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Tesla की Model Y भारत में लॉन्च, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे, कंपनी दे रही है डिस्काउंट

 नई दिल्ली  दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla ने बड़े ही जोर-शोर से भारत में एंट्री की थी. कंपनी ने बीते साल जो शुरुआती कारें भारत मंगाई थीं, उनमें से कई कारें अब तक ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाई है. हालात ऐसे हैं कि टेस्ला को अपनी ही मॉडल Y एसयूवी पर भारी छूट देनी पड़ रही है, ताकि स्टॉक में रखी हुई गाड़ियां बिक सकें. इंडिया में एंट्री के तकरीबन 6 महीनों के बाद भी टेस्ला की रफ्तार सुस्त ही है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला ने पिछले साल भारत में Model Y एसयूवी के तकरीबन 300 यूनिट को इंपोर्ट किया था. इनमें से लगभग एक तिहाई यानी करीब 100 गाड़ियां चार महीने बाद भी बिना खरीदार के खड़ी हैं. कई ऐसे ग्राहक जिन्होंने पहले बुकिंग कराई थी, उन्होंने बाद में कार खरीदारी का मन बदल लिया और बुकिंग कैंसिल करा दी. इसी वजह से कंपनी पर स्टॉक साफ करने का दबाव बढ़ गया है. Tesla पर 2 लाख का डिस्काउंट रिपोर्ट्स की माने तो कारों की बिक्री को रफ्तार देने के लिए टेस्ला कुछ वेरिएंट्स पर 2 लाख रुपये तक की छूट दे रही है. यह ऑफर खास तौर पर पिछले साल आई Model Y स्टैंडर्ड रेंज पर दिया जा रहा है. हालांकि, कंपनी ने इस डिस्काउंट ऑफर कोई बड़ा प्रचार-प्रसार नहीं किया है. बल्कि सीधे चुनिंदा ग्राहकों और टेस्ट ड्राइव लेने वालों को बताया जा रहा है. ताकि वो डिस्काउंट का लाभ उठाते हुए कार खरीद सकें. हालांकि कार पर डिस्काउंट के बारे में टेस्ला की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है.  ऊंची कीमत और टैक्स  भारत में टेस्ला की एंट्री जुलाई में हुई थी. कंपनी ने अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को भारतीय ग्राहकों के बीच लॉन्च किया. इस कार की शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई. शुरुआत मुंबई से हुई और आने वाले महीनों में कंपनी ने दिल्ली और गुरुग्राम में भी अपने शोरूम शुरू किए. इतना ही नहीं कंपनी ने देश भर के ग्राहकों के लिए कार की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू कर दी. टेस्ला को भरोसा था कि उसका ब्रांड नाम ग्राहकों को खींच लाएगा, लेकिन इंपोर्टेड कारों पर लगने वाला करीब 110 प्रतिशत तक का टैक्स कीमत को काफी बढ़ा देता है.  भारत में सुस्त शुरुआत ऐसे वक्त में हुई है, जब दुनियाभर में टेस्ला की हालत खस्ता है. बीते साल यानी 2025 में चीन की प्रमुख इलेक्ट्रिक कार कंपनी बिल्ड योर ड्रीम (BYD) ने बिक्री के मामले में टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है. अब बीवाईडी दुनिया की सबसे बेस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक कार कंपनी बन चुकी है. अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े बाजारों में भी टेस्ला की पकड़ कमजोर हुई है. भारत में कई ग्राहक टेस्ट ड्राइव के बाद दूसरे ऑप्शन की ओर मुड़ रहे हैं. कुछ को बीएमडब्ल्यू की iX1 ज्यादा किफायती लग रही है, तो कुछ को बीवाईडी की सीलायन 7 में ज्यादा फीचर्स नजर आ रहे हैं. इन दोनों की शुरुआती कीमत मॉडल Y से कम है, जिससे टेस्ला को सीधी टक्कर मिल रही है. बुकिंग ज्यादा, डिलीवरी कम रिपोर्ट्स के अनुसार, टेस्ला को भारत में मॉडल Y के लिए करीब 600 बुकिंग मिली थीं. लेकिन इनमें से बड़ी संख्या अब तक डिलीवर नहीं हो पाई है. साल 2025 में पूरे देश में सिर्फ 227 टेस्ला कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. भारत में टेस्ला की एंट्री तो जोर-शोर से हुई लेकिन अब कारों की बिक्री के आंकड़े ये साफ संकेत दे रहे हैं, भारत में टेस्ला की राह आसान नहीं है. कैसी है Tesla Model Y टेस्ला मॉडल वाई इंडियन मार्केट में दो वेरिएंट (लॉन्ग रेंज और स्टैंडर्ड) में आती है. इसमें लॉन्ग रेंज RWD वेरिएंट में 84.2kWh का बैटरी पैक दिया गया है. जो सिंगल चार्ज में 661 किमी की ड्राइविंग रेंज देती है. कंपनी का दावा है कि, ये वेरिएंट महज 5.6 सेकंड में ही 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकता है. सुपर-फास्ट DC चार्जर की मदद से इसकी बैटरी 15 मिनट में इतनी चार्ज हो जाती है कि, कार 267 किमी तक चल सकती है. इस हायर वेरिएंट की कीमत 67.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. वहीं स्टैंडर्ड वेरिएंट थोड़ा किफायती है और इसमें छोटा बैटरी पैक मिलता है. इस वेरिएंट में कंपनी ने 64kWh की बैटरी दी है. जो सिंगल चार्ज में तकरीबन 500 किमी की ड्राइविंग रेंज देता है. यह वेरिएंट 5.9 सेकंड में 0-100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ता है. DC फास्ट चार्जर से इस वेरिएंट की बैटरी 15 मिनट में इतना चार्ज हो जाती है, जिससे चालक को 238 किमी की ड्राइविंग रेंज मिलती है. स्टैंडर्ड वेरिएंट की कीमत 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है.

Tesla ने भारत में अपनी स्थिति मजबूत की, बेंगलुरु में नया शोरूम खोलने की तैयारी

बेंगलुरु   एलन मस्क के मालिकाना हक वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla ने हाल ही में जानकारी दी है कि मुंबई और दिल्ली में फिजिकल टचपॉइंट खोलने के बाद अब वह भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रही है. कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की है कि वह बेंगलुरु में अपना तीसरा और सबसे नया टचपॉइंट खोलने जा रही है. संभावना जताई जा रही है कि बेंगलुरु में इस टचपॉइंट में चार सुपरचार्जर स्टेशन लगाए जा सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और नई दिल्ली के एयरोसिटी में टचपॉइंट्स में हैं. Tesla के इंडिया पोर्टफोलियो में अभी सिर्फ़ एक कार Tesla Model Y मौजूद है. भारत में Tesla Model Y दो अलग-अलग बैटरी पैक के साथ बेची जाती है. पहला इसमें 60 kWh बैटरी पैक मिलता है, जबकि दूसरा 75 kWh बैटरी पैक मिलता है. इसके अलावा, भारत में बेची जाने वाली Tesla Model Y सिर्फ़ रियर-व्हील ड्राइव (RWD) वेरिएंट में पेश की गई है, जबकि दुनिया भर में ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) वेरिएंट बेचे जाते हैं. Tesla Model Y के दो वेरिएंट हैं, जिसमें 60-kWh बैटरी पैक वाला रियर-व्हील ड्राइव वेरिएंट शामिल है, जिसकी क्लेम्ड रेंज 500 km है. वहीं दूसरी ओर, लॉन्ग-रेंज रियर-व्हील ड्राइव वेरिएंट 75-kWh बैटरी पैक पर चलता है, जिसकी क्लेम्ड रेंज 622 km है.         इसके अलावा, कंपनी भारत में 6 लाख रुपये के प्रीमियम पर ऑटोनॉमस ड्राइविंग देने की उम्मीद कर रही है. हालांकि, भारत में सेल्फ-ड्राइविंग गाड़ियों को कंट्रोल करने वाले कानूनों में अस्पष्टता के कारण, इस फीचर को बाद में लॉन्च किया जा सकता है. Tesla Model Y की कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 59 लाख रुपये है और यह 67.89 लाख रुपये तक जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने दिल्ली NCR और मुंबई में जो सुपरचार्जर लगाए हैं, वे वर्जन 4 यूनिट हैं, जो दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी चार्ज कर सकते हैं. फिलहाल इनका इस्तेमाल सिर्फ Tesla गाड़ियों के लिए ही किया जा सकेगा, और बाद में दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी चार्ज करने की अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा, Tesla ने गुरुग्राम में DLF होराइजन सेंटर में अपना पहला डेडिकेटेड चार्जिंग स्टेशन खोलकर अपने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और बढ़ाया है. इसमें कई तरह के चार्जिंग ऑप्शन हैं, जिसमें चार वर्जन 4 सुपरचार्जर यूनिट शामिल हैं, जो 250 kW की पीक आउटपुट देते हैं और तीन डेस्टिनेशन चार्जर जो 11 kW तक की पावर देते हैं. गुरुग्राम चार्जिंग स्टेशन के लॉन्च के साथ, कंपनी के पास अब तीन बड़े चार्जिंग स्टेशन हो गए हैं, जिनमें 12 सुपरचार्जर यूनिट और 10 डेस्टिनेशन चार्जर यूनिट शामिल हैं.

भारतीय मूल के करोड़पति विक्रम बेरी अरेस्ट: टेस्ला में आगजनी की साजिश का सनसनीखेज आरोप

वाशिंगटन अमेरिका में भारतीय मूल के करोड़पति व्यापारी बेरी विक्रम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक विक्रम पर आरोप है कि उन्होंने कैलिफोर्निया के बे एरिया में एक शराब की दुकान में आग लगाने की कोशिश की। जब वह इसमें असफल रहे तो टेस्ला को दूसरी गाड़ियों से टक्कर मारकर आग लगाने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम एक मानसिक स्वास्थ्य कंपनी बेटरलाइफ के संस्थापक हैं। घटना की जानकारी देते हुए सांता क्लारा काउंटी शेरिफ के कार्यालय ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में लिखा, यह घटना साराटोगा की गैरोड फार्म्स पर हुई। इस जगह पर विक्रम ने वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने विक्रम को आग लगाने की कोशिश करते हुए पकड़ा। इसके बाद उनकी कहासुनी हो गई। इस पर गु्स्साए विक्रम ने कर्मचारियों को ऊपर वाइन से भरी बोतल फेंकी और वहां से भागने की कोशिश की। अधिकारियों के मुताबिक दुकान के बाहर खड़ी अपनी टेस्ला कार में बैठकर विक्रम ने वहां पर मौजूद दो कारों में जानबूझकर टक्कर मार दी। इसके बाद दुकान के कर्मचारियों ने पुलिस को कॉल किया। पुलिस के पहुंचने पर विक्रम ने खुद को अपनी इलेक्ट्रिक कार में बंद कर लिया और बाहर आने से इनकार कर दिया। शेरिफ कार्यालय के मुताबिक, वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने विक्रम बेरी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन उसने ऐसा करने के से इनकार कर दिया। बाद में कर्मचारियों ने उसे बाहर निकालने के लिए पेपरबॉल और स्प्रे का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसे गिरफ्तार करके अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 42 वर्षीय विक्रम बेरी, मेनेलो पार्क निवासी के तौर पर हुई है। इस घटना के बाद उसके ऊपर घातक हथियार से हमला करने और गिरफ्तारी का विरोध करने का आरोप लगाया गया है। कौन हैं विक्रम बेरी? विक्रम की लिंक्डन प्रोफाइल के मुताबिक उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई अर्बाना-शैंपेन यूनिवर्सिटी से पूरी की और बाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम एक करोड़पति है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डेलॉयट में एक कंस्लटेंट के रूप में की और बाद में कुछ और कंपनियों में काम करके 2016 में खुद की कंपनी शुरू की। फिलहाल विक्रम को गिरफ्तार करके उनसे इस घटना के बारे में पूछताछ की जा रही है।  

अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और टेस्ला ने भारत में क्यों किया निवेश का ऐलान, ट्रंप के ‘डेड इकोनॉमी’ बयान के बावजूद?

 नई दिल्‍ली अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने जुलाई 2025 में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था और साथ ही भारतीय इकोनॉमी को 'डेड इकोनॉमी' कहा था. लेकिन अब अमेरिकी कंपनियां ही भारत में अपना कारोबार फैला रही है और इन कंपनियों ने लाखों करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है.  माइक्रोसॉफ्ट से लेकर अमेजन, गूगल और ओपेनएआई जैसी कंपनियों ने बड़े निवेश का ऐलान किया है. माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्‍य नडेला ने भारत में 17.5 अरब डॉलर यानी 1.57 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है, जो भारत के AI मार्केट को बढ़ाएगी.  अमेजॉन का बड़ा निवेश  माइकोसॉफ्ट के एक दिन बाद 10 दिसंबर को अमेजन ने भारत में बड़े निवेश का ऐलान किया है. अमेजॉन 2030 तक देश में 35 अरब डॉलर का निवेश करेगा, जिससे उसके सबसे बड़े ग्‍लोबल मार्केट में से एक के साथ उसके संबंध और मजबूत होंगे. ई-कॉमर्स सेक्‍टर की यह दिग्‍गज कंपनी AI और लॉजिस्टिक्‍स इंफ्रा जैसे सेक्‍टर्स में निवेश करने और अपने क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग और क्विक कॉमर्स बिजनेस को विस्‍तार करने की योजना बना रही है.  माइक्रोसॉफ्ट करेगी एशिया का सबसे बड़ा निवेश माइ्क्रोसॉफ्ट ने एशिया का सबसे बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है. पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सत्‍य नडेला ने कहा कि माइक्रोसाफ्ट की 2029 तक 17.5 बिलियन डॉलर के निवेश की योजना है. कंपनी ने कहा कि यह निवेश माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड और एआई विस्तार के लिए किया जाएगा. गूगल कितना करने वाला है निवेश?  इससे पहले अक्‍टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम में एक बड़े पैमाने पर एआई हब बनाने के लिए 15 अरब डॉलर लागत का ऐलान किया था. यह अमेरिका के बाहर कंपनी का सबसे बड़ा निवेश होगा. गूगल ने कहा था कि यह सुविधा अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर को रिन्‍यूवेबल एनर्जी क्षमता के साथ एकीकृत करेगी और भारत में गीगावाट-स्केल का पहला डेटा सेंटर कैंपस होगा. इस निवेश से 2030 तक 1 लाख तक नौकरियां पैदा हो सकती है.  इंटेल, कॉग्निजेंट और OpenAI टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इंटेल को अपने चिप प्‍लांटों में संभावित खरीदार के रूप में हासिल किया है. यह समझौता भारत की चिप उत्पादन क्षमता में इंटेल के विश्वास का संकेत देता है. कॉग्निजेंट के सीईओ रवि कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और भारत की एआई फर्स्ट पहल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है. कंपनी ने एआई को अपनाने और स्किल डेवलपमेंट में तेजी लाने की योजना का ऐलान किया है. कई रिपेार्ट में कहा गया है कि  OpenAI, Tata Consultancy Services के साथ भारत में Stargate का चैप्टर लॉन्च करने के लिए बातचीत कर रही है.  भारत में क्‍यों आ रही ये कंपन‍ियां?      भारत में इंटरनेट यूजर्स, स्मार्टफोन यूज और डिजिटल सर्विस की मांग बहुत बड़ी है. इस वजह से AI सर्विस, क्लाउड-सर्विसेज़, डेटा-प्रोसेसिंग के लिए बड़ा मार्केट है.      AI मॉडल और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए डेटा, यूजर्स बेस और क्वालिटी नेटवर्क्स बहुत मायने रखते हैं. भारत में ये सर्विसेज मजबूत हैं और तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे निवेश के लिए एक अच्‍छा माहौल मिलता है.      भारत में टेक, इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर डेवलप में बहुत कुशल लोग हैं. यहां ऑपरेशन और सर्वर/डेटा-सेंटर चलाने की लागत अमेरिका और अन्‍य वेस्‍ट कंट्री की तुलना में बहुत कम है.     भारत में पहले से ही कई IT सर्विसेज, डेटा-सेंटर, क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स  और तेजी से बढ़ती स्टार्ट-अप कल्‍चर है . इससे US कंपनियों को अपना AI-हब, क्लाउड या मॉडल-डेवलपमेंट सेंटर खोलने में अच्‍छा प्‍लेस मिल रहा है.      AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी ग्‍लोबल लेवल पर एक बड़ा ट्रेंड चल रहा है. अमेरिकी कंपनियां जैसे Microsoft, Google, Amazon आदि, चाहते हैं कि AI मॉडल, क्लाउड सर्विसेज, डेटा-हब आदि वैश्विक स्तर पर फैले. इससे इनको एक बड़ा फायदा मिल सकता है.  

सिद्धांत अवस्थी ने छोड़ा टेस्ला साइबरट्रक प्रोग्राम, इंटर्न से हेड तक का सफर

नई दिल्ली   टेस्ला के साइबरट्रक प्रोग्राम के हेड सिद्धांत अवस्थी ने इस्तीफ दे दिया है। वे करीब आठ वर्ष पहले एक इंटर्न के तौर पर कंपनी में शामिल हुए थे। यह जानकारी अवस्थी की ओर से एक सोशल मीडिया पोस्ट में सोमवार को दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में अवस्थी ने अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा, "टेस्ला में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद, हाल ही में इसे छोड़ने का फैसला किया है, जो कि मेरी जिंदगी के अब तक के सबसे कठिन फैसलों में से एक है। आठ साल पहले, जब मैंने यहां एक इंटर्न के तौर पर शुरुआत की थी, तो कभी नहीं सोचा था कि मुझे साइबरट्रक प्रोग्राम का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा।" उन्होंने आगे पोस्ट में एलन मस्क और सभी टेस्ला के लीडर्स (पूर्व और वर्तमान), मेंटर्स और सभी ग्राहकों का धन्यवाद किया। अवस्थी ने बताया कि टेस्ला में अपने आठ वर्षों के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने मॉडल 3 को बेहतर बनाने, गीगा शंघाई पर काम करने, नए इलेक्ट्रॉनिक्स और वायरलेस आर्किटेक्चर विकसित करने और साइबरट्रक पर काम करने का मौका मिला। उन्होंने पोस्ट में आगे कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, तब जब आपके सामने ग्रोथ के इतने सारे अवसर मौजूद हो। टेस्ला की गाड़ियों काफी जटिल हैं, लेकिन उन्हें वह क्रेडिट नहीं मिलता है, जो मिलना चाहिए, लेकिन ये गाड़ियां लोगों की जिंदगी को बदलने में सफल रही हैं। अवस्थी ने पोस्ट के अंत में कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि टेस्ला अपने मिशन में जरूर कामयाब होगा और मैं अपनी जिंदगी के अगले अध्याय के लिए रोमांचित हूं। टेस्ला भारत में भी कदम रख चुकी है, लेकिन कंपनी अब तक कुछ खास कमाल दिखाने में कामयाब नहीं रही है। बीते महीने कंपनी की बिक्री मजह 40 यूनिट्स थी, जिससे कंपनी की देश में संचयी बिक्री 104 यूनिट्स हो गई है।

TESLA कार में कैद होकर 5 लोगों की मौत, मामले में दायर हुई शिकायत

न्यूयॉर्क अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला (TESLA) पर विस्कॉन्सिन में हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद मुकदमा दायर किया गया है. यह हादसा पिछले साल वेरोना (मैडिसन) में हुआ था, जिसमें Model S कार सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई थी. आरोप है कि कार के डिज़ाइन में खामी के कारण उसमें बैठे पैसेंजर आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खोल पाए और अंदर ही फंसकर जल गए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये हादसा 1 नवंबर 2024 की रात का है. जब वेरोना (विस्कॉन्सिन) में टेस्ला मॉडल एस कार सड़क से स्किड होकर एक पेड़ से जा टकराई. कार में सवार जेफ़्री बाउर (54) और मिशेल बाउर (55) अपने दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे थे. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ ही क्षणों में कार में आग लग गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद कार के भीतर से चीखें सुनाई दीं, लेकिन कोई भी दरवाज़ा खोल नहीं सका.  टेस्ला पर मुकदमा बीते 31 अक्टूबर, शुक्रवार को बाउर दंपत्ति के चार बच्चों ने टेस्ला पर मुकदमा दायर किया है. उनका आरोप है कि कार के इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम में ऐसी खामी थी, जिसने उनके माता-पिता को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं दिया. शिकायत में कहा गया है कि आग लगने के बाद लिथियम-आयन बैटरी पैक ने इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया, जिससे दरवाज़े खुल ही नहीं सके. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों का कहना है कि टेस्ला को इस खामी की जानकारी पहले से थी, क्योंकि ऐसे हादसे पहले भी हो चुके थे. इसके बावजूद कंपनी ने “सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज़ करते हुए” कार के डिज़ाइन में कोई बदलाव नहीं किया. साइबरट्रक हादसे में दो छात्रों की मौत  यह पहली बार नहीं है जब टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों के सेफ्टी सिस्टम और डिज़ाइन फीचर्स पर सवाल उठे हों. कंपनी पहले भी अपनी ऑटोपायलट तकनीक और दरवाजे के ऑटोमैटिक सिस्टम को लेकर आलोचनाओं का सामना कर चुकी है. पिछले साल नवंबर में कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को उपनगर में साइबरट्रक हादसे में दो कॉलेज छात्रों की मौत हुई थी. तब भी परिवारों ने दावा किया था कि आग लगने के बाद वाहन के हैंडल डिज़ाइन के कारण छात्र बाहर नहीं निकल सके. NHTSA कर रही है जांच अमेरिकी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने सितंबर 2025 में टेस्ला के डोर डिज़ाइन की जांच शुरू की थी. कई रिपोर्टों में सामने आया कि एक्सीडेंट के समय टेस्ला कार के डोर हैंडल्स फेल हो सकते हैं. बाउर परिवार की याचिका में यह भी कहा गया है कि, पीछे की सीट पर बैठे यात्रियों को बच निकलने के लिए कार के फ्लोर मैट को हटाकर एक मेटेल के टैब को खोजना पड़ता है, जो हादसे के वक्त किसी आम व्यक्ति के लिए असंभव है. बाउर दंपत्ति के मौत के मामले वाली रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, स्थानीय निवासी ने 911 पर कॉल कर बताया कि उसने कार के भीतर से मदद की चीखें सुनीं, लेकिन कोई दरवाज़ा नहीं खुल रहा था. शिकायत में लिखा गया है, “टेस्ला के डिज़ाइन ने एक ऐसा जोखिम पैदा किया जो पूरी तरह से अनुमानित था. कि दुर्घटना में बच जाने वाले लोग जलती हुई कार में फंस जाएंगे.” इस मुकदमे में ड्राइवर को भी प्रतिवादी बनाया गया है, बाउर दंपत्ति के बच्चों का आरोप है कि चालक ने लापरवाही से वाहन चलाया, जिससे यह भयानक हादसा हुआ. यह मुकदमा डेन काउंटी की राज्य अदालत में दायर किया गया है.

FSD तकनीक पर संकट: Tesla की लाखों कारों की होगी गहन जांच

न्यूयॉर्क एलन मस्क के नेतृत्व वाली इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की कारें दुनिया भर में अपने एडवांस टेक्नोलॉजी और फीचर्स के लिए मशहूर हैं. लेकिन टेस्ला आज सवालों के घेरे में है. जिस “Full Self-Driving” फीचर को एलन मस्क ने ड्राइविंग के इतिहास का सबसे बड़ा सॉफ़्टवेयर अपग्रेड बताया था, वही अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच के घेरे में है. अमेरिका की सड़कों पर लाखों टेस्ला कारें आज एक ऐसे प्रयोग का हिस्सा हैं, जो यह तय करेगा कि क्या मशीनें वाकई इंसानों जितनी बेहतर और जिम्मेदार हो सकती हैं.  तकनीक ने जहां ऑटोमेशन की नई सीमाएं तोड़ीं, वहीं अब यह भी पूछना जरूरी हो गया है, क्या इस दौड़ में हमने सेफ्टी को पीछे छोड़ दिया है? अमेरिकी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने घोषणा कर दी कि वे टेस्ला के “Full Self-Driving” (FSD) सॉफ़्टवेयर की व्यापक जांच करेगा. इसके चलते टेक्नोलॉजी और सेफ्टी का मेल एक विवादास्पद मोड़ पर पहुँच गया है. शिकायतों का सिलसिला जांच की शुरुआत ड्राइवरों की शिकायतों से हुई. कुछ मामलों में FSD सिस्टम से लैस कारों ने रेड लाइट क्रॉस कर लिया, कुछ ने सड़क के विपरीत दिशा में गाड़ी ले ली, और कुछ ने तो रेलवे क्रासिंग्स पर रुकने में असमर्थता दिखाई. NHTSA ने कहा कि जांच उन स्थितियों पर फ़ोकस करेगी जिसमें सिस्टम ड्राइवर को गलती सुधारने का पर्याप्त समय नहीं देता. खासकर रेलवे क्रॉसिंग्स और सड़क क्रॉस के दौरान. जांच के दायरे में 29 लाख कारें NBC न्यूज की एक रिपोर्ट ने बताया गया है कि, कई वीडियो में टेस्ला गाड़ियों को रेलवे क्रॉसिंग पर रुकते नहीं देखा गया, या वे रेलवे क्रॉसिंग गेट्स के नीचे से गुजरती दिखीं. जबकि रेड़ लाइट जल रही थी या गेट बंद हो रहा था. ऐसे आरोपों ने NHTSA को इस जांच की दिशा निर्धारित करने में मजबूर कर दिया है. एजेंसी का कहना है कि, FSD तकनीक से लैस तकरीबन 29 लाख टेस्ला कारों की जांच की जाएगी. यह जांच मात्र कुछ गाड़ियों तक सीमित नहीं है. इसमें लगभग 2.9 मिलियन (29 लाख) टेस्ला वाहन शामिल हैं जिनमें FSD सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल किए गए हैं. चाहे वह Model 3 हो या Model X, यदि उसमें FSD फीचर है, तो वह जांच के दायरे में आते हैं. NHTSA ने स्पष्ट किया कि इसमें वाहनों की पूरी स्थिति की जांच की जाएगी, कि वो फुल सेल्फ ड्राइविंग कंडिशन में किस तरह का रिस्पांस करती हैं. क्या कहते हैं एलन मस्क? इस बीच, टेस्ला के मुखिया एलन मस्क सोशल मीडिया पर FSD का बखान करते नहीं थक रहे हैं. उन्होंने कई ट्वीट और पोस्ट शेयर किए, जिनमें दावा था कि FSD v14.1 ने लॉस एंजेलिस की ट्रैफ़िक से लेकर शहर की सड़कों और हाईवे तक, पैदल चलने वालों व सड़क पर चल रहे कंस्ट्रक्शन वर्क के बीच, लगभग एक घंटे ऑटोमैटिक ड्राइव किया. बिना किसी मैन्युअल हस्तक्षेप के. मस्क ने एक ऐसे मामले का वीडियो भी साझा किया जिसमें टेस्ला कार सेल्फ ड्राइविंग मोड में मल्टी-स्टोरी मॉल की पार्किंग में एंट्री और एग्जिट हुई. ये पूरी प्रक्रिया बिना किसी इंसानी मदद के हुई. निश्चित ही मस्क के इस तरह के पोस्ट्स टेस्ला सपोर्टस में काफी उत्साह जगाते हैं. लेकिन NHTSA को उत्साह नहीं, सबूत चाहिए. और यदि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ है, तो जवाबदेही तय करनी होगी. क्या है फुल सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक? टेस्ला की फुल सेल्फ-ड्राइविंग (Full Self-Driving या FSD) तकनीक एक एडवांस ऑटोपायलट सिस्टम है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि कार खुद से चल, मोड़, ओवरटेक और पार्क कर सके. यह सिस्टम कैमरों, अल्ट्रासोनिक सेंसर और न्यूरल नेटवर्क बेस्ड सॉफ़्टवेयर के ज़रिए सड़क पर ट्रैफ़िक, सिग्नल, लेन मार्किंग और पैदल चलने वालों को पहचानता है. हालांकि इसका नाम “फुल सेल्फ-ड्राइविंग” है, लेकिन यह पूरी तरह ऑटोनॉमस नहीं है. यानी ड्राइवर को हर समय सतर्क रहना और ज़रूरत पड़ने पर कंट्रोल संभालने के लिए तैयार रहना पड़ता है.  टेक्नोलॉजी और जिम्मेदारी  इस पूरे विवाद में एक बड़ा सवाल यह भी छिपा है कि, जब हम “सेमी-ऑटोनॉमस” ड्राइविंग की बात करते हैं, तो कहां तक तकनीक भरोसेमंद है, और कहां पर इंसान को हस्तक्षेप करने का मौका बचा है? NHTSA की जांच यह जानने का प्रयास करेगी कि क्या और कितनी असुरक्षित स्थितियों में ड्राइवर को चेतावनी मिलती है, और क्या उस चेतावनी के बाद पर्याप्त समय बचता है. इस लेख का उद्देश्य केवल आलोचना नहीं है. यह चेतावनी भी है कि भविष्य की ड्राइविंग चाहे ऑटोमैटिक हो, लेकिन जिम्मेदारी तय करना जरूरी है. यदि तकनीक में कोई ख़ामी आती है तो वाहन निर्माता और नियम बनाने वाले दो दोनों का दायित्व बनता है कि वह नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखें. अब यह देखने की देर है कि NHTSA की रिपोर्ट क्या कहेगी, और टेस्ला कैसे अपनी प्रतिष्ठा और विश्वास को संभाल पाएगा.

भारत में Tesla लॉन्च की तैयारी पूरी, जानिए कब और कहां खुलेगा पहला शोरूम

मुंबई  आखिरकार सालों के लंबे इंतजार के बाद एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की इंडिया में एंट्री होने जा रही है. अलग-अलग मौकों पर कई बार टेस्ला की कारों को भारतीय सड़कों पर स्पॉट किया गया था, लेकिन अब इन कारों का इंतजार खत्म होने जा रहा है. टेस्ला इंडिया में अपने ऑफिशियल ऑपरेशन की शुरुआत करने जा रही है और कंपनी के पहले शोरूम की शुरुआत मुंबई में होगी.  कहां खुलेगा टेस्ला का शोरूम? रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आगामी 15 जुलाई को टेस्ला का इंडिया में पहला शोरूम मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लैक्स (BKC) में शुरू किया जाएगा. इस शोरूम की शुरुआत के साथ टेस्ला की साउथ एशिया में एक फॉर्मल एंट्री होगी. लगभग 4000 वर्ग फुट में फैले टेस्ला के इस पहले शोरूम से इंडिया ऑपरेशन की शुरुआत होगी. मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में शोरूम का काम तकरीबन खत्म हो चुका है. ये शोरूम ग्राहकों के लिए टेस्ला के 'एक्सपीरिएंस सेंटर' के तौर पर काम करेगा, जिसमें ग्राहकों को टेस्ला की कारों को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा. टेस्ला भारत में डायरेक्ट-टू-कस्टमर (Direct-to-Customer) रिटेल मॉडल के साथ वाहनों की बिक्री करेगी. लेकिन कारों की बिक्री के बाद सहायता के लिए ब्रांड के पास स्थानीय साझेदार भी होंगे. जो आफ्टर सेल्स सपोर्ट मुहैया कराएंगे.  टेस्ला ने निकाली थी जॉब वैकेंसी मुंबई के बाद टेस्ला देश की राजधानी दिल्ली में भी अगला शोरूम खोलेगी. हाल ही में टेस्ला ने मुंबई और पुणे में अलग-अलग पदों पर वैकेंसी (Tesla Jobs in India) भी निकाली थी. जिसमें सेल्स एक्जीक्यूटिव, सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग और आईटी, ऑपरेशन बिजनेस सपोर्ट, चार्जिंग इंफ्रा, एआई और रोबोटिक, सेल्स और कस्टमर सपोर्ट सहित कई अलग-अलग डिविजन में नौकरियों के लिए आवदेन मांगे गए थें. भारत पहुंची चीन में बनी टेस्ला की कारें ब्लूमबर्ग की पिछली रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि, टेस्ला की कारों का पहला सेट भारत पहुंच चुका है. टेस्ला की मशहूर इलेक्ट्रिक एसयूवी – मॉडल वाई (Model Y) रियर-व्हील ड्राइव को चीन में स्थित टेस्ला की फैक्ट्री से भारत भेजा गया है. कंपनी ने इस कार के कुल 5 यूनिट को चीन के शंघाई से भारत में इंपोर्ट किया है. Model Y दुनिया की बेस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक कारों में से एक है और संभवत: कंपनी इसी कार से भारत में अपने सफर की शुरुआत कर सकती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि, टेस्ला ने अमेरिका, चीन और नीदरलैंड से सुपरचार्जर कंपोनेंट, कार एक्सेसरीज, मर्चेंडाइज और स्पेयर्स को भी इंपोर्ट किया है. दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क (Elon Musk) के नेतृत्व वाली टेस्ला इस समय यूरोप और चीन के बाजार में बिक्री में भारी गिरावट से जूझ रही है. यही कारण है कि टेस्ला जल्द से जल्द दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार यानी भारत में प्रवेश करने की योजना बना रही है. क्या होगी कीमत? हालांकि आधिकारिक लॉन्च से पहले टेस्ला की पहली कार की कीमत के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. लेकिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि, इंपोर्ट की गई इन कारों में से प्रत्येक मॉडल की कीमत 27.7 लाख रुपये (लगभग 31,988 डॉलर) घोषित की गई है और इन पर 21 लाख रुपये से अधिक का इंपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है. अब लॉन्च के बाद ही इस कार की कीमत का खुलासा हो सकेगा. क्या भारत में लगेगा टेस्ला का प्लांट? फिलहाल टेस्ला भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने पिछले महीने मीडिया को दिए अपने एक बयान में कहा था कि, "टेस्ला की प्राथमिकता भारत में अपने शोरूम का विस्तार करने में है. कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि, "हालांकि टेस्ला ने बहुत कम रुचि दिखाई है, लेकिन कई ग्लोबल ब्रांड्स – जिनमें हुंडई, मर्सिडीज-बेंज, स्कोडा और किआ शामिल हैं – ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है.