकि एजेंसियों को इसकी जानकारी मिल गई और बम निरोधक दस्ते ने पहुंचकर इसे निष्क्रिय कर दिया। एक दिन पहले ही बारामुला जिले के जांबाजपोरा इलाके में आईडी पाया गया था। सेना ने आईईडी मिलने के बाद बड़ी सावधानी से इसे निष्क्रिय कर दिया। सेना का कहना है कि यह आतंकियों की साजिश है। बता दें कि घाटी में सुरक्षाबलों की सतर्कता और एजेंसियों के अलर्ट रहने की वजह से कई हादसे टाले गए हैं। दिल्ली में आतंकी साया दिल्ली में आतंकी खतरे की आशंका संबंधी खुफिया जानकारी मिलने के बाद शनिवार को लाल किले के आसपास के इलाके और चांदनी चौक के कुछ हिस्से सहित राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया था कि पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटीटी) ने कथित तौर पर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों को हमले वाले स्थानों की सूची में रखा है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के पास संभावित विस्फोट के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है, जो प्रमुख पर्यटन स्थल और उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है। मंदिर को भी निशाना बनाया जा सकता है सूत्रों ने बताया कि ऐसी खुफिया सूचना है कि चांदनी चौक स्थित एक मंदिर को भी निशाना बनाया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि खुफिया जानकारी का सत्यापन और उनका आकलन किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर संवेदनशील धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया है कि लश्कर-ए-तैयबा इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) आधारित हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, हमले की यह कथित साजिश आतंकी समूह द्वारा छह फरवरी को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक मस्जिद में हुए विस्फोट का बदला लेने के प्रयासों से जुड़ी है। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियां ​​और दिल्ली पुलिस की इकाइयां आपस में करीबी समन्वय बनाए हुए हैं और सीसीटीवी निगरानी, ​​वाहनों की जांच व संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती के माध्यम से निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि बम निरोधक दस्ते, खोजी दस्ते और त्वरित प्रतिक्रिया दल भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात किए गए हैं। यह चेतावनी 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के पास हुए घातक कार विस्फोट की पृष्ठभूमि में जारी की गई है। विस्फोट में कम से कम 13 लोग मारे गए थे और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि के बारे में तुरंत पुलिस या आपातकालीन सेवाओं को सूचित करने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है और ये उपाय एहतियात के तौर पर किए गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि आगे की जानकारी जुटाने और प्राप्त सूचनाओं की पुष्टि की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ में अलर्ट: दरवाज़ा खटखटाकर आतंकियों ने मांगा खाना, पुलिस को कॉल के बाद बड़ा अभियान शुरू

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ और आसपास के इलाके में एक बार फिर से आतंकी हलचल के संकेत मिले हैं. इसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात बसंतगढ़ के ऊपरी इलाके में स्थित चिंगला बलोठा गांव में तीन संदिग्ध आतंकियों ने एक बकरवाल परिवार के घर का दरवाजा खटखटाया और खाना मांगा. इससे घर का मालिक घबराकर भाग गया और इस बारे में पुलिस को जानकारी दी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, घर का मालिक अचानक तीन अजनबी युवकों को देखकर घबरा गया और मौके का फायदा उठाकर भाग निकला. उसने तुरंत पास के पुलिस चौकी और सेना को सूचना दी. इलाके में आतंकियों के होने का इनपुट मिलने के बाद रात से ही सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), CRPF और पुलिस की संयुक्त टीमों ने चिंगला बलोठा समेत ऊपरी बसंतगढ़ के घने जंगलों, गुफाओं और चोटियों को घेर लिया है. ड्रोन और हेलीकॉप्टर से भी निगरानी की जा रही है. गुरुवार सुबह तक ये सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है. बता दें कि बसंतगढ़ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा (LoC) से महज कुछ किलोमीटर दूर है और पिछले कई सालों से आतंकियों के लिए डोडा-किश्तवाड़ के घने जंगलों तक पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता रहा है. हाल के महीनों में भी इसी इलाके में कई मुठभेड़ें हो चुकी हैं और कई आतंकी मारे जा चुके हैं.  

रायपुर ATS की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ में ISIS नेटवर्क पर शिकंजा, FIR दर्ज

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक बड़ा आतंकी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश को एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने समय रहते विफल कर दिया है। रायपुर एटीएस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान स्थित इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) मॉड्यूल इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय किशोरों को अपने नेटवर्क में जोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस मामले में एटीएस ने सोमवार देर रात गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत पहली एफआईआर दर्ज की है। इसकी स्थापना के बाद से पहली बड़ी कार्रवाई है। सूत्रों के अनुसार, एटीएस ने दो नाबालिग लड़कों की पहचान की है, जिनकी उम्र 16 और 17 वर्ष बताई जा रही है। इनमें से एक रायपुर का रहने वाला है और दूसरा भिलाई का। खुफिया एजेंसियां इन दोनों पर पिछले डेढ़ साल से नजर रख रही थीं। जांच के दौरान इनके मोबाइल फोनों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले कई संदेश और वीडियो सामग्री मिली है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि विदेशी हैंडलर्स इन युवाओं को आतंकी विचारधारा की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए गुमराह कर रहा था ISIS मॉड्यूल जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट्स का इस्तेमाल कर भारतीय नाबालिगों से संपर्क साध रहे थे। एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, ये हैंडलर्स पहले किशोरों से दोस्ती करते, फिर धीरे-धीरे उन्हें कट्टरपंथी सामग्री भेजकर उनकी मानसिकता को प्रभावित करते थे। ग्रुप चैट्स के जरिए उन्हें जिहादी वीडियो, कथित धार्मिक संदेश और ISIS से जुड़ी गलत सूचनाएं भेजी जाती थीं। हैंडलर्स का उद्देश्य नाबालिगों को इस कदर ब्रेनवॉश करना था कि वे स्थानीय स्तर पर ISIS की जड़ें फैलाने में मदद कर सकें। इसके तहत उन्हें "अंदरूनी सूचनाएं जुटाने", "स्थानीय समर्थन आधार बनाने" और "छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल खड़ा करने" के लिए प्रेरित किया जा रहा था। एजेंसियों को मिला संदिग्ध डिजिटल सबूत एटीएस और खुफिया एजेंसियों की जांच में यह भी पाया गया कि दोनों नाबालिगों के मोबाइल में ऐसे कई चैट, नोट्स और वीडियो मौजूद हैं जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। एजेंसियों को संदेह है कि इन युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से "लोन वुल्फ" हमलों और स्थानीय स्तर पर अस्थिरता पैदा करने के तरीकों पर भी प्रभावित किया जा रहा था। एटीएस अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान स्थित ISIS नेटवर्क का यह मॉड्यूल भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए किशोरों और युवाओं को सबसे आसान निशाना मानकर उन पर फोकस कर रहा था। स्थापना के बाद ATS की पहली FIR छत्तीसगढ़ एटीएस की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी। हालांकि विशेष मामलों में आमतौर पर स्थानीय पुलिस स्टेशन के माध्यम से UAPA लागू किया जाता था, लेकिन इस बार एटीएस ने स्वयं UAPA की पहली FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई आतंकवाद-रोधी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  एटीएस अधिकारियों के अनुसार, राज्य में ऐसे अन्य संभावित संपर्कों की तलाश की जा रही है जो विदेशी आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की जांच और सख्ती बढ़ाई जाएगी। राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती छत्तीसगढ़ में आतंकवादी संगठनों की ऑनलाइन घुसपैठ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाने की यह नई रणनीति युवा वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रही है, जिसे रोकने के लिए एटीएस और साइबर सेल मिलकर रणनीतिक कदम उठा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की एजेंसियां अधिक सतर्क हो गई हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठनों की घुसपैठ रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल की यह साजिश बेनकाब होना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

देश में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम: जैश मॉड्यूल से 2,900 किलो विस्फोटक जब्त, 7 आरोपी दबोचे गए

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसर गजवात-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आतंक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो डॉक्टर भी शामिल हैं.  2,900 किलोग्राम विस्फोटक अब तक बरामद न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और करीब 2,900 किलोग्राम आईईडी बनाने का सामग्री बरामद किया है. जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में यह ऑपरेशन अंजाम दिया गया.  पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में फरीदाबाद के डॉक्टर मुअज़मिल अहमद गनई और कुलगाम निवासी डॉक्टर आदिल शामिल है. जांच में सामने आया है कि ये लोग विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और सोशल और एजुकेशनल नेटवर्क्स के जरिए फंड जुटा रहे थे. असॉल्ट राइफल, 2900KG विस्फोटक… फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉक्टर्स के ठिकानों से क्या-क्या मिला पुलिस को मुजम्मिल की निशानदेही पर एक स्विफ्ट कार मिली, जिसमें से क्रिंकोव असॉल्ट राइफल, तीन मैगजीन और 83 राउंड बरामद हुए. इसके अलावा एक पिस्टल, 8 राउंड, दो मैगजीन और दो खाली खोखे भी मिले. ये सभी हथियार उसी स्विफ्ट कार से बरामद किए गए जो अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने वाली एक महिला डॉक्टर की बताई जा रही है. पुलिस फिलहाल उससे पूछताछ कर रही है. सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने मुजम्मिल के बताए एक ठिकाने धौज इलाके में छापा मारा. वहां से लगभग 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट मिला, जिसे आठ बड़े और चार छोटे सूटकेस में छुपाकर रखा गया था. पुलिस सूत्रों के अनुसार यह विस्फोटक करीब 15 दिन पहले ही मुजम्मिल तक पहुंचा था. इस सामग्री को आतंकी कोड वर्ड में ‘सफेद पाउडर’ कहा जाता है. धौज वाले कमरे से पुलिस ने 20 टाइमर और 20 बैटरी भी बरामद की हैं. पुलिस का कहना है कि मुजम्मिल ने इस कमरे को सिर्फ विस्फोटक छिपाने के लिए किराए पर लिया था. डॉक्टर मुजामिल को पुलिस ने दबोचा फतेहपुर तगा गांव में पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली. सुबह से चल रही छापेमारी में एक घर से 2563 किलो संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद की है.  पुलिस के अनुसार, यह घर डॉक्टर मुजामिल ने एक मौलाना से किराए पर लिया था. मौलाना को पुलिस ने सुबह ही हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है. बताया जा रहा है कि फतेहपुर तगा गांव धौज से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. 'व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क' पुलिस ने बताया कि यह 'व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क' था जिसमें कुछ प्रोफेशनल्स और छात्र आतंकियों से जुड़े हुए थे. वो एन्क्रिप्टेड चैनलों के माध्यम से विचारधारा फैलाने, फंड मूवमेंट और हथियारों की सप्लाई का समन्वय कर रहे थे. 19 अक्तूबर को श्रीनगर के बुनपोरा नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर मिलने के बाद मामला दर्ज हुआ था. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह नेटवर्क न केवल घाटी बल्कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है. पकड़े गए सात संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार सात लोगों की पहचान आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद (सभी श्रीनगर), मौलवी इरफान अहमद (शोपियां), जमीर अहमद अहांगर (गंदरबल), डॉ. मुअज़मिल अहमद गनई (पुलवामा), और डॉक्टर आदिल (कुलगाम) के रूप में हुई है. फरीदाबाद से डॉक्टर की गिरफ्तारी डॉक्टर मुअज़मिल को फरीदाबाद में उसके किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया, जहां से पुलिस को 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, एके-56 रायफल, AK Krinkov, बरेटा पिस्टल, चीनी स्टार पिस्टल और सैकड़ों कारतूस मिले हैं. पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क सोशल वेलफेयर के नाम पर धन जुटाकर आतंकी गतिविधियों में खर्च करता था. रविवार को भी मिला था विस्फोटक गौरतलब है कि इससे पहले, फतेहपुर तगा गांव में रविवार को पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया था जिसमें एक कश्मीरी डॉक्टर मुजामिल के किराये के कमरे से 360 किलो अमोनिटम नाइट्रेट मिला था. यह कमरा मौलाना को आरोपी को किराये पर दिया था. फरीदाबाद में 360 किलो संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट बरामद होने पर हरियाणा DGP ओ.P. सिंह ने कहा, “…मैं इस ऑपरेशन में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को बधाई देता हूँ, और हमें विश्वास है कि हमने समय रहते एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने में सफलता पाई है. विभिन्न एजेंसियाँ इस पर काम कर रही हैं। जैसे-जैसे जानकारी सामने आएगी, संबंधित एजेंसियाँ उसे साझा करेंगी. जांच जारी है, इसलिए इस पर और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.” क्या है मामला गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने सबसे पहले श्रीनगर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाने के मामले में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया था.  पिछले 15 दिनों से ऑपरेशन में तीन दिनों में पुलिस ने ताबड़तोड़ छापे मारे और फिर हरियाणा के फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी छापेमारी की. इस मामले में अब तक कुल 7 लोग गिरफ्तार किए गए हैं. दो लोग हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार हुए हैं और यहां पर एक घर से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट. दो राइफल और कई पिस्तौल बरामद किए हैं. इसी तरह, सोमवार को एक अन्य घर में रेड से 2363 किलो विस्फोटक बरामद हुआ है. अब तक कुल सात लोग गिरफ्तार पुलिस ने इस मामले में हरियाणा, यूपी और जम्मू एंवं कश्मीर राज्यों से कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है. पूरे मामले में आरिफ निसार डार उर्फ साहिल – निवासी नवगाम, श्रीनगर, यासिर-उल-अशरफ – निवासी नवगाम, श्रीनगर, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद – निवासी नवगाम, श्रीनगर, मौलवी इरफान अहमद (मस्जिद के इमाम) – निवासी शोपियां, जमीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशा – निवासी वाकुरा, गांदरबल, डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई उर्फ मुसैब – निवासी कोईल, पुलवामा, डॉ. अदील निवासी वानपोरा, कुलगाम को अरेस्ट किया है. इनसे से जिसमें मुजम्मिल और आदिल की गिरफ्तारी फरीदाबाद से हुई है.

ATS का बड़ा एक्शन: हथियार सप्लाई करते तीन संदिग्ध गिरफ्तार, देश में हमले की साजिश का खुलासा

अहमदाबाद / नई दिल्ली गुजरात में आतंकी साजिश रचने के आरोप में तीन संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आतंक रोधी दस्ते (ATS) ने हथियार सप्लाई करते समय तीनों संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। देश में आतंकी हमले की साजिश रचने के आरोप में पकड़े गए इन लोगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। अहमदाबाद से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया, 'गुजरात एटीएस ने अहमदाबाद से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ये पिछले एक साल से गुजरात एटीएस के रडार पर थे। तीनों को हथियार सप्लाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। ये देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमले करने की योजना बना रहे थे।'

J&K के कुपवाड़ा में बड़ी सफलता! सेना ने घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर 2 आतंकियों को किया ढेर

कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ घुसपैठ की कोशिश को सेना ने नाकाम कर दिया। साथ ही, जवानों ने 2 अज्ञात आतंकवादियों को मारा गिराया है। सेना के श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने बताया कि खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिला था। इसके आधार पर कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश को रोकने के लिए अभियान शुरू किया गया। सेना ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'सतर्क सैनिकों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दी। इस दौरान आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। फिलहाल इलाके की तलाशी जारी है।' वहीं, श्रीनगर में पुलिस ने  तीन संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया। उनके पास से हथियार और गोला-बारूद जब्त कर आतंकी साजिश नाकाम कर दी गई। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि ममता चौक, कोनाखान डलगेट के पास नियमित वाहनों की जांच चल रही थी। इस दौरान पुलिस की टीम ने बिना पंजीकरण संख्या वाली काले रंग की मोटरसाइकिल को रोका। रुकने का इशारा करने पर मोटरसाइकिल सवार और पीछे बैठे दो लोगों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया। देसी कट्टा और 9 जिंदा कारतूस बरामद पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान शाह मुतैयब और कामरान हसन शाह के रूप में हुई है। ये दोनों कुलीपोरा खानयार श्रीनगर के निवासी हैं। मोहम्मद नदीम उत्तर प्रदेश के मेरठ का निवासी है और वर्तमान में कावा मोहल्ला, खानयार में रह रहा है। पुलिस ने बताया कि इनके पास से एक देसी कट्टा और 9 जिंदा कारतूस बरामद हुए। शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि आरोपी बरामद हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल करके इलाके में किसी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। खानयार पुलिस स्टेशन में यूएपीए और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

बब्बर खालसा आतंकी की इंदौर में गिरफ्तारी, रॉकेट लॉन्चर अटैक का था मास्टरमाइंड

इंदौर दिल्ली पुलिस ने इंदौर से खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य को पकड़ा है। उस पर पंजाब के एक थाने पर रॉकेट लॉन्चर से हमला करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, पंजाब से भागकर वह पहले गुजरात पहुंचा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी अमित कौशिक ने बताया- आतंकवादी का नाम आकाशदीप सिंह उर्फ बाज है। वह अमृतसर में चनाचेन का रहने वाला है। उसने अप्रैल 2025 में पंजाब के गुरदासपुर के बटाला में किला लाल सिंह थाने पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया था। हमले की जिम्मेदारी बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े हैप्पी पासिया, मनू आगवन और गोपी नवांशहरिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ली थी। पुलिस ने दावा किया था कि ये हमला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और पंजाब में ग्रेनेड हमलों के आरोपी को मारने का बदला लेने के लिए किया गया था। आकाश सिंह इंदौर के हीरानगर थाना इलाके की निर्माणाधीन बिल्डिंग में क्रेन ऑपरेटर का काम कर रहा था। बुधवार को दिल्ली पुलिस यहां पहुंची और उसे गिरफ्तार कर साथ ले गई। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक अन्य मामला भी दिल्ली में ही दर्ज है। विदेश में बैठे आतंकी हैंडलर से संपर्क में था दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आकाशदीप बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में था। जो उसे सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए निर्देश दे रहा था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को आकाशदीप के गुजरात में होने का सुराग मिला था। वहां पतासाजी करने पर उसके इंदौर में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद इंस्पेक्टर अशोक कुमार भड़ाना के नेतृत्व में एक टीम इंदौर पहुंची थी। आकाशदीप से पूछताछ में आतंकी नेटवर्क, उनके विदेशी संपर्क और फंडिंग के खुलासे की उम्मीद है। डीसीपी कौशिक ने कहा- यह गिरफ्तारी बब्बर खालसा के भारत में फैले नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता है। हम आरोपी से पूछताछ कर अन्य लिंक और मॉड्यूल की जांच कर रहे हैं।