samacharsecretary.com

मंत्री सारंग: शूटिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनने की राह पर

शूटिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर- मंत्री सारंग मंत्री सारंग: शूटिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनने की राह पर मध्यप्रदेश शूटिंग में अग्रणी बनने की दिशा में, मंत्री सारंग ने दी जानकारी मंत्री सारंग ने राज्य शूटिंग अकादमी का किया निरीक्षण भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने बुधवार को मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी का निरीक्षण कर वहाँ की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने अकादमी में अभ्यासरत प्रदेश के प्रतिभावान शूटिंग खिलाड़ियों से संवाद किया और उनका उत्साहवर्धन किया। मंत्री सारंग ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश शूटिंग में देश को अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना, प्रशिक्षित कोचिंग स्टाफ और उत्कृष्ट अवसर उपलब्ध करा रही है। हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को भी गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव सहयोग करेगी। सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने अकादमी परिसर की विभिन्न सुविधाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को खिलाड़ियों की सुविधाओं में बेहतरी के निर्देश दिए।  

मंत्री टेटवाल: प्रदेश के 18 हजार युवाओं को हर साल जीवन कौशल शिक्षा प्रशिक्षण

भोपाल कौशल विकास राज्य एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कौशल विकास संचालनालय में कौशल विकास विभाग एवं यूएनएफपीए की साझेदारी पर आधारित ब्रोशर का विमोचन किया। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि कौशल विकास केवल तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के व्यक्तिगत निर्माण, संर्वांगीण विकास के लिए जीवन कौशल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 18 हजार युवाओं को हर वर्ष जीवन कौशल शिक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंत्री टेटवाल ने कहा कि जीवन कौशल शिक्षा का इस वृहद स्तर पर क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के लिए अनूठी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास युवाओं को रोजगार के साथ जीवन में सफल होने के लिए भी तैयार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष कंट्री की प्रतिनिधि सुएंड्रिया एम. वोज़्नार ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन के प्रयासों और सहयोग की सराहना करती हूँ। उन्होंने कहा कि कौशल विकास संचालनालय के साथ मिलकर किये जा रहे कार्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगारपरक कौशल प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से सुदृढ़, आत्मविश्वासी और सामाजिक रूप से जागरूक भी बना रहे हैं। इस अवसर पर कौशल विकास संचालनालय द्वारा यूएनएफपीए के तकनीकी सहयोग से संचालित महत्वपूर्ण कार्यक्रम जीवन कौशल शिक्षा (जीवन तरंग), मानसिक स्वास्थ्य एवं सजगता कार्यशाला एवं डिजिटल स्टोरीटेलिंग कार्यशाला से संबंधित प्रशिक्षण अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर कार्यक्रम की उपलब्धियों, विस्तार योजनाओं तथा प्रशिक्षकों के अनुभवों को भी साझा किया गया। यह साझेदारी मध्यप्रदेश को कौशल विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।  

इस महीने बिहार वालों को मिलने वाली है ‘विज्ञान का तीर्थ’ की सौगात!

इस माह के अंत तक खुलेगी डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी  इस महीने बिहार वालों को मिलने वाली है ‘विज्ञान का तीर्थ’ की सौगात!    बिहार को मिलेगा ‘विज्ञान का तीर्थ’! इस महीने होगा उद्घाटन… जानिए कैसा होगा  500 सीटों का ऑडिटोरियम, सेल्फी प्वॉइंट और 269 विज्ञान प्रदर्श वाली होगी सांइस सिटी पटना  बिहार और खास कर पटना के लोगों को जल्‍द ही एक जबरदस्‍त सौगात मिलने वाली है। महान वैज्ञानिक और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की स्मृति में बन रही साइंस सिटी इसी माह के अंत तक जनता के लिए समर्पित होगी। भवन निर्माण विभाग ने इसकी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। लगभग 20.5 एकड़ में फैली यह भव्य साइंस सिटी मोईन-उल-हक स्टेडियम के पास तैयार की गई है। साइंस सिटी का निर्माण बिहार की विज्ञान और शिक्षा यात्रा को एक नई ऊंचाई देगा।  होंगी ये पांच गैलरियां  बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी बेसिक साइंस गैलरी सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी गैलरी बॉडी एंड माइंड गैलरी 26 थीम पर आधारित होगी गैलरी यहां बनाए जा रही पांच गैलरियों को 26 थीम से सजाया जाएगा। जिस पर 269 विज्ञान प्रदर्श लगाए जाएंगे। पहले चरण में बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी और बेसिक साइंस गैलरी में 47 प्रदर्श स्थापित किए जा रहे हैं। जो विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए अद्भुत होगा। साइंस सिटी सिर्फ विज्ञान प्रदर्श तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह युवाओं और बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का बेहतरीन संगम बनेगी। साइंस सिटी में ये भी ​​होगा खास 500 सीटों की क्षमता वाला आधुनिक ऑडिटोरियम 150 छात्रों व 3 शिक्षकों के लिए डोरमेटरी 4डी थियेटर, बहुउद्देशीय हॉल और प्री-फंक्शनल हॉल कैफेटेरिया, पार्किंग, पेयजल और शौचालय एट्रियम बनेगा आकर्षण साइंस सिटी का एट्रियम एरिया खास तौर पर आकर्षक का केंद्र होगा। यहां सेल्फी पॉइंट, डिजिटल पैनल और म्यूरल्स लगाए जा रहे हैं। यानी यहां सिर्फ विज्ञान ही नहीं, बल्कि खूबसूरत माहौल का भी अनुभव मिलेगा। विद्यार्थियों और युवाओं के लिए बड़ा तोहफ़ा भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि के मुताबिक साइंस सिटी का सिविल वर्क पूरा हो चुका है और प्रदर्शों की इंस्टॉलेशन तेजी से हो रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी की जा रही है। यह साइंस सिटी न सिर्फ विद्यार्थियों बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए विज्ञान और नवाचार का अनूठा केंद्र बनने जा रही है।

महाराष्ट्र में रेल निर्माण स्थल पर त्रासदी, 4 बच्चों की झुलसती मौत

यवतमाल  महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के दारव्हा में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां रेलवे निर्माण के लिए खोदे गए एक गहरे गड्ढे में डूबकर चार मासूम बच्चों की जान चली गई. यह हादसा बुधवार शाम को दारव्हा-नेर मार्ग के पास रेलवे स्टेशन परिसर में हुआ. इस घटना में मारे गए बच्चों की पहचान रिहान असलम खान (13), गोलू पांडुरंग नारनवरे (10), सोम्या सतीश खडसन (10) और वैभव आशीष बोधले (14) के रूप में हुई है, ये सभी दारव्हा के रहने वाले थे. दरअसल, वर्धा-यवतमाल-नांदेड रेलवे परियोजना का काम तेजी से चल रहा है. इस दौरान पुलों के खंभे बनाने के लिए कई गहरे गड्ढे खोदे गए हैं. गड्ढों में उतर गए थे बच्चे हाल की भारी बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए थे, लेकिन इनके चारों ओर कोई भी सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया था. बुधवार दोपहर ये बच्चे नहाने के लिए इन गड्ढों में उतर गए. पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे डूबने लगे. आसपास के लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और तुरंत दारव्हा के उप जिला अस्पताल ले गए. बाद में, गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें यवतमाल के संजीवनी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया.

दिव्यांग कल्याण परिषद ने विधायक को सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र, पेंशन बढ़ाने की मांग

दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य,10 सूत्रीय मांगों का सौपा मांग पत्र,दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन 600 से बढ़ा कर 5 हजार कराये,सरकार तक भेजे हमारी मांगे,आज जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याए आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा में दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य आज विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में पहुचे । दिव्यांग जनों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र विधायक को सौपा एवं उनकी मांगों को शासन तक पहुचने एवं उन मांगो को पूर्ण कराने की मांग की । सौपे गये मांग पत्र में मांग की गई कि अभी दिव्यांजनो को 600₹ पेंशन मिलती है सरकार उसे बढ़ा कर 5 हजार करे । दिव्यांग जनों को एवं आये अन्य  ग्रामीणोंजनों को विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने भरोसा दिया कि उनकी समस्या को जल्द हल कर जो मांग शासन स्तर की है उसे वे शासन तक पहुचायेंगे । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । आज जनसुनवाई में कई विभागों के 44 आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा,जो मांग शासन स्तर की है उनेह वे शासन तक पहुचायेंगे। मीडिया प्रभारी सुशील संचेती ने जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में दिव्यांजनो की दस सूत्रीय मांगों के साथ घाटे वाले बाबा स्थल पर चबूतरा एवं टीन शेड निर्माण कराने,किसान सम्मन निधि अप्राप्त होने की शिकायत,मकान का पट्टा दिलाने,ग्राम टिंगम टेकरी मांडा गुराडिया तहसील जावर में मकान का पट्टा दिलाने,करंट लगने पर आर्थिक सहायता प्रदाय हेतु,स्पेशल मोबाइल एवं दिव्यांगों के लिए छड़ी प्रदाय हेतु मांग पत्र,दुपाड़िया से मुंदीखेड़ी तक रोड एवं डीपी हेतु आवेदन,अज्ञात वाहन से टक्कर मारने पर सहायता राशि दिलाने,काजीपुरा वार्ड क्रमांक 9 आष्टा में बाउंड्री वॉल एवं तीन पहिया वाहन दिलाने,ग्राम पंचायत अरनिया जोहरी में वाधयन्त्र हेतु राशि स्वीकृत करने, इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन हेतु आवेदन,आर्थिक सहायता की मांग,प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय हेतु मांग सहित अन्य 44 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

अब मातृत्व का सपना टाले बिना पूरा करें करियर गोल्स, जानें Egg Freezing से जुड़े जरूरी तथ्य

नई दिल्ली मातृत्व का सफर महिलाओं के लिए हमेशा से एक भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दा रहा है. मां बनना, अपनी गोद में अपने अंश को देखना आज भी हर महिला के लिए सबसे अहम है लेकिन कई बार करियर की दौड़, परिवार की जिम्मेदारियां या सही साथी न मिल पाने की वजह से यह सपना पूरा नहीं हो पाता और समय की बाध्यताएं उनके मातृत्व के सपनों को चुनौती देती हैं. यहीं से आता है एग फ्रीजिंग का चलन. एक ऐसा आधुनिक समाधान जो महिलाओं को उनके सपनों को जीवित रखने का अवसर देता है. भारत में बढ़ा एग फ्रीजिंग का ट्रेंड हाल के वर्षों में, भारत में एग फ्रीजिंग का ट्रेंड काफी प्रचलित हुआ है. एग फ्रीजिंग को मेडिकल भाषा में Oocyte cryopreservation कहते हैं, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें महिलाएं अपने अंडों को भविष्य के लिए संरक्षित कर सकती हैं, ताकि जब वे तैयार हों, तब मां बनने का सपना पूरा कर सकें. यह तकनीक न केवल करियर और मातृत्व के बीच संतुलन लाने में मदद करती है, बल्कि महिलाओं को बिना किसी बंधन के, बिना किसी जल्दबाजी के, अपने समय पर मां बनने का अधिकार देती है. आसान हो रही है egg freezing की प्रक्रिया पिछले पांच सालों में भारत में एग फ्रीजिंग की मांग में काफी वृद्धि हुई है. Egg Preservation Institute of Asia (EIPA) जो भारत में शुरू हुआ एक लीडिंग फर्टिलिटी क्लिनिक है, उसने कुछ समय पहले एट-होम एग फ्रीजिंग की शुरुआत की है. यह सर्विस के जरिए लगभग पूरी एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया को घर में ही निजता और आसानी से किया जा सकता है.   क्यों महिलाएं करा रहीं एग फ्रीज? अंडों को फ्रीज करने का विकल्प महिलाओं को आजादी देता है और उन्हें अपनी इच्छा के मुताबिक संतान पैदा करने का अधिकार देता है. लगातार महंगी हो रही एजुकेशन और करियर के दबाव की वजह से अधिकांश जोड़े आजकल देर से और करियर में सेटल होने के बाद ही मां-बाप बनने की प्लैनिंग कर रहे हैं ताकि संतान आने से पहले ही वो आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएं.  Oocyte cryopreservation महिला की फर्टिलिटी क्लॉक, हेल्थ इश्यूज, मेनापॉस या लाइफस्टाइल से प्रभावित हुए बिना अंडों को संरक्षित रखने में मदद करता है जिसके बाद वो In vitro fertilization (IVF) के जरिए बाद में इन अंडों का उपयोग मां बनने के लिए कर सकती हैं.  कब तक करा लेनी चाहिए egg freezing दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नीलम सूरी egg freezing (अंडे जमाना) के बारे में बात करते हुए 'आजतक डॉट इन' से कहती हैं, भारत समेत पूरी दुनिया में महिलाओं की प्रजनन शक्ति (fertility) पहले से कम हुई है. वहीं, 30-35 वर्ष के बाद महिलाओं के अंडाणु की संख्या और गुणवत्ता तेजी से गिरती है जिससे गर्भधारण के अवसर कम होते जाते हैं. इस वजह से महिलाएं अब अपने अंडों को लैब में फ्रीजिंग कर रही हैं ताकि उन्हें शादी या बच्चे की प्लानिंग के लिए बाद में उपयोग कर सकें. कैसे होता है egg freeze अमेरिका के ओहियो में हाल ही में 30 साल पुराने फ्रीज्ड अंडे से एक दम स्वस्थ बच्चा पैदा हुआ है. इस बारे में डॉ. नीलम बताती हैं कि अंडाणु जमा कराना एक सुरक्षित प्रक्रिया है जिसमें महिला के अंडाशय से अंडाणु निकालकर उन्हें -196 डिग्री सेल्सियस पर फ्रीज कर दिया जाता है जो 20 साल तक सुरक्षित रहते हैं. कैंसर जैसी बीमारियों में भी महिलाओं के लिए एग्स फ्रीजिंग जरूरी होती है क्योंकि रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी से एग्स नष्ट हो सकते हैं. एग फ्रीजिंग का सक्सेस रेट क्या है इस सवाल के जवाब में डॉक्टर नीलम ने कहा, 'गर्भधारण की सफलता मुख्य रूप से अंडाणु की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. 35 साल से पहले अंडा जमाने पर सक्सेस रेट करीब 60-70% होता है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह घटता जाता है. इसलिए एग फ्रीजिंग जितना जल्दी हो उतना बेहतर होता है.  ज्यादातर मामलों में 20-30 वर्ष के बीच ही ऐसा कर लेना चाहिए.'  क्या कोई भी महिला एग फ्रीजिंग करा सकती है  डॉ. नीलम ने बताया कि भारत में एग फ्रीजिंग कानूनी रूप से वैध है और यह महिला के अपने शरीर की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है. इसलिए कोई भी इसे करा सकता है. हालांकि इसके लिए मेडिकल सलाह जरूरी है, खासकर अगर महिला को कोई गंभीर बीमारी है या उसकी फर्टिलिटी गिर रही है. एग फ्रीजिंग का फैसला महिला के व्यक्तिगत कारणों और मेडिकल इंडिकेटर्स पर आधारित होता है. आखिर में वो बताती हैं कि अंडाणु जमाने के बाद भ्रूण में कोई आनुवांशिक समस्या न हो, इसके लिए PGD (preimplantation genetic diagnosis) कराना चाहिए ताकि स्वस्थ बच्चे का जन्म हो सके. egg freezing एक सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है. यह उनके लिए फायदेमंद है जो सही पार्टनर ना मिल पाने के कारण लेट मैरिज कर रही हैं, करियर को लेकर ज्यादा फोकस्ड हैं, या फिर किसी मेडिकल कंडीशन से जूझ रही हैं. महिलाएं सीमित अंडों के साथ पैदा होती हैं लखनऊ में सी के बिड़ला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की सेंटर हेड डॉक्टर श्रेया गुप्ता का कहना है कि पुरुषों की तरह महिलाओं में अंडों का उत्पादन पूरे जीवन भर नहीं होता है. महिलाओं के अंडाणु (Eggs) पहले से निश्चित संख्या में होते हैं जो जन्म के समय सबसे ज्यादा होते हैं लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है उनकी संख्या और गुणवत्ता कम होती जाती है.   उदाहरण के लिए 30 के बाद लगभग बड़ी संख्या में एग्स खत्म हो जाते हैं और 37 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते यह करीब 90% तक कम हो जाते हैं. इस वजह से भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में एग फ्रीजिंग की मांग बढ़ी है. इन बीमारियों के इलाज से पहले करानी चाहिए एग फ्रीजिंग ऑटोइम्यून और कैंसर जैसी कई बीमारियों के इलाज से पहले भी अंडाणु फ्रीज कराए जा सकते हैं क्योंकि कैंसर की दवाएं अंडाणु को नुकसान पहुंचा सकती हैं.  आज के समय में 10 से 15 वर्षों तक अंडाणु सुरक्षित रखे जा सकते हैं. हालांकि अंडाणु में लंबी अवधि तक स्पर्म या भ्रूण (एंब्रियो) की तुलना में कम समय तक सुरक्षित रह सकते हैं.   कुछ महिलाओं के 50 की उम्र के बाद भी पीरियड्स आते हैं लेकिन वो … Read more

उपभोक्ता आयोग का काम प्रशंसनीय: 3.07 लाख से अधिक प्रकरण हुए निराकृत, 78 हजार का 90 दिन में निपटान

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में उपभोक्ताओं के आवेदन पर लगातार कार्यवाही की जा रही है। जून 2025 तक कुल 3 लाख 7 हजार 536 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। कुल प्राप्त प्रकरण संख्या 3 लाख 31 हजार 789 हैं। राजपूत ने बताया है कि निराकृत प्रकरणों में से 78 हजार 20 प्रकरणों का निराकरण 90 दिन में किया गया। उपभोक्त विवाद प्रतितोषण आयोग अंतर्गत जिला अनूपपुर में 475, अशोकनगर में 2365, बड़वानी 1093, बालाघाट 3571, बैतूल 2228, भिंड 6175, भोपाल क्रं-एक 19 हजार 498, भोपाल क्रं-2 4395, बुरहानपुर 1739, छतरपुर 6579, छिंदवाड़ा 6479, दमोह 5634, दतिया 5821, देवास 3313, धार 4337, डिंडोरी 676, गुना 10 हजार 865, ग्वालियर 23 हजार 210, हरदा 3014, इंदौर क्रं-1 में 27 हजार 916, इंदौर क्रं-2 में 5863, जबलपुर क्रं-1 में 15 हजार 464, जबलपुर क्रं-2 में 3566, झाबुआ 1288, कटनी 3781, खंडवा 6081, मंडला 4785, मंडलेश्वर 4063, मंदसौर 7954, मुरैना 9162, नर्मदापुरम 5597, नरसिंहपुर 2536, नीमच 1995, पन्ना 1585, रायसेन 1193, राजगढ़ 5050, रतलाम 3999, रीवा 11 हजार 904, सागर 9297, सतना 11 हजार 65, सीहोर 6565, सिवनी 4051, शहडोल 1801, शाजापुर 3190, श्योपुर 2258, शिवपुरी 11 हजार 84, सीधी 2172, टीकमगढ़ 3428, उज्जैन 12 हजार 537, उमरिया 485 और विदिशा में 4354 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।  

शाही विरासत पर सुलगा विवाद: भोपाल में 15000 करोड़ की संपत्ति पर 20+ दावेदारों का दावा

भोपाल  शाही परिवार की संपत्ति का विवाद फिर से सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने MP हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति से जुड़ा है। नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान को 1962 में एकमात्र वारिस घोषित किया गया था। साजिदा सुल्तान, फिल्म अभिनेता सैफ अली खान की दादी हैं। अब नवाब के भाइयों और अन्य रिश्तेदारों के वंशज इस दावे का विरोध कर रहे हैं। नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशजों ने दी याचिका सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और अतुल चन्दुरकर की बेंच ने 8 अगस्त को यह फैसला सुनाया। उन्होंने उमर फारूक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया। ये दोनों नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशज हैं। उनके वकील आदिल सिंह बोपराई ने बताया कि MP हाई कोर्ट ने 30 जून को फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि नवाब की संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। यह फैसला 'तलत फातिमा (रामपुर) केस' पर आधारित था। हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले को फिर से विचार करने के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट में इसी फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने सैफ की फैमिली के पक्ष में दिया था फैसला 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने 'तलत फातिमा रामपुर केस' में फैसला दिया था कि शाही संपत्ति का बंटवारा पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। MP हाई कोर्ट ने 2000 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (दिवंगत क्रिकेटर) और उनके कानूनी वारिसों (सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और शर्मिला टैगोर) के अधिकारों को सही माना था। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला 1997 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर आधारित था, जिसे 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था। और भी हैं इस मामले में पेंच इस संपत्ति विवाद में एक और पेच है। 2015 में सरकार ने आबिदा सुल्तान की संपत्ति को जब्त कर लिया था। आबिदा सुल्तान, हमीदुल्लाह खान की सबसे बड़ी बेटी थीं। वह पाकिस्तान चली गई थीं। भारत में उनकी संपत्ति को 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दिया गया है। जबलपुर के वकील राजेश कुमार पंचोली के अनुसार, आबिदा सुल्तान 1972 के मूल मामले में शामिल थीं। इस मामले में भोपाल की शाही संपत्ति के लिए 20 से अधिक दावेदार थे। रामपुर केस की चर्चा क्यों हो रही है? 2019 का रामपुर केस इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें कहा गया था कि सभी वारिसों को, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। लेकिन पंचोली का कहना है कि यह मामला भोपाल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो सकता। 1972 से नवाब की कई संपत्तियां, जो भोपाल, सीहोर और रायसेन में फैली हुई हैं, वो या तो बेची जा चुकी हैं या दूसरों के कब्जे में हैं। फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान किसी भी नई बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी है।  

मध्य प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या में इजाफा, परिसीमन से पहली सीट का नाम सामने आया

भोपाल   मध्यप्रदेश के आगामी 2028 विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि धार जिले से अलग होकर औ‌द्योगिक नगरी पीथमपुर (Pithampur) को स्वतंत्र विधानसभा सीट का दर्जा मिल सकता है। बढ़‌ती आबादी और मतदाताओं की संया को देखते हुए यह फैसला लगभग तय माना जा रहा है। वर्तमान में धार जिले में सात और इंदौर जिले में नौ विधानसभा सीटें हैं। दोनों जिलों की कुल आबादी और मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। धार में बनेंगी दो नई विधानसभा सीटें राजनीतिक गलियारों में 2028 के विधानसभा चुनाव (mp assembly elections 2028) से पहले होने वाले परिसीमन और महिला आरक्षण पर निगाह टिकी हुई है। इससे जहां नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे, वहीं दावेदारों के साथ-साथ विधायकों की संख्या में भी इजाफा होगा। औसतन एक विधानसभा में ढाई से लेकर तीन लाख मतदाता ही रहेंगे और मौजूदा विसंगतियों को दूर किया जाएगा। अभी धार सहित देश-प्रदेश में विधानसभा-लोकसभा सीटों के क्षेत्रफल और आबादी यानी मतदाताओं में भारी विसंगति है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार में दो नई सीटें बन सकती हैं। इससे जहां मौजूदा विधायकों का गणित बिगड़ेगा, वहीं नए चेहरों को भी मौका मिलेगा। मुस्लिम वोट नहीं होंगे निर्णायक सूत्रों का कहना है कि धार जिले का परिसीमन विशेषज्ञता के साथ किया जाएगा कि किसी भी सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में नहीं रह सके। कांग्रेस-भाजपा के लिए चुनौती पीथमपुर को नई विधानसभा बनने पर दोनों दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। कांग्रेस को संगठन खड़ा करने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा को औ‌द्योगिक मजदूरों और ग्रामीण वोट बैंक के बीच संतुलन साधना पड़ेगा। अनुमान है कि नई सीट में ढाई से तीन लाख मतदाता होंगे, जिनमें मजदूर, कर्मचारी और ग्रामीण समाज की भूमिका निर्णायक रहेगी। 2026 के बाद होगा परिसीमन संविधान संशोधन के तहत 2026 तक लोकसभा और विधानसभा सीटें बढ़ाने पर रोक है। लेकिन जनगणना 2026 के बाद नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होगा। तब मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटें बढ़कर 280 तक हो सकती हैं, वहीं लोकसभा की 29 सीटें बढ़कर 35 से 40 तक पहुंचने का अनुमान है। पीथमपुर विधानसभा में आएंगे ये क्षेत्र इस समय पीथमपुर धार विधानसभा का हिस्सा है, लेकिन औ‌द्योगिक इकाइयों, मजदूर बस्तियों और ग्रामीण अंचल की वजह से यहां मतदाताओं की संया लगातार बढ़ रही है। प्रस्तावित परिसीमन के बाद प्रीति नगर, अकोलिया, बरदरी, खेड़ा, सागौर कुटी और इंडोरामा सहित आसपास के क्षेत्र नई पीथमपुर विधानसभा में शामिल किए जा सकते हैं। धार का क्षेत्रफल और मतदाता घटेंगे, जबकि पीथमपुर की अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनेगी।

धर्म परिवर्तन विवाद: इंदौर में बहू पर पति को मुस्लिम बनाने का आरोप, परिजनों ने पुलिस में दी शिकायत

इंदौर  इंदौर जिला न्यायालय ने एक बहू के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मंगलवार को मामला दर्ज किया है। आरोप है कि विवाह के बाद महिला ने हिंदू पति और ससुराल पक्ष पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी। शादी के कुछ दिनों बाद ही बढ़ने लगे विवाद मरीमाता क्षेत्र की एक युवती का विवाह अप्रैल 2022 में एरोड्रम इलाके के युवक से हुआ था। ससुराल पक्ष के अनुसार, महिला विवाह के बाद केवल 15–20 दिन ही घर पर रही। इस दौरान वह अपने मुस्लिम मित्रों के प्रभाव में आकर मुस्लिम धर्म की इबादत करने लगी। परिवार का आरोप है कि बहू दरगाह जाकर ताबीज, भभूत और फल लाकर जबरदस्ती पति को खिलाने लगी। जब धर्म परिवर्तन के लिए पति ने मना किया तो महिला ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या करने की धमकी दी। पति और सास पर दबाव, 10 लाख की मांग ससुराल वालों ने बताया कि एक दिन बहू ने अपनी अलमारी से सभी जेवर निकाल लिए और कहा कि वह "अल्लाह के सजदे" में जा रही है। उसने पति से भी साथ चलने का दबाव बनाया। 17 मार्च 2024 को महिला अपने मायके वालों और दोस्तों के साथ घर आई और 10 लाख रुपए की मांग की। इसी दौरान उसने पति को धर्म बदलने का दबाव बनाकर धमकाया। ससुराल पक्ष ने पुलिस को बुलाया, लेकिन महिला और उसके साथी मौके से चले गए। पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं परिवार ने वर्ष 2024 में ही पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। एरोड्रम थाने में मामला दर्ज भी हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद भी बहू लगातार ससुराल पर दबाव बनाती रही। अदालत ने लिया संज्ञान, बहू को नोटिस थक हारकर परिवार ने एडवोकेट डॉ. रुपाली राठौर और कृष्ण कुमार कुन्हारे के माध्यम से जिला न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया। अदालत को दी गई जानकारी में पीड़ित पति और सास ने बहू की धमकियों और जबरदस्ती का पूरा ब्यौरा दिया। महिला एवं बाल विकास अधिकारी की गोपनीय जांच रिपोर्ट में भी बहू द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की पुष्टि हुई। इसके आधार पर अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत केस दर्ज कर बहू को नोटिस जारी किया है।