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मंत्री कश्यप ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

विभागीय कार्यों में आ रही तकनीकी समस्याओं का आपसी समन्वय से करें निराकरण: मंत्री श्री केदार कश्यप  रायपुर विभागीय कार्यों में आ रही समस्याओं का निराकरण आपसी समन्वय स्थापित कर समय-सीमा में निराकरण करें। यह बातें जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज शिवनाथ भवन अटल नगर में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने बैठक में जल संसाधन विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की और स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने बैठक का संचालन करते हुए कहा कि एमआईएस में आ रही समस्याओं का आपसी समन्वय स्थापित कर 19 अगस्त 2025 के पूर्व समस्त तकनीकी विषयों पर आवश्यक निर्णय लेते हुए निराकरण कर लिया जाए। साथ ही तकनीकी स्वीकृति से संबधित वित्तीय अधिकार को युक्तियुक्त करने हेतु प्रस्ताव 06 अगस्त 2025 तक शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। निविदा प्रपत्र के अंतर्गत 108 प्रकरणों में दोषी पाये गये निविदाकारों के विरूद्ध कार्यवाही एक सप्ताह के भीतर अनिवार्यतः पूर्ण करें और दोषी पाए गए निविदाकारों को आगामी निविदा में भाग लेने के संबंध में निविदा कंडिका में संशोधन हेतु प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर शासन को प्रेषित करना सुनिश्चित करें।  बैठक में सचिव श्री टोप्पो ने अधिकारियों को एमआईएस में संबंधित प्रविष्टी प्रदर्शित होने के लिए आवश्यक व्यवस्था भी समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।  इसके साथ ही निविदा प्रक्रिया में आ रही समस्याओं का संबंधित मुख्य अभियंता एवं निविदा प्रकोष्ठ कार्यालय प्रमुख अभियंता आपस में समन्वय स्थापित कर निराकरण हेतु आवश्यक कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि बोधघाट वृहद् परियोजना, इन्द्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना, शेखरपुर जलाशय एवं डांडपानी जलाशय के निर्माण हेतु आवश्यक कार्यवाही पूरी कर तथा प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त योजनाओं में निविदा स्वीकृति का कार्य निर्धारित 100 दिवस की समय-सीमा में पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें।  सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने बैठक में जलाशयों से कृषकों की माँग के अनुरूप नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए जल प्रदाय किया जाना सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने विभिन्न विषयों पर विभागीय नीति तैयार कर एक माह के भीतर शासन को प्रस्तुत किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जल-कर में वृद्धि हेतु प्रस्ताव अविलम्ब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग के कार्य को भी पी.पी.पी. माध्यम से कराए जाने हेतु प्रस्ताव अविलम्ब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। सचिव श्री टोप्पो ने मंत्री श्री कश्यप को बताया कि विशेष केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने हेतु प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत कर दिया जाएगा और परियोजना मण्डल की आगामी बैठक हेतु आवश्यक तैयारियां एक सप्ताह के भीतर पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्यवाही भी समय से पूर्ण कर लिया जाएगा। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता श्री इंद्रजीत उईके, मुख्य अभियंता सर्वश्री प्रसून शर्मा, डी.के. बुम्मेरकर, जे.आर. भगत, आर.आर. सारथी, एस.के. टीकम, शंकर ठाकुर, के. एस. भंडारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

ब्रह्मोस मिसाइल से और घातक होगी सेना: ऑपरेशन सिंदूर के बाद तैयारी तेज

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया। भारतीय सेना अब भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए बड़ा ऑर्डर दे रही है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जल्द ही हाई लेवल मीटिंग में भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए बड़ी संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी जा सकती है। साथ ही, भारतीय वायु सेना के लिए भी इन मिसाइलों के जमीनी और हवाई वैरिएंट खरीदे जाएंगे। पाकिस्तान के वायु ठिकानों और सेना के कैंपों पर हमले के लिए इन मिसाइलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया। नौसेना इन मिसाइलों को अपने वीर-कैटेगरी के युद्धपोतों पर तैनात करने वाली है, जबकि वायु सेना इन्हें अपने रूसी मूल के सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों पर लगाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों स्वदेशी हथियारों की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने हमारे स्वदेशी हथियारों की ताकत देखी। हमारे एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें और ड्रोन ने आत्मनिर्भर भारत की शक्ति दिखाई, खासकर ब्रह्मोस मिसाइलों ने। आतंकी मुख्यालयों पर किया हमला भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पंजाब प्रांत में स्थित मुख्यालयों पर हमला किया। भारतीय वायु सेना ने इसके लिए ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया। इसने टारगेट को बहुत सटीकता से तबाह कर दिया। ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को भी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों और उनके ठिकानों को बचाने की कोशिश में जवाबी कार्रवाई की थी।  

रूस से तेल खरीद पर कायम रहेगा भारत: अमेरिका की नाराज़गी के बावजूद ये हैं 5 ठोस कारण

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के साथ ही रूस से तेल एवं गैस खरीदने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की थी। इस धमकी के बाद वाइट हाउस को उम्मीद थी कि भारत दबाव में आ जाएगा और रूसी तेल के कंटेनर भारतीय बंदरगाहों की ओर आना बंद कर देंगे। लेकिन ट्रंप प्रशासन की उम्मीदों के उलट, भारत ने अपने रुख को और सख्त करते हुए रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखा। भारत ने अमेरिका के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूसी तेल के शिपमेंट लेना बंद कर दिया है। भारत ने सोमवार को ट्रंप की चेतावनी का जवाब देते हुए कहा कि रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी "अनुचित और अव्यवहारिक" है। भारत के इस कड़े जवाब के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही थी- और वैसा ही हुआ। ट्रंप का बयान और भारत का जवाब अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि खरीदे गए तेल का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा है। उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है। इस वजह से, मैं भारत द्वारा अमेरिका को भुगतान किए जाने वाले टैरिफ को काफी हद तक बढ़ाने जा रहा हूं।" इसके जवाब में, भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "भारत को निशाना बनाना अनुचित और अव्यवहारिक है। किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तरह, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।" भारत ने क्यों अपनाया सख्त रुख- 5 बड़े कारण भारतीय शेयर बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, नई दिल्ली का रुख केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से परे है। भारत दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रख रहा है, जिसमें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा और स्वायत्तता सुनिश्चित करना शामिल है। विशेषज्ञों ने भारत के इस दृढ़ रुख के पांच प्रमुख कारण बताए: 1. ट्रंप-भारत-रूस त्रिकोण बसव कैपिटल के सह-संस्थापक संदीप पांडे ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया था कि पाकिस्तान उनके करीब है, क्योंकि उन्होंने आईएमएफ सहायता को रोकने के लिए अपने वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं किया। इसलिए ऐसा लगता है कि भारत ने यह निर्णय लिया है कि अमेरिका उसका 'मित्र' है, जबकि रूस उसका 'भाई' है। जब नई दिल्ली को चुनना होगा, तो वे मित्र के बजाय भाई को चुनेंगे।” 2. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई दिल्ली का कड़ा रुख भारत का जीडीपी काफी हद तक कृषि पर आधारित है। यदि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत कृषि क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए खोला जाता है, तो महंगाई, विकास दर जैसे कारक भारत सरकार के नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। संदीप पांडे ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि-प्रधान है, जहां राष्ट्रीय जीडीपी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा कृषि क्षेत्र से आता है। इस क्षेत्र को अमेरिका जैसे विदेशी खिलाड़ी के लिए खोलने से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि महंगाई और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण कारक सरकार के नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। इससे अमेरिका को भारतीय अर्थव्यवस्था तक पहुंच मिल जाएगी, जो भारत के लिए खतरा हो सकता है। 3. रूस से नैफ्था आयात: चीन के दबदबे को चुनौती भारत ने हाल ही में रूस से नैफ्था (Naphtha) का आयात शुरू किया है, जो पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक और रक्षा निर्माण जैसे क्षेत्रों में कच्चे माल की आपूर्ति के लिए अहम है। वाई वेल्थ के निदेशक अनुज गुप्ता ने कहा, "भारत का रूस से कच्चा तेल आयात रोकना असंभव लगता है, क्योंकि भारत ने रूस से नेफ्था आयात शुरू किया है। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अगला कदम है, जो रासायनिक, प्लास्टिक और रासायनिक रेजिन के आयात में चीन के एकाधिकार को तोड़ने की कोशिश है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रूस यूरोपीय और अन्य देशों को नेफ्था निर्यात नहीं कर पा रहा है, जिसके चलते चीन का वैश्विक व्यापार में एकाधिकार बढ़ गया। भारत का यह कदम इस एकाधिकार को तोड़ने की दिशा में है और भारत जल्द ही अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद नेफ्था का शुद्ध निर्यातक बन सकता है।" एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की वरिष्ठ शोध विश्लेषक सीमा श्रीवास्तव ने कहा, "रूस से नेफ्था आयात का भारत का निर्णय आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और औद्योगिक आधार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव है। यह कदम महत्वपूर्ण सप्लाई चैन में विविधता लाता है, जो पारंपरिक स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और पेट्रोकेमिकल्स और रक्षा विनिर्माण जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों में लागत को कम करने के लिए आवश्यक है।" 4. आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली का निर्माण भारत लंबे समय से रूस से न केवल हथियार खरीदता रहा है, बल्कि रक्षा तकनीक भी शेयर करता रहा है। नैफ्था आयात से भारत को रक्षा उत्पादन (जैसे फाइटर जेट और ड्रोन्स) में नई ऊर्जा मिलेगी। संदीप पांडे ने कहा, "अमेरिकी प्रशासन रूसी तेल आयात के जरिए कई लक्ष्य साधने की कोशिश कर रहा है। वे जानते हैं कि रूस भारत को लड़ाकू विमान और उनकी तकनीक ट्रांसफर करता है, जिसने भारत को स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने की स्थिति में ला दिया है। रूस से नेफ्था आयात शुरू करना भारत-रूस रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अगला कदम है। यह भारत को लड़ाकू विमानों और रक्षा ड्रोनों के लिए बॉडी विकसित करने में मदद करेगा। इसलिए, रूसी कच्चे तेल के आयात को रोकने की अमेरिकी मांग को स्वीकार करना वास्तविकता से परे है।" 5. जवाबी टैरिफ और डिजिटल टैक्स की तैयारी सेबी-पंजीकृत मूलभूत विश्लेषक अविनाश गोरक्षकर ने कहा, "जिस तरह अमेरिकी सरकार ने भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया है, उसी तरह भारतीय सरकार भी अमेरिकी आयात पर टैरिफ बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ एक धमकी की तरह हैं, जबकि भारतीय टैरिफ एक कूटनीतिक कदम होगा। भारत सरकार ऑनलाइन डिजिटल विज्ञापनों से होने वाली आय पर डिजिटल टैक्स फिर से लागू करने पर विचार कर सकती है, … Read more

उत्तरकाशी में भारी त्रासदी: बादल फटने से पहाड़ी मलबा गिरा, कई घर जमींदोज

धराली उत्तराखंड में इस समय कुदरती आफत पीछा नहीं छोड़ रही है। आज उत्तरकाशी के धराली गांव में अचानक बादल फट गया। बादल फटते ही पहाड़ का मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। लोगों में इस भयावह घटना को देखते ही चीख-पुकार मच गई। बादल फटने से खीर गंगा ऊफान पर आ गई। राली बाजार व आसपास के क्षेत्र के भारी नुकसान पहुंचा है। यहां कुछ लोगों के दबे होने की भी सूचना है। हर्षिल से आर्मी,पुलिस,एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई हैं। बादल फटते ही पहाड़ से आया सैलाब उत्तरकाशी के धराली गांव में दोपहर बादल फटने के बाद पहाड़ से ढेर सारा मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। इसके चलते कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है। वीडियो में देखने पर पता चलता है कि यह जलजला कितना भयावह था। लोगों ने यह दृश्य देखते चीख-पुकार मचाना शुरू कर दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। लोग वीडियो बनाते वक्त चीख रहे थे। सीएम ने जताया घटना पर दुख उत्तरकाशी में हुए इस भयानक हादसे पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धराली (उत्तरकाशी) क्षेत्र में बादल फटने से हुए भारी नुकसान का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए SDRF,NDRF,जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। इस सम्बन्ध में लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क में हूं और स्थिति की गहन निगरानी की जा रही है। ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं। उत्तराखंड पुलिस ने दी अपडेट उत्तराखंड पुलिस ने अपने एक्स हैंडल से बताया कि उत्तरकाशी,हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस,SDRF,आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। उक्त घटना को देखते हुए सभी नदी से उचित दूरी बनाएं। पुलिस ने सचेत करते हुए स्वयं,बच्चों व मवेशियों को नदी से उचित दूरी पर ले जाने को कहा है।  

छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज से खुला समृद्धि का नया द्वार

रणनीतिक खनिजों की खोज में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक छलांग:छत्तीसगढ़ में निकेल-क्रोमियम-PGE की पुष्टि रायपुर  खनिज विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। मेसर्स डेक्कन गोल्ड माइनिंग लिमिटेड (DGML) ने राज्य में हाल ही में प्राप्त संयुक्त अनुज्ञा क्षेत्र में निकल (Nickel), क्रोमियम (Chromium) और प्लेटिनम समूह के तत्वों (PGEs) की खोज की है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि छत्तीसगढ़ में रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उनके सतत विकास के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। यह खोज महासमुंद जिले के भालुकोना–जामनीडीह निकल, क्रोमियम और PGE ब्लॉक में हुई है, जो लगभग 3000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस क्षेत्र का प्रारंभिक अन्वेषण भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा G4 स्तर पर किया गया था, जिसमें इन खनिजों की उपस्थिति की संभावना प्रकट हुई थी। इस आधार पर, छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग के अंतर्गत भूविज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय (DGM) ने विस्तृत भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन कर ब्लॉक की ई-नीलामी प्रक्रिया संपन्न कराई। दिनांक 6 मार्च 2023 को ब्लॉक का सफलतापूर्वक नीलामीकरण हुआ, जिसमें DGML ने 21%  सबसे ऊँची बोली लगाकर इसे हासिल किया। इसके पश्चात DGM छत्तीसगढ़ द्वारा अन्वेषण कार्यों को शीघ्र गति देने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग प्रदान किया गया। आवश्यक वन और पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त होने के बाद, DGML ने अन्वेषण कार्यों की शुरुआत की, जिनमें विस्तृत भू-वैज्ञानिक मानचित्रण, रॉक चिप सैम्पलिंग, ड्रोन आधारित मैग्नेटिक सर्वेक्षण तथा इंड्यूस्ड पोलराइजेशन (IP) सर्वेक्षण शामिल हैं। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। अब तक लगभग 700 मीटर लंबी खनिजीकृत पट्टी की पहचान की गई है, जो संभावित मैफिक-अल्ट्रामैफिक चट्टान संरचनाओं में स्थित है। भूभौतिकीय सर्वेक्षणों से प्राप्त संकेतों के अनुसार 300 मीटर गहराई तक सल्फाइड खनिजों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो इस ब्लॉक की समृद्ध खनिज क्षमता को रेखांकित करती है। भालुकोना ब्लॉक के समीप ही स्थित केलवरडबरी निकल, क्रोमियम एवं PGE ब्लॉक पूर्व में मेसर्स वेदांता लिमिटेड को नीलामी के माध्यम से प्रदान किया गया था। इन दोनों ब्लॉकों के संयुक्त विकास से महासमुंद क्षेत्र को देश के रणनीतिक खनिजों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाएँ सशक्त हुई हैं। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक खोज राज्य और देश के लिए अत्यावश्यक खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की भावना को सशक्त करती है और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करती है। छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य शासन द्वारा रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसका प्रमाण 2024-25 के अन्वेषण प्रस्तावों में परिलक्षित होता है, जहां 50% से अधिक प्रस्ताव इन्हीं खनिजों पर केंद्रित हैं। अब तक राज्य द्वारा 51 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है, जिनमें ग्रेफाइट, निकल, क्रोमियम, PGEs, लिथियम, ग्लॉकोनाइट, फॉस्फोराइट एवं ग्रेफाइट-वैनाडियम जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 टिन ब्लॉकों को भारत सरकार के खनिज मंत्रालय को आगामी नीलामी हेतु सौंपा गया है। इस दिशा में योजनाबद्ध एवं संस्थागत प्रयासों को गति देने के लिए DGM, छत्तीसगढ़ ने एक क्रिटिकल मिनरल सेल (Critical Mineral Cell) का गठन किया है, जो शोध, शैक्षणिक एवं पेशेवर संस्थानों के साथ सहभागिता बढ़ाकर खनिज अन्वेषण एवं परिशोधन को प्रोत्साहित कर रहा है। इस संदर्भ में खनिज संसाधन विभाग के सचिव, श्री पी. दयानंद, ने कहा कि यह खोज केवल एक वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक छलांग है। बढ़ती वैश्विक मांग के मद्देनज़र, हरित ऊर्जा एवं हाई-टेक तकनीकों के लिए आवश्यक खनिज — जैसे निकेल और प्लेटिनम समूह के तत्व — भविष्य की तकनीकों की रीढ़ हैं। छत्तीसगढ़ भारत के रणनीतिक खनिज मानचित्र में एक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए कटिबद्ध है और हम इसके लिए आवश्यक संस्थागत और संचालनात्मक सहयोग सुनिश्चित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ की खनिज समृद्धि की स्थिति को और मजबूत करती है, बल्कि आधुनिक तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में उपयोगी खनिजों की खोज की दिशा में अद्भुत संभावनाओं की नींव भी रखती है।

टीम इंडिया बनी इंग्लैंड की सबसे बड़ी चुनौती, दशक भर से जारी विजय अभियान

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम का इस दशक में इंग्लैंड के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट में एकछत्र राज देखने को मिला है। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ अंग्रेज इस दशक में यानी 2020 के बाद से एक अदद सीरीज जीतने के लिए तड़प रहे हैं। टीम इंडिया ने हर फॉर्मेट में इंग्लैंड को चारों खाने चित किया हुआ है, जबकि बिग थ्री में शामिल इंग्लैंड की टीम पिछली 10 सीरीजों में एक भी सीरीज जीत नहीं पाई है। इंग्लैंड की टीम ने दो सीरीज ड्रॉ जरूर कराई हैं, लेकिन दोनों सीरीज टेस्ट सीरीज थीं और इंग्लैंड की सरजमीं पर खेली गई थीं। वहीं, टीम इंडिया टेस्ट, वनडे और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट को मिलाकर कुल 8 सीरीज 10 में से जीत ली हैं, जबकि दो सीरीजों का नतीजा ड्रॉ रहा है। इस तरह इंग्लैंड की टीम इस दशक में भारत के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज जीतने के मामले में खाली हाथ रही है। इंग्लैंड ने आखिरी बार भारत के खिलाफ वनडे सीरीज 2018 में जीती थी, जो इंग्लैड में खेली गई थी। 3 मैचों की सीरीज में भारत को 2-1 से हार मिली थी। भारत के खिलाफ टी20 सीरीज जीते 10 साल भी ज्यादा का समय हो गया है। आखिरी बार भारत के खिलाफ इंग्लैंड ने 2014 में टी20 सीरीज जीती थी, जो सिर्फ एक मैच था। 2018 में आखिरी टेस्ट सीरीज भारत के खिलाफ इंग्लैंड ने जीती थी। पांच मैचों की टेस्ट सीरीज की बात करें तो इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने ओवल में 6 रनों से जीत दर्ज करके सीरीज को 2-2 से बराबर किया। इंग्लैंड की टीम 3 मैचों के बाद 2-1 से आगे थी, लेकिन भारत ने चौथे मैच को ड्रॉ कराया और आखिरी मैच में शानदार जीत दर्ज करते हुए सीरीज में बराबरी हासिल की। दोनों देशों के बीच अब अगली सीरीज इन्हीं दिनों अगले साल होगी, जो वनडे और टी20 सीरीज होगी।  

30 मई 2019 से अब तक यानी 2258 दिन तक गृह मंत्रालय की कमान, अमित शाह ने नया रिकार्ड बनाया

नई दिल्ली  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया है। वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेता बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। खास बात है कि उन्होंने यह उपलब्धि 5 अगस्त को हासिल की है। इसी दिन उन्होंने संसद में जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का ऐलान किया था। अमित शाह भारत के गृहमंत्री पद पर 2 हजार 258 दिनों से हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 30 मई 2019 को यह पद पहली बार संभाला था। इसके बाद 2024 में NDA सरकार बनने के बाद भी वह इस पद पर काबिज हुए। इस पद पर आडवाणी के बाद कांग्रेस दिग्गज गोविंद वल्लभ पंत सबसे ज्यादा समय तक रहे हैं। एक ओर जहां आडवाणी ने 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक कुल 2 हजार 256 दिन गृहमंत्री के तौर पर सेवाएं दीं। वहीं, पंत 10 जनवरी 1955 से 7 मार्च 1961 तक इस पद पर रहे। यानी कुल 6 साल 56 दिन तक वह गृहमंत्री रहे। खास बात है कि शाह देश के पहले सहकारिता मंत्री भी हैं। इससे पहले वह गुजरात के गृहमंत्री भी रह चुके हैं। पीएम मोदी ने की तारीफ मंगलवार को प्रधानमंत्री ने NDA सांसदों के साथ बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वह अब सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले केंद्रीय गृह मंत्री बन गए हैं। पीएम ने भाषण में कहा कि पांच अगस्त एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि इसी दिन पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था। उन्होंने कहा कि NDA सरकार ने संविधान का सही अर्थों में पालन किया है। खास बात है कि मंगलवार को भाजपा की अगुवाई वाली NDA सरकार ने जून 2024 में सरकार बनने के बाद से संसद के सत्रों के दौरान इस तरह की यह दूसरी बैठक की है।  

नापाक याराना फिर याद दिलाया गया! टैरिफ विवाद पर भारत की सैन्य प्रतिक्रिया ने अमेरिका को घेरा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बोल और भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद दोनों देशों में जारी तनातनी के बीच भारतीय सेना ने अमेरिका को आईना दिखाया है और 54 साल पुराना वाकया याद दिलाया है। दरअसल, भारतीय सेना ने मंगलवार को 1971 में प्रकाशित एक अखबार की क्लिप शेयर कर अमेरिका पर तंज कसा है। इस क्लिप में दिखाया गया है कि अमेरिका कैसे दशकों से पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है। यह पोस्ट इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से भारत के तेल खरीदने पर भारतीय सामानों पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि वह भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करेंगे क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहा है लेकिन अमेरिका खुद भूल गया कि उसका अतीत कैसा रहा है। भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने क्या लिखा? इसी संदर्भ में ट्रंप सरकार को आईना दिखाते हुए भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने 5 अगस्त, 1971 को प्रकाशित अखबार की एक क्लिप साझा की है। उस क्लिप में तत्कालीन रक्षामंत्री विद्याचरण शुक्ला द्वारा राज्यसभा में दिए गए बयान का जिक्र है। तब शुक्ला ने नाटो शक्तियों द्वारा पाकिस्तानी सेना को संभावित हथियारों की सप्लाई को लेकर संसद में बयान दिया था। इसमें दिखाया गया है कि कैसे अमेरिका 1971 के युद्ध की तैयारी के लिए दशकों से पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई कर रहा था। सेना ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा है, “आज का दिन, युद्ध की तैयारी का वह साल – 5 अगस्त, 1971।” तब के रक्षा मंत्री ने संसद में दिया था बयान शुक्ला ने तब राज्यसभा में दिए अपने बयान में बताया था कि कैसे बांग्लादेश में इस्लामाबाद के सशस्त्र आक्रमण की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति को लेकर नाटो और सोवियत संघ से संपर्क किया गया था। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सोवियत संघ और फ्रांसीसी सरकार ने पाकिस्तान को हथियार देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना समर्थन जारी रखा था। इसमें यह भी कहा गया है कि तब अमेरिका और चीन दोनों ने पाकिस्तान को औने-पौने दामों पर हथियार बेचे थे। इससे यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान ने 1971 में भारत के साथ युद्ध दोनों देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए हथियारों से लड़ा था। इसमें एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है कि अमेरिका से पाकिस्तान को 1954 के बाद से करीब दो अरब डॉलर के हथियारों की आपूर्ति की गई है। पाकिस्तान पर मेहरबान ट्रंप बता दें कि अमेरिका अभी भी पाकिस्तान पर मेहरबान और नरम है क्योंकि उस पर लगाए गए टैरिफ इसी बात का संकेत देते हैं। हाल ही में अमेरिका ने जो टैरिफ लगाए हैं, उनमें पाकिस्तान को बड़ी छूट दी गई है। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर टैरिफ 29 प्रतिशत से घटकर 19 प्रतिशत कर दिया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिकी शुल्क में खासी बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर भारी मात्रा में रूस से तेल खरीदने और उसे बड़े मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा, "भारत रूस से भारी मात्रा में तेल सिर्फ खरीद ही नहीं रहा है, बल्कि उस तेल के बड़े हिस्से को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है।" भारत पर बिदक रहे ट्रंप इसके साथ ही ट्रंप ने कहा, "उसे (भारत को) इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है। इसी वजह से मैं भारत से अमेरिका को दिए जाने वाले शुल्क को काफी बढ़ाने जा रहा हूं।" ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाने के साथ ही रूस से तेल एवं गैस खरीदने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस से सैन्य उपकरण और कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर जुर्माना लगाने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में आई अधिसूचना में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया था।  

भारत-पाकिस्तान मैच से पहले बड़ा बयान: पूर्व पाक कप्तान ने अपनी टीम पर ही उठा दिए सवाल

नई दिल्ली पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान राशिद लतीफ ने 14 सितंबर को होने वाले एशिया कप मुकाबले में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की संभावनाओं को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने हालिया खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि टीम के प्रदर्शन और रणनीति में सुधार की जरूरत है। IANS से बात करते हुए लतीफ ने बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के खिलाफ पाकिस्तान की हालिया हार का जिक्र किया और एक मजबूत भारतीय टीम का सामना करने की चुनौतियों पर जोर दिया। पाकिस्तान क्रिकेट टीम अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, जहां उसे उन टीमों के खिलाफ अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें उससे हराने की उम्मीद थी। इन असफलताओं ने 9 सितंबर से शुरू होने वाले प्रतिष्ठित एशिया कप टूर्नामेंट की उनकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राशिद लतीफ ने कहा कि, "पाकिस्तान के लिए 14 सितंबर को एक मजबूत भारतीय टीम के खिलाफ खेलना बहुत मुश्किल होगा। एशिया कप हो जाए बस।"दरअसल, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। देश में फैले आक्रोश को देखते हुए भारत किसी भी स्तर पर पाकिस्तान से क्रिकेट नहीं खेलना चाहता। हाल ही में वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में भी भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले का बहिष्कार किया। पूर्व कप्तान ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन किया। उन्होंने कहा, "हमारी क्रिकेट हवा में चल रही है… हम बांग्लादेश और वेस्टइंडीज से हार गए, ऐसे मैच जो हमें कभी नहीं हारने चाहिए थे। हमारा कप्तान अच्छा हो सकता है, लेकिन तीनों फॉर्मेट में तालमेल बिठाना आसान नहीं है। हमारे पास प्रतिभा है, लेकिन हम अभी तक सही फैसले नहीं ले पा रहे हैं।" पाकिस्तान के हालिया प्रदर्शन में बांग्लादेश और दूसरी श्रेणी की वेस्टइंडीज़ टीम से हार शामिल है, जिसके नतीजों ने उनकी तैयारी के तरीकों और टीम रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

लाल किला बना सुरक्षा अलर्ट का केंद्र, चूक पर 7 पुलिसकर्मी नपे

नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा से जुड़ी दिल्ली से बड़ी खबर आई है। दिल्ली के लाल किले की सुरक्षा में तैनात एक हेड कांस्टेबल समेत 7 पुलिसकर्मियों को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि लाल किले में स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम को लेकर हर रोज पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मॉक ड्रिल करती है। शनिवार को भी एक ड्रिल की गई। इसमें दिल्ली पुलिस स्पेशल स्टाफ की एक टीम सिविल ड्रेस में डमी बम के साथ लाल किला परिसर में दाखिल हुई। लेकिन लाल किले की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बम का पता नहीं लगा सके जिसके बाद सुरक्षा में तैनात सभी 7 पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया। तत्काल प्रभाव से पुलिसकर्मी सस्पेंड स्पेशल सेल की एक टीम शनिवार को सादे कपड़ों में डमी बम के साथ लाल किले परिसर में दाखिल हुई। उस समय, सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बम का पता नहीं लगा सके। इसलिए उन पर एक्शन हुआ है। लाल किले की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक का मामला होने से सात पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। साथ ही बाकी जवानों को डीसीपी राजा बांठिया ने सख्त हिदायत दी।  तत्काल प्रभाव से संबंधित सभी पुलिसकर्मी लाइन हाजिर इस चूक के बाद तत्काल प्रभाव से संबंधित सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है. डीसीपी का कहना है कि ये सुरक्षा में नहीं है, इस तरह हम अपनी तैयारी को और पुख्ता कर रहे हैं. वहीं, सोमवार को लाल किले में घुसपैठ कर रहे पांच बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया, जिनको बांग्लादेशी दूतावास को सौंपकर डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पूछताछ में फिलहाल कोई संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई है. सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. 15 अगस्त को लेकर लाल किले की सुरक्षा अभूतपूर्व -डीसीपी राजा बांठिया डीसीपी राजा बांठिया का कहना है कि 15 अगस्त को लेकर लाल किले की सुरक्षा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दी गई है. रात-दिन पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं. किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति की आवाजाही सख्ती से प्रतिबंधित है. खासकर आईआईटी गेट, नेटा गेट, लोहे वाले गेट समेत सभी प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर ट्रिपल लेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा घेरा और सतर्कता आने वाले दिनों में और बढ़ाई जाएगी. उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, जिससे त्योहार शांतिपूर्ण व सुरक्षित तरीके से मनाया जा सके. लाल किला में जबरन घुसने की कोशिश कर रहे थे 6 बांग्लादेशी वहीं लाल किले की सुरक्षा से जुड़ी एक और खबर सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने लाल किला परिसर में जबरन घुसने के आरोप में 6 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनकी उम्र करीब 20-25 साल बताई जा रही है। ये सभी अवैध बांग्लादेशी हैं जो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में मजदूरी करते हैं। आरोपियों के पास से बांग्लादेशी दस्तावेज मिले  पुलिस को इनके पास से बांग्लादेशी दस्तावेज मिले हैं। फिलहाल पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इनका लाल किले में घुसने का मकसद क्या था।