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टेस्ला की भारत में असफलता: 10% टारगेट भी पूरा नहीं हुआ, क्या 6-सीटर से बदल पाएगा हालात?

मुंबई  दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी भारत आई, धमाका करने की कोशिश की, लेकिन हकीकत की जमीन पर उसे तगड़ा झटका लगता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की. आज 22 अप्रैल 2026 को टेस्ला ने अपनी नई Model Y L (6-सीटर, लॉन्ग व्हीलबेस) को भारत के बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत 62 लाख रुपये तय की गई है. यह सिर्फ एक नई लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि एक तरह का 'डैमेज कंट्रोल' है, क्योंकि भारत में टेस्ला का अब तक का सफर काफी संघर्ष भरा और उम्मीद से कहीं ज्यादा फीका रहा है।   टेस्ला के भारत में संघर्ष की सबसे बड़ी वजह इसकी आसमान छूती कीमतें रही हैं. भारत में बाहर से आने वाली गाड़ियों पर सरकार 70% से 110% तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ लगाती है. इसका नतीजा यह हुआ कि Model Y की कीमत 60 लाख से 68 लाख रुपये के बीच पहुंच गई. इतनी महंगी होने के कारण यह आम आदमी की पहुंच से दूर होकर Mercedes EQB, BMW iX1 और Volvo EC40 जैसी लग्जरी गाड़ियों की कैटेगरी में खड़ी हो गई. भारत जैसे देश में, जहां लोग गाड़ी खरीदने से पहले उसकी कीमत और वैल्यू पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं, टेस्ला कभी भी 'मास मार्केट' को आकर्षित नहीं कर पाई।  आंकड़ों की बात करें तो टेस्ला का प्रदर्शन काफी बुरा रहा है. साल 2025 में कंपनी ने पूरे साल के दौरान सिर्फ 227 गाड़ियां ही बेचीं, जबकि उनका लक्ष्य कम से कम 2,500 यूनिट्स का था. स्थिति इतनी खराब हो गई कि कंपनी को अपने स्टॉक को निकालने के लिए 2 लाख रुपये तक का डिस्काउंट देना पड़ा. यह दिखाता है कि सिर्फ ब्रांड नाम के भरोसे भारतीय बाजार को जीतना इतना आसान नहीं है, खासकर तब जब ग्राहक को हर कदम पर पैसे की कीमत वसूलनी हो।  कीमत के अलावा चार्जिंग की समस्या ने भी टेस्ला की राह मुश्किल की है. भारत में फिलहाल केवल 25,000 चार्जिंग स्टेशन हैं, जो जरूरत के हिसाब से बहुत कम हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि जो स्टेशन मैप पर दिखते हैं, वे असल में खराब मिलते हैं. टेस्ला की सबसे बड़ी ताकत उसका 'सुपरचार्जर नेटवर्क' माना जाता है, जिसने अमेरिका और यूरोप में धूम मचा रखी है, लेकिन भारत में यह नेटवर्क अभी नाममात्र का ही है. बिना मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कोई भी EV यूजर लंबी दूरी के सफर पर निकलने से कतराता है।  भारतीय बाजार में टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों का दबदबा भी टेस्ला के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. टाटा की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में करीब 60% हिस्सेदारी है, जिसके बाद महिंद्रा और JSW MG मोटर्स का नंबर आता है. ये कंपनियां भारतीय ग्राहकों की नब्ज पहचानती हैं. टाटा नेक्सन EV और महिंद्रा की नई गाड़ियां टेस्ला के मुकाबले बहुत सस्ती हैं और भारतीय परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. ऐसे में टेस्ला के लिए इन दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है।  एक और कड़वा सच यह है कि भारत में लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार बहुत ही छोटा है. 16.5 लाख रुपये यानी करीब 20,000 डॉलर से ऊपर की गाड़ियों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी सिर्फ 6.6% है. इस छोटे से हिस्से में भी मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, किआ और ऑडी जैसे पुराने और जमे-जमाए खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं. टेस्ला को न सिर्फ इन ब्रांड्स से लड़ना पड़ रहा है, बल्कि भारतीय सड़कों की चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है. टेस्ला की गाड़ियों का ग्राउंड क्लीयरेंस कम है, जो भारत के बड़े स्पीड ब्रेकर्स और गड्ढों के लिए सही नहीं बैठता. इसे ठीक करने के लिए गाड़ी के डिजाइन में बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें काफी खर्च आता है।  सर्विस नेटवर्क के मामले में भी टेस्ला काफी पीछे छूट गई है. टेस्ला के शोरूम और सर्विस सेंटर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित हैं, जबकि टाटा और महिंद्रा का नेटवर्क गांव-कस्बों तक फैला है. अगर किसी छोटे शहर के ग्राहक को गाड़ी में कोई दिक्कत आए, तो उसके पास कोई आसान रास्ता नहीं होता. इसके अलावा एलन मस्क की अपनी वैश्विक छवि और उनकी राजनीतिक गतिविधियों का असर भी कहीं न कहीं कंपनी की सेल्स पर पड़ा है, जिसे पूरी दुनिया में महसूस किया गया है।  अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा? नई 6-सीटर Model Y L के जरिए टेस्ला भारत के उस प्रीमियम सेगमेंट को लुभाना चाहती है जो बड़ी और आरामदायक SUVs पसंद करता है. यह एक अच्छी कोशिश तो है, लेकिन जानकारों का मानना है कि जब तक टेस्ला भारत में अपनी फैक्ट्री नहीं लगाती और यहीं पर गाड़ियां बनाना शुरू नहीं करती, तब तक ऊंची कीमतों का यह सिलसिला नहीं थमेगा. लोकल मैन्युफैक्चरिंग ही वो एकमात्र रास्ता है जिससे टेस्ला भारतीय बाजार में लंबी रेस का घोड़ा बन सकती है।   

TESLA का नया सुपरचार्जर, 15 मिनट में इलेक्ट्रिक कार पूरी तरह होगी चार्ज

 नई दिल्ली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla ने पिछले साल जुलाई में अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार मॉडल वाई को भारत में लॉन्च किया था. अब कंपनी ने नवी मुंबई में अपना नया चार्जिंग स्टेशन शुरू किया है. भारत में ये टेस्ला का पांचवा चार्जिंग स्टेशन है. ख़ास बात ये है कि ये नया सुपर चार्जिंग स्टेशन मॉल के अंदर लगाया गया है, इससे अब लोग शॉपिंग के साथ-साथ अपनी कार भी आसानी से चार्ज कर सकेंगे।  कंपनी द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार टेस्ला का यह नया सुपरचार्जर मुंबई के नेक्सस सीवुड्स मॉल में लगाया गया है. ये कंपनी का पहला इन-मॉल चार्जिंग स्टेशन है. इससे पहले कंपनी ने इंडिया में किसी मॉल के अंदर चार्जिंग फेसिलिटी शुरू नहीं की थी. इस नई फेसिलिटी में कुल 8 चार्जर लगाए गए हैं, जिससे आसपास के Tesla कार मालिकों को बड़ी राहत की उम्मीद है. यह चार्जिंग स्टेशन मॉल के B1 पार्किंग एरिया में लगाया गया है।  टेस्ला पहले से गुरुग्राम, दिल्ली, और मुंबई में अपने चार्जिंग स्टेशन लगा चुका है. अब कंपनी पूरे देश में अपने Supercharger नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रही है. खास बात यह है कि कंपनी ऐसे लोकेशन की तलाश में है, जहां लोग आमतौर पर समय बिताते हैं, जैसे मॉल, हाईवे रेस्ट स्टॉप और फूड कोर्ट इत्यादि. ताकि कार को खड़ी चार्जिंग करना आसान हो।  पावरफुल चार्जिंग की सुविधा इस नए स्टेशन पर 4 V4 सुपरचार्जर (डीसी चार्जिंग) लगाए गए हैं. जिनकी स्पीड 250 kW तक है. इसके अलावा चार डेस्टिनेशन चार्जर भी लगाए गए हैं, जो 11 kW की पावर देते हैं. यानी यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से चार्जिंग का विकल्प चुन सकते हैं. कंपनी का दावा है कि सुपरचार्जर की मदद से Model Y इलेक्ट्रिक कार को सिर्फ 15 मिनट में लगभग इतना चार्ज किया जा सकता है कि, यूजर को 275 किलोमीटर तक की रेंज मिलेगी।  Tesla ऐप से पूरा कंट्रोल Tesla के मोबाइल ऐप के जरिए यूजर्स आसानी से नजदीकी चार्जिंग स्टेशन ढूंढ सकते हैं, बैटरी को पहले से तैयार कर सकते हैं, चार्जिंग स्टेटस देख सकते हैं और पेमेंट भी कर सकते हैं. यह पूरा सिस्टम एक ही जगह पर उपलब्ध है. इस नए स्टेशन के साथ Tesla के भारत में अब कुल 4 चार्जिंग स्टेशन हो गए हैं. जिसमें 20 सुपरचार्जर और 14 डेस्टिनेशन चार्जर शामिल हैं।  चार्जिंग स्टेशन के साथ ही नेक्सस सीवुड्स मॉल के एट्रियम में Tesla ने एक पॉप-अप स्टोर भी शुरू किया है. यहां लोग कंपनी की कारों को करीब से देख सकते हैं, टेस्ट ड्राइव ले सकते हैं और नई तकनीक को समझ सकते हैं. Model Y की शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये है. साथ ही कंपनी होम चार्जिंग की सुविधा भी दे रही है। 

13 साल बाद TESLA के VP राज जगन्नाथन ने इस्तीफा दिया, जानें क्या है इसका मतलब

 नई दिल्ली  इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज अमेरिकन कंपनी टेस्ला के लिए यह समय आसान नहीं चल रहा है. इसी बीच कंपनी को एक और बड़ा झटका लगा है. टेस्ला के वाइस प्रेसिडेंट राज जगन्नाथन (Raj Jegannathan) ने 13 साल तक काम करने के बाद कंपनी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने यह जानकारी लिंक्डइन पर एक छोटे से पोस्ट के जरिए दी. राज जगन्नाथन ने टेस्ला में अपने सफर को “लगातार बदलते और आगे बढ़ते रहने वाली जर्नी” बताया. राज जगन्नाथन ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में लिखा कि, "13 साल के सफर को एक ही पोस्ट में समेटना आसान नहीं है. टेस्ला में यह यात्रा लगातार बदलाव और आगे बढ़ने की रही है. दुनिया के सबसे बड़े एआई क्लस्टर में से एक को डिजाइन करने, तैयार करने और चलाने की तकनीकी चुनौतियों से लेकर आईटी, सिक्योरिटी, सेल्स और सर्विस में अहम योगदान देना मेरे लिए एक सम्मान की बात रही है." हालांकि उन्होंने कंपनी छोड़ने की वजह को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की. क्या थी राज जगन्नाथन की भूमिका राज जगन्नाथन टेस्ला में वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर आईटी, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस एप्लीकेशंस और इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. पिछले साल उन्हें टेस्ला की सेल्स टीम को लीड करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. यह जिम्मेदारी उन्हें तब मिली थी जब नॉर्थ अमेरिका के सेल्स हेड ट्रॉय जोन्स को कंपनी से हटा दिया गया था. टेस्ला की गिरती बिक्री  इस समय टेस्ला कई चुनौतियों से जूझ रही है. कंपनी की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है. इसकी एक बड़ी वजह टेस्ला के पुराने हो चुके इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल माने जा रहे हैं. इसके अलावा सीईओ एलन मस्क के राजनीतिक बयानों और गतिविधियों को लेकर भी कंपनी को आलोचना का सामना करना पड़ा है. इससे टेस्ला की ब्रांड इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है. यूरोपीय बाजार में भी टेस्ला की कारों की बिक्री गिर चुकी है. EV के गढ़ में लड़खड़ाई टेस्ला  Tesla कारों की बिक्री में आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है. पहली बार घटा रेवेन्यू टेस्ला के लिए 2025 एक अहम साल साबित हुआ. इस साल कंपनी का रेवेन्यू 3 प्रतिशत गिर गया, जो अब तक का पहला मौका है जब टेस्ला की कमाई में गिरावट दर्ज की गई. अब कंपनी पर दबाव है कि वह इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री को दोबारा रफ्तार दे और लंबे समय से किए जा रहे ड्राइवरलेस तकनीक के वादों को पूरा करे. कौन हैं राज जगन्नाथन राज जगन्नाथन ने साल 2012 में टेस्ला जॉइन की थी. उस समय वे क्लाउड सिक्योरिटी और आईटी के तकनीकी विशेषज्ञ थे. धीरे धीरे उन्होंने कंपनी में ऊंचे पद हासिल किए और वाइस प्रेसिडेंट बने. टेस्ला से पहले भी उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों के साथ काम किया. उन्होंने ओरेकल में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम किया और माइक्रोसॉफ्ट के एज़्योर एआई प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े रहे. राज जगन्नाथन ने आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया है. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने भारत में इंफोसिस से की थी, जहां वे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम को लीड कर चुके हैं. राज जगन्नाथन का जाना टेस्ला के लिए ऐसे समय में हुआ है जब कंपनी पहले से दबाव में है. अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में सुस्ती है. वहीं एलन मस्क का फोकस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेल्फ ड्राइविंग सिस्टम और ह्यूमनॉइड रोबोट्स पर ज्यादा नजर आ रहा है. पिछले साल टेस्ला दुनिया की सबसे बड़ी ईवी कंपनी का खिताब भी चीन की बीवाईडी के हाथों गंवा चुकी है. दुनिया के इलेक्ट्रिक कार बाजार में BYD का दबदबा बढ़ रहा है.  टेस्ला में लगातार हो रहे बड़े इस्तीफे राज जगन्नाथन अकेले ऐसे सीनियर अधिकारी नहीं हैं जिन्होंने हाल के समय में टेस्ला छोड़ी है. पिछले कुछ सालों में कई बड़े नाम कंपनी से बाहर हो चुके हैं. एलन मस्क के करीबी माने जाने वाले ओमेद अफशार भी पिछले साल कंपनी छोड़ चुके हैं. इसके अलावा ऑप्टिमस रोबोट प्रोजेक्ट के इंजीनियरिंग हेड मिलान कोवाक और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर टीम संभालने वाले डेविड लॉ भी टेस्ला से विदा ले चुके हैं. इन लगातार हो रहे इस्तीफों ने टेस्ला के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी नजर इस पर है कि कंपनी इन चुनौतियों से कैसे उबरती है और क्या एक बार फिर अपनी खोई हुई रफ्तार हासिल कर पाती है. भारत में भी टेस्ला की शुरुआत बेहद धीमी रही है. पिछले साल जुलाई में टेस्ला ने मुंबई के बांद्र कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में देश का पहला शोरूम शुरू किया. इस दौरान कंपनी ने Tesla Model Y को इंडियन मार्केट में लॉन्च किया है, जिसकी शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये है. हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते कार की कीमत काफी ज्यादा है, और इसका असर कार सेल्स पर भी देखने को मिल रहा है. फिलहाल कंपनी इस कार की खरीद पर एक्सचेंज ऑफर भी दे रही है, ताकि बिक्री को रफ्तार दी जा सके. 

जहां 90% बिकती हैं इलेक्ट्रिक कारें, वहीं TESLA की सेल्स 88% गिरी, जानें वजह

 नई दिल्ली     यूरोप में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बात हो और टेस्ला का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. लेकिन इस बार कहानी थोड़ी उलटी है. जिस नॉर्वे को टेस्ला अपना सबसे मजबूत किला मानती रही, वहीं अब उसके दरवाजे चरमराते दिख रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि नॉर्वे की सड़कों पर इलेक्ट्रिक कारों की बाढ़ है, लेकिन EV की इस भीड़ में टेस्ला की नाव लड़खड़ा गई है. सवाल सिर्फ बिक्री घटने का नहीं है, सवाल यह है कि क्या यूरोप में टेस्ला का जादू सच में कमजोर पड़ने लगा है. बिक्री के मोर्चे पर आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है.  वहीं दूसरी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. फॉक्सवैगन ID.3 ने 299 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप पोजिशन हासिल की, जो टेस्ला से लगभग पांच गुना ज्यादा है. नॉर्वे में टेस्ला के लिए जनवरी भले ही मुश्किल रहा, लेकिन इस देश में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बनी हुई है. पिछले महीने नॉर्वे में बिकने वाली नई गाड़ियों में से करीब 94 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें थीं. डीजल गाड़ियों की सिर्फ 98 यूनिट्स बिकीं, जबकि पेट्रोल कारों का आंकड़ा केवल 7 पर सिमट गया. यह अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है. कुछ यूरोपीय देशों में टेस्ला की वापसी नॉर्वे में गिरावट के बावजूद टेस्ला को यूरोप के कुछ अन्य देशों में राहत मिली है. स्पेन में कंपनी की बिक्री 70 प्रतिशत बढ़कर 456 यूनिट्स तक पहुंच गई. इटली में 75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 713 कारें बिकीं. स्वीडन में बिक्री 26 प्रतिशत बढ़कर 512 यूनिट्स रही, जबकि डेनमार्क में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ आंकड़ा 458 यूनिट्स तक पहुंचा. इन देशों में आई तेजी का कारण टेस्ला की नई और किफायती स्टैंडर्ड मॉडल्स मानी जा रही हैं. कंपनी ने हाल ही में Model 3 और Model Y के किफायती वेरिएंट को लॉन्च किया है. जो काफी बजट फ्रेंडली है. जानकारों का मानना है कि, कम कीमत और बेहतर रेंज के चलते इन कारों को लोग प्राथमिकता दे रहे हैं. भारत में बिक्री बढ़ाने के लिए खास ऑफर भारतीय बाजार की बात करें तो यहां भी टेस्ला की हालत खराब ही है. बीते साल जुलाई में टेस्ला ने बड़े जोर-शोर के साथ इंडिया एंट्री का ऐलान किया था. कंपनी ने मुंबई के ब्रांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स (BKC) में अपना पहला शोरूम शुरू किया. जिसे बाद में दिल्ली और गुरुग्राम तक बढ़ा दिया गया है. टेस्ला ने भारत में अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 59.89 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 73.89 लाख रुपये तक जाती है. दरअसल, हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते टेस्ला की कार यहां काफी महंगी पड़ रही है. शुरुआत में ऐसी रिपोर्ट आई थी कि, कुछ ग्राहकों ने टेस्ला मॉडल वाई की बुकिंग कराई थी, लेकिन बाद में उन्होंने कैंसिल करा दी. खैर, टेस्ला भारत में भी बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रही है. कंपनी टेस्ला मॉडल Y पर खास स्कीम्स दे रही है. इसके तहत पेट्रोल या डीजल गाड़ी के बदले एक्सचेंज कराने पर ग्राहकों को 3 लाख रुपये तक का एक्सचेंज बोनस ऑफर किया जा रहा है.   

Tesla की Model Y भारत में लॉन्च, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे, कंपनी दे रही है डिस्काउंट

 नई दिल्ली  दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla ने बड़े ही जोर-शोर से भारत में एंट्री की थी. कंपनी ने बीते साल जो शुरुआती कारें भारत मंगाई थीं, उनमें से कई कारें अब तक ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाई है. हालात ऐसे हैं कि टेस्ला को अपनी ही मॉडल Y एसयूवी पर भारी छूट देनी पड़ रही है, ताकि स्टॉक में रखी हुई गाड़ियां बिक सकें. इंडिया में एंट्री के तकरीबन 6 महीनों के बाद भी टेस्ला की रफ्तार सुस्त ही है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला ने पिछले साल भारत में Model Y एसयूवी के तकरीबन 300 यूनिट को इंपोर्ट किया था. इनमें से लगभग एक तिहाई यानी करीब 100 गाड़ियां चार महीने बाद भी बिना खरीदार के खड़ी हैं. कई ऐसे ग्राहक जिन्होंने पहले बुकिंग कराई थी, उन्होंने बाद में कार खरीदारी का मन बदल लिया और बुकिंग कैंसिल करा दी. इसी वजह से कंपनी पर स्टॉक साफ करने का दबाव बढ़ गया है. Tesla पर 2 लाख का डिस्काउंट रिपोर्ट्स की माने तो कारों की बिक्री को रफ्तार देने के लिए टेस्ला कुछ वेरिएंट्स पर 2 लाख रुपये तक की छूट दे रही है. यह ऑफर खास तौर पर पिछले साल आई Model Y स्टैंडर्ड रेंज पर दिया जा रहा है. हालांकि, कंपनी ने इस डिस्काउंट ऑफर कोई बड़ा प्रचार-प्रसार नहीं किया है. बल्कि सीधे चुनिंदा ग्राहकों और टेस्ट ड्राइव लेने वालों को बताया जा रहा है. ताकि वो डिस्काउंट का लाभ उठाते हुए कार खरीद सकें. हालांकि कार पर डिस्काउंट के बारे में टेस्ला की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है.  ऊंची कीमत और टैक्स  भारत में टेस्ला की एंट्री जुलाई में हुई थी. कंपनी ने अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को भारतीय ग्राहकों के बीच लॉन्च किया. इस कार की शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई. शुरुआत मुंबई से हुई और आने वाले महीनों में कंपनी ने दिल्ली और गुरुग्राम में भी अपने शोरूम शुरू किए. इतना ही नहीं कंपनी ने देश भर के ग्राहकों के लिए कार की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू कर दी. टेस्ला को भरोसा था कि उसका ब्रांड नाम ग्राहकों को खींच लाएगा, लेकिन इंपोर्टेड कारों पर लगने वाला करीब 110 प्रतिशत तक का टैक्स कीमत को काफी बढ़ा देता है.  भारत में सुस्त शुरुआत ऐसे वक्त में हुई है, जब दुनियाभर में टेस्ला की हालत खस्ता है. बीते साल यानी 2025 में चीन की प्रमुख इलेक्ट्रिक कार कंपनी बिल्ड योर ड्रीम (BYD) ने बिक्री के मामले में टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है. अब बीवाईडी दुनिया की सबसे बेस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक कार कंपनी बन चुकी है. अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े बाजारों में भी टेस्ला की पकड़ कमजोर हुई है. भारत में कई ग्राहक टेस्ट ड्राइव के बाद दूसरे ऑप्शन की ओर मुड़ रहे हैं. कुछ को बीएमडब्ल्यू की iX1 ज्यादा किफायती लग रही है, तो कुछ को बीवाईडी की सीलायन 7 में ज्यादा फीचर्स नजर आ रहे हैं. इन दोनों की शुरुआती कीमत मॉडल Y से कम है, जिससे टेस्ला को सीधी टक्कर मिल रही है. बुकिंग ज्यादा, डिलीवरी कम रिपोर्ट्स के अनुसार, टेस्ला को भारत में मॉडल Y के लिए करीब 600 बुकिंग मिली थीं. लेकिन इनमें से बड़ी संख्या अब तक डिलीवर नहीं हो पाई है. साल 2025 में पूरे देश में सिर्फ 227 टेस्ला कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. भारत में टेस्ला की एंट्री तो जोर-शोर से हुई लेकिन अब कारों की बिक्री के आंकड़े ये साफ संकेत दे रहे हैं, भारत में टेस्ला की राह आसान नहीं है. कैसी है Tesla Model Y टेस्ला मॉडल वाई इंडियन मार्केट में दो वेरिएंट (लॉन्ग रेंज और स्टैंडर्ड) में आती है. इसमें लॉन्ग रेंज RWD वेरिएंट में 84.2kWh का बैटरी पैक दिया गया है. जो सिंगल चार्ज में 661 किमी की ड्राइविंग रेंज देती है. कंपनी का दावा है कि, ये वेरिएंट महज 5.6 सेकंड में ही 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकता है. सुपर-फास्ट DC चार्जर की मदद से इसकी बैटरी 15 मिनट में इतनी चार्ज हो जाती है कि, कार 267 किमी तक चल सकती है. इस हायर वेरिएंट की कीमत 67.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. वहीं स्टैंडर्ड वेरिएंट थोड़ा किफायती है और इसमें छोटा बैटरी पैक मिलता है. इस वेरिएंट में कंपनी ने 64kWh की बैटरी दी है. जो सिंगल चार्ज में तकरीबन 500 किमी की ड्राइविंग रेंज देता है. यह वेरिएंट 5.9 सेकंड में 0-100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ता है. DC फास्ट चार्जर से इस वेरिएंट की बैटरी 15 मिनट में इतना चार्ज हो जाती है, जिससे चालक को 238 किमी की ड्राइविंग रेंज मिलती है. स्टैंडर्ड वेरिएंट की कीमत 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है.

Tesla ने भारत में अपनी स्थिति मजबूत की, बेंगलुरु में नया शोरूम खोलने की तैयारी

बेंगलुरु   एलन मस्क के मालिकाना हक वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla ने हाल ही में जानकारी दी है कि मुंबई और दिल्ली में फिजिकल टचपॉइंट खोलने के बाद अब वह भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रही है. कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की है कि वह बेंगलुरु में अपना तीसरा और सबसे नया टचपॉइंट खोलने जा रही है. संभावना जताई जा रही है कि बेंगलुरु में इस टचपॉइंट में चार सुपरचार्जर स्टेशन लगाए जा सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और नई दिल्ली के एयरोसिटी में टचपॉइंट्स में हैं. Tesla के इंडिया पोर्टफोलियो में अभी सिर्फ़ एक कार Tesla Model Y मौजूद है. भारत में Tesla Model Y दो अलग-अलग बैटरी पैक के साथ बेची जाती है. पहला इसमें 60 kWh बैटरी पैक मिलता है, जबकि दूसरा 75 kWh बैटरी पैक मिलता है. इसके अलावा, भारत में बेची जाने वाली Tesla Model Y सिर्फ़ रियर-व्हील ड्राइव (RWD) वेरिएंट में पेश की गई है, जबकि दुनिया भर में ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) वेरिएंट बेचे जाते हैं. Tesla Model Y के दो वेरिएंट हैं, जिसमें 60-kWh बैटरी पैक वाला रियर-व्हील ड्राइव वेरिएंट शामिल है, जिसकी क्लेम्ड रेंज 500 km है. वहीं दूसरी ओर, लॉन्ग-रेंज रियर-व्हील ड्राइव वेरिएंट 75-kWh बैटरी पैक पर चलता है, जिसकी क्लेम्ड रेंज 622 km है.         इसके अलावा, कंपनी भारत में 6 लाख रुपये के प्रीमियम पर ऑटोनॉमस ड्राइविंग देने की उम्मीद कर रही है. हालांकि, भारत में सेल्फ-ड्राइविंग गाड़ियों को कंट्रोल करने वाले कानूनों में अस्पष्टता के कारण, इस फीचर को बाद में लॉन्च किया जा सकता है. Tesla Model Y की कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 59 लाख रुपये है और यह 67.89 लाख रुपये तक जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने दिल्ली NCR और मुंबई में जो सुपरचार्जर लगाए हैं, वे वर्जन 4 यूनिट हैं, जो दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी चार्ज कर सकते हैं. फिलहाल इनका इस्तेमाल सिर्फ Tesla गाड़ियों के लिए ही किया जा सकेगा, और बाद में दूसरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी चार्ज करने की अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा, Tesla ने गुरुग्राम में DLF होराइजन सेंटर में अपना पहला डेडिकेटेड चार्जिंग स्टेशन खोलकर अपने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और बढ़ाया है. इसमें कई तरह के चार्जिंग ऑप्शन हैं, जिसमें चार वर्जन 4 सुपरचार्जर यूनिट शामिल हैं, जो 250 kW की पीक आउटपुट देते हैं और तीन डेस्टिनेशन चार्जर जो 11 kW तक की पावर देते हैं. गुरुग्राम चार्जिंग स्टेशन के लॉन्च के साथ, कंपनी के पास अब तीन बड़े चार्जिंग स्टेशन हो गए हैं, जिनमें 12 सुपरचार्जर यूनिट और 10 डेस्टिनेशन चार्जर यूनिट शामिल हैं.

भारतीय मूल के करोड़पति विक्रम बेरी अरेस्ट: टेस्ला में आगजनी की साजिश का सनसनीखेज आरोप

वाशिंगटन अमेरिका में भारतीय मूल के करोड़पति व्यापारी बेरी विक्रम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक विक्रम पर आरोप है कि उन्होंने कैलिफोर्निया के बे एरिया में एक शराब की दुकान में आग लगाने की कोशिश की। जब वह इसमें असफल रहे तो टेस्ला को दूसरी गाड़ियों से टक्कर मारकर आग लगाने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम एक मानसिक स्वास्थ्य कंपनी बेटरलाइफ के संस्थापक हैं। घटना की जानकारी देते हुए सांता क्लारा काउंटी शेरिफ के कार्यालय ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में लिखा, यह घटना साराटोगा की गैरोड फार्म्स पर हुई। इस जगह पर विक्रम ने वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने विक्रम को आग लगाने की कोशिश करते हुए पकड़ा। इसके बाद उनकी कहासुनी हो गई। इस पर गु्स्साए विक्रम ने कर्मचारियों को ऊपर वाइन से भरी बोतल फेंकी और वहां से भागने की कोशिश की। अधिकारियों के मुताबिक दुकान के बाहर खड़ी अपनी टेस्ला कार में बैठकर विक्रम ने वहां पर मौजूद दो कारों में जानबूझकर टक्कर मार दी। इसके बाद दुकान के कर्मचारियों ने पुलिस को कॉल किया। पुलिस के पहुंचने पर विक्रम ने खुद को अपनी इलेक्ट्रिक कार में बंद कर लिया और बाहर आने से इनकार कर दिया। शेरिफ कार्यालय के मुताबिक, वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने विक्रम बेरी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन उसने ऐसा करने के से इनकार कर दिया। बाद में कर्मचारियों ने उसे बाहर निकालने के लिए पेपरबॉल और स्प्रे का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसे गिरफ्तार करके अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 42 वर्षीय विक्रम बेरी, मेनेलो पार्क निवासी के तौर पर हुई है। इस घटना के बाद उसके ऊपर घातक हथियार से हमला करने और गिरफ्तारी का विरोध करने का आरोप लगाया गया है। कौन हैं विक्रम बेरी? विक्रम की लिंक्डन प्रोफाइल के मुताबिक उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई अर्बाना-शैंपेन यूनिवर्सिटी से पूरी की और बाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम एक करोड़पति है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डेलॉयट में एक कंस्लटेंट के रूप में की और बाद में कुछ और कंपनियों में काम करके 2016 में खुद की कंपनी शुरू की। फिलहाल विक्रम को गिरफ्तार करके उनसे इस घटना के बारे में पूछताछ की जा रही है।  

अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और टेस्ला ने भारत में क्यों किया निवेश का ऐलान, ट्रंप के ‘डेड इकोनॉमी’ बयान के बावजूद?

 नई दिल्‍ली अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने जुलाई 2025 में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था और साथ ही भारतीय इकोनॉमी को 'डेड इकोनॉमी' कहा था. लेकिन अब अमेरिकी कंपनियां ही भारत में अपना कारोबार फैला रही है और इन कंपनियों ने लाखों करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है.  माइक्रोसॉफ्ट से लेकर अमेजन, गूगल और ओपेनएआई जैसी कंपनियों ने बड़े निवेश का ऐलान किया है. माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्‍य नडेला ने भारत में 17.5 अरब डॉलर यानी 1.57 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है, जो भारत के AI मार्केट को बढ़ाएगी.  अमेजॉन का बड़ा निवेश  माइकोसॉफ्ट के एक दिन बाद 10 दिसंबर को अमेजन ने भारत में बड़े निवेश का ऐलान किया है. अमेजॉन 2030 तक देश में 35 अरब डॉलर का निवेश करेगा, जिससे उसके सबसे बड़े ग्‍लोबल मार्केट में से एक के साथ उसके संबंध और मजबूत होंगे. ई-कॉमर्स सेक्‍टर की यह दिग्‍गज कंपनी AI और लॉजिस्टिक्‍स इंफ्रा जैसे सेक्‍टर्स में निवेश करने और अपने क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग और क्विक कॉमर्स बिजनेस को विस्‍तार करने की योजना बना रही है.  माइक्रोसॉफ्ट करेगी एशिया का सबसे बड़ा निवेश माइ्क्रोसॉफ्ट ने एशिया का सबसे बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है. पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सत्‍य नडेला ने कहा कि माइक्रोसाफ्ट की 2029 तक 17.5 बिलियन डॉलर के निवेश की योजना है. कंपनी ने कहा कि यह निवेश माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड और एआई विस्तार के लिए किया जाएगा. गूगल कितना करने वाला है निवेश?  इससे पहले अक्‍टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम में एक बड़े पैमाने पर एआई हब बनाने के लिए 15 अरब डॉलर लागत का ऐलान किया था. यह अमेरिका के बाहर कंपनी का सबसे बड़ा निवेश होगा. गूगल ने कहा था कि यह सुविधा अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर को रिन्‍यूवेबल एनर्जी क्षमता के साथ एकीकृत करेगी और भारत में गीगावाट-स्केल का पहला डेटा सेंटर कैंपस होगा. इस निवेश से 2030 तक 1 लाख तक नौकरियां पैदा हो सकती है.  इंटेल, कॉग्निजेंट और OpenAI टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इंटेल को अपने चिप प्‍लांटों में संभावित खरीदार के रूप में हासिल किया है. यह समझौता भारत की चिप उत्पादन क्षमता में इंटेल के विश्वास का संकेत देता है. कॉग्निजेंट के सीईओ रवि कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और भारत की एआई फर्स्ट पहल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है. कंपनी ने एआई को अपनाने और स्किल डेवलपमेंट में तेजी लाने की योजना का ऐलान किया है. कई रिपेार्ट में कहा गया है कि  OpenAI, Tata Consultancy Services के साथ भारत में Stargate का चैप्टर लॉन्च करने के लिए बातचीत कर रही है.  भारत में क्‍यों आ रही ये कंपन‍ियां?      भारत में इंटरनेट यूजर्स, स्मार्टफोन यूज और डिजिटल सर्विस की मांग बहुत बड़ी है. इस वजह से AI सर्विस, क्लाउड-सर्विसेज़, डेटा-प्रोसेसिंग के लिए बड़ा मार्केट है.      AI मॉडल और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए डेटा, यूजर्स बेस और क्वालिटी नेटवर्क्स बहुत मायने रखते हैं. भारत में ये सर्विसेज मजबूत हैं और तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे निवेश के लिए एक अच्‍छा माहौल मिलता है.      भारत में टेक, इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर डेवलप में बहुत कुशल लोग हैं. यहां ऑपरेशन और सर्वर/डेटा-सेंटर चलाने की लागत अमेरिका और अन्‍य वेस्‍ट कंट्री की तुलना में बहुत कम है.     भारत में पहले से ही कई IT सर्विसेज, डेटा-सेंटर, क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स  और तेजी से बढ़ती स्टार्ट-अप कल्‍चर है . इससे US कंपनियों को अपना AI-हब, क्लाउड या मॉडल-डेवलपमेंट सेंटर खोलने में अच्‍छा प्‍लेस मिल रहा है.      AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी ग्‍लोबल लेवल पर एक बड़ा ट्रेंड चल रहा है. अमेरिकी कंपनियां जैसे Microsoft, Google, Amazon आदि, चाहते हैं कि AI मॉडल, क्लाउड सर्विसेज, डेटा-हब आदि वैश्विक स्तर पर फैले. इससे इनको एक बड़ा फायदा मिल सकता है.  

सिद्धांत अवस्थी ने छोड़ा टेस्ला साइबरट्रक प्रोग्राम, इंटर्न से हेड तक का सफर

नई दिल्ली   टेस्ला के साइबरट्रक प्रोग्राम के हेड सिद्धांत अवस्थी ने इस्तीफ दे दिया है। वे करीब आठ वर्ष पहले एक इंटर्न के तौर पर कंपनी में शामिल हुए थे। यह जानकारी अवस्थी की ओर से एक सोशल मीडिया पोस्ट में सोमवार को दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में अवस्थी ने अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा, "टेस्ला में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद, हाल ही में इसे छोड़ने का फैसला किया है, जो कि मेरी जिंदगी के अब तक के सबसे कठिन फैसलों में से एक है। आठ साल पहले, जब मैंने यहां एक इंटर्न के तौर पर शुरुआत की थी, तो कभी नहीं सोचा था कि मुझे साइबरट्रक प्रोग्राम का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा।" उन्होंने आगे पोस्ट में एलन मस्क और सभी टेस्ला के लीडर्स (पूर्व और वर्तमान), मेंटर्स और सभी ग्राहकों का धन्यवाद किया। अवस्थी ने बताया कि टेस्ला में अपने आठ वर्षों के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने मॉडल 3 को बेहतर बनाने, गीगा शंघाई पर काम करने, नए इलेक्ट्रॉनिक्स और वायरलेस आर्किटेक्चर विकसित करने और साइबरट्रक पर काम करने का मौका मिला। उन्होंने पोस्ट में आगे कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, तब जब आपके सामने ग्रोथ के इतने सारे अवसर मौजूद हो। टेस्ला की गाड़ियों काफी जटिल हैं, लेकिन उन्हें वह क्रेडिट नहीं मिलता है, जो मिलना चाहिए, लेकिन ये गाड़ियां लोगों की जिंदगी को बदलने में सफल रही हैं। अवस्थी ने पोस्ट के अंत में कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि टेस्ला अपने मिशन में जरूर कामयाब होगा और मैं अपनी जिंदगी के अगले अध्याय के लिए रोमांचित हूं। टेस्ला भारत में भी कदम रख चुकी है, लेकिन कंपनी अब तक कुछ खास कमाल दिखाने में कामयाब नहीं रही है। बीते महीने कंपनी की बिक्री मजह 40 यूनिट्स थी, जिससे कंपनी की देश में संचयी बिक्री 104 यूनिट्स हो गई है।

TESLA कार में कैद होकर 5 लोगों की मौत, मामले में दायर हुई शिकायत

न्यूयॉर्क अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला (TESLA) पर विस्कॉन्सिन में हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद मुकदमा दायर किया गया है. यह हादसा पिछले साल वेरोना (मैडिसन) में हुआ था, जिसमें Model S कार सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई थी. आरोप है कि कार के डिज़ाइन में खामी के कारण उसमें बैठे पैसेंजर आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खोल पाए और अंदर ही फंसकर जल गए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये हादसा 1 नवंबर 2024 की रात का है. जब वेरोना (विस्कॉन्सिन) में टेस्ला मॉडल एस कार सड़क से स्किड होकर एक पेड़ से जा टकराई. कार में सवार जेफ़्री बाउर (54) और मिशेल बाउर (55) अपने दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे थे. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ ही क्षणों में कार में आग लग गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद कार के भीतर से चीखें सुनाई दीं, लेकिन कोई भी दरवाज़ा खोल नहीं सका.  टेस्ला पर मुकदमा बीते 31 अक्टूबर, शुक्रवार को बाउर दंपत्ति के चार बच्चों ने टेस्ला पर मुकदमा दायर किया है. उनका आरोप है कि कार के इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम में ऐसी खामी थी, जिसने उनके माता-पिता को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं दिया. शिकायत में कहा गया है कि आग लगने के बाद लिथियम-आयन बैटरी पैक ने इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया, जिससे दरवाज़े खुल ही नहीं सके. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों का कहना है कि टेस्ला को इस खामी की जानकारी पहले से थी, क्योंकि ऐसे हादसे पहले भी हो चुके थे. इसके बावजूद कंपनी ने “सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज़ करते हुए” कार के डिज़ाइन में कोई बदलाव नहीं किया. साइबरट्रक हादसे में दो छात्रों की मौत  यह पहली बार नहीं है जब टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों के सेफ्टी सिस्टम और डिज़ाइन फीचर्स पर सवाल उठे हों. कंपनी पहले भी अपनी ऑटोपायलट तकनीक और दरवाजे के ऑटोमैटिक सिस्टम को लेकर आलोचनाओं का सामना कर चुकी है. पिछले साल नवंबर में कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को उपनगर में साइबरट्रक हादसे में दो कॉलेज छात्रों की मौत हुई थी. तब भी परिवारों ने दावा किया था कि आग लगने के बाद वाहन के हैंडल डिज़ाइन के कारण छात्र बाहर नहीं निकल सके. NHTSA कर रही है जांच अमेरिकी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने सितंबर 2025 में टेस्ला के डोर डिज़ाइन की जांच शुरू की थी. कई रिपोर्टों में सामने आया कि एक्सीडेंट के समय टेस्ला कार के डोर हैंडल्स फेल हो सकते हैं. बाउर परिवार की याचिका में यह भी कहा गया है कि, पीछे की सीट पर बैठे यात्रियों को बच निकलने के लिए कार के फ्लोर मैट को हटाकर एक मेटेल के टैब को खोजना पड़ता है, जो हादसे के वक्त किसी आम व्यक्ति के लिए असंभव है. बाउर दंपत्ति के मौत के मामले वाली रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, स्थानीय निवासी ने 911 पर कॉल कर बताया कि उसने कार के भीतर से मदद की चीखें सुनीं, लेकिन कोई दरवाज़ा नहीं खुल रहा था. शिकायत में लिखा गया है, “टेस्ला के डिज़ाइन ने एक ऐसा जोखिम पैदा किया जो पूरी तरह से अनुमानित था. कि दुर्घटना में बच जाने वाले लोग जलती हुई कार में फंस जाएंगे.” इस मुकदमे में ड्राइवर को भी प्रतिवादी बनाया गया है, बाउर दंपत्ति के बच्चों का आरोप है कि चालक ने लापरवाही से वाहन चलाया, जिससे यह भयानक हादसा हुआ. यह मुकदमा डेन काउंटी की राज्य अदालत में दायर किया गया है.