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मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 7 अगस्त को पॉक्सो कार्यशाला, बाल अधिकारों पर होगा फोकस

भोपाल  लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पोक्सो अधिनियम) विषय पर जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा 7 अगस्त (गुरुवार) को एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया तथा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्रविंद्र मोरे उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला में पूरे प्रदेश से महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, पुलिस तथा जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पोक्सो अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों पर अधिकारियों को संवेदनशील बनाना और उन्हें विधिक जानकारी व प्रशिक्षण प्रदान करना है। कार्यशाला में बाल संरक्षण के क्षेत्र में नीति निर्धारण से लेकर ज़मीनी कार्यान्वयन तक की प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने पर भी मंथन किया जाएगा।  

इंदौर की तरक्की पर सीएम का दावा, सिंघार ने पूछा- करोड़ों का निवेश आया कैसे? PM 25 को धार में रखेंगे नींव

भोपाल विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि विकास को लेकर मध्य प्रदेश से नहीं बल्कि देश को देखकर बात करनी होगी। उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि पूरा देश लाभान्वित होना चाहिए। बिजली, सड़क आखिरी महत्व तक का और प्रवासियों की मानसिकता उनके काम करने का तरीका मध्य प्रदेश अनुकूल है।  फालतू के कानून खत्म मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार में कारखाने में हड़ताल नहीं हुई। मध्य प्रदेश में चाहे कांग्रेस की सरकार हो या बीजेपी की। परमात्मा की कृपा से इंदौर की गति जेट विमान की तरह चल रही है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर चारों टाउन बड़ी-बड़ी स्थिति में बड़ी-बड़ी संभावनाएं रखते हैं। हमने मेट्रोपॉलिटन इलाका पांच पांच शहरों को मिलाकर बनाया है। मास्टर प्लान को लेकर झगड़ा लैंड यूज का होता है। हम क्षेत्र आधार विकास को लेकर योजना पर काम कर रहे हैं। यह आगामी समय में 10-12 जिलों का नया मॉडल बनेगा। हम फालतू के कानून खत्म करते हुए नई विचारधारा नए कानून की ओर बढ़ रहे हैं। हम योजनाओं का सरलीकरण कर रहे हैं। धार में भूमिपूजन करेंगे PM मोदी सीएम डॉ. मोहन यादव ने आगे कहा कि GIS के लिए भोपाल का चयन किया है। GIS के लिए पीएम मोदी रात रुके। कोयंबटूर में वहां के नेता प्रतिपक्ष ने उद्योग को लेकर आंदोलन कर दिया था। मैंने कहा…कंपनियां वहां भी करें, और एमपी में भी काम करें। स्विट्जरलैंड के व्यापारी मोटा अनाज कोदू कुटकी खरीदने को तैयार है। हमारा माल दुनिया खरीद रही। पर्यटन के कई आयामों से रोजगार दिए जा रहे। इंजीनियरिंग कॉलेज में ही IT पार्क बना रहे। पढ़ाई के साथ काम भी एक ही कैंपस में मिल जाएगा।” सीएम ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अगस्त को धार में पीएम मित्रा पार्क का भूमि-पूजन करेंगे / सीएम के वक्तव्य पर उमंग सिंघार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के वक्तव्य पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूछा, “मध्य प्रदेश मेकिंग मध्य प्रदेश कब बनेगा? मुख्यमंत्री का आभार आपने आंकड़े गिनाए। करोड़ों का निवेश आया। लेकिन कैसे आया यह समझ ही नहीं आया। किसानों की जमीनों को लेकर मुआवजा दे नहीं पा रहे। 120 इंडस्ट्रियल पार्क बना रहे हैं। उद्योगपति को क्यों नहीं बोलते कि वह डेवलपमेंट करें। सरकार जनता के पैसे से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कर रही है। सरकार को विचार करना चाहिए।” उमंग सिंघार ने आगे कहा, “बेरोजगारों को आप आकाशी रोजगार कह रहे हो। मध्य प्रदेश के सालों से बेरोजगार पड़े युवाओं की रोजगार नहीं दे पा रहे हैं।हम सफेद प्याज की खेती को बढ़ावा नहीं दे पा रहे। चावल को लेकर मध्यप्रदेश कहा हैं? सोयाबीन के प्लांट बंद पड़े हैं। देश का सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य की आज हालत खराब है। इस पर सरकार ने कुछ नहीं किया।” “IT सेक्टर की बात करते हैं..लेकिन IT मध्यप्रदेश नहीं आता। बड़ी कंपनियां बंद हो रही हैं, सिर्फ 11 बची है। नाम कहें तो गिना सकता हूं। पॉलिसी में खराबी है न। मांडू के पर्यटन की बात करते हैं। तालाब सूखे पड़े हैं..पर्यटन नहीं आता। पर्यावरण में घोटाला हो रहा है। मुख्यमंत्री के पास रिपोर्ट पेंडिंग पड़ी है। मेडिकल टूरिज्म की बात करते हैं आप। लेकिन लोग प्रदेश से बाहर जाते हैं..ये क्या है मेडिकल टूरिज्म? भावनाएं अच्छी है आपकी लेकिन आपकी भावनाएं लोगों तक नहीं पहुंच पाती। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आपने समूह की बात की लेकिन यहां भ्रष्टाचार हो रहा है।”

भारतीय सेना की दो-टूक: अमेरिका ने किया भरोसे का उल्लंघन, क्या रिश्तों में आएगी दरार?

नई दिल्ली   भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने एक पुरानी खबर को साझा कर अमेरिका को उसकी दशकों पुरानी नीति याद दिलाई है. सेना ने पांच अगस्त 1971 को प्रकाशित एक समाचार लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया है. इसमें बताया गया था कि अमेरिका ने 1954 से 1971 तक पाकिस्तान को दो अरब डॉलर (लगभग 17,500 करोड़ रुपये) के हथियार भेजे थे. इस पोस्ट को ‘This Day That Year’ कैप्शन के साथ शेयर किया गया, जिसमें हैशटैग #KnowFacts का इस्तेमाल किया गया. यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव और व्यापारिक मुद्दों के साथ-साथ भारत-रूस संबंधों पर डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बीच आया है. यह लेख 1971 के उस समय का है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था. उस साल दिसंबर में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ. भारतीय सेना की इस पोस्ट को मौजूदा हालात में अमेरिका की नीतियों पर एक तीखा कटाक्ष माना जा रहा है. 1971 में अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति जारी रखी थी, भले ही उसने भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए हथियारों पर प्रतिबंध की घोषणा की थी. इस दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को टैंक, जेट विमान और अन्य सैन्य उपकरण दिए. ये हथियार बाद में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान इस्तेमाल हुए. भारतीय सेना की इस पोस्ट का समय महत्वपूर्ण है. हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा है. भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-रूस संबंधों पर टिप्पणी करते हुए भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं. इसके जवाब में भारत ने साफ किया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों को प्राथमिकता देता है. भारतीय सेना की यह पोस्ट न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि भारत अमेरिका की दोहरी नीति को भूला नहीं है. 1971 के युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान का समर्थन किया था और अपने विमानवाहक पोत USS एंटरप्राइज को हिंद महासागर में तैनात किया था, जिसे भारत के खिलाफ एक चेतावनी माना गया. इस दौरान भारत ने सोवियत संघ के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत किया, जिसने युद्ध में भारत को कूटनीतिक और सैन्य सहायता प्रदान की. भारतीय सेना की यह पोस्ट उस समय की याद दिलाती है, जब अमेरिका की नीतियों ने भारत के लिए चुनौतियां खड़ी की थीं. वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग बढ़ा है, लेकिन पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति का मुद्दा समय-समय पर विवाद का कारण बनता रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोस्ट भारत का एक रणनीतिक संदेश है, जिसमें वह अमेरिका को उसकी पुरानी नीतियों के प्रति आगाह कर रहा है. यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में नई तल्खी ला सकता है, खासकर तब जब भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने बढ़ाया ब्रह्मोस पर भरोसा, मिसाइलों के लिए बड़ा ऑर्डर जारी

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया। भारतीय सेना अब भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए बड़ा ऑर्डर दे रही है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जल्द ही हाई लेवल मीटिंग में भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए बड़ी संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी जा सकती है। साथ ही, भारतीय वायु सेना के लिए भी इन मिसाइलों के जमीनी और हवाई वैरिएंट खरीदे जाएंगे। पाकिस्तान के वायु ठिकानों और सेना के कैंपों पर हमले के लिए इन मिसाइलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया। नौसेना इन मिसाइलों को अपने वीर-कैटेगरी के युद्धपोतों पर तैनात करने वाली है, जबकि वायु सेना इन्हें अपने रूसी मूल के सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों पर लगाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों स्वदेशी हथियारों की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने हमारे स्वदेशी हथियारों की ताकत देखी। हमारे एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें और ड्रोन ने आत्मनिर्भर भारत की शक्ति दिखाई, खासकर ब्रह्मोस मिसाइलों ने। आतंकी मुख्यालयों पर किया हमला भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पंजाब प्रांत में स्थित मुख्यालयों पर हमला किया। भारतीय वायु सेना ने इसके लिए ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया। इसने टारगेट को बहुत सटीकता से तबाह कर दिया। ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को भी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों और उनके ठिकानों को बचाने की कोशिश में जवाबी कार्रवाई की थी।

BJP की राह पर प्रियंका चतुर्वेदी? पीएम मोदी से मीटिंग के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म

नई दिल्ली शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बीते दिन सोमवार (04 अगस्त, 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसकी तस्वीरें उन्होंने आज मंगलवार (05 अगस्त, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर कीं। इसके बाद से लोग इस पर रिएक्शन देने लगे हैं और कहने लगे हैं कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। उन्होंने तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, "कल मैंने संसद में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मैं उनके बहुमूल्य समय और भारत के आकर्षक सांस्कृतिक इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर उनकी अंतर्दृष्टि के लिए धन्यवाद करती हूं।" पीएम मोदी से मुलाकात की इन तस्वीरों को पोस्ट किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे हैं कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल होगीं। हालांकि प्रियंका चतुर्वेदी ने जिस तरह का रिएक्शन दिया है, उससे लगता नहीं है कि ऐसा कुछ होने वाला है। प्रियंका चतुर्वेदी ने दिया ये इशारा राज्यसभा सांसद ने इसको लेकर कोई टिप्पणी तो नहीं की लेकिन एक पोस्ट को रीपोस्ट करके कुछ इशारा जरूर किया। दरअसल अमित शांडिल्य नाम के एक यूजर ने लिखा, "सिर्फ एक साथी सांसद के रूप में मिलना ही कुछ लोगों को चुभ गया है। यही लोग दूसरों को असहिष्णु कहते हैं।" इस लिखी हुई टिप्पणी को प्रियंका चतुर्वेदी ने रीपोस्ट किया है। कौन हैं प्रियंका चतुर्वेदी? शिवसेना (यूबीटी) में शामिल होने से पहले वो कांग्रेस में हुआ करती थीं। उनकी पहचान एक तेज तर्रार प्रवक्ता के रूप में है, जो टीवी डिबेट में शामिल होती हैं। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हाल ही में सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेशों में भेजा था, जिसका वो हिस्सा थीं। उन्होंने 2019 में कांग्रेस को छोड़ शिवसेना (यूबीटी) का दामन थामा था। इसके बाद वो 2020 में राज्यसभा सांसद बनीं और अगले साल उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है।

फडणवीस का बयान: नंदनी मठ के साथ हैं, हथिनी विवाद में सरकार उठाएगी कानूनी कदम

मुंबई  महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में नंदनी मठ को माधुरी उर्फ महादेवी हाथी को वापस लाने के लिए राज्य सरकार का साथ मिला है। राज्य सरकार इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस मामले में सरकार, मठ के साथ है और उसे वापस लाने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले में मठ के साथ है और सरकार भी अलग से पुनर्विचार याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति रखेगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय के कैबिनेट हॉल में माधुरी हथिनी के मुद्दे पर बैठक हुई। इस दौरान उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, वन मंत्री गणेश नाइक, उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ, जनस्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबिटकर, नंदनी मठ के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि नंदनी मठ की परंपराओं और स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर कानूनी प्रक्रिया के जरिए माधुरी हथिनी को वापस लाने की कोशिश की जाएगी। पिछले 34 साल से माधुरी मठ में है और जनता चाहती है कि वह वापस आए। इसके लिए राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी और मठ को भी अपनी याचिका में सरकार को शामिल करना चाहिए। वन विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत पक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें उच्च-स्तरीय समिति और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सुझावों को लागू किया जाएगा। हथिनी की देखभाल के लिए डॉक्टरों सहित एक टीम बनाई जाएगी और जरूरी सहायता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू सेंटर जैसी व्यवस्था भी की जाएगी। सरकार इस याचिका में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध भी करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले में नागरिकों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। वहीं, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि वन विभाग को महाराष्ट्र से बाहर ले जाए गए सभी हाथियों की जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए। इस अवसर पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार को नागरिकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए माधुरी हथिनी को वापस लाने की पहल करनी चाहिए।

छोटे वक्त की शादी, बड़ी एलिमनी की डिमांड – SC ने सुनाया सख्त फैसला

नई दिल्ली एक महिला की ओर दायर एलिमनी के केस में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली अदालत ने इस मामले में शख्स को आदेश दिया कि वह अपनी पूर्व पत्नी को एलिमनी के तौर पर मुंबई की हाईप्रोफाइल सोसायटी में स्थित फ्लैट दे दें। इसके साथ ही एलिमनी का केस अब बंद कर दिया जाए। इसके साथ ही बेंच ने महिला को भी सुनाया, जिसने मांग रखी थी कि उसे 12 करोड़ रुपये की रकम और मुंबई स्थित एक फ्लैट एलिमनी में दिया जाए। इस पर चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि आप दोनों की शादी ही 18 महीने चली और आप 18 करोड़ रुपये मांग रही हैं। इसका अर्थ हुआ कि आप शादी के प्रति एक महीने के बदले एक करोड़ चाहती हैं। जस्टिस गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने महिला की दलीलों पर कहा कि आपकी तो शादी ही बहुत कम समय चली। ऐसे में इतनी बड़ी डिमांड करना कैसे तार्किक है। चीफ जस्टिस गवई ने कहा कि जिस फ्लैट की मांग की जा रही है वह मुंबई की कल्पतरू सोसायटी में है, जो शहर का नामी हाउसिंग प्रोजेक्ट है। उन्होंने महिला से पूछा कि आप कितनी पढ़ी लिखी हैं। इस पर महिला ने बताया कि उसने एमबीए तक की पढ़ाई की है और पूर्व में आईटी सेक्टर में काम कर चुकी है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में नौकरी कर सकती हैं। फिर काम क्यों नहीं करती हैं? यही नहीं मुख्य न्यायाधीश ने शादी की कम अवधि का हवाला देते हुए कहा कि यह कुल 18 महीने ही चली और आप हर एक महीने के बाद 1 करोड़ की डिमांड कर रही हैं। शख्स की वकील माधवी दीवान ने कहा कि महिला 18 महीने की शादी के अंत के नतीजे में अनिश्चितकाल तक आर्थिक सहयोग नहीं मांग सकती। दीवान ने कहा कि वह पढ़ी लिखी हैं और काम कर सकती हैं। इसके बाद बेंच ने संबंधित व्यक्ति की इनकम टैक्स डिटेल भी मंगाई ताकि तय किया जा सके कि उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है। वह एलिमनी के तौर पर कितनी रकम देने में सक्षम है। इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने साफ कर दिया कि महिला ऐसी किसी संपत्ति में हक नहीं मांग सकती, जो उसके पूर्व के पति के नाम नहीं है बल्कि उसके पिता के नाम है। अंत में अदालत ने कहा कि महिला चाहे तो फ्लैट ले ले या फिर एकमुश्त 4 करोड़ रुपये की रकम लेकर समझौता करे। इसके अलावा चीफ जस्टिस ने यहां तक कहा कि जो लोग नौकरी करने के योग्य हैं, वे जानबूझकर बेरोजगारी का रास्ता नहीं ले सकते कि फिर उसकी आड़ में मोटा अमाउंट मांग लें। उन्होंने कहा कि आप पढ़ी लिखी हैं। आपको इस रकम के भरोसे नहीं रहना चाहिए। आपको खुद कमाना चाहिए और पूरी गरिमा के साथ जीवन निर्वाह करना चाहिए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की समीक्षा: प्रदेश में चलेगा सोलर पंप स्थापित करने का सघन अभियान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसानों के खेतों पर कुसुम योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रावधानों का किसानों को लाभ दिलवाते हुए सोलर पंप स्थापना में पूर्ण सहयोग किया जाए। इसके लिए नवकरणीय ऊर्जा विभाग और सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय से कार्य कर लक्ष्य पूर्ण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। बैठक में नवीन और नवकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राकेश शुक्ला की उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इस वर्ष सोलर पंप स्थापित करने का अभियान प्रारंभ हो चुका है। इस कार्य की प्रगति की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विस्तार पूर्वक समीक्षा की। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में आगामी वर्ष तक 10 लाख सोलर पंप स्थापित किए जाएंगे। चरणबद्ध रूप से यह कार्य किया जा रहा है। किसानों को खेतों में सोलर पंप की स्थापना से जहां सामान्य बिजली के उपयोग पर होने वाले अत्यधिक व्यय से मुक्ति मिलेगी वहीं इस नवाचार से अन्य किसान भी प्रेरित होंगे। यह कार्य प्रदेश में गति प्राप्त करेगा। इसके लिए किसानों में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी किए जाएंगे। आने वाले समय में यह भी संभव होगा कि किसान उत्पादित ऊर्जा का विक्रय कर सकेंगे। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जाति और धर्म आधारित आदेश पर नाराज, अधिकारी सस्पेंड

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के उस आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें ग्राम सभा की जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई को खास जाति (यादव) और धर्म (मुस्लिम) से जोड़कर निर्देशित किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस आदेश को ‘भेदभावपूर्ण और अस्वीकार्य’ बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए संबंधित संयुक्त निदेशक एस.एन. सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा और सोच न सिर्फ शासन की नीति के खिलाफ है, बल्कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह से निष्पक्ष, तथ्यों और कानून के अनुसार होनी चाहिए, न कि जाति या धर्म के आधार पर। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से ऐसी गलती न हो, इसका सख्त ख्याल रखा जाए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार समरसता, सामाजिक न्याय और सभी के समान अधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियां किसी भी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह पर आधारित नहीं हो सकतीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की नीति संविधान और न्याय की मूल भावना पर आधारित है, न कि किसी भेदभाव पर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सहारनपुर में एक कार्यक्रम के दौरान विपक्षी दलों को भी घेरा। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म के बढ़ते गौरव से कांग्रेस और सपा परेशान हैं। पहले की सरकारें आतंकियों को संरक्षण देती थीं और सनातन धर्म की परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास करती थीं, लेकिन अब भारत अपनी आध्यात्मिक विरासत के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने सहारनपुर क्षेत्र की उपेक्षा को समाप्त कर दिया है और विकास तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। इस पूरे मामले से सरकार का यह संदेश साफ है कि जाति और धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई न तो स्वीकार की जाएगी और न ही उसे बर्दाश्त किया जाएगा।  

हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा जनहानि, फसल हानि के प्रकरणों का संवेदनशीलता से करें निराकरण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के कार्यों की समीक्षा की रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा जनहानि, पशुहानि एवं फसल क्षति के प्रकरणों में त्वरित, नियमानुसार एवं संवेदनशीलता से क्षतिपूर्ति सहायता प्रदान की जाए। वनांचल में निवासरत लोगों को कई बार वन्यप्राणियों के हमलों से अपनों को खोने की पीड़ा सहनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावितों के दुख-दर्द का मानवीय दृष्टिकोण से शीघ्र निराकरण किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री साय आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हाथी-मानव द्वंद्व और अन्य हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा जनहानि, पशुहानि एवं फसल क्षति की घटनाएं राज्य के वनांचल क्षेत्रों में चुनौती बनकर उभर रही हैं। ऐसी स्थितियों में शासन की जिम्मेदारी है कि पीड़ितों को शीघ्र एवं न्यायसंगत सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित प्रकरणों का नियमानुसार त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जंगली हाथियों द्वारा धान जैसी प्रमुख फसल के अतिरिक्त गन्ना, केला, पपीता एवं कटहल जैसी नगदी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी दोहरी मार झेलनी पड़ती है। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में प्रदत्त व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टों की अद्यतन स्थिति की भी जानकारी ली। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रदत्त सहायता समय पर प्रभावितों तक पहुंचे, इसके लिए विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाए। जनहानि, स्थायी अपंगता, पशुहानि, मकान क्षति तथा फसल हानि के लिए दी जाने वाली क्षतिपूर्ति दरों में वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव भी बैठक में प्रस्तुत किया गया। बैठक में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसल क्षति के आरबीसी के प्रावधानों के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि पर भी चर्चा की गई। बैठक मे मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, कृषि विभाग की सचिव श्रीमती शहला निगार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी सचिव श्री अंकित आनंद, सचिव (वन) श्री अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री सुधीर अग्रवाल, अपर मुख्य वन संरक्षक श्री प्रेम कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।