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ट्रम्प के टैरिफ वार के बीच PM मोदी-पुतिन की खास बातचीत, भारत में स्वागत के लिए न्योता

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच टेलिफोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध, आपसी संबंधों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। पीएम मोदी ने एक बार फिर भारत की शांति की नीति को दोहराया और राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का निमंत्रण भी दिया। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन से जुड़े हालिया हालात की भी पुतिन से जानकारी ली। भारत की शांति की नीति पीएम मोदी ने पुतिन को इस जानकारी के लिए धन्यवाद भी दिया और दोहराया कि भारत हमेशा युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। भारत की नीति है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही किसी भी संघर्ष का हल निकलना चाहिए। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच पुराने और मजबूत रिश्तों पर भी चर्चा की और दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच के संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। पुतिन को भारत आने का न्योता बता दें, भारत और रूस कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं, जैसे ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापार। इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आने वाले महीनों में और बातचीत की योजना है। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को इस साल भारत आने का न्योता भी दिया है। भारत- रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का यह 23वां संस्करण होगा, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने का काम करेगा।

कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया: दिल्ली के पीतमपुरा रेस्टोरेंट में परिधान संबंधी कोई रोक नहीं

नई दिल्ली दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि पीतमपुरा के उस रेस्टोरेंट ने अपनी नीति बदल ली है, जहां पहले भारतीय परिधान में लोगों को प्रवेश से रोका गया था। अब रेस्टोरेंट में किसी भी परिधान में आने वाले लोगों को प्रवेश की अनुमति होगी। यह कदम सभी ग्राहकों के प्रति समान व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में बताया कि पीतमपुरा के रेस्टोरेंट ने अपनी नीति बदल ली है और अब किसी भी परिधान, विशेष रूप से भारतीय परिधानों में आने वाले लोगों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। रेस्टोरेंट संचालकों ने भारतीय परिधान में आने वाले ग्राहकों का स्वागत करने का आश्वासन दिया है। साथ ही रक्षाबंधन के अवसर पर भारतीय परिधान में आने वाली बहनों को डिस्काउंट भी दिया जाएगा। इससे पहले कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो को रिपोस्ट कर पीतमपुरा के रेस्टोरेंट में भारतीय परिधानों पर रोक की घटना को अस्वीकार्य बताया था। कपिल मिश्रा ने बताया था कि इस मामले को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गंभीरता से लिया और अधिकारियों को जांच व त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। कपिल मिश्रा के पोस्ट के बाद रेस्टोरेंट संचालकों ने अपनी गलती स्वीकार की। रेस्टोरेंट के निदेशक नीरज अग्रवाल ने एक वीडियो में स्पष्ट किया कि उनके यहां किसी भी परिधान में आने वाले ग्राहकों पर कोई पाबंदी नहीं है और सभी का स्वागत है। टुबाटा रेस्टोरेंट के मालिक नीरज अग्रवाल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हमारे यहां पर किसी भी परिधान में आए लोगों को रोका नहीं जाता है, सभी का स्वागत किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साड़ी, शूट में आई महिलाओं को रोका नहीं जाता है। सभी परिवार के साथ आएं। यहां आने से पहले रजिस्ट्रेशन करा लेंगे तो वेटिंग की समस्या नहीं होगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बारे में कहा कि यह 3 अगस्त का वीडियो है। उस दिन ज्यादा भीड़ थी। कुछ हुआ होगा। लेकिन, हम सभी का स्वागत करते हैं। मैं दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी रेस्टोरेंट में आने के लिए आमंत्रित करता हूं और उनका स्वागत करता हूं। रेस्टोरेंट मैनेजर ने भी माना कि यह गलतफहमी थी, यहां परिधान के आधार पर किसी को नहीं रोका जाता। इसके अतिरिक्त, रक्षाबंधन के अवसर पर रेस्टोरेंट ने भारतीय परिधान में आने वाली महिलाओं के लिए 10 प्रतिशत डिस्काउंट की घोषणा की है। बताते चलें कि टुबाटा रेस्टोरेंट को लेकर जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। उस वीडियो में एक शख्स द्वारा दावा किया गया कि वह इस रेस्टोरेंट में आए थे। चूंकि, वह भारतीय परिधान में थे, इसीलिए उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। जबकि दूसरी ओर कम कपड़े पहने लोगों को रेस्टोरेंट में जाने दिया गया था।

भारत की संप्रभुता पर कभी समझौता नहीं, अमेरिकी टैरिफ पर पीयूष गोयल का तगड़ा जवाब

नई दिल्ली भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "आज तक ऐसा कोई नहीं आया हैजो भारत को झुका सके। असंभव है। कोई लाख कोशिश कर ले, भारत को कोई नहीं झुका सकता।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल की खरीद जारी रखने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। समिट में बोलते हुए गोयल ने कहा कि आज का भारत पहले से कहीं ज्यादा सशक्त और आत्मविश्वासी है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था सालाना 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और आने वाले समय में यह गति और तेज होगी। "डिग्लोबलाइजेशन नहीं, व्यापार पुनर्गठन हो रहा है" जब वैश्विक व्यापार संगठनों के साथ भारत के भविष्य के संबंधों को लेकर सवाल पूछा गया, तो गोयल ने कहा कि दुनिया में "डिग्लोबलाइजेशन" नहीं हो रहा, बल्कि देश अपने व्यापारिक साझेदारों और रास्तों का पुनर्गठन कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस साल भारत पिछले साल से ज्यादा निर्यात करेगा। उन्होंने कहा, “हमने पहले से ही व्यापार बाधाओं का मुकाबला करने के लिए कई कदम उठा लिए हैं।” ट्रंप की ‘मृत अर्थव्यवस्था’ पर तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को “मृत अर्थव्यवस्था” कहा था। इस पर पीयूष गोयल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता द्वारा इस नकारात्मक बयान को दोहराना शर्म की बात है। मैं इसकी निंदा करता हूं। देश राहुल गांधी को कभी माफ नहीं करेगा जो भारत की महान गाथा को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।” मजबूत आर्थिक नींव का दावा गोयल ने कहा कि भारत की मुद्रा, विदेशी मुद्रा भंडार, शेयर बाजार और आर्थिक बुनियादी ढांचा पूरी तरह मजबूत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में महंगाई की दर अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। उन्होंने कहा, “दुनिया आज भारत को सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देख रही है, जो वैश्विक विकास में 16 प्रतिशत योगदान दे रही है।” उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब युवा, कुशल और आकांक्षी जनसंख्या वैश्विक साझेदारों के लिए एक बड़ी ताकत है। कोविड संकट को अवसर में बदला गोयल ने भारत के आईटी उद्योग को हजारों नौकरियां देने और देश के कायाकल्प में योगदान देने का श्रेय दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने कोविड संकट को अवसर में बदला। उन्होंने कहा, "भारत हमेशा कठिन समय में विजयी होकर उभरेगा।" मंत्री ने बताया कि भारत इस समय यूएई, मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया, EFTA (चार देशों का यूरोपीय समूह), यूके, यूरोपीय संघ, चिली, पेरू, न्यूजीलैंड और अमेरिका समेत कई देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है या उन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। अंत में उन्होंने कहा, “भारत आज ज्यादा मजबूत है, अधिक सम्मानित है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ऊंचे कद के नेता के नेतृत्व में है।” इससे पहले पीयूष गोयल ने एक पोस्ट में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक रिपोर्ट शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि देश की अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है। आईएमएफ ने हाल ही में विश्व आर्थिक परिदृश्य 2025 का जुलाई अपडेट जारी किया था। इसमें उसने मौजूदा और अगले वित्त वर्ष के लिए भारत का विकास अनुमान बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है।  

मिथिलांचल की संस्कृति भारतीय विरासत का अनन्य गहना, गृह मंत्री अमित शाह का बयान

सीतामढ़ी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सीतामढ़ी में मां जानकी की जन्मस्थली पुनौरा धाम मंदिर के भूमि पूजन के बाद इस कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए मिथिलांचल की संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि सही अर्थों में मिथिलांचल की संस्कृति पूरे भारतीय संस्कृति का अनन्य गहना है। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को निशाने पर लिया और एनडीए सरकार के किए गए विकास कार्यों की तारीफ की। उन्होंने आज के दिन को देश और दुनिया के लिए शुभ बताते हुए कहा कि माता सीता ने एक ही जीवन में आदर्श पत्नी, आदर्श बेटी, आदर्श मां और आदर्श राजमाता के स्वरूपों को चरितार्थ किया है। आज माता जानकी का जहां जन्म हुआ, उस पुनौरा धाम मंदिर के परिसर का समग्र विकास होने की नींव डालने का काम हुआ है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मां जानकी की जन्मस्थली पर जो यह भव्य मंदिर बनने जा रहा है, यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मिथिलांचल के भाग्योदय की शुरुआत है। उन्होंने मिथिलांचल की संस्कृति के साथ यहां की कला की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर मिथिला की कला को हमेशा आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति को मधुबनी पेंटिंग भेंट की और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति को भी मिथिलांचल की कला का नमूना देकर विदेश में मिथिला की कला का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मिथिला, वाल्मीकि रामायण से लेकर महाभारत और बौद्ध तथा जैन साहित्य तक, हमारी संस्कृति का केंद्र रहा है। धर्मशास्त्र, साहित्य, संगीत, भाषा और तंत्रज्ञान का यह एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है। मिथिलांचल, जहां राजा जनक हुए, जहां याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी हुए, जहां शंकराचार्य और मंडन मिश्र ने शास्त्रार्थ को चरम सीमा पर पहुंचाया, जहां मुनि अष्टावक्र ने अष्टावक्र गीता का ज्ञान दिया, उसे फिर से विद्या का धाम और संस्कृति का केंद्र बनाने की शुरुआत आज यहां से होगी। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी जोरदार हमला बोला। उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि आपके माता-पिता की सरकार ने गुंडई करने के अलावा, गैंग चलाने के अलावा, अपहरण-फिरौती के अलावा मिथिलांचल के विकास के लिए क्या किया? आप इसका हिसाब दीजिए। उन्होंने एनडीए सरकार में किए गए कार्यों की गिनती कराते हुए कहा कि हमने पीएम मोदी की तरफ से विकास का सारा हिसाब दे दिया। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भी उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव दोनों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बिहार में एसआईआर का विरोध कर क्या जताना चाहते हैं? इनको बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी हार का अहसास हो गया है, इसलिए ये तमाम बहाने कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग घुसपैठियों को वोट बैंक समझते हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि इस साल बिहार में होने वाले चुनाव में भी एनडीए विजयी होगी। 

एससीओ शिखर सम्मेलन में चीन ने पीएम मोदी कोशामिल होने का किया स्वागत, जताई मजबूत एकता और सहयोग की भावना

बीजिंग चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन आने का स्वागत करता है, जो इस महीने के अंत में तिआनजिन शहर में आयोजित किया जाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "चीन प्रधानमंत्री मोदी का तिआनजिन एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन आने का स्वागत करता है। हमें विश्वास है कि सभी पक्षों के संयुक्त प्रयासों से तिआनजिन शिखर सम्मेलन एकजुटता, मित्रता और सार्थक परिणामों का आयोजन होगा और एससीओ एक नए उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के चरण में प्रवेश करेगा, जिसमें अधिक एकता, समन्वय, गतिशीलता और उत्पादकता होगी।" उन्होंने बताया कि "चीन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तिआनजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस आयोजन में एससीओ के सभी सदस्य देशों सहित 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भाग लेंगे। यह एससीओ के गठन के बाद से अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन होगा।" रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच तिआनजिन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन यात्रा करेंगे। यह 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी, जिसने भारत-चीन संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले 2019 में चीन गए थे। इसके अलावा उन्होंने 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। भारत और चीन के बीच चार साल से चले आ रहे सीमा गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति उस समय हुई जब दोनों देशों ने लगभग 3500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त के लिए समझौता किया। जुलाई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तिआनजिन में आयोजित एससीओ विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से भी मुलाकात की और साथ ही सभी विदेश मंत्रियों के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी भेंट की। जून में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन का दौरा किया था। भारत ने उस बैठक की संयुक्त घोषणा का समर्थन करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उसमें आतंकवाद से संबंधित चिंताओं को शामिल नहीं किया गया था। भारत का कहना था कि दस्तावेज में आतंकवाद के मुद्दे को शामिल किया जाना चाहिए, जो एक विशेष देश को स्वीकार नहीं था, इसलिए संयुक्त वक्तव्य को अपनाया नहीं गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने भी बीजिंग में आयोजित एससीओ सदस्य देशों के सुरक्षा परिषद सचिवों की 20वीं बैठक में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड को समाप्त करने और यूएन द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके नेटवर्क को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि एससीओ एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में की गई थी। इसके सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं।

दुपट्टा फाड़कर राखी बांधने वाली गुजरात की महिला ने धामी को कर दिया भावुक

धराली, उत्तराखंड उत्तराखंड के धराली में तीन दिन पहले हुई बादल फटने की घटना के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे। इसी दौरान उस वक्त एक अत्यंत भावुक कर देने वाला पल देखने को मिला, जब वहां रेस्क्यू कर लाई गई एक महिला ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए उन्हें अपना दुपट्टा फाड़कर बनी राखी उनकी कलाई पर बांधी। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना से सीएम भी भावुक हो गए और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये कोई सामान्य राखी नहीं थी, ये थी भरोसे की, अपनत्व की, और उस रिश्ते की जो खून से नहीं, दिल से जुड़ता है। जिस महिला ने यह प्रतीकात्मक राखी बांधी वह गुजरात की रहने वाली है। सीएम ने कहा- आपकी राखी बहुत स्पेशल इस घटना के दौरान मुख्यमंत्री के साथ महिला का संवाद भी हुआ। राखी बंधवाने के बाद सीएम ने महिला से कहा- 'आपकी ये राखी तो बहुत स्पेशल है'। इसके बाद जब उस महिला ने झुकते हुए सीएम के पैर छूने की कोशिश की तो धामी ने उसे रोकते हुए अपने सीने से लगा लिया। इसके बाद महिला ने फिर आभार जताते हुए सीएम से बहुत-बहुत शुक्रिया कहा। जिसके बाद धामी ने पूछा कि 'सुरक्षित पहुंच गए ना', तो महिला ने कहा- 'हां पहुंच गए'। इसके बाद सीएम ने 'राधे-राधे' और 'जय गंगा मैया कहा'। धामी बोले- मैं आ गया ना आपको लेने महिला ने आगे कहा- 'बहुत बड़ी सुरक्षा मिली हमें मिलिट्री से, कुछ परेशानी नहीं हुई, लेकिन तीन दिन हम गंगोत्री में फंसे रह गए'। तब धामी ने कहा कि 'आ गया ना मैं आप लोगों को लेने के लिए'। इसके बाद महिला ने आगे कहा, 'बस मेरी यही प्रार्थना है कि रक्षाबंधन पर हमको याद करना। हमारा भैया सुखी रहे। यही प्रार्थना है।' सीएम बोले- केवल एक कपड़े का टुकड़ा इस घटना के वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने लिखा, ‘धराली (उत्तरकाशी) में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान एक बहन ने साड़ी का किनारा फाड़ कर मेरी कलाई पर राखी के प्रतीक के रूप में बांधा तो मन अत्यंत भावुक हो उठा। ना थाली, ना चंदन, केवल एक कपड़े का टुकड़ा, लेकिन उसमें रिश्ते का सच्चा एहसास, सुरक्षा का वचन, और मानवता का सबसे सुंदर रूप समाया था। उस राखी में एक बहन की प्रार्थना थी और एक भाई के कंधों पर आया एक नया दायित्व। ये कोई सामान्य राखी नहीं थी, ये थी भरोसे की, अपनत्व की, और उस रिश्ते की जो खून से नहीं, दिल से जुड़ता है।’ बता दें कि जिस महिला ने सीएम को राखी बांधी उसका नाम धनगौरी बरौलिया है, जो कि गुजरात में अहमदाबाद के ईशनपुर इलाके की रहने वाली हैं। वह अपने परिवार के साथ गंगोत्री दर्शन के लिए उत्तराखंड आई थीं, लेकिन 5 अगस्त को आई भीषण आपदा के कारण वे धराली में अपने परिवार सहित फंस गई थीं। रेस्क्यू टीमों ने अपने अथक प्रयासों से महिला और उसेके परिवार को शुक्रवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।  

गडकरी बोले: E20 पेट्रोल से माइलेज कम होने के दावे गलत, जानिए पूरी बात

नई दिल्‍ली हाल के समय में पेट्रोल में एथेनॉल मिले होने की वजह से गाड़ी के कम माइलेज मिलने को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही है। इसपर सरकार की तरफ से पहले ही सफाई दी जा चुकी है। अब इस मामले पर भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी खुलकर बात की। उन्होंने तो उन लोगों को खुली चुनौती दे दी है, जो इसको लेकर दावा कर रहे हैं कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से गाड़ी कम माइलेज देगी। आइए विस्तार में जानते हैं कि इस मामले में नितिन गडकरी ने क्या कहा? गडकरी की खुली चुनौती     सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को बिजनेस टुडे के जरिए आयोजित एक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। यहां पर उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (जिसे E20 कहा जाता है) से वाहनों का माइलेज कम होता है, इस तर्क में कोई सच्चाई नहीं है। इसके साथ ही कहा कि इस पर तो कोई चर्चा भी नहीं है। मुझे नहीं पता कि मुझे यह राजनीतिक रूप से कहना चाहिए या नहीं, लेकिन ऐसा लगता है कि पेट्रोलियम लॉबी इसे हेरफेर कर रही है। आप मुझे दुनिया में एक भी ऐसा वाहन दिखाओ जिसे E20 पेट्रोल के कारण समस्या हुई हो! मैं एक खुली चुनौती देता हूँ। E20 से बिल्कुल कोई समस्या नहीं है।     गडकरी ने आगे कहा कि स्थानीय रूप से उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल भारत के आयात बिल को कम करने में मदद करता है और प्रदूषण को भी कम करता है। मक्के की कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,600 रुपये हो गई हैं, यह सब इसलिए है क्योंकि इससे एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है। इससे बिहार और उत्तर प्रदेश में मक्का के तहत आने वाले क्षेत्र में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों की आय बढ़ रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय कह चुका है ये बात     नितिन गडकरी के इस खुली चुनौती से पहले पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से पेट्रोल में एथेनॉल की वजह से माइलेज पर पड़ने वाले असर के बारे में बता चुका है। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से कह गया है कि इस फ्यूल के कारण इंजन को कोई बड़ा नुकसान या परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं आती है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि नई कारों में माइलेज 2 प्रतिशत तक और पुरानी कारों में 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जिन्हें अपडेटेड पार्ट्स की जरूरत हो सकती है। इसको लेकर मंत्रालय की तरफ से सोमवार को एक सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया गया था, जिसमें बताया गया था कि इसे नियमित रखरखाव के साथ संभाला जा सकता है।     इस पोस्ट में पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर पुराने वाहनों में 20,000 से 30,000 किमी के बाद रबर के पुर्जे या गैसकेट जैसे छोटे-मोटे अपडेट की जरूरत हो सकती है, जो सस्ते होते हैं और आमतौर पर नियमित सर्विसिंग के दौरान किए जाते हैं।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को दीं रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन के पावन पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि राखी का पर्व, भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का त्यौहार है। यह हमारी गौरवशाली संस्कृति के गरिमामय उत्कर्ष का प्रतीक है। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, पारिवारिक समरसता और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा का उत्सव है। उन्होंने कहा कि राखी के पर्व पर हमें मातृ शक्ति के सम्मान, सहयोग और सशक्तिकरण में सहभागिता का संकल्प लेना चाहिए।  

केंद्र सरकार ने ई-बसों, ट्रकों और एम्बुलेंस के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना को 2 साल के लिए बढ़ाया आगे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों, एम्बुलेंस और ट्रकों के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना को दो साल के लिए बढ़ाकर मार्च 2028 कर दिया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, यह योजना अब मार्च 2026 के बजाय मार्च 2028 में समाप्त हो जाएगी। अधिसूचना के अनुसार, इस योजना के लिए फंड आवंटन 10,900 करोड़ रुपए पर बरकरार रखा गया है और योजना के तहत कोई अतिरिक्त आवंटन नहीं किया जाएगा। अधिसूचना के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए प्रोत्साहन मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएंगे। पीएम ई-ड्राइव योजना, देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों को इलेक्ट्रिक ट्रकों में बदलने के लिए 9.6 लाख रुपए तक के प्रोत्साहन के साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करती है। पिछले महीने, सरकार ने पीएम ई-ड्राइव पहल के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रकों) के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु एक अभूतपूर्व योजना शुरू की, जिसमें अधिकतम प्रोत्साहन राशि 9.6 लाख रुपए प्रति वाहन निर्धारित की गई है। यह पहली बार है जब सरकार इलेक्ट्रिक ट्रकों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान कर रही है, जिसका उद्देश्य देश में क्लीन, कुशल और सस्टेनेबल फ्रेट मोबिलिटी की ओर ट्रांजिशन को गति प्रदान करना है। इस योजना से देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों की तैनाती को समर्थन मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के अनुसार, डीजल ट्रक, कुल वाहन संख्या का केवल 3 प्रतिशत होने के बावजूद, परिवहन से संबंधित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 42 प्रतिशत का योगदान करते हैं और वायु प्रदूषण को काफी बढ़ा देते हैं। इस योजना के तहत, केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (सीएमवीआर) के तहत परिभाषित एन2 और एन3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर भी मांग प्रोत्साहन लागू किया जाएगा। एन2 श्रेणी में 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक के ग्रॉस व्हीकल वेट (जीवीडब्ल्यू) वाले ट्रक शामिल हैं। एन3 श्रेणी में 12 टन से अधिक और 55 टन तक के जीवीडब्ल्यू वाले ट्रक शामिल हैं। आर्टिकुलेटेड वाहनों के मामले में, प्रोत्साहन केवल एन3 श्रेणी के पुलर ट्रैक्टर पर लागू होंगे। ये प्रोत्साहन खरीद मूल्य में अग्रिम कटौती के रूप में दिए जाएंगे और पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पीएम ई-ड्राइव पोर्टल के माध्यम से ओईएम को प्रतिपूर्ति की जाएगी।  

पूर्वोत्तर क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में एकजुट रणनीति का महत्व: ज्योतिरादित्य सिंधिया की टिप्पणी

नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी लाने के लिए यूनिफाइड एप्रोच की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के गैप को भरने के लिए पांच सुझाव दिए, जिसमें एक क्षेत्रीय मास्टर प्लान तैयार करके पूर्वोत्तर क्षेत्र की इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रिड को मिलाना, एनईआर के लिए प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए एक निगरानी तंत्र की स्थापना, विभिन्न कर और अन्य रियायतों की पेशकश के माध्यम से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क के लिए नीति को आगे बढ़ाना, पड़ोसी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सीमा पार कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और डिजिटल कनेक्टिविटी और पावर ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना है। ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी’ पर हाई-लेवल टास्क फोर्स (एचएलटीएफ) में बोलते हुए, सिंधिया ने आगे कहा कि भविष्य की परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर मैप किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने सभी पूर्वोत्तर राज्यों से कहा कि वे अपनी स्टेट लॉजिस्टिक्स पॉलिसी को मंत्रालय द्वारा देश भर में सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर तैयार किए गए मानकों के अनुसार, अपटेड करें। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र के तीव्र आर्थिक विकास के लिए परिवहन गलियारों के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा सकते हैं। एचएलटीएफ बैठक में हाईवे, रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल संपर्क जैसे सेक्टर्स में पूर्वोत्तर क्षेत्र में मौजूदा क्रिटिकल गैप पर ध्यान केंद्रित किया गया। पूर्वोत्तर में इन्फ्रास्ट्रक्चर अंतर को पाटने के लिए, एचएलटीएफ बैठक में एक व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर मास्टरप्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया। यह योजना सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के परामर्श से विकसित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय विकास के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा। बैठक के दौरान चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में राज्य-विशिष्ट बाधाओं और चुनौतियों की पहचान, महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी गैप और प्राथमिकता वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरतें, पूंजी निर्माण के लिए राज्य बजट और राष्ट्रीय निवेश का एकीकरण और 2047 तक विकसित पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक रोडमैप का कार्यान्वयन शामिल था। इस वर्ष की शुरुआत में केंद्र ने आठ हाई-लेवल टास्क फोर्स (एचएलटीएफ) का गठन किया था, जिनमें से प्रत्येक का नेतृत्व पूर्वोत्तर राज्य के एक मुख्यमंत्री द्वारा किया जाता है, जिसमें केंद्रीय मंत्री और अन्य राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं।