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AMU कुलपति नियुक्ति मामले में जज ने लिया अलग रुख, सुनवाई से हटे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की कुलपति के रूप में प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ मुजफ्फर उरुज रब्बानी द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नईमा की नियुक्ति को बरकरार रखा गया था। वह संस्थान के इतिहास में इस पद पर आसीन होने वाली पहली महिला हैं। कोर्ट को बताया गया कि नईमा अपने पति का महत्वपूर्ण वोट पाकर कुलपति (वीसी) बनीं। उस समय उनके पति एएमयू के कुलपति थे। याचिकाकर्ता ने पति द्वारा अपनी पत्नी के पक्ष में दिए गए वोट को ''हितों का टकराव'' बताया। चीफ जस्टिस ने कहा कि आदर्श रूप से कुलपति को नियुक्ति प्रक्रिया में भाग नहीं लेना चाहिए था, बल्कि संस्थान के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसमें भाग लेने देना चाहिए था। जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सुनवाई से खुद को किया अलग बहरहाल, जस्टिस चंद्रन ने इसी तरह की चयन प्रक्रिया में एक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में अपनी पिछली भूमिका का हवाला देते हुए मामले से खुद को अलग करने की पेशकश की। उन्होंने कहा, ''जब मैंने फैजान मुस्तफा का चयन किया था, तब मैं सीएनएलयू (कंसोर्टियम आफ नेशनल ला यूनिवर्सिटी) का कुलाधिपति था..इसलिए मैं खुद को सुनवाई से अलग कर सकता हूं।'' जस्टिस चंद्रन को फैसला करने दें- चीफ जस्टिस इस पर सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''हमें (जस्टिस चंद्रन पर) पूरा भरोसा है। सुनवाई से अलग होने की कोई जरूरत नहीं है। आप पूरी तरह से फैसला कर सकते हैं।'' बहरहाल, चीफ जस्टिस ने कहा, ''मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को फैसला करने दें। इस मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसका हिस्सा जस्टिस चंद्रन नहीं हैं।'' यह याचिका अब एक अलग पीठ के समक्ष जाएगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया।  

मध्यप्रदेश की नदियाँ भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश है नदियों का मायका भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत का हृदय मध्यप्रदेश, यहां के अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य और अथाह, अविरल जल राशि के लिए समूचे विश्व में जाना जाता है। मध्यप्रदेश में बहने वाली नदियां भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक हैं, जिनके किनारे सदियों से हमारी शाश्वत सभ्यता फल फूल रही है। यहाँ की पहचान केवल प्राचीन धरोहरों, मंदिरों, किलों और जनजातीय संस्कृति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की छोटी-बड़ी 750-800 नदियों से भी है।प्रदेश की इस समृद्ध जल राशि के कारण ही मध्यप्रदेश को ‘नदियों का मायका’ कहा जाता है। मध्यप्रदेश से उद्गमित छोटी-बड़ी नदियाँ, गंगा, नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, माही और महानदी जैसे विशाल नदी प्रवाह तंत्रों में समाहित होकर पूरे भारत की जीवन-रेखा बनाती हैं। मध्यप्रदेश की नदियाँ केवल भौतिक जल स्रोत नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक भी हैं। नदियों के किनारे प्राचीन नगरों, धार्मिक स्थलों और व्यापारिक मार्गों का विकास हुआ। क्षिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन प्राचीन समय से ही खगोल विज्ञान और श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लंग के कारण धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। प्राचीन उज्जयिनी सिंहस्थ ‘कुंभ’ समागम का तीर्थ क्षेत्र भी है। नर्मदा नदी के तट पर बसे महेश्वर और ओंकारेश्वर शहर शैव परंपरा के प्रमुख तीर्थ-स्थल हैं। ओंकारेश्वर 12 ज्योर्तिलिंगों में एक है। बेतवा नदी के तट औऱ प्रवाह क्षेत्र के ओरछा, सांची और विदिशा मध्यकालीन भारत की सांस्कृतिक यशोगाथा के प्रतीक होने के साथ ही बौद्ध संस्कृति के उदयावसान के साक्षी भी रहे हैं। मध्यप्रदेश का अधिकांश भूभाग विंध्य और सतपुड़ा की पहाड़ियों से आच्छादित है। यही कारण है कि यह अनेक महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है। नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ हैं, जबकि सोन, क्षिप्रा, चंबल, बेतवा उत्तर और पूर्व की ओर बहकर अपनी अथाह जलराशि के साथ गंगा-यमुना में समाहित हो जाती हैं। माही, वैंगंगा, तवा जैसी नदियाँ भी अलग-अलग बेसिन को जल-पोषित करती हैं। इस भौगोलिक विविधता ने ही प्रदेश को नदी समृद्ध राज्य के रूप में प्रतिष्ठा दी है। पुण्य सलिला मां नर्मदा का दूसरा नाम रेवा भी है।भगवान शिव की पुत्री मानी जाने वाली रेवा मध्यप्रदेश और गुजरात दोनों की जीवन रेखा है। मान्यता है कि मां नर्मदा के दर्शन मात्र से ‘गंगा स्नान’ का पुण्य मिलता है। श्रद्धालुओं के लिए 3000 किमी से अधिक लंबी नर्मदा परिक्रमा जीवन का सबसे बड़ा तप माना जाता है। मां नर्मदा अमरकंटक से जन्म लेकर लेकर जबलपुर में धुआंधार जलप्रपात बनाती हुई गुजरात को अभिसिंचित कर लगभग 1312 किलोमीटर की यात्रा तय कर अरब सागर की खंभात की खाड़ी में विराम पाती हैं। महाभारत काल में चंबल नदी का नाम चर्मणवती था। यह भगवान परशुराम के जन्म-स्थल जानापाव से निकली। यह राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा बनाती है। जानापाव से निकलकर चंबल नदी मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित ‘पंचनदा’ संगम पर यमुना में परिमित जलराशि के साथ समाहित हो जाती है। बेतवा (वेत्रवती)  को मध्यप्रदेश की गंगा भी कहा जाता है। इसके तट पर राम राजा का ऐतिहासिक शहर ओरछा बसा है। विदिशा और सांची जैसे नगरों को भी इसने पोषित किया है। विंध्यांचल पर्वत से निकल कर लगभग 590 किलोमीटर दूरी तय कर यमुना नदी में जा मिलती है।  मोझदायिनी क्षिप्रा नदी के तट पर प्राचीन उज्जयिनी शहर बसा है। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर और सिंहस्थ कुम्भ समागम का यह तीर्थ क्षेत्र विश्वविख्यात है। क्षिप्रा को भी मालवा की गंगा कहा जाता है। क्षिप्रा नदी इंदौर जिले में उज्जैनी-मुंडला गांव के ककड़ी-बड़ली नामक स्थान से निकल कर लगभग 195 किलोमीटर की यात्रा के बाद चंबल नदी में मिल जाती है। रामायण और महाभारत में सोन नदी का उल्लेख मिलता है। इसे पुरुष वाचक ‘नद’ की संज्ञा भी दी गई है। महर्षि वाल्मीकि ने इसे सुभद्र कहा है। यह नदी प्रदेश में शहडोल और रीवा के क्षेत्रों को सींचती हुई बिहार में प्रवेश कर लगभग 784 किलोमीटर लंबी यात्रा के बाद पतितपावनी गंगा से संगम करती है। ताप्ती नदी सतपुड़ा की पहाड़ियों से निकलकर गुजरात तक जाती है और लगभग 724 किलोमीटर की दूरी तय कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। माही नदी की विशेषता है कि यह कर्क रेखा को दो बार पार करती है। माही नदी भी मध्यप्रदेश से गुजरात तक 583 किलोमीटर की यात्रा कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। मध्यप्रदेश से उद्गम पाने वाली अन्य प्रमुख नदियों में वैंनगंगा गोंडवाना क्षेत्र की जीवनरेखा है। तवा नर्मदा की सहायक नदी है, जिस पर मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा बाँध बना है। कालीसिंध, पार्वती, केन, शक्कर, जोहिला  स्थानीय कृषि और वन्य जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। मध्यप्रदेश की नदियों पर अनेक सिंचाई एवं जलविद्युत परियोजनाएँ बनी हैं, जिनसे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। चंबल-पार्वती-कालीसिंध रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों के साझा महत्व की परियोजना है। केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए समृद्धि की गंगोत्री मानी जा रही है। ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्च परियोजना मध्यप्रदेश के बुरहानपुर एवं खंडवा और महाराष्ट्र के अकोला, अमरावती और बुलढाणा ज़िलों के भू-जल संकट और अनियमित वर्षा की समस्या का स्थायी समाधान मानी जा रही है। बाणसागर परियोजना सोन नदी पर बनी है। इससे शहडोल, रीवा और सीधी जिलों को लाभ पहुंच रहा है। तवा परियोजना नर्मदा की सहायक तवा पर निर्मित है। इससे होशंगाबाद क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल की पूर्ति हो रही है। गांधीसागर परियोजना चंबल नदी पर बनाई गई है। इससे  जलविद्युत बनाई जा रही है, साथ ही बड़े क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। ओंकारेश्वर एवं बरगी परियोजना नर्मदा नदी पर निर्मित है।  

टोल कर्मियों ने ड्यूटी पर जा रहे सैनिक को पीटा और बांधा

मेरठ देश की सरहद पर रहकर अपनी जान की बाजी लगाते हुए देश की सुरक्षा करने वाले सेना के जवान को टोल कर्मियों ने खंबे से बांधकर जमकर पीटा । टोल कर्मियों के द्वारा सेना के जवान की खंभे से बांधकर पिटाई किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है । इस वीडियो में साफतौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह करीब दर्जन पर दबंग टोलकर्मी सेना के जवान को खंभे से बांधकर बेतहाशा पीटते हुए नजर आ रहे हैं । दरअसल,  यह पूरा मामला जिले के थाना सरूरपुर क्षेत्र के भूनी टोल प्लाजा का है । सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह टोल पर मौजूद दबंग टोल कर्मचारियों के द्वारा एक युवक को खंबे से बांधकर पीटा है। करीब दर्जन भर टोलकर्मी बेतहाशा जिस युवक को पीट रहे हैं उसका नाम है कपिल जोकि थाना क्षेत्र के ही गोटका गांव का रहने वाला है और वो सेवा की राजपूत बटालियन में श्रीनगर में तैनात है। सेना के जवान को श्रीनगर ड्यूटी पर जाना था बताया जा रहा है कि कांवड़ यात्रा की छुट्टी के बाद कपिल वापस श्रीनगर जा रहे थे और इसीलिए वो रात के वक़्त कार से अपने भाई के साथ घर से निकले । लेकिन जैसे ही कार मेरठ करनाल हाईवे पर स्थित भूनी टोल प्लाजा पर पहुंची तो वहां वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी जिसके चलते कपिल ने टोल कर्मियों को अपना सेना का पहचान पत्र दिखाते हुए कहा कि वो सेना के जवान है और उन्हें जल्दी जाना है जिससे कि वो श्रीनगर पहुंचने के लिए दिल्ली से अपनी फ्लाइट पकड़ सके । इसी बात को लेकर सेना के जवान कपिल और टोलकर्मियों के बीच बहस शुरू हुई जिसके चलते बहस हाथापाई में बदल गई और एकाएक टोल प्लाजा पर मौजूद करीब दर्जन भर दबंग टोलकर्मियों ने सेना के जवान कपिल और उनके भाई पर जानलेवा हमला कर दिया। इस दौरान पास में मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल में कैद कर लिया और इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है । मारपीट करने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार वहीं इस मामले पर एसपी देहात राकेश मिश्रा का कहना है कि सेना के जवान से मारपीट करने वाले चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि सेना के जवान से मारपीट करने वाले बाकी लोगों की पहचान सीसीटीवी और वीडियो के आधार पर की जा रही है और जल्द से जल्द उन्हें भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा ।  

योगी सरकार के प्रयासों से देश-विदेश में खुल रहे रोजगार के अवसर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार ऐतिहासिक पहल कर रही है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाएं जिस दूरदर्शिता से रोजगार सृजन की बहुआयामी रणनीति अपनाई है। रोजगार को लेकर प्रदेश सरकार की नीति अब सिर्फ स्थानीय नौकरियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन की शुरुआत की है।  मिशन के मुख्य उदेश्यों में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न रोजगार के अवसरों को पता लगाना, स्किलगैप का अध्ययन कर उसको दूर कराना, रोजगार कार्यक्रम संचालित करना, कॅरियर काउन्सिलिंग कराना तथा राज्य के रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों एवं अल्परोजगार युवाओं को पोस्ट प्लेसमेन्ट स्पोर्ट प्रदान करना है जिसमें घरेलू एवं विदेशी प्लेसमेन्ट के जरिए राज्य सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हो। विदेश में नौकरी के लिए युवाओं को तैयार करने के उद्देश्य से युवाओं को प्रोफेशनल रूप से तैयार किया जायेगा तथा बाजार मांग के अनुरूप ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किये जाएंगे। जापान, जर्मनी, क्रोएशिया और यूएई में श्रमिकों की भारी मांग इस अभियान को और विस्तार देते हुए प्रदेश सरकार ने जापान, जर्मनी, क्रोएशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से भी नर्सों, केयर गिवर्स, ड्राइवरों और निर्माण श्रमिकों की मांग प्राप्त की है। इसमें लगभग 1.50 लाख रूपये तक का वेतन मिलेगा, साथ ही खाड़ी देशों से भी विभिन्न सेक्टर की रिक्तियों की प्राप्ति सम्भावित है। श्रम विभाग इस दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है ताकि उत्तर प्रदेश के कुशल श्रमिकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सम्मानजनक और बेहतर वेतनमान वाली नौकरियां मिल सकें। यह पहल युवाओं को विदेश जाने का सुरक्षित और कानूनी विकल्प उपलब्ध कराकर अवैध माध्यमों पर भी रोक लगाने में सहायक है। 10,830 रोजगार मेलों के माध्यम से 13,64,501 अभ्यर्थियों को निजी क्षेत्र में नौकरियां मिली रोजगार सृजन को लेकर प्रदेश सरकार की दूसरी बड़ी उपलब्धि रोजगार मेलों के माध्यम से निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाना है। 1 अप्रैल 2017 से लेकर 30 अप्रैल 2025 तक सेवायोजन विभाग की ओर से आयोजित 10,830 रोजगार मेलों के माध्यम से 13,64,501 अभ्यर्थियों को निजी क्षेत्र में नौकरियां मिली हैं। ये मेले राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित किए गए, जिनमें सैकड़ों कंपनियों ने हिस्सा लिया और युवाओं को मौके पर ही चयनित कर नौकरी दी। इससे न केवल युवाओं को अवसर मिले बल्कि कंपनियों को भी प्रशिक्षित और कुशल जनशक्ति उपलब्ध हुई। इस मिशन के तहत अब तक 5,978 श्रमिकों को इज़राइल में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। वहीं, 1,383 और निर्माण श्रमिकों को भेजने की प्रक्रिया तेज़ी से प्रगति पर है। इस प्रयास से राज्य में न केवल विदेशी मुद्रा का आगमन बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अनुमान है कि इजराइल भेजे गए श्रमिकों से प्रदेश को लगभग 1,000 करोड़ रुपये का रेमिटेन्स प्राप्त हो सकता है, जो ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। योगी सरकार का मानना है कि केवल नौकरी उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं, बल्कि युवाओं को सही दिशा देना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत सेवायोजन विभाग की ओर से अबतक 24,493 करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 26,51,727 युवाओं को करियर मार्गदर्शन मिला। इन कार्यक्रमों ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है, जहां जानकारी की कमी के कारण प्रतिभाएं पीछे छूट जाती थीं। सेवामित्र पोर्टल पर 52,349 श्रमिक पंजीकृत स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने ‘सेवामित्र योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत कुशल कामगारों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है, जिस पर अब तक 52,349 श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं। ये श्रमिक प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, पेंटर, एसी मैकेनिक, ब्यूटीशियन आदि सेवाओं के लिए लोगों को घर बैठे उपलब्ध हो रहे हैं। यह योजना एक ओर जहां श्रमिकों की आय सुनिश्चित कर रही है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल रही हैं। उत्तर प्रदेश अब केवल नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि श्रम और प्रतिभा का निर्यात करने वाला राज्य बन रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल राज्य को सामाजिक और आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।  

राज्य में IPS अफसरों का बड़ा फेरबदल, 6 अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश

पटना  विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला जारी है। अगस्त में दूसरी बार भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। एक साथ 6 आईपीएस अधिकारियों को नए पद का प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा 26 बिहार पुलिस सेवा अफसरों को भी नई जिम्मेदारी मिली है। ट्रांसफर और नियुक्ति को लेकर 7 अगस्त गुरुवार गृह विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। आदेश के तहत बैच 2022 की आईपीएस अधिकारी शैलजा को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 हिलसा नालंदा के पद पर भेजा गया है। इससे पहले वह सहायक पुलिस अधीक्षक, वैशाली पद पर कार्यरत थी। मोहिबुल्लाह अंसारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 नगर पटना को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2 विधि व्यवस्था पटना के पद पर भेजा गया है। बता दें कि इससे पहले 2 अगस्त को भी बिहार सरकार ने 10 आईपीएस और एक बीपीएस अधिकारी का तबादला किया था।  कई जिलों के एसपी बदले गए थे।   इन आईपीएस अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी  संकेत कुमार, सहायक पुलिस अधीक्षक सारण को स्थानांतरित कर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिक्रमगंज रोहतास पद की जिम्मेदारी सौंप गई है। गरिमा, सहायक पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरपुर को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सरैया मुजफ्फरपुर के पद पर नियुक्त किया गया है। साक्षी कुमारी सहायक पुलिस अधीक्षक, बेगूसराय को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बलिया बेगूसराय पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कमल मीणा, सहायक पुलिस अधीक्षक दरभंगा को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मसौढ़ी पटना के पद पर भेजा गया है। 25 से अधिक BPS अफसर इधर से उधर  सुनीता कुमारी, अपर पुलिस अधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग को स्थानांतरित करके अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पुपरी सीतामढ़ी के पद की जिम्मेदारी सौंप गई है। सुमित कुमार अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 हिलसा नालंदा को स्थानांतरित करके वरीय पुलिस उपाधीक्षक बिहार पुलिस अकादेमी राजगीर के पद पर भेजा गया है। राजेश कुमार पुलिस उपाधीक्षक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को स्थानांतरित कर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी झाझा, जमुई के पद की जिम्मेदारी दी गई है। ज्योति शंकर पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राइम) नालंदा को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 सदर पूर्णियां के पद पर नियुक्त किया गया है। गोपाल कृष्ण को पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राइम) जहानाबाद के पद पर भेजा गया है। नवल किशोर को पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राइम) पटना की जिम्मेदारी मिली है। कुमार संजय को पुलिस उपाधीक्षक विधि व्यवस्था शाखा बिहार पुलिस मुख्यालय पटना के पद पर नियुक्त किया गया है। अतनु दत्ता, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पुपरी सीतामढ़ी को स्थानांतरित कर पुलिस उपाधीक्षक यातायात बेतिया के पद पर नियुक्त किया गया है। शैलेश प्रीतम पुलिस उपाधीक्षक यातायात सिवान को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बनमनखी पूर्णियां के पद पर नियुक्त किया गया है। सुशील कुमार को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अररिया पद पर भेजा गया है। नरेंद्र कुमार पुलिस उपाधीक्षक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। सुनील कुमार सिंह को पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय शिवहर पद पर नियुक्त किया गया है।

उत्तराखंड सरकार का ऐलान: मदरसा बोर्ड होगा भंग, लागू होगा नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून

देहरादून उत्तराखंड सचिवालय में  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल पांच प्रस्तावों पर मुहर लगी है. इनमें एक फैसला उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम, 2025 से जुड़ा है. कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है और इसे आज से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा. राज्य सरकार के मुताबिक, अब तक राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय को दिया जाता था, लेकिन प्रस्तावित अधिनियम के लागू होने के बाद सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी यह सुविधा मिलेगी. सरकार का दावा है कि इस कदम के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा जिसने सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने के लिए एकाकीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है. अधिनियम लागू होने के बाद 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड और उससे जुड़े अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम, 2019 को भंग कर दिया जाएगा. बोर्ड की जगह अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. यह नया प्राधिकरण राज्य के सभी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों की मान्यता और निगरानी करेगा. मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत वर्तमान में राज्य में मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत हैं. अधिनियम लागू होने के बाद इन्हें भी नए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी. सरकार का कहना है कि यह नया ढांचा शिक्षा में क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करेगा और संस्थागत अधिकारों की रक्षा करेगा. मान्यता के लिए संस्थानों का सोसाइटी एक्ट, ट्रस्ट एक्ट या कंपनी एक्ट में पंजीकरण अनिवार्य होगा. साथ ही, संबंधित भूमि और संपत्तियाँ संस्थान के नाम पर दर्ज होना जरूरी होगा. कांग्रेस ने धामी कैबिनेट के फैसले पर उठाए सवाल कांग्रेस ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं. पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने इसे लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उनका कहना है कि विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है और सरकार के पास जनता से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं. कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है, लेकिन सरकार केवल एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने में जुटी है. सुजाता पॉल ने यह भी कहा कि हमारे संविधान में अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों के शैक्षिक अधिकारों की गारंटी देते हैं. इसके अलावा, 1992 और 2004 में केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े कानून बनाए थे. ऐसे में यह कहना गलत है कि केवल मुसलमानों को ही अल्पसंख्यक होने का लाभ मिल रहा है. उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए. सुजाता पॉल के अनुसार, उत्तराखंड में आम शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है. कई जगह स्कूल और शिक्षक नहीं हैं, लेकिन सरकार को इस विधेयक को लाने की इतनी जल्दी है मानो यही सबसे बड़ी प्राथमिकता हो. मदरसा बोर्ड भंग करने के प्लान पर क्या बोले एक्सपर्ट? पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट के फैसले पर इस्लामिक मामलों के जानकार खुर्शीद अहमद का कहना है, "जो कानून बनाने की बात सरकार कर रही है वो आर्टिकल 30A का घोर उल्लंघन है. इसके साथ 2004 में लाए गए एक्ट के मुताबिक पहले से ही देश में अल्पसंख्यक आयोग मौजूद है, जो शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देता है."

जयवीर सिंह ने कहा- ग्रामीण पर्यटन में यूपी के कारिकोट गांव ने पेश की मिसाल,अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से मिलेगी प्रेरणा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का कारिकोट गांव ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना चुका है। गांव का चयन इंडियन सब कांटिनेंटल रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म (आईसीआरटी) अवार्ड 2025 के लिए किया गया है। कारिकोट गांव को यह सम्मान 13 सितम्बर को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में दिया जाएगा। यह जानकारी उप्र के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।  पर्यटन मंत्री ने बताया कि कारिकोट गांव का चयन आईसीआरटी अवार्ड के लिए होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। भारत-नेपाल सीमा से सटे कारिकोट ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में मिसाल पेश की है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग की पहल पर ग्रामीणों ने होमस्टे की शुरुआत की। साथ ही सीमा पर्यटन जैसे अभिनव पहल भी किए गए। इन प्रयासों से स्थानीय समुदायों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिला है। गांव की संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को भी नई पहचान मिली है। दिल्ली में आगामी 13 सितम्बर को आयोजित होने वाले बीएलटीएम ट्रेड शो में भारत सहित उपमहाद्वीप की 17 संस्थाओं को रिस्पोंसिबल टूरिज्म सम्मान दिया जाएगा। इन संस्थाओं को वन टू वॉच, सिल्वर और गोल्ड श्रेणी में मान्यता दी जाएगी। मान्यता सूची में स्थान पाने वाली सभी संस्थाओं ने प्रमाणिकता, पुनरावृत्ति की क्षमता, नवाचार, प्रभाव, स्थिरता और जिम्मेदार पर्यटन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है। भारतीय उपमहाद्वीप जिम्मेदार पर्यटन पुरस्कारों के निर्णायक मंडल में प्रो. हैरॉल्ड गुडविन शामिल हैं। गुडविन रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पार्टनरशिप के प्रबंध निदेशक और आईसीआरटी ग्लोबल के संस्थापक हैं। साथ ही, मनीषा पांडे, प्रबंध निदेशक विलेज वेज़ और आईसीआरटी भारतीय उपमहाद्वीप की प्रतिनिधि तथा चार्मारी मेल्ज, निदेशक आईसीआरटी श्रीलंका सहित अन्य निर्णायक मंडल का हिस्सा रहे।  उल्लेखनीय है कि, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ग्रामीण पर्यटन को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि राज्य को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाई जाए। राज्य सरकार का मानना है कि गांव केवल कृषि और परम्पराओं के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक भी हैं। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से इन विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने की योजना है। जयवीर सिंह ने बताया कि कारिकोट उत्तर प्रदेश के अन्य गांवों के लिए ग्रामीण पर्यटन में प्रेरणास्त्रोत बनेगा। नेपाल की सीमा से सटे और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के करीब स्थित कारिकोट गांव ने सामुदायिक नेतृत्व के जरिए पर्यटन को नई दिशा दी है। थारू समुदाय सहित समाज के अन्य लोगों की भागीदारी क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। विश्वास है कि यह उपलब्धि प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगी। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि राज्य में ग्रामीण पर्यटन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति-2025 सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रूरल टूरिज्म को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कारिकोट गांव को मिला सम्मान विभागीय प्रयासों और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में सफलता का परिणाम है।  

जानिए किस मामले में ओपी राजभर ने किया कोर्ट में सरेंडर

लखनऊ  योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर चर्चा में आ गए है। उन्होंने आज मऊ के एमपी एमएलए कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था। राजभर ने कहा कि वो इसीलिए यहां पर पेश होने के लिए पहुंटे है।  इस मामले में हुआ केस दर्ज  बता दें कि ओपी राजभर पर आचार संहिता उल्लंघन के मामले में हलधरपुर थाने में उनपर मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसके बाद कोर्ट ने वारंट जारी किया था। आज राजभर कोर्ट में सरेंडर किया है। इस दौरान उन्होंने कहा, कोर्ट से वारंट आया, जिसके बाद हम उनके समक्ष पेश होने पहुंचे। कैबिनेट मंत्री के कोर्ट में सरेंडर होने के दौरान सुभासपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कोर्ट ने दी जमानत ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान बिगड़े बोल पर मुकदमा दर्ज हुआ था। ये मुकदमा हलधरपुर थाने में दर्ज हुआ था। राजभर कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे, लेकिन आज कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने राजभर को इस मामले में जमानत भी दे दी है। 

पहले मैच में नहीं खेलेंगे ईशान किशन और आकाश दीप, Duleep Trophy 2025 से बाहर रहने की ये है वजह

नई दिल्ली  ईशान किशन की भारतीय टीम में वापसी हो सकती थी, लेकिन वह चोट के कारण टल गई। अब उनको एक और झटका लगा है। दलीप ट्रॉफी के पहले मैच से ईशान किशन बाहर हो गए हैं। वे ईस्ट जोन के लिए दलीप ट्रॉफी में भाग लेने वाले थे, लेकिन एक चोट के कारण वह पहले मैच का हिस्सा नहीं होंगे। इंग्लैंड में नॉटिंघमशायर के लिए क्रिकेट खेलते समय उनको चोट लगी थी, जिससे वे अभी तक पूरी तरह रिकवर नहीं हो पाए हैं। इसी चोट के कारण उन्होंने इंग्लैंड दौरे पर विकेटकीपर ऋषभ पंत के चोटिल होने के बाद टेस्ट टीम में रिप्लेसमेंट के तौर पर जगह नहीं मिल पाई थी। इसके अलावा तेज गेंदबाज आकाश दीप पर भी अपडेट आया है। फिलहाल के लिए ईशान किशन की जगह ईस्ट जोन टीम में ओडिशा के आशीर्वाद स्वेन को शामिल किया गया है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के मुताबिक, ई-बाइक से गिरने के बाद किशन को कई टांके लगे थे और इसी वजह से उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और आखिरी टेस्ट के लिए चोटिल ऋषभ पंत की जगह टीम में शामिल नहीं लिया गया। तमिलनाडु के एन जगदीशन को ध्रुव जुरेल के बैकअप के तौर पर टीम में जगह दी गई थी। हालांकि, ईशान किशन की चोट अभी के लिए गंभीर नहीं है, लेकिन यह एहतियाती कदम है, क्योंकि उनको इंडिया ए के लिए दो मैच आने वाले समय में खेलने हैं। इसके अलावा इंग्लैंड के दौरे पर तीन टेस्ट मैच खेलने वाले आकाश दीप को आराम करने की सलाह दी गई है। वे भी ईस्ट जोन के लिए खेलने वाले थे, लेकिन उनको आराम करने के लिए कहा है। कोई छोटी इंजरी उनको हो सकती है। चौथे टेस्ट मैच में वे चोट के कारण नहीं खेल पाए थे। 3 टेस्ट मैचों में आकाश दीप ने 13 विकेट निकाले थे। नाइट वॉचमैन के तौर पर उन्होंने एक शानदार अर्धशतक भी आखिरी मैच में जड़ा था। अभिमन्यु ईश्वरन की कप्तानी वाली टीम में असम के मुख्तार हुसैन उनकी जगह लेंगे। ईस्ट जोन अपने अभियान की शुरुआत 28 अगस्त से शुरू होने वाले क्वार्टर फाइनल में शुभमन गिल की अगुवाई वाले नोर्थ जोन के खिलाफ करेगा। सभी मैच बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित सीओई में खेले जाएंगे। ऑलराउंडर रियान पराग को ईस्ट जोन का उप कप्तान बनाया गया है। टीम में दो अन्य भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार भी शामिल हैं। शमी ने पिछले दो वर्षों में केवल एक प्रथम श्रेणी मैच खेला है। दलीप ट्रॉफी के पहले मैच के लिए ईस्ट जोन टीम अभिमन्यु ईश्वरन (कप्तान), आशीर्वाद स्वैन (विकेटकीपर), संदीप पटनायक, विराट सिंह, डेनिश दास, श्रीदाम पॉल, शरणदीप सिंह, कुमार कुशाग्र (विकेटकीपर), रियान पराग (उप-कप्तान), उत्कर्ष सिंह, मनीषी, सूरज सिंधु जयसवाल, मुकेश कुमार, मुख्तार हुसैन और मोहम्मद शमी  

भाजपा का मास्टरस्ट्रोक: विरोध थामने के लिए भाजपा का कदम, जनता को मनाने के लिए मुफ्त में मिलेंगे हजारों हेलमेट

इंदौर  हेलमेट की अनिवार्यता से उपजे जनाक्रोश को शांत करने के लिए भाजपा ने ठोस योजना तैयार कर ली है। जल्द ही जिला प्रशासन उद्योगपतियों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों के प्रमुखों की बैठक बुलाएगा। इस बैठक में जनता को हेलमेट लगाने के लिए अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों और सामाजिक संगठनों की ओर से निशुल्क हेलमेट वितरण अभियान भी शुरू किया जाएगा। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा कि हेलमेट अनिवार्य करने का निर्णय सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को रोकने के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन ऐसे निर्णय लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी भी होनी चाहिए। हाल ही में भाजपा कार्यालय में सभी विधायकों के साथ इस विषय पर चर्चा हुई, जिसमें कई विधायकों ने अचानक इस नियम के लागू होने पर नाराजगी जताई। बैठक में तय होगी नई तिथि सुमित मिश्रा ने बताया कि कलेक्टर आशीष सिंह से इस विषय पर बातचीत हो चुकी है। इसके बाद इंदौर के उद्योगपतियों, व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सभी की राय लेकर हेलमेट लागू करने की नई तिथि तय की जाएगी। तय तिथि तक नागरिकों को हेलमेट खरीदने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे नियम लागू होते ही सभी के पास हेलमेट उपलब्ध हो सके। निशुल्क हेलमेट वितरण की योजना भाजपा अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति हेलमेट खरीदने की अनुमति नहीं देती। इसे देखते हुए जिला प्रशासन, नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा अलग-अलग स्थानों पर 500-500 हेलमेट मुफ्त वितरित किए जाएंगे। इसी तरह भाजपा और अन्य सामाजिक संगठन भी हेलमेट वितरण में शामिल होंगे। उद्देश्य यह रहेगा कि नियम लागू होने से पहले हर जिम्मेदार नागरिक के पास हेलमेट पहुंच जाए। शुरू होगा विशेष अभियान मिश्रा ने कहा कि हेलमेट को लेकर विशेष मूवमेंट शुरू किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित तिथि तक सभी तैयारियां पूरी हो जाएं। इसके बाद इंदौर की सड़कों पर दोपहिया वाहन चलाने वाला हर व्यक्ति हेलमेट पहने नजर आए। प्रशासन और भाजपा का लक्ष्य है कि इस अभियान के जरिए सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जाए और दुर्घटनाओं में होने वाली जान-माल की हानि को कम किया जा सके।